MP में कोरोना फिर बना चैंलेंज: महाराष्ट्र की बसों पर प्रतिबंध 30 अप्रैल तक, स्कूल अभी नहीं खुलेंगे

भोपाल: मध्य प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए शिवराज सरकार ने महाराष्ट्र से आने-जाने वाली बसों पर लगा प्रतिबंध एक महीने (30 अप्रैल तक) के लिए बढ़ा दिया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि जिस तरह कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है, उसे देखते हुए स्कूल फिलहाल नहीं खोले जाएंगे. रंगपंचमी पर सार्वजनिक आयोजन नहीं होगा. मुख्यमंत्री ने कहा बुधवार को सभी कमिश्नर, कलेक्टर, आईजी, एसपी, सीएमएचओ, जिला पंचायत के सीईओ की वर्चुअल मीटिंग ली.

बैठक में विशेषकर तीन मुद्दों पर चर्चा हुई. सबसे पहला और महत्वपूर्ण मुद्दा कोरोना संक्रमण रहा. इसे नियंत्रित करने के लिए जो रणनीति आइडेंटिफिकेशन,आइसोलेशन और टेस्टिंग ट्रीटमेंट (आईआईटीटी ​​​) ​पर फोकस किया गया है, मुख्यमंत्री ने उसकी समीक्षा की और अधिकारियों से इसके बारे में जाना. मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल में बेड की कमी ना रहे, यह हमारे सामने चैलेंज है. इसके लिए जरूरी मैन पावर और व्यवस्थाएं खड़ी करनी हैं, उसकी तैयारी की भी समीक्षा मुख्यमंत्री ने बैठक में की.

मुख्यमंत्री ने कहा कि संक्रमित के निकटतम लोगों की पहचान संदिग्ध होने पर उन्हें आइसोलेट करना अब अनिवार्य किया जा रहा है. अगर किसी का घर छोटा है तो उसमें आइसोलेट करने से कोई फायदा नहीं. उनके लिए व्यवस्था बनाने पर फैसला हुआ है. जहां कोरोना के ज्यादा मामले हैं, वहां टेस्टिंग बढ़ाई जाएगी. इसके साथ ही इन शहरों में 1 अप्रैल से 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीनेशन शुरू हो रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जिलों और नगरों में ज्यादा संक्रमण है, वहां वैक्सीनेशन के अभियान को हम युद्ध स्तर पर चलाएंगे.

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि इंदौर, भोपाल, जबलपुर और खरगौन की स्थिति से वह चिंतित हैं. इन स्थानों पर कुछ माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाकर कोरोना संक्रमण को नियंत्रित किया जाए. क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप के साथ बैठक कर चर्चा की जाए और आवश्यक निर्णय लिए जाएं. भोपाल में 171 स्थानों पर वैक्सीनेशन कार्य हो रहा है, इस कार्य में तेजी लाई जा रही है. उन्होंने कहा कि हमीदिया अस्पताल सहित सभी वैक्सीनेशन केंद्रों में वैक्सीन लगाने के कार्य को गति दें.

जेयू खोलेगा स्वयं का मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल

ग्वालियर
बुधवार को इस संबंध में हुई एडवाइजरी समिति की बैठक
जीवाजी विश्वविद्यालय के टंडन हॉल में बुधवार को मेडिकल कॉलेज के प्रारंभ व संचालन किए जाने हेतु एडवाइजरी समिति की मीटिंग हुई। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में कहा गया कि जेयू के पास स्वयं की बीस एकड़ भूमि है, जिस पर जेयू द्वारा मेडिकल कॉलेज खोला जाए। शुरूआत में 150 सीटों के लिए ओपन होने वाले इस कॉलेज के साथ तीन सौ से अधिक बैड वाला अस्पताल भी खोले जाने पर विचार हुआ। इसके लिए एनओसी प्राप्त करने के लिए एप्लीकेशन जुलाई माह तक फाइल करने की बात कही गई। बैठक में कुलाधिसचिव प्रो. उमेश होलानी, कुलसचिव प्रो. आनंद मिश्रा, डीसीडीसी डॉ. केशव िंसंह गुर्जर, डीआर डॉ. आईके मंसूरी सहित प्रो. जीबीकेएस प्रसाद, प्रो. डीडी अग्रवाल, प्रो. नलिनी श्रीवास्तव, प्रो. एके श्रीवास्तव, डॉ. ज्योति बिंदल, डॉ. संजीव कुमार सिंह, डॉ. सुखदेव माखीजा मौजूद रहे।
समित के सदस्यों ने ये भी विचार रखेबीएचयू व एएमयू जैसे विश्वविद्यालयों द्वारा भी स्वयं के हॉस्पिटल संचालित किए जा रहे हैं। इसे देखते हुए भी जेयू में उचित इंफ्रास्ट्रक्चर युक्त हॉस्पिटल खोलने की आवश्यकता है।

वर्तमान में प्रदेश में 17 हजार की जनसंख्या पर एक डॉक्टर है। डॉक्टर्स की कमी को पूरी करने के लिए भी हॉस्पिटल ओपन करने की आवश्यकता है।

नई शिक्षा नीति के अनुसार विश्वविद्यालय को मल्टीफंक्शनल होना जरूरी है, इसलिए विवि को स्वयं का हॉस्पिटल खोले जाने की जरूरत है।

इसके लिए विज्ञापन जारी करके 11 माह के लिए फैकल्टी की संविदा नियुक्ति की जा सकती है।

इस बात पर भी फोकस हो कि टीचिंग उपकरण व हॉस्पिटल के उपकरण अलग- अलग हो।

ग्वालियर संभाग में वर्तमान में कोई भी प्राइवेट कॉलेज संचालित नहीं है, जबकि अन्य संभागों में यह व्यवस्था उपलब्ध है, अतः मेडिकल कॉलेज खोला जाना चाहिए।

जेयू की चिकित्सा संबद्धतता जबलपुर विवि में स्थानांतरित हो गई, जिसे फिर से शुरू किया जाए।

यूपी : बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी पर पोटा लगाने वाले पूर्व डिप्टी एसपी पर दर्ज मुकदमे वापस

यूपी के माफिया और विधायक मुख्तार अंसारी पर पोटा लगाने वाले पूर्व डिप्टी एसपी शैलेंद्र सिंह को अदालत की तरफ से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ दायर सभी मुकदमे वापस लेने के आदेश दिए हैं। यह बात खुद शैलेंद्र सिंह ने अपने फेसबुक अकाउंट के जरिए साझा की है। उन्होंने एक पोस्ट डालकर और न्यायालय के आदेश की कॉपी डालकर बताया है कि उनके खिलाफ सभी मुकदमे वापस ले लिए गए हैं।

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है, “2004 में जब मैंने माफिया मुख्तार अंसारी पर LMG केस में POTA लगा दिया था, तो मुख्तार को बचाने के लिए तत्कालीन सरकार ने मेरे ऊपर केस खत्म करने का दबाव बनाया। जिसे न मानने के फलस्वरूप मुझे डिप्टी एसपी पद से त्यागपत्र देना पड़ा था। इस घटना के कुछ महीने बाद ही तत्कालीन सरकार के इशारे पर, राजनीति से प्रेरित होकर मेरे ऊपर वाराणसी में आपराधिक मुकदमा लिखा गया और मुझे जेल में डाल दिया गया। लेकिन जब माननीय योगी जी की सरकार बनी तो, उक्त मुकदमे को प्राथमिकता के साथ वापस लेने का आदेश पारित किया गया, जिसे माननीय सीजेएम न्यायालय द्वारा 6 मार्च, 2021 को स्वीकृति प्रदान की गई। न्यायालय के आदेश की नकल आज ही प्राप्त हुई। मैं और मेरा परिवार योगी जी की इस सहृदयता का आजीवन ऋणी रहेगा। संघर्ष के दौरान मेरा साथ देने वाले सभी शुभेक्षुओं का, हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।”

गौरतलब है कि वर्ष 2004 में एसटीएफ के तत्कालीन डिप्टी एसपी शैलेंद्र कुमार सिंह को मुखबिरों से सूचना मिली थी कि सेना का एक भगोड़ा एलएमजी लेकर भागा है और उसे मुख्तार अंसारी को बेचने की तैयारी है। इसके बाद शैलेंद्र ने भगोड़े को पकड़ कर एलएमजी (लाइट मशीनगन) बरामद की थी। डिप्टी एसपी का दावा था कि एलएमजी मुख्तार अंसारी के पास से बरामद हुई थी। इसी आरोप के चलते मुख्तार अंसारी के खिलाफ पोटा के तहत मामला दर्ज कराया था। इसके बाद शैलेंद्र की राह मुश्किल होती चली गई थी और उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

2004 में जब मैनें माफिया मुख्तार अंसारी पर LMG केस में POTA लगा दिया था, तो मुख्तार को बचाने के लिए तत्कालीन सरकार ने मेरे ऊपर केस खत्म करने का दबाव बनाया। जिसे न मानने के फलस्वरूप मुझे Dy SP पद से त्यागपत्र देना पड़ा था। इस घटना के कुछ महीने बाद ही तत्कालीन सरकार के इशारे पर, राजनीति से प्रेरित होकर मेरे ऊपर वाराणसी में अपराधिक मुकदमा लिखा गया और मुझे जेल में डाल दिया गया।
लेकिन जब मा. योगी जी की सरकार बनी तो, उक्त मुकदमे को प्राथमिकता के साथ वापस लेने का आदेश पारित किया गया, जिसे मा. CJM न्यायालय द्वारा 6 मार्च, 2021 को स्वीकृति प्रदान की गई। मा. न्यायालय के आदेश की नकल आज ही प्राप्त हुई।
मैं और मेरा परिवार मा. योगी जी की इस सहृदयता का आजीवन ऋणी रहेगा। संघर्ष के दौरान मेरा साथ देने वाले सभी शुभेक्षुओं का, हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
जय हिंद 🙏

बंगाल: शेख और पाल की लड़ाई में बदल रहा है नंदीग्राम का राजनीतिक माजरा

शेख और ताहेर ने अपनी पार्टी तृणमूल का झंडा उठा रखा है। पॉल अब सुवेंदु अधिकारी के साथ है। जयदीप घोष कहते हैं कि नंदीग्राम में तीस प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं। इसलिए पॉल और उनके नेता सुवेंदु ने हिंदुत्व के राष्ट्रवाद को मुद्दा बनाकर जीत की चौसर बिछाई है। सुवेंदु के पिता शिशिर अधिकारी की राजनीतिक विरासत बने रहने के लिए जरूरी है कि सुवेंदु जीत जाएं। वहीं, ताहेर और शेख की टीम के मो. सलीम कहते हैं कि ममता बनर्जी नहीं जीती तो फिर पश्चिम बंगाल ही हाथ से निकल जाएगा। इसलिए लड़ाई कांटे की है, हलांकि जीत ममता की ही पक्की है। वैसे अधिकारी परिवार राजनीति का पुराना और सधा हुआ खिलाड़ी है। शिशिर, शिवेन्दु, सुवेंदु सब धीरे-धीरे कद-पद वाले नेता हो चुके हैं। शांतनु बनर्जी कहते हैं कि नंदीग्राम में चप्पे-चप्पे पर सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल का संगठन खड़ा कर रखा था। पिछले दस साल ममता बनर्जी मुख्यमंत्री जरूर रही, लेकिन कभी नंदीग्राम नहीं गई। सब सुवेंदु के ही कंधे पर रहा। अब सुवेंदु तृममूल छोड़कर भाजपा में चले गए हैं तो साथ में 30-35 प्रतिशत तृणमूल के स्थानीय नेता भी चले गए हैं। मामला दिलचस्प है। देखना है किसका होता है नंदीग्राम।

कौन हैं शेख, ताहेर और पाल

सूफियाना शेख, अबु ताहेर और मेघनाथ पॉल। नंदीग्राम में कभी तृणमूल और सुवेंदु अधिकारी के तीन राजनीतिक कमांडर थे। अब इनमें से सूफियाना और ताहेर तो तृणमूल में हैं। ममता के साथ प्रचार कर रहे हैं। जबकि मेघनाथ पाल सुवेंदु के साथ भाजपाई हो गए हैं। तीनों की नंदीग्राम में मतदाताओं के बीच में गहरी पैठ है। इसी को ध्यान में रखकर ममता बनर्जी ने पाल से भी मदद मांगी थी। 30 प्रतिशत मुस्लिम वोटर वाले नंदीग्राम को 2016 में सुवेंदु ने 68 हजार मतों से जीता था। टीम सुवेंदु मानकर चल रही है कि इस 30 प्रतिशत मतदाताओं में से बहुत कम ही उनके साथ आएंगे। इसलिए वह खुलकर हिन्दुत्व का कार्ड खेल रहे हैं।

केवल हिन्दुत्व के कार्ड से सुवेंदु के लिए आसान नहीं नंदीग्राम

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नंदीग्राम में कैंप करके सुवेंदु के हिन्दुत्व कार्ड को काफी मजबूती दे दी है। भाजपा के पश्चिम बंगाल के उपाध्यक्ष राजकमल पाठक कहते हैं कि नंदीग्राम ममता के लिए बहुत आसान नहीं है। लेकिन दीपक सान्याल कहते हैं कि ममता को हराना सुवेंदु के लिए भी आसान नहीं है, क्योंकि नंदीग्राम के 70 प्रतिशत हिन्दू मतदाता सुवेंदु को वोट डालने नहीं जा रहे हैं। सान्याल का कहना है कि यदि इतने मतदाता सुवेंदु को वोट डाल दें तो निश्चित रूप से ममता चुनाव हार जाएंगी। ममता बनर्जी ने पिछले सवा साल से भाजपा की रणनीति को भांपकर पूरे बंगाल में खूब सॉफ्ट हिन्दुत्व का कार्ड खेला है। ममता ने अपना गोत्र शांडिल्य और पार्टी का गोत्र मां, माटी, मानुष बताया है। सनातन धर्म के पुजारियों के लिए राज सहायता की घोषणा समेत तमाम प्रयास किए हैं। दूसरे, तृणमूल के सभी हिन्दूओं ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन भी नहीं थामा है। वरिष्ठ पत्रकार शांतनु बनर्जी कहते हैं कि कुछ भी हो पश्चिम बंगाल में राजनीतिक चेहरे के रूप में ममता बनर्जी के सामने सुवेंदु अधिकारी कुछ भी नहीं है और जिस तरह से ममता बनर्जी को जन समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है, उससे साफ लगता है कि भले वह कम अंतर से जीतें, लेकिन सुवेंदु से सीट छीन लेंगी।  

क्या कहते हैं शिशिर अधिकारी?

सुवेन्दु के पिता हैं, तृणमूल से सांसद और अब भाजपा में शामिल हैं। शिशिर अधिकारी पंचायत चुनाव से उठे जमीनी नेता हैं। नगर निगम से लेकर संसद तक अपनी जीत का लगातार परचम फहराया है।  से साफ कहते हैं कि क्षेत्र हमारा है। अब हमारा लड़का चुनाव लड़ रहा है तो जीतेगा। जनता ममता बनर्जी को जिताने के मूड में बिल्कुल नहीं है। दो मई को स्थिति साफ हो जाएगी। राज्य में प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर भरोसा करके लोग विकास के लिए भाजपा को वोट देंगे। वैसे भी भाजपा ने नंदीग्राम जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है।

भाजपा के लिए ममता बनर्जी का मनोबल तोड़ना जरूरी?

भाजपा के एक पश्चिम बंगाल के उपाध्यक्ष की सुनिए।  से ऑफ दि रिकार्ड कहते हैं कि सुवेंदु अधिकारी मंच से पश्चिम बंगाल को चलाने की बात कर रहे हैं। आखिर ऐसी बात किसके बूते कर रहे हैं? क्योंकि न तो भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने और न ही प्रधानमंत्री मोदी या गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें पार्टी का मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया है। सूत्र का कहना है कि बंगाल भाजपा का कोई नेता मंच से तो क्या छिपे तौर पर भी ऐसा नहीं बोल रहा है। इसका मतलब समझिए? सूत्र का कहना है कि इसके बाद भी भाजपा ने नंदीग्राम में केंद्रीय मंत्रियों, नेताओं, दूसरे राज्यों के नेताओं, संघ के प्रचारकों, कार्यकर्ताओं की फौज लगा रखी है। रणनीतिकार सूत्र का कहना है कि फिलहाल हमारा मकसद नंदीग्राम में ममता बनर्जी को घेरकर उनके मनोबल को तोडऩा है। क्यों कि अभी इसके बाद छह चरणों के चुनाव बाकी हैं। अगर ममता बनर्जी नंदीग्राम में हार की स्थिति देखकर तंग हो गई तो आगे हमें बड़ा फायदा मिल सकता है।

बिहार में इस जगह पर राजमहल छोड़ने के बाद भगवान बुद्ध ने कराया था मुंडन,

पश्चिम चंपारण, । सांसारिक समस्याओं से व्यथित होकर जब गौतम बुद्ध (तथागत) ने गृह त्याग किया तो उनकी इस यात्रा में चंपारण के रमपुरवा को गौरवशाली इतिहास से जुड़ने का सौभाग्य मिला। करीब पच्चीस सौ वर्ष पहले महाभिनिष्क्रमण के दौरान उन्होंने गौनाहा के रमपुरवा में ही राजसी वस्त्र का त्याग किया और मुंडन कराया। फिर सत्य की खोज में आगे की ओर निकल पड़े। 

बुद्ध के उस ऐतिहासिक पल को उनके अनुयायी मौर्य सम्राट अशोक ने स्तंभ का निर्माण कराकर देश दुनिया के लिए उस विरासत के रूप में यादगार बनाया। जहां आज भी श्रीलंका, तिब्बत, जापान, कंबोडिया आदि देशों से बौद्धिष्ट अपने इस धर्म स्थल पर पहुंचकर बुद्ध को शिद्दत से याद करते हैं। शांति और सद्भाव की इस माटी पर वर्ष 2012 में एक साथ आठ देशों के 275 बौद्धिष्ट पहुंच चुके हैं। लौरिया में बौद्ध महोत्सव में भाग लेकर वे रमपुरवा आए थे। जहां बुद्ध की यादों से जुड़ी हुई स्मृतियां बिखरी पड़ी देखकर उन्हें दर्द हुआ। सभी के चेहरे पर इन कृतियों के विकास को लेकर चिंता की भाव थी। मगर, खुशी बुद्ध की पावन धरती पर पहुंचकर इस मिंट्टी को छूने की थी। बौद्धिष्टो में शामिल ताईवान के धर्मगुरु व पर्यटकों का नेतृत्व कर रहे मास्टर झिंताओं ने यहां पर चंपारण के बौद्ध स्थलों के लिए सौ करोड़ के निवेश की बात भी कही थी। जानकार बताते हैं कि गृह त्याग के बाद बुद्ध यात्रा के दौरान घोड़ा से रमपुरवा में गिर गए थे। वहीं पर उन्होंने अपने राजशी वस्त्र का त्याग कर दिया।

सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के साथ-साथ बुद्ध की याद में स्तंभ का निर्माण कराया। इस स्तंभ की खूबियां भी अद्वितीय रही। पूरे विश्व में रमपुरवा ही ऐसी जगह है जहां अशोक ने दो स्तम्भ स्थापित कराए थे। इनमें से एक स्तम्भ के उपर वृषभ एवं दूसरे पर सिंह का प्रतीक चिंह था। जो कभी टूट कर गिर गया। वृषभ का शीर्ष राष्ट्रपति भवन की आर्ट गैलरी में तथा सिंह का शीर्ष कोलकाता के राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा हुआ है। गृह त्याग के दौरान लौरिया में भी बुद्ध के पांव पड़े थे। सम्राट अशोक द्वारा स्थापित स्तंभ यहां आज भी बौद्ध धर्मावलंबियों और पर्यटकों को उनकी याद दिल आ रहा है। बता दें कि रमपुरवा बौद्ध स्थल के विकास की दरकार है। स्तंभ पर छतरी लगा कर एक केयरटेकर के माध्यम से उसकी सुरक्षा की जा रही है। मगर वहां पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए ना समुचित मार्ग और ना शौचालय व बैठने की व्यवस्था। लोगों का कहना है कि इसके विकास की अब तक कोई योजना धरातल पर उतारने की पहल नहीं हुई।

रामनगर की विधायक भागीरथी देवी ने कहा कि रमपुरवा अशोक स्तंभ सबसे महत्वपूर्ण है। इसपर सम्राट अशोक के संदेश अंकित है। लेकिन दुर्भाग्य से पुरातत्व विभाग के द्वारा इसका बेहतर संरक्षण नहीं किया जा रहा है। इसका संरक्षण हो और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सके, मैं विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री से मिलकर इस दिशा में पहल करूंगी। 

वायुसेना के पंखों को मिलेगी और मजबूती, आज फ्रांस से भारत आएंगे तीन नए राफेल फाइटर जेट

नई दिल्ली: चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद के बीच भारतीय वायुसेना के हवाई जखीरे में फिर से इजाफा होने वाला है. राफेल लड़ाकू विमानों की नई खेप आज हिन्दुस्तान पहुंच रही है. खबरों के मुताबिक तीनों राफेल लड़ाकू विमान आज शाम अंबाला के एयरबेस पर लैंड करेंगे. ये तीनों लड़ाकू विमान फ्रांस से हिन्दुस्तान की लगभग 7 हजार किमी.की दूरी बिना रुके तय करेंगे. यूएई के आसमान में ही तीनों विमानों में एयर टू एयर रिफ्यूलिंग की जाएगी, यानि उड़ान के दौरान आसमान में ही ईंधन भरा जाएगा.

अब तक 11 राफेल आए, गोल्डन ऐरो स्कॉवड्रन का हिस्सा बने हिस्सा
भारत सरकार ने फ्रांस से 36 राफेल विमानों की खरीद की है, जिनमें से 21 विमान भारत को सौंपे जा चुके हैं. हालांकि अब तक 11 राफेल विमान ही भारत आए हैं. ये सभी अंबाला में मौजूद वायुसेना के गोल्डन ऐरो स्कॉवड्रन का हिस्सा हैं और आज जो तीन राफेल आएंगे उन्हें भी गोल्डन एरो स्कॉवड्रन में ही शामिल किया जाएगा.

इन सभी 14 राफेल विमानों को वायुसेना जरूरत के हिसाब से कहीं भी इस्तेमाल कर सकती है. लेकिन स्कॉवड्रन की पहली जिम्मेदारी देश के पश्चिम और उत्तर में चीन-पाकिस्तान से जुड़ी हवाई सीमा को महफूज रखना है.

अप्रैल में पांच और राफेल आएंगे
इन लड़ाकू विमानों की एक और नई खेप अगले महीने यानि अप्रैल के आखिर में आएगी. अप्रैल वाली खेप में तीन की जगह 5 राफेल लड़ाकू विमान होंगे. नए विमानों को पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयरबेस पर तैनात किया जाएगा. चीन से लगती पूर्वी सीमा की निगरानी या जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल हाशिमारा बेस से आसानी से किया जा सकेगा.

क्यों गेम चेंजर हैं राफेल?
भारतीय वायुसेना के लिए राफेल लड़ाकू विमान गेमचेंजर माने जा रहे हैं. क्योंकि इनके आने से भारत को अपने पड़ोसियों के मुकाबले तकनीकी बढ़त भी मिली है और युद्ध की सूरत में एक ताकतवर लड़ाका भी. और राफेल ने इसका सबूत लद्दाख के आसमान में उड़ान भर के दे दिया था.

31 मार्च से शनि का राशि परिवर्तन, इन 6 राशियों को मिल सकती हैं खुशखबरी


धनु राशि और मीन राशि

अतीत के एक दौर की समाप्ति हो रही है और नया दौर शुरू होने वाला है। निजी और व्यवसाई की स्थितियों के मामले में शांतिपूर्ण माहौल रहेगा। व्यवसाय के क्षेत्र में कुछ मामलों में देरी होगी और कुछ लोग विरोध भी करेंगे। लेकिन उनका यह विरोध अस्थाई होगा। निजी और पारिवारिक मामलों में धैर्य से काम लें। परिवार के साथ छुट्टियां मनाने के लिए योजना बनाएंगे। शनि की कृपादृष्टि से आप कामयाब होंगे।


सिंह राशि और मेष राशि

शनि आपकी राशि मे गोचर कर रही हैं जिससे नए अवसरों और रचनात्मक कार्यों में संगल रहेंगे और अपनी प्रतिभा और क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। आपका शुभ अंक 21 और 23 है। शुभ रंग रॉयल ब्लू है। शनि के अष्टम भाव के स्वामी का द्वादश भाव में आना आपके लिए शुभ समाचार लाया है। आर्थिक चिंताएं खत्म होगी और रुकावटओं का नाश होगा। रुके हुए काम पूर्ण होने से मन काफी प्रसन्न रहेगा। आपको आने वाले दिनों में एक बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं।

मीन राशि और वृषभ राशि

कारोबारी महिलाएं महत्वपूर्ण सौदे सफलतापूर्वक कर पाएंगी। शनि की कृपा दृष्टि आप की राशि पर है जिससे आपके जीविका के क्षेत्र में काफी प्रगति होगी। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। मन अज्ञात भय से ग्रसित हो सकता है। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की बहुत आवश्यकता है। हर शनिवार को शनिदेव को तेल चढ़ाये।

5 बड़े ग्रहों का अप्रैल में राशि परिवर्तन, जानिए प्रभाव

Grah Rashi Parivartan 2021: अप्रैल महीने में शुक्र, गुरु, बुध, मंगल और सूर्य ग्रह अपनी राशि बदलेंगे। जिसका असर लोगों की लव, मैरिज से लेकर करियर लाइफ तक पर पड़ेगा।

Shukra, Mangal, Surya, Guru And Budh Rashi Parivartan 2021: ज्योतिष शास्त्र अनुसार ग्रहों का राशि परिवर्तन काफी अहम माना जाता है। क्योंकि ग्रह हमारे लाइफ पर प्रभाव डालते हैं। अप्रैल महीने में शुक्र, गुरु, बुध, मंगल और सूर्य ग्रह अपनी राशि बदलेंगे। जिसका असर लोगों की लव, मैरिज से लेकर करियर लाइफ तक पर पड़ेगा। जानिए कब कौन सा ग्रह अप्रैल में बदल रहा है राशि और आपके लिए क्या मिल रहे हैं संकेत, जानिए…

शुक्र: ये ग्रह व्यक्ति के जीवन में स्त्री, वाहन और धन सुख को प्रभावित करता है। इस ग्रह के मजबूत होने से जीवन में धन-धान्य की कमी नहीं रहती है। शुक्र का राशि परिवर्तन ज्योतिष की नजर में काफी महत्व रखता है। 10 अप्रैल को शुक्र मेष राशि में प्रवेश करने जा रहा है। इसके प्रभाव से वृषभ, कर्क, कन्या और मकर वालों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी हालांकि लव लाइफ में कुछ कष्टों का सामना करना पड़ सकता है।

गुरु: इस ग्रह का राशि परिवर्तन 6 अप्रैल को कुम्भ राशि में होने जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव मिथुन, धनु और मीन वालों पर पड़ेगा। इन राशि के जातकों को करियर में कुछ परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं। किसी दोस्त या रिश्तेदार से धोखा मिलने के आसार रहेंगे। वहीं गुरु का गोचर कन्या और कुंभ राशि के जातकों के लिए लाभकारी साबित होगा।

ममता के गढ़ में ज्योतिरादित्य सिंधिया

राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा ने बंगाल विधानसभा चुनाव के चौथे चरण के मतदान वाली सीटों के लिए स्टार प्रचारक बनाया है। यह पहला मौका है जब भाजपा ने उन्हें यह जिम्मा सौंपा है। कैलाश विजयवर्गीय भी स्टार प्रचारक हैं।

ग्वालियर  राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा ने बंगाल विधानसभा चुनाव के चौथे चरण के मतदान वाली सीटों के लिए स्टार प्रचारक बनाया है। यह पहला मौका है जब भाजपा ने उन्हें यह जिम्मा सौंपा है। इससे पहले मध्य प्रदेश से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद पटेल, गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा सहित कई दिग्गज वहां प्रचार अभियान में शामिल हो चुके हैं।

चौथे चरण में 47 विधानसभा सीटों पर 10 अप्रैल को मतदान होगा। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व राज्य प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय भी स्टार प्रचारक हैं।

सूत्रों का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया बंगाल में कांग्रेस की नीतियों पर प्रहार करेंगे। साथ ही कमजोर संगठन पर भी निशाना साध सकते हैं, जिससे कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा का मुद्दा फिर सामने आ सकता है।

दरअसल, ममता सरकार को घेरने के लिए भाजपा पहले से ही मुख्यमंत्री और गृह मंत्री सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं को भेजती रही है, लेकिन जिन सीटों पर कांग्रेस का प्रभाव माना जाता रहा है, वहां भी पार्टी जीत की संभावनाएं तलाश रही है। चूंकि बंगाल में चुनावी रण भाजपा बनाम टीएमसी हो चला है, तो भाजपा मतदाताओं के सामने सिंधिया के बहाने मध्यप्रदेश के सफल सियासी प्रयोग को रखना चाहती है।

इसकी दूसरी वजह यह भी है कि बंगाल में भाजपा के करीब 130 प्रत्याशी टीएमसी, कांग्रेस या वाम दलों से आए हैं। ऐसे में भाजपा मतदाताओं को भरोसा दिलाना चाहती है कि बाहर से आए नेता भी भाजपा में वैसे ही समरस होकर विकास को गति देते हैं जैसे मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक विधायक-मंत्री।

मध्यप्रदेश में अपने समर्थकों के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया मार्च, 2020 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे, जिसके चलते कांग्रेस की कमल नाथ सरकार गिरी और शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस साबित करने की कोशिश करती रही कि सिंधिया का कद कम हुआ है और भाजपा उनसे किए वादे से पीछे हटती रही है। इधर, भाजपा सियासत के ऐसे नए दौर में असीम संभावनाएं देखती है, जिसमें दूसरे दलों में असंतुष्ट दिग्गजों को भाजपा में लाया जाए, जिससे न केवल भाजपा का विस्तार हो, बल्कि विपक्षी दलों को झटका भी लगे। ऐसे में मामले में मध्यप्रदेश बड़ी प्रयोगशाला साबित हुआ।

भाजपा ने सारे समीकरणों को दरकिनार कर शिवराज कैबिनेट में सिंधिया समर्थकों को न केवल अच्छा-खासा मौका दिया, बल्कि विधानसभा की 28 सीटों में से 25 पर उपचुनाव में सिंधिया समर्थक उन सभी पूर्व विधायकों को उसी सीट पर टिकट दिया, जो अपनी विधायकी से इस्तीफा देकर भाजपा में आए थे।

आंकड़ों पर नजर डालें तो स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश में भाजपा के कुल विधायकों में से 20 फीसद से ज्यादा मूल रूप से भाजपा से जुड़े नहीं रहे हैं, वहीं कैबिनेट में ऐसे 40 फीसद से ज्यादा मंत्री हैं। भाजपा नेता पंकज चतुर्वेदी कहते हैं सिंधिया जी भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। जब-जब पार्टी ने जो दायित्व उन्हें दिया,उन्होंने निभाया है। अब बंगाल में पार्टी की मंशा के अनुरूप कार्य करेंगे।