कांग्रेस उम्मीदवार की बीजेपी कार्यकर्ताओं से झड़प, सतीश सिकरवार ने IG से की शिकायत

ग्वालियर। मध्यप्रदेश की 28 सीटों के लिए सुबह सात बजे मतदान जारी है. इन 28 सीटों में से ग्वालियर विधानसभा सीट भी एक है. वहीं उपचुनाव में कुछ जगहों पर झड़प और फायरिंग की घटनाएं भी सामने आ रही हैं. ग्वालियर के एक पोलिंग बूथ पर पहुंचे ग्वालियर पूर्व से प्रत्याशी सतीश सिकरवार और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई.

कांग्रेस प्रत्याशी सिकरवार का आरोप है कि, पोलिंग बूथ पर बीजेपी कार्यकर्ता मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि, मास्क पहनकर, मुंह बांधकर पोलिंग बूथ पर बैठे हैं और बीजेपी के पक्ष में वोट डालने की कोशिश कर रहे हैं. बीजेपी कार्यकर्ताओं के पोलिंग बूथ पर मौजूद होने की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे सतीश सिकरवार और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई. हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी ने इस मामले की पुलिस में शिकायत की है. सिकरवार ने कहा कि, उन्होंने आईजी से शिकायत की है. साथ ही कहा कि अगर बीजेपी के कार्यकर्ता पोलिंग बूथ से नहीं हटते तो वे लिखित शिकायत करेंगे.

बता दें, इसी तरह की घटनाएं दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी देखने को मिल रही हैं. मुरैना के सुमावली विधानसभा क्षेत्र में मतदान के दौरान पचौरी का पुरा मतदान केंद्र के बाहर लाइन में लगे कुशवाह समाज के लोगों ने बीजेपी समर्थकों पर लाठी- डंडों से मारपीट और फायरिंग की. इस दौरान बघेल कुशवाह को गोली लग गई. गोली चलने की वजह से करीब आधे घंटे तक वोटिंग बंद रही.

प्रधानमंत्री केपी ओली ने प्रचंड को दी बड़े ऐक्शन की दी धमकी, नेपाल में क्या होने जा रहा है?

पड़ोसी देश नेपाल एक बार फिर बड़े राजनीतिक संकट के मुहाने पर खड़ा है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पार्टी के सह अध्यक्ष पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड के बीच लंबे समय तक सुलह की कोशिशें नाकाम हो गई हैं और सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में बंटवारा तय माना जा रहा है। पुष्प कमल दहल की ओर से पार्टी मीटिंग को लेकर दबाव डाले जाने पर ओली ने साफ कह दिया है कि इन बैठकों की आवश्यकता नहीं है और यदि उनके खिलाफ फैसला लिया जाता है तो वह ‘बड़ा ऐक्शन’ ले सकते हैं। 

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के अस्तित्व में आने के बाद से ही इसमें तीन खेमे हैं और दो मिलकर तीसरे को अल्पमत में डाल सकते हैं। काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय दहल और वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल साथ हैं। हालांकि, ओली ने झुकने से इनकार कर दिया है और पार्टी में बंटवारे को तैयार हैं। 

ओली की ओर से ‘बड़े ऐक्शन’ की धमकी को लेकर नेपाल में अटकलों का दौर चल पड़ा है। राजनीतिक हलको से लेकर आम लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि ओली आखिर किस बड़े ऐक्शन की बात कर रहे हैं। 

माधव कुमार नेपाल के करीबी एक कमिटी सदस्य ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर कहा, ”ओली अब को गिराने के लिए धमकाने की रणनीति अपना रहे हैं। चूंकि वह सत्ता में हैं, वह सरकार की अगुआई कर रहे है, वह सरकारी मशीनरी को नियंत्रित करते हैं, ओली खुद को ताकतवर मानते हैं।” 

पार्टी के नेता इस बात का स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे हैं कि ओली के ‘बड़े एक्शन’ का मतलब क्या है? वरिष्ठ नेता झालानाथ खनल ने कहा, ”मैं नहीं जानता कि ओली के ‘बिग ऐक्शन’ का क्या मतलब है। लेकिन इसका कोई मतलब नहीं है, क्योंकि पार्टी सामूहिक रूप से कोई फैसला करेगी।”

पार्टी के आंतरिक सूत्रों के मुताबिक, ओली की ओर से कोई बुरा कदम उठाए जाने के बावजूद दहल शायद कोई कठोर कदम ना उठा सकें। दहल के करीबी नेताओं ने ओली के बड़े एक्शन से डरकर उनपर बातचीत के लिए दबाव बनाने में जुट गए हैं।  

एक नेता ने यहां तक कहा कि यदि ओली पर दबाव बढ़ता है तो वह कोई ऐसा कदम उठाने से भी नहीं हिचकिचाएंगे जो वास्तव में अनुचित होगा। चूंकि संसद का सत्र नहीं चल रहा है। ओली नई पार्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए नियमों में बदलाव करने के लिए अध्यादेश ला सकते हैं। इसके लिए ओली ने अप्रैल में अध्यादेश जारी किया था, लेकिन भारी विरोध और आलोचना की वजह से उन्हें वापस लेना पड़ा था।

इस अध्यादेश में कहा गया था कि पार्टी में बंटवारे या नई पार्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए संसदीय पार्टी या सेंट्रल कमिटी के 40 फीसदी सदस्यों की सहमति की आवश्यकता होगी। हालांकि, कई नेता मानते हैं कि ओली यदि इससे भी बड़ा कोई कदम उठा लें तो हैरानी की बात नहीं होगी। पार्टी के कई नेताओं का यह भी कहना है कि ओली संसद को भंग कर सकते हैं।  

दहल के करीबी और स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य पंफा भूसल ने कहा, ”ओली के साथ बैठक के दौरान दहल ने इस बात पर भी चिंता जाहिर की थी कि क्या मौजूदा (राजनीतिक) सिस्टम ध्वस्त हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा, ”दहल इस बात को लेकर चिंतित थे कि चीजें सही दिशा में नहीं बढ़ रही हैं।”

फिर बढ़ने वाली है पाकिस्तान की बेचैनी, इस दिन भारत आएगा रफाल का दूसरा बैच

नई दिल्ली: फ्रांस से नॉन-स्टॉप उड़ान भरकर रफाल फाइटर जेट का दूसरा बैच 4 नवंबर को भारत के अंबाला एयरबेस पर पहुंचने की संभावना है. 3 रफाल के साथ फ्रांसीसी एयरफोर्स के फाइटर और मिड एयर रिफ्यूलर भी होंगे. इनके आने से भारतीय वायुसेना में रफाल एयरक्राफ्ट की कुल तादाद 8 हो जाएगी. 

इससे पहले 29 जुलाई को 5 रफाल विमानों की हरियाणा के अंबाला एयरबेस पर सुरक्षित लैंडिंग हुई थी. इन्हें 10 सितम्बर को अंबाला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ‘गोल्डन एरोज स्क्वॉड्रन’ में शामिल किया गया था. सूत्रों के मिली जानकारी के अनुसार, ये लड़ाकू विमान फ्रांसीसी बंदरगाह शहर बोरदु के मेरिग्नैक एयरबेस से उड़ान भरेंगे और करीब 7,000 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद पहले गुजरात के जामनगर पहुंचेंगे.

इस यात्रा के लिए भारतीय वायु सेना के पायलटों को फ्रांस के सेंट दिजिएर एयरबेस में बकायदे चरणबद्ध तरीके से ट्रेनिंग दी गई है. बताते चलें कि रफाल विमान भारत द्वारा पिछले दो दशक से अधिक समय में लड़ाकू विमानों की पहली बड़ी खरीद है. इन विमानों के आने से भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता में महत्वपूर्ण रूप से बढ़ोतरी होगी. भारत ने 23 सितंबर 2016 को फ्रांसीसी एरोस्पेस कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए 59,000 करोड़ रुपये का सौदा किया था. 

जमीनी और हवाई ठिकानों को एक पल में ध्वस्त कर सकता है रफाल
रफाल मीका मल्टी-मिशन एयर-टू-एयर मिसाइलों और स्कैल्प डीप-स्ट्राइक क्रूज मिसाइलों से लैस है. ये वे हथियार हैं जिससे लड़ाकू पायलट पहाड़ों में भी दुश्मनों के हवाई और जमीनी ठिकानों पर हमला कर पाएंगे. राफेल के अचूक निशाने से दुश्मन किसी भी तरह से नहीं बच सकता. 10 टन वजनी यह लड़ाकू विमान मिसाइल्स के साथ उड़ान भरता है. तब इसका वजन 25 टन तक हो जाता है. ऐसे में इतना तो तय है कि रफाल दुश्मन के छक्के छुड़ाने के लिए अपने साथ काफी मिसाइल्स कैरी कर कर सकता है. रफाल स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस है और इसी खूबी के चलते यह दुश्मन को चकमा देने की ताकत रखता है और युद्ध के दौरान पूरा गेम बदल सकता है. 

बात अगर हथियारों की करें, तो रफाल में सबसे खतरनाक मिसाइल  Meteo beyond Visual Range AIR to Air Missile है. इसकी खासियत है कि यह मिसाइल हवा से हवा में मार कर सकती है. बता दें कि कुल 36 रफाल विमान भारत फ्रांस से खरीद रहा है. एयरफोर्स के एक अधिकारी ने बताया, ‘रफाल कई तरह के मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है. जमीनी और समुद्री हमला, वायु रक्षा, टोही और परमाणु हमले को रोकने में भी सक्षम है. यह लगभग 10 टन हथियार और पांच टन ईंधन ले जा सकता है.’

दिग्विजय सिंह ने फिर उठाए EVM पर सवाल, पूछा- विकसित देश क्यों नहीं करते भरोसा

भोपाल।
मध्य प्रदेश में विधानसभा की 28 सीटों पर उपचुनाव के लिए वोटिंग शुरू होते ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर ईवीएम मशीनों पर सवाल खड़े किए हैं। दिग्विजय ने कहा है कि भारत और कुछ अन्य छोटे देश ही ईवीएम मशीन का उपयोग करते हैं जबकि विकसित देशों में इसका इस्तेमाल नहीं होता।

दिग्विजय ने मंगलवार सुबह ट्वीट कर कहा कि तकनीकी युग में विकसित देश EVM पर भरोसा नहीं करते पर भारत व कुछ छोटे देशों में EVM से चुनाव होते हैं। विकसित देश क्यों नहीं कराते? क्योंकि उन्हें EVM पर भरोसा नहीं है। क्यों? क्योंकि जिसमें चिप है वह हैक हो सकती है।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां पहले भी ईवीएम को लेकर सवाल खड़ी करती रही हैं। ये पार्टियां बीजेपी पर ईवीएम की हैकिंग का आरोप लगाती रही हैं। हालांकि, ऐसे आरोप अक्सर चुनावी नतीजे आने के बाद सामने आते हैं, लेकिन दिग्विजय ने इस बार वोटिंग शुरू होते ही ट्वीट कर फिर से इस विवाद को हवा दे दी है।

राज्यसभा चुनाव में सभी प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए, बीजेपी संग कांग्रेस ने भी बनाया ‘इतिहास’

लखनऊ
राज्यसभा के लिए उत्तर प्रदेश की 10 सीटों के लिए सभी प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए। सोमवार को नाम वापस लेने की अवधि खत्म होते ही चुनाव अधिकारी ने प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचित होने की घोषणा की। इसी के साथ इतिहास में बीजेपी पहली बार राज्यसभा में सबसे बेहतर स्थिति में पहुंच गई है और कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे खराब हाल में।

उत्तर प्रदेश की इन सीटों से राज्यसभा पहुंचे लोगों में बीजेपी की ओर से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, पूर्व डीजीपी बृजलाल, नीरज शेखर, हरिद्वार दुबे, गीता शाक्य, बीएल शर्मा और सीमा द्विवेदी शामिल हैं। वहीं एक सीट समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव और एक सीट बहुजन समाज पार्टी के रामजी गौतम के खाते में गई है।

बीजेपी ने यूपी में चला था दांव

आपको बता दें कि 25 नवंबर को राज्यसभा के 10 सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इनमें तीन सांसद बीजेपी के, चार समाजवादी पार्टी के, दो बीएसपी के और एक कांग्रेस के नेता शामिल हैं। राज्यसभा चुनावों में बीजेपी यूपी में 9 प्रत्याशी जीतने की स्थिति में थी, लेकिन उसने सिर्फ 8 प्रत्याशी उतारते हुए एक सीट खाली छोड़ दी थी। बीजेपी के इस दांव ने जहां सबको चौंका दिया था, वहीं कांग्रेस और एसपी ने बीजेपी और बीएसपी के गठजोड़ का आरोप लगाया था।

बदल गया राज्यसभा का गणित

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राज्यसभा की 11 सीटों पर नतीजे साफ होने के बाद राज्यसभा में बीजेपी अब तक के शिखर पर है, वहीं कांग्रेस की सीटें इतिहास में सबसे कम हो गई हैं। अब बीजेपी के पास कुल 92 सीटें हो जाएंगी, वहीं कांग्रेस के पास सिर्फ 38 सीटें बचेंगी। अगर बात करें एनडीए की तो अब राज्यसभा में एनडीए की कुल सीटों की संख्या 112 हो जाएगी। यह संख्या बहुमत के आंकड़े से सिर्फ 10 सीटें दूर है। आपको बता दें कि राज्यसभा में कुल सीटें 245 हैं जिनमें से 12 सीटों पर राष्ट्रपति सदस्यों को नामांकित करते हैं। बाकी सीटों पर चुनाव होता है।

Madhya Pradesh News : फ्रांस के राष्ट्रपति के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले कांग्रेस विधायक सहित 50 लोग गिरफ्तार 

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कांग्रेस (Congress) विधायक आरिफ मसूद (Congress MLA Arif Masood) सहित 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि बाद में सभी को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

हाइलाइट्स:

फ्रांस के राष्ट्रपति के खिलाफ प्रदर्शन करने पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद सहित 50 लोग गिरफ्तार।कोविड-19 के नियमों का उल्लंघन कर कांग्रेस विधायक ने किया था प्रदर्शन, दर्ज हुई थी एफआईआरगिरफ्तार करने के बाद कांग्रेस विधायक सहित सभी 50 लोगों रिहा किया.

भोपाल
फ्रांस (France) के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (President Emmanuel Macron) के खिलाफ पिछले सप्ताह प्रदर्शन कर कोविड-19 (Covid-19) के लिए लागू आदेश का उल्लंघन करने के मामले में मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कांग्रेस (Congress) विधायक आरिफ मसूद (Congress MLA Arif Masood) सहित 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि बाद में सभी को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

मध्य प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक उपेन्द्र जैन ने सोमवार को बताया कि मसूद और 49 अन्य लोगों को रविवार को गिरफ्तार किया गया और बाद में इन सभी को पुलिस ने जमानत पर रिहा कर दिया, क्योंकि इन्होंने जो अपराध किया था वह जमानती था। उन्होंने कहा कि इन सभी को पुलिस थाने से रिहा किया गया है। जैन ने बताया कि इनके खिलाफ धारा 188 (एक लोकसेवक द्वारा घोषित आदेश की अवज्ञा) के तहत मामला दर्ज करने के अलावा चार अन्य धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें से दो धाराएं 269 और 270, आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 15 (बी) एवं महामारी अधिनियम की धारा 3 शामिल हैं, जो कोविड-19 के चलते जिला प्रशासन ने लगाई है।

इससे पहले, तलैया पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी डी पी सिंह ने बताया था कि मसूद और कुछ मौलवियों सहित दो हजार लोग विरोध प्रदर्शन के तहत गुरुवार को भोपाल में इक़बाल मैदान में एकत्र हुए थे। इनके खिलाफ धारा 188 (एक लोकसेवक द्वारा घोषित आदेश की अवज्ञा) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

उन्होंने कहा कि इन प्रदर्शनकारियों ने कोविड-19 की महामारी के मद्देनज़र जिला प्रशासन के उस आदेश का उल्लंघन किया है, जिसमें लोगों के इतनी बड़ी तादात में इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगाया गया है। बता दें, फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद के कार्टून विवाद पर भोपाल के इक़बाल मैदान में गुरुवार को विधायक आरिफ मसूद के नेतृत्व में मौलवियों और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने फ्रांस के राष्ट्रपति के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कानूनी ‌श‌िक्षण संस्‍थानों को राज्य सरकार और SDMA की एनओसी के साथ फिज़िकल एग्ज़ाम कराने की अनुमति दी

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने विश्वविद्यालयों/ कानूनी शिक्षण केंद्रों को राज्य सरकार और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की एनओसी के साथ फिज़िकल एग्ज़ाम आयोजित करने की अनुमति देने का फैसला किया है। हालांकि जब तक COVID-19 महामारी से छुटकारा नहीं पा लिया जाता है, तब तक ऐसे छात्रों ‌को परीक्षा में नहीं शामिल होने का विकल्प दिया जा सकता है, जो असमर्थ हैं और/ या परीक्षा में उपस्थित होने के लिए तैयार नहीं हैं। फिज़िकल एग्ज़ाम में उपस्थित हुए छात्र, यदि इस प्रकार की परीक्षा को क्लियर नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें यूनिवर्सिटी/ कानून श‌िक्षा के केंद्रों के भौतिक रूप से पुनः खुलने के बाद रि-एपियर परीक्षा में उपस्थित होने का मौका दिया जा सकता है।

काउंसिल ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय द्वारा विचार की गई फिज़िकल एग्ज़ाम 02.11.2020 से प्रभावी होती है और यदि उक्त परीक्षा उन सभी छात्रों के लिए, जो परीक्षा में उपस्थित नहीं हो सकते, बिना किसी दंडात्मक परिणाम के आयोजित की जाती है, तो कोई भी छात्र प्रभावित नहीं होगा, और उन्हें बार काउंसिल ऑफ इंडिया के 27.05.2020 और 09.06.20120 के परिपत्र / प्रेस रिलीज़ में ‌किए गए विचार के अनुसार कॉलेज / विश्वविद्यालय के भौतिक रूप से दोबारा खुलने के बाद परीक्षा में बैठने का अवसर मिलेगा, जिसे दिनांक 05.10.2020 के बीसीआई संकल्प द्वारा आगे स्पष्ट किया गया है।

जनरल काउंसिल ने राज्य सरकार और राज्य आपदा प्रबंधन की एनओसी के साथ फिज़िकल एग्ज़ाम आयोजित करने के लिए विश्वविद्यालयों/कानूनी केंद्रों को एक विकल्प प्रदान करने के लिए बीसीआई के संकल्प/परिपत्र/ प्रेस विज्ञप्ति दिनांक 27.05.2020, 09.06.2020 और 05.10.2020 को संशोधित किया  है। प्राधिकरण, ऐसे छात्रों को विकल्प देता है, जो COVID-19 महामारी की समाप्‍ति तक ऐसी फिज़िकल एग्ज़ाम में असमर्थ और / या अनिच्छुक हैं।

परिषद ने यह भी संकल्प लिया है कि अंतिम वर्ष के कानून के छात्रों / कक्षाओं के साथ-साथ सभी मध्यस्‍थ कक्षाओं के लिए परीक्षा ऑनलाइन आयोजित की जा सकती है, यदि विश्वविद्यालय / लॉ कॉलेज इसे ऑनलाइन आयोजित करने में सक्षम हैं, और यदि छात्रों के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह भी संकल्प किया जाता है कि यदि ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की जाती है और कोई भी छात्र/छात्रा इसे देने में असमर्थ है/ या उसमें उपस्थित नहीं है, तो वह इस तरह की परीक्षा / विषय का पेपर उत्तीर्ण नहीं कर पा रहा है, ऐसे छात्र महामारी के बाद विश्वविद्यालय/ कॉलेज दोबारा खुलने के बाद एक महीने के भीतर जब भी पुनः परीक्षा देने के हकदार होंगे।

परिषद ने दोहराया है कि महामारी से प्रभावित सभी छात्र जो अगले वर्ष / सेमेस्टर में पदोन्नत होते हैं, उनकी पदोन्नति प्रभावित हुए बिना, और जो उपस्थित होने में असमर्थ हैं / या वर्तमान में आयोजित ( महामारी के दौरान) ऑफ़लाइन/ ऑनलाइन परीक्षा और / या फिज़िकल एग्ज़ाम जो विश्वविद्यालयों / कॉलेजों के भौतिक रूप से दोबारा खुलेने के एक महीने के भीतर दोबारा आयोजित की जानी है, को क्लियर करने में असमर्थ हैं, उन्हें कानून की डिग्री प्रदान करने से पहले, अंतिम वर्ष की परीक्षा के तुरंत बाद, बिना किसी दंड या पूर्वाग्रह के, ऐसे पेपर को पास करने का अवसर प्रदान किया जाएगा।

उड़ने वाली कार का हुआ सफल ट्रायल, महज 3 मिनट में बन जाती है एयर व्हीकल

यूरोपीय देश स्लोवाकिया (Slovakia) में महज तीन मिनट में रोड से आसमान में उड़ जाने वाली कार का टेस्ट किया गया.


नई दिल्ली. यूरोपीय देश स्लोवाकिया (Slovakia) की एक कंपनी क्लेनविजन (KleinVision) पिछले 30 साल से फ्लाइंग कार (Flying Car) विकसित करने के लिए मेहनत कर रही है. अब क्लेनविजन का सपना अब साकार होता नजर आ रहा है. हाल ही में कंपनी ने घोषणा की है कि फ्लाइंग कार का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है.

इस फ्लाइंग कार को एयर कार (Air Car) का नाम दिया गया है. ये जमीन पर तो चलेगी ही साथ ही आसमान में भी उड़ सकेगी. कंपनी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ”प्रोफेसर स्टीफन क्लेन द्वारा डिजाइन की गई 5th जनेरेशन की फ्लाइंग कार ने इस हफ्ते स्लोवाकिया के पिएस्टनी हवाई अड्डे पर दो उड़ानें कंप्लीट की गईं.”

महज 3 मिनट में बन जाती है एयर व्हीकल

क्लेनविजनल ने अपने यूट्यूब चैनल पर एयर कार का एक वीडियो पोस्ट किया है. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि ये पहले कार से एयरक्राफ्ट में तब्दील होती है और फिर लैंड करने के बाद रोड पर दौड़ती हुई भी दिखती है. कंपनी ने लिखा, ”लेटेस्ट जनरेशन फ्लाइंग कार रोड व्हीकल से एयर व्हीकल में सिर्फ तीन मिनटों में तब्दील हो सकती है. कार सेल्फ ड्राइव जर्नी और कमर्शियल टैक्सी सर्विस के लिए उपयोगी है.”