सड़क पर मिले पुलिस अधिकारी से दीपावली पर मिलने पहुंचे साथी

ग्वालियर ()। ग्वालियर में विक्षिप्त हालत में सीएसपी रत्नेश तोमर को मिले पुलिस अधिकारी मनीष मिश्रा को स्वर्ग सदन में ठहराया गया है। स्वर्ग सदन में युवाओं की टीम मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों की देखभाल करती है। दीपावली के अवसर पर स्वर्ग सदन में मनीष मिश्रा से उनके क्लासमेट रहे सीएसपी रत्नेश तोमर, महाराजपुरा थाना प्रभारी आसिफ बेग, ईओडब्ल्यू डीएसपी संजय चतुर्वेदी आदि मिलने पहुंचे। वहीं मनीष मिश्रा का इलाज मानसिक अरोग्यशाला में डा. नंदलाल कर रहे हैं। वहीं ग्वालियर आने से पूर्व मनीष मिश्रा शिवपुरी में भी कई सालों तक चिंताहरण मंदिर के आसपास घूमते रहे हैं, शिवपुरी में एक समाजसेवी संस्था ने इनका इलाज कराया था जिसके बाद यह कुछ समय के लिए ठीक भी हुए थे, लेकिन बाद में यह फिर से अपनी पुरानी अवस्था में पहुंच गए थे।

मतगणना से वापस लौट रहे सीएसपी रत्नेश तोमर को वंदन गार्डन के पास एक विक्षिप्त मिला था, इस विक्षिप्त की दयनीय हालत देखकर सीएसपी रत्नेश तोमर ने इसे वहीं पर कपड़े व जूते दान किए थे, लेकिन जब यह वापस लौटे तो विक्षिप्त ने सीएसपी रत्नेश तोमर को उनके नाम से पुकारा तब सभी लोग चौंक गए थे कि एक विक्षिप्त उनका नाम कैसे जानता है। इसके बाद मनीष ने बताया कि उसने उनके साथ ट्रेनिंग की थी और वह पुलिस अधिकारी थे। इसके बाद सीएसपी रत्नेश तोमर ने 12 नवंबर को मनीष मिश्रा को स्वर्ग सदन में पहुंचाया। वहां पर विकास गोस्वामी और उनकी टीम द्वारा मनीष की देखभाल की जा रही है। दीपावली पर सीएसपी रत्नेश तोमर सहित अन्य साथी उनसे मुलाकात करने पहुंचे।

चीन के अत्याचार के खिलाफ वीगर मुसलमानों ने किया `जंग का ऐलान

बीजिंग: चीन (China) के अत्याचार के खिलाफ अब वीगर मुस्लिम (Uyghur Muslims) अपनी आवाज बुलंद करने लगे हैं. मुस्लिमों ने यह साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें चीन के अत्याचार से आजादी नहीं मिल जाती, उनका संघर्ष जारी रहेगा. पूर्वी तुर्किस्तान (East Turkestan) के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बड़ी संख्या में वीगर मुस्लिमों ने विरोध-प्रदर्शन किया.   

चीन ने किया था कब्जा
प्रदर्शन के दौरान वीगर समुदाय के नेताओं ने कसम खाई कि जब तक चीन से आजादी नहीं मिल जाती, तब तक वह चैन से नहीं बैठेंगे. बता दें कि पूर्वी तुर्किस्तान भी मध्य एशिया का एक स्वतन्त्र हिस्सा हुआ करता था, लेकिन चीन ने उस पर कब्जा कर लिया. इसे ही आज शिंजियांग प्रांत (Xinjiang region) के रूप में जाना जाता है. यहां समय-समय पर आजादी के लिए प्रदर्शन होते रहते हैं. 

पीछे नहीं हटेंगे
चीन विरोधी प्रदर्शन में शामिल वीगर नेताओं ने कहा, ‘जब तक हम अपने लोगों को आजाद नहीं करा लेते तब तक हम आराम नहीं करेंगे. हम पीछे नहीं हटेंगे, हमारे अपने अधिकार हैं. हमारे पास आपके (चीन) अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है और हम बताना चाहते हैं कि दुनिया का हर वीगर मुस्लमान एक सिपाही है, जो अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ेगा’.  

कई देशों में हुए प्रदर्शन
12 नवंबर को पूर्वी तुर्किस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दुनियाभर के कई देशों में चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए. पूर्वी तुर्किस्तान या शिंजियांग में 10 मिलियन वीगर हैं, जो लंबे समय से चीन के शोषण का शिकार हो रहे हैं. कई रिपोर्ट में यह बात सामने आ चुकी है कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार मुस्लिमों को तरह-तरह से प्रताड़ित करती है. उनसे जबरन श्रम करवाया जाता है, उनकी आबादी घटाने के लिए जबरन गर्भपात भी कराया जाता है.

अमेरिका रहा है मुखर
अमेरिका इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहा है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मुस्लिमों पर अत्याचार के मद्देनजर चीन के खिलाफ कई कड़े कदम उठाये हैं. कुछ वक्त पहले अमेरिका ने शिंजियांग प्रांत निर्मित सभी उत्पादों के आयात पर रोक लगा दी थी. क्योंकि वहां वीगर मुस्लिमों से बंधुआ मजदूरों की तरह काम करवाया जाता है. इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी ट्रंप सरकार चीन के इस अमानवीय कृत्य को पुरजोर तरीके से उठाती आई है. अब जब अमेरिका में सत्ता परिवर्तन हो गया है, यह देखने वाली बात होगी कि नए राष्ट्रपति का इस मुद्दे पर क्या रुख रहता है.   

तालिबान के खिलाफ अफगानिस्तान का ऐक्शन, 70 से ज्यादा कमांडर, 152 पाकिस्तानी लड़ाके ढेर

काबुल
अफगानिस्तान के इंटीरियर अफेयर्स मंत्रालय ने रविवार को एक लिस्ट जारी ऐलान किया है कि हेलमंद और कांधार में एक महीने पहले शुरू किए गए अभियान में करीब 70 तालिबानी कमांडर मारे गए हैं। तालिबान के हमलों के जवाब में अफगानी सुरक्षाबलों ने यह ऑपरेशन जारी किया था। मंत्रालय के मुताबिक 20 कमांडर हेलमंद के अलग-अलग हिस्सों के थे और 45-100 सदस्यों तक के समूहों का नेतृत्व कर रहे थे। वहीं, कांधार में करीब 40 तालिबानी कमांडर मारे गए हैं।

हेलमंद में मारे गए पाक लड़ाके
हेलमंद में मारे गए 10 कमांडर उरुजगा, कांधार और गजनी से आए थे। पत्रकारों के सामने लिस्ट रिलीज करते हुए मंत्रालय ने बताया कि कम से कम 152 पाकिस्तानी लड़ाके हेलमंद प्रांत में मारे गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक 65 शवों को डुरंड लाइन के जरिए ट्रांसफर कर दिया गया है जबकि 35 शवों को फराह, 54 को हेलमंद, 13 को जाबुल और 13 को उरुजगान प्रांत पहुंचाया गया है।

134 आम नागरिक मारे गए
इस दौरान 30 तालिबानी कमांडर हेलमंद में घायल हुए हैं। इस ऑपरेशन का नेतृत्व चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल मोहम्मद यासिन जिया कर रहे थे। अभी भी ऑपरेशन जारी है कि लेकिन मंत्रालय ने दावा किया है कि तालिबान को मात दे दी गई है। प्रवक्ता ने यह भी बताया है कि तालिबान के हमलों में पिछले 25 दिन में कम से कम 134 आम लोग मारे गए हैं और 289 घायल हुए हैं। वहीं, तालिबान ने मंत्रालय के बयान का खंडन किया है।

अफगानिस्तान में सक्रिया पाकिस्तानी आतंकी
गौरतलब है कि जुलाई में जारी की गई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान के करीब 6,000-6,500 आतंकवादी पड़ोसी अफगानिस्तान में सक्रिय हैं जिनमें से अधिकतर का संबंध ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ से है और वे दोनों देश के लिए खतरा हैं। वहीं, अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन (Pentagon) ने भी अफगानिस्तान पर जारी अपनी रिपोर्ट में अफगानिस्तान और पाकिस्तान सीमा क्षेत्र को आतंकी संगठनों के लिए सुरक्षित ठिकाना बताया था।

तृणमूल में मतभेद: अब दो बड़े नेताओं के आपसी मतभेद ने बढ़ाई तृणमूल की और परेशानियां

कोलकाता, । तृणमूल कांग्रेस की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के कद्दावर मंत्री शुभेंदु अधिकारी की बगावती के बाद अब सिंगुुर में तृणमूल के दो वरिष्ठ नेताओं मंत्री रबींद्रनाथ भट्टाचार्य और विधायक बेचाराम मन्ना के बीच मतभेद खुलकर सामने आया है। सिंगुुर आंदोलन में इन दोनों नेताओं की अहम भूमिका रही है। एक तरफ जहां इस मतभेद के कारण रबींद्रनाथ भट्टाचार्य ने पार्टी छोड़ने की बात कही है, वहीं बेचाराम मन्ना ने इस्तीफे की पेशकश की है। हालांकि तृणमूल सुप्रीमों ममता बनर्जी के निर्देश पर पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता इस आपसी मतभेद को दूर करने के लिए आगे आए हैं।

सिंगुुर आंदोलन में ममता के साथ रहे रबींद्रनाथ भट्टाचार्य ने पार्टी से इस्तीफा देने की बात कह दी है। भट्टाचार्य ने सिंगुर में टाटा के नैनो कारखाने के खिलाफ आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। वहीं विधायक बेचाराम मन्ना भी सिंगुर आंदोलन में काफी सक्रिय रहे थे। एक बार फिर रबींद्रनाथ व बेचाराम के बीच विवाद गहरा गया है। बात यहां तक पहुंच गई है कि मन्ना ने विधायक पद से इस्तीफा देने की इच्छा जता दी है।

हालांकि बाद में तृणमूल नेतृत्व ने मन्ना से बात की तो वह मान गए हैं लेकिन अब रबींद्रनाथ क्षुब्ध हैं। क्योंकि, उनके करीबी तृणमूल के ब्लॉक अध्यक्ष महादेब दास को ममता बनर्जी ने पद से हटा दिया है। इसी तरह का बदलाव हुगली जिले के हरिपाल ब्लॉक में भी किया गया जिसके चलते मन्ना भी नाराज हो गए थे। फिलहाल मन्ना मान गए हैं लेकिन रवींद्रनाथ खफा हैं।

बहरहाल आगामी वर्ष चुनाव होना है और उससे पहले तृणमूल के भीतर संग्राम शुभ संकेत नहीं है। जिस तरह से नंदीग्राम और सिंगुर दोनों ही क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण बनने-बिगड़ने लगे हैं उससे ऐसा लग रहा कि तृणमूल के भीतर सब कुछ सही नही हैं। 

RJD ने कसा तंज, चुनाव के समय शिमला में बहन के घर पर पिकनिक मना रहे थे राहुल गांधी

बिहार विधानसभा चुनावों में तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए। लालू यादव की पार्टी आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन एक बार फिर सत्ता हाथ लगी नीतीश कुमार और एनडीए के। कांग्रेस ने आरजेडी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, 70 सीटों पर प्रत्याशी भी खड़े किए, लेकिन कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पाई। अब आरजेडी नेता कांग्रेस के खिलाफ खुलकर बोलने लगे हैं। शिवानंद तिवारी ने ताजा बयान दिया है। उन्होंने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा है कि जब बिहार में चुनाव हो रहे थे, तब राहुल गांधी अपने बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के शिमला वाले घर पर पिकनिक मना रहे थे। शिवानंद तिवारी आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।

बकौल शिवानंद, ऐसा कभी लगा ही नहीं कि कांग्रेस बिहार चुनाव को गंभीरता से ले रही है। जो भी नेता आए, उनमें से अधिकतर पटना में प्रेस में बयान देने तक ही सीमित रहे। कांग्रेस में भाजपा के विकल्प बनने की क्षमता नहीं है।

बिहार में चुनावी सरगर्मी थी। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में भाजपा-जदयू जैसी मजबूत पार्टियों की संयुक्त ताकत के खिलाफ लड़ाई थी और राहुल गांधी शिमला में बहन प्रियंका वाड्रा के घर पिकनिक मना रहे थे। कांग्रेस बिहार में 70 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी, लेकिन 70 जनसभाएं भी नहीं कर पाईं। यहां तक कि राहुल गांधी ने भी सिर्फ चार सभाएं ही कीं।

इसके साथ ही शिवानंद तिवारी ने पूछा कि क्या पार्टी ऐसे ही चलती है। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस के इसी रुख का फायदा भाजपा को हो रहा है। ऐसा सिर्फ बिहार नहीं, बाकी राज्यों में भी हुआ है। कांग्रेस को मंथन करना चाहिए। देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी होने का दावा करने वालों को चुनाव के प्रति तो गंभीर होना पड़ेगा। पार्टी आलाकमान एक बार फिर विचार करें। बिहार की हार पर मंथन के बहाने अपनी रणनीति पर दोबारा सोचें।

मध्यप्रदेश सरकार का नया विमान उड़ान भरने के लिए तैयार 

भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार का नया विमान एयरकिंग बी-250 उड़ान भरने के लिए तैयार है। विमान के लिए सभी जरुरी अनुमति डीजीसीए की ओर से मिल चुकी हैं और तमाम कागजी कार्रवाई भी पूरी हो चुकी हैं। 60 करोड़ रुपए की कीमत का एयरकिंग बी-250 विमान अगस्त के महीने में भोपाल पहुंचा था और तब से स्टेट हैंगर में खड़ा हुआ था। अब जब कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है तो उम्मीद है कि जल्द ही प्रदेश सरकार के मुखिया सीएम शिवराज सिंह चौहान इस विमान से उड़ान भरेंगे।


बताया जा रहा है कि विमान से यात्रा की शुरुआत शुभ मुहूर्त में की जाएगी। सीएम शिवराज सिंह चौहान 16-17 नवंबर को विमान से पहली यात्रा तिरुपति की कर सकते हैं। एयरकिंग बी-250 विमान 7 सीटर विमान है और प्रदेश की सभी हवाई पट्टियों पर लैंड कर सकता है।

कमलनाथ सरकार में खरीदी, शिवराज सरकार में पहली उड़ान

बता दें कि तमाम खूबियों से लैस एयरकिंग बी-250 विमान की खरीदी कमलनाथ सरकार के दौरान की गई थी। कमलनाथ सरकार ने विमान को खरीदने की सारी औपचारिकताएं पूरी हुई थीं लेकिन जब तक विमान आया तब तक कमलनाथ सरकार नहीं रही। अब सीएम शिवराज सिंह चौहान इस विमान से पहली उड़ान भरेंगे।

एयरकिंग बी-250 विमान की खासियत

– एयरकिंग बी-250 विमान इस रेंज के अन्य विमानों की तुलना में बेहद की खूबसूरत और बड़ा विमान है।

– एयरकिंग बी-250 विमान मीडियम रेंज के दूसरे विमानों से ज्यादा पावरफुल माना जाता है।

– एयरकिंग बी-250 विमान का इंटीरीयर बहुत ही ज्यादा खूबसूरत बनाया गया है जो आरामदायक होता है।

– एयरकिंग बी-250 विमान में डुअल फ्लाइट मैनेजमेंट सिस्टम हैं, ये ट्रैफिक अलर्ट और टक्कर की स्थिति से आगाह कर सकता है।

– एयरकिंग बी-250 विमान ऑटोमेटिक फ्लाइट गाइडेंस सिस्टम से लैस है।

– मीडियम रेंज होने के कारण ये किसी भी जगह आसानी से उतारा जा सकता है।

Bhai Dooj 2020: भाई दूज पर 2 घंटे 9 मिनट का शुभ मुहूर्त, दिन में इस वक्त न करें भाई को तिलक

कार्तिक शुक्ल द्वितिया को भाई दूज (Bhai Dooj 2020) का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाई का तिलक करती हैं और उसकी लंबी उम्र की दुआ करती हैं. इस बार भइया दूज का पर्व सोमवार, 16 नवंबर को मनाया जा रहा है. ज्योतिषविदों के मुताबिक, भाई दूज का त्योहार शुभ मुहूर्त (Shubh muhurt) में मनाने से लाभ होता. जबकि राहु काल (Rahu kaal) में भाई को तिलक करने से बचना चाहिए.


ज्योतिषियों के मुताबिक, भाई दूज के दिन टीका करने का शुभ मूहूर्त सोमवार, 16 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 56 मिनट से 03 बजकर 06 मिनट तक रहेगा. यानी भाई दूज का त्योहार मनाने के लिए 2 घंटे 9 मिनट का शुभ मुहूर्त है.


यदि आप किसी कारणवश शुभ मुहूर्त में भाई को तिलक नहीं कर पा रही हैं तो अभिजीत मुहूर्त में त्योहार मना सकती हैं. आज 11 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 27 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त में तिलक किया जा सकता है.

ज्योतिषविद के मुताबिक, भाई दूज पर सुबह 7:30 बजे से राहु काल लग रहा है जो सुबह 9:00 बजे तक रहेगा. इस बीच भाई को तिलक करने से बचें. इस अवधि के पहले या बाद में ही त्योहार मनाएं.

बहनें सुबह स्नान करने के बाद अपने ईष्ट देव, भगवान विष्णु या गणेश की पूजा करें. इस दिन भाई के हाथों में सिंदूर और चावल का लेप लगाने के बाद उस पर पान के पांच पत्ते, सुपारी और चांदी का सिक्का रखती हैं. फिर उसके हाथ पर कलावा बांधकर जल उडेलते हुए भाई की दीर्घायु के लिए मंत्र पढ़ती हैं.


कहीं-कहीं बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हैं और फिर कलाई पर कलावा बांधती हैं. फिर वह भाई का माखन-मिश्री या मिठाई से मुंह मीठा करवाती हैं और अंत में उसकी आरती उतारती हैं. इस दिन बहुत से भाई अपनी बहनों के घर जाकर भोजन भी करते हैं और उन्हें कुछ उपहार भी देते हैं.

भाई दूज पर भाई की आरती उतारते वक्त बहन की थाली में सिंदूर, फूल, चावल के दाने, सुपारी, पान का पत्ता, चांदी का सिक्का, नारियल, फूल माला, मिठाई, कलावा, दूब घास और केला जरूर होना चाहिए. इन सभी चीजों के बिना भाई दूज का त्योहार अधूरा माना जाता है.

मौसम ने ली करवट:ग्वालियर में रात भर होती रही तेज बारिश

न्यूनतम तापमान 15.1 डिग्री पर आया, 24 घंटों में बादल छाए रहने के आसार

शहर में रविवार को तेज बारिश हुई। दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है। सुबह से आसमान में बादल छाए थे। दोपहर करीब 1 बजे हल्की बारिश और 2 बजे से तेज बारिश हुई है। करीब रात तक चली है। रात तक 30 मिली बारिश दरज हुई है। रविवार को न्यूततम तापमान भी 15.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। लोगों को रात को ठंड का कम अहसास हुआ है। अगले 24 घंटों तक बारिश होने की संभावना है।।

अफगानिस्तान के ऊपर बना पश्चिमी विक्षोभ् जम्मू कश्मीर ऊपर से गुजर रहा है, जिससे वहां बर्फबारी की संभावना है, लेकिन इस कारण अंचल का मौसम प्रभावित हो गया है। शनिवार को दीपावली थी। रविवार को गोवर्धन पूजन हुआ। सुबह से ही आसमान में बादल छाए थे, जो दोपहर होते-होते बरस गए और
रात भर बरसते रहे।

24 घंटे रहेंगे बादल

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम का यह मिजाज अगले 24 घंटे तक ऐसे ही बने रहने के आसार है। तीन दिन बाद मौसम में बदलाव आ सकता है। अंचल में धुंध के साथ ठंड भी बढ़ेगी।

बीमारियों का खतरा

मौसम के बार-बार बदलने के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बारिश से वायरल डिसीज के बढ़ने की संभावना है। ऐसे में बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।

बीसीआई ने डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन में पंजीकृत सभी वकीलों के विवरण प्रस्तुत करने की तारीख 31 दिसंबर तक बढ़ाई

बीसीआई ने डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन में पंजीकृत सभी वकीलों के विवरण प्रस्तुत करने की तारीख 31 दिसंबर तक बढ़ाई


BCI Further Extends Time To Furnish Details Of All Advocates Registered With District Bar Associations Till Dec 31


बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने प्रैक्टिस करने वाले ऐसे सभी अधिवक्ताओं के विवरण सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति को प्रस्तुत करने की समय सीमा बढ़ा दी है, जो उनके संबंधित बार एसोसिएशनों के सदस्य हैं। बीसीआई ने 31 दिसंबर, 2020 तक विवरण प्रस्तुत करने की अवधि बढ़ा दी है।

विभिन्न बार एसोसिएशन और स्टेट बार काउंसिल से विस्तार के लिए अनुरोध प्राप्त मिलने के बाद बीसीआई की जनरल काउंसिल (General Council of the BCI) ने इस प्रकार हल किया:

“विचार के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया की जनरल काउंसिल ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय की ई-समिति की आवश्यकता के अनुसार मांगे गए देश के प्रत्येक प्रैक्टिसिंग एडवोकेट के विवरण प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर, 2020 तक बढ़ाने का संकल्प लिया है।”

परिषद ने सभी अधिवक्ताओं से अनुरोध किया है, जिन्होंने अभी तक अपना विवरण प्रस्तुत नहीं किया है, संबंधित बार संघों के माध्यम से या संबंधित बार परिषदों के माध्यम से अपना विवरण भेजें जिनके तहत वे इनरोल्ड हैं।

परिषद ने पहले कहा था,

“उन्हें संबंधित बार संघों को अपना विवरण प्रस्तुत करना होगा, जिसके वे सदस्य हैं और सुविधा और सहजता के लिए, पूरी सूची को बार एसोसिएशनों के माध्यम से बीसीआई को वर्ड/ एक्सेल प्रारूप में भेजना होगा।”

इसी को दोहराते हुए बीसीआई ने कहा,

“इससे पहले भी बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने बार एसोसिएशनों और बार काउंसिलों को संबोधित किया है कि व्यक्तिगत रूप से एडवोकेट्स से विशेष रूप से अनुरोध किया गया था कि वे बीसीआई को अपना विवरण निजी तौर पर ईमेल पर न भेजें। बार एसोसिएशनों के माध्यम से या बार काउंसिलों के माध्यम से यह विवरण भेजें क्योंकि व्यक्तिगत रूप से भेजे जाने पर अधिवक्ताओं के ऐसे आवश्यक विवरण एकत्र करना संभव नहीं होगा। यह विवरण बार एसोसिएशनों और बार काउंसिलों के माध्यम से भेजना उचित और संभव होगा। “

इसके अलावा परिषद ने स्पष्ट किया है कि संबंधित अधिवक्ताओं के लेटरहेड पर जानकारी प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं है और इसके अलावा, यदि यह संभव नहीं है, तो ईमेल द्वारा ऐसी सूचना प्रस्तुत करने वाले अधिवक्ता के हस्ताक्षर संलग्न करना अनिवार्य नहीं है।

यहां फिर से दोहराया गया है कि यह योजना / प्रस्ताव सभी अधिवक्ताओं के लाभ के लिए है। सुप्रीम कोर्ट ने देश की 22 विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में बार के साथ कम्यूनिकेशन का एक तरीका तैयार किया है।

ई-समिति ने वकीलों को ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई आदि के लिए भी प्रशिक्षण दिया है। अन्य आवश्यक जानकारी / रिपोर्ट भी अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराई जाएगी।

परिषद ने बार एसोसिएशनों को और अधिक सक्रिय होने के लिए कहा है, क्योंकि जो विवरण मांगे गए हैं, हो सकता है वे सभी स्टेट बार काउंसिल के पास उपलब्ध न हों।

24 जुलाई, 2020 को लिखे गए पत्र में बीसीआई ने देश भर के सभी जिला और तालुका बार एसोसिएशनों से अनुरोध किया था कि वे सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति के अवलोकन के लिए सभी संबंधित अधिवक्ताओं के विवरणों की आपूर्ति करें जो उनके संबंधित बार एसोसिएशनों के सदस्य हैं।

इस प्रैक्टिस को अनिवार्य कर दिया गया है और ऐसे अधिवक्ता जो अपने संबंधित बार एसोसिएशन को अपेक्षित जानकारी प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं, उन्हें परिषद द्वारा “नॉन प्रैक्टिसिंग एडवोकेट” के रूप में माना जाएगा।

सभी संबंधित निकायों को इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पहले 15 दिनों का समय दिया गया था। परिषद से किए गए कई अनुरोधों को देखते हुए इस अवधि को बाद में 15 नवंबर तक बढ़ा दिया गया था।