काली पूजा, बिरसा मुंडा… बिहार छोड़ बंगाल में यूं ही नहीं घूम रहे BJP के ‘चाणक्य’ शाह, 2 दिन में एक-एक कदम ममता के लिए नई टेंशन

कोलकाता
बिहार में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया जारी है लेकिन केंद्रीय मंत्री अमित शाह इस वक्त बंगाल में मौजूद हैं। खास बात यह है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 6 महीने से ज्यादा का वक्त है लेकिन शाह ने अभी से यहां चुनावी बिगुल बजा दिया है। दो दिन के दौरे के पहले दिन शाह ने राज्य में अगले साल 200 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा किया। शाह ने संगठन की शक्ति को मजबूत करने पर जोर देते हुए आदिवासी कार्यकर्ता के घर दोपहर का खाना खाया। उन्होंने पं. बंगाल के लोगों से ममता सरकार को उखाड़ फेंकने की अपील की। ध्यान रहे की बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह का एक-एक कदम चुनावी रणनीति का हिस्सा है। आइए समझते हैं कि शाह की किस कार्यक्रम के क्या मायने हैं…

मां काली के दर्शन और हिंदू मतदाताओं को संदेश
आज दौरे के दूसरे दिन की शुरुआत अमित शाह ने दक्षिणेश्वर काली मंदिर से की है। उन्होंने यहां मां काली के दर्शन किए। यहां स्वामी विवेकानंद के गुरु परमहंस ने आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त की थी। परमहंस हिंदू नवजागरण के प्रमुख सूत्रधारों में से एक माने जाते हैं। 2015 में पीएम मोदी ने भी यहां दर्शन किए थे। अमित शाह ने इस मौके पर चैतन्य महाप्रभु, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद और अरबिंदो का जिक्र किया। उन्होंने ममता सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बंगाल आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रहा है लेकिन आज तुष्टिकरण चरम पर है। स्वाभाविक है कि शाह इस कदम से हिंदू मतदाताओं को संदेश दे रहे हैं।

मतुआ समुदाय के घर भोजन कर मतदाताओं से एकजुट होने की पुकार
अमित शाह दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पूजा-आराधना के बाद मतुआ समुदाय के मंदिर में जाएंगे और उनके बीच भोजन करेंगे। मतुआ पश्चिम बंगाल में एससी आबादी का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा है। बंगाल में मतुआ समुदाय के लगभग 72 लाख लोग हैं और आठ से 10 विधानसभा सीटों पर उनका प्रभाव है। बंगाल की पौने दो करोड़ की एससी आबादी में 33 लाख नमोशूद्र है जिसका एक बड़ा हिस्सा मतुआ हैं। 1950 से मतुआ धार्मिक प्रताड़ना के बाद बंगाल आए थे। शाह का साफ संदेश है कि हिंदुओं में अगड़े-पिछड़े की राजनीति खत्म हो और एकजुट होकर ममता सरकार के खिलाफ वोट करें।

”ममता सरकार का मृत्युघंट बज चुका है। सोनार बांग्ला की रचना और बंगाल में परिवर्तन मोदी के नेतृत्व में आ सकता है। ये सरकार को उखाड़कर फेंक दीजिए, एक मौका बीजेपी को दीजिए। 200 से ज्यादा सीटों के साथ बीजेपी यहां सरकार बनाने जा रही है।”

अमित शाह इससे पहले दुर्गा पूजा के मौके पर बंगाल दौरे की तैयारी में थे लेकिन स्वास्थ्य के चलते उनका यह दौरा रद्द हो गया। तब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सिलीगुड़ी दौरे पर आए थे। चुनाव से पहले बीजेपी की कोशिश बंगालियों की भावनाओं को जोड़ने की है। बीजेपी नहीं चाहती कि उस पर हिंदी भाषा की पार्टी या फिर बाहरी होने का आरोप लगे। इसी के चलते अमित शाह अपने दौरे से आदिवासी, दलित और दूसरे छोटे समुदाय को जोड़ रहे हैं।

बंगाल में ममता सरकार पर तुष्टिकरण के आरोप लगते आए हैं और पिछले दिनों राजनीतिक हिंसा ने राज्य सरकार की खूब किरकिरी भी कराई। ऐसे में बीजेपी भी यह मान रही है कि बंगाल में इस वक्त जो माहौल है, वह पहले कभी देखने को नहीं मिला। पार्टी इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहती है, इसलिए अमित शाह का यह दो दिन का दौरा कई मायनों में अहम है।

बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि के साथ आदिवासी कल्याण पर जोर
दौरे के पहले दिन शाह ने आदिवासी कल्याण पर जोर दिया। अमित शाह के दौरे में दलितों को अपने पाले में करने की पुरजोर कोशिश हुई। दौरे की शुरुआत बांकुरा में अमित शाह ने बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित करके की। दोपहर का लंच बांकुरा के एक गांव चतुर डींग में किया। अमित शाह के लंच के लिए यहां मिट्टी के चूल्हे और बर्तन बनाए गए। बंगाली पकवान तैयार किए गए। अमित शाह के स्वागत में यहां भारत माता की जय के नारे लगाए गए। अमित शाह ने लंच डिप्लोमेसी के जरिए बंगाल के वंचित समाज को साथ लेकर चलने का संदेश दिया।

अमित शाह ने देश की सुरक्षा को बंगाल की आंतरिक सुरक्षा से जोड़ते हुए बीजेपी को मौका देने की बात कही। अमित शाह ने कहा, ‘देश की सुरक्षा बंगाल के आंतरिक सुरक्षा के साथ जुड़ी है। देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए बंगाल के युवाओं को रोजगार देने के लिए,बंगाल के गरीबों को बाहर निकालने के लिए, एक मौका बीजेपी को दीजिए हम आने वाले दिनों में यहां सोनार बांग्ला की रचना करेंगे।’

बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या से आक्रोश
पिछले दिनों बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्याओं को भी अमित शाह ने अपने दौरे में भुनाया। कोलकाता पहुंचते ही उन्होंने पिछले महीने पुलिस कस्टडी में मारे गए बीजेपी कार्यकर्ता के परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद बीती रात कोलकाता में पार्टी पदाधिकारियों और सांसदों के साथ बंद कैमरे में बैठक की।

पार्टी पदाधिकारियों के साथ बंद कमरे में बैठक
इस बैठक में पार्टी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के अलावा राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष.और बीजेपी के सभी सांसद मौजूद थे। पार्टी इस बार के चुनाव में बंगाल में कमल खिलाने का सुनहरा मौका मान रही है।

ममता ने लगाया केंद्र पर धमकाने का आरोप
बीजेपी की बंगाल जीतने की रणनीति से ममता खेमे की टेंशन बढ़ गई है। ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर धमकाने का आरोप लगाया। ममता ने अपने बयान में कहा, ‘हम लोग जैसे केंद्र के काम में हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं, वैसे ही केंद्र सरकार भी संविधान के मुताबिक, हमारे कामों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। लेकिन पिछले कुछ दिनों से हमें खबर मिल रही है कि राज्य सरकार को बिना सूचना दिए अलग-अलग एजेंसियां अलग-अलग जगहों पर अलग तरह के लोगों को तकलीफ दे रही हैं। अगर नियम के मुताबिक, किसी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई करनी है तो आप कर सकते हैं, लोकल पुलिस को बता सकते हैं। एक सिस्टम होता है काम करने का।’

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