हमारे दैनिक जीवन में शामिल है विज्ञान, व्यवहार में समझने की जरूरत


जेयू और विज्ञान भारती की ओर से हुए कार्यक्रम में प्रदर्शनी भी लगाई गई
विज्ञान हमारे दैनिक जीवन में शामिल है, लेकिन उसे समझने और व्यवहार में उतारने की जरूरत है। कई ऐसे मेडिश्नल प्लांट्स हैं, जिनसे कई तरह की बीमारियों की दवाइयां बनती हैं। विज्ञान को समझने का हमारा नजरिया व्यावहारिक होना चाहिए, तभी आने वाली पीढ़ी भी उसे समझ सकेगी।
यह बात जीवाजी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कही। वह जेयू और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वाधान में गालव सभागार में हुए कार्यक्रम में बोल रही थीं। इस दौरान विज्ञान भारती की ओर से एक प्रदर्शनी भी लगाई गई।
इस अवसर जेयू की ओर से डीसीडीसी डॉ. केशव सिंह गुर्जर, डीएसडब्ल्यू प्रो. एसके द्विवेदी, कुलानुशासक डॉ. हरेंद्र शर्मा, कार्यपरिषद सदस्य डॉ. शिवेंद्र सिंह राठौड़, वीरेंद्र गुर्जर और विज्ञान भारती के प्रांत सचिव संजय कौरव मौजूद रहे।

भारतीय नजरिया जरूरी

विज्ञान भारती के प्रांत सचिव संजय कौरव ने कहा कि सफलता के लिए हमें आत्मनिर्भर बनना होगा। दूसरी बात विज्ञान के प्रति भारतीय दृष्टिकोण जरूरी है जो मानव कल्याण की सीख देता है।

किताबी ज्ञान से ऊपर है विज्ञान

डॉ. शिवेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि विज्ञान को महज किताबी ज्ञान तक नहीं बांधा जा सकता। यह उससे कहीं ऊपर है। समय के बदलाव के साथ विज्ञान की भूमिका में लगातार परिवर्तन आया है, जरूरत है उसे व्यावहारिक तौर पर समझने की।

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