मध्यप्रदेश में कमलनाथ कांग्रेस की क्या स्थिति है, सत्ता में आने के लिए कितनी सीटें चाहिए –

भोपाल। मध्य विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 55 दमोह सीट से कांग्रेस पार्टी के विधायक राहुल लोधी विधायक पद से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। राजधानी भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में राहुल लोधी ने बताया कि उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा क्यों दिया। 

15 महीने में दमोह का एक भी काम नहीं हुआ 

राहुल लोधी ने भी कमलनाथ पर कई आरोप लगाए जो इस्तीफा देने वाले विधायकों ने पहले भी लगाए थे। राहुल लोधी ने कहा कि 2018 के विधानसभा चुनाव में कमलनाथ ने आश्वासन दिया था कि दमोह में मेडिकल कॉलेज खोला जाएगा परंतु 15 महीने के शासनकाल में कमलनाथ दमोह के लिए किसी भी काम पर हस्ताक्षर नहीं किए। भारतीय जनता पार्टी ने विश्वास दिलाया है कि चुनाव में मैंने जनता से जो भी वादे किए थे, शिवराज सिंह चौहान की सरकार उन्हें पूरा करेगी। राहुल लोधी ने स्पष्ट किया कि इस परिवर्तन के पीछे किसी भी प्रकार की सौदेबाजी नहीं है। 

कमलनाथ के पास 87 विधायक बचे, 25 इस्तीफा दे गए 

कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल लोधी के इस्तीफे को भी सौदेबाजी और भाजपा की डर्टी पॉलिटिक्स बता रहे हैं। जबकि इससे पहले शनिवार को खबर आई थी कि कमलनाथ की टीम भारतीय जनता पार्टी के ऐसे विधायकों कि रेकी कर रही है, जिनके टूटने की संभावना है। भाजपा में कुछ विधायक ऐसे हैं जिन्हें खुद भी पता है कि अगली बार उन्हें टिकट नहीं मिलने वाला। शनिवार को खबर आई थी कि कमलनाथ की टीम इस तरह के विधायकों के संपर्क में हैं। आज दिनांक 25 अक्टूबर 2020 की स्थिति में मध्यप्रदेश विधानसभा में:- 

भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की संख्या 107 कांग्रेस पार्टी के विधायकों की संख्या 87 बहुजन समाज पार्टी के विधायकों की संख्या 2 समाजवादी पार्टी के विधायकों की संख्या 1 निर्दलीय विधायकों की संख्या 4 खाली विधानसभा सीटों की संख्या 29 मध्य प्रदेश में कुल विधानसभा सीटों की संख्या 230 कितनी विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 28 तीन नवंबर को मध्य प्रदेश में विधायकों की संख्या 229 सरकार बनाने के लिए जरूरी विधायकों की संख्या 115 पूर्ण बहुमत के लिए कांग्रेस को कितनी सीटों पर जीतना जरूरी 28 जुगाड़ की सरकार बनाने के लिए कितनी सीटों पर जीतना जरूरी 21संसदीय कार्य मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने 2 दिन पहले इसी संख्या (115) का जिक्र किया था। 

इस गणित को दूसरे तरीके से समझते हैं 

मध्यप्रदेश में ऐसे विधायक जो सत्ता के साथ रहेंगे 07 सत्ता तक पहुंचने के लिए जरूरी विधायकों की संख्या 108 कांग्रेस पार्टी के पास विधायकों की संख्या 87 उपचुनाव में कितनी सीटों पर जीत जरूरी 21 भारतीय जनता पार्टी के पास विधायकों की संख्या 107 कितनी सीटों पर जीत जरूरी 01 

ज्योतिरादित्य सिंधिया को वक्त माफ नहीं करेगा.

 

मध्य प्रदेश से लेकर बिहार तक पूरे देश में कोरोना महामारी के भयावह खतरे के बीच भी खतरा बढ़ाने का सियासी धमाल बनाया तो उसके एकलौते जिम्मेवार शख्स है ग्वालियर राजघराने के वंशज ज्योतिरादित्य सिंधिया! वही ज्योतिरादित्य जो चुनाव सभाओं में इन दिनों कह रहे हैं कि यह चुनाव कांग्रेस और भाजपा का नहीं, मेरा है मेरा! पूरा देश सिंधिया की तरफ देख रहा है। बिल्कुल सही इतिहास भी देख रहा है। जिसमें लिखा जाना है कि दल बदल का सबसे घातक उदाहरण ज्योतिरादित्य सिंधिया!  जिन्होंने महामारी के खतरों के दौरान दल बदल करके मध्य प्रदेश को एक मिनि चुनाव की तरफ धकेल दिया।

शिवराज सिंह की सरकार बनी रहे इसके लिए चुनाव आयोग को मध्य प्रदेश में चुनाव करवाने थे। और जब मप्र में करवाना थे तो बिहार में भी करवाना पड़े। विपक्ष जो आमतौर पर चुनाव की मांग करता है वह कोरोना की वजह से बिहार में चुनाव करवाने का विरोध कर रहा था। विधानसभा की अवधि खत्म हो जाने के बाद वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता था। नीतीश कुमार के कुशासन से परेशान भाजपा के लिए इससे अनुकूल कुछ नहीं था। वह अगले छह महीने या उससे भी ज्यादा अपने हिसाब से राज्यपाल के जरिए राज कर सकती थी। लेकिन मध्य प्रदेश के कारण भाजपा को ऐसे चुनाव में जाना पड़ा जो नीतीश के साथ उसके खिलाफ भी जाता दिख रहा है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया को कोई माफ नहीं करेगा। उनके समर्थक विधायक और मंत्री जिन्हें इस्तीफा देकर बहुत मुश्किल चुनाव लड़ना पड़ रहा है से लेकर ग्वालियर और चंबल संभाग की वह जनता भी जिसके लिए चुनावों ने कोरोना संक्रमण का खतरा और बढ़ा दिया है। हां, एक जगह ऐसी है जहां उन्हें माफी मांगने की भी जरूरत नहीं है केवल फोन करना है और उनकी सारी गलतियां भुला दी जाएंगी। मध्य प्रदेश के कांग्रेसियों को भी यही डर है और इसकी अटकले लगनी शुरू हो गई है।

राहुल गांधी की उदारता जहां सिंधिया के लिए आशा की अंतिम किरण है वहीं कांग्रेसियों के लिए चिंता का भारी सबब। व्यक्तिगत व्यवहार में भूलो और माफ करो बड़ा मानवीय गुण है मगर राजनीति में नहीं। राजनीति में एक को माफ करने का मतलब दूसरों की वफादारी कम करके आकंना भी है। सचिन पायलट इसका एक बड़ा उदाहरण हैं। उनकी वापसी को पार्टी में खासतौर से राजस्थान में अभी भी सहजता से नहीं लिया जा रहा है। भाजपा में सिंधिया जिस तरह अलग थलग पड़ गए उसे देखकर उनके समर्थक भी उनका साथ छोड़ने लगे हैं। इतिहास में कोई सिंधिया इतना तनहा और उपेक्षित कभी नहीं रहा। ज्योतिरादित्य को सबसे बड़ी चोट लगी जान देने की कसमें खाने वाले अपने समर्थकों की बेवफाई से। जिन मंत्री और ग्वालियर के अपने खास समर्थक प्रद्धुमन सिंह तोमर के पांवों में पहनाने के लिए वे हाथ में चप्पल लिए खड़े थे वे मुख्यमंत्री शिवराज से लेकर कांग्रेस के अपने पुराने सहयोगियों के पांवों में बुरी तरह गिर रहे हैं। भरी सभा में शिवराज के चरणों में दो दो बार सिर रखने के बाद तोमर का एक और वीडियो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और अरुण यादव ने ट्वीट किया है जिसमें कांग्रेसी कार्यकर्ता उन्हें पकड़ पकड़ कर रोक रहे हैं। मगर वे कुर्सी से उतरकर उनके पांवों में सिर रखने के लिए मचले जा रहे हैं।

सिंधिया के लिए यह सब बर्दाश्त करना बहुत मुश्किल है। ग्वालियर चंबल संभाग में कांग्रेसी नेता के किसी कार्यक्रम में यदि सिंधिया के समर्थक नेता चले जाते थे तो उनसे जवाब तलब हो जाता था। जब वे कांग्रेस में थे उस समय अगर कहीं जाते थे और उस कार्यक्रम में दिग्विजय सिंह के लोग शामिल होते थे तो दिग्विजय कभी नहीं पूछते थे। लेकिन जब इसका उल्टा होता था, दिग्विजय सिंह के कार्यक्रम में सिंधिया का कोई आदमी चला गया तो सिंधिया उसका कोर्ट मार्शल कर देते थे। ऐसी अहं ब्रह्मास्मि ऐंठ में रहने वाले सिंधिया के लिए यह स्वीकार कर पाना बहुत तकलीफदेह हो रहा है कि एक एक करके उनके साऱे प्रमुख सहयोगी मुख्यमंत्री शिवराज को अपना नेता बता रहे हैं। सिंधिया के बड़े खास समर्थक माने जाने वाले मंत्री गोविन्द राजपूत ने सार्वजनिक तौर पर रोते हुए कहा कि उन्होंने तो कांग्रेस

मुख्यमंत्री शिवराज के लिए छोड़ी है। वे विकास पुरुष हैं। दूसरे सबसे बड़े सिपहसालार तुलसी सिलावट भी शिवराज के गुणगान में लग गए हैं। और जिन इमरती देवी को महाराज ने मेरी इमरती को किसने बोला कहकर अपने कंधे से लगा लिया था वे कह रही हैं कि पार्टी जाए भाड़ में। इमरती देवी जहां खड़ी हो जाती है वहां हिन्दुस्तान खड़ा हो जाता है। कहां महाराज खुद अपने आपको एक हस्ती मानते थे कहां उनकी वे समर्थक जो कल तक कहती थीं कि महाराज कहें तो हम कुए में कूद जाएंगे। वे आज खुद को हस्ती बता रही हैं।

महाराज के दुखों का कोई पारावार नहीं है। पहले उन्हें स्टार कैंपेनरों की लिस्ट में दसवें स्थान पर रखा, फिर चुनाव रथों से उनका फोटो गायब किया गया और अब मुख्यमंत्री शिवराज ने उनके साथ चुनावी दौरे बंद कर दिए। सिंधिया के गढ़ माने वाले ग्वालियर में भी शिवराज अकेले सभाएं कर रहे हैं। जगह जगह अब लोग पूछने लगे हैं कि जिस सम्मान के लिए महाराज ने मध्य प्रदेश को चुनाव में झौंका वह सम्मान कहां है? जब सचिन पायलट भाजपा की तरफ गए तो वे इंतजार कर रहे थे कि राहुल गांधी उनके लिए भी ऐसा कुछ बोलें कि सचिन चाहे जब मेरे घर आ सकते थे। मगर राहुल ने नहीं बोला। जो भावनाएं सिंधिया के लिए व्यक्त की थीं वह आज तक किसी और के लिए नहीं कीं। परिवार के तीनों सदस्य सोनिया राहुल और प्रियंका से

ज्योतिरादित्य हमेशा परिवार के सदस्य की तरह बात करते थे। जिन लोगों ने 2014 से 19 तक लोकसभा में देखा है उन्हें मालूम है कि सदन में सबसे अनौपचारिक तरीके से अगर कोई राहुल से बात करता था तो वह ज्योतिरादित्य थे। इतना सम्मान कम ही लोगों को मिलता है। और विडबंना यह देखिए कि दूसरी पार्टी में जाकर ऐसा अपमान भी कम ही लोगों के नसीब में आता है। केन्द्रीय मंत्री और ग्वालियर के सबसे बड़े भाजपा नेता नरेन्द्र सिंह तोमर ने सार्वजनिक रूप से कहा कि सिंधिया हैं क्या जो उनका फोटो लगे? माधवराव सिंधिया ने ज्योतिरादित्य के लिए बहुत समृद्ध राजनीतिक विरासत छोड़ी थी। ग्वालियर के लोगों को आज अपने माधव महाराज ज्यादा याद आ रहे हैं। ग्वालियर में माना नहीं जाता कि उनकी मृत्यु हो गई। उन्हें कैलाशवासी कहा जाता है। वे हिमालय पर वापस रहने चले गए। ऐसे ग्वालियर के लोगों में माधवराव के भी प्राण बसते थे। 1985 में रेल मंत्री बने तो ताज एक्सप्रेस को आगरा से ग्वालियर ले आए। आगरा वाले भारी नाराज बोले ताजमहल को भी ले जाओ! माधवराव धीरे से बोले अगर संभव होता तो ले भी आता। किसी ने राजीव गांधी से बोला इन्हें जहाजरानी मंत्री मत बना देना। नहीं तो सबसे पहले ग्वालियर में बंदरगाह बनाएंगे। और फिर पूछेंगे कि समन्दर कौन सा ठीक रहेगा। अरब सागर या प्रशांत महासागर! वे सच्चे अर्थों में विकास पुरुष थे। ज्योति को आज गद्दार से लेकर विनाश पुरुष तक कहा जा रहा है। कोरोना की चपेट में जितने नेता, कार्यकर्ता आते जा रहे हैं ज्योतिरादित्य के खिलाफ गुस्सा उतना ही बढ़ता चला जा रहा है।

26 अक्टूबर को मना रहे हैं दशहरा तो जानिए शुभ मुहूर्त

विजयादशमी की पूजन शास्त्रानुसार विजयकाल में होती है एवं विजयकाल सायं दशमी तिथि में तारा उदय होने के पश्चात होता है।
इस वर्ष 25 अक्टूबर 2020 को दशमी तिथि प्रात: 7:41 से प्रारंभ होकर अगले दिन प्रात: 9:00 बजे तक रही जबकि 26 अक्टूबर 2020 को सायंकाल विजयकाल में एकादशी तिथि है जो अगले दिन प्रात:काल 10:46 बजे तक रहेगी।
अत: विजयादशमी के निर्धारण में शास्त्रानुसार सायंकाल के समय विजयकाल में दशमी तिथि का होना अनिवार्य है जो 25 अक्टूबर 2020 को था।।

इस शास्त्रोक्त आधार को ध्यान में रखते हुए विजयादशमी का पर्व 25 अक्टूबर 2020 को मनाया गया लेकिन कुछ लोग मत मतांतर होने से 26 अक्टूबर 2020
को मनाने जा रहे हैं पर्व, प्रस्तुत है उनके लिए शुभ मुहूर्त…

शुभ समय- प्रात: 6:00 से 7:30 तक,
प्रात:

9:00 से 10:30 तक,
दोपहर :
3:31 से 6:41 तक…

इस महीने में लगाए तुलसी का पौधा, जानें क्यों?


हिन्दू धर्म में जड़ और चेतन सब में ईश्वर की भावना है। नदियां, पत्थर, पहाड़, पौधों में भी ईश्वर और देवी देवताओं का वास माना जाता है। तुलसी का पौधा बहुत शुभ होता है यह हमारे कई कामों में काम आता है। पौधों में देवियों और देवताओं का वास इसलिए माना जाता है, क्योंकि उनके अन्दर नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने की शक्ति होती है। तुलसी का पौधा में इनमें से एक है, इसमें औषधीय के साथ साथ दैवीय गुण भी पाए जाते हैं। शास्त्रों में तुलसी को भगवान विष्णु की पत्नी कहा गया है। भगवान विष्णु ने छल से इनका वरण किया था इसलिए उनको पत्थर हो जाने का श्राप मिला, तभी से भगवान विष्णु शालिग्राम के रूप में पूजे जाने लगे। शालिग्राम रुपी भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के हो ही नहीं सकती।

जानें तुलसी का वैज्ञानिक महत्व

तुलसी के पत्तों में रोग-प्रतिरोधक क्षमता पायी जाती है। इसके नियमित सेवन से सर्दी जुकाम फ्लू जैसी छोटी मोटी परेशानियां नहीं हो पाती, साथ ही गंभीर बीमरियों में भी इसका काफी लाभ देखा गया है। तुलसी के बीज , संतान उत्पत्ति की समस्यों में कारगर होते हैं। जहाँ भी तुलसी लगती है, उसके आस-पास सकारात्मक ऊर्जा होती है।

क्या हैं तुलसी पूजा का विधान

 तुलसी का पौधा किसी भी बृहस्पतिवार को लगा सकते हैं, हालांकि कार्तिक का महीना इसके लिए सर्वोत्तम है।

 कार्तिक के महीने में तुलसी के पौधे की पूजा और तुलसी विवाह सारी मनोकामनाओं को पूर्ण कर देता है।

 तुलसी का पौधा घर या आगन के बीचों बीच या अपने शयन कक्ष के पास की बालकनी में लगाना चाहिए।

 प्रातःकाल तुलसी के पौधे में जल डालकर, इसकी परिक्रमा करनी चाहिए।

– नियमित रूप से सायंकाल इसके नीचे घी का दीपक जलाना सर्वोत्तम होता है।

तुलसी पूजा की सावधानियां क्या हैं?

 तुलसी के पत्ते हमेश प्रातः काल ही तोड़ने चाहिए अन्य समयों पर नहीं।

 रविवार के दिन तुलसी के नीचे दीपक न जलाएँ।

 भगवान विष्णु और इनके अवतारों को तुलसी दल जरूर अर्पित करें।

 भूलकर भी भगवान गणेश और माँ दुर्गा को तुलसी अर्पित न करें।

 तुलसी के पत्ते कभी बासी नहीं होते, पुराने पत्तों को पूजा में प्रयोग किया जा सकता है।

तुलसी का विशेष प्रयोग क्या है?

– हनुमान जी को मंगलवार को तुलसी के पत्तों की माला अर्पित करने से कर्ज के मामले में लाभ होता है।

 भगवान कृष्ण को नित्य तुलसी दल अर्पित करने से ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति होती है।

 भोजन पकाते समय उसमे तुलसी के पत्ते डाल देने से खाना कभी कम नही पड़ता।

 तुलसी की माला गले में धारण करने से बुद्धि सही रास्ते पर रहती है।

इन उपायों को आजमा कर पायें अपना प्‍यार

आप उसे दिन-रात सोचते हैं ले‍किन वह आपको भाव तक नहीं देती और बहुत अधिक प्रयास करने पर भी वे उसका प्यार पाने में कामयाब नही हो पाते । कई लड़कों के पास यह कला गॉड गिफ्ट के रूप में होती हैं आप किसी लड़की से प्रेम करते है और कुछ कह नहीं पाते हो तो उसको अपनी तरफ आकर्षित करना चाहते है तो आजमांए आसान उपाय।

1. आप एक पान का पत्ता लीजिये और उसके ऊपर हल्दी से उस व्यक्ति का नाम लिख लीजिये।  सोमवार को आप पान के पत्ते पर नाम लिखना शुरू कीजिये और शुक्रवार तक हर रोज पान के पत्ते पर नाम लिखें और तब शुक्रवार के दिन इन सभी पत्तों को  किसी नदी, तालाब या नहर में अपनी इच्छा का ध्यान करते हुए बहा दीजिये।  जल्द ही आपके पास आपका प्यार होगा। 

 2. यदि आपको उस लड़की का रुमाल कैसे भी कैसे मिल जाये, तो उसको ले आइये और उस रुमाल को अपने पास तकिये के पास रखकर सो जाइये।  आप ऐसा तबतक करें, जब तक वह लड़की आपके लिए हाँ ना कर दें।  जैसे ही वह हाँ करें, इस रुमाल को बहते पानी में बहा दें। 

 3. मंगलवार के दिन हनुमान जी की मूर्ति से सिंदूर लीजिये और माता सीता के चरणों में लगा दीजिये।  जब माता सीता के चरणों में सिंदूर लगायें तो दिल से अपनी इच्छा को बतायें।  ध्यान रहे कि आपका प्यार सच्चा हो और किसी की जिंदगी से खेलने वाला ना हो, अन्यथा अनर्थ भी हो सकता है। 

 4. बुधवार को अपने हाथ पर चन्दन से उस व्यक्ति का नाम लिखें, जिसे आप प्यार करते हैं और तब गणेश भगवान के मंदिर जाएँ।  वहां पर दोनों हाथों को गणेश जी के चरणों पर रख दें।  ऐसा 5 बुधवार करें।

 5. आप लड़की के लिए सुबह-सुबह खुद से कुछ खाने का बनायें और खाना बनाते समय ‘वश्यं कुरू कुरू स्वाहा’ का जाप करते रहें और जब उस व्यक्ति से मिलें तो उसे यह भोजन करा दें।  

 6. लड़की के सर का बाल किसी भी तरह लें और अमावस्या की रात को खुले आसमान के नीचे बैठकर, इस लड़की को पानी की इच्छा जाहिर करें।  कम से कम 15 मिनट तक लड़की का नाम पुकारते रहें और यह बाल तब खुली हवा में उड़ा दें।  ऐसा कुछ अमावस्या पर करते रहें। 

 7. यदि आपको किसी का दिल जीतना है या किसी लड़की को अपना बनाना है तो कैसे भी कैसे पहले तो उसको शिव मंदिर ले जाएँ और सोमवार के दिन उसके हाथों से गरीबों को मीठा भोजन दान करवा दें।  याद रहे कि आप भी उस समय उस लड़की के साथ होने चाहिए।  आपको निश्चित रूप से लाभ होगा। 

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अगर ऐसे रखेंगे अपना पर्स तो हो जाएंगे मालामाल

वास्तुशास्त्र के अनुसार अगर कोई भी व्यक्ति अपने पर्स में बताई गई चीजों को रखने से परहेज करता है तो उसपर हमेशा ही माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है

देहरादूनः (Dehradun) व्यक्ति के जीवन में पैसों की एक खास अहमीयत होती है. हर व्यक्ति को अपनी मूलभूत आवश्कताओं को पूरा करने के लिए पैसों की जरूरत रहती हैं. लेकिन अगर आपके पास किसी भी वजह से पैसों की कमी है तो यह आपके जीवन में कई प्रकार की परेशानियों का कारण बन सकती हैं. लेकिन वास्तुशास्त्र के अनुसार अगर कोई भी व्यक्ति अपने पर्स में बताई गई चीजों को रखने से परहेज करता है तो उसपर हमेशा ही माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. आइए जानते हैं क्या है वो चीजें जिसे करने से आप हमेशा धन की तंगी से बचे रह सकते हैं.

शौच के समय यहां रखें पर्स

अक्सर हम शौच के समय अपने पर्स को सही जगह रखना भूल जाते हैं. जिसका परिणाम हमें पैसों की तंगी के रूप में देखने को मिलता है. वास्तुशास्त्र कहता है कि जब भी आप शौच के लिए जाएं तो और आपके पास पर्स को बाहर सुरक्षित रखने की कोई जगह ना हो तो ऐसे में अपने पर्स को पीछे वाली पॉकेट से निकाल कर हमेशा अपनी आगे वाली जेब में रख लें. ऐसा करने से आप पर माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.

सिक्के और नोट ना रखें साथ

अक्सर हम लोग अपने पर्स में सिक्के और नोट को एक साथ रखते हैं. लेकिन वास्तुशास्त्र के मुताबिक हमें अपने पर्स में कभी-भी सिक्के और नोट एक साथ नहीं रखने चाहिए. हमें हमेशा उन्हें अलग-अलग जगह रखना चाहिए. वास्तुशास्त्र के अनुसार हमें हमेशा ही अपने पर्स में सिक्कों को किसी बंद जगह पर रखना चाहिए.

पर्स में भूलकर भी ना रखें चाबी

जी हां अगर आप पैसों की तंगी से बचना चाहते हैं तो भूलकर भी अपने पर्स में किसी भी प्रकार की चाबी ना रखें. फिर चाहे वह चाबी आपके अपने घर या दफ्तर की ही क्यों ना हो. वास्तुशास्त्र के मुताबिक अगर आप अपने पर्स में किसी भी प्रकार की चाबी रखते हैं तो आपको धन की हानि हो सकती है और आपको आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है.

पर्स में ना रखे कागज के नोट, रसीद व टिकट

वास्तुशास्त्र के अनुसार अगर कोई व्यक्ति पैसों की तंगी को झेल रहा है तो इसके पीछे एक कारण उसके द्वारा अपने पर्स में कागज के नोट रखना हो सकता है. वास्तुशास्त्र के मुताबिक अगर आप अपने पर्स में कागज के नोट रखते हैं तो आप पैसों की तंगी का शिकार हो सकते हैं. वास्तुशास्त्र के मुताबिक हमें अपने पर्स में कागज के नोट के अलावा किसी भी वस्तु की रसीद या टिकट भी रखने से बचना चाहिए. क्योंकि इससे पैसों की तंगी संबंधी समस्या हो सकती है.