Sankashti Chaturthi 2021: आज है संकष्टी चतुर्थी, जानिए इस व्रत के लाभ और कथा


Sankashti Chaturthi 2021: भारतीय संवत्सर का ग्याहरवां चंद्रमास तथा दसवां सौरमास ‘माघ’ कहलाता है।इंदौर के पंडित गिरीश व्यास ने बताया माघ में शीतल जल में डुबकी लगाने वाले मनुष्य पापमुक्त हो स्वर्गलोक में जाते हैं। यथा – माघे निमग्नाः सलिले सुशीले विमुक्तपापस्त्रिदिवं प्रयान्ति। इस मास की कृष्णचतुर्थी संकष्टीचतुर्थी के नाम से विख्यात है। कहते हैं किसी भी शुभकार्य के पहले भगवान गणेश की आराधना आवश्यक होती है। इस बार कृष्णचतुर्थी हमारे जीवन के समस्त पाप को हरने के लिए दो मार्च 2021 को मंगलवार को सुबह पांच बजकर 46 मिनट से प्रारंभ होकर तीन मार्च 2021, बुधवार को रात्रि 02.59 तक रहेगी।

इस चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी भी कहा गया है। जिसका अर्थ है ‘कठिन समय से मुक्ति पाना’ अर्थात यह चतुर्थी व्रत, तीर्थस्नान, दान, धर्म, दया आदि मुक्ति तथा समस्त दुखों से मुक्ति दिलाने वाला है। माघ मास की कृष्ण चतुर्थी में भगवान के स्वरूप की कल्पना चार मस्तक और चार भुजाओं के रूप में की जाती है। चतुर्थी का व्रत प्रत्येक मास में दो बार मनाया जाता है।

माघ मास के चतुर्थी का व्रत अत्यन्त ही कठिन व्रतों मे से एक माना जाता है। मान्यता है कि व्रत में फलाहार के रूप में जड़ अर्थात जमीन के अन्दर उत्पन्न फलों का ही सेवन करना चाहिए। इसलिए इस समय कंदमूल जैसे रतालु, शकरकंद का सेवन भी किया जाता है। दक्षिण भारत में यह पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। कहा जाता है इस दिन भगवान गणेश की सच्चे ह्रदय से की हुई पूजा विशेष फलदायी होती है। इसमें सुहागिन स्त्रियां चतुर्थी का व्रत कर सायं चंद्रमा देखकर जल ग्रहण करती हैं

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