हाथरस केस: सच्चाई जानने के लिए अब गांव के लोगों की नजरें सीबीआई जांच पर

हाथरस के कथित गैंगरेप में की जांच करते हुए सीबीआई को 17 दिन बीत चुके हैं। अब गांव के लोगों के साथ ही आसपास के लोगों की नजरें सीबीआई की जांच पर हैं। सभी जल्द ही इसकी सच्चाई जानने के लिए उत्सुक है। 

हाथरस में पहली किसी मामले की सीबीआई जांच कर रही है। मामला पेचीदा होने के कारण हर कोई यह जानने के लिए उत्सुक है कि वास्तव में मामला क्या है, क्योंकि एसआईटी अपनी जांच पूरी करने के बाद वापस जा चुकी है। सरकार ने एसआईटी की रिपोर्ट भी उजागर नहीं की है। जबकि एसआईटी ने इस पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका की जांच की थी। इसलिए किसी को यह पता भी नहीं हो सका है कि इस पूरे प्रकरण में और कितने पुलिसकर्मी दोषी हैं। बात अगर सीबीआई की करें तो शुरुआत में केंद्र सरकार ने कहा था कि पंद्रह दिन के अंदर सीबीआई अपनी जांच पूरी करेगी, लेकिन मामला फंसता ही नजर आ रहा है। यही कारण है कि सीबीआई अभी तक जांच पड़ताल में जुटी है। गुरुवार को गांव में हर जगह यही चर्चा थी कि आखिर कब सच्चाई सामने आयेगी। 

बाजरे की करब को इकट्ठा करने पहुंचा पीड़ित परिवार 

पीड़ित परिवार ने गुरुवार को पुलिस सुरक्षा के बीच अपने खेत पर जाकर बाजरे की करब को इकठ्ठा किया। इस बीच पूरा परिवार पुलिस के घेरे में रहा। बाहरी किसी व्यक्ति को प्रवेश नहीं करने दिया।दो दिन पहले पीड़ित परिवार ने अपने खेत में खड़ी बाजरे की फसल को काटा था। बाजरे को परिवार के लोग निकालकर अपने घर ले आये थे,लेकिन बाजरे की करब खेत में ही पड़ी थी। गुरुवार की सुबह पीड़ित परिवार ने पुलिस से कहा कि वह अपने करब को इकठ्ठा करने के लिए जायेगे तो पुलिसकर्मी पीड़िता के पिता, दोनों भाईऔर मां को अपने साथ खेत पर ले गये। खेत के आसपास पुलिसकर्मी घेरा बनाकर खड़े हो गये। उसके बाद पीड़ित परिवार ने पूरी करब को इ कठ्ठा किया और बाद में दोपहर को अपने घर आ गये। 

भाजपा का रोड शो

ग्वालियर और ग्वालियर पूर्व विस में शक्ति प्रदर्शन के लिए शुक्रवार को भाजपा रोड शो करेगी।
भाजपा के रोड शो में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, सांसद विवेक शेजवलकर, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, अजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालसिंह आर्य उपस्थित रहेंगे।

रोड शो शाम 4.30 बजे ग्वालियर पूर्व विस क्षेत्र में नदी गेट से शुरू होकर जयेंद्रगंज, इंदरगंज चौराहा, लोहिया बाजार, नया बाजार, दाल बाजार होते हुए इंदरगंज चौराहे पर समाप्त होगा। ग्वालियर विस क्षेत्र में शाम 6 बजे रोड शो सेवानगर पार्क से शुरू होगा और किला गेट हजीरा से चार शहर का नाका, हजीरा चौराहे से होकर तानसेन नगर पर खत्म होगा।

सेंसेक्स में 323 और निफ्टी में 82 अंकों की गिरावट, बैंकिंग शेयरों में भी भारी बिकवाली, बजाज फाइनेंस का शेयर 3% नीचे

कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन बाजार में बिकवाली है। बीएसई सेंसेक्स 323.61 अंक नीचे 39,426.24 पर और निफ्टी 82.40 अंक नीचे 11,588.40 पर कारोबार कर रहा है। बाजार की गिरावट को बैंकिंग और ऑटो शेयर लीड कर रहे हैं। निफ्टी बैंक इंडेक्स में 327 अंकों की गिरावट है। ऑटो इंडेक्स में भी 1% की गिरावट है। आईटी और मेटल के शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं।

स्टॉक्स इंडेक्स

निफ्टी में बजाज फाइनेंस और भारती एयरटेल के शेयरों में 3-3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट है। कोटक बैंक और मारुति के शेयरों में भी 2-2 फीसदी की गिरावट है। जबकि, अदानी पोर्ट का शेयर 5% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। बीपीसीएल के शेयर में 3% की बढ़त है। आईओसी और कोल इंडिया के शेयरों में भी 2-2 फीसदी से ज्यादा की बढ़त है। सुबह बीएसई सेंसेक्स 29.97 अंक ऊपर 39,779.82 पर और निफ्टी 7.65 अंक ऊपर 11,678.45 पर खुला था।

गुरुवार को बाजार का हाल

कल बीएसई सेंसेक्स 172.61 अंक नीचे 39,749.85 पर और निफ्टी 58.80 अंक नीचे 11,670.80 पर बंद हुआ था। बाजार की गिरावट को मेटल और ऑटो सेक्टर ने लीड किया था। निफ्टी ऑटो इंडेक्स और मेटल इंडेक्स में क्रमश: 0.96% और 0.76% की गिरावट देखने को मिली थी। कल निफ्टी में एलएंडटी का शेयर 4% नीचे बंद हुआ था। टाइटन के शेयर में भी 3% की गिरावट देखने को मिली थी। एशियन पेंट्स का शेयर 3% ऊपर बंद हुआ था। टेक महिंद्रा का शेयर भी 2% ऊपर बंद हुआ था। गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 385.29 अंक नीचे 39,537.17 पर और निफ्टी 96.30 अंक नीचे 11,633.30 पर खुला था।

इन शेयरों पर रहेगी नजर

1. तिमाही नतीजे – शुक्रवार को आरआईएल, आईओसी, डीएलएफ, इंडसइंड बैंक, जिंदल स्टील, यूपीएल, क्वेस कॉर्प और वकरंगी अपनी दूसरी तिमाही के नतीजे घोषित करेंगी।
2. बैंक ऑफ बड़ौदा- बैंक को सितंबर तिमाही में 1,678.6 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ है। इससे पहले पिछली तिमाही में बैंक को 864.26 करोड़ रुपए घाटा हुआ था। दूसरी तिमाही में बैंक का नेट इंट्रेस्ट इनकम भी 6.8% बढ़कर 7,508 करोड़ रुपए हो गया।
3. मारुति सुजुकी – दूसरी तिमाही में मारुति सुजुकी इंडिया का मुनाफा सालाना आधार पर 1% बढ़कर 1,371 करोड़ रुपए रहा। ऑपरेशन से मिलने वाला रेवेन्यू 10.34% बढ़कर 18,755.6 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 16,997.9 करोड़ रुपए था। दूसरी तिमाही में कंपनी ने कुल 393,130 वाहनों की बिक्री की है।
4. इंटरग्लोब एविएशन – एयरलाइन कंपनी की कुल आय 2020-21 की दूसरी तिमाही में 64.5 प्रतिशत घटकर 3,029 करोड़ रुपए रही। कंपनी का कुल व्यय सितंबर, 2020 को समाप्त तिमाही में 4,224 करोड़ रुपए रहा, जो एक साल पहले 2019-20 की इसी तिमाही के मुकाबले 55.9 प्रतिशत कम है।
5. वोडाफोन-आइडिया (VI)- टेलीकॉम कंपनी ने गुरुवार को 30 सितंबर को समाप्त तिमाही के लिए 7,218 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा पोस्ट किया। कंपनी को पिछले साल की समान तिमाही में 50,921 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। दूसरी तिमाही में रेवेन्यू करीब 3% घटकर 10,830.5 करोड़ रुपए रही, जो एक साल पहले समान तिमाही में 11,146.4 करोड़ रुपए थी।

दुनियाभर के बाजारों में रही बढ़त

गुरुवार को दुनियाभर के बाजारों में तेजी देखने को मिली। अमेरिकी बाजार डाउ जोंस 0.52% की बढ़त के साथ 139.16 अंक ऊपर 26,659.10 पर बंद हुआ था। नैस्डैक इंडेक्स में भी 1.87% बढ़त के साथ 207.99 अंक ऊपर 11,350.70 पर बंद हुआ था। वहीं, एसएंडपी 1.19% की तेजी के साथ 39.08 पॉइंट ऊपर 3,310.11 पर बंद हुआ था।

दूसरी ओर यूरोपियन मार्केट में गुरुवार को ज्यादातर इंडेक्स फ्लैट ही बंद हुए थे। इसमें ब्रिटेन का FTSE 5,581.75 अंक पर और फ्रांस का CAC 4,569.67 अंक पर बंद हुआ था। जर्मनी का DAX इंडेक्स 0.32% ऊपर बंद हुआ था। शुक्रवार को एशियाई बाजारों में बिकवाली है। जापान का निक्केई इंडेक्स 149.44 अंक नीचे कारोबार कर रहा है। हांगकांग का हेंगसेंग इंडेक्स भी 52.90 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। इसके अलावा चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स भी 0.10% की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है।

दुनियाभर के बाजारों में रही बढ़त

गुरुवार को दुनियाभर के बाजारों में तेजी देखने को मिली। अमेरिकी बाजार डाउ जोंस 0.52% की बढ़त के साथ 139.16 अंक ऊपर 26,659.10 पर बंद हुआ था। नैस्डैक इंडेक्स में भी 1.87% बढ़त के साथ 207.99 अंक ऊपर 11,350.70 पर बंद हुआ था। वहीं, एसएंडपी 1.19% की तेजी के साथ 39.08 पॉइंट ऊपर 3,310.11 पर बंद हुआ था।


World war 3: नास्त्रेदमस ने किया है इशारा, ईसाईयत-इस्लाम के संघर्ष से विश्वयुद्ध का खतरा

नई दिल्ली: फ्रांस (France) को लेकर मुस्लिम देशों (Islamic countries) के रवैये से एक नए संघर्ष (Third world war) का आगाज होने की आशंका है. फ्रांसीसी राष्ट्रपति इम्मानुएल मैक्रों (emmanuel macron) ने कट्टरपंथी इस्लाम (Islamic terrorism) के कारण पैदा हुए संकट की तरफ इशारा किया तो दुनिया भर के मुसलमानों ने एक सुर में मैक्रों को निशाना बनाना शुरु कर दिया. यहां तक कि अपने कुकर्मों की तरफ से आंख मूंदकर दुनिया भर के मजहबी कट्टरपंथी जिस तरह मैक्रां के खिलाफ मोर्चा बांध रहे हैं. उससे भविष्य में ईसाईयत और इस्लाम के बीच फिर से आठवां क्रूसेड शुरु होने की आशंका है. मशहूर भविष्यवेत्ता नास्त्रेदमस ने इसकी तरफ इशारा भी किया है. 

क्या है नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी

दुनिया के महान भविष्यवक्ता मिशेल द नास्त्रेदमस ने तीसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत की तरफ संकेत देते हुए अपनी मशहूर किताब सेंचुरीज में लिखा है कि ”युद्ध तब शुरू होगा जब ऊंट राइन और डेन्यूब का पानी पीएगा और इससे पछताएगा नहीं. और फिर रोना और लॉरा थरथराएंगे. लेकिन आल्प्स में मुर्गा उसे नष्ट कर देगा.”
नास्त्रेदमस की ये भविष्यवाणी तीसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत मानी जाती है. जिसमें ऊंट मुस्लिम देशों का प्रतिनिधित्व करता है. जो कि यूरोपीय देशों में भारी कहर बरपाएगा. शुरुआत में ईसाई देशों की हार होगी. लेकिन बाद में इस्लामी सेना का विनाश कर दिया जाएगा. 

नास्त्रेदमस की इस भविष्यवाणी की विशद व्याख्या की गई है. जिस पर कई किताबें भी लिखी गई हैं. जिसमें से बेस्टसेलर बुक का नाम है. नास्त्रेदमस और यूरोप पर इस्लामी आक्रमण Nostradamus and Islamic invasion on europe). 

इस किताब में विस्तार से बताया गया है कि कैसे यूरोप के सभ्य देश लगातार इस्लामी कट्टरपंथियों के बर्बर आक्रमण के शिकार बन रहे हैं. जो कि आने वाले भविष्य में बड़े संघर्ष का कारण बन सकता है. 

यूरोप पर इस्लामी आक्रमण
आक्रमण शब्द सुनते ही आप चौंकिएगा नहीं. क्योंकि यूरोप में होने वाला इस्लामी आक्रमण किसी आक्रामक तरीके से नहीं बल्कि बेहद शांति से शातिर चाल के तहत हो रहा  है. यूरोपीय देशों में मुस्लिम कट्टरपंथी शरणार्थी के भेस में पहुंच रहे हैं. जिसके बाद ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करके वहां अपनी आबादी बढ़ा रहे हैं और पूरे देश को अपनी शरिया के मुताबिक बदलने की कोशिश में जुटे हैं. यह एक तरह के यूरोपीय देशों पर कब्जे की साजिश है. 
हालत ये है किफ्रांस में इस समय यूरोप में सबसे ज़्यादा मुसलमान 65 लाख मुसलमान हो चुके हैं. जो कि वहां की जनसंख्या का 7.5 फीसदी हैं. 

जर्मनी में मुसलमानों की संख्या 52 लाख है. जो वहां की आबादी का 5 फ़ीसदी हैं. 
-ब्रिटेन में मुस्लिम आबादी 38 लाख है जो कि वहां की आबादी का 5 फ़ीसदी हैं.
इसके अलावा स्विट्जरलैण्ड, नीदरलैण्ड, ऑस्ट्रिया, हंगरी जैसे यूरोपीय देशों में भी शरणार्थियों के रुप में आए मुस्लिमों ने अपनी संख्या बढ़ानी शुरु कर दी है.

जिसके नतीजे में वहां प्रतिक्रिया हो रही है. इन देशों की जनता ने ऐसे नेताओं को चुनना शुरु कर दिया है.  जो उन्हें मुस्लिम कट्टरपंथियों से निजात दिलाने का वादा कर रहे हैं. एक तरफ कट्टरपंथी मानने के लिए तैयार नहीं हैं. दूसरी तरफ यूरोपीय देशों की जनता गोलबंद होने लगी है. ऐसे में संघर्ष अवश्यंभावी दिख रहा है. 

कट्टरपंथियों से सबसे ज्यादा मुश्किल में फ्रांस 
यूरोप के सबसे अभिजात्य माने जाने वाले देश फ्रांस में सबसे ज्यादा संघर्ष की स्थिति बनती हुई दिखाई दे रही है. यहां मुस्लिम आबादी सबसे ज्यादा है. जिसकी वजह से मुश्किल भी सबसे ज्यादा है. फ्रांस में पिछले कई दशकों से कई आतंकवादी हमले हो चुके हैं. मुस्लिम शरणार्थियों और कट्टरपंथी आतंकियों ने पेरिस में कई बार, नीस, लेस लिस, ला डिफेंस, जो ले टूर्स, सेंट क्वेंटिन फलावियर, थेलीज, वैलेंस, मैगनविल, लेवालेइ पैरे, मर्साई, करकासोन, स्ट्रैसबर्ग, ल्योन आदि शहरों को अपने आतंक का निशाना बनाया है. 
ताजा हमला फिर से नीस शहर में हुआ है. जहां चर्च के  बाहर चाकूबाजी की घटना हुई है. जिसमें तीन लोगों की मौत की खबर है. जबकि कई लोग घायल हो गए हैं. 

फ्रांस में शरणार्थियों ने सबसे पहले यहूदी समुदाय के खिलाफ हिंसा की शुरुआत की. 
पेरिस के सारसेल्स जैसे ग़रीब उपनगरीय इलाक़ों में, जहां यहूदी और मुसलमान साथ-साथ रहते हैं, वहां यहूदियों और उनके उपासनास्थलों पर हमले तेज़ होते गए. इस्लामी कट्टरपंथियों के हाथों कई यहूदियों की मौत के बाद यहूदी समाज का बड़ा तबक़ा फ्रांस छोड़कर इसराइल और दूसरे देशों में बसने लगा.

शार्ली एब्दो के कार्टूनिस्टों पर हमले के बाद फ्रांस का सब्र खत्म हुआ
यहूदियों पर अपनी दहशत कायम करने के बाद मुस्लिम कट्टरपंथियों ने फ्रांस के आम नागरिकों को निशाना बनाना शुरु किया. जिसके तहत 2015 में शार्ली एब्दो पत्रिका के दर्जन भर कार्टूनिस्टों की निर्मम हत्या कर दी गई. कुछ ही दिन पहले एक स्कूल टीचर को एक चित्र दिखाने की वजह से चाकू से मार डाला गया. गुरुवार को चर्च पर हमले की खबर आई. 

इस तरह की घटनाओं ने फ्रांस का सब्र खत्म कर दिया है. वह इस तरह की घटनाओं के खिलाफ कड़े कानून  बनाने की तैयारी में है. 
राष्ट्रपति मैक्रों ने इस महीने की शुरुआत में शिक्षक की हत्या से पहले ही फ्रांस में “इस्लामिक अलगाववाद” से निपटने के लिए कड़े क़ानून बनाने की घोषणा की थी. फ्रांस ने कट्टरपंथियों के सामने झुकने से इनकार करते हुए वह सभी विवादित कार्टून दिखाने शुरु कर दिए. जिनपर मुस्लिम कट्टरपंथियों को आपत्ति है. 

कई और देशों ने फ्रांस के साथ एकता दिखाते हुए चार्ली एब्दो के कार्टूनों का सार्वजनिक प्रदर्शन शुरु किया है. 

फ्रांस अब टकराव को टालना नहीं सकता. वहां की जनता में मुस्लिम कट्टरपंथियों के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है. फ्रांस के राष्ट्रपति ज्यादा दिनों तक जनभावना को दबाकर नहीं रख सकते. 

बेहद ताकतवर है फ्रांस 
फ्रांस दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी और आधुनिक सैन्य ताकत है. उसका रक्षा बजट लगभग 35 अरब डॉलर का है. वह राफेल जैसे अत्याधुनिक विमान बनाता है. उसके पास 2 लाख से ज्यादा  प्रशिक्षित सैन्य बल हैं. 

किसी भी मुस्लिम देश के पास फ्रांस का अकेले सामने करने की ताकत नहीं है. उसपर से फ्रांस का पक्ष नैतिक रुप से मजबूत है. उसने किसी पर हमला नहीं किया बल्कि उसका हर कदम अपने बचाव के लिए है. जिसके कारण भारत ने भी फ्रांस का समर्थन किया है. 

मुस्लिम कट्टरपंथियों के खिलाफ फ्रांस के राष्ट्रपति के स्टैण्ड का समर्थन करते हुए भारतीय विदेश मंत्राल ने बयान जारी किया है कि “अंतरराष्ट्रीय वाद-विवाद के सबसे बुनियादी मानकों के उल्लंघन के मामले में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के ख़िलाफ़ अस्वीकार्य भाषा में व्यक्तिगत हमलों की हम निंदा करते हैं. हम साथ ही भयानक तरीक़े से क्रूर आतंकवादी हमले में फ़्रांसीसी शिक्षक की जान लिए जाने की भी निंदा करते हैं. हम उनके परिवार और फ्रांस के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं. किसी भी कारण से या किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद के समर्थन का कोई औचित्य नहीं है.”

पूरी यूरोपियन यूनियन और अमेरिका के साथ दुनिया के सभी सभ्य देश  फ्रांस के साथ खड़े हैं. क्योंकि मुस्लिम कट्टरपंथी सभी सभ्य देशों की समस्या का कारण हैं.  खास बात ये है कि मुस्लिम देश अपने यहां किसी तरह के शरणार्थियों का स्वागत नहीं करते. सीरिया, घाना, लेबनान, इराक जैसे मुस्लिम देशों के शरणार्थी हजारों किलोमीटर दूर यूरोपीय देशों में शरण लेने पहुंच जाते हैं. लेकिन अपने नजदीक के सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की जैसे देशों की तरफ रुख भी नहीं करते. क्योंकि वे जानते हैं कि ये मुस्लिम देश भले ही जितना हंगामा मचाएं. लेकिन शरण उन्हें मानवीय कानूनों का पालन करने वाले यूरोपीय देशों में ही मिलेगी. 

ये मुस्लिम शरणार्थियों के साथ वेश बदलकर कट्टरपंथी और आतंकी भी बड़ी संख्या में यूरोपीय देशों में पहुंच चुके हैं. जो समस्या का कारण बन रहे हैं. 

नास्त्रेदमस के अलावा बाबा वेंगा ने भी की है युद्ध की भविष्यवाणी
बुल्गारिया की नेत्रहीन महिला भविष्यवक्ता बाबा वेंगा ने भी यूरोप में मुस्लिम ईसाई संघर्ष के बारे में स्पष्ट रुप से भविष्यवाणी की है. उन्होंने कहा है कि ”दुनियाभर में ‘ग्रेट मुस्लिम वार’ की शुरुआत होगी. यह जंग अरब की धरती से शुरू होगी. इसके बाद सीरिया और फिर यूरोप में लड़ी जाएगी और 2043 तक चलेगी

खास बात ये है कि बाबा वेंगा का साल 1996 में 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था. उन्होंने  अमेरिका में हुए 9/11 हमले और 2004 में आई सुनामी के बारे में वर्षों पहले भविष्यवाणी कर दी थी. 

नास्त्रेदमस और बाबा वेंगा के अलावा भी  कई इस्लामी और गैर-इस्लामी भविष्यवेत्ताओं के मुताबिक इस्लामी कैलेंडर यानी हिजरी की 14 वीं शताब्दी में इस्लाम को एक बड़े संघर्ष और बदलाव से गुजरना होगा. जिसके बाद मूल इस्लाम में  बहुत से बदलाव होंगे. जिसकी वजह से इस्लाम का वर्तमान स्वरुप बदल जाएगा. 

यूरोपीय देशों सहित पूरी दुनिया में इस्लाम और दूसरे धर्मों के संघर्ष को देखकर ऐसा लगता है कि इन भविष्यवाणियों के सही होने का समय नजदीक आ गया है. क्योंकि पूरी दुनिया मुस्लिम और गैर मुस्लिम दो खेमों में  बंटती जा रही है.  भारत भी इसका अपवाद नहीं है. 

भारत के लिए बेहतर ये है कि सभी भविष्यवक्ताओं ने उसके उज्जवल भविष्य के बारे में संकेत दिया है. देखिए कुछ अंश- 

‘सागरों के नाम वाला धर्म चांद पर निर्भर रहने वालों के मुकाबले तेजी से पनपेगा और उसे भयभीत कर देंगे, ‘ए’ तथा ‘ए’ से घायल दो लोग।’ (x-96)- नास्त्रेदमस
 
‘लाल के खिलाफ एकजुट होंगे लोग, लेकिन साजिश और धोखे को नाकाम कर दिया जाएगा.’ 

 ‘पूरब का वह नेता अपने देश को छोड़कर आएगा, पार करता हुआ इटली के पहाड़ों को और फ्रांस को देखेगा. वह वायु, जल और बर्फ से ऊपर जाकर सभी पर अपने दंड का प्रहार करेगा.’  

(समाचार एजेंसी)

विघटन प्रक्रिया के नाम पर लॉलीपॉप देकर पीछे हटाना चाहता है चीन, जाल में नहीं फंसेगा भारत

पूर्वी लद्दाख में विघटन पर सैन्य-कूटनीतिक स्तर के आठवें दौर की वार्ता के लिए तारीख को लेकर भारत चीन की पुष्टि का इंतजार कर रहा है। एचटी को पता चला है कि उसने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा फिंगर 4 से चीनी सैनिकों की वापसी की शर्तों को खारिज कर दिया है। 

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रतिष्ठान में विचार से परिचित अधिकारियों के अनुसार, अगले दौर की वार्ता 19 वीं सीपीसी केंद्रीय समिति के 5 वीं पूर्ण सत्र और 3 नवंबर के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों की समाप्ति के बाद होगी। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी ओर से यह स्पष्ट कर दिया है कि देश विघटन और डी-एस्कलेशन वार्ता को जारी रखने के लिए तैयार है ताकि मई 2020 से तैनात दोनों सेनाएं अपने बैरक में लौट सकें।

दोनों पक्षों के बीच हुई चर्चा से परिचित वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के अनुसार, भारत ने पीएलए की यह शर्त मान ली है कि भारतीय सेना को केवल पैंगोंग त्सो के फिंगर 3 तक गश्त करनी चाहिए। चीनी सेना केवल फिंगर 5 तक गश्त करे ये अस्वीकार्य है वरना विवादास्पद फिंगर 4 अधिकृत अक्साई चिन का हिस्सा बन जाएगा। अनिवार्य रूप से, चीनी प्रस्ताव का अर्थ है कि फिंगर 4 दोनों सेनाओं के लिए सीमा से बाहर हो जाएगा, भले ही भारतीय सेना पहले फिंगर 8 तक गश्त करती थी। 1959 की लाइन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा या LAC चीन की नजर में पैंगोंग त्सो झील के फिंगर 4 से होकर गुजरती है। भारत ने इसे खारिज कर दिया है।

भारतीय की नजर में LAC की यह रेखा खारे पानी की झील के फिंगर 8 से होकर गुजरती है। मामले को जटिल करने के लिए, पीएलए ने फिंगर 8 से फिंगर 4 तक एक सड़क का निर्माण किया है, जबकि भारतीय पक्ष को अभी भी सड़क को फिंगर 4 से जोड़ना बाकी है। जबकि भारतीय और चीनी सेना दोनों फिंगर 4 पर 5800 मीटर की ऊंचाई पर हैं, बीजिंग का प्रस्ताव है कि भारतीय सेना इस इलाके को पूरी तरह खाली कर दे। 5-6 मई की रात, पीएलए ने कील वाली क्लबों और छड़ों का उपयोग करते हुए फिंगर 4 पर हमला किया, एक भारतीय सेना के अधिकारी को पैंगोंग त्सो झील में फेंक दिया और भारतीय सैनिकों से भिड़ गए।

भारत ने चीन के उस प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि विघटन प्रक्रिया के हिस्से के रूप में भारतीय सेना पेंगोंग त्सो के दक्षिण तट पर रेजांग ला -रचिन ला रिज-लाइन को पहले  खाली करे।

फ्रांस में हमलाः राष्ट्रपति मैक्रों के खिलाफ भोपाल में मुस्लिमों का प्रदर्शन,

भोपाल
फ्रांस में हालिया समय में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा आम लोगों के सिर काटने और चाकूबाजी जैसी घटनाओं पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सख्त रुख अपनाने की बात कही है। इस पर दुनियाभर में मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया। हाल ही में तुर्की से लेकर बांग्लादेश तक मैक्रों के खिलाफ जबरदस्त विरोध हुआ था। भारत में कुछ जगहों पर छिटपुट प्रदर्शन देखे गए, पर अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से भी एक वीडियो सामने आया है। जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोगों को बड़ी संख्या में मैक्रों के खिलाफ प्रदर्शन करते देखा जा सकता है। इससे जुड़ा एक वीडियो ट्वीट कर भाजपा नेता संबित पात्रा ने इसे भयावह बताया है।

क्यों हो रहा मैक्रों के बयान पर
विवाद?:

 गौरतलब है कि यूरोप में फ्रांस ऐसा देश है, जहां की आबादी में 10 फीसदी मुस्लिम हैं। इनमें ज्यादातर दूसरे देशों या फ्रांस के उपनिवेशों से आए लोग शामिल हैं। सीरिया और इराक में आईएस के उभरने के बाद फ्रांस इस आतंकी संगठन के निशाने पर रहा है। कई आतंकी हमलों के बाद राष्ट्रपति मैक्रों इस्लामी आतंकवाद और कट्टरपंथ से लड़ने की बात कह चुके हैं।

एक हालिया इंटरव्यू में मैक्रों ने फ्रांस की धर्मनिरपेक्षता को सर्वोपरि बताते हुए इस्लाम को संकट में पड़ा धर्म बताया था। कुछ ही दिन पहले फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद का आपत्तिजनक कार्टून दिखाने वाले एक टीचर की हत्या के बाद मैक्रों ने कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही। इसके बाद फ्रांस में कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और कुछ एनजीओ भी बंद किए गए हैं। इसी के खिलाफ दुनियाभर में उनका विरोध जारी है।

जहां भारत के विदेश मंत्रालय ने फ्रांस के राष्ट्रपति पर हो रहे जुबानी हमलों की निंदा की है, वहीं कुछ नेताओं ने मैक्रों को समर्थन भी जताया है। इनमें दक्षिणपंथी लेखिका शेफाली वैद्य भी शामिल हैं। उन्होंने मुंबई के भिंडी बाजार का एक वीडियो शेयर किया। इसमें मैक्रों के पोस्टर जमीन पर फैले दिखाई दे रहे हैं, जिनके ऊपर से कारें गुजर रही हैं।

पुलवामा पर सच्‍चाई कबूल कर फंसा पाकिस्‍तान, FATF में हो सकता है ब्‍लैकलिस्‍ट

इस्‍लामाबाद, एजेंसी। पाकिस्‍तान के मंत्री फवाद चौधरी की ससंद में माना कि पुलवामा आतंकी हमले को इमरान खान सरकार ने करवाया था। इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता अनुराग श्रीवास्‍तव ने कहा कि आतंकवाद का समर्थन करने में पाकिस्तान और उसकी भूमिका के बारे में पूरी दुनिया को पता है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) से ब्लैकलिस्ट होने बचने के लिए पाकिस्तान आतंक के खिलाफ कार्रवाई का ढोंग कर दुनिया की आंखों में धूल झोंकता रहा है और आतंकवाद के समर्थन से मुकरता रहा है।

अब इमरान खान के मंत्री के कबूलनामे के बाद फिलहाल एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल पाकिस्तान के ब्लैकलिस्ट होने की संभावना बढ़ गई है। इसी हफ्ते एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बरकरार रखा है और अगले साल फरवरी में पाकि‍स्‍तान की तरफ से आतंक पर लगाम लगाने वाली कार्रवाइयों को लेकर उसके ब्लैकलिस्ट किए जाने पर फैसला लेगा।

एफएटीएफ में ब्लैकलिस्ट होने से पाकिस्तान पाई-पाई को होगा मोहताज 

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पिछले साल यह बताया था कि देश को ग्रे लिस्ट में रहने से हर साल 10 अरब डॉलर का नुकसान होता है। एफएटीएफ के मौजूदा फैसले से इस साल दिसंबर तक पाकिस्तान को 25 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है। वह जून 2018 से इस लिस्ट में है। ऐसे में पुलवामा में आतंकी हमले के खुलासे से यह साफ है कि आतंक के खिलाफ लड़ाई का ढोंग करने वाले पाकिस्तान को अब उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। अगर पाकिस्तान FATF में ब्लैकलिस्ट होता है तो उसे विश्व बैंक, आईएमएफ जैसे संगठनों और देशों से आर्थिक मदद मिलने के दरवाजे करीब-करीब बंद हो जाएंगे। इससे पहले से पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था बदहाल हो जाएगी और पाई-पाई का मोहताज हो जाएगा। 

पुलवामा हमले में शहीद हुए थे सीआरपीएफ के 40 जवान

पाकिस्तान के मंत्री फवाद चौधरी ने वहां की संसद में कबूल किया कि पुलवामा हमला पाक की कामयाबी है। दरअसल, पिछले साल पुलवामा में हुए आत्मघाती आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे

पाकिस्‍तान का कबूलनामा 

बुधवार को पाकिस्तान की संसद में पूर्व विदेश मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने स्वीकार किया कि विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई का असली कारण भारत का खौफ था। पाकिस्तान असेंबली के पूर्व स्पीकर अयाज सादिक ने तो यहां तक कहा कि अभिनंदन की रिहाई को लेकर हुई बैठक में विदेश मंत्री एमएम कुरैशी और सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के पैर कांप रहे थे और उन्हें पसीना आ रहा था। 

उनके अनुसार, विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा था कि ‘अल्लाह के वास्ते इसको (अभिनंदन) वापस जाने दो, क्योंकि रात नौ बजे हिंदुस्तान पाकिस्तान पर हमला कर देगा।’ वहीं प्रधानमंत्री इमरान खान बैठक में आने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाए थे।

Gwalior Crime News : ड्रग इंस्पेक्टर ने की साैदेबाजी, लिपिक 25 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथाें गिरफ्तार

ग्वालियर, लाेकायुक्त की टीम ने गुरूवार काे ग्वालियर कलेक्ट्रेट स्थित आैषधीय विभाग में पदस्थ लिपिक काे 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथाें गिरफ्तार किया है।

लधेड़ी निवासी महेंद्र पाल ने बताया कि उसे दवा मार्केटिंग का लाइसेंस बनवाना था। 3150 रुपये की रसीद कटवाने के बाद जब कलेक्ट्रेट स्थित आैषधीय विभाग पहुंचा ताे वहां ड्रग इंस्पेक्टर अजय ठाकुर से मुलाकात हुई। ड्रग इंस्पेक्टर ने लाइसेंस के लिए 30 हजार रुपये की डिमांड रखी। पैसे के लेनदेन काे लेकर कई दिनाें से बातचीत का दाैर चल रहा था। 27 अक्टूबर काे जब मैने फाेन किया आैर दफ्तर आने की बात कही ताे ड्रग इंस्पेक्टर अजय ठाकुर बाेले कि तुम दफ्तर मत आआे, मैं तुम्हारी दुकान पर आ जाऊंगा।

दुकान पर हुई बातचीत के बाद वे 25 हजार में लाइसेंस देने काे राजी हाे गए। मैने इसकी पूरी रिकार्डिंग सहित लाेकायुक्त में शिकायत दर्ज करा दी। इसके बाद गुरूवार काे लाेकायुक्त की टीम ने महेंद्र काे 25 हजार रुपये लेकर कलेक्ट्रेट स्थित आैषधीय विभाग में भेजा।

दफ्तर में ड्रग इंस्पेक्टर अजय ठाकुर माैजूद नहीं थे। फाेन पर चर्चा के आधार पर लिपिक अयूब खान काे 25 हजार रुपये थमा दिए। इसके साथ ही लाेकायुक्त की टीम ने लिपिक काे रंगे हाथाें पकड़ लिया। टीम काे अजय ठाकुर माैके पर माैजूद नहीं मिले हैं, लेकिन अॉडियाे रिकार्डिंग टीम के पास माैजूद है।

जरूरी खबर: अगले महीने से बैंक में पैसा जमा और निकालने पर भी देना होगा चार्ज, ढीली होगी जेब

नई दिल्ली

मौजूदा समय में कई ऐसी बैंकिंग सुविधाएं हैं, जिनका इस्तेमाल तकरीबन हर ग्राहक करता है और इसके लिए ग्राहकों से पैसे वसूले जाते हैं। लेकिन इसके बारे में बहुत कम लोगों को पता है। एसएमएस सुविधा, मिनिमम बैलेंस, एटीएम व चेक के इस्तेमाल तक, पर बैंक आपसे पैसे वसूलता हैं। लेकिन अब से ग्राहकों को बैंकों में अपना पैसा जमा करने और निकासी के लिए भी फीस देनी पड़ेगी।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने की शुरुआत 
बैंक ऑफ बड़ौदा ने इसकी शुरुआत भी कर दी है। बैंक ऑफ इंडिया, पीएनबी, एक्सिस और सेंट्रल बैंक इस पर जल्द ही फैसला लेंगे। अगले महीने से यानी नवंबर 2020 से तय सीमा से ज्यादा बैंकिंग करने पर ग्राहकों को अलग से शुल्क देना होगा। 

मालूम हो कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने चालू खाते, कैश क्रेडिट लिमिट और ओवरड्राफ्ट खाते से पैसे जमा और निकालने के अलग व बचत खाते से जमा-निकासी के अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए हैं। अगले माह से ग्राहक लोन खाते के लिए महीने में तीन बार के बाद जितनी बार भी पैसा निकालेंगे, उन्हें 150 रुपये देने होंगे। 

बचत खाते की बात करें, तो ऐसे खाताधारकों के लिए तीन बार तक जमा करना फ्री होगा, लेकिन अगर ग्राहकों ने चौथी बार पैसे जमा किए, तो उन्हें 40 रुपये देने होंगे। इतना ही नहीं, वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी बैंकों ने कोई राहत नहीं दी है। जनधन खाताधारकों को इसमें थोड़ी राहत मिली है। उन्हें जमा करने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा, लेकिन निकालने पर 100 रुपये देना होंगे।

आइए जानते हैं सीसी, चालू, ओवरड्राफ्ट और बचत खाताधारकों के लिए नवंबर से जमा और निकासी पर कितना शुल्क वसूला जाएगा।

सीसी, चालू व ओवरड्राफ्ट खातों के लिए इतना होगा शुल्क

सीसी, चालू व ओवरड्राफ्ट खाताधारक अगर प्रतिदिन एक लाख रुपये तक जमा करते हैं, तो यह सुविधा निशुल्क होगी। लेकिन इससे ज्यादा पैसे जमा करने पर बैंक आपसे पैसे वसूलेंगे।ऐसे खाताधारकों के एक लाख से ज्यादा जमा करने पर एक हजार रुपये पर एक रुपये चार्ज देना होगा। इसके लिए न्यूनतम व अधिकतम सीमा क्रमश: 50 रुपये और 20 हजार रुपये है।अगर सीसी, चालू व ओवरड्राफ्ट खातों से एक महीने में तीन बार पैसे निकाले जाते हैं, तो ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा। चौथी बार निकासी पर प्रत्येक विड्रॉल पर 150 रुपये का शुल्क लगेगा।

बचत खाताधारकों के लिए इतना होगा शुल्क

बचत खाताधारकों के लिए तीन बार तक जमा निशुल्क रहेगा।हालांकि चौथी बार से खाताधारकों को प्रत्येक बार पैसे जमा करने पर 40 रुपये देने होंगे।निकासी की बात करें, तो प्रत्येक माह में तीन बार खाते से पैसा निकालने पर ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।लेकिन चौथी बार से ग्राहकों को हर बार 100 रुपये का भुगतान करना अनिवार्य होगा।

फोलियो चार्ज भी वसूलते हैं बैंक
फोलियो चार्ज के नाम पर बैंकों को मोटी कमाई होती है। लेजर फोलियो के लिए बैंक 200 रुपये प्रति पेज वसूलते हैं। लेजर फोलियो किसी भी तरह के लोन पर सीसी या ओडी पर वसूला जाता है।