खून से पत्र लिखकर व्यापम फर्जीवाड़े की जांच की मांग, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के बंगले के बाहर किया प्रदर्शन

  

ग्वालियर। व्यापम द्वारा आयोजित कराई गई कृषि विस्तार अधिकारी परीक्षा में गड़बड़ी का विरोध कर रहे कृषि महाविद्यालय के छात्रों ने इस कथित फर्जीवाड़े के विरोध में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के बंगले के बाहर प्रदर्शन किया और अपने खून से पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। आपको बता दें कि ग्वालियर में कृषि महाविद्यालय रेसकोर्स रोड़ पर बना है और यहंी पास में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर का सरकारी बंगला बना हुआ है। कृषि महाविद्यालय के छात्र पीईबी और सीएम शिवराज सिंह चैहान के खिलाफ नारेबाजी करते हुए केन्द्रीय मंत्री के बंगले के बाहर पहंुचे और व्यापम में सहायक कृषि विकास अधिकारी और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के पद के लिए आयोजित परीक्षा में फर्जीवाड़े का आरोप लगाकर परीक्षा की न्यायिक जंाच की मंाग की।
ग्वालियर के कृषि महाविद्यालय के पीजी छात्रों ने पिछले दिनों वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी और सहायक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी पद के लिए हुई लिखित परीक्षा में पेपर कुछ लोगों को लीक करने का सनसनीखेज आरोप लगाते हुए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर के बंगले पर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने अपने खून से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और सीजेआई एस ए बोबडे को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि मध्यप्रदेश में हुए व्यापम घोटाले टू के बारे में या तो जल्द और विश्वसनीय जांच कराई जाए अथवा छात्रों को इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए। केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर के रेसकोर्स स्थित बंगले पर यह छात्र दोपहर 12:30 बजे पहुंचे थे। वहां उन्होंने धरना प्रदर्शन किया और प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और व्यापमं के अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों का कहना है कि ग्वालियर भिंड मुरैना के कई छात्र जो पूर्व में फिसड्डी रहे हैं वह इन परीक्षाओं में टॉपर कैसे आ गए याने बड़े स्तर पर घोटाला हुआ है। छात्रों का कहना है कि वह 18 दिन से लगातार अपना आंदोलन जारी रखे हुए हैं लेकिन उनकी सुनने वाला ना तो कोई जनप्रतिनिधि है और ना ही कोई अफसर। इससे पहले कृषि महाविद्यालय के छात्र अर्धनग्न होकर प्रदर्शन कर चुके हैं वह कॉलेज के गेट पर कई दिनों तक धरने पर भी बैठे रहे। अब उन्होंने अपने खून से राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है और कहा है कि उन्हें न्याय दो अथवा इच्छा की अनुमति दो ।

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