शनिश्चरीअमावस्या: शनि की शांति के लिए तेल, तिल-मंगोड़े का लगाया भोग

ग्वालियर। शनिचरी अमावस्या पर शहर के सभी शनि मंदिरों में सुबह से भक्तों का पहंुचना शुरू होगया है और शनि को शांति करने भक्तों ने शनिदेव का सरसों के तेल सेअभिषेक किया और तिल-मगोड़े का भोग भी लगाया। शनि अमावस्या कोलेकर सभी शनि मंदिरों पर तैयारियां की गई हैं। मंदिरों को सजाया गया है। इसमौके पर भण्डारों का भी आयोजन किया जाएगा।न्याय केदेवता शनिदेव की कृपा दृष्टि पाने के लिए भक्त शनिवार को शनि मंदिरों मेंभगवान की पूजा अर्चना करने पहंुचे हैं। भक्तों ने शनिदेव को सरसों का तेल, तिल,काला कपड़ा और लोहा आदि भेंट किया।

शहर में   बहोड़ापुर स्थित नवग्रह मंदिर, दाल बाजार स्थितशनिदेव मंदिर, तारागंज शनिदेव मंदिर आदि पर विशेष इंतजाम किए गए हैं।शनिदेवने राजा दशरथ को दिया था वरदानज्योतिषाचार्यपं. मनोज शर्मा के अनुसार अमावस्या हर महीनें आती है, लेकिन शनिवार को आनेवाली अमावस्या का विशेष महत्व होता है। क्योंकि इस दिन शनिदेव रोहणी नक्षत्रको पार करते हैं, रोहणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा है। शनिस्त्रोत में उल्लेख है कि एकबार अयोध्या में भारी अकाल पड़ा था। अयोध्या के राजा दशरथ ने जब इसका कारणजानना चाह तो बताया गया कि शनिदेव रोहणी नक्षत्र का भेदन कर रहे हैं। इसकारण यहअकाल पड़ रहा है। इसके बाद राजा दशरथ शनिदेव से युद्ध करने के लिए उनके सामने गए।शनिदेव राजा दशरथ की अपने प्रजा के प्रति निष्ठा और प्रेम देखकर बहुत प्रसन्न हुएऔर उन्होंने राजा दशरथ को वरदान दिया कि वह जब तक जीवित रहेंगे वह रोहणीनक्षत्र का भेदन नहीं करेंगे।

—————-

एैंती स्थितशनिदेव मंदिर पर हजारों की संख्या में पहंुचे श्रद्धालु

मुरैना।शनिचरी अमावस्या पर मुरैना के एैंती गंाव में पहाडी पर स्थित शनिदेव मंदिर मेंशुक्रवार की शाम से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे थे और रात 12 बजे से मंदिर के पटश्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। जिसके बाद से हजारों श्रद्धालु शनिदेव महाराज केदर्शन कर चुके हैं। शनिवार को सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमानअष्टक का पाठ करने भी शनि ग्रह के प्रभाव से शांति मिलती है। जिन लोगों परशनि की महादशा चल रही है, ऐसे जातक मांस-मदिरा का सेवन नहीं करें व मुकदमेमें झूठी गवाही भी न दें। इससे शनि का क्रोध नुकसान पहुंचा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *