MP उपचुनाव: जीतू पटवार बोले- कमलनाथ की होती है टाटा-अंबानी से बात, उनके पैरों की धूल के बराबर भी नहीं शिवराज

मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं। इस बीच कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी बयानबाजी तेज हैं। इस उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी लगातार सेल्फ गोल करती जा रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी नेता इमरती देवी को लेकर दिए गए बयान का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी को एक और मौका दे दिया है।

एक रैली में जीतू पटवारी ने कहा, ‘ये अनिल, मुकेश अंबानी, रतन टाटा… ये बड़े-बड़े उद्योगपतियों के नाम आप सुनते हैं। इनको तो यूं फोन लगाते हैं। ऐसा व्यक्तित्व है कमलनाथ जी का। शिवराज सिंह चौहान तो उनके पैरों की धूल के बराबर भी नहीं है।’

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के डबरा में कांग्रेस उम्मीदवार सुरेंद्र राजेश के लिए प्रचार करने पहुंचे कमलनाथ ने बीजेपी उम्मीदवार इमरती देवी को आइटम बता डाला। कमलनाथ ने कहा, ”सुरेश राजेश जी हमारे उम्मीदवार हैं, सरल स्वभाव के सीधे-साधे हैं। ये तो करेंगे, ये उसके जैसे नहीं हैं, क्या है उसका नाम…. ( लोग चिल्लाते हैं- इमरती देवी), मैं क्या उसका नाम लूं, आप तो उसको मेरे से ज्यादा पहचानते हैं। आपको तो पहले ही मुझे सावधान कर देना चाहिए था, ये क्या आइटम है…ये क्या आइटम है (हंसते हुए)। 

कांग्रेस नेता ने शिवराज को कहा था- भूखा-नंगा
इससे पहले मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेता दिनेश गुर्जर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए विवादित बयान दिया था। उन्होंने एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को भारत का दूसरा सबसे बड़ा उद्योगपति बताया तो शिवराज सिंह चौहान को भूखे नंगे परिवार का बता डाला। हालांकि, शिवराज सिंह चौहान ने इसे अपने लिए हथियार बना लिया और कहा कि वह नंगे-भूखे परिवार से हैं इसलिए गरीबों का दुख दर्द समझते हैं।

दिनेश गुर्जर ने उपचुनाव को लेकर एक चुनावी सभा में कहा, ”कमलनाथ जी हिन्दुस्तान के दूसरे नंबर के उद्योगपति हैं। शिवराज सिंह की तरह नंगे-भूखे घर के नहीं हैं। शिव राज सिंह चौहान के पास पांच एकड़ की जमीन हुआ करती थी, आज हजारों एकड़ जमीन के मालिक हो गए, क्योंकि किशानों का खून पीने का काम उन्होंने किया।शिवराज सिंह चौहान ने दिनेश गुर्जर पर पलटवार करते हुए कहा, ”हां, मैं नंगे-भूखे परिवार से हूं, इसलिए उनका दुख-दर्द समझता हूं। हां, मैं गरीब हूं इसलिए गरीब बेटे-बेटियों का मामा बन पढ़ाता हूं। गरीब हूं इसलिए गरीब मां-बाप का कन्यादान करता हूं। गरीब हूं इसलिए गरीब का दर्द समझता हूं… प्रदेश को समझता हूं।”

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