सिब्बल के बाद कांग्रेस पर भड़के गुलाम नबी आजाद, कहा- निचले स्तर के पार्टी वर्करों से हमारा कनेक्शन टूट गया

नई दिल्ली
कांग्रेस में अंतर्कलह अब खुलकर सामने आ रही है। बिहार विधानसभा चुनावों के बाद से ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खुलकर कांग्रेस लीडरशिप पर आवाज उठा रहे हैं। कपिल सिब्बल ने जब खुलकर इसका विरोध किया तो लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जैसे दिग्गज नेताओं ने सिब्बल को आड़े हाथों ले लियाअब गुलाम नबी आजाद  ने पार्टी के काम करने के तौर-तरीकों पर सवाल उठाया है।

गुलाब नबी आजाद ने बोला हमला


गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हमारे लोगों का ब्लॉक स्तर पर, जिला स्तर पर लोगों के साथ कनेक्शन टूट गया है। जब कोई पदाधिकारी हमारी पार्टी में बनता है तो वो लेटर पैड छाप देता है, विजिटिंग कार्ड बना देता है, वो समझता है बस मेरा काम खत्म हो गया, काम तो उस समय से शुरू होना चाहिए। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि चुनाव 5-सितारा होटल में बैठकर नहीं जीते जाते। आज नेताओं के साथ समस्या यह है कि अगर उन्हें पार्टी का टिकट मिलता है, तो वे पहले 5-सितारा होटल बुक करते हैं। अगर कहीं कोई उबड़-खाबड़ सड़क है तो वे वहां नहीं जाएंगे। जब तक ये कल्चर हम नहीं बदलेंगे, हम चुनाव नहीं जीत सकते।

गुलाम नबी आजाद ने बोला शेर

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हम सभी नुकसान के बारे में चिंतित हैं, खासकर बिहार और उपचुनाव परिणामों के बारे में। मैं नुकसान के लिए नेतृत्व को दोष नहीं देता हूं। क्योंकि पार्टी के बड़े नेताओं का जमीनी स्तर पर संपर्क टूट गया है। ब्लॉग लेवल पर, जिला स्तर पर कार्यकर्ताओं का संबंध लोगों से टूट गया है। आदमी को पार्टी से इश्क होना चाहिए। गुलाम नबी आजाद ने शेर सुनाते हुए कहा कि ये इश्क़ नहीं आसां इतना ही समझ लीजिए, इक आग का दरिया है और डूब के जाना है।

पहले ढांचा खड़ा करना होगा, फिर कोई भी नेता हो चलेगा: आजाद

आजाद ने कहा, ‘हमारा ढांचा कमजोर है, हमें ढांचा पहले खड़ा करना पड़ेगा। फिर उसमें कोई भी नेता हो चलेगा। सिर्फ नेता बदलने से आप कहेंगे कि पार्टी बदल जाएगी, बिहार आएगा, मध्य प्रदेश आएगा, उत्तर प्रदेश आएगा, नहीं वो सिस्टम से बदलेगा।’ आजाद ने कहा कि हमारे लोगों का ब्लॉक स्तर पर, जिला स्तर पर लोगों के साथ कनेक्शन टूट गया है। जब कोई पदाधिकारी हमारी पार्टी में बनता है तो वो लेटर पैड छाप देता है, विजिटिंग कार्ड बना देता है, वो समझता है बस मेरा काम ख़त्म हो गया, काम तो उस समय से शुरू होना चाहिए।
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कपिल सिब्बल की नाराजगी

इससे पहले कपिल सिब्बल ने एक इंटरव्यू (Kapil Sibbal Interview) के दौरान कहा, ‘दिक्कत ये है कि राहुल गांधी डेढ़ साल पहले यह बात साफ कर चुके हैं कि वे अब कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं बनना चाहते। उन्होंने यह भी कहा था कि मैं नहीं चाहता कि गांधी परिवार का कोई भी व्यक्ति उस पद पर काबिज हो। इस बात के डेढ़ साल बीत जाने के बाद मैं ये पूछता हूं कि कोई राष्ट्रीय पार्टी इतने लंबे समय तक अपने अध्यक्ष के बिना कैसे काम कर सकती है।’ सिब्बल ने कहा कि मैंने पार्टी के भीतर आवाज उठाई थी। हमने अगस्त में चिट्ठी भी लिखी। लेकिन किसी ने हमसे बात नहीं की। मैं जानना चाहता हूं कि डेढ़ साल बाद भी हमारा अध्यक्ष नहीं है। कार्यकर्ता अपनी समस्या लेकर किसके पास जाएं।

चिट्ठी कांड से भी नहीं पड़ा कोई फर्क

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्होंने जुलाई महीने में संसदीय समूह की मीटिंग में यह मुद्दा उठाया था। उसके बाद 23 नेताओं ने अगस्त में कांग्रेस प्रेजिडेंट को चिट्ठी लिखी, लेकिन कोई चर्चा नहीं हुई, हमसे किसी ने संपर्क नहीं किया। सिब्बल ने बिहार विधानसभा चुनाव और कुछ राज्यों में उपचुनावों में कांग्रेस के बेहद खराब प्रदर्शन का मुद्दा उठाया तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी और दिल्ली कांग्रेस प्रमुख अनिल चौधरी हमलावर हो गए। गहलोत ने ट्वीट किया, ‘कपिल सिब्बल को हमारे आंतरिक मसलों की मीडिया में चर्चा की कोई जरूरत नहीं थी। इसने देशभर में पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को आहत किया है।’

यहां से शुरू हुआ था पूरा मामला

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही पार्टी के अंदर अंर्तकलह की शुरुआत हो गई थी। उसके बाद ये मामला तब ज्यादा गरमा गया जब कांग्रेस प्रवक्ता संजय झा ने खुलकर कहा कि कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी आलाकमान से नाराजगी जाहिर की है। तब कांग्रेस ने इस बात को सिरे से नकार दिया था। उसके बाद गुलाम नबी आजाद का एक पत्र सार्वजनिक हो गया। इसी के बाद से ही कांग्रेस में हलचल पैदा हो गई। कांग्रेस के इन नेताओं की शिकायत थी कि पार्टी को एक्टिव अध्यक्ष मिलना चाहिए ताकि नए ताकत के साथ कांग्रेस उभरे। लेकिन गुलाम नबी आजाद को पार्टी से साइड लाइन कर दिया गया। संजय झा को भी कांग्रेस ने निष्काषित कर दिया गया था।

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