डोनाल्ड ट्रंप के ‘तख्तापलट’ से सेना की दूरी, US जनरल बोले- ‘किसी तानाशाह के प्रति नहीं है वफादारी’

वॉशिंगटन
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हुए और डेमोक्रैट कैंडिडेट जो बाइडेन को बहुमत मिला। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव के नतीजे से इनकार कर दिया है और हालात ऐसे पैदा हो गए हैं कि ट्रंप के सैन्य तख्तापलट करने की आशंका तक जताई जाने लगी है। इसी बीच देश के जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ चेयरमैन जनरल मार्क माइली ने दो टूक कहा है कि सेना किसी राजा-रानी या तानाशाह की नहीं, देश के संविधान की कसम खाती है। उन्होंने कहा कि सेना का हर सदस्य खुद से ज्यादा उसकी रक्षा करेगा।

पेंटागन में ट्रंप ने किए बदलाव
दरअसल, ट्रंप ने हाल ही में पेंटागन में ताबड़तोड़ बदलाव करते हुए रक्षामंक्षी मार्क एस्पर को हटाया और फिर अपने तीन वफादारों को अहम पदों पर नियुक्त कर दिया। इसके बाद ही ऐसी अटकलें लगने लगीं कि ट्रंप अपने कार्यकाल के आखिरी दो हफ्तों में क्या कर सकते हैं। हालांकि, इसका कोई ठोस आधार नहीं है और माइली ने साफ किया है कि किसी भी हालत में ट्रंप को सेना की मदद नहीं मिलेगी।

सेना को नहीं करना फैसला

उन्होंने कांग्रेस को बताया है, ‘चुनाव को लेकर किसी विवाद की स्थिति में समाधान देश की अदालत और संसद को करना होगा, सेना को नहीं।’ उन्होंने कहा कि सेना के सदस्यों को चुनाव के बाद सत्ता के हस्तांतरण में शामिल नहीं होना चाहिए। गौरतलब है कि ट्रंप एस्पर से काफी वक्त से नाराज थे। खासकर जून में जब जनआंदोलन के दौरान सेना के इस्तेमाल की ट्रंप की मर्जी पर एस्पर ने असहमति जताई थी।

क्या करेंगे ट्रंप?
ट्रंप के इस रुख से इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि राष्‍ट्रपति ट्रंप और उनकी पार्टी के नेता सत्‍ता में बने रहने के लिए हर प्रयास करेंगे। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी पिछले दिनों कहा था, ‘ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल के लिए आसानी से सत्‍ता हस्‍तांतरण होगा।’ उधर, अटार्नी जनरल विलियम बार ने भी संघीय अभियोजकों से कहा है कि वे चुनावी धांधली की जांच शुरू करें। सत्‍ता में बने रहने के लिए ट्रंप प्रशासन के इस तमाम दांवपेच के बाद भी अमेरिकी व‍िशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप के पास अब सत्‍ता में बने रहने के लिए कोई विकल्‍प नहीं बचा है।

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