पीएम मोदी से तारीफ… घोषणापत्र में तस्वीर, क्या बंगाल में बीजेपी की तलाश दिलीप घोष पर पूरी हो रही है?

कोलकाता
पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी से सत्ता छीनने की लड़ाई में इस बार बीजेपी डटकर मुकाबला कर रही है। राज्य में चुनाव प्रचार पूरे स्पीड से चल रहा है। इस बीच शनिवार को खड़गपुर में रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल बीजेपी चीफ दिलीप घोष की तारीफों से पुल बांधे। यह अप्रत्याशित था, क्योंकि ऐसा बहुत कम देखा गया है जब मोदी सार्वजनिक रूप से किसी नेता की तारीफ करते दिखे हों।

पीएम मोदी की इस तारीफ के कई मायने निकाले जा रहे हैं। चर्चा यह भी है कि बंगाल में बीजेपी की सीएम उम्मीदवार की तलाश दिलीप घोष पर पूरी हो सकती है। यही नहीं रविवार को जारी बीजेपी के घोषणापत्र के बैक कवर पर दिलीप घोष की भी तस्वीर दिख रही है।

मोदी ने दिलीप घोष की तारीफ में क्या कहा था?
पश्चिम मिदनापुर के खड़गपुर में रैली के दौरान पीएम मोदी का दिलीप घोष का जिक्र करते हुए कहा था, ‘मैं क्यों इतना निश्चित हूं कि बंगाल में हमारी सरकार आने जा रही है। यह गर्व की बात है कि हमारे पास दिलीप घोष जैसे नेता हैं। बीजेपी के130 के करीब कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन न्यौछावर कर दिया ताकि बंगाल आबाद रहे। दिलीप घोष ना चैन की नींद सोए हैं न दीदी की धमकियों से डरे हैं। उन पर अनेक हमले हुए हैं। मौत के घाट उतारने की कोशिश हुई लेकिन वो बंगाल के उज्ज्वल भविष्य का प्रण लेकर चल पड़े और आज पूरे बंगाल में नई ऊर्जा भर रहे हैं।’

खड़गपुर में 11 बार के विधायक को हराया था

खड़गपुर दिलीप घोष का गढ़ माना जाता है। वह इसी जिले से आते हैं और 2016 में वह प्रदेश की राजनीति में एक बड़े नेता के रूप में उभरे जब उन्होंने कांग्रेस के 11 बार के विधायक और वरिष्ठन नेता ज्ञान सिंह सोहन पाल को हराया था। 2019 में घोष के लोकसभा में जाने के बाद यह सीट खाली हो गई। उसके बाद हुए उपचुनाव में यह सीट टीएमसी के खाते में चली गई।

इस बार बीजेपी ने दिया दूसरे को टिकट
बीजेपी ने इस बार इस सीट से ऐक्टर हिरन चटर्जी को टिकट दिया है और बंगाल बीजेपी चीफ के गढ़ को दोबारा हासिल करना अब बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के राज्य यूनिट के नेताओं का मानना है कि पीएम मोदी की इस तारीफ का कनेक्शन खड़गपुर सीट पर नतीजे से ज्यादा मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के संभावित चेहरे से है।

बीजेपी ने उतारे कई सांसद लेकिन दिलीप घोष को मौका नहीं
बीजेपी ने अपने स्टेट यूनिट के लगभग सभी वरिष्ठ नेताओं को विधानसभा चुनाव में टिकट दिया है। फिर वे चाहे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय हों, केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो हों, लोकसभा सांसद लॉकेट चटर्जी, निशिथ प्रमाणिक और जगननाथ सरकार हों। इनके अलावा पार्टी के थिंक टैंक माने जाने वाले स्वपन दासगुप्ता को भी पार्टी ने टिकट दिया है जिन्होंने हाल ही में राज्यसभा से इस्तीफा दिया है। लेकिन पार्टी ने इस बार दिलीप घोष को चुनाव में नहीं उतारा है। ऐसे में बंगाल बीजेपी यूनिट में असंतोष भी देखने को मिला था।

बाहरियों को टिकट देने से वर्कर्स में बढ़ी थी नाराजगी
.
पिछले दिनों बीजेपी ने अपने 157 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी जिसमें दूसरे दलों से आए नेताओं को अधिक तरजीह दी गई थी। इससे बीजेपी कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी और जगह-जगह बीजेपी दफ्तर में तोड़फोड़ की खबरें आने लगी थीं। ऐसे में खड़गपुर में पीएम मोदी की दिलीप घोष की तारीफ को नाराज कार्यकर्ताओं के लिए संकेत माना जा रहा हैं। हालांकि ऐसी कई बातें हैं जो सीएम फेस बनने के लिए दिलीप घोष के पक्ष में नहीं है। यही वजह है कि बीजेपी अब तक उन्हें लेकर स्पष्ट नहीं हो पाई है और पीएम मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ रही है।

वो बातें जो दिलीप घोष के पक्ष में हैं
कोलकाता और दिल्ली बीजेपी के गलियारों में कई नामों की चर्चा है जिनमें पश्चिम बंगाल बीजेपी चीफ और पूर्व आरएसएस प्रचारक दिलीप घोष सबसे प्रबल दावेदार बताए जा रहे हैं। दिलीप घोष अपने गंवई अंदाज के लिए जाने जाते हैं जो इस वक्त राज्य इकाई में अंदरूनी कलह से जूझ रहे हैं। उन्हें बंगाल के ग्रामीण इलाकों में भी पार्टी का आधार मजबूत करने के लिए जाना जाता है। साथ ही वह टीएमसी नेताओं को आक्रामक अंदाज में जवाब देने वाली छवि रखते हैं।

वो बातें जो दिलीप घोष के समर्थन में नहीं हैं
दिलीप घोष की इस दावेदारी में कई अड़चने भी हैं। पार्टी के अंदर उनके कई विरोधी भी हैं जिन्हें घोष को सीएम पद का उम्मीदवार बनाने में ऐतराज हो सकता है। पब्लिक रैलियों में घोष के कई अटपटे बयान भी सुर्खियों में रहे जैसे गोमूत्र में सोना होता है और कोविड 19 के लिए एक दवाई का काम करती है। बंगाल का मिडिल क्लास बौद्धिक माना जाता है जिसके सामने इस तरह के बेसिर पैर वाले बयानों से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है। घोष की व्यक्तिगत जीवनशैली में भी बंगाल की कला संस्कृति का अभाव है और यह सारी बातें उनके ‘बंगाली भद्रलोक’ में फिट बैठने के लिए पक्ष में नहीं दिख रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *