किसान आंदोलन पर अपनों से ही घिरने लगी केंद्र सरकार, सुब्रमण्यन स्वामी ने पीएम मोदी को बनाया निशाना

केंद्र सरकार किसान आंदोलन पर अपनों से भी घिरने लगी है। मोदी सरकार के नियुक्त राज्यपाल से लेकर बीजेपी नेता तक, किसान आंदोलन पर नरमी बरतने की सलाह सरकार को दे रहे हैं। सबका कहना है कि केंद्र सरकार को किसानों की मांगों पर गौर करना चाहिए और उसे उचित मांगों के मुताबिक तीनों नए कृषि कानूनों को संशोधित करने से भी नहीं हिचकना चाहिए। इसी क्रम में बीजेपी के दिग्गज नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने पीएम मोदी पर ही निशाना साधा तो मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने आज फिर सरकार की कड़ी आलोचना की। आइए जानते हैं कौन-कौन से अपने, किसान आंदोलन पर मोदी सरकार को घेर रहे हैं…

चीन पर नरम तो किसानों पर गरम क्यों मोदी: स्वामी

बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा यह कहकर पीएम मोदी की आलोचना की है कि वो चीन की अकड़ के आगे तो झुक रहे हैं, लेकिन किसानों की मांगों पर नरम नहीं हो रहे। स्वामी ने कहा, “चीन की भाव-भंगिमा अब तक ठीक नहीं है, फिर भी मोदी उसके साथ रिश्ते दोबारा सामान्य करने करने जा रहे हैं। चीन के साथ व्यापार भी सामान्य स्तर पर आ रहा है और राष्ट्रपति शी (जिनपिंग) जल्द ही हमारे सरकारी अतिथि होंगे। लेकिन, वो (मोदी) किसानों से कड़ाई से निपटना चाहते हैं। हजारों किसान खुली जगह में सत्याग्रह कर रहे हैं। साहस का ऐसा एकतरफा प्रदर्शन क्यों?”

सबसे कड़े आलोचक सत्यपाल मलिक

किसान आंदोलन पर सरकार की सबसे कड़ी आलोचना मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक कर रहे हैं। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से मोदी सरकार की आंदोलनकारी किसानों के प्रति कड़े रुख पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने भी कहा कि कुतिया भी मर जाए तो हमारे नेताओं का शोक संदेश आता है, लेकिन 250 किसानों की मौत पर किसी ने चूं तक नहीं बोला है। उन्होंने कहा कि किसानों की मौत पर चुप्पी संवेदनहीनता दिखाती है। मलिक दिल्ली से डिडवाना जाते वक्त राजस्थान के झुंझुनूं में रुके और एक निजी कार्यक्रम में ये बातें कहीं। इससे पहले, 15 मार्च को उन्होंने उत्तर प्रदेश के बागपत में यहां तक कहा कि किसान यूं ही वापस नहीं लौटने वाले हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को नसीहत दी कि वो किसानों की बात मान ले। 

किसानों के हाथ में ही सौंप दें कानून: चौधरी बीरेंद्र सिंह

एक और बीजेपी नेता और मोदी सरकार में मंत्री रहे चौधरी बिरेंद्र सिंह भी किसान आंदोलन का समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को कहा कि वो तीनों नए कृषि कानून आंदोलनकारी किसानों को सौंपकर पूछे कि इनमें क्या-क्या सुधार होने चाहिए। जिंद के नरवाणा में किसान नेता सर छोटू राम की जंयती के मौके पर आयोजित समारोह में कहा कि सरकार को चाहिए कि वो कानून में बदलावों को लेकर किसान के साथ बातचीत करे। उन्होंने कहा, “अमेरिका में 44 साल पहले 1,500 ट्रैक्टर सड़कों पर आ गए थे और अमेरिकी सरकार को कानून में संशोधन करना पड़ा था। अब आप समझ सकते हैं।”

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