बीसीआई ने डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन में पंजीकृत सभी वकीलों के विवरण प्रस्तुत करने की तारीख 31 दिसंबर तक बढ़ाई

बीसीआई ने डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन में पंजीकृत सभी वकीलों के विवरण प्रस्तुत करने की तारीख 31 दिसंबर तक बढ़ाई


BCI Further Extends Time To Furnish Details Of All Advocates Registered With District Bar Associations Till Dec 31


बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने प्रैक्टिस करने वाले ऐसे सभी अधिवक्ताओं के विवरण सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति को प्रस्तुत करने की समय सीमा बढ़ा दी है, जो उनके संबंधित बार एसोसिएशनों के सदस्य हैं। बीसीआई ने 31 दिसंबर, 2020 तक विवरण प्रस्तुत करने की अवधि बढ़ा दी है।

विभिन्न बार एसोसिएशन और स्टेट बार काउंसिल से विस्तार के लिए अनुरोध प्राप्त मिलने के बाद बीसीआई की जनरल काउंसिल (General Council of the BCI) ने इस प्रकार हल किया:

“विचार के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया की जनरल काउंसिल ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय की ई-समिति की आवश्यकता के अनुसार मांगे गए देश के प्रत्येक प्रैक्टिसिंग एडवोकेट के विवरण प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर, 2020 तक बढ़ाने का संकल्प लिया है।”

परिषद ने सभी अधिवक्ताओं से अनुरोध किया है, जिन्होंने अभी तक अपना विवरण प्रस्तुत नहीं किया है, संबंधित बार संघों के माध्यम से या संबंधित बार परिषदों के माध्यम से अपना विवरण भेजें जिनके तहत वे इनरोल्ड हैं।

परिषद ने पहले कहा था,

“उन्हें संबंधित बार संघों को अपना विवरण प्रस्तुत करना होगा, जिसके वे सदस्य हैं और सुविधा और सहजता के लिए, पूरी सूची को बार एसोसिएशनों के माध्यम से बीसीआई को वर्ड/ एक्सेल प्रारूप में भेजना होगा।”

इसी को दोहराते हुए बीसीआई ने कहा,

“इससे पहले भी बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने बार एसोसिएशनों और बार काउंसिलों को संबोधित किया है कि व्यक्तिगत रूप से एडवोकेट्स से विशेष रूप से अनुरोध किया गया था कि वे बीसीआई को अपना विवरण निजी तौर पर ईमेल पर न भेजें। बार एसोसिएशनों के माध्यम से या बार काउंसिलों के माध्यम से यह विवरण भेजें क्योंकि व्यक्तिगत रूप से भेजे जाने पर अधिवक्ताओं के ऐसे आवश्यक विवरण एकत्र करना संभव नहीं होगा। यह विवरण बार एसोसिएशनों और बार काउंसिलों के माध्यम से भेजना उचित और संभव होगा। “

इसके अलावा परिषद ने स्पष्ट किया है कि संबंधित अधिवक्ताओं के लेटरहेड पर जानकारी प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं है और इसके अलावा, यदि यह संभव नहीं है, तो ईमेल द्वारा ऐसी सूचना प्रस्तुत करने वाले अधिवक्ता के हस्ताक्षर संलग्न करना अनिवार्य नहीं है।

यहां फिर से दोहराया गया है कि यह योजना / प्रस्ताव सभी अधिवक्ताओं के लाभ के लिए है। सुप्रीम कोर्ट ने देश की 22 विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में बार के साथ कम्यूनिकेशन का एक तरीका तैयार किया है।

ई-समिति ने वकीलों को ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई आदि के लिए भी प्रशिक्षण दिया है। अन्य आवश्यक जानकारी / रिपोर्ट भी अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराई जाएगी।

परिषद ने बार एसोसिएशनों को और अधिक सक्रिय होने के लिए कहा है, क्योंकि जो विवरण मांगे गए हैं, हो सकता है वे सभी स्टेट बार काउंसिल के पास उपलब्ध न हों।

24 जुलाई, 2020 को लिखे गए पत्र में बीसीआई ने देश भर के सभी जिला और तालुका बार एसोसिएशनों से अनुरोध किया था कि वे सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति के अवलोकन के लिए सभी संबंधित अधिवक्ताओं के विवरणों की आपूर्ति करें जो उनके संबंधित बार एसोसिएशनों के सदस्य हैं।

इस प्रैक्टिस को अनिवार्य कर दिया गया है और ऐसे अधिवक्ता जो अपने संबंधित बार एसोसिएशन को अपेक्षित जानकारी प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं, उन्हें परिषद द्वारा “नॉन प्रैक्टिसिंग एडवोकेट” के रूप में माना जाएगा।

सभी संबंधित निकायों को इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पहले 15 दिनों का समय दिया गया था। परिषद से किए गए कई अनुरोधों को देखते हुए इस अवधि को बाद में 15 नवंबर तक बढ़ा दिया गया था।

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