मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का निधन, लखनऊ में ली अंतिम सांस

लखनऊ: राजनीति में आज शोक की लहर दौड़ गयी. अचानक मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन के निधन की खबर ने सभी को शोकाकुल कर दिया. लालजी टंडन भाजपा के वरिष्ठतम नेताओ में से एक थे और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बेहद करीबी नेता माने जाते थे. टंडन का आज सुबह 5:35 मिनट पर निधन हो गया. लखनऊ के मेंदाता में उन्होंने अंतिम सांस ली.

85 वर्ष के थे लालजी टंडन

85 वर्षीय लालजी टंडन का लंबे समय से लखनऊ के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा था. टंडन को 11 जून को सांस लेने में तकलीफ और बुखार के चलते मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लिवर में दिक्कत होने की वजह से 14 जून को इमरजेंसी ऑपरेशन किया गया था. फिर उनकी हालत नाजुक हो गई. उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालजी टंडन के निधन पर दुख व्यक्त किया. पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा, “लालजी टंडन को उनकी समाज सेवा के लिए याद किया जाएगा. उन्होंने उत्तर प्रदेश में बीजेपी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई. वह जनता की भलाई के लिए काम करने वाले नेता थे. वह कानूनी मामलों के जानकार थे. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी लालजी टंडन को श्रद्धांजलि दी है और उनके योगदान को याद किया.

एफआरवी पर हमला करने वालाें की तलाश में दबिश, आरोपी गायब

ग्वालियर। गुठीना गांव में पुलिस की एफआरवी पर हमला करने वाले आराेपिताें की तलाश में पुलिस पार्टी ने गांव के साथ ही संभावित ठिकानाें पर भी दबिश दी है। हालांकि आराेपित अभी हाथ नहीं लगे हैं। पुलिस रिश्तेदाराें के जरिए अब हमलावराें तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। आराेपिताें के माेबाइल भी ट्रेस किए जा रहे हैं, जिससे उनकाे सीमा से बाहर निकलने से पहले पकड़ा जा सके।

गुठीना गांव में दो पक्षों के बीच झगड़ा होने की सूचना सोमवार रात 100 नंबर डायल कर दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची तो पता चला बालकिशन पुत्र सुमेर सिंह माहौर का गांव के ही ज्ञान सिंह, अशोक, कल्लू व राजू कटारे से झगड़ा हुआ था। झगड़े में आरोपितों में बालकिशन की मारपीट की थी। बालकिशन को बचाने के लिए आए पिता सुमेर सिंह व मां प्रेमा बाई और भाई की भी मारपीट की गई है। एफआरबी में तैनात आरक्षक राजेश शर्मा घायलों को थाने लेकर आ रहा था। इसी बीच कल्लू जाट, पप्पू ने एफआरबी को रोककर घायलों को उतारने का प्रयास किया। जब एफआरबी में तैनात जवानों ने घायलों को बचाया तो हमलावरों ने गाड़ी की तोड़फोड़ कर दी। किसी तरह पायलट एफआरबी को थाने लेकर पहुंचा। महाराजपुरा थाना पुलिस ने बालकिशन की रिपोर्ट पर ज्ञान सिंह व उसके साथियों के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कर लिया है। दूसरा प्रकरण आरक्षक राजेश शर्मा की रिपोर्ट पर एफआरबी की तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ दर्ज की गई है। पुलिस हमलावरों की तलाश कर रही है।

शीतकालीन सत्र को लेकर संशय:विधानसभा का सत्र बुलाएं या नहीं मंत्री के पास पहुंची फाइल

विधानसभा के शीतकालीन सत्र को लेकर अभी संशय की स्थिति है। हालांकि संसदीय कार्य विभाग ने इस संबंंध में कार्यवाही शुरू कर दी है। संसदीय कार्य विभाग ने सत्र को लेकर फाइल विभागीय मंत्री के पास भेजी है।

सत्र कब होना है, कितने दिन का होना है या अभी नहीं होना है, यह तय करने के लिए ही फाइल भेजी गई है। इसमें कहा गया है कि आगामी सत्र में नए चुने गए विधायकों को शपथ दिलाना है और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव कराना है। सत्र और तारीख के संबंध में अंतिम फैसला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लेंगे। सूत्रों के अनुसार 21 से 24 दिसंबर तक 4 दिवसीय सत्र बुलाया जा सकता है।

टल भी सकता है सत्र
कोरोना की स्थिति को देखते हुए संसद का शीतकालीन सत्र स्थगित कर दिया गया है। मप्र विधानसभा के आगामी सत्र को लेकर भी यह संशय है क्योंकि कोरोना के कारण पिछला सत्र एक दिन में ही हो गया। इससे पहले एक सत्र कोरोना की वजह से ही निरस्त कर दिया गया था।

दो बार टल चुका है चुनाव
अभी रामेश्वर शर्मा प्रोटेम स्पीकर हैं। वे सबसे लंबे समय तक प्रोटेम स्पीकर के पद पर रहने वाले नेता हैं। जगदीश देवड़ा ने मंत्री बनने पर प्रोटेम स्पीकर पद से इस्तीफा दिया था, उसके बाद 2 जुलाई से शर्मा यह पद संभाल रहे हैं।

मूली देखकर खुश हो जाते हैं आंतों के गुड बैक्टीरिया, जानें समय के अनुसार मूली खाने का सही तरीका

मूली सर्दियों में की सबसे लोकप्रिय सब्जियों में से एक है। क्योंकि इस सब्जी को सलाद के रूप में भी खाया जाता है, पूड़ी-पराठे में फिलर के रूप में उपयोग किया जाता है और इसकी सब्जी भी उतने ही चाव से खाई जाती है। आपको बता दें कि आप मूली किसी भी रूप में खाइए, इसे खाने के बाद आपको जितनी खुशी मिलती है, उससे कहीं ज्यादा खुशी मिलती है, आपकी आंतों में रहनेवाले गुड बैक्टीरिया को! जानिए क्यों है ऐसा…

कचरे की सफाई करे
-भोजन खाने और पाचन क्रिया के दौरान हमारे शरीर में की तरह के टॉक्सिक एसिड यानी विषैले तत्व जमा हो जाते हैं। इनमें कुछ तत्व वे होते हैं, जो हमारे द्वारा खाए गए भोजन के जरिए हमारे शरीर में जाते हैं, जैसे प्रिजर्वेटिव्स, पाउडर से पकाए गए फलों के छिलके और रेशे या खाने में उपयोग होनेवाले कैमिकल युक्त रंग इत्यादि।

जबकि कुछ विषैले पदार्थ भोजन को पचाने की प्रक्रिया के दौरान हमारे शरीर के अंदर उत्पन्न होते हैं। हालांकि गैस, डकार, मल और मूत्र के माध्यम से इनमें से ज्यादातर टॉक्सिक एसिड्स बाहर निकल जाते हैं। लेकिन कुछ आंतों और लिवर में रह जाते हैं। मूली इन सभी विषैले तत्वों का सफाया करती

जब शरीर में जमा ये टॉक्सिक एसिड खत्म होते हैं तो आंतों में रहनेवाले गुड बैक्टीरिया को अपनी वृद्धि करने के लिए पर्याप्त अवसर मिलता है। इससे आपके शरी के गुड बैक्टीरिया खुश रहते हैं और भोजन को तेजी से और सही तरीके से पचाने का कार्य कर पाते हैं। परिणामस्वरूप आपकी सेहत अच्छी रहती है।

कब्ज की समस्या को दूर करे

-अपने डिटॉक्सिफिकेशन के गुणों के कारण मूली शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य करती है। इसलिए जिन लोगों को कब्ज की शिकायत रहती है, उन्हें मूली का अलग-अलग रूपों में और अधिक उपयोग करना चाहिए।

इन स्थितियों में ना खाएं मूली

-हालांकि मूली सर्दियों की सब्जी है और रेचक गुणों से युक्त है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति सर्दी-जुकाम की स्थिति में मूली खा ले तो यह उसकी समस्या को कई गुना बढ़ा सकती है।

जबकि अगर स्वस्थ होने की स्थिति में आप मूली का सेवन करेंगे तो यह आपको सर्दी-जुकाम से बचाने का काम करती है। इसलिए सिर दर्द, सर्दी-जुकाम, खांसी, सीने में भारीपन, छाती में कफ जमा होना और बुखार की स्थिति में कच्ची मूली का सेवन नहीं करना चाहिए।

-हालांकि इन स्थितियों में मूली की सब्जी और मूली के पत्तों की भाजी का सेवन आप निश्चिंत होकर कर सकते हैं। बस सलाद के रूप में मूली नहीं खानी है। 

ऐसे खाया तो दर्द बढ़ा सकती है मूली
-मूली शरीर के लिए कई तरह के दर्द दूर करने का कार्य करती है। लेकिन यदि आप रात के समय या सुबह खाली पेट कच्ची मूली खाते हैं तो आपको पेट दर्द या शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द का सामना करना पड़ सकता है।

दरअसल, मूली फाइबर युक्त होते हुए भी पाचन में भारी होती है। इसलिए इसे पचाने के दौरान शरीर में अधिक मात्रा में वायु की वृद्धि होती है। यदि आप रात में मूली खाकर सोएंगे तो किसी भी समय तेज पेट दर्द, सिरदर्द इत्यादि के कारण आपकी नींद टूट सकती है।

-जिन लोगों को पहले से ही दर्द की समस्या रहती है, उन्हें रात के समय भूल से भी कच्ची मूली का सेवन नहीं करना चाहिए। बेहतर होगा कि मूली के पत्तों की भुज्जी के अतिरिक्त मूली की सब्जी या पराठे का उपयोग भी रात के समय यानी डिनर में ना करें। 

ओसामा के अंत पर ओबामा ने खोले राज, ‘पाकिस्तान सेना से जुड़े थे तालिबान, अलकायदा के तार, जो बाइडेन थे ऐक्शन के खिलाफ’

वॉशिंगटन
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की नई किताब ‘अ प्रॉमिज्ड लैंड’ ने इन दिनों सिर्फ अमेरिका ही नहीं, दुनिया कई देशों की राजनीति में हलचल मचा रखी है। इस किताब के एक हिस्से में ओबामा ने एबटाबाद में आलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के ठिकाने पर छापा मारने के अभियान के बारे में भी कई खुलासे किए हैं। ओबामा ने बताया है कि उन्होंने इसमें पाकिस्तान को शामिल करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि यह ‘खुला रहस्य’ था कि पाकिस्तान की सेना, खासकर उसकी खुफिया सेवा में कुछ तत्वों के तालिबान और शायद अलकायदा से भी संबंध थे और वे कई बार अफगानिस्तान और भारत के खिलाफ सामरिक पूंजी के तौर पर इनका इस्तेमाल करते थे।

2011 का हमला
ओबामा ने ‘अ प्रॉमिज्ड लैंड’ नाम की अपनी किताब में राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल में एबटाबाद में मारे गए छापे की जानकारी दी है। अमेरिकी कमांडो के इस छापे में दुनिया का सर्वाधिक वांछित आतंकवादी लादेन 2 मई, 2011 को मारा गया था। उन्होंने बताया कि इस अत्यधिक खुफिया अभियान का तत्कालीन रक्षा मंत्री रोबर्ट गेट्स और पूर्व उपराष्ट्रपति और मौजूदा निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने विरोध किया था।

अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति ने बताया कि एबटाबाद में पाकिस्तानी सैन्य छावनी के बाहर एक पनाहगाह में लादेन के रहने की बात स्पष्ट हो जाने के बाद अलकायदा प्रमुख को मारने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि इस अभियान की गोपनीयता बनाए रखने की आवश्यकता ने चुनौती बढ़ा दी थी।

पाक को शामिल नहीं कर सकतेथे’
ओबामा ने कहा, ‘हम जानते थे कि यदि किसी को बिन लादेन के बारे में हमारे कदम की जरा सी भी भनक लग गई, तो मौका हमारे हाथ से चला जाएगा, इसी लिए पूरी संघीय सरकार में केवल कुछ ही लोगों को अभियान की योजना की जानकारी दी गई थी।’ उन्होंने लिखा, ‘हमारे सामने एक और रुकावट थी- हम भले ही कोई भी विकल्प चुनते, उसमें पाकिस्तान को शामिल नहीं किया जा सकता था।’

पाक सेना, खुफिया सेवा के अलकायदा से संबंध’
ओबामा ने कहा, ‘हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने आतंकवाद विरोधी कई अभियानों में हमारे साथ सहयोग किया और अफगानिस्तान में हमारे बलों के लिए अहम आपूर्ति मार्ग मुहैया कराया, लेकिन यह खुला रहस्य था कि पाकिस्तान की सेना, खासकर उसकी खुफिया सेवाओं में कुछ तत्वों के तालिबान और संभवत: अलकायदा से भी संबंध थे। वे यह सुनिश्चित करने के लिए सामरिक पूंजी के तौर पर कभी-कभी उनका इस्तेमाल करते थे कि अफगान सरकार कमजोर बनी रहे और अफगानिस्तान पाकिस्तान के सबसे बड़े दुश्मन भारत के नजदीक न आने पाए।’

अभियान की जानकारी हो सकती थी लीक’
उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान की सेना एबटाबाद परिसर से कुछ ही मील की दूरी पर थी, जिसके कारण इस बात की संभावना बढ़ गई थी कि पाकिस्तानियों को कुछ भी बताने से अभियान की जानकारी लीक हो सकती है। ओबामा ने लिखा कि वे एबटाबाद में भले ही कोई भी विकल्प चुनते, उन्हें सबसे खतरनाक तरीके से अपने सहयोगी के क्षेत्र में बिना अनुमति घुसना पड़ता और इससे राजनयिक संबंध भी दाव पर लगे थे और इसने जटिलताएं भी बढ़ा दी थीं।

अंतिम चरणों में दो विकल्पों पर विचार किया गया कि हवाई हमला किया जाए या किसी विशेष मिशन को अधिकृत किया जाए, जिसके तहत एक टीम हेलिकॉप्टर से चोरी-छुपे पाकिस्तान जाएगी, परिसर पर छापा मारेगी और पाकिस्तानी पुलिस या सेना के प्रतिक्रिया देने से पहले वहां से निकल आएगी। ओबामा और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने दूसरे विकल्प को चुना।

जरदारी ने दिया था आश्वासन
ओबामा ने कहा कि इस अभियान के बाद उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई लोगों से फोन पर बात की, जिनमें से उनके लिए सबसे मुश्किल पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से बात करना था, जिन्हें पाकिस्तान की संप्रभुता के हनन के कारण आलोचनाओं का शिकार होना पड़ता। उन्होंने कहा, ‘हालांकि मैंने जब उनसे बात की, तो उन्होंने बधाई दी और सहयोग देने का आश्वासन दिया।’

POK खाली कराने के लिए संघ ने शुरू की मुहिम, फारूक अब्दुल्ला पर भड़के इंद्रेश कुमार ने कहा- हम पर रहम कीजिए, चीन ही चले जाइए

नई दिल्ली
आरएसएस नेता और राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान को खाली कराने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाने के मकसद से अभियान शुरू किया है। उन्होंने आर्टिकल 370 को खत्म किए जाने पर गुपकार गठबंधन के नेताओं फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के बयानों को लेकर भी उन पर हमला किया। इतना ही नहीं, संघ नेता ने फारूक अब्दुल्ला को चीन चले जाने की सलाह दे दी।

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के एक कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार ने कहा, ‘अब पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान से आवाज उठेगी। वे जम्मू और कश्मीर का हिस्सा हैं लिहाजा उन्हें भारत में मिलना चाहिए। पीओके, गिलगित-बाल्तिस्तान का पाकिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए आज से एक अभियान शुरू होगा। पाकिस्तान को इन जगहों से अपनी सेनाओं को हटाना होगा।’

संघ नेता ने जम्मू-कश्मीर में चीन की मदद से आर्टिकल 370 की बहाली की इच्छा जताने वाले फारूक अब्दुल्ला पर तीखा हमला करते हुए कहा, ‘चलिए एक प्रस्ताव पास करके उनसे कहते हैं कि प्लीज चीन चले जाइए, हम पर रहम कीजिए।’

इंद्रेश कुमार ने तिरंगे को लेकर पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती की विवादित टिप्पणी को लेकर भी उन पर हमला बोला। संघ नेता ने कहा कि मुफ्ती को जहां अच्छा लगे वहां चली जाएं। जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा खत्म किए जाने पर इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत 70 सालों बाद एक राष्ट्र बना है। एक राष्ट्र, एक ध्वज, एक संविधान, एक नागरिकता, एक नारा और एक राष्ट्रगान।

जो बाइडेन ने भारत को लेकर दिया पहला बयान, PM मोदी को लेकर कही ये बड़ी बात

वॉशिंगटन: अमेरिका (America)  के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) ने कहा है कि वह कोविड-19 (COVID-19) महामारी से पार पाने, वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy)  को पटरी पर लाने के लिए कदम उठाने और एक सुरक्षित एवं समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने सहित सभी साझा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) के साथ मिल कर काम करने के इच्छुक हैं.

बाइडेन के सत्ता हस्तांतरण दल ने यह जानकारी दी.

देश में तीन नंवबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली बातचीत थी.

बाइडेन (Joe Biden) और निर्वाचित उप राष्ट्रपति कमला हैरिस (Kamala Harris) के सत्ता हस्तांतरण दल ने बताया, ‘निर्वाचित राष्ट्रपति ने कहा है कि वह कोविड-19 महामारी से पार पाने और भविष्य में आने वाले स्वास्थ्य संकटों से बचाव की तैयारी करने, जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने, वैश्विक अर्थव्यवस्था की पुनर्बहाली के लिए कदम उठाने, देश में तथा विदेशों में लोकतंत्र को मजबूत करने और एक सुरक्षित एवं समृद्ध हिंद- प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने सहित सभी साझा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मिल कर काम करने के इच्छुक हैं.’

दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद जारी बयान के अनुसार बाइडन ने मोदी की बधाई के लिए उनका आभार व्यक्त किया और दक्षिण एशियाई मूल की पहली उपराष्ट्रपति के साथ मिल कर अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करने और उसे विस्तार देने की इच्छा व्यक्त की है.

साझा प्राथमिकताओं और चुनौतियों पर चर्चा
इससे पहले मंगलवार को मोदी ने ट्वीट करके कहा कि अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन से फोन पर बात करके उन्हें बधाई दी. हमने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और कोविड-19 महामारी, जलवायु परिवर्तन तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग पर साझा प्राथमिकताओं और चुनौतियों पर चर्चा की.

प्रधानमंत्री ने अमेरिका की निर्वाचित उप राष्ट्रपति कमला हैरिस को भी बधाई दी.

उन्होंने कहा, ‘उनकी सफलता भारतीय अमेरिकी समुदाय के लिए गर्व और प्रेरणा की बात है. यह समुदाय भारत-अमेरिका सबंधों की मजबूती का महत्वपूर्ण स्रोत है.’

प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंगलवार को एक बयान जारी करके कहा कि मोदी ने बाइडन के निर्वाचन के लिए उन्हें बधाई दी है.

राज्यपाल के बयान पर भड़कीं ममता, बोलीं- शांतिभंग करने के लिए बंगाल में आए बाहरी गुंडे

कोलकाता
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ममता पर हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य में सियासी हिंसा बर्दाश्त नहीं करूंगा। वहीं ममता बनर्जी ने किसी का नाम लिए बगैर बीजेपी और राज्यपाल पर तंज कसा है। ममता ने कहा कि कुछ लोग दूसरे राज्यों से गुंडे लेकर आ रहे हैं ताकि 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की शांति भंग की जा सके।

दरअसल कूच बिहार जिले में बीजेपी कार्यकर्ता का शव मिलने के बाद राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि मैं राज्य सरकार को हमेशा से कहता रहा हूं कि कानून-व्यवस्था को राजनीति से अलग रखा जाए। उन्होंने कहा कि बार-बार चेतावनी के बावजूद कुछ अधिकारी राजनीतिक कार्यकर्ताओं की तरह काम कर रहे हैं। ऐसे में हमें सियासी हिंसा को रोकना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि, मैं यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी शक्ति में सब कुछ करूंगा कि पश्चिम बंगाल के लोगों को हिंसा के बिना एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव देखने को मिले। मुझे नतीजों से कोई लेना-देना नहीं है, केवल कानून और मतदाता संतुष्टि की प्रक्रिया को कायम रखना है।

ममता ने कहा- ‘गुंडों और बाहरी लोगों’ का करें प्रतिकार

हिन्दी भाषी बहुल क्षेत्र पोस्ता बाजार में जगधात्री पूजा के शुभारंभ के अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोगों से कहा कि वे राज्य में अशांति फैलाने वाले ‘गुंडों और बाहरी लोगों’ का प्रतिकार करें। उन्होंने कहा, ‘अगर बाहर से कुछ गुंडे हमारे राज्य में आकर आपको आतंकित करते हैं तो आप सभी को एकजुट होकर उनका प्रतिकार करना चाहिए।’

ममता ने बीजेपी को बताया ‘बाहरी लोगों की पार्टी’
ममता ने आगे कहा, ‘मैं वादा करती हूं कि हम आपके साथ होंगे। हम शांति में विश्वास करते हैं। लेकिन कुछ लोग सिर्फ चुनाव के दौरान दूसरों को आतंकित करने आते हैं। हम उन्हें यहां मनमर्जी नहीं करने देंगे।’ इन बाहरी लोगों को ‘विभाजनकारी ताकत’ बताते हुए बनर्जी ने कहा कि उन्हें हराने की आवश्यकता है। ममता बनर्जी ने इससे पहले भी कई मौकों पर बीजेपी को ‘बाहरी लोगों की पार्टी’ बताया है।

बीजेपी की बढ़ती पकड़ से टीएमसी हताश’

बनर्जी के बयान पर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि देश के बाकी हिस्सों से आने वाले भारतीयों का तृणमूल कांग्रेस सरकार स्वागत नहीं करती है, लेकिन बांग्लादेशी घुसपैठियों का दिल खोलकर स्वागत किया जाता है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख का बयान राज्य में बीजेपी की बढ़ती पकड़ पर पार्टी की हताशा व्यक्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान तृणमूल कांग्रेस और उसके नेतृत्व के गुस्से और हताशा को दर्शाते हैं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान के श्वसुर श्री घनश्यामदास जी मसानी का निधन

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के श्वसुर एवं श्रीमती साधना सिंह के पिता श्री घनश्यामदास मसानी का आज हृदयाघात से भोपाल के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने गहरा दु:ख प्रकट करते हुए उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि दी है। वे 88 वर्ष के थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी श्रीमती सुशीला देवी, 03 बेटियां श्रीमती रेखा ठाकुर, श्रीमती कल्पना सिंह एवं श्रीमती साधना सिंह तथा 02 बेटे श्री अरूण सिंह मसानी एवं श्री संजय सिंह मसानी हैं।

श्री घनश्यामदास मसानी का जन्म 15 नवम्बर 1932 को गोंदिया, महाराष्ट्र में हुआ। वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सक्रिय स्वयं सेवक एवं समाजसेवी थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज एवं राष्ट्र की सेवा को समर्पित किया। वे अयोध्या में श्री राममंदिर के निर्माण को युगान्तकारी घटना बताते थे।

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