शिवपुरी रूट पर दोड़ेगी इलेक्ट्रिक ट्रेन, सीआरएस ने निरीक्षण कर जांची गुणवत्ता

ग्वालियर । गुना-शिवपुरी से ग्वालियर रूट पर दौड़ने वाली ट्रेनें अब इलेक्ट्रिक इंजन के साथ दौड़ेंगी। इसके लिए रेलवे ने पूरी लाइन पर इलेक्ट्रिक डिवाइस लगाए जा चुके हैं। इन रूट का सीआरएस अरविंद कुमार जैन ने निरीक्षण कर मंगलवार को गुणवत्ता की जांच की। अभी तब इस रूट पर डीजल इंजन से रेल को चलाया जा रहा था जिसके कारण एक ओर यह प्रदूषण को बढावा दे रही थी वहीं इसके संचालन का खर्च भी अधिक आ रहा था।इलेक्ट्रिक रेल चलने से यात्रियों का ग्वालियर से शिवपुरी गुना जाने का समय बचेगा, इसके साथ ही रेलवे का ट्रेन संचालन में होने वाले खर्च में भी बचत होगी। 

रेलवे विभाग द्वारा शिवपुरी से ग्वालियर के लिए बनाए गए रेल मार्ग पर अभी तक डीजल इंजन से रेल का संचालन किया जा रहा था। इस रूट को इलेक्ट्रिक लाइन बनाने के लिए रेलवे ने कार्य प्रारंभ किया था जो कि पूर्ण हो चुका है। कार्य की गुणवत्ता को जांचने के लिए पश्चिमी क्षेत्र के रेल सेफ्टी सतर्कता आयुक्त अरविन्द कुमार जैन अरविंद कुमार जैन ने निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने 8 कोच वाली इलेक्ट्रिक रेल से इस मार्ग का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्हें इस रूट में जो खामियां मिली उसे उन्होंने दर्ज किया अब इस रेलवे बोर्ड को भेजा जाएगा जिससे इस रूट पर इलेक्ट्रिक रेलों का संचालन प्रारंभ किया जा सके।

मल्टी स्पेशियलटी में हादसे के बाद निरीक्षण करने पहुंचे ऊर्जा मंत्री

ग्वालियर । जेएस परिसर स्थित मल्टी स्पेशियलटी के आईसीयू में आग लगने के हादसे के बाद प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर बुधवार को मल्टी स्टपेशियलिटी व जय आरोग्य अस्पताल का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के अफसरों से आग लगने के कारणों को जाना। साथ ही उन्होंने मरीजों व उनके स्वजनों से भी बात की। लोगों ने जो समस्याएं मंत्री श्री तोमर को बताईं। उन्हें हल करने के निर्देश श्री तोमर ने अफसरों को दिए। तकरीबन एक घंटे तक वे अस्पताल में रहे। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं को देखा और उन्हें और सुधारने के निर्देश दिए। जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों को उपचार कराने के दौरान अधिक से अधिक सुविधा मिले और परेशानी न हो।

मुख्यमंत्री ने बांधवगढ़ में जंगल में लगाई कुर्सी-टेबिल, आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश पर किया मंथन

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को सुबह बांधवगढ़ के जंगल में कुर्सी-टेबिल लगाकर आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश को लेकर चिंतन-मंथन किया। मुख्यमंत्री उमरिया के प्रवास पर हैं। बांधवगढ़ से डगडउआ जाते समय ग्राम धमोखर में बैगा जनजाति के लोगों से मुख्यमंत्री ने संवाद भी किया। इस दौरान उन्होंने आदिवासियों की समस्याएं भी सुनी।

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को देर शाम बांधवगढ़ में वन और पर्यटन विभाग के अफसरों की बैठक बुलाई थी। जिसमें वाइल्ड लाइफ टूरिज्म को प्रमोट करने की रणनीति पर मंथन किया था। वे बुधवार को दोहपर 3 बजे उमरिया में आयोजित जनजातीय गौरव कार्यक्रम में शामिल होंगे।

मंगलवार को हुई बैठक में तय किया गया था कि बफर में सफर योजना के कम से कम 24 नए टूरिस्ट जोन बनाए जाएंगे। इससे करीब 10 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का फोकस एग्रो फॉरेस्ट्री को प्रोत्साहन देने पर ज्यादा है। इसके साथ ही सामुदायिक आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने आला अफसरों के साथ आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के तहत वनों से रोजगार के अवसर पैदा करने को लेकर भी चर्चा की। बैठक में वन मंत्री विजय शाह, खाद्य मंत्री बिसाहूलाल सिंह व अदिम जाति कल्याण मंत्री मीना सिंह के अलावा मुख्य रूप से मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस व वन विभाग के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल मौजूद रहे।

अहमद पटेल का निधन:1 अक्टूबर को कोरोना संक्रमित हुए थे, मोदी बोले- अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए याद किए जाएंगे

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गुजरात से राज्यसभा सांसद अहमद पटेल (71) का बुधवार तड़के निधन हो गया। पटेल 1 अक्टूबर को कोरोना संक्रमित हुए थे। उन्हें 15 अक्टूबर को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पटेल ने कोरोना संक्रमित होने की जानकारी देते हुए अपने सभी करीबियों और संपर्क में आने वाले लोगों से खुद को आइसोलेट करने और कोविड टेस्ट कराने की अपील की थी।

अहमद के बेटे फैजल ने ट्वीट में बताया,

‘बड़े दुख के साथ मैं यह बताना चाहता हूं कि मेरे पिता अहमद पटेल का बुधवार देर रात 3.30 बजे निधन हो गया है। करीब एक महीने पहले उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी और उनके शरीर के कई अंग काम करना बंद कर चुके थे, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। अल्लाह उन्हें जन्नत फरमाए।’ फैजल ने अपने सभी शुभचिंतकों से कोरोना गाइडलाइन का पालन करने की अपील की और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने को कहा है।

प्रधानमंत्री ने शोक जताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, ‘अहमद पटेल जी के निधन से दुखी हूं। उन्होंने कई साल सार्वजनिक जीवन में समाज के लिए काम किया। उन्हें अपने तेज दिमाग के लिए जाना जाता था। कांग्रेस को मजबूत करने के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे। मैंने उनके बेटे फैजल से बात की है। उनकी आत्मा को शांति मिले।’

राहुल गांधी ने कहा,

‘आज दुखद दिन है। अहमद पटेल कांग्रेस पार्टी के स्तंभ थे। वे हमेशा पार्टी के लिए जिए और कठिन वक्त में हमेशा पार्टी के साथ खड़े रहे। हमेशा उनकी कमी खलेगी।’

सोनिया का शोक संदेश

‘मैंने ऐसा सहयोगी खो दिया, जिसने अपनी पूरी जिंदगी कांग्रेस को समर्पित कर दी थी। उनकी विश्वसनीयता, काम के प्रति समर्पण, दूसरों की मदद करने जैसे गुण उन्हें दूसरों से अलग बनाते थे। उनकी क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती। उनके परिवार के साथ मेरी संवेदनाएं हैं।’

28 साल में सांसद बन गए थे

पटेल का जन्म 21 अगस्त 1949 को गुजरात के भरूच जिले के पिरामण गांव में हुआ था। वे 3 बार लोकसभा सांसद (1977 से 1989) और 4 बार राज्यसभा सांसद (1993 से 2020) रहे। उन्होंने पहला चुनाव 1977 में भरूच लोकसभा सीट से लड़ा था और 62 हजार 879 वोटों से जीते थे। तब उनकी उम्र सिर्फ 28 साल थी। 1980 में पटेल भरूच से ही 82 हजार 844 वोटों से और 1984 में 1 लाख 23 हजार 69 वोटों से जीत दर्ज की थी।

सोनिया के राजनीतिक सलाहकार थे

पटेल जनवरी से सितंबर 1985 तक तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के संसदीय सचिव रहे। 2001 से सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार थे। जनवरी 1986 में वे गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे। 1977 से 1982 तक यूथ कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। सितंबर 1983 से दिसंबर 1984 तक वे कांग्रेस के जॉइंट सेक्रेटरी रहे।

शिवराज सिंह और नरोत्तम मिश्रा में कहीं न कहीं सामंजस्य की कमी है 

भोपाल  लगभग एक सप्ताह पहले की बात है, जब देश के अलग अलग राज्यों में लव जिहाद पर कानून के मसले पर मंथन का दौर अपने चरम पर था। मध्यप्रदेश की गिनती इस कानून के समर्थक राज्यों में थी, लेकिन यह अन्य राज्यों की अपेक्षा सिर्फ इसलिए अलग था क्योंकि यहां पर कानून से जुड़े वक्तव्य, उसके प्रारूप और उसकी जरूरत से जुड़े तर्क सीएम हाउस से नहीं बल्कि गृहमंत्री के बंगले से प्रसारित हो रहे थे। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा पहले सामने आकर एमपी में कानून बनाने का ऐलान करते हैं, दूसरे दिन इसके प्रारूप पर चर्चा करते हैं, और तीसरी दिन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका प्रारूप फाइनल भी कर देते हैं।

इस दौरान कहीं से कहीं तक ये खबर सामने भी नहीं आई, कि संबंधित कानून पर कैबिनेट में मंथन हुआ हो, या सीएम शिवराज के साथ गृहमंत्री ने कोई विशेष चर्चा की हो। यहां खुद नरोत्तम ही प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय मीडिया की पिच पर अकेले खेलते नजर आए। यह तस्वीर जब सामने आई, तो प्रदेश में सीएम के रसूख पर ही सवाल उठने लगे, जिसके बाद सीएम हाउस से खबर आई, कि अति व्यस्तता के कारण सीएम शिवराज इस विषय में ज्यादा विचार नहीं कर सके, अब वह अपने स्तर पर कानून की जरूरत पर मंथन करेंगे और इसका फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। 

सीएम हाउस के बेहद ही आंतरिक सूत्रों की मानें, तो लव जिहाद पर नरोत्तम मिश्रा का यह स्टैंड सीएम शिवराज को काफी नागवार गुजरा, लेकिन नरोत्तम पर पार्टी हाईकमान की सुदृष्टि उन्हें यह नाराजगी जाहिर करने से रोके रही। सूत्रों का तो यहां तक कहना है, कि छपास की इस दौड़ में नरोत्तम को पछाड़ने के लिए सीएम शिवराज ने एकाएक गौ कैबिनेट के गठन का ऐलान कर दिया, हालांकि इस खबर में कितनी सच्चाई है यह तो सीएम ही जानें। 

अब जरा आजकल सामने आ रही तस्वीरों पर गौर कीजिए, किस तरह एक वेब सीरिज को लेकर मध्यप्रदेश सरकार खासकर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का रुख भोपाल से लेकर दिल्ली की मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। मीडिया का आकर्षण हासिल करने में महारथी नरोत्तम ने संघ और बीजेपी की लाइन को आगे बढ़ाते हुए इस वेब सीरिज को लेकर ऐसा माहौल तैयार कर दिया, जो अमूमन मध्यप्रदेश के संदर्भ में कभी भी राष्ट्रीय परिदृश्य में नजर नहीं आया, और इस गंभीर मसले को लेकर भी नरोत्तम मीडिया के हीरो बने हुए हैं। 

अंत में कहा जा सकता है किकई बातें ऐसी होती हैं, जो न तो खुलकर की जाती और न उन्हें सार्वजनिक स्तर पर लिखा जाता हैं, लेकिन उनके बारे में पता सबको रहता है। पिछले लगभग 5 सालों से मध्यप्रदेश में एक बहस के साथ यह मसला हर किसी की जुबां पर था, और सीएम शिवराज द्वारा खुद के पास जनसंपर्क मंत्रालय रखना इस बहस को खत्म करने की ही कोशिश था। लेकिन इसके बाद भी मीडिया के हीरो अभी भी नरोत्तम ही बने हुए हैं, जो प्रदेश के मुखिया को काफी हद तक रास नहीं आ रहा।

Mustard oil: स्वास्थ्य के लिए कितना लाभदायक है सरसों का तेल, जानें सरसों के तेल के फायदे और नुकसान!



Mustard oil: सरसों के तेल को किचन से लेकर शरीर में लगाने तक के लिए इस्तेमाल किया जाता है. सरसों का तेल एक आम तेल है. जिसे खाना पकाने में इस्तेमाल किया जाता है. सरसों के तेल को हेल्थ और ब्यूटी दोनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. कई जगह पर सरसों के तेल को कड़वा तेल भी कहा जाता है. सरसों का तेल सेहत और सुंदरता दोनों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. सरसों के तेल में बहुत से ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर में घाव भरने ,जोड़ों के दर्द या कान दर्द जैसी चीजों में बहुत मददगार माना जाता है. सरसों के तेल को आयुर्वेद और कई दवाओं में भी इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन सरसों के तेल के अधिक इस्तेमाल के कई नुकसान भी हो सकते हैं. सरसों के तेल को जहां एक तरफ सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. तो वही दूसरी तरफ इसके कुछ नुकसान भी हैं. सरसों के तेल की मालिश करने से शरीर के दर्द में राहत पाई जा सकती है. तो दूसरी तरफ ज्यादा मालिश करने से शरीर काला भी पड़ने लगता है. सरसों के तेल को स्किन ग्लो के लिए अच्छा माना जाता है. लेकिन जिनको इससे एलर्जी है, उन्हें इससे बचना चाहिए. तो चलिए आज हम आपको सरसों के तेल के फायदे औऱ नुकसान के बारे मे बताते हैं. 

सरसों के तेल के फायदेंः (Health Benefits Of Mustard oil)

1. सरसों के तेल की लगातार मालिश करने से जोड़ों का दर्द ठीक हो सकता है. इससे शरीर के अकड़न को भी दूर किया जा सकता है.


सरसों के तेल को स्किन ग्लो के लिए अच्छा माना जाता है. लेकिन जिनको इससे एलर्जी है, उन्हें इससे बचना चाहिए. 

2. सरसों के तेल को मसूड़ों के लिए लाभदायक माना जाता है. सरसों के तेल में नमक डालकर मसूड़ों पर मालिश करने से मसूड़ों का दर्द और दांतों को सफेद बनाया जा सकता है. 

3. सरसों के तेल का इस्तेमाल करने से फंगल संक्रमण के खतरे से बचा जा सकता है. सरसों के तेल में  एलिल आइसोथियोसाइनेट नामक एक तत्व पाया जाता है. जो आपको फंगल संक्रमण के खतरे से बचाने में मदद कर सकता है.

4. सरसों के तेल को पाचन और खांसी-जुकाम में भी मददगार माना जाता है. सरसों के तेल से बने खाने का सेवन करने से गैस अपच की समस्या से बचा जा सकता है.

सरसों के तेल के नुकसानः (Side Effects Of Mustard oil)

1. सरसों के तेल की लंबे समय तक मालिश करने से शरीर काला बड़ सकता है. किसी-किसी को इससे शरीर में दाने भी निकल सकते हैं. 

2. कई लोगों को सरसों के तेल का सेवन करने से राइनाइटिस हो सकता है. जिससे बलग़म की झिल्ली में सूजन हो जाती है. खांसना, छींकना, भरी हुई नाक, नाक से पानी बहाना आदि समस्याएं हो सकती हैं. 

3. कुछ लोगों को सरसों के तेल से एलर्जी होती है. जिसके कारण शरीर में सरसों का तेल लगते ही उन्हें खुजली, सूजन की समस्या हो सकती है. इसलिए जिन लोगों को सरसों के तेल से एलर्जी है उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए.

4. गर्भवती महिलाओं को सरसों के तेल का ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए. क्योंकि सरसों के तेल में कुछ ऐसे रासायनिक यौगिक होते हैं. जो पूरी तरह से शिशु के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. 

आज है तुलसी विवाह और देवउठनी एकादशी व्रत, जानें पूजा का समय और विधि

देवउठनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के स्वरूप शालीग्राम का देवी तुलसी (Tulsi) से विवाह होने की परंपरा भी है. माना जाता है कि जो भक्त देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का अनुष्ठान करता है उसे कन्यादान के बराबर पुण्य मिलता है.

श्राप की मुक्ति के लिए भगवान ने शालीग्राम पत्थर के रूप में अवतार लिया और तुलसी से विवाह कर लिया.


Tulsi Vivah and Dev Uthani Ekadashi: आज तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) और देवउठनी एकादशी है. कहते हैं कि कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रीहरि चतुर्मास की निद्रा से जागते हैं, इसीलिए इस एकादशी को देवउठनी एकादशी भी कहते हैं. इस दिन से ही हिन्दू धर्म में शुभ कार्य जैसे विवाह (Marriage) आदि शुरू हो जाते हैं. देवउठनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु के स्वरूप शालीग्राम का देवी तुलसी से विवाह होने की परंपरा भी है. माना जाता है कि जो भक्त देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का अनुष्ठान करता है उसे कन्यादान के बराबर पुण्य मिलता है. वहीं एकादशी व्रत को लेकर मान्यता है कि साल के सभी 24 एकादशी व्रत करने पर लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता तुलसी ने भगवान विष्णु को नाराज होकर श्राम दे दिया था कि तुम काला पत्थर बन जाओगे. इसी श्राप की मुक्ति के लिए भगवान ने शालीग्राम पत्थर के रूप में अवतार लिया और तुलसी से विवाह कर लिया. वहीं तुलसी को माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है. हालांकि कई लोग तुलसी विवाह एकादशी को करते है तो कहीं द्वादशी के दिन तुलसी विवाह होता है. ऐसे में एकादशी और द्वादशी दोनों तिथियों का समय तुलसी विवाह के लिए तय किया गया है.

एकादशी तिथि और तुलसी विवाह का समय-
एकादशी तिथि प्रारंभ- 25 नवंबर 2020, बुधवार को सुबह 2.42 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त- 26 नवंबर 2020, गुरुवार को सुबह 5.10 बजे तक

द्वादशी तिथि प्रारंभ- 26 नवंबर 2020, गुरुवार को सुबह 5.10 बजे से
द्वादशी तिथि समाप्त- 27 नवंबर 2020, शुक्रवार को सुबह 7.46 बजे तक

एकादशी व्रत और पूजा विधि-


-एकादशी व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करें और व्रत का संकल्प लें.
-इसके बाद भगवान विष्णु की अराधना करें.
-भगवान विष्णु के सामने दीप-धूप जलाएं. फिर उन्हें फल, फूल और भोग अर्पित करें.
-मान्यता है कि एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी जरूर अर्पित करनी चाहिए.
-शाम को विष्णु जी की अराधना करते हुए विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें.
-एकादशी के दिन पूर्व संध्या को व्रती को सिर्फ सात्विक भोजन करना चाहिए.
-एकादशी के दिन व्रत के दौरान अन्न का सेवन नहीं किया जाता है.
-एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित है.
-एकादशी का व्रत खोलने के बाद ब्राहम्णों को दान-दक्षिणा जरूर दें.