सेल्फी की सनक में गई जान:कनपटी से पिस्टल सटाकर सेल्फी लेते वक्त अचानक चली गोली; अस्पताल में मौत

दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में सेल्फी की सनक में एक युवक की जान चली गई। दरअसल, यहां बिसरख थाना क्षेत्र में एक युवक अपनी कनपटी से पिस्टल सटाकर सेल्फी ले रहा था। पिस्टल लोडेड थी, इसी दौरान अचानक गोली चल गई। जो उसके पेट में लगी। इससे युवक घायल हो गया। उसे शारदा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम को भेजते हुए मृतक के एक दोस्त को हिरासत में लिया है। पुलिस घटना को संदिग्ध मान रही है।

असलहे से खेलना पड़ा भारी

बादलपुर थाना क्षेत्र के अच्छेजा निवासी नकुल उर्फ नंदू शर्मा शनिवार की शाम धर्मपुरा के रहने वाले अपने साथी सौरभ मावी (22 साल) के साथ पतवाड़ी गांव में अपने एक मित्र सचिन से मिलने के लिए कार से पतवाडी गांव जा रहा था। जब उसकी कार एसीई चौराहे के पास पहुंची तो उसी दौरान रास्ते में सौरभ पिस्टल से खेलने लगा। इसी दौरान उसने पिस्टल कनपटी से सटाकर सेल्फी लेने लगा। उसे यह मालूम नहीं था कि चेंबर में गोली है। उसने खेल-खेल में जैसे ट्रिगर दबाया गोली चल गई। पिस्टल से निकली गोली सौरभ के पेट में लगी। तत्काल उसे शारदा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

दोस्त नंदू को हिरासत में लिया गया

डीसीपी नोएडा सेंट्रल हरिश्चंद्र ने बताया कि सौरभ के साथी नंदू ने इसकी सूचना बिसरख थाने को दी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। इसके अलावा नंदू को हिरासत में लिया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है। कारण नंदू ही घटना का चश्मदीद है। पिस्टल व गाड़ी को कब्जे में लिया गया है। फॉरेंसिक टीम ने जांच की है। यह पता लगाया जा रहा है कि पिस्टल लाइसेंसी थी या नहीं।

कब्र से निकाला गया काजल किन्नर का शव, ग्वालियर में दोबारा होगा पीएम, मुखिया नेहा ने दूसरे किन्नर पर लगाया हत्या का आरोप

ग्वालियर। मुरैना में कुछ दिनों पूर्व मौत के बाद दफनाई गई काजल किन्नर के शव का देाबारा से पीएम कराया जाएगा। यहंा आपको बता दें कि मुरैना के अम्बाह में काजल किन्नर का चार दिन पूर्व निधन हो गया था जिसके बाद गोपनीय रूप से उसके शव को सुपुर्दे खाक कर दिया गया था लेकिन किन्नरेां की मुखिया नेहा ने काजल की हत्या की आशंका जताई थी और चेली रबिया पर हत्या का आरोप लगाया था जिसके बाद काजल किन्नर के शव को कब्रगाह से निकाल कर अंबाह अस्पताल भेजा गया और वहंा से ग्वालियर भेजा जाएगा। संभवतः देश में यह पहला मामला होगा जहंा किसी किन्नर के शव का कब्र से निकालकर उसका पोस्टमार्टम कराया जाएगा नियम के अनुसार किन्नरों का अंतिम संस्कार अंत्यत गोपनीय रूप से किया जाता है।

भारत-चीन ने LAC पर तनाव कम करने के लिए जताई सहमति, जल्द होगी एक और बैठक

लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी भारत-चीन में सीमा विवाद के बीच छह नवंबर को हुई दोनों पक्षों की कोर कमांडर स्तर की वार्ता के बाद भारत ने बयान जारी किया है। लद्दाख के चुशूल सेक्टर में हुई वार्ता को नई दिल्ली ने रचनात्मक बताया है। इसके अलावा, दोनों ही देशों के बीच जल्द ही अगली बैठक भी होगी। दोनों ही पक्ष सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए राजी हुए हैं।

आठवें दौर की कोर कमांडर स्तर की वार्ता के बाद भारत ने रविवार को बयान जारी कर कहा, ”भारत-चीन सीमा क्षेत्रों के पश्चिमी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर डिस-एंगेजमेंट को लेकर दोनों पक्षों में गहराईपूर्ण और रचनात्मक वार्ता हुई।”

केंद्र सरकार ने आगे कहा, ”दोनों पक्षों (भारत-चीन) ने नेताओं की सहमति को ईमानदारी से लागू करने पर सहमत हुए हैं। इसमें सीमावर्ती सैनिकों को सयंम बरतने के लिए सुनिश्चित करना और किसी भी गहतफहमी से बचना शामिल है। अब आगे की चर्चा अगली बैठक में होगी, जिसे जल्द ही आयोजित किया जाएगा।”

भारत-चीन के बीच अप्रैल महीने से एलएसी पर सीमा विवाद जारी है। दोनों पक्षों के बीच जून महीने में तनाव तब चरम पर पहुंच गया था, जब गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों में हिंसक टकराव हो गया। इस दौरान, चीनी जवानों ने भारतीय जवानों पर धोखे से हमला बोल दिया था, जिसमें भारत के 20 जवान भी शहीद हो गए थे। हालांकि, चीन के भी कई सैनिक मारे गए थे। इसके बाद भी अगस्त महीने में चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश की थी, जिसे जवानों ने नाकाम कर दिया था।  

आठवें दौर की कोर कमांडर स्तर की वार्ता के बाद जारी बयान में आगे कहा गया,”भारत और चीन सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से संवाद और संचार बनाए रखने के लिए सहमत हुए। इस बैठक में वार्ता को आगे बढ़ाते हुए, अन्य मुद्दों के निपटारे पर भी फोकस किया गया, ताकि संयुक्त रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखी जा सके। भारत और चीन ने जल्द ही एक और दौर की बैठक करने पर सहमति व्यक्त की है।”

अमेरिका चुनाव: जीत के बाद बोलीं कमला हैरिस- इस कार्यकाल में पहली महिला हो सकती हूं आखिरी नहीं

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में जो बिडेन और उप-राष्ट्रपति चुनाव कमला हैरिस के समर्थक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए डेलावेयर के विलमिंगटन में एकत्रित हुए हैं। नए राष्ट्रपति जो बिडेन को मंच पर जाने के दौरान उनका जोर-शोर से स्वागत किया गया। उन्होंने समर्थकों को धन्यवाद दिया और कहा, “मैं लाल राज्यों और नीले राज्यों को नहीं देखता, बल्कि केवल संयुक्त राज्य को देखता हूं।” जो बिडेन ने कहा- मुझे उस अभियान पर गर्व है जो हमने एक साथ में किया। यह सबसे विविध अभियान था जिसे एक साथ रखा चलााया गया।

चुनी गईं उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने समर्थकों को धन्यवाद दिया और कहा, “आपने आशा, शालीनता, विज्ञान और सच्चाई को चुना। आपने जो बिडेन को चुना। ”हैरिस ने जो बिडेन को खुद को दोस्त के रूप में चुनने के लिए भी धन्यवाद दिया और अमेरिका की महिलाओं से कहा, “मैं इस कार्यालय में पहली महिला हो सकती हूं, मैं आखिरी नहीं हो सकती। अमेरिका ने एक संदेश भेजा है, कि यह संभावनाओं का देश है। ”उन्होंने आगे कहा, “अमेरिका तैयार है, और इसलिए जो और मैं है।”

गौरतलब है कि कमला हैरिस अमेरिका की पहले अश्वेत महिला उपराष्ट्रपति बनने जा रही हैं। कैलिफोर्निया की सीनेटर कमला दक्षिण एशियाई मूल की पहली अमेरिकी उपराष्ट्रपति भी होंगी। यह पहली बार है जब दक्षिण एशियाई मूल की कोई महिला सरकार में इतने बड़े ओहदे पर काम करेगी।

शनिवार को (स्थानीय समयानुसार, शुक्रवार की देर रात) को अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए डमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडेन ने कहा कि हम इस कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के लिए पहले ही दिन से अपनी योजना को अमल में लाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘अमेरिकी नागरिकों ने डेमोक्रेट्स को कोरोना वायरस संकट, आर्थिक मंदी और नस्लवाद की समस्या पर कार्रवाई करने के लिए चुना है और हम पहले दिन से ही इस पर काम करेंगे।’

जो बाइडेन के इस ऐलान से साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका में एक बार फिर से कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए कुछ कड़े प्रावधान लागू किए जा सकते हैं। जिस तरह से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, वैसे में या तो फिर से शहरों को लॉक किया जा सकता है या फिर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि लगातार तीन दिनों से अमेरिका में कोरोना वायरस के नए मामलों में बड़ा इजाफा देखने को मिल रहा है। 

लद्दाख घाटी में तैनात होगी उन्नत सारंग तोप, मारक क्षमता के आगे नहीं टिक सकेंगे दुश्मन

जबलपुर, । मध्य प्रदेश स्थित वाहन निर्माणी जबलपुर (VFJ) ने पुरानी 130 एमएम सारंग तोप को उन्नत (अपग्रेड) कर 155 एमएम बनाकर हाल ही में सेना के हवाले किया है। अब रक्षा मंत्रालय ने सेना की इससे जुड़ी जरूरत जल्द पूरा करने के निर्देश आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) को दिए हैं। कुल 280 पुरानी सारंग तोपों को उन्नत बनाने की जवाबदारी दो निर्माणियों के बजाय सिर्फ वीएफजे को सौंप दी है। उन्नत सारंग तोप में 28 के बजाय 38 किमी की अचूक मारक क्षमता ने सैन्य जवानों व अधिकारियों को भी कायल बना दिया है, इसलिए सेना ने यह तोप लद्दाख घाटी में तैनात करके देश के दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है।

गौरतलब है कि ओएफबी ने करीब डेढ़ साल पहले पुरानी तोपों को अपग्रेड करने की जवाबदारी गन कैरिज फैक्ट्री (GCF) और वीएफजे को संयुक्त रूप से सौंपी थी। इसके बाद वीएफजे व जीसीएफ ने पुरानी तोपों के सभी कलपुर्जो को खोलकर व बैरल बदलकर उन्नत बनाने का काम किया। इस काम से मुक्त हुए जीसीएफ को बोर्ड मुख्यालय अब धनुष तोप (155 एमएम/45 कैलिबर) को और भी बेहतरीन बनाने के साथ-साथ नया काम देने की योजना बना रहा है।

इसलिए कर रहे उन्नत: अपग्रेड तोप की निशाना साधने की क्षमता में करीब 10 किमी और विध्वंसक (मारक) क्षमता में वृद्घि हुई है।

सारंग की यह खासियत : अपग्रेड सारंग तोप लक्ष्य पर अचूक वार करने में सक्षम है। यह अत्याधुनिक तोप अब भी वजन में बेहद हल्की है। इस तोप को किसी भी वाहन से जोड़कर (टो कर) या धक्का देकर यहां से वहां जल्द ले जाया जा सकता है।

इंजनयुक्त बनाने पर विचार : अपग्रेड सारंग तोप का लाजवाब प्रदर्शन देखकर सैन्य अधिकारियों ने अब इसे इंजनयुक्त बनाने की जरूरत पर रक्षा मंत्रालय से चर्चा की है।

वीएफजे के पीआरओ राजीव कुमार अग्रवाल ने बताया कि ओएफबी के निर्देश पर इस निर्माणी में 280 सारंग तोप अपग्रेड करने की योजना बनाई गई है।

अहोई अष्टमी आज, इस शुभ मुहूर्त में ऐसे करें अहोई माता की पूजा, जान लें चंद्रोदय से लेकर तारों को देखने का समय और व्रत कथा

अहोई अष्टमी का व्रत 8 नवंबर यानी आज है। इस व्रत को संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान को दीघार्यु के साथ समृद्धि की भी प्राप्ति होती है। कहते हैं कि अहोई माता के आशीर्वाद से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अहोई अष्टमी के दिन माता पार्वती की पूजा का विधान है। दिवाली से 8 दिन पहले रखा जाने वाला व्रत मुख्य रूप से उत्तर भारत की महिलाएं रखती हैं।

अहोई अष्टमी की तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त- 

अष्टमी तिथि प्रारंभ- 8 नवंबर 2020 को सुबह 07 बजकर 29 मिनट से।
अष्टमी तिथि समाप्त- 9 नवंबर 2020 को सुबह 06 बजकर 50 मिनट तक।
पूजा का मुहूर्त- 8 नवंबर को शाम 05 बजकर 31 मिनट से शाम 06 बजकर 50 मिनट तक।
कुल अवधि- 1 घंटे 19 मिनट।
तारों को देखने का समय- 8 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 56 मिनट। 
चंद्रोदय का समय- 8 नवंबर 2020 को रात 11 बजकर 56 मिनट तक।

अहोई अष्टमी के दिन ऐसे करें पूजा 

करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद अष्टमी तिथि को देवी अहोई व्रत मनाया जाता है । गोबर से या चित्रांकन के द्वारा कपड़े पर आठ कोष्ठक की एक पुतली बनाई जाती है और उसके बच्चों की आकृतियां बना दी जाती हैं। माताएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को या प्रदोष काल उसकी पूजा करती हैं।

करवाचौथ में इस्तेमाल किए गए करवे में जल भर लिया जाता है। शाम को माता की विधि-विधान से पूजा के बाद उन्हें फल, फूल और मिठाई भोग लगाते हैं। उसके बाद तारों को करवे से अर्घ्य देने के बाद रात में व्रत का समापन किया जाता है। इसके बाद अहोई माता की व्रत कथा सुनने के बाद अन्न-जल ग्रहण किया जाता है। उस करवे के जल को दीपावली के दिन पूरे घर में छिड़का जाता है। मान्यता है कि अहोई माता की पूजा करके उन्हें दूध-चावल का भोग लगाना शुभ होता है।

अहोई माता की कथा 

एक साहूकार के 7 बेटे थे और एक बेटी थी। साहूकार ने अपने सातों बेटों और बेटी की शादी कर दी थी। अब उसके घर में सात बेटों के साथ सात बहुएं भी थीं।

साहूकार की बेटी दिवाली पर अपने ससुराल से मायके आई थी। दिवाली पर घर को लीपना था, इसलिए सारी बहुएं जंगल से मिट्टी लेने गईं। साहुकार की बेटी भी अपनी भाभियों के साथ चल पड़ी।

साहूकार की बेटी जहां मिट्टी काट रही थी, उस स्थान पर स्याहु (साही) अपने साथ बेटों से साथ रहती थी। मिट्टी काटते हुए गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी के चोट से स्याहु का एक बच्चा मर गया। इस पर क्रोधित होकर स्याहु ने कहा कि मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी।

स्याहु के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभियों से एक-एक कर विनती करती हैं कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें। सबसे छोटी भाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है। इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते हैं, वे सात दिन बाद मर जाते हैं। सात पुत्रों की इस प्रकार मृत्यु होने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा। पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी।

सुरही सेवा से प्रसन्न होती है और छोटी बहु से पूछती है कि तू किस लिए मेरी इतनी सेवा कर रही है और वह उससे क्या चाहती है? जो कुछ तेरी इच्छा हो वह मुझ से मांग ले। साहूकार की बहू ने कहा कि स्याहु माता ने मेरी कोख बांध दी है जिससे मेरे बच्चे नहीं बचते हैं। अगर आप मेरी कोख खुलवा दें तो मैं आपका उपकार मानूंगी। गाय माता ने उसकी बात मान ली और उसे साथ लेकर सात समुद्र पार स्याहु माता के पास ले चली।

रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगते हैं। अचानक साहूकार की छोटी बहू की नजर एक ओर जाती हैं, वह देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है। इतने में गरूड़ पंखनी वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहू ने उसके बच्चे को मार दिया है इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है।

छोटी बहू इस पर कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है। गरूड़ पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याहु के पास पहुंचा देती है।

वहां छोटी बहू स्याहु की भी सेवा करती है. स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहू होने का आशीर्वाद देती है। स्याहु छोटी बहू को सात पुत्र और सात पुत्रवधुओं का आर्शीवाद देती है। और कहती है कि घर जाने पर तू अहोई माता का उद्यापन करना। सात सात अहोई बनाकर सातकड़ाही देना। उसने घर लौट कर देखा तो उसके सात बेटे और सात बहुएं बेटी हुई मिली। वह खुशी के मारे भाव-भिवोर हो गई। उसने सात अहोई बनाकर सातकड़ाही देकर उद्यापन किया।

अहोई का अर्थ एक यह भी होता है ‘अनहोनी को होनी बनाना।’ जैसे साहूकार की छोटी बहू ने कर दिखाया था। जिस तरह अहोई माता ने उस साहूकार की बहू की कोख को खोल दिया, उसी प्रकार इस व्रत को करने वाली सभी नारियों की अभिलाषा पूर्ण करें।

ग्वालियर कोरोना बुलेटिन : उपचुनाव के बाद कोरोना ने पकड़ी रफ्तार

ग्वालियर, । उपचुनाव की तरीखों का ऐलान होते ही कोरोना संक्रमित मिलने वाले मरीजों की संख्या भी कम हो गई थी। लेकिन देखने में आ रहा है कि उपचुनाव होते ही एक बार फिर से कोरोना संक्रमित मरीज मिलने की रफ्तार धीरे-धीरे तेज होती जा रही है। जिलें में शुक्रवार को 81 नए कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं। वहीं उपचार के दौरान 1 मरीज ने दम तोड़ा है।

गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय में 116 कोरोना संदिग्धम मरीजों की जांच की गई। इसमें 34 कोरोना संक्रमित मिले। रैपिड एंटीजन टेस्ट में 40, प्रायवेट पैथोलॉजी 4 और प्रायवेट हॉस्पिटल में हुईं जांचों में 3 को कोरोना संक्रमित मिलने की पुष्टि हुई है। वहीं जिले में अब तक 12679 कोरोना संदिग्ध मरीजों की जांच की गई है। इसमें से 12096 मरीज स्वस्थ होकर घर पहुंच गए हैं।

यहां बता दें कि जिलेवासी जो अनुमान लगा रहे थे कि उपचुनाव के को देखते हुए मरीजों की संख्या कम की जा रही है। जैसे ही उपचुनाव खत्म होंगे मरीजों की संख्या बढ़ना शुरू हो जाएगी। ठीक वैसा ही होता दिख रहा है। हालांकि उपचुनाव के बाद मरीजों की संख्या बढऩी ही थी, क्योंकि उपचुनाव के दौरान जमकर रैली, आमसभा हुई हैं। इनमें नियमों की धज्जियां उड़ी हैं। इसलिए यह पहले से ही स्पष्ट था कि चुनाव के बाद मरीजों की संख्या बढ़ेगी।

यहां निकले कोरोन संक्रमित मरीज :

रूद्रपुरा, पुरानी छावनी, गोसपुरा नंबर 1, तानसेन नगर, नारायण विहार गोले का मंदिर, रमटापुरा, पिंटो पार्क, पुरानी छावनी, एलएनआईपी, शारदा विहार सिटी सेंटर, हजीरा, कुंज विहार कॉलोनी, बहोड़ापुर, सराफा बाजार, विजय नगर, अलकापुरी, आउ नगर, अशोक विहार तानसेन नगर, गांधी नगर, समाधिया कॉलोनी, नाका चंद्रवदनी, कंपू, गोविंदपुरी, पेटल नगर, गुब्बारा फाट हुरावली, मुरार, सुरेश नगर, तारागंज, किशनपुरी, बजरंग विहार, भदरौला, सलमा, भुडेरा, गोल पहाडयि़ा, अजयपुर, लाला बाजार, शताब्दीपुरम, जनकगंज, गिरवाई, तिवारी मोहल्ला मोहना, कैलाश टॉकीज, लक्ष्मीगंज, आदित्यपुरम, एग्रीकल्चर हॉस्ट थाटीपुर, साईं महिमा अपार्टमेंट पटेल नगर, रई भितरवार, डबरा में ऊषा कॉलोनी, अयोध्या कॉलोनी, सलवाई, गुप्तापुरा, चीनोर रोड़ सहित अन्य क्षेत्रों में संक्रमित मरीज मिले हैं।

जीआरएमसी की जांच में :

भिंड – 2

गुना – 1

अशोक नगर – 1

श्योपुर – 9

मुरैना – 1

पिछले 6 दिन में इस तरह बड़ रहा कोरोना :

दिन | सैंपल | संक्रमित | स्वस्थ

1 नवंबर | 809 | 32 | 45

2 नवंबर | 904 | 29 | 37

3 नवंबर | 807 | 48 | 26

4 नवंबर | 888 | 57 | 21

5 नवंबर | 805 | 65 | 61

सभी एग्जिट पोलों में में बिहार में आरजेडी व कांग्रेस गठबंधन को बढ़त मिली

दिल्ली । तीन चरण में हुए बिहार के मतदान  के बाद आज शाम को विभिन्न न्यूज चैनल्स ने बिहार के एग्जिट पोल आ गए । सभी मे बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार जन समर्थन खोटी नज़र आ रही है ।  किसी भी चेनल ने एनडीए को बढ़त नहीं दिखाई है । नीतीश कुमार की पार्टी काफी सीटें गंवाते दिख रही है जबकि भाजपा बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है लेकिन सरकार बनाने के जादुई आंकड़े से बहुत दूर है ।

ये हैं एग्जिट पोल

बिहार चुनाव Exit poll :

कुल सीट : 243
बहुमत : 122

tv9 भारतवर्ष…

NDA : 110-120
महागठबंधन : 115-125
एलजेपी : 3-5
अन्य : 10-15

इंडिया Tv…

NDA : 116
महागठबंधन : 120
एलजेपी : 01
अन्य : 6

न्यूज़ 24…

NDA : 91-117
महागठबंधन : 119-138
अन्य : 3-6

रिपब्लिक भारत…

NDA : 91-117
महागठबंधन : 118-138
एलजेपी : 5-8
अन्य : 3-6

NDTV इंडिया…

NDA : 116
महागठबंधन : 120
एलजेपी : 1
अन्य :

ZEE हिन्दुस्तान…

NDA : 100-120
महागठबंधन : 120
अन्य : 10-18

नेपाल में भड़का विवादः ओली ने गुपचुप बदला देश का नाम, पार्टी में उठी विरोध की आवाजें

विस्तार

नेपाल में अब देश के संवैधानिक नाम को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब और तीखा हो गया है। कुछ दिन पहले देश के कानून, न्याय एवं संसदीय मामलों के मंत्रालय ने एक सर्कुलर जारी कर सभी सरकारी एजेंसियों से कहा था कि वे देश का नाम ‘संघीय लोकतांत्रिक नेपाल गणराज्य’ की जगह सिर्फ ‘नेपाल’ लिखें। केपी शर्मा ओली सरकार के इस कदम के पीछे क्या मंशा थी, इसे अब तक साफ नहीं किया गया है। लेकिन अब सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर इसको लेकर कड़े सवाल उठाए जाने लगे हैं। संविधान विशेषज्ञों का भी कहना है कि देश का आधिकारिक नाम महज इस तरह के सर्कुलर या कैबिनेट के फैसले से नहीं बदला जा सकता।     

ओली सरकार के हालिया कदम का असर होगा कि दूसरे देश भी अपने दस्तावेजों में इस देश का नाम सिर्फ नेपाल लिखेंगे। इसी तरह देश की पाठ्यपुस्तकों में भी नाम बदलना पड़ेगा। जबकि नेपाल के संविधान की धारा 56 (1) में ये साफ लिखा है कि नेपाल संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य का मुख्य ढांचा तीन स्तरों वाला होगा। ये स्तर हैं- संघीय, प्रादेशिक और स्थानीय। इसी ढांचे के अनुरूप देश का आधिकारिक नाम संविधान में तय किया गया था।  

अब सत्ताधारी दल के भीतर इस मुद्दे को सीधे प्रधानमंत्री ओली और उनकी सरकार पर निशाना साधा जा रहा है। पार्टी की स्थायी समिति के सदस्य लीलामणि पोखरेल ने एक बयान में कहा है कि प्रधानमंत्री ओली लगातार ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिनका मकसद मौजूद व्यवस्था को ध्वस्त करना है। कम्युनिस्ट पार्टी की ही सांसद राम कुमारी झंकरी ने इसे संघीय व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम करार दिया है। 

ये इल्जाम भी लगा है कि हालांकि ओली सरकार ने ये फैसला सितंबर में ही ले लिया था, लेकिन इसकी जानकारी प्रेस कांफ्रेंस के जरिए नहीं दी गई, जैसाकि आम चलन है। जब सर्कुलर जारी किया गया तो उसके बाद धीरे-धीरे ये जानकारी सार्वजनिक दायरे में आई। जब उस बारे में सवाल पूछा गया तब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि कैबिनेट ने ये निर्णय सितंबर ही ले लिया था। जब ये फैसला लिया गया, तो उसके काफी समय बाद तक संचार और सूचना तकनीक के मंत्रालय की वेबसाइट पर इसका कोई उल्लेख नहीं था।

जबकि सरकार के तमाम फैसलों की इस पर तुरंत जानकारी दी जाती है। फैसले को छिपाए रखने के सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए गए हैं। कम्युनिस्ट पार्टी के कुछ नेताओं ने मीडिया से कहा है कि गोपनीयता बरतने के सरकार के तरीके से सरकार की मंशा पर शक खड़ा होता है।

नेपाल के गणराज्यीय संविधान को सितंबर 2015 में लागू किया गया था। उसके पहले सात साल तक इसे बनाने की प्रक्रिया चली। उस दौरान संविधान सभा का दो बार चुनाव हुआ। गणराज्यीय संविधान बनाने की कोशिश 2005 में राजतंत्र के खात्मे के बाद शुरू हुई थी। संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि देश के नाम से संघीय गणराज्य शब्द हटाना संविधान की भावना पर सीधा प्रहार है।

उन्होंने ध्यान दिलाया है कि देश का नाम फेडरल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ नेपाल होगा, यह पहली संविधान सभा ने 2008 में ही तय कर लिया था और तभी इसी नाम की सूचना संयुक्त राष्ट्र को दे दी गई थी।

प्रधानमंत्री ओली का हालिया आचरण कई मामलों में संदिग्ध रहा है। उन पर आरोप है कि वे सत्ताधारी पार्टी को तोड़ने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। इन्हीं के बीच देश के नाम को विवाद खड़ा करने के उनके रुख ने पहले से ही सुलग रहे माहौल को और भड़का दिया है।