अस्पताल को चेतावनी पत्र जारी, डॉक्टर को नोटिस तक नहीं

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। तानसेन नगर स्थित पेनेसिया हॉस्पिटल में विगत दिवस महिला की मौत हुई थी। परिजनों ने उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए थे। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने अपनी टीम को अस्पताल का निरीक्षण करने भेजा था। निरीक्षण में कई खामियां मिली थींं। अस्पताल संचालक को नोटिस जारी किया जवाब मांगा था। अस्पताल संचालक ने सीएमएचओ ऑफिस में जवाब भी पेश कर दिया। लेकिन जब जवाब संतोषजनक नहीं लगा तो हॉस्पिटल को फिर से चेतावनी पत्र जारी किया गया है। लेकिन खास बात यह है कि जो डॉक्टर महिला का उपचार कर रहा था, उसे स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस भी नहीं दिया। इस पर परिजनों ने कलेक्टर को दिए आवेदन में लेने-देन का आरोप लगाया है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मनीष शर्मा ने बताया कि तानसेन नगर स्थित पेनेसिया हॉस्पिटल में खामियां मिलने पर अस्पताल संचालक को नोटिस जारी किया गया था। साथ ही सात दिन में जवाब पेश करने का आदेश भी दिया गया था। अस्पताल संचालक ने नोटिस का जवाब तो पेश कर दिया। लेकिन वह संतोषजनक नहीं है। इस पर अस्पताल को फिर से चेतावनी पत्र जारी किया गया है। डॉ. शर्मा से जब मृतका संगीता अग्रवाल का उपचार करने वाले ऑनकॉल डॉक्टर रोहित प्रताप सिंह तोमर पर कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया कि वह ऑनकॉल डॉक्टर थे, इसलिए कार्रवाई नहीं की, और मुझे उनके बारे में ठीक से याद भी नहीं है।

वहीं मृतका संगीता अग्रवाल के परिजनों ने कलेक्टर को शिकायती आवेदन पत्र सौंपा है। आवेदन के माध्यम से उन्होंने इस मामले में डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग पर लेन-देन के आरोप लगाए हैं। साथ ही उन्होंने कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

क्या था मामला :

अवाड़पुरा कम्पू निवासी संगीता अग्रवाल को डायबिटिक की समस्या थी। इस पर उनके पति रामदास अग्रवाल (रामू) उन्हें उपचार के लिए 11 अक्टूबर को तानसेन नगर स्थित पेनेसिया हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे। वहां उनका उपचार ऑनकॉल डॉ. रोहित प्रताप सिंह तोमर कर रहे थे। जैसा पति रामदास अग्रवाल ने बताया था कि 14-15 अक्टूबर को मृतका संगीता को इंसुलिन का इंजेक्शन दिया और उसके कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई थी। वहीं पेनेसिया हॉस्पिटल के प्रबंधक जीत शर्मा ने बताया था कि मृतक संगीता अग्रवाल को डायबिटिक समस्या थी। वैसे वह नॉमर्ल थीं, खाना खाने के बाद उनकी सुगर बढ़ गई जो 238 हो गई । इसके बाद उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया और मौत हो गई थी।

टीम को निरीक्षण में मिली थीं यह खामियां :

मरीज भर्ती मिले थे, लेकिन मौके पर कोई भी डॉक्टर नहीं मिला था।

हॉस्पिटल में अप्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ मिला था।

रिकार्ड भी उपलब्ध नहीं करा पाया था प्रबंधन।

मेडिकल पर फर्मासीस्ट नहीं मिला था।

रेट लिस्ट चस्पा नहीं मिली थी।

मृतका की रिकार्ड की कॉपी भी नहीं मिली थी।

इनका कहना है :पेनेसिया हॉस्पिटल के निरीक्षण में कई खामियां सामने आईं थीं। इस पर हॉस्पिटल संचालक को नोटिस जारी किया गया था। साथ ही सात दिन में जवाब पेश करने के आदेश दिए थे। अस्पताल संचालक ने जो जवाब दिया है, वह संतोषजनक नहीं है। इसलिए उसे फिर से चेतावनी पत्र जारी किया गया है।


डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ

कमलनाथ ने अधिकारियों को चेताया, कहा- राजनीतिक संरक्षण कभी स्थाई नहीं होता, निष्पक्ष होकर करें काम

भोपाल। मध्यप्रदेश में संपन्न हुए 28 विधानसभा उपचुनाव के बाद 10 नवंबर को मतगणना होना है. मतगणना में गड़बड़ी न हो इसको लेकर कांग्रेस काफी सजग है. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज एक बयान जारी करते हुए कहा है कि सुमावली, मुरैना और मेहगांव में पुलिस और प्रशासन के संरक्षण में खुलेआम गोली चली और मतदान को प्रभावित किया गया. इसके सबूत विभिन्न माध्यमों से जनता के सामने भी आए हैं, लेकिन चुनाव आयोग द्वारा रि-पोलिंग नहीं कराने और कार्रवाई नहीं करने से दुखद स्थिति निर्मित हुई है. उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जो कर्मचारी अधिकारी राजनीतिक संरक्षण के लिए चुनाव प्रभावित कर रहे हैं, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि राजनीतिक संरक्षण कभी स्थाई नहीं होती है.

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि सुमावली, मुरैना, मेहगांव सहित अन्य उपचुनाव वाले क्षेत्रों में बीजेपी के लोगों ने हिंसक घटनाओं के माध्यम से और गोली चलाकर बूथ कैपचरिंग की. उन्हें इसके लिए खुलेआम पुलिस और प्रशासन का संरक्षण मिला. कमलनाथ का कहना है कि इन सारी घटनाओं का वीडियो और खबरें विभिन्न प्रचार माध्यमों से सामने आई हैं, लेकिन दुख की बात यह है कि चुनाव आयोग ने शिकायतों और प्रमाणों के बाद भी ऐसे बूथों पर रि-पोलिंग करवाना उचित नहीं समझा. इस तरह की घटनाओं की प्रमाणिकता से शिकायतों के साथ प्रत्याशियों द्वारा चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए गए. लेकिन फिर से मतदान कराने का निर्णय नहीं लिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. इस तरह की घटनाओं पर अपराधिक मामले भी दर्ज नहीं किए गए. इन तथ्यों से स्पष्ट है कि पुलिस और प्रशासन द्वारा ऐसे तत्वों की खुलकर मदद की गई है, उनकी मूक सहमति से ही ये घटनाएं घटित हुई हैं.

इस्‍लामिक आतंकवादियों की नर्सरी बना फ्रांस, स‍िखा रहे अपने ही देश से नफरत: इमैनुअल मैक्रां

पेरिस
फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुअल मैक्रां ने चेतावनी दी है कि देश में कई जगहों पर ‘आतंकवादियों की नर्सरी’ चल रही है। मैक्रां ने दावा किया कि आतंकवादियों की नर्सरी में बच्‍चों को इस्‍लामिक तौर तरीकों से फ्रांसीसी मूल्‍यों के प्रति घृणा करना सिखाया जाता है। फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति ने ‘इस्‍लामिक अलगाववाद’ का मुद्दा ऐसे समय पर उठाया है जब पूरा देश पिछले दिनों हुए आतंकी हमलों से गुस्‍से में है।

मैक्रां ने फाइनेंशियल टाइम्‍स को लिखे एक पत्र में कहा कि ‘इस्‍लाम के विकृत रूप’ के नाम पर नफरत फैलाने वाले बयानों से फ्रांस के शिक्षक सैमुअल पैटी की गला काटकर हत्‍या की गई। इस निर्मम हत्‍याकांड को अंजाम देने वाले चेचेनिया के नागरिक को बाद में पुलिस ने मार गिराया था। मैक्रां ने कहा कि मुस्लिम बच्‍चे ऑनलाइन कट्टरपंथी इस्‍लाम की शिक्षा के शिकार बन रहे हैं। इन बच्‍चों को देश के कानूनों नहीं मानने के लिए प्रेरित किया जाता है।

फ्रांस में आतंकवादियों की नर्सरी चल रही’
मैक्रां ने कहा, ‘वर्ष 2015 में यह स्‍पष्‍ट हो गया और मैंने राष्‍ट्रपति बनने से पहले ही कहा था कि फ्रांस में आतंकवादियों की नर्सरी चल रही है।’ उन्‍होंने कहा, ‘कुछ जिलों और इंटरनेट पर कट्टर इस्‍लाम से जुड़े गुट हमारे बच्‍चों को देश से ही नफरत करना बता रहे हैं। उन्‍हें देश के कानूनों को नहीं मानने का आह्वान कर रहे हैं। अगर आप मेरे ऊपर भरोसा नहीं कर रहे हैं तो सोशल मीडिया पर किए जाने वाले नफरत भरे पोस्‍ट को पढ़‍िए जो इस्‍लाम के दूषित रूप में शेयर किए जा रहे हैं और जिसकी वजह से सैमुअल पैटी की हत्‍या की गई।’

फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति ने कहा, ‘उन छोटे जिलों की यात्रा करिए जहां पर तीन से चार साल की लड़कियां बुर्का पहनती हैं और उन्‍हें लड़कों से अलग रखा जाता है। थोड़ा सा जवान होने पर इन बच्‍चों को समाज से अलग करके रखा जाता है और फ्रांस के मूल्‍यों के प्रति नफरत करना सीखाया जाता है।’ उन्‍होंने इस अवधारणा को खारिज कर दिया कि फ्रांस किसी एक खास धार्मिक समूह के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। उन्‍होंने कहा कि यह जंग घृणा के खिलाफ है न कि इस्‍लाम के खिलाफ।

जयवर्धन सिंह के लिए भोपाल में मेंडोरा महल, T&CP ने लैंडयूज़ बदला –

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह को राजनीति का राजगुरु ऐसे ही नहीं कहते हैं। राधौगढ़ राज परिवार के युवराज, पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री जयवर्धन सिंह के लिए मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आलीशान और विशाल मेंडोरा महल की तैयारियां चल रही है। यह भव्य महल भोपाल शहर के नजदीक 2.45 हेक्टेयर जमीन पर जंगल में बनाया जाएगा। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने लैंडयूज़ भी बदल दिया है। इस महल के साथ एक कथा हमेशा के लिए जुड़ जाएगी और वह यह कि जिस जमीन पर यह महल बनकर तैयार हुआ है, इससे पहले यहां टाइगर रहा करते थे।

जयवर्धन सिंह के मेंडोरा महल के लिए 2.45 हेक्टेयर जमीन का लैंडयूज़ बदला

अधिकारियों ने मास्टर प्लान 2031 में मेंडोरा स्थित जयवर्धन सिंह की जमीन का लैंडयूज बदलकर आवासीय श्रेणी- रेसिडेंशियल जनरल फाइव (आरजी 5) कर दिया। वर्तमान मास्टर प्लान में पीएसपी लैंडयूज निर्धारित है। वन क्षेत्र से लगे दिग्विजय सिंह के परिवार की 11 खसरों की कुल 2.45 हेक्टेयर (करीब छह एकड़) भूमि के लैंडयूज बदलने के लिए आसपास के खसरों को आवासीय लैंडयूज में तब्दील कर दिया गया। इससे यहां आवासीय निर्माण हो सकेगा। साथ ही जमीन की कीमत में भी इजाफा होगा। 

लैंड यूज़ परिवर्तन के खिलाफ 500 से ज्यादा आपत्तियां

मास्टर प्लान 2031 में बड़े तालाब व वन परिक्षेत्रों में प्लानिंग को लेकर पूर्व महापौर आलोक शर्मा भी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। गड़बड़ियों को देखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की थी। मास्टर प्लान को लेकर 500 से अधिक आपत्तियां सिर्फ वन परिक्षेत्रों में शहरी विकास व लैंडयूज परिवर्तन को लेकर दर्ज कराई गई हैं।

प. बंगाल में बोले Amit Shah, ‘मां, माटी और मानुष का नारा तुष्टिकरण में बदला, भतीजे को CM बनाना चाहती हैं ममता’

कोलकाता
पश्चिम बंगाल में अपने तीन दिवसीय दौरे के आखिरी दिन मीडिया को संबोधित करने पहुंचे बीजेपी नेता और गृहमंत्री अमित शाह ने ममता सरकार पर जमकर निशाना साधा। शाह ने कहा कि ममता बनर्जी को 10 साल पहले मां माटी मानुष के नारे पर वोट दिया गया था लेकिन 10 साल में ये बातें तुष्टिकरण की सियासत में बदल गईं। शाह ने कहा कि ममता बनर्जी का लक्ष्य है कि वह अगले कार्यकाल में अपने भतीजे को यहां का सीएम बना दें। लेकिन यहां के लोग नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में परिवर्तन चाहते हैं।

शाह ने कहा कि मैं बंगाल के लोगों को आश्वस्त करने आया हूं कि पांच साल में सोनार बांग्ला बनाने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने कांग्रेस, वाम दलों और टीएमसी को मौका दिया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का लक्ष्य है कि वह अगली सरकार में अपने भतीजे को सीएम बना दें। पश्चिम बंगाल में प्रशासन का राजनीतिकरण किया गया है, इंस्टीट्यूशनल करप्शन किया जा रहा है और राजनीति का अपराधीकरण कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल में तुष्टिकरण से बंगाल की जनता के एक बड़े वर्ग में दूसरे दर्जे का नागरिक होने का भाव पैदा हो गया है। पश्चिम बंगाल में तीन कानून हैं, एक अपने भतीजे के लिए, दूसरा वोट बैंक और तीसरा आम आदमी के लिए। कानून की पुस्तक में एक कानून है, लेकिन यहां लागू करने में तीन तरह का कानून देखने मिलता है।

NCRB को डेटा ना देकर क्या छिपा रही हैं ममता’
शाह ने यहां पर ममता बनर्जी से सात सवाल पूछे। शाह ने पूछा कि बंगाल सरकार ने 2018 के बाद NCRB को राज्य में अपराध के आंकड़े क्यों नहीं भेजे। आखिर सरकार क्या छिपाना चाहती है? शाह ने कहा कि 2018 में महिलाओं के खिलाफ अपराध में तीसरे नंबर पर बंगाल रहा है। बलात्कार, एसिड अटैक के मामलों में पहले नंबर रहा। गायब महिलाओं को ना ढूंढ पाने के मामले में देश में नंबर रहा। ममता दीदी क्या जवाब देंगी कि बंगाल की महिलाएं क्यों असुरक्षित हैं। ममता बनर्जी को मुझे सवाल करने के बजाय खुद चिंतन करना चाहिए।

राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या पर उठाए सवाल

ममता बनर्जी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां 100 से अधिक बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या हुई। राजनीतिक हत्याओं के मामले में ममता सरकार क्या श्वेतपत्र निकाल सकेगी क्या? शाह ने कहा कि हम ममता बनर्जी सरकार से कहना चाहते हैं कि वह केंद्र की सरकार को लोगों तक पहुंचाएं। केंद्र की सरकार की योजनाओं का सबसे बुरा हाल पश्चिम बंगाल में दिख रहा है। शाह ने कहा कि आयुष्मान भारत का लाभ पश्चिम बंगाल के लोगों तक नहीं पहुंच सका है। इसके अलावा किसान सम्मान निधि के पैसे बंगाल के लोगों तक नहीं पहुंच पाए क्योंकि सरकार ने खातों की डिटेल्स नहीं दिए। हर महीने ममता सरकार पत्र लिखती हैं कि पैसा हमें दे दो, लेकिन मैं जानता हूं कि अगर ये पैसा दिया तो वो कैडर की भेंट चल जाएगा। मई में चुनाव के बाद हम ये पैसे किसानों को पैसे सीधे भेजेंगे।

’22 सीट का लक्ष्य रखा तो लोग हंसते थे’
शाह ने कहा कि जब मैंने लोकसभा चुनाव में 22 सीट का लक्ष्य रखा तो लोग हंसते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। हम 200 सीट जीतकर यहां सरकार बनाने जा रहे हैं। नड्डा जी के नेतृत्व में हम पश्चिम बंगाल के चुनाव को काफी गंभीरता से ले रहे हैं, क्योंकि इससे देश की सुरक्षा का उद्देश्य भी जुड़ा हुआ है।

हिम्मत है तो फ़िल्म सिटी को यूपी ले जाकर दिखाएं, उद्धव ठाकरे की योगी को चुनौती

मुंबई
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती देते हुए कहा है कि अगर हिम्मत है तो वह फिल्म सिटी को उत्तर प्रदेश में ले जाकर दिखाएं। कुछ महीनों पहले आदित्यनाथ ने कहा था कि वे देश की सबसे बड़ी फिल्म सिटी उत्तर प्रदेश में बनाएंगे। तब से इस मुद्दे पर शिवसेना और बीजेपी आमने-सामने हैं।

वेबिनार में बोले उद्धव ठाकरे
सिनेमा जगत से जुड़े हुए एक वेबीनार में गुरुवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बोलते हुए एक बार फिर से योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे ने मुंबई फिल्म सिटी में आधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाने का भी भरोसा फिल्म जगत को दिया है। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में कई सारी समस्याएं और परेशानियां हैं जिनको दूर करने का काम हमारी सरकार करेगी। बॉलीवुड इंडस्ट्री को जो भी सुविधाएं चाहिए उन्हें मुहैया करवाया जाएगा। उद्धव ठाकरे ने कहा कि जिस भूमि पर दादा साहब फाल्के ने फिल्म निर्माण की शुरुआत की। उस जगह पर मैं किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने दूंगा।

कश्मीर में शुरू करो फिल्म सिटी, भाजपा को सलाह
इसके पहले शिवसेना के मुखपत्र सामना ने भी यूपी में फिल्म सिटी स्थापना को लेकर योगी पर निशाना साधा था। सामना ने तब लिखा था कि जब लॉकडाउन और कोरोना की वजह से फिल्म सिटी बंद है तब योगी जी नई फिल्म सिटी बनाने की बात कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय सलाहकारों के मार्गदर्शन के साथ यह काम शुरू किया जाएगा और अगले ढाई वर्ष के भीतर यह काम पूरा कर लिया जाएगा। यह सब होने के बाद भी मुंबई की फिल्म सिटी का महत्व कम नहीं होगा।

मुंबई से बॉलीवुड खत्म करने का षड्यंत्र
शिवसेना ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि मुंबई से बॉलीवुड को दूसरी जगह शिफ्ट करने का षड्यंत्र किया जा रहा है। लेकिन हम इसे पूरा नहीं होने देंगे। मुंबई महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक राजधानी भी है। आज बॉलीवुड में हॉलीवुड को टक्कर देने वाली फिल्में बन रही हैं। दुनियाभर में बॉलीवुड कलाकारों के चाहने वाले लोग मौजूद हैं। मनोरंजन क्षेत्र एक बड़ा उद्योग का क्षेत्र बन चुका है। जहां असंख्य लोगों को रोजगार का मौका मिलता है। सिनेमा की वजह से अपने कलाकार लोकप्रिय होते हैं। लेकिन बीते कुछ दिनों से कुछ लोगों की वजह से बॉलीवुड को बदनाम करने की भी साजिश की जा रही है जो बेहद ही दुखद है।

Whatsapp Pay UPI: वाट्सएप के जरिए भी भेज सकते हैं पैसे, यह है स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस 

नई दिल्ली,  देशभर में लोग कल (शुक्रवार) से वाट्सएप के जरिए रुपये भेज सकेंगे। वाट्सएप (WhatsApp) के अनुसार, उसके प्लेटफॉर्म के जरिए रुपये भेजना उतना ही आसान है, जितना कि किसी को संदेश भेजना होता है। मैसेजिंग एप का कहना है कि लोग सुरक्षित रूप से परिवार के किसी सदस्य को पैसे भेज सकते हैं या नकदी का लेनदेन किये बिना और स्थानीय बैंक में जाए बिना दूर रहकर भी वस्तुओं की कीमतें साझा कर सकते हैं।

वाट्सएप ने यूपीआई (UPI) का उपयोग करते हए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ साझेदारी में इंडिया-फर्स्ट, रियल टाइम पेमेंट सिस्टम तैयार किया है। इस सिस्टम से 160 से अधिक बैंकों के साथ लेनदेन पूरा किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि आप किस तरह अपने एंड्रॉयड मोबाइल फोन और आईफोन में वाट्सएप के इस नए फीचर का उपयोग कर किसी को भी रुपये भेज सकते हैं। ध्यान रखें कि आप जिस नंबर से वाट्सएप चला रहे हैं, वह आपके बैंक अकाउंट के साथ रजिस्टर्ड हो।

इस तरह करें सेटअप

स्टेप 1. सबसे पहले आपको अपना वाट्सएप अपडेट करना होगा। इसके बाद अपने फोन में वाट्सएप खोलें और सबसे ऊपर दाएं कोने में तीन डॉट आइकन पर क्लिक करें। 

स्टेप 2. अब पेमेंट्स पर क्लिक करें। पेमेंट मैथड एड करें। अब आपको बैंकों की एक लिस्ट मिलेगी।

स्टेप 3. आपको दी गई बैंकों की लिस्ट में से उस बैंक पर क्लिक करना है, जिसका अकाउंट आपको वाट्सएप पेमेंट के लिए एड करना है।

स्टेप 4. इसके बाद आपके फोन नंबर का वेरिफिकेशन होगा। इसके लिए आपको ‘वेरीफाई वाया एसएमएस’ टैब पर क्लिक करना होगा।

स्टेप 5. वेरिफिकेशन प्रोसेस पूरी होने के बाद आपको अन्य पेमेंट्स एप्स की तरह ही लेनदेन के लिए यूपीआई पिन सेट करना होगा।

स्टेप 6. इसके बाद आपको पेमेंट पेज पर आपके द्वारा चुना गया बैंक दिखने लगेगा।

इस तरह भेजें रुपये

स्टेप 1. वाट्सएप पर उस व्यक्ति के चैट इनबॉक्स को खोलें, जिसे आपको रुपये भेजने हैं।

स्टेप 2. अब पेमेंट आइकन पर क्लिक करें और जितने रुपये भेजने हैं, वह राशि लिखें। आप इसके साथ एक नोट भी लिख सकते हैं।

स्टेप 3. वाट्सएप पेमेंट प्रोसेस पूरी करने के लिए आपको अपना यूपीआई पिन डालने की जरूरत होगी। लेनदेन पूरी होने के बाद आपको कंफर्मेशन का मैसेज आ जाएगा।

दिवाली शॉपिंग पर खो गया है आपका SBI एटीएम तो इस नंबर पर करें कॉल, मिनटों में ब्लॉक हो जाएगा कार्ड

अगर आपका SBI ATM कार्ड खो गया है या फिर चोरी हो गया है तो अब आसानी सिर्फ एक नंबर पर कॉल करके इसको ब्लॉक करा सकते हैं. इसके अलावा रिइश्यू कराने के लिए भी आपको बैंक के चक्कर नहीं लगाने होंगे.

नई दिल्ली: अगर आपका SBI ATM कार्ड खो गया है या फिर चोरी हो गया है तो अब आसानी सिर्फ एक नंबर पर कॉल करके इसको ब्लॉक करा सकते हैं. इसके अलावा रिइश्यू कराने के लिए भी आपको बैंक के चक्कर नहीं लगाने होंगे. आप इसी टोल फ्री नंबर पर कॉल करके अपने एटीएम कार्ड को रिइश्यू भी करा सकते हैं. कार्ड को ब्लॉक कराने के बाद आपका पैसा और बैंक अकाउंट की डिटेल्स दोनों सेफ रहती हैं तो अगर कभी भी आपका कार्ड खो जाए तो सबसे पहले उसको ब्लॉक करा लें.

SBI ने किया ट्वीट

SBI ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडिल पर ट्वीट करके बताया कि ग्राहक अब और भी आसानी से अपने एटीएम कार्ड को ब्लॉक और रिइश्यू करा सकते हैं. इसके लिए आपको बस अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से SBI के टोल फ्री नंबर पर कॉल करना है.

इस नंबर को कर लें सेव

फोन कॉल के जरिए भी एटीएम कार्ड को ब्लॉक कर सकते हैं. एसबीआई के ग्राहक कस्टमर केयर पर कॉल करके कार्ड ब्लॉक करवा सकते हैं. इसके लिए टोल-फ्री नंबर 18004253800 या 1800112211 पर कॉल करना होगा. यहां इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पांस सिस्टम (IVRS) के निर्देशों को फॉलो कर एसबीआई का एटीएम कार्ड ब्लॉक कर सकते हैं.

SMS के जरिए भी करा सकते हैं ब्लॉक

आपको बता दें कि आप SMS के जरिए भी अपने एटीएम कार्ड को ब्लॉक करा सकते हैं. इसके लिए ग्राहकों को यूजरनेम और पासवर्ड की भी जरूरत नहीं होगी. आपको अकाउंट के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से BLOCK और कार्ड नंबर के आखिरी 4 डिजिट लिखकर 567676 नंबर पर एसएमएस भेजना है. आपके पास बैंक की तरफ से कार्ड ब्लॉक को कंफर्म करने के लिए मैसेज आएगा जिसमें टिकट नंबर, ब्लॉक करने की तारीख और समय होगा.

ऑनलाइन इस तरह से कार्ड को कराएं ब्लॉक-

>> सबसे पहले आपको https://www.onlinesbi.com/ पर जाकर लॉग इन करें.

>> अब आपको ई-सर्विसेज टैब में ATM कार्ड सर्विसेज पर क्लिक करना है.

>> अब ‘ब्लॉक ATM कार्ड’ चुनें.

>> संबंधित कार्ड से लिंक बैंक खाता संख्या सिलेक्ट करें. अगर किसी का एसबीआई में एक ही अकाउंट है तो यह अपने आप सिलेक्ट हो जाएगा.

>> अब Continue पर क्लिक करें.

>> ग्राहक के पास मौजूद सभी एसबीआई डेबिट कार्ड की डिटेल्स सामने आएंगी. जिस कार्ड को ब्लॉक कराना है, उसे चुनें.

>> इसके बाद कार्ड ब्लॉक कराने का कारण पूछा जाएगा. कार्ड चोरी हुआ है तो स्टोलन और अगर खो गया है तो लॉस्ट चुनकर सबमिट पर क्लिक करें.

>> डिटेल्स वेरिफाई कर कन्फर्म करें. याद रखें एक बार कार्ड ब्लॉक होने पर इसे इंटरनेट बैंकिंग के जरिए अनब्लॉक नहीं किया जा सकता.

>> इसके बाद ऑथेंटिकेशन का तरीका पूछा जाएगा. अगर ओटीपी के जरिए ऐसा करना चाहते हैं तो ओटीपी चुनें.

>> ओटीपी ग्राहक के एसबीआई में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आएगा. निर्धारित स्पेस में इसे डालकर सबमिट करें.

>> इसके बाद एसबीआई एटीएम/डेबिट कार्ड सफलतापूर्वक ब्लॉक होने का एक्नॉलेजमेंट शो होगा.

मध्यप्रदेश उपचुनाव: क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने ही गढ़ में कमजोर हो गये….?

भोपाल

मध्यप्रदेश की 28 सीटों पर उपचुनाव पूरे हो चुके हैं। हालांकि, परिणामों को लेकर पार्टियों की बीच काफी जिज्ञासा है। नतीजों को लेकर भाजपा की कोर टीम ने पार्टी स्तर पर विश्लेषण किया है। इसमें भाजपा इस बात के लिए आश्वस्त है कि पार्टी की जीत पक्की है। बता दें, विश्लेषण में यह तथ्य भी सामने आया है कि भाजपा को ग्वालियर-चंबल संभाग में परिणाम पार्टी को चौंका सकते हैं। यह राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाला क्षेत्र है। 

वहीं, इस मामले में राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सिंधिया के प्रभाव वाले क्षेत्र में पार्टी को नुकसान की आशंका यदि सही साबित हुई तो मध्य प्रदेश में भाजपा की राजनीति का अलग दौर शुरू होगा।

हालांकि, जब तक चुनावों के नतीजे साफ नहीं हो जाते तब तक पार्टी के आंतरिक विश्लेषण को अंतिम नहीं माना जा सकता. वहीं, सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस से भाजपा में आए जिन ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया, उनकी पार्टी में स्वीकार्यता को लेकर शुरू से ही असमंजस था। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के सामने एक हिचक यह भी थी कि भाजपा में आने से पहले दशकों तक जिन नेताओं को भला-बुरा कहा गया, अब उनके लिए जनता से वोट किस तरह मांगें?

वहीं, उपचुनावों के प्रचार के दौरान यह भी प्रसंग सुनने में आए थे कि जब मतदाताओं ने कार्यकर्ताओं व नेताओं से प्रति प्रश्न किए कि जिन्हें आप अब तक बुरा कहते थे, अब वे अच्छे कैसे हो गए? इस तरह के सवालों ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए असहज स्थिति पैदा की।