लद्दाख घाटी में तैनात होगी उन्नत सारंग तोप, मारक क्षमता के आगे नहीं टिक सकेंगे दुश्मन

जबलपुर, । मध्य प्रदेश स्थित वाहन निर्माणी जबलपुर (VFJ) ने पुरानी 130 एमएम सारंग तोप को उन्नत (अपग्रेड) कर 155 एमएम बनाकर हाल ही में सेना के हवाले किया है। अब रक्षा मंत्रालय ने सेना की इससे जुड़ी जरूरत जल्द पूरा करने के निर्देश आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) को दिए हैं। कुल 280 पुरानी सारंग तोपों को उन्नत बनाने की जवाबदारी दो निर्माणियों के बजाय सिर्फ वीएफजे को सौंप दी है। उन्नत सारंग तोप में 28 के बजाय 38 किमी की अचूक मारक क्षमता ने सैन्य जवानों व अधिकारियों को भी कायल बना दिया है, इसलिए सेना ने यह तोप लद्दाख घाटी में तैनात करके देश के दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है।

गौरतलब है कि ओएफबी ने करीब डेढ़ साल पहले पुरानी तोपों को अपग्रेड करने की जवाबदारी गन कैरिज फैक्ट्री (GCF) और वीएफजे को संयुक्त रूप से सौंपी थी। इसके बाद वीएफजे व जीसीएफ ने पुरानी तोपों के सभी कलपुर्जो को खोलकर व बैरल बदलकर उन्नत बनाने का काम किया। इस काम से मुक्त हुए जीसीएफ को बोर्ड मुख्यालय अब धनुष तोप (155 एमएम/45 कैलिबर) को और भी बेहतरीन बनाने के साथ-साथ नया काम देने की योजना बना रहा है।

इसलिए कर रहे उन्नत: अपग्रेड तोप की निशाना साधने की क्षमता में करीब 10 किमी और विध्वंसक (मारक) क्षमता में वृद्घि हुई है।

सारंग की यह खासियत : अपग्रेड सारंग तोप लक्ष्य पर अचूक वार करने में सक्षम है। यह अत्याधुनिक तोप अब भी वजन में बेहद हल्की है। इस तोप को किसी भी वाहन से जोड़कर (टो कर) या धक्का देकर यहां से वहां जल्द ले जाया जा सकता है।

इंजनयुक्त बनाने पर विचार : अपग्रेड सारंग तोप का लाजवाब प्रदर्शन देखकर सैन्य अधिकारियों ने अब इसे इंजनयुक्त बनाने की जरूरत पर रक्षा मंत्रालय से चर्चा की है।

वीएफजे के पीआरओ राजीव कुमार अग्रवाल ने बताया कि ओएफबी के निर्देश पर इस निर्माणी में 280 सारंग तोप अपग्रेड करने की योजना बनाई गई है।

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