पश्चिम बंगाल में बीजेपी की वापसी के लिए आरएसएस प्रचारक को बनाया गया नया महासचिव विजयवर्गी के पर कतरे कतरे

कोलकाता। बीजेपी आलाकमान ने पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई में अंदरूनी कलह मिटाने और राज्य के नेतृत्व को काबू में रखने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इसमें बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के पर करतना भी शामिल है। अखबार के मुताबिक बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने विजयवर्गीय से कहा है कि उन्हें अपने गृह राज्य मध्य प्रदेश से ज्यादा वक्त पश्चिम बंगाल में लगाने की कोई ज़रूरत नहीं है। उनकी जगह अब पार्टी के संयुक्त महासचिव (संगठन) शिव प्रकाश को पश्चिम बंगाल पर ज्यादा ध्यान देने को कहा गया है। कैलाश विजयवर्गीय अब तक पश्चिम बंगाल में पार्टी के केंद्रीय सह-पर्यवेक्षक के तौर पर काफी वक्त देते रहे हैं।

संगठन के स्तर पर हाल में किए गए बदलावों में आरएसएस प्रचारक रहे अमिताव चक्रवर्ती को पश्चिम बंगाल बीजेपी का संगठन महासचिव बनाना बेहद मायने रखता है। चक्रवर्ती को सुब्रतो चट्टोपाध्याय की जगह पर संगठन महासचिव बनाया गया है। सुब्रतो पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष के बेहद करीबी माने जाते हैं और 2014 से संगठन महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सूत्रों के मुताबिक घोष ने उन्हें हटाए जाने का कड़ा विरोध किया था, लेकिन इस मामले में उनकी बात सुनी नहीं गई।

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने ये तमाम बदलाव राज्य संगठन के भीतर दिलीप घोष और मुकुल रॉय खेमे के खेमों में बढ़ते आपसी टकराव को काबू में रखने के इरादे से किए हैं। बीजेपी आलाकमान को फिक्र है कि अगर इस खेमेबाज़ी पर काबू नहीं पाया गया तो 2021 के विधानसभा चुनाव में काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इन बदलावों के जरिए बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने पश्चिम बंगाल इकाई की कमान सीधे अपने हाथों में लेने का संकेत भी दिया है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एक वरिष्ठ नेता ने उन्हें बताया कि अब से बीजेपी की राज्य इकाई के तमाम मसलों पर केंद्रीय नेतृत्व की सीधी नज़र रहेगी, जो तमाम मसलों और रणनीतियों का फैसला खुद ही करेगा।

दरअसल, 2017 में मुकुल रॉय के शामिल होने के बाद से ही पश्चिम बंगाल बीजेपी में दो गुट बने हुए हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद यह गुटबाज़ी और बढ़ गई। जहां पार्टी के पुराने लोग दिलीप घोष के साथ हैं, वहीं टीएमसी से आने वाले लोगों का जुड़ाव मुकुल रॉय गुट के साथ है। दिलचस्प बात यह है कि कैलाश विजयवर्गीय इस गुटबाज़ी को खत्म करने पर ध्यान देने की जगह मुकुल रॉय गुट को बढ़ावा देने में लगे रहे। पिछले महीने राज्य समिति के पुनर्गठन में मुकुल रॉय गुट के नए लोगों को अहमियत दिए जाने के बाद यह गुटबाज़ी और बढ़ गई।

इसी बीच, मुकुल रॉय को पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल सिन्हा की जगह पर  राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया गया। हालात तब और बिगड़ गए जब दिलीप घोष ने भारतीय जनता युवा मोर्चा की राज्य इकाई की सभी जिला समितियों को भंग करके उनके अध्यक्षों को पद से हटा दिया। इसी के बाद बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को लगा कि अब इस अंदरूनी कलह पर काबू पाने के लिए कदम उठाना ज़रूरी हो गया है।

विजयवर्गीय के पर कतरने का फैसला करके बीजेपी आलाकमान ने मुकुल रॉय गुट को कड़ा संदेश देने की कोशिश भी की है। संदेश यह है कि मुकुल रॉय को अब दिलीप घोष के साथ मिलकर काम करना होगा ताकि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में पार्टी को गुटबाज़ी का खामियाज़ा न भुगतना पड़े।

बहरहाल, इस सारी कवायद का एक संदेश यह भी है कि अब बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई का नियंत्रण पूरी तरह केंद्रीय नेतृत्व के हाथों में चला गया है, जिनके इशारों पर ही अब राज्य इकाई को काम करना होगा। इन हालात में टीएमसी यह आरोप भी लगा सकती है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी दरअसल बाहरी लोगों द्वारा चलाई जाने वाली पार्टी है।

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