नहीं चलेगी अफसरीः कलेक्टर ने आतिशबाजी के लिए दो घंटे दिए ,गृहमंत्री बोले . कोई समय सीमा नहींए खूब फोड़ो पटाखे

गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया के दो घंटे पटाखे जलाने के आदेश को 24 घंटे बाद ही पलट दिया है। उन्होंने कहा कि पटाखा फोड़ने की कोई समय सीमा नहीं है, खूब पटाखे फोड़ें। दिवाली महापर्व को खूब उत्साह से मनाएं, कोई समय सीमा नहीं है। बस कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन करें।

जब उनसे पूछा गया कि भोपाल कलेक्टर ने दिवाली और आगे आने वाले त्योहारों में दो घंटे ही पटाखे फोड़ने का आदेश दिया है। इस पर नरोत्तम ने कहा कि एनजीटी के आदेश के संबंध में उन्होंने आदेश दिया होगा, लेकिन कोई समय सीमा नहीं है। ये हमारा त्योहार है और इसे धूमधाम से मनाएं। तीन दिन पहले सीएम शिवराज ने भी कहा था, कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए दीवाली अच्छे से मनाएं।

बता दें कि गुरुवार को ही भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया ने आदेश जारी कर कहा था कि दीपावली और अन्य त्यौहारों के दिन सिर्फ रात 8 से 10 बजे तक ही आतिशबाजी की जा सकेगी। कहा गया था कि मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की शहर में वायु गुणवत्ता की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। इस कारण राजधानी में अब सिर्फ 2 घंटे ही पटाखे फोड़े जाएंगे।

आदेश में छठ पूजा, क्रिसमस और नववर्ष भी शामिल था
आदेश सिर्फ दीपावली ही नहीं, बल्कि अन्य त्यौहारों जैसे छठ पूजा, क्रिसमस और नव वर्ष की रात पर भी लागू रहेगा। हालांकि दो दिन पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया था कि प्रदेश में खुशियों पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है। प्रदेश वासी दिल खोलकर पटाखे चला सकेंगे।

एनजीटी के आदेश का उल्लेख
कलेक्टर अविनाश लवानिया ने धारा 144 के तहत अधिकारों का उपयोग करते हुए इस आदेश को जारी किया है। आदेश में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) नई दिल्ली द्वारा पारित 9 नवंबर के आदेश का हवाला दिया गया। इसमें कहा गया है कि प्रदूषण में वायु की क्वालिटी को देखते हुए आतिशबाजी पर रोक लगाई जाए, जहां वायु की गुणवत्ता अत्यधिक खराब है।

डेलावेयर का 85% शराब कारोबार गुजरातियों के पास, बाइडेन दीपावली मनाते हैं और गरबा भी करते हैं

अमेरिका में फिलहाल डेलावेयर राज्य की ही चर्चा है। प्रेसिडेंट इलेक्ट जो बाइडेन यहीं के रहने वाले हैं। इस स्टेट को अमेरिका में स्माल वंडर भी कहा जाता है। करीब 10 लाख की आबादी वाले इस राज्य की राजधानी डोवर है। सबसे बड़ा शहर विल्मिंगटन है। बाइडेन इसी शहर में रहते हैं। उनका कैम्पेन ऑफिस भी यहीं था।

न्यूक्लियर सप्लाई डील में भारत के समर्थन में थे बाइडेन
डेलावेयर के बिजनेसमैन पलाश गुप्ता कहते हैं- बाइडेन के कजिन मुंबई में रहते हैं। इसलिए उनकी इच्छा मुंबई जाने की है। उनका भारतीयों के प्रति हमेशा से लगाव रहा है। इस बात की पूरी उम्मीद है कि उनका लगाव भारत से आगे भी रहेगा। क्योंकि, भारत विकासशील देश है। जब बराक ओबामा प्रेसिडेंट थे, तब न्यूक्लियर सप्लाई डील में बाइडेन भारत के समर्थन में थे। उन्होंने ही सिविल न्यूक्लियर एग्रीमेंट पास कराया था।

डेलावेयर के ही परेश पटेल कहते हैं- बाइडेन मेरे घर से एक मील की दूरी पर रहते हैं। मैं और मेरा परिवार 36 साल से उन्हें निजी तौर पर जानते हैं। इलेक्शन में जीत के बाद बाइडेन जब डेलावेयर के चर्च में कैंडिल जलाने आए थे, तब मैं परिवार के साथ चर्च में मौजूद था। हमारे पारिवारिक रिश्ते हैं।

भारत या मोदी विरोधी नहीं है बाइडेन
परेश कहते हैं- सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रम्प ही भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे दोस्त हैं। बाइडेन और वाइस प्रेसिडेंट इलेक्ट कमला हैरिस को भारत और मोदी विरोधी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि उनका झुकाव इस्लाम की तरफ ज्यादा है। ये बात बिल्कुल गलत है। बाइडेन ने कुछ समय पहले ही कहा था कि वे भारत के साथ रिश्ते और ज्यादा मजबूत करेंगे। डेमोक्रेटिक पार्टी ने एक साल से भारत के पक्ष में कई बार आवाज उठाई है। ओबामा के समय वाइस प्रेसिडेंट रहे बाइडेन ने 2014 में मोदी का भव्य स्वागत किया था। परेश पटेल ने इलेक्शन के दौरान बाइडेन की काफी मदद की

हिंदू त्योहारों में शामिल होते हैं बाइडेन
परेश कहते हैं- बाइडेन भारतीयों से जुड़े हुए हैं। एक ही स्टेट और शहर में रहने की वजह से हम उन्हें कई साल से जानते हैं। वे गरबा और दीपावली के दौरान हमारे कार्यक्रमों में शामिल होते थे। वे भारतीयों का स्वागत हमेशा हाथ जोड़कर करते हैं। यहां बीएपीएस मंदिर है। इसमें वे अकसर आते हैं। जहां तक कमला हैरिस का सवाल है तो उनके बारे में सब जानते हैं। उनका भारत से गहरा जुड़ाव है। उम्मीद है यह आगे ज्यादा मजबूत होगा।

डेलावेयर में 85% शराब की दुकानें गुजरातियों की
इस छोटे से राज्य में गुजरातियों का बोलबाला है। लिकर यानी शराब के 85% स्टोर्स गुजरातियों के हैं। इसकी एक लॉबी भी है। डेलावेयर के पूर्व में पेन्सिलवेनिया, उत्तर में न्यूजर्सी, पश्चिम और दक्षिण में मेरीलैंड जैसे बड़े राज्य हैं। न्यूजर्सी और डेलावेयर को जोड़ने वाला ‘डेलावेयर मेमोरियल ब्रिज’ बहुत मशहूर है।

पारिवारिक हैं बाइडेन
बाइडेन शांत स्वभाव और मीठा बोलने वाले व्यक्ति हैं। 77 साल की उम्र में भी उनमें युवाओं जैसा जोश है। वे पारिवारिक व्यक्ति हैं। सीनेटर रहते हुए वे रोजाना डेलावेयर से वॉशिंगटन तक की सफर ट्रेन से करते थे। ऐसा इसलिए ताकि रोज परिवार को वक्त दे सकें।

बाइडेन के डेलावेयर में दो घर हैं। एक मकान दो साल पहले बाइडेन और पत्नी जील ने खरीदा था। चुनाव प्रचार के दौरान कोविड से बचने के लिए उन्होंने घर के बेसमेंट में ही ऑफिस बनाया था। इसी ऑफिस से ऑनलाइन कैम्पेन किए। लोगों ने इसे काफी पसंद भी किया था।

सेल्स टैक्स नहीं देना पड़ता

डेलावेयर में कोई बड़ा ऐतिहासिक स्थल नहीं है। इसके बावजूद यह राज्य मशहूर है। यहां खरीदारी पर सेल्स टैक्स नहीं देना पड़ता। अमेरिका की ज्यादातर बड़ी कंपनियां अपने कार्पोरेट ऑफिस यहीं रजिस्टर कराती हैं। क्योंकि टैक्स कम देना पड़ता है। पड़ोसी राज्यों की तुलना में डेलावर में प्रॉपर्टी टैक्स काफी कम है। इस वजह से यहां रहने और प्रॉपर्टी खरीदने की होड़ लगी रहती है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लिखा- राहुल गांधी में सब्जेक्ट का मास्टर होने की योग्यता या जुनून नहीं है

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने मेमोइर (जीवनी) में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जिक्र किया है. ओबामा का कहना है, “राहुल उस स्टूडेंट की तरह हैं जो टीचर को इम्प्रेस करने के लिए तो उत्सुक (ईगर) है, लेकिन सब्जेक्ट का मास्टर होने के मामले में योग्यता या जुनून की कमी है. यह राहुल की कमजोरी है.” ओबामा जब सत्ता में थे तब, राहुल गांधी कांग्रेस के उपाध्यक्ष थे.

‘मनमोहन सिंह शांत और ईमानदार’

मनमोहन सिंह के कार्यकाल वाली UPA सरकार के समय नवंबर 2009 में ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल भारत दौर पर आए थे, तब मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी गुरुशरण कौर ने ओबामा परिवार के लिए डिनर भी रखा था. बराक ओबामा, अमेरिका के पहले अफ्रीकी-अमेरिकी राष्ट्रपति थे, उन्होंने अपने कार्यकाल में दो बार भारत की यात्रा की थी. ओबामा ने मनमोहन सिंह को शांत और ईमानदार बताया है.

ओबामा की 768 पेज की किताब 17 नवंबर को रिलीज होगी. द न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसके कुछ हिस्सों का रिव्यू पब्लिश किया है. ओबामा ने अपनी किताब में दूसरे देशों के नेताओं के बारे में भी लिखा है. रूस के प्रेसिडेंट ब्लादिमीर पुतिन को शारीरिक रूप से साधारण बताया है. अमेरिका के प्रेसिडेंट इलेक्ट जो बाइडेन के बारे में लिखा है कि वे सज्जन, ईमानदार और वफादार हैं. बाइडेन को लगे कि उन्हें तवज्जो नहीं मिल रही, तो वे गुस्सा हो सकते हैं, यह ऐसी क्वालिटी है जो किसी युवा से डील करते वक्त माहौल बिगाड़ सकती है.

मध्य प्रदेश पुलिस का शार्प शूटर SI कचरे में खाना ढूंढता मिला –

ग्वालियर। सन 1999 से लेकर 2005 तक मध्य प्रदेश पुलिस की सेवा करने वाले सब इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा पिछले 10 सालों से ग्वालियर की सड़कों पर लावारिस घूम रहे हैं। यहां वह कचरे में लोगों का झूठा खाना मिल जाता है तो खा लेते हैं। खुले आसमान के नीचे जहां जगह मिले रात बिता लेते हैं। 

कैसे पता चला, किसने पहचाना 

सब इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा के परिजनों का कहना है कि उनका मानसिक संतुलन खराब है परंतु 10 नवंबर 2020 मतगणना की रात 1:30 बजे जो कुछ भी हुआ, वह घटनाक्रम यह प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है कि ऐसा ही मनीष मिश्रा पागल नहीं है और उनकी याददाश्त भी अच्छी है। रात 1:30 बजे डीएसपी रत्नेश सिंह तोमर और विजय भदौरिया ड्यूटी पर थे तभी उन्होंने देखा कि सड़क किनारे एक व्यक्ति कचरे में खाना ढूंढ रहा है। दोनों में से एक ने अपने जूते और दूसरे ने ठंड से बचने के लिए उसे अपनी जैकेट दे दी। जब दोनों पुलिस अधिकारी वहां से जाने लगे तो भिखारी से देखने वाले उस युवक ने दोनों को उनके नाम से पुकारा। इसके बाद मनीष मिश्रा ने दोनों अधिकारियों के साथ लंबे समय तक बातचीत की। फिर जैसे ही उसकी लाइफ की कहानी 2005 के पास आई, मनीष मिश्रा फिर से वैसे ही हो गए जैसे 2 घंटे पहले थे।

अचूक निशानेबाज थानेदार थे एसआई मनीष मिश्रा

ग्वालियर के झांसी रोड इलाके में सालों से सड़कों पर लावारिस घूम रहे सब इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा सन् 1999 पुलिस बैच का अचूक निशानेबाज थानेदार थे। मनीष दोनों अफसरों के साथ 1999 में पुलिस सब इंस्पेक्टर में भर्ती हुआ था। दोनों डीएसपी रत्नेश सिंह तोमर और विजय भदौरिया ने इसके बाद काफी देर तक मनीष मिश्रा से पुराने दिनों की बात की और अपने साथ ले जाने की जिद की जबकि वह साथ जाने को राजी नहीं हुआ। अंततः एक समाज सेवी संस्था के माध्यम से मनीष मिश्रा को आश्रम में भिजवा दिया गया है।

मनीष मिश्रा के परिवार में सभी अच्छे पदों पर पदस्थ

मनीष मिश्रा के परिवार की बात की जाए तो उनके भाई भी टीआई है पिता व चाचा एडिशनल एसपी से रिटायर हुए हैं। चचेरी बहन दूतावास में पदस्थ है और मनीष मिश्रा द्वारा खुद 2005 तक नौकरी की गई है। आखिरी समय तक वह दतिया जिले में पदस्थ रहे इसके बाद मानसिक संतुलन खो बैठे। पत्नी से उनका तलाक हो चुका है जो न्यायिक सेवा में पदस्थ है। लिहाजा इस घटनाक्रम से जितने यह अधिकारी हैरान हुए उतने लोग भी हैरान हो रहे है। 

मप्र पुलिस ने अपने अधिकारी को लावारिस क्यों छोड़ दिया 

मध्य प्रदेश पुलिस या कोई भी यूनिफॉर्म सर्विस में शासन एक अधिकारी की ट्रेनिंग पर एक बड़ी रकम खर्च करता है। ऑन ड्यूटी अधिकारी और वह भी मनीष मिश्रा जैसा शार्प शूटर अचानक ड्यूटी से ऑफ हो जाए तो डिपार्टमेंट के लिए यह सामान्य बात नहीं होनी चाहिए। क्या पुलिस डिपार्टमेंट में ऐसी कोई पॉलिसी है जिसके तहत यह पता लगाया जाता हो कि बीमार हुआ अधिकारी, यदि लंबे समय तक ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुआ तो तस्दीक की जाएगी वह स्वस्थ हुआ या नहीं। एक बड़ा प्रश्न यह भी है कि 2005 में सब इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा की लाइफ में ऐसा क्या हुआ था, जिसके कारण वह आज इस हालत में पहुंच गए। इन्वेस्टिगेशन जरूरी है।

पश्चिम बंगाल में ममता से होगी भाजपा की कड़ी टक्‍कर, जेएनयू से हुई लेफ्ट को किनारे करने की शुरुआत

नई दिल्‍ली । बिहार में एनडीए को मिली सफलता से भारतीय जनता पार्टी को पड़ोसी राज्‍य पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में जीत की आस बढ़ गई है। पार्टी के लिए अब अगले निशाने पर यही राज्‍य है। यहां की चुनावी जंग जीतना पार्टी के कुछ मुश्किल जरूर लगता है। यहां पर 2011 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने राज्‍य से 34 वर्ष पुराने सीपीआई (एम) के शासन को उखाड़ फैंका था और पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्‍यमंत्री बनीं थीं।2016 के चुनाव उन्‍होंने यहां से दोबारा जीत दर्ज की। ममता ने राज्‍य से वामपंथी विचारधारा की जड़ों को उखाड़ने का काम बखूबी अंजाम दिया है। यही वजह है कि 2021 के चुनाव में भाजपा की सीधी टक्‍कर भी ममता बनर्जी के साथ ही होने वाली है।

भाजपा ने इसकी तैयारी काफी समय पहले से ही शुरू भी कर दी है। हालांकि जानकार मानते हैं कि इस राज्‍य में भाजपा की राह बिहार की तरह आसान नहीं है। राजनीतिक विश्‍लेषक शिवाजी सरकार का कहना है कि यहां की सत्‍ता तक पहुंचने के लिए भाजपा को कुछ ज्‍यादा मेहनत करनी होगी। हालांकि उनका ये भी मानना है कि राज्‍य स्‍तर पर पार्टी में जो मतभेद हैं उससे पार्टी की राह मुश्किल हो सकती है। उन्‍होंने इस बात की भी आशंका जताई है कि पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव बिहार की तुलना में अधिक हिंसा भरे होंगे। उनके मुताबिक पश्चिम बंगाल में यदि लेफ्ट, कांग्रेस और ममता मिलकर एक साथ चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा की राह मुश्किल कर सकते हैं। हालांकि ये समीकरण कुछ मुश्किल जरूर है। वहीं भाजपा लेफ्ट के साथ मुश्किल ही जाएगी। उन्‍होंने बताया कि आने वाले चुनाव काफी खास होंगे। इस चुनाव में ममता की सीटें बढ़ने के आसार काफी कम हैं।

शिवाजी का मानना है कि पश्चिम बंगाल में लेफ्ट कमजोर जरूर हुआ है लेकिन खत्‍म नहीं हुआ है। यही वजह है कि इसको साधने के लिए भाजपा ने जेएनयू, जो कि लेफ्ट का गढ़ है, का सहारा लिया है। यहां पर दो वर्षों से पर्दे में ढकी स्‍वामी विवेकानंद की मूर्ति का अनावरण करके भाजपा ने लेफ्ट को ही साधने की कोशिश की है। विवेकानंद की मूर्ति के जरिए भाजपा ने पश्चिम बंगाल के चुनाव को ही निशाना बनाया है। इस मूर्ति का लेफ्ट हमेशा से ही विरोध करता रहा है। पिछले वर्ष इस मूर्ति के साथ तोड़फोड़ तक की गई थी। 2016 में जब प्रोफेसर एम जगदीश कुमार जवाहरलाल नेहरू के वाइस चांसलर बने तब उन्‍होंने इस मूर्ति को यहां पर लगाने की राह आसान की थी। हालांकि लेफ्ट समर्थित स्‍टूडेंट्स यूनियन बार-बार इस बात का आरोप लगाती रही हैं कि प्रशासन ने इसमें लाइब्रेरी के फंड को खपा दिया है। जहां तक इस मूर्ति से भाजपा का ताल्‍लुक है तो उसने ये कदम बंगाल में सहानुभूति की लहर पाने की कोशिशों के तहत उठाया है।

आपको यहां पर बता दें कि स्‍वामी विवेकानंद का ताल्‍लुक सीधेतौर पर पश्चिम बंगाल से है। उनका असल में नाम नरेंद्र नाथ दत्‍त था। 1913 में शिकागो में आयोजित विश्‍व धर्म महासभा में उन्‍होंने भारत का प्रतिनिधित्‍व किया था। यहां पर दिए गए उनके भाषण को आज भी याद किया जाता है। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस के शिष्‍य थे और उन्‍होंने ही रामकृष्‍ण मिशन की स्थापना की थी। प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में कई बार उनकी कही गई बातों को याद करते हुए दिखाई देते हैं।

मेहंदी में मिलाएं ये 3 चीजें, सफेद बालों की परेशानी और हेयर फॉल से मिलेगी निजात 

White Hair Remedies in Hindi: बालों को काला बनाने के अलावा, सरसो इन्हें मजबूती भी प्रदान करता है। ये हेयर ग्रोथ में भी मददगार होते हैं

White Hair Remedies: कम उम्र में बाल सफेद होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं जिनमें से कुछ जेनेटिक होते हैं तो कई बार लापरवाही के कारण भी बाल सफेद हो जाते हैं। गलत खानपान और शरीर में पोषक तत्वों की कमी से भी असमय सफेद बालों की परेशानी से लोग जूझते हैं। आज के समय में स्ट्रेस व धूल-मिट्टी के बीच न केवल लोगों का स्वास्थ्य बल्कि उनके बाल भी प्रभावित हो रहे हैं। इस कारण उम्रदराज ही नहीं बल्कि नौजवानों के बाल भी सफेद हो रहे हैं। इनसे छुटकारा पाने के लिए लोग कई केमिकल युक्त हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। इनमें मौजूद रसायन बालों को ज्यादा डैमेज कर सकते हैं। जबकि घरेलू तरीकों के इस्तेमाल से बाल काले भी रहते हैं और उनसे साइड इफेक्ट भी नहीं होता है।

काले व चमकदार बालों के लिए मेहंदी का इस्तेमाल बेहद कारगर माना गया है। हालांकि, मेहंदी में कुछ चीजों को मिलाकर आप इसे और भी ज्यादा प्रभावी बना सकते हैं। आइए जानते हैं –

कपूर: मेंहदी में सबसे पहले कपूर को पिघलाएं और फिर अच्छी तरह मिक्स कर लें। इसके बाद इसमें पानी डालें और मिला लें। इस मिश्रण में कुछ देर बाद बादाम का तेल डालकर मिलाएं। इस बात का ध्यान रखें कि मेहंदी का यह पेस्ट गाढ़ा होना चाहिए। अब इस मिश्रण को बालों पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें। सूख जाने के बाद इसे अच्छी तरह धो लें। ऐसा चार सप्ताह तक करने से आपके बाल मजबूत, घने और काले हो जाएंगे। इस उपाय का इस्तेमाल आपको सप्ताह में सिर्फ एक बार करना है।


कॉफी: सबसे पहले कॉफी पाउडर को पानी में अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद मेहंदी पाउडर में इस कॉफी के घोल को डालें और मिला लें। फिर पानी धीरे-धीरे डालते हुए इसे मिक्स करें। ध्यान रहे पेस्ट हल्का गाढ़ा हो। इस हेयर मास्क को बालों और स्कैल्प पर अच्छी तरह लगाएं और कम से कम 2 से 3 घंटे के लिए छोड़ दें। इसके बाद बालों को पॉलीथिन से कवर कर लें ताकि रंग अच्छी तरह से चढ़ें। इसके बाद बालों को शैंपू से धोकर कंडीशनर लगा लें। इस मिश्रण को तीन हफ्तों में एक बार जरूर लगाएं, जल्द परिणाम दिखेगा।

सरसो: मेहंदी व सरसो के तेल का मिश्रण बनाने के लिए आप 1 कप सरसो तेल और 3 चम्मच के करीब मेहंदी पाउडर ले लें। आप चाहें तो मेहंदी की पत्तियां भी ले सकते हैं। एक लोहे की कड़ाही को गैस पर चढ़ाएं और उसमें सरसो का तेल डालें। तेल जब गर्म हो जाए तो गैस की आंच धीमी कर दें। अब उसमें मेहंदी मिलाएं। जब तक मिश्रण उबल नहीं जाता तब तक धीरे-धीरे चलाते रहें। तेल जब पूरी तरह से काला हो जाए और मेहंदी अच्छी तरह उसमें घुल जाए तो गैस बंद कर दें। कड़ाही को करीब 1 घंटे तक ढक कर रखें, तेल जब ठंडा हो जाए तो उसे छानकर किसी बोतल में रख लें। महीने भर तक सप्ताह में 2 दिन इस तेल से मालिश करने से आपको बेहतर परिणाम नजर आएंगे।

सिर्फ 7 दिन गुड़ खाने के बाद ऐसे परिणाम मिलेंगे कि आप हैरान रह जायेंगे 

सर्दी का सीजन शुरु होने वाला है और गांव में अगर आप जानते हैं तो गुड़ बनने की मीठी मीठी सी महक आने लगती है। गुड स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। गुड़ एक प्रकार से सेहत का खजाना है। सर्दियों में डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि थोड़े से गुड़ का सेवन जरुर करना चाहिए। शायद ही आपको मालूम हो कि गुड़ का सेवन करना सेहत के लिए कितना फायदेमंद होता है।

इससे मनुष्य की पाचन शक्ति तो मजबूत होती ही है साथ ही गुड़ खाने से हमारी बॉडी में हीमोग्लोबिन की कमी नही होती है। गुड़ का सेवन करने से शरीर से बहुत प्रकार की बीमारियां दूर होती है इसलिए हो सके तो गुड़ को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें जिससे शरीर में बहुत सारे फायदे देखने को मिलेंगे।

गुड़ के फायदे –

गुड़ घुटनों में जोड़ों के दर्द को कम करता है। गुड़ को अदरक के साथ मिलाकर खाने से घुटने के दर्द में काफी राहत मिलती है। गुड़ में बहुत मात्रा में कैल्शियम और फॉस्फोरस पाया जाता है जो कि हमारी हड्डियों के लिये बहुत ही फायदेमंद है।

गुड आयरन का बहुत बड़ा स्रोत माना जाता है यदि किसी का हीमोग्लोबिन कम है और ब्लड प्रेशर की समस्या है तो रोजाना थोड़ा सा गुड़ जरुर खाना चाहिए।

सर्दी में जुकाम से छुटकारा पाने में गुड़ काफी असरदार है। काली मिर्च और अदरक के साथ थोड़ा सा गुड़ खाते हैं तो सर्दी और जुखाम में आराम मिलता है अगर किसी को खांसी की शिकायत है तो उसे चीनी के बजाए गुड़ खाना चाहिए।

गले की खराश और जलन को दूर करने के लिये गुड़ को अदरक के साथ मिक्स करके खाने से गले की खराश दूर हो जाती है।

Diwali 2020 Puja: 14 नवंबर को है दीवाली, जानें शुभ मुहूर्त, लक्ष्‍मी पूजन का सही तरीका और आरती 

Diwali 2020 Puja: 14 नवंबर को है दीवाली, जानें शुभ मुहूर्त, लक्ष्‍मी पूजन का सही तरीका और आरती

Diwali Puja 2020: दीवाली (Diwali 2020) हिन्‍दुओं के सबसे प्रमुख और बड़े त्‍योहारों में से एक है. यह खुशहाली, समृद्धि, शांति और सकारात्‍मक ऊर्जा का द्योतक है. रोशनी का यह त्‍योहार बताता है कि चाहे कुछ भी हो जाए असत्‍य पर सत्‍य की जीत अवश्‍य होती है. मान्यता है कि रावण की लंका का दहन कर 14 वर्ष का वनवास काटकर भगवान राम अपने घर लौटे थे. इसी खुशी में पूरी प्रजा ने नगर में अपने राम का स्वागत घी के दीपक जलाकर किया. राम के भक्तों ने पूरी अयोध्या को दीयों की रोशनी से भर दिया था. दीवाली के दिन को मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) के जन्म दिवस के तौर पर मनाया जाता है. वहीं, यह भी माना जाता है कि दीवाली की रात को ही मां लक्ष्मी में भगवान विष्णु से शादी की थी. इस दिन श्री गणेश, मां लक्ष्‍मी और मां सरस्‍वती की पूजा (Diwali Puja) का विधान है. मान्‍यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि तथा बुद्धि का आगमन होता है. हिन्‍दुओं के अलावा सिख, बौद्ध और जैन धर्म के लोग भी दीवाली धूमधाम से मनाते हैं.

दीवाली कब है?
हिन्‍दू पंचांग के अनुसार दीवाली या दीपावली कार्तिक मास के कृष्‍ण पक्ष की अमावस्‍या को मनाई जाती है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार दीवाली हर साल अक्‍टूबर या नवंबर महीने में आती है. इस बार दीवाली 14 नवंबर को है. 

दीवाली की तिथि और शुभ मुहूर्त 
दीवाली / लक्ष्‍मी पूजन की तिथि: 14 नवंबर 2020 
अमावस्‍या तिथि प्रारंभ: 14 नवंबर 2020 को दोपहर 02 बजकर 17 मिनट से 
अमावस्‍या तिथि समाप्‍त: 15 नवंबर 2020  को सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक 
लक्ष्‍मी पूजा मुहुर्त: 14 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 28 मिनट से शाम 07 बजकर 24 मिनट तक
कुल अवधि: 01 घंटे 56 मिनट 

दीवाली पूजन की सामग्री 
लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा, लक्ष्मी जी को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, लाल कपड़ा, सप्तधान्य, गुलाल, लौंग, अगरबत्ती, हल्दी, अर्घ्य पात्र, फूलों की माला और खुले फूल, सुपारी, सिंदूर, इत्र, इलायची, कपूर, केसर, सीताफल, कमलगट्टे, कुशा, कुंकु, साबुत धनिया (जिसे धनतेरस पर खरीदा हो), खील-बताशे, गंगाजल, देसी घी, चंदन, चांदी का सिक्का, अक्षत, दही, दीपक, दूध, लौंग लगा पान, दूब घास, गेहूं, धूप बत्ती, मिठाई, पंचमेवा, पंच पल्लव (गूलर, गांव, आम, पाकर और बड़ के पत्ते), तेल, मौली, रूई, पांच यज्ञोपवीत (धागा), रोली, लाल कपड़ा, चीनी, शहद, नारियल और हल्दी की गांठ. 

लक्ष्‍मी पूजन की विधि
धनतेरस के दिन माता लक्ष्‍मी और भगवान गणेश की नई मूर्ति खरीदकर दीपावली की रात उसका पूजन किया जाता है. दीवाली के दिन इस तरह करें महालक्ष्‍मी की पूजा:

मूर्ति स्‍थापना: सबसे पहले एक चौकरी पर लाल वस्‍त्र बिछाकर उस पर मां लक्ष्‍मी और भगवान गणेश की प्रतिमा रखें. अब जलपात्र या लोटे से चौकी के ऊपर पानी छिड़कते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें.
ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्‍थां गतोपि वा । य: स्‍मरेत् पुण्‍डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि: ।। 

धरती मां को प्रणाम: इसके बाद अपने ऊपर और अपने पूजा के आसन पर जल छिड़कते हुए दिए गए मंत्र का उच्‍चारण करें. 
पृथ्विति मंत्रस्‍य मेरुपृष्‍ठ: ग ऋषि: सुतलं छन्‍द: कूर्मोदेवता आसने विनियोग: ।।  
ॐ पृथ्‍वी त्‍वया धृता लोका देवि त्‍वं विष्‍णुना धृता । 
त्‍वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम् नम:  ।।
पृथ्वियै नम: आधारशक्‍तये नम: ।।

आचमन: अब इन मंत्रों का उच्‍चारण करते हुए गंगाजल से आचमन करें.
ॐ केशवाय नम:ॐ नारायणाय नम: ॐ माधवाय नम: 

ध्‍यान: अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए मां लक्ष्‍मी का ध्‍यान करें.
या सा पद्मासनस्था विपुल-कटि-तटी पद्म-पत्रायताक्षी
गम्भीरार्तव-नाभि: स्तन-भर-नमिता शुभ्र-वस्त्रोत्तरीया ।
या लक्ष्मीर्दिव्य-रूपैर्मणि-गण-खचितैः स्‍वापिता हेम-कुम्भैः,
सा नित्यं पद्म-हस्ता मम वसतु गृहे सर्व-मांगल्य-युक्ता ।।

आवाह्न: अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए मां लक्ष्‍मी का आवाह्न करें.
आगच्‍छ देव-देवेशि! तेजोमय‍ि महा-लक्ष्‍मी !
क्रियमाणां मया पूजांगृहाण सुर-वन्दिते !
।। श्रीलक्ष्‍मी देवीं आवाह्यामि ।।

पुष्‍पांजलि आसन: अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए हाथ में पांच पुष्‍प अंजलि में लेकर अर्पित करें.
नाना रत्‍न समायुक्‍तंकार्त स्‍वर विभूषितम् ।
आसनं देव-देवेश ! प्रीत्‍यर्थं प्रति-गह्यताम् ।।
।। श्रीलक्ष्‍मी-देव्‍यै आसनार्थे पंच-पुष्‍पाणि समर्पयामि ।। 

स्‍वागत: अब श्रीलक्ष्‍मी देवी ! स्‍वागतम् मंत्र का उच्‍चारण करते हुए मां लक्ष्‍मी का स्‍वागत करें. 

पाद्य: अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए मां लक्ष्‍मी के चरण धोने के लिए जल अर्पित करें.
पाद्यं गृहाण देवेशिसर्व-क्षेम-समर्थेभो: !
भक्तया समर्पितं देविमहालक्ष्‍मी !  नमोsस्‍तुते ।।
।। श्रीलक्ष्‍मी-देव्‍यै पाद्यं नम: 

अर्घ्‍य: अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए मां लक्ष्‍मी को अर्घ्‍य दें.
नमस्‍ते देव-देवेशि ! नमस्‍ते कमल-धारिणि !
नमस्‍ते श्री महालक्ष्‍मीधनदा देवी ! अर्घ्‍यं गृहाण ।
गंध-पुष्‍पाक्षतैर्युक्‍तंफल-द्रव्‍य-समन्वितम् ।
गृहाण तोयमर्घ्‍यर्थंपरमेश्‍वरि वत्‍सले !
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै अर्घ्‍यं स्‍वाहा ।।

स्‍नान: अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा को जल से स्‍नान कराएं. फिर  दूध, दही, घी, शहद और चीनी के मिश्रण यानी कि पंचामृत से स्‍नान कराएं. आखिर में शुद्ध जल से स्‍नान कराएं.
गंगासरस्‍वतीरेवापयोष्‍णीनर्मदाजलै: ।
स्‍नापितासी मय देवी तथा शांतिं कुरुष्‍व मे ।।   
आदित्‍यवर्णे तपसोsधिजातो वनस्‍पतिस्‍तव वृक्षोsथ बिल्‍व: ।
तस्‍य फलानि तपसा नुदन्‍तु मायान्‍तरायश्र्च ब्रह्मा अलक्ष्‍मी: ।
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै जलस्‍नानं समर्पयामि ।।

वस्‍त्र: अब मां लक्ष्‍मी को मोली के रूप में वस्‍त्र अर्पित करते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें.
दिव्‍याम्‍बरं नूतनं हि क्षौमं त्‍वतिमनोहरम्  ।
दीयमानं मया देवि गृहाण जगदम्बिके ।।
उपैतु मां देवसख: कीर्तिश्च मणिना सह ।
प्रादुर्भूतो सुराष्‍ट्रेsस्मिन् कीर्तिमृद्धि ददातु मे । 
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै वस्‍त्रं समर्पयामि ।।

आभूषण: अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए मां लक्ष्‍मी को आभूषण चढ़ाएं.
रत्‍नकंकड़ वैदूर्यमुक्‍ताहारयुतानि च ।
सुप्रसन्‍नेन मनसा दत्तानि स्‍वीकुरुष्‍व मे ।।
क्षुप्तिपपासामालां ज्‍येष्‍ठामलक्ष्‍मीं नाशयाम्‍यहम् ।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वात्रिर्णद मे ग्रहात् ।।   
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै आभूषणानि समर्पयामि ।।

सिंदूर: अब मां लक्ष्‍मी को सिंदूर चढ़ाएं.
ॐ सिन्‍दुरम् रक्‍तवर्णश्च सिन्‍दूरतिलकाप्रिये ।
भक्‍त्या दत्तं मया देवि सिन्‍दुरम् प्रतिगृह्यताम् ।।
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै सिन्‍दूरम् सर्पयामि ।।

कुमकुम: अब कुमकुम समर्पित करें.
ॐ कुमकुम कामदं दिव्‍यं कुमकुम कामरूपिणम् ।
अखंडकामसौभाग्‍यं कुमकुम प्रतिगृह्यताम् ।।
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै कुमकुम सर्पयामि ।।

अक्षत: अब अक्षत चढ़ाएं.
अक्षताश्च सुरश्रेष्‍ठं कुंकमाक्‍ता: सुशोभिता: ।
मया निवेदिता भक्‍तया पूजार्थं प्रतिगृह्यताम् ।। 
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै अक्षतान् सर्पयामि ।।

गंध: अब मां लक्ष्‍मी को चंदन समर्पित करें.
श्री खंड चंदन दिव्‍यंगंधाढ्यं सुमनोहरम् ।
विलेपनं महालक्ष्‍मी चंदनं प्रति गृह्यताम् ।
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै चंदनं सर्पयामि ।।

पुष्‍प: अब पुष्‍प समर्पिम करें. 
यथाप्राप्‍तऋतुपुष्‍पै:विल्‍वतुलसीदलैश्च ।
पूजयामि महालक्ष्‍मी प्रसीद मे सुरेश्वरि ।
।। श्रीलक्ष्‍मी देव्‍यै पुष्‍पं सर्पयामि ।।

अंग पूजन: अब हर एक मंत्र का उच्‍चारण करते हुए बाएं हाथ में फूल, चावल और चंदन लेकर दाहिने हाथ से मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा के आगे रखें.
ॐ चपलायै नम: पादौ पूजयामि ।
ॐ चंचलायै नम: जानुनी पूजयामि । 
ॐ कमलायै नम: कटिं पूजयामि ।
ॐ कात्‍यायन्‍यै नम: नाभि  पूजयामि ।
ॐ जगन्‍मात्रै नम: जठरं पूजयामि ।
ॐ विश्‍व-वल्‍लभायै नम: वक्ष-स्‍थलं पूजयामि ।
ॐ कमल-वासिन्‍यै नम: हस्‍तौ पूजयामि ।
ॐ कमल-पत्राक्ष्‍यै नम: नेत्र-त्रयं पूजयामि ।
ॐ श्रियै नम: शिर पूजयामि ।

 अब मां लक्ष्‍मी को धूप, दीपक और नैवेद्य (मिष्‍ठान) समपर्ति करें. फिर उन्‍हें पानी देकर आचमन कराएं. 
इसके बाद ताम्‍बूल अर्पित करें और दक्षिणा दें. 
 फिर अब मां लक्ष्‍मी की बाएं से दाएं प्रदक्षिणा करें. 
 अब मां लक्ष्‍मी को साष्‍टांग प्रणाम कर उनसे पूजा के दौरान हुई ज्ञात-अज्ञात भूल के लिए माफी मांगे. 
 इसके बाद मां लक्ष्‍मी की आरती उतारें

मां लक्ष्‍मी की आरती
मां लक्ष्‍मी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥

उमा, रमा, ब्रम्हाणी,
तुम ही जग माता ।
सूर्य चद्रंमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

दुर्गा रूप निरंजनि,
सुख-संपत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

तुम ही पाताल निवासनी,
तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,
भव निधि की त्राता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

जिस घर तुम रहती हो,
ताँहि में हैं सद्‍गुण आता ।
सब सभंव हो जाता,
मन नहीं घबराता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

तुम बिन यज्ञ ना होता,
वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

महालक्ष्मी जी की आरती,
जो कोई नर गाता ।
उँर आंनद समाता,
पाप उतर जाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥

Diwali 2020: इस दिवाली 499 साल बाद बना तीन ग्रहों का दुर्लभ संयोग, जानिए किसका शुरू होगा अच्छा समय

Diwali 2020: कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला त्यौहार दिवाली इस साल 14 नवंबर को है. इस साल ग्रहों के अद्भुत संयोग बन रहा है. दिवाली पर धन और ज्ञान का कारक बृहस्पति ग्रह अपनी स्वराशि धनु और शनि अपनी स्वराशि मकर में रहेगा. जबकि शुक्र ग्रह कन्या राशि में रहेगा. ज्योतिषों के मुताबिक दिवाली पर ये संयोग 499 साल बाद बन रहा है.ऐसी स्थिति 1521 में देखी गई थी.

ज्योतिषियों के मुताबिक वृषभ, कर्क, तुला और कुंभ राशि के जातकों के लिए ये समय काफी शुभ रहने वाला है. जबकि मिथुन, सिंह और कन्या राशि के जातकों को थोड़ा संभलकर रहना होगा.दिवाली में विशेष रूप से माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. दिवाली साल के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है. रोशनी और रंगों का ये त्यौहार बहुत सारी खुशियां और उत्साह लेकर आता है.

इस त्यौहार के दिन हम भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं. दिवाली पर भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी का घर में स्वागत करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि दिवाली में मां लक्ष्मी का आगमन होता है.

इस दिन हनुमान जी, यमराज, चित्रगुप्त, कुबेर, भैरव, कुलदेवता और पितरों का पूजन जरूर करें. मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु का भी पूजन करें. पूजा के वक्त श्री सूक्त का पाठ करें. आप विषणुसहस्त्रनाम, गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं.