भितरघातियों पर कार्रवाई के लिए सिंधिया का दबाव, भाजपा संगठन लेगा सख्त एक्शन

भोपाल। । उपचुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद भाजपा संगठन की कोर टीम ने अगले चरण पर काम शुरू कर दिया है। इसमें उन लोगों की पड़ताल की जाएगी जिन्होंने उपचुनाव में पार्टी के खिलाफ काम किया या निष्क्रिय रहे। राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी भाजपा संगठन से जुड़े कई नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए दबाव बनाया हुआ है। बताया जा रहा है कि पार्टी पदाधिकारियों ने तय कर लिया है कि भितरघाती कितने ही बड़े कद का नेता क्यों ना हो, उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। इससे सभी स्तर पर यह संदेश जाएगा कि पार्टी ही सब कुछ है और उसके निर्णय को मानना सभी के लिए बंधनकारी है।

मालूम हो, उपचुनाव के दौरान पार्टी ने गौरीशंकर शेजवार, उनके बेटे मुदित शेजवार आदि को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण नोटिस जारी किया था। सत्ता के भविष्य से जुड़े उपचुनाव भाजपा के लिए बेहद अहम थे, लेकिन कांग्रेस से आए पूर्व विधायकों को प्रत्याशी बनाए जाने के कारण भाजपा के मूल कार्यकर्ता नाराज थे। बहुत सारे विधानसभा क्षेत्र में तो कार्यकर्ता और नेता मान गए, लेकिन कई जगह अंत तक भितरघात का डर बना रहा।

यही वजह है कि भाजपा उपचुनाव के परिणामों को लेकर आशंकित थी। इस बार के उपचुनाव में भाजपा छोड़कर कांग्रेस से उपचुनाव लड़ने वालों में सतीश सिकरवार, कन्हैयालाल अग्रवाल, पारूल साहू जैसे नाम प्रमुख हैं। पार्टी इनके खिलाफ तो कार्रवाई कर चुकी है। अब भितरघात या निष्क्रिय रहने वालों की बारी है।

सिंधिया और उनके समर्थकों पर उठाए थे सवाल

सिंधिया और उनके 22 समर्थक विधायक कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए तो कुछ जगह स्थानीय भाजपा नेताओं की नाराजगी सामने आई थी। सिंधिया ने इस बारे में पार्टी पदाधिकारियों को अवगत कराया। सिंधिया की वजह से भाजपा सत्ता में लौटी और उनका महत्व समझते हुए पार्टी नेताओं को चेतावनी दी गई। उपचुनाव के नतीजों से साबित हो गया कि सरकार बनाने के लिए उस समय पार्टी द्वारा लिया गया निर्णय सही था। अब इसी को उदाहरण बनाने हुए अनुशासन का चाबुक संगठन चलाएगा।

पार्टी के निर्णय पर नहीं उठेंगे सवाल

पार्टी संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि भाजपा का देशभर में जिस प्रकार का प्रभाव है, उसे संगठित रखने के लिए सख्त अनुशासन आवश्यक है। यह वरिष्ठ नेता से लेकर अंतिम पंक्ति के कार्यकर्ता तक के लिए समान रूप से लागू होना आवश्यक है। अन्य दलों के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के आने से यदि भाजपा को लाभ होता है तो इसे सभी को स्वीकार करना होगा, क्योंकि किसी को पार्टी में लेने या न लेने के फैसले अतिवरिष्ठ स्तर पर किए जाते हैं। जिसमें पार्टी हित होगा, वही सर्वमान्य होगा की नीति का पालन आवश्यक है। कुछ नेताओं पर कार्रवाई की जाती है तो पूरी पार्टी में यह संदेश स्थापित हो जाएगा। साथ ही भविष्य में पार्टी की दिशा और दशा को लेकर संगठन कार्य कर सकेगा।

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