किसान संगठनों का भारत बंद:किसान आंदोलन के 4 महीने पूरे; कृषि कानूनों के विरोध में सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक सड़कें और ट्रेनें रोकी जाएंगी

किसान आंदोलन के 4 महीने पूरे होने पर संयुक्त किसान मोर्चा ने शुक्रवार को भारत बंद बुलाया है। मोर्चा के मुताबिक, देश के तमाम किसान संगठनों, मजदूर संगठनों, छात्र संगठनों, बार संघ, सियासी दलों और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने उनके बंद का समर्थन किया है। बंद सुबह 6 से शाम 6 बजे तक होगा।

किसान मोर्चा का कहना है कि इस बार बंद का दायरा ज्यादा बड़ा होगा। दुकानें, मॉल, बाजार बंद रखने के साथ ही तमाम छोटी-बड़ी सड़कें और ट्रेनें रोकी जाएंगी। इस दौरान एम्बुलेंस और जरूरी सेवाएं जारी रहेंगी।

राजधानी में भी प्रभावी होगी नाकेबंदी
किसानों ने तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने, MSP पर फसल खरीद के लिए कानून बनाने, किसानों के खिलाफ दर्ज सभी मामले खत्म करने, इलेक्ट्रिसिटी और पॉल्यूशन बिल वापस लेने और डीजल, पेट्रोल और गैस की कीमतें कम करने की मांग कर यह बंद बुलाया है।

संयुक्त मोर्चा का कहना है कि दिल्ली के पास किसान जिन सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं, वे पहले से ही बंद हैं। जो वैकल्पिक मार्ग बनाए गए हैं, उन्हें भी बंद किया जाएगा। संगठन ने किसानों से अपील की है कि वे शांति से विरोध को सफल बनाएं। किसान मोर्चा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रदर्शनकारी किसी भी तरह की बहस और विवाद में शामिल न हों।

कैट ने किया किनारा
कन्फेडरशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा है कि व्यापारियों ने कुछ किसान संगठनों के भारत बंद के बारे में पूछा है। हमें पता चला है कि कैट का नाम बंद में शामिल किया गया है। यह कि गलत है और इससे भ्रम पैदा किया जा रहा है।देश के 40 हजार व्यापार संगठनों की ओर से कैट यह साफ करता है कि दिल्ली और देश भर में सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले रहेंगे। भारत बंद का समर्थन करने के लिए न तो किसी किसान संगठन ने हमसे बात की है और न ही हम खुद बंद का समर्थन करते हैं। हमारा मानना है कि किसानों और सरकार के बीच गतिरोध को बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए।

दिल्ली ट्रेडर्स ऑर्गेनाइजेशन ने कहा- किसानों का समर्थन, लेकिन दुकानें खुली रखेंगे
​​​​​​​दिल्ली के कारोबारियों के संगठन चैबंर्स ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने गुरुवार को कहा कि भारत बंद के दौरान दुकानें और फैक्ट्रियां खुली रखी जाएंगी।संगठन के कन्वीनर बृजेश गोयल और अध्यक्ष सुभाष खंडेलवाल ने कहा कि हमने व्यापारियों के साथ इस मसले पर चर्चा की। उनमें से ज्यादातर ने कहा कि वे किसानों की मांगों का समर्थन करते हैं। केंद्र को इस मुद्दे का हल ढूंढना चाहिए। हालांकि, व्यापारी शुक्रवार को अपने प्रतिष्ठान खुले रखना चाहते हैं, क्योंकि वे कोरोनो के कारण पहले से नुकसान उठा रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। अगर हालात बदतर होते हैं तो प्रशासन फिर से बाजार बंद कर सकता है। ऐसा करना उनके कारोबार के लिए सही नहीं होगा।

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