दूसरों की जिंदगी डाली खतरे में-पॉजीटिव रिपोर्ट आने के बाद वैक्सीन लगवाकर शहर में घूमने निकला, केस दर्ज

ग्वालियर। एक युवक कोरोना संक्रमित निकलते ही दूसरे दिन टीका लगवाने जा पहुंचा। टीका लगवाने के बाद वह बेधड़क होकर बाजार में घूम रहा था। स्मार्ट सिटी के कमांड कंट्रोल सेंटर से जब मरीज की लोकेशन ली गई तो पता चला कि मरीज अपने घर पर नहीं है, बल्कि उसके माेबाइल में डाउनलाेड आराेग्य सेतु एप उसकी लाेकेशन जयाराेग्य अस्पताल बता रहा था। इसके बाद इसकी सूचना इंसीडेंट कमांडर व तहसीलदार नवनीत शर्मा को दी गई। इंसीडेंट कमांडर दल-बल के साथ मरीज के घर पहुंचे तो देखा कि होम क्वारंटाइन को जो पर्चा चस्पा किया था, वह फटा हुआ है और मरीज घर पर नहीं है। इसके बाद मरीज के खिलाफ गोला का मंदिर थाना में कोविड नियमों का उल्लंघन के तहत केस दर्ज कराया गया है।

 आदर्श कॉलोनी काल्पीब्रिज में रहने वाला युवक 26 मार्च को कोरोना संक्रमित निकला था। जिसकी सूचना उसके मोबाइल नंबर पर दी गई और उसे होमक्वारंटाइन कर दिया गया। घर पर पर्चा भी चस्पा किया गया और उसे दवा उपलब्ध कराते हुए उसका मोबाइल में आरोग्य सेतु एप लोड कर दिया गया। जिससे मरीज की स्मार्ट सिटी के कमांड कंट्रोल सेंटर से निगरानी रखी जा सके। युवक संक्रमित निकलने के दूसरे दिन 27 मार्च को जिला अस्पताल पहुंचा और वहां पर कोरोना वैक्सीन का टीका लगवा लिया। जिसका रिकॉर्ड प्रशासन के पास मौजूद है। शुक्रवार को कमांड कंट्राेल सेंटर से मरीज की लोकेशन पता करने के लिए जब आरोग्य सेतु एप की मदद ली गई तो पता चला कि मरीज की लोकेशन घर पर न आते हुए जेएएच की आई। जिसकी सूचना कमांड कंट्राेल सेंटर ने तहसीलदार नवनीत शर्मा को दी। तहसीलदार ,पटवारी,दरोगा व अन्य कर्मचारियों के साथ युवक के घर पहुंचा तो वह घर में नहीं मिला और पर्चा भी फटा हुआ था। युवक को फोन कर बुलाने के लिए कहा तो युवक ने बताया कि उसका घर काल्पी ब्रिज में बिरला नगर पुल के पास है। इसके बाद तहसीलदार ने किसी तरह से युवक को बुलाकर फिर से होम आइसोलेट कराया। साथ ही युवक के खिलाफ गोला का मंदिर थाना में शिकायत दर्ज करा दी गई

प्रधानमंत्री का ‘दीदी’ कहना TMC को पसंद नहीं, महिला नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उठाए सवाल

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस की महिला नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री मोदी के उस संबोधन पर सवाल उठाए हैं जिसमें पीएम ने ममता बनर्जी को व्यंगात्मक रूप से दीदी बुलाया था. टीएमसी ने इसे महिलाओं का अपमान बताया है. मिदनापुर से टीएमसी की उम्मीदवार जून मालिया ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना शोभा नहीं देता.

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा था, “दीदी… ओह दीदी… दीदी हार आपके सामने है. अभी इसे स्वीकार करिए. हुगली के लोगों की आवाज सुनिए. दीदी…”

TMC को क्यों है ऐतराज
टीएमसी की तरफ से कहा गया है कि जिस अंदाज से प्रधानमंत्री ने बात की, ये महिलाओं का असम्मान है. इसलिए उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. देखा जाए तो इस चुनावी दौर में दोनों ही पार्टियां एक दूसरे पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही हैं. एक तरफ बीजेपी ममता बनर्जी पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है वहीं टीएमसी भी पीएम मोदी पर दबाव बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ रही.

बंगाल में दो चरण की वोटिंग हुई
बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर आठ चरणों में वोटिंग होनी है. 27 मार्च और 1 अप्रैल को दो चरणों में वोटिंग हो चुकी है. तीसरे चरण की वोटिंग अब 6 अप्रैल को होगी. पहले दोनों चरणों में 60 सीटों पर 80 फीसदी से ज्यादा वोटिंग प्रतिशत रहा है. इसके बाद चौथे चरण में 44 सीटों पर 10 अप्रैल को, पांचवें चरण में 45 सीटों पर 17 अप्रैल को, छठे चरण में 43 सीटों पर 22 अप्रैल को, सातवें चरण में 36 सीटों पर 26 अप्रैल को और आठवें और अंतिम चरण में 35 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. वहीं, पांच राज्यों में एक साथ 2 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगें.

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार है. टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी राज्य की मुख्यमंत्री हैं. 2016 विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने सबसे ज्यादा 211 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. वहीं कांग्रेस ने 44, लेफ्ट ने 26 और बीजेपी ने मात्र तीन सीटों पर जीत दर्ज की थी. जबकि अन्य ने दस सीटों पर जीत हासिल की थी. यहां बहुमत के लिए 148 सीटें चाहिए.

कोरोना की स्थिति पर प्रधानमंत्री मोदी की हाई लेवल बैठक, कैबिनेट सचिव और स्वास्थ्य सचिव भी रहे मौजूद

नई दिल्ली: देश में कोरोना संक्रमण का आंकड़ा हर दिन एक लाख के करीब तक पहुंच गया है. ऐसे में आज कोरोना मामलों की स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक हाई लेवल बैठक की. इस बैठक में कोरोना से जुड़े मुद्दों और टीकाकरण पर चर्चा हुई. कैबिनेट सचिव, पीएम के प्रधान सचिव, स्वास्थ्य सचिव और डॉक्टर विनोद पॉल भी मौजूद रहें.

हर दिन का एक लाख के करीब पहुंचा आंकड़ा

भारत में रविवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 93,249 नए मामले सामने आए जो इस साल एक दिन में आए कोविड-19 के सर्वाधिक मामले हैं. इसके साथ ही देश में संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 1,24,85,509 हो गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सुबह आठ बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार 18 सितंबर के बाद से कोरोना वायरस संक्रमण के एक दिन में सामने आए ये सबसे अधिक मामले हैं. 18 सितंबर को कोविड-19 के 93,337 मामले आए थे. आंकड़ों के मुताबिक रविवार को महामारी से 513 और लोगों के जान गंवाने से मृतकों की संख्या बढ़कर 1,64,623 हो गई है.

कोरोना मामलों में लगातार 25वें दिन बढ़ोतरी

मंत्रालय ने बताया कि संक्रमण के मामलों में लगातार 25वें दिन बढ़ोतरी दर्ज की गई है. देश में अब भी 6,91,597 मरीज कोविड-19 का इलाज करा रहे हैं जो संक्रमण के कुल मामलों का 5.54 प्रतिशत है. स्वस्थ होने वाले लोगों की दर गिरकर 93.14 प्रतिशत रह गई है.

देश में 12 फरवरी को सबसे कम 1,35,926 लोग संक्रमित थे जो संक्रमण के कुल मामलों का 1.25 प्रतिशत था. आंकड़ों के अनुसार इस बीमारी से अब तक 1,16,29,289 लोग उबर चुके हैं जबकि मृत्यु दर 1.32 प्रतिशत है.

भारत में कोविड-19 के मामले सात अगस्त को 20 लाख का आंकड़ा पार कर गए थे. इसके बाद संक्रमण के मामले 23 अगस्त को 30 लाख, पांच सितंबर को 40 लाख और 16 सितंबर को 50 लाख के पार चले गए थे. वैश्विक महामारी के मामले 28 सितंबर को 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख, 20 नवंबर को 90 लाख और 19 दिसंबर को एक करोड़ का आंकड़ा पार कर गए थे.

मेरे दो मुसलमान भाई मारे गए हैं’.. बंगाल की ‘घुसपैठिया’ पॉलिटिक्स पर’ प्रहार

मतुआ सेक्ट को मानने वालों की आबादी लगभग 3 करोड़ है और 50 से 70 सीटों पर उलटफेर कर सकते हैं। मोदी का ओराकांडी जाना ममता के कथित मुस्लिम तुष्टीकरण पर प्रहार था। बीजेपी को इस जवाबी गोलबंदी का मौका दीदी ने 2008 में ही दे दिया था। बांग्लादेशी शरणार्थी और घुसपैठिए के बीच फर्क की यही नीति शायद इस विधानसभा चुनाव का नतीजा तय कर दे। आजादी के बाद से ही जातीय या सांप्रदायिक राजनीति करने वालों के लिए पश्चिम बंगाल की सरजमीं बंजर साबित हुई। यहां के मुसलमान राजनीति की मुख्य धारा में रहे। या तो वामदलों के साथ या कांग्रेस के साथ। फुरफुरा शरीफ के अब्बास सिद्दिकी या किसी मौलाना की तकरीर से कोई खास फर्क नहीं पड़ा। कम्युनिस्ट विचारधारा के कारण हिंदू मतों में भी जातीय बिखराव नहीं था। पर 2007-8 के आस-पास हिंदू राष्ट्रवाद की राजनीति पश्चिम बंगाल में भी पंचायत स्तर पर घुस गई। इसकी प्रतिक्रिया में मुसलमान स्थानीय स्तर पर गोलबंद होने लगे।

​मेरे दो मुसलमान भाई मारे गए हैं..

2007 में बुद्धदेब भट्टाचार्य ने कट्टर वामपंथ का चोला फेंक नव उदारवाद का आत्मघाती प्रयोग किया। टाटा और सलेम ग्रुप को सिंगूर और नंदीग्राम में फैक्ट्री लगाने की जगह दी। 32 साल से निर्णायक मौके की तलाश कर रही ममता ने किसानों की जमीन लौटाने के लिए जबर्दस्त आंदोलन छेड़ दिया। अगले ही साल हुए पंचायत चुनाव में नंदीग्राम और सिंगूर में टीएमसी की जीत हुई। पहली बार मुसलमान वोटों का बड़ा हिस्सा मेनस्ट्रीम राजनीति से अलग होकर ममता के पाले में आ गया। ममता के 16 दिनों के प्रदर्शन के बाद टाटा ने नैनो कार की फैक्ट्री सिंगूर से हटाने का ऐलान कर दिया। ये अक्टूबर का महीना था। ममता बनर्जी ने जब तालियों की गड़गड़ाहट के बीच भाषण शुरू किया तो एक अलग मुद्दा उभर कर सामने आ गया। एक रोड एक्सीडेंट में दो युवाओं की मौत हुई थी। ममता ने मंच से कहा – हमारे दो मुसलमान भाई आज सुबह मारे गए हैं। वो हमारे समर्थक थे। इसे एक्सीडेंट बताने की कोशिश की जा रही है लेकिन ये सीपीएम का षडयंत्र है।

इसने सबको चौंका दिया। पर ममता को आगे का रास्ता साफ दिखाई दे रहा था। सूबे का 27 परसेंट वोट बैंक सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के रास्ते टीएमसी की झोली में गिरने के लिए तैयार था। एक साल पहले ही जस्टिस राजिंदर सच्चर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि पश्चिम बंगाल का मुसलमान गुजरात के मुसलमान से भी पिछड़ा हुआ है। इससे पश्चिम बंगाल के मुसलमानों को बेचैनी सी हुई। 2006 से 2008 के बीच तीन घटनाओं ने मुसलमान वोट का नया ठिकाना खोज दिया। सच्चर कमेटी रिपोर्ट, जमीन अधिग्रहण और रिजवानुर रहमान की संदिग्ध मौत। 30 साल के कंप्यूटर टीचर रिजवान ने उद्योगपति अशोक तोडी की बेटी से शादी की और कुछ दिनों बाद ही उसकी लाश रेलवे लाइन पर मिली। कहा जाता है कि पुलिस ने उस पर तलाक देने का दबाव बनाया था।

दीदी का यू-टर्न

2008 के पंचायत चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया था। इसके साथ ही घुसपैठियों को लेकर उनकी नीति ने भी यू-टर्न लिया। इस दो उदाहरण से समझते हैं। 15 सितंबर, 2003 को दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े तरुण विजय की किताब कम्युनिस्ट आतंकवाद का लोकार्पण था। ममता ने अपने संबोधन में कहा – आप लोग सच्चे देशभक्त हैं। अगर आपका एक प्रतिशत समर्थन भी हमें बंगाल में मिल जाए तो फासिस्ट सरकार को उखाड़ फेकेंगे। इसके अगले साल 2004 के चुनाव में ममता अपनी पार्टी की अकेली सांसद थी। उन्होंने चार अगस्त को लोकसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर बांग्लादेशी घुसपैठियों पर चर्चा कराने की मांग की। स्पीकर धुर कम्युनिस्ट सोमनाथ चटर्जी थे जिन्हें हराकर दीदी पहली बार 1984 में संसद पहुंची थी। उन्होंने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद गुस्से से लाल ममता ने वेल में जाकर स्पीकर के चेयर पर रखे कागजात हवा में उछाल दिए। नरेंद्र मोदी ने 2014 की रैलियों में इसे जमकर उछाला। 7 मई, 2014 के दिन मोदी ने कहा.. अकेली शेरनी तो पार्लियामेंट में आग लगा रही थी.. अब घुसपैठियों का मुद्दा कहां चला गया ?

ममता ‘बानो’ से ‘बेगम’ तक का सफर

एक बार यू-टर्न लेने के बाद ममता पीछे मुड़ कर नहीं देखी। 2009 के लोकसभा चुनाव में इसका फायदा। टीएमसी को 19 सीटें मिली और ममता देश की रेल मंत्री बनीं। सितंबर, 2009 में रेल मंत्रालय ने हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला और उर्दू में एक विज्ञापन छापा। इसमें कहा गया कि ममता बनर्जी ईद के मौके पर दो योजनाओं की शुरुआत करेंगी – कोलकाता में अल्पसंख्यक बहुत इलाके में नर्सिंग ट्रेनिंग कॉलेज और रेल लाइन का दोहरीकरण। लेकिन सबका ध्यान खींचा विज्ञापन में दीदी की तस्वीर ने। ममता ने अपनी साड़ी का पल्लू सिर पर ऐसे बांधा जो हिजाब जैसा लग रहा था।

अभी तक संघ या बीजेपी ममता के खिलाफ उतनी आक्रामक नहीं हुई थी क्योंकि वो दीदी के रास्ते वामपंथ के सफाए का इतंजार कर रही थीं। लेकिन संघ से अलग हुई संस्था हिंदू समहति ने दीदी को ममता बानो कहना शुरू कर दिया।

इसके अगले साल 2010 में टीएमसी ने कोलकाता नगर निगम पर कब्जा जमाया। जीत के बाद ठीक बाद पार्क सर्कस में इफ्तार का आयोजन किया गया। इसे कोलकाता के इतिहास में सबसे खर्चीला इफ्तार माना जाता है। फिर बारी बुद्धदेब की विदाई की आई। 2011 में पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के बाद ममता ने इमामों और मुअज्जिनों को हर महीने पैसा देना शुरू कर दिया। 2012 में राज्य सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए अलग अस्पताल की योजना भी बनाई पर भारी विरोध के बाद इसे वापस ले लिया गया। बीजेपी को मानो ममता के सत्ता में आने का ही इंतजार था। 2011 के बाद राज्या में पांव जमाने के लिए बीजेपी के सामने सिर्फ टीएमसी थी। बारी थी दीदी के मुस्लिम तुष्टीकरण पर चौतरफा प्रहार करने की। किसे पता था 2021 में नंदीग्राम के संग्राम में ममता के सारथी रहे सुवेंदु अधिकारी से ही पश्चिम बंगाल की सीएम को सबसे बड़ी चुनौती मिलेगी। नंदीग्राम में वोटिंग के दिन सुवेंदु ने कहा कि बेगम तो सभी बूथों पर एजेंट भी नहीं जुटा पाईं, इनका बस चले तो बंगाल को मिनी पाकिस्तान बना दें।

​घुसपैठियों पर राजनीति और सीएए का वार

भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों की सही संख्या बता पाना मुश्किल है। 2016 में किरण रिजिजू ने राज्यसभा में कहा था कि लगभग 2 करोड़ से ज्यादा बांग्लादेशी भारत में हैं। पिछले साल गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी ने अपने एक बयान में कहा कि अगर सबको नागरिकता दी जाए तो आधा बांग्लादेश खाली हो जाएगा। दरअसल ये बयान 2019 में लागू नागरिकता संशोधन कानून के बाद आया जिसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी और जैन धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। अब ये पक्का नहीं कहा जा सकता कि बांग्लादेश से आए मुसलमानों की संख्या कितनी है और इनमें से कितने पश्चिम बंगाल में रह रहे हैं। अनुमान के मुताबिक इनकी संख्या एक करोड़ है। हां एक बात जरूर है कि पिछले कुछ दशकों में मुर्शिदाबाद के बाद मालदा और उत्तर दिनाजपुर मुस्लिम बहुल हुए हैं।

23 साल तक सीएम रहे ज्योति बसु ने भी अवैध घुसपैठ की समस्या स्वीकार की थी। 11 अक्टूबर, 1992 में सीपीएम के मुखपत्र गणशक्ति में उन्होंने लिखा – 1979 के बाद से मुसलमान भी भारत में आ रहे हैं। 1977 से 1992 के बीच 235,529 घुसपैठियों की पहचान की गई जिनमें 68,472 हिंदू और 164, 132 मुसलमान थे। हालांकि सीपीआई और सीपीएम ने इन्हें वोट बैंक की तरह पोषित किया। सीपीआई के संगठन यूनाइटेड सेंट्रल रिफ्यूजी काउंसिल (यूसीआरसी) इनकी देखभाल करती थी। यूं कहें वैचारिक चारे के लिए भी इनका इस्तेमाल हुआ। यूसीआरसी कोरिया में साम्राज्यवाद, दुनिया में इंग्लैंड और अमेरिका की दादागीरी जैसे मुद्दे उठाती रही। इसने कभी भी बांग्लादेश में पूर्वी पाकिस्तान के दमन का मुद्दा नहीं उठाया। उदाहरण के लिए यूसीआरसी ने 1952 में पारित प्रस्ताव में कहा – दुनिया रूस और चीन के साथ नाइंसाफी कर रही है, भारत सरकार को भारी उद्योग लगाने के लिए रूस से सामान मंगाना चाहिए।

2014 के कन्फ्यूजन से संभली बीजेपी

मोदी जब पीएम की रेस में शामिल हुए तो बंगाल में उनकी पहली जनसभा 5 फरवरी, 2014 को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में थी। मंच पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा भी थे। बीजेपी के स्टेट यूनिट को उम्मीद थी कि ममता पर मोदी जमकर प्रहार करेंगे। लेकिन मोदी ने नरम रुख अपनाया। उन्होंने कहा, दीदी को आप यहां काम करने दीजिए, मुझे वहां काम करने दीजिए। आपके दोनो हाथों में लड्डू होगा। प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि ये बंगाल के लोगों के लिए तीसरा लड्डू होगा। सीपीएम ने उसी दिन आरोप लगाया कि बीजेपी और ममता चुनाव बाद हाथ मिलाने वाले हैं। दो हफ्ते बाद ममता ने खुद स्टैंड साफ किया – हम सीपएम, कांग्रेस और बीजेपी तीनों से लड़ेंगे।

बीजेपी के नरम-गरम रवैये से जो नुकसान हो रहा था, उसे दूर करना जरूरी था। 10 अप्रैल 2014 के दिन सिल्लीगुड़ी के माटिगारा में मोदी ने कहा – ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के लोगों के साथ धोखा किया है और इस पर लगाम लगाने के लिए नई दिल्ली में ‘बड़ा मास्टरजी’ का होना ज़रूरी है। फिर 27 अप्रैल को हुगली की रैली में मोदी बरस पड़े – वामपंथियों ने 34 साल के शासन में उतना नुकसान नहीं किया जितना ममता ने 35 महीने के शासन में किया। जय श्रीराम के नारों के बीच 4 मई को बांकुरा की रैली में सीएए की पटकथा लिख दी गई। मोदी ने कहा – भारत माता को दिल में लिए आने वाले , दुर्गा अष्टमी मनाने वाले को हम यूं ही रहने दें। क्या भारत माता अपने बच्चों को नहीं अपनाएगी। लेकिन जो वोट बैंक वाले जो घुसपैठिए आए हैं, उन्हें जाना ही होगा। गुस्से से तमतमाई ममता ने विवादास्पद प्रतिक्रिया दी – मोदी को कमर में रस्सा बांध कर जेल भेज देना चाहिए।

फिर पीछे मुड़कर नहीं देखी बीजेपी

घुसपैठियों के मुद्दे पर दीदी का रिएक्शन बीजेपी के पक्ष में काम करने लगा। संघ और पश्चिम बंगाल की यूनिट ने इसे मुख्य हथियार बनाकर वार करने शुरू कर दिए। 2017 से 19 के बीच राज्य के जिलों में दंगे हुए। इससे वोटों का ध्रुवीकरण तेजी से होने लगा। वामपंथ खत्म होने के बाद बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग काम करने लगी। उधर धारा 370, 35ए हटाने और तीन तलाक को गैर कानूनी ठहराने वाले कानूनो को असर भी बंगाल में दिखा। इस दौरान सांगठनिक मजबूती और टीएमसी की टूट ने बीजेपी को सांस्कृतिक तौर पर बंगाल में पैठ बनाने में मदद की जिसका नतीजा दो मई को आने वाला है।

पपीता खाने के ये नुकसान और फायदे आपको हैरत में डाल देंगे, इन लोगों के लिए है घातक

पपीते को स्वास्थ्यप्रद भोजन में से एक माना जाता है. पपीता विटामिन, खनिज, एंजाइम से भरपूर होता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं. हम सभी ने इसके अनेक स्वास्थ्य लाभों के बारे मे सुना होगा. लेकिन आज हम आपको पपीते के सेवन के कुछ साइड इफेक्ट बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में जानकर यकीनन आप हैरान रह जाएंगे. चलिए जानते हैं पपीता खाने के कुछ नुकसान…

इस रसदार पपीते में भरपूर औषधीय गुण होते हैं और यह एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल के रूप में कार्य करता है. हालांकि पपीते के पत्तों का इस्तेमाल आमतौर पर डेंगू बुखार के इलाज के लिए किया जाता है, लेकिन जब इसे अधिक मात्रा में लिया जाता है तो जोखिम भी हो सकता है.

पपीता से गुर्दे की पथरी के विकास का  जोखिम
पपीता विटामिन सी से भरपूर होता है जो एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करता है और त्वचा की कोशिकाओं को समय से पहले बूढ़ा होने से बचाने में मदद करता है. कैंसर के विकास के जोखिम को कम करता है, प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है और बेहतर रक्त परिसंचरण आदि को विनियमित करने में मदद करता है. हालांकि, अधिक सेवन से कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं जिनमें गुर्दे की पथरी का निर्माण शामिल हैं.

एलर्जी
पपीता त्वचा के लिए अच्छा है क्योंकि इसमें पपैन एंजाइम के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट भी प्रचुर मात्रा में होते हैं. हालांकि, कुछ लोगों को इससे एलर्जी हो सकती है, ऐसे लोगों को इसके सेवन से दूर रहना चाहिए.

कब्ज
पपीता कब्ज के लिए एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसका बहुत अधिक सेवन नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है. हालांकि इसका अधिक सेवन कब्ज का कारण भी बन सकता है.

अधीर रंजन ने चुनाव आयोग से की पीएम मोदी की शिकायत, VVIP एयरक्राफ्ट के इस्तेमाल पर उठाए सवाल

नई दिल्ली/कोलकाता
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर जोर आजमाइश जारी है। इस बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने चुनाव आयोग से पीएम मोदी की शिकायत की है। अधीर रंजन ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक रैलियों के दौरान पीएम मोदी की ओर से VVIP विमान के इस्तेमाल पर सवाल उठाया है। अधीर रंजन ने इस बात चुनाव आयोग से आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया।

अधीर रंजन ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र
मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को लिखे पत्र में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा- ‘किसी भी आधिकारिक दौरे पर पीएम की सुरक्षा को अहम माना जाता है। लेकिन जब प्रधानमंत्री एक राजनीतिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आ रहे हैं, तो इससे किसी अन्य नेता का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। देरी के चलते, उन्हें उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा और एक पूर्व-निर्धारित राजनीतिक कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा। मुझे नहीं पता कि क्या अन्य गतिविधियों को रोकना पीएम के राजनीतिक कार्यक्रम का हिस्सा है।’

क्या राजनीतिक रैलियों में VVIP एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल हो सकता है?
अधीर रंजन ने अपने पत्र में आगे लिखा, ‘जब मैं रेल मंत्रालय में था तो कभी अपनी कार को चुनावी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं किया। मैं यह समझने में असफल रहा कि क्या राजनीतिक रैलियों में भाग लेने के लिए वीवीआईपी एयरक्राफ्ट (जो विदेशी यात्रा के लिए है) उसका इस्तेमाल किया जा सकता है।’

अधीर रंजन ने की आवश्यक कार्रवाई की मांग
कार्रवाई की मांग करते हुए अधीर रंजन ने कहा- ‘जब भारत एक गरीब देश है, सभी सरकारी कर्मचारियों ने कोरोना महामारी संकट के दौरान अपने कुछ दिनों के वेतन का त्याग किया। मतदाताओं को अपने इलाकों में लगातार 2 सालों के लिए सांसद निधि विकास कार्य से वंचित होना पड़ा है। यह सब आपकी जानकारी के लिए हैं और इस पर आवश्यक कार्रवाई की जाए।’

आज तीसरे चरण के लिए प्रचार का आखिरी दिन
आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए दो चरण संपन्न हो चुके हैं। तीसरे चरण के लिए चुनाव प्रचार का आज आखिरी दिन है और 6 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। सभी राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। खुद प्रधानमंत्री मोदी भी बंगाल में बीजेपी की सरकार बनाने के लिए ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं।

मानव इतिहास में पहली बार! तीन प्राइवेट पार्ट के साथ जन्मा यह बच्चा, जानें हैरान करने वाली कहानी

मानव इतिहास में शायद यह पहली बार है जब तीन प्राइवेट पार्ट यानी पेनिस (लिंग) के साथ एक बच्चे का जन्म हुआ है। इराक का यह बच्चा तीन लिंगों वाला यानी ट्रिपहेलिया का पहला रिपोर्टेड मामला है। इराक के मोसुल शहर के दुहोक में जन्मे इस बच्चे के परिवार वाले उस वक्त दंग रह गए, जब जन्म के तीन माह बाद प्राइवेट पार्ट में सूजन की शिकायत को लेकर वे डॉक्टर के पास गए थे।

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ सर्जरी केस रिपोर्ट में प्रकाशित अध्ययन में इस रिपोर्ट को लिखने वाले डॉ शाकिर सलीम जबाली के मुताबिक, हमारी जानकारी के अनुसार तीन पेनिस वाला अथवा ट्रिपहेलिया का पहला दर्ज केस है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बच्चे के परिवारिक में ऐसा कोई आनुवांशिक पतन का इतिहास नहीं रहा है। माना जा रहा है कि बच्चा जब गर्भ में था, तब दवाओं के संपर्क में सही से नहीं आ पाया, इस वजह से ऐसा हुआ होगा। 

न्यूयॉर्क पोस्ट की खबर के मुताबिक, जब बच्चा तीन महीने का था, जब अंडकोश में सूजन की शिकायत को लेकर इस बच्चे के मां-बाप डॉक्टर के पास पहुंचे थे। बच्चे को देखने के बाद डॉक्टरों ने पाया कि उसके एक नहीं बल्कि तीन-तीन पेनिस (लिंग) हैं। मेन पेनिस के जड़ से जुड़ा एक पेनिस था, जिसकी लंबाई 2 सेंटीमीटर थी, वहीं दूसरे की लंबाई एक सेंटीमीटर थी, जो मेन लिंग की निचले हिस्से से जुड़ा था। 

यहां हैरानी की बात यह थी कि तीन लिंगों में से केवल एक ही सही से काम कर रहा था। यानी दो अन्य लिंग में मूत्रमार्ग अथवा यूरिन ट्यूब नहीं थे। इस तरह से इनसे होकर यूरिन नहीं निकल सकता था। इस जांच के बाद डॉक्टरों ने उन दो अतिरिक्त लिंगों को सर्जरीर के जरिए हटाने का फैसला किया। 

इसके बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया और इसके बाद दोनों लिंगों को हटा दिया गया। हालांकि, एक साल तक फॉलो अप लेने के बाद इसे समस्या मुक्त माना गया। बता दें कि ठीक इसी तरह का मामला भारत में भी 2015 में देखा गया था, जब एक बच्चे के दो लिंग थे। मगर इसका डॉक्यूमेंटेशन नहीं हुआ था या किसी जर्नल में इसकी रिपोर्ट पब्लिश नहीं हुई थी, इस वजह से अभी के मामले को पहला मामला माना जा रहा है। 

जम्मू-कश्मीर : बडगाम में हथियारों का जखीरा बरामद, आपत्तिजनक सामग्री भी मिली

मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षा बलों को लश्कर-ए-ताइबा के आतंकियों की ओर से छिपाए गए हथियारों के जखीरे को बरामद करने में कामयाबी मिली। बैग में छिपाकर रखे गए हथियारों के साथ ही संगठन से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री भी मिली है। 

जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना की 53 राष्ट्रीय राइफ ल्स (आरआर) ने इनपुट के आधार पर जिले के खान साहिब इलाके के शनिपोरा गांव के करीब जंगल क्षेत्र में शनिवार को तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान उन्हें जंगल में झाड़ियों के बीच एक बैग मिला जिसमें  लश्कर से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री और भारी मात्रा में हथियार थे। 

पुलिस के अनुसार बरामद किए गए हथियारों में 1 चीनी पिस्तौल (9 एमएम), 1 अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर (यूबीजीएल), 4 यूबीजीएल राउंड, 4 पिस्तौल की मैगजीन, 3 रेडियो सेट एंटीना, 1 बैटरी (9 वोल्ट), 7.62 एमएम की 3 गोलियां, 9 एमएम की 98 गोलियां और 1 बोनट कवर शामिल हैं। पुलिस ने इस बैग को कब्जे में लेते हुए तफ्तीश शुरू कर दी है।

बंगाल में गरमा रहा हिंदू-दलित का मुद्दा, ममता बोलीं- मैं ब्राह्मण हूं, अनुसूचित जाति की महिला मेरे लिए खाना बनाती है

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर विधानसभा चुनाव जीतने के लिए राज्य में साम्प्रदायिक संघर्ष पैदा करने का शनिवार को आरोप लगाया। तृणमूल प्रमुख ने असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाले एआईएमआईएम और अब्बास सिद्दीकी के आईएसएफ की ओर परोक्ष तौर पर इशारा करते हुए मुस्लिमों से हैदराबाद की भाजपा के समर्थन वाली पार्टी और उसकी बंगाल की सहयोगी पार्टियों के जाल में न फंसने का भी आह्वान किया, जो मतों का ध्रुवीकरण करने आई हैं।

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने दक्षिण 24 परगना जिले के रैदिघी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘हैदराबाद का व्यक्ति और यहां के फुरफुरा शरीफ (सिद्दीकी) में उसका सहयोगी भाजपा के इशारे पर अल्पसंख्यक वोटों का बंटवारा करना चाहते हैं और बिहार चुनाव के दौरान जो हुआ था उसे दोहराना चाहते हैं। ओवैसी और सिद्दीकी, दोनों ने पहले तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर दिया था। आईएसएफ माकपा और कांग्रेस के गठबंधन के साथ चुनाव लड़ रही है।

बनर्जी ने साथ ही हिंदुओं से आग्रह किया कि वे भाजपा के ‘साम्प्रदायिक झड़प भड़काने के प्रयासों से सावधान रहें। उन्होंने उनसे कहा कि वे उन बाहरियों से दूर रहें जिन्हें उनके क्षेत्रों में दिक्कत उत्पन्न करने के लिए भेजा गया है। बनर्जी ने अपनी हिंदू पहचान पर जोर देते हुए कहा, ”मैं एक हिंदू हूं जो हर दिन घर से निकलने से पहले चंडी मंत्र का जप करती हूं। लेकिन मैं हर धर्म को सम्मान देने की अपनी परंपरा में विश्वास रखती हूं।

मैं हिंदू घर की बेटी, मुझे सभी मंत्र आते हैं
उन्होंने कहा, ‘मैं एक हिंदू घर की बेटी हूं। मुझे सभी मंत्र आते हैं जो मां चंडी और मां जगदात्री के लिए उच्चारित किए जाते हैं। उनमें (भाजपा नेताओं) से कितने यह कर सकते हैं? ममता ने उन भाजपा नेताओं पर निशाना साधा जिन्होंने दलित मतदताओं के घरों का दौरा किया और वहां भोजन किया। उन्होंने कहा, ”मैं एक ब्राह्मण महिला हूं लेकिन मेरी करीबी सहयोगी एक अनुसूचित जाति की महिला है जो मेरी हर जरूरत का ध्यान रखती है। वह मेरे लिए भोजन भी पकाती है।

दलित विरोधी को लेकर बीजेपी को घेरा
बनर्जी ने कहा, मुझे इसका प्रचार करने की जरूरत नहीं है क्योंकि जो दलित के आंगन में खाना खाने के लिए पांच सितारा होटल से भोजन मंगवा कर खा रहे हैं वे दलित विरोधी, पिछड़ा वर्ग विरोधी और अल्पसंख्यक विरोधी हैं। उन्होंने दावा किया कि अगर भाजपा पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई तो वह संशोधित नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करेगी जिससे ‘कई नागरिकों को यहां से जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा, वे पश्चिम बंगाल और उसके लोगों को विभाजित करेंगे। याद कीजिए कि कैसे उन्होंने असम में एनआरसी में 14 लाख बंगालियों और दो लाख बिहारियों के नाम हटा दिए। बनर्जी ने आरोप लगाया कि ‘केंद्रीय बल मतदान से 48 घंटे पहले हर घर के लोगों को डरा-धमका रहे हैं और उनसे भाजपा के लिए वोट करने को कह रहे हैं।

बाहरियों पर साधा निशाना
उन्होंने कहा, डरो मत। माताओं और बहनों उन्हें चुनौती दो। हमें कोई दिक्कत नहीं है अगर केंद्रीय बल निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए निष्पक्ष रूप से काम करें लेकिन यदि वे किसी खास राजनीतिक पार्टी की तरफ से काम करेंगे तो हम विरोध करेंगे। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्व मेदिनीपुर जिले में नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र में बाहरियों ने चुनावों में धांधली करने की कोशिश की। बनर्जी ने नंदीग्राम में भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा है।

नंदीग्राम में धांधली की कोशिश की गई
उन्होंने कहा, नंदीग्राम में चुनावों में धांधली करने की कोशिश की गई। नंदीग्राम में बाहरी गुंडों के साथ एक स्थानीय हुड़दंगी था, क्योंकि वे लोगों को धमकाने के लिए गए थे। यह उनका स्वरूप है। हालांकि, मुझे जीतने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा, वे बिहार से गुंडे लाए थे और मुझे पेट्रोल बम से घेरने का षड्यंत्र रचा था, लेकिन नंदीग्राम के लोगों ने उसे तब नाकाम कर दिया, जब वे मेरे बचाव में एकजुट हो गए थे।

अमित शाह को घेरा
कुल्पी में, दिन की दूसरी सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, ‘भाजपा को बंगाल के बारे में कुछ भी नहीं पता है जो दुर्गा, काली, शिव, कृष्ण, शीतला की भक्ति के साथ पूजा करता है, जबकि ईद भी उतने ही उत्साह के साथ मनाता है। उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि ”अमित शाह जैसे लोग रवींद्रनाथ टैगोर, काजी नजरूल इस्लाम, स्वामी विवेकानंद और ईश्वरचंद्र विद्यासागर की धरती पर सभाओं को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ”जो भी इन दंगाइयों, मानवता के हत्यारों द्वारा बुलाई गई सार्वजनिक सभाओं में शामिल होते हैं उन्हें शर्म आनी चाहिए।