सज़ा का इनाम: चुनाव में हटाये एसपी फिर पदस्थ किये

भोपाल । राज्य शासन अब अपने वर्किंग मोड़ में आ गयी । सबसे पहले सरकार ने उन आईपीएस अफसरों को पुरुष्कार देने का फैसला लिए जिन्हें कांग्रेस की सरकार की शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने हटाया था । दतिया और अशोक नगर जिलों के पुलिस अधीक्षक फिर से पदस्थ किये गए हैं।

अमन सिंह को दतिया और रघुवंश सिंह भदौरिया को फिर से अशोक नगर का पुलिस कप्तान बनाया गया है । इन दोनों को चुनाव आयोग ने हटाया था।

ग्वालियर में नशे का आदी युवक सोते समय हीटर से जिंदा जला

ग्वालियर । द्वितीय वाहिनी के सरकारी क्वार्टर में बुधवार की रात को एसएएफ के रिटायर्ड जवान के पुत्र अमर सिंह की हीटर से जिंदा जलकर मौत हो गई। अमर सिंह स्मैक के अलावा अन्य नशे का भी आदी था। मृतक युवक का परिवार रिटायर्ड होने के बाद प्रगति विहार स्थित नए मकान में शिफ्ट हो गया है, लेकिन अमर सिंह सरकारी क्वार्टर छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। कंपू थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर हादसे की जांच शुरू कर दी है।

द्वितीय वाहिनी एसएएफ के जवान रामेंद्र सिंह के नाम पर है। रामेंद्र सिंह रिटायर्ड हो चुके हैं। इस क्वार्टर में उनका बेटा अमर सिंह अब भी रह रहा था। अमर सिंह नशे का आदी होने के कारण परिवार के साथ नहीं रहता है। दो दिन पूर्व अमर सिंह को उसकी मां प्रगति विहार में स्थित नए मकान में ले जाने के लिए आई थी, लेकिन उसने जाने से इंकार कर दिया।पुलिस का प्राथमिक पड़ताल के बाद कयास है कि अमर सिंह रात को हीटर जलाकर लकड़ी के पलंग पर सो गया हाेगा। इसी दाैरान रात में हीटर पर कोई कपड़ा गिर जाने के कारण आग लग गई। आशंका है कि अमर सिंह के नशे में होने के कारण उसे आग लगने का पता नहीं चला। आग में झुलसकर अमर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही परिवार के लोग व पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद शव को रात में पीएम के लिए डेड हाउस पहुंचा दिया था। गुरुवार की सुबह युवक के शव का डॉक्टरी परीक्षण कराने के बाद पुलिस ने स्वजनों को सौप दिया। पुलिस ने आगजनी की घटना की जांच शुरू कर दी है।

पाकिस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यकों पर अत्‍याचार जारी, अब बोरिस जॉनसन ने उठाई आवाज

लंदन, एएनआइ। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (Boris Johnson)  ने बुधवार को संसदीय सत्र के दौरान पाकिस्‍तान से वहां की जनता के मौलिक अधिकारों की गारंटी देने की मांग की है।  सांसद खान ने सवाल किया था कि क्‍या सरकार को पाकिस्‍तान के सामने यह स्‍पष्‍ट कर देना चाहिए कि सरकार समर्थित अत्‍याचार का सिलसिला अब बंद करना जरूरी हो गया है। पाकिस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यकों के खिलाफ अत्‍याचार और जुल्‍म का सिलसिला जारी है और दुनिया के तमाम देश इससे अवगत हैं। का आग्रह किया। प्रधानमंत्री जॉनसन सांसद इमरान अहमद खान के सवाल का जवाब दे रहे थे।

जॉनसन ने जवाब दिया, ‘ मैं अपने आदरणीय दोस्‍त से सहमत हूं और मैं उन्‍हें बता सकता हूं कि इसलिए ही दक्षिण एशिया के मंत्री ने हाल में इस मामले को पाकिस्‍तान के मानवाधिकार मंत्री के समक्ष उठाया और हमने पाकिस्‍तान सरकार से आग्रह किया कि वे अपनी जनता के मौलिक अधिकारों को की गारंटी लें।’  अहमद खान ने संसद को संबोधित करने के दौरान कहा कि जब देश में कोविड-19 के खिलाफ जंग जारी है तो इसे मानवीय अन्‍यायों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और अल्‍पसंख्‍यकों के खिलाफ हो रहे जुल्‍म और अत्‍याचार को बंद करना चाहिए। 

अहमद खान ने पेशावर में हुए अहमदी शख्‍स महबूब अहमद खान का जिक्र किया और सवाल उठाया कि इस हत्‍या का अपराध पाकिस्‍तानी कानून के अंतर्गत आता है या नहीं। दरअसल, सांसद अहमद खान ने कहा, ‘रविवार को 82 वर्षीय महबूब अहमद खान की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हाल में पेशावर में मारे गए खन चौथे अहमदी मुसलमान हैं। उन्‍होंने पाकिस्तानी कानून के तहत अपराध किया था? वह खुद को अहमदी मुस्लिम कहते थे जिनका पंथ ‘सभी के लिए प्यार, किसी के लिए नफरत नहीं’ है। क्या मेरे आदरणीय मित्र इस बात पर मुझसे सहमत हैं कि पाकिस्तान में नफरत सड़कों पर खत्म हो जाती है। सरकार को पाकिस्तान को स्पष्ट करना चाहिए कि देश में अल्‍पसंख्‍यकों के खिलाफ होने वाले अत्‍याचारों को समर्थन दिया जाना समाप्त होना चाहिए?’

बता दें कि पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले अत्‍याचार व शोषण को लेकर कई बार आलोचनाओं का शिकार हो चुका है। यहां अल्पसंख्यकों के सरकारी अधिकारियों के हाथों उत्पीड़न के मामले सामने आते रहते हैं।सांसद अहमद खान ने कहा कि खुद को अहमदी मुसलमान बताना जिनका समुदाय सब के लिए प्रेम और किसी के लिए नफरत का भाव नहीं रखता है हगुनाह है। उन्‍होंने आगे कहा, क्‍या मेरे आदरणीय मित्र मेरे साथ इस बात को लेकर सहमत हैं कि पाकिस्‍तान में नफरत की हिंसा हो रही है जिसका अंत सड़कों पर होता है।

बनर्जी को दिखाए बागी तेवर, कैबिनेट बैठक नहीं पहुंचे, BJP में शामिल होने की चर्चा

पश्चिम बंगाल में गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के बाद से ही सियासी हलचल तेज है। अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगने के संकेत दिख रहे हैं। सूत्रों की मानें तो शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को बागी तेवर दिखाए हैं और वह आज हुई कैबिनेट बैठक में भी नहीं पहुंचे हैं। राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा है कि ममता बनर्जी की कैबिनेट में मंत्री शुभेंदु अधिकारी टीएमसी से नाता तोड़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी के काफी खास और भरोसेमंद नेता माने जाते हैं। 

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आज ममता बनर्जी की कैबिनेट बैठक में न सिर्फ शुभेंदु अधिकारी ही नदारद दिखे हैं, बल्कि उनके अलावा तीन अन्य मंत्री राजीव बनर्जी, गौतम देब और रवींद्र घोष भी बैठक में नहीं पहुंचे हैं। ऐसी चर्चा है कि ये लोग ममता बनर्जी से बगावत कर सकते हैं और टीएमसी से अलग राह चुन सकते हैं। खबर यह भी है कि शुभेंदू अधिकारी ने टीएमसी से अलग एक रैली भी की है, जहां ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं लगी थी। यही वजह है कि ऐसी अटकलों को बल मिल रहा है।

दरअसल, शुभेंदु अधिकारी समेत इन मंत्रियों की बगावत ऐसे वक्त में सामने आई है, जब हाल ही में अमित शाह ने पश्चिम बंगाल का दौरा किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को बंगाल में दो दिवसीय दौरे पर गए थे और जहां उन्होंने आगामी चुनाव को लेकर बीजेपी की तैयारियों का जायजा लिया था और पार्टी को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं से बातचीत की थी। शाह के दौरे के बाद से ही पश्चिम बंगाल की सियासत गर्म दिख रही है। शुभेंदू अधिकारी अगर टीएमसी का साथ छोड़ते हैं तो यह ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका इसलिए भी होगा, क्योंकि शुभेंदु का कई सीटों पर प्रभाव दिखता है।

कौन हैं शुभेंदु अधिकारी

शुभेंदु अधिकारी ममता सरकार में परिवहम, जल और सिंचाई मंत्री हैं। शुभेंदू को ममता बनर्जी का काफी भरोसेमंद नेता माना जाता है। वह पूर्व मेदिनीपुर जिले का मुख्यालय तमलुक संसदीय क्षेत्र से सांसद भी रहे हैं। माकपा के गढ़ को भेदने में शुभेंदु अधिकारी का भी योगदान है। 2009 से पहले तक तमलुक सीट माकपा का अभेद्य दुर्ग माना जाता रहा, लेकिन 2009 में हुए संसदीय चुनाव में इस सीट से तृणमूल के शुभेंदु अधिकारी निर्वाचित हुए और फिर माकपा का अभूतपूर्व पराभव शुरू हो गया। 2014 में हुए पिछले चुनाव में भी इस सीट से शुभेंदु जीते, लेकिन 2016 में राज्य विधानसभा चुनाव के बाद शुभेंदु अधिकारी संसदीय राजनीति से दूर हो गए और नंदीग्राम से विधायक चुने गए। लिहाजा 2016 में इस सीट के लिए उपचुनाव हुआ, जिसमें शुभेंदु के छोटे भाई दिव्येंदु अधिकारी उम्मीदवार बने और जीते भी।

बंगाल में अमित शाह ने 200 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा

केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह 5 नवंबर को दो दिवसीय दौरे पर पश्चिम बंगाल पहुंचे थे, जहां उन्होंने 13 जिलों के नेताओं के साथ एक बैठक की। इस बैठक में अमित शाह ने नेताओं से कहा कि आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 200 से अधिक सीटें जीतनी चाहिए। अमित शाह ने कहा कि ममता बनर्जी ने प्रशासन का राजनीतिकरण कर दिया है, राजनीति का अपराधीकरण कर दिया तो भ्रष्टाचार को संस्थागत कर दिया है। उन्होंने कहा कि टीएमसी कैडर ने साइक्लोन और कोरोना महामारी में सहायता वितरण में भी भ्रष्टाचार किया। 

भितरघातियों पर कार्रवाई के लिए सिंधिया का दबाव, भाजपा संगठन लेगा सख्त एक्शन

भोपाल। । उपचुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद भाजपा संगठन की कोर टीम ने अगले चरण पर काम शुरू कर दिया है। इसमें उन लोगों की पड़ताल की जाएगी जिन्होंने उपचुनाव में पार्टी के खिलाफ काम किया या निष्क्रिय रहे। राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी भाजपा संगठन से जुड़े कई नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए दबाव बनाया हुआ है। बताया जा रहा है कि पार्टी पदाधिकारियों ने तय कर लिया है कि भितरघाती कितने ही बड़े कद का नेता क्यों ना हो, उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। इससे सभी स्तर पर यह संदेश जाएगा कि पार्टी ही सब कुछ है और उसके निर्णय को मानना सभी के लिए बंधनकारी है।

मालूम हो, उपचुनाव के दौरान पार्टी ने गौरीशंकर शेजवार, उनके बेटे मुदित शेजवार आदि को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण नोटिस जारी किया था। सत्ता के भविष्य से जुड़े उपचुनाव भाजपा के लिए बेहद अहम थे, लेकिन कांग्रेस से आए पूर्व विधायकों को प्रत्याशी बनाए जाने के कारण भाजपा के मूल कार्यकर्ता नाराज थे। बहुत सारे विधानसभा क्षेत्र में तो कार्यकर्ता और नेता मान गए, लेकिन कई जगह अंत तक भितरघात का डर बना रहा।

यही वजह है कि भाजपा उपचुनाव के परिणामों को लेकर आशंकित थी। इस बार के उपचुनाव में भाजपा छोड़कर कांग्रेस से उपचुनाव लड़ने वालों में सतीश सिकरवार, कन्हैयालाल अग्रवाल, पारूल साहू जैसे नाम प्रमुख हैं। पार्टी इनके खिलाफ तो कार्रवाई कर चुकी है। अब भितरघात या निष्क्रिय रहने वालों की बारी है।

सिंधिया और उनके समर्थकों पर उठाए थे सवाल

सिंधिया और उनके 22 समर्थक विधायक कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए तो कुछ जगह स्थानीय भाजपा नेताओं की नाराजगी सामने आई थी। सिंधिया ने इस बारे में पार्टी पदाधिकारियों को अवगत कराया। सिंधिया की वजह से भाजपा सत्ता में लौटी और उनका महत्व समझते हुए पार्टी नेताओं को चेतावनी दी गई। उपचुनाव के नतीजों से साबित हो गया कि सरकार बनाने के लिए उस समय पार्टी द्वारा लिया गया निर्णय सही था। अब इसी को उदाहरण बनाने हुए अनुशासन का चाबुक संगठन चलाएगा।

पार्टी के निर्णय पर नहीं उठेंगे सवाल

पार्टी संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि भाजपा का देशभर में जिस प्रकार का प्रभाव है, उसे संगठित रखने के लिए सख्त अनुशासन आवश्यक है। यह वरिष्ठ नेता से लेकर अंतिम पंक्ति के कार्यकर्ता तक के लिए समान रूप से लागू होना आवश्यक है। अन्य दलों के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के आने से यदि भाजपा को लाभ होता है तो इसे सभी को स्वीकार करना होगा, क्योंकि किसी को पार्टी में लेने या न लेने के फैसले अतिवरिष्ठ स्तर पर किए जाते हैं। जिसमें पार्टी हित होगा, वही सर्वमान्य होगा की नीति का पालन आवश्यक है। कुछ नेताओं पर कार्रवाई की जाती है तो पूरी पार्टी में यह संदेश स्थापित हो जाएगा। साथ ही भविष्य में पार्टी की दिशा और दशा को लेकर संगठन कार्य कर सकेगा।

आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का रोडमैप जारी, किसानों की आमदनी दोगुनी और रोजगार बढ़ाने का दावा

भोपाल, । छह माह के लंबे मंथन के बाद शिवराज सरकार ने आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का रोडमैप 2023 तैयार कर लिया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को भोपाल के मिंटो हॉल में आयोजित कार्यक्रम में इसे जारी करते हुए कहा कि यह चुनौती को अवसर में बदलने का रोडमैप है। इसमें दावा किया गया है कि किसानों की आय दोगुनी करने के साथ रोजगार के मौके बढ़ाये जाएंगे। इसके लिए निवेश को बढ़ावा देने के साथ कृषि को प्रसंस्करण से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंबल (अटल प्रोग्रेस वे) एक्सप्रेस वे और नर्मदा एक्सप्रेस वे सिर्फ सड़क ही नहीं बल्कि विकास के मार्ग होंगे। इनके दोनों ओर औद्योगिक पार्क विकसित किये जाएंगे। भोपाल-इंदौर एक्सप्रेस वे को आदर्श बनाया जाएगा। निवेश को बढ़ावा देने के साथ जरूरी धनराशि का इंतजाम बजट के बाहर से किया जाएगा। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम में मंत्री, सांसद, विधायक, कमिश्नर और कलेक्टर शामिल हुए।

खाली हो गया था खजाना

मुख्यमंत्री ने कोरोनाकाल का जिक्र करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण के समय हमारे सामने आर्थिक चुनौतियां थीं। एक समय तो ऐसा भी आया था, जब खजाना खाली हो गया था। अधिकारियों ने कर्मचारियों का वेतन काटने का प्रस्ताव दिया पर हमने नकार दिया और किसी भी कर्मचारी का वेतन नहीं रुकने दिया। उधार लेकर काम चलाया पर अब स्थितियां धीरे-धीरे सुधर रही हैं। जहां चाह होती है, वहां राह को निकलना ही होता है। मुख्यमंत्री यह नहीं कह सकता है कि मैं क्या करूं।

प्रत्येक 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

मुख्यमंत्री ने कहा कि रोडमैप के क्रियान्वयन को लेकर लगातार समीक्षा होगी। प्रत्येक तीस दिन में विभागों को रिपोर्ट देनी होगी। इसके आधार पर मैं समीक्षा करूंगा। विभागीय मंत्री और प्रमुख अधिकारियों से उन्होंने कहा कि रोडमैप को पूरा करने के लिए कार्ययोजना बनाकर काम करें। दीनदयाल उपाध्याय समितियों के माध्यम से रोडमैप के क्रियान्वयन पर गांव-गांव में नजर रखी जाएगी।

खेती को प्रसंस्करण से जोड़कर लाएंगे उन्नति

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती को प्रसंस्करण से जोड़कर आर्थिक उन्नति लाई जाएगी। ओंकारेश्वर जलाशय में सोलर पैनल के माध्यम से बिजली बनाई जाएगी। सिंचाई के लिए जल की एक-एक बूंद का उपयोग करेंगे। किसानों को कल्याण निधि दी जाएगी। गरीबों का राज्य के संसाधन पर बराबरी का हक होगा। बजट में जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी का फार्मूला लागू करेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ महिला सशक्तिकरण पर ध्यान दिया जाएगा। मानसून में पर्यटन को बढ़ाने के लिए बफर में सफर को बढ़ावा दिया जाएगा। अमरकंटक, रामायण सर्किट, तीर्थंकर सर्किट, नर्मदा परिक्रमा, ग्रामीण सक्रिट जैसी थीम पर पर्यटन सर्किट विकसित किये जाएंगे।

तीन साल में देश का अग्रणीय राज्य बनेगा मध्य प्रदेश

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तारीफ करते हुए कहा कि जब सभी राज्यों का ध्यान कोरोना महामारी पर ही था,तब मध्य प्रदेश ने प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने का रोडमैप बनाया। इसके परिणाम हमें आने वाले दिनो में देखने को मिलेंगे। यह विकास का रोडमैप है। मध्य प्रदेश देश के केंद्र में है और यहां लॉजिस्टक हब तैयार किया जा सकता है। निजी क्षेत्र के सहयोग से विकास पर फोकस किया है। मुझे उम्मीद है कि तीन साल में रोडमैप को लागू करके प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शुमार होगा।

वहीं, खजुराहो से सांसद और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के रोडमैप के विमोचन पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान को पूरा करने में आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश का रोडमैप मील का पत्थर साबित होगा। इसका फायदा सभी क्षेत्रों को मिलेगा। मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस ने कहा कि चार राष्ट्रीय वेबिनार के माध्यम से देश और विदेश के विशेषज्ञों के साथ मंथन और ऑनलाइन सुझावों पर विचार करने के बाद रोडमैप तैयार किया गया है।

अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन का भारत से है कनेक्शन, नागपुर में रहते हैं रिश्तेदार

अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन का भारत के साथ कनेक्शन सामने आया है। बाइडन के दूरदराज के कुछ रिश्तेदार महाराष्ट्र के नागपुर शहर में 1873 से रह रहे हैं। जो बाइडन ने इनके बारे में 2013 और 2015 में कुछ मौकों पर जिक्र भी किया था। नागपुर में बाइडन परिवार के कुछ लोगों ने मंगलवार को यह दावा किया। बाइडन जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति थे और 2013 में मुंबई आए थे तो उस वक्त उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि उनके दूर दराज के कुछ रिश्तेदार भारत की वित्तीय राजधानी में रहते हैं। मुंबई में 2013 में एक कार्यक्रम में और फिर वाशिंगटन में 2015 में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि 1972 में सीनेटर बनने के बाद उन्हें भारत में अपने एक रिश्तेदार का पत्र मिला था और पता चला कि उनके परिवार के एक पूर्वज ईस्ट इंडिया कंपनी में काम करते थे।

नागपुर के लेस्ली बाइडन ने यह पत्र लिखा था और उनके पड़पोते नागपुर में रहते हैं । पत्र में दावा किया गया कि उनका परिवार 1873 से ही यहां रह रहा है। लेस्ली की पड़पोती सोनिया बाइडन फ्रांसिस नागपुर में मनोचिकित्सक हैं। उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा कि नागपुर और दूसरी जगहों पर रहने वाले बाइडन परिवार के लोग अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन की जीत से काफी खुश हैं।

सोनिया ने कहा कि लेस्ली बाइडन नागपुर में रहते थे और वह भारत लॉज एंड हॉस्टल, और भारत कैफे के प्रबंधक थे । उनका 1983 में निधन हो गया। सोनिया ने कहा कि ‘इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया के 28 मार्च-चार अप्रैल 1981 के अंक को पढ़कर लेस्ली को तत्कालीन सीनेटर जो बाइडन के बारे पता चला। सोनिया ने कहा, ”15 अप्रैल 1981 को लेस्ली ने जो बाइडन को एक पत्र लिखा। जो बाइडन ने 30 मई 1981 को इसका जवाब दिया जिसमें उन्होंने कहा कि भारत से आए पत्र को देखकर उन्हें काफी खुशी हुई और बाइडन की वंशावली के बारे में पूछा।”

सोनिया के बड़े भाई और मर्चेंट नेवी के पूर्व कर्मचारी इयान बाइडन (44) भी नागपुर में रहते हैं । उन्होंने कहा कि लेस्ली और जो बाइडन ने पूर्वज जॉन बाइडन और उनकी पत्नी एनी बीमाउंट के बारे में सूचनाएं साझा की थी। बाइडन परिवार ने इन पत्रों को दिखाते हुए दावा किया कि ये पत्र व्यवहार लेस्ली और जो बाइडन के बीच हुए थे। क्या नागपुर में रहने वाले बाइडन परिवार के लोग जनवरी में जो बाइडन के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के समारोह में हिस्सा लेंगे, इस पर परिवार के लोगों ने कहा कि वे बाइडन को शुभकामनाएं देते हैं।

सोनिया ने कहा, ”नागपुर, मुंबई, न्यूजीलैंड और अमेरिका में रहने वाले बाइडन (वंश) परिवार के लोग लेस्ली के पड़पोते लेस्ली डेविड बाइडन की शादी में जनवरी 2018 में इकट्ठा हुए थे।” सोनिया ने कहा कि लेस्ली बाइडन के परिवार के लोग नागपुर, मुंबई, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में रहते हैं । नागपुर में लेस्ली की बहू एंजेलिना बाइडन भी रहती हैं।

बंबई शेयर बाजार में 24 जुलाई 2013 को एक कार्यक्रम में जो बाइडन ने कहा था कि भारत और यहां मुंबई आना सम्मान की बात है। मुझे याद है कि जब मैं 1972 में अमेरिका में सीनेट के लिए निर्वाचित हुआ तो मुझे यहां से पत्र मिला था। मुझे अफसोस है कि मैंने आगे खोजखबर नहीं ली। बाइडन ने सात साल पहले मुंबई में कहा, ”श्रोताओं में से कुछ वंशावली विशेषज्ञ इस बारे में पता कर सकते हैं। मुंबई में बाइडन नाम के एक व्यक्ति का मुझे पत्र मिला था।”

वॉशिंगटन में 2015 में अपने संबोधन में बाइडन ने दावा किया कि उनके एक पूर्वज जार्ज बाइडन ईस्ट इंडिया ट्रेडिंग कंपनी में कैप्टन थे और उन्होंने एक भारतीय महिला से शादी की थी। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने भारत में ही बसने का फैसला किया था। बाइडन ने कहा था, ”मुंबई में बाइडन परिवार के पांच लोग रहते हैं। जो बाइडन ने कहा था कि किसी ने उन्हें मुंबई में रहने वाले बाइडन परिवार के लोगों के फोन नंबर भी दिए थे। उन्होंने श्रोताओं को बताया था कि अभी उन्होंने बात नहीं की है लेकिन आगे वह ऐसा करने की सोच रहे हैं।”

दिल्ली को अनलॉक करने पर हाई कोर्ट की केजरीवाल को फटकार- केस डबल होने का कर रहे इंतजार?

नई दिल्ली
कोरोना वायरस की तीसरी लहर का सामना कर रही राजधानी दिल्ली को अनलॉक करने को लेकर हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि दूसरी राज्य सरकारें जहां कोरोना वायरस को लेकर सख्ती बरकरार रखे हुए हैं, वहीं दिल्ली को लगातार अनलॉक किया जा रहा है। कोर्ट ने केजरीवाल सरकार से सवाल किया कि क्या वह मामलों के दोगुने होने का इंतजार कर रही है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि वह स्टेटस रिपोर्ट दायर कर बताए कि उसने कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए पिछले दो हफ्तों में क्या कदम उठाए। मामले में अगली सुनाई 18 नवंबर को होगी।

दिल्ली में कोरोना को बढ़ते मामलों पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा, ‘दिल्ली में आंकड़े प्रति दिन 8000 से ऊपर हैं। क्या हम आंकड़ों के डबल होने का इंतजार कर रहे हैं?’ कोर्ट ने दिल्ली को अनलॉक किए जाने पर सवाल भी उठाए। कोर्ट ने कहा, ‘ऐसी स्थिति में दिल्ली सरकार ने कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए क्या किया? स्कूलों को खोला जा रहा है। तहबाजारी और साप्ताहिक बाजार अपने पुराने रूप में लौट आए हैं। दिल्ली सरकार बताए कि हमें इस याचिका का दायरा टेस्ट से आगे बढ़ाते हुए किट की उपलब्धता या अन्य मुद्दों तक क्यों नहीं लेकर जानी चाहिए?’

दिल्ली सरकार ने अपने जवाब में हाई कोर्ट के सामने कहा कि कई जगह ऐसी है जहां कोरोना के मामले कम हैं। नॉर्थ ईस्ट दिल्ली इसमें शामिल है। हालांकि नई दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली में केस बढ़ रहे हैं। कोर्ट दिल्ली सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं नजर आया। कोर्ट ने कहा, ‘हम सभी मौजूदा स्थिति से वाकिफ हैं। हममें से कोई नहीं जानता कि क्या होगा। दिल्ली सरकार ने क्यों अपने सारे पंख खोल दिए हैं जबकि दूसरे राज्यों में संक्रमण को रोकने के लिए बंदी पर काम हो रहा है।’

दिल्ली हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब मामले में याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि वह कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। बावजूद इसके न उन्हें बेड मिला और न कोई अस्पताल। आखिरकार एक दोस्त की मदद से एक नर्सिंग होम में दाखिला मिला। पर यहां एक ऑक्सीजन मीटर के अलावा कोई मदद नहीं है।

कोर्ट ने दिल्ली सरकार को चेताते हुए कहा कि त्योहारों के मौसम में बाजारों में बड़े पैमाने पर भीड़ जुटती नजर आ रही है, जो संक्रमण को और बढ़ाएगी। दिल्ली सरकार यदि कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए अपने नीति को लेकर गंभीर है तो उसे पब्लिक प्लेस पर मास्क के इस्तेमाल और भीड़ जमा होने से रोकना होगा। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि वह स्टेटस रिपोर्ट दायर कर बताए कि उसने कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए पिछले दो हफ्तों में क्या कदम उठाए।

Bihar Election 2020: 12 और सीटें हासिल कर RJD ने तैयार किया सरकार बनाने का फॉर्मूला 


Bihar Result News: बिहार के चुनाव परिणाम आए 48 घंटे से ज्यादा का वक्त बीत चुका है लेकिन अभी तक कोई भी गठबंधन राज्यपाल के पास नहीं पहुंचा है. इस बीच खबर है कि महागठबंधन की अगुवा – राष्ट्रीय जनता दल ने अपने कुछ पूर्व सहयोगियों से संपर्क किया है.

नई दिल्ली/पटना. बिहार चुनाव (Bihar Eelection 2020) में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन  (NDA) को जनता ने एक बार फिर मौका दिया है. हालांकि इस बार समीकरण थोड़े बदले हैं. हर बार छोटे भाई की भूमिका रहने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP), राज्य में दूसरे नंबर का दल बन कर उभरी वहीं, सबसे ज्यादा सीटें पाकर नंबर 1 बने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पास सरकार बनाने के लिए सिर्फ 12 सीटों की कमी है. जनता दल यूनाइटेड (JDU) को को इस बार बहुत नुकसान हुआ और वह सिर्फ 43 सीटों पर ही जीत पाई है. हालांकि भाजपा ने स्पष्ट किया है कि राज्य के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ही रहेंगे.

इस बीच महागठबंधन भी अपने दांव पेच आजमा रहा है. राजद की अगुवाई वाले पांच दलों के महागठबंधन ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है. वह अपने दो पूर्व सहयोगियों से संपर्क में है जो फिलहाल NDA का हिस्सा हैं. अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राजद- मुकेश सहनी की अगुवाई वाले विकासशील इन्सान पार्टी और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के हिन्दुस्तानी आवामा मोर्चा सेक्युलर के संपर्क में है. साथ ही पार्टी हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से भी बात कर रही है. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अगर पांच सीटें AIMIM और चार सीटें (VIP-HAM) की महागठबंधन के हिस्से आ जाएं तो बात बन सकती है.

बता दे दोनों दल पहले तो महागठबंधन का हिस्सा थे, लेकिन चुनाव के ठीक पहले बीजेपी की अगुवाई वाले NDA में चले गए थे. रिपोर्ट के अनुसार राजद सूत्र ने कहा कि एक कोशिश करने में क्या जाता है? अगर VIP और HAM हमारे साथ आ जाएं तो यह निश्चित है कि यह उनके लिए फायदे की बात होगी. हम उन्हें एनडीए से बेहतर जगह देंगे. AIMIM हमें समर्थन करने के लिए राजी है.’