ग्वालियर में महिला को केबिन बुलाकर टीआइ ने की छेड़छाड़, एसपी ने किया निलंबित

ग्वालियर | ग्वालियर के कंपू थाना प्रभारी केएन त्रिपाठी पर बुधवार रात महिला थाना में महिला से छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया है। टीआइ ने महिला को अपने केबिन में बुलाकर उसे पकड़ लिया। महिला ने विरोध किया कहने लगा कि शाम को कैंसर पहाड़ी चलेंगे। इतना ही नहीं चार दिन से टीआइ लगातार महिला को वॉट्सऐप कॉल व चैट कर मिलने बुला रहा था। घबराई पीड़िता ने महिला परामर्श दात्री को अपनी पीड़ा बताई। जब महिला पुलिस अफसरों के पास बैठकर अपनी परेशानी बता रही थी। उस समय भी टीआइ का कॉल आया, जिसे सबके सामने महिला ने सुनाया। एसपी ने तत्काल टीआइ को निलंबित कर दिया है।

18 अक्टूबर रविवार को कंपू पुलिस ने जेएएच के पास से एक युवक को स्कूटर पर खड़े होकर शराब पीते पकड़ा था। उसे पुलिस लेकर थाना पहुंच गई। युवक की पत्नी थाना पहुंची तो पुलिस ने युवक को छोड़ दिया, लेकिन स्कूटर रख लिया। वह महिला, पीड़िता से परिचित थी। इस पर वह थाना में बात करने उसे ले गई। जब पीड़िता थाना में पहुंची तो कंपू टीआइ उस पर लट्टू हो गए। स्कूटर छोड़ दिया पर महिला का नंबर ले लिया। इसके बाद उसी दिन उसे कॉल किया और बोले कभी भी कोई काम हो तो आ जाना। इसके बाद वॉट्सऐप कॉल, चैट शुरू कर दी। लगातार चार दिन से महिला को अपने पास बुला रहे थे।

ई-रिक्शा पर बैठकर कैंसर पहाड़ी पर जाना चाहता था टीआइ

इस पर बुधवार को महिला ने महिला काउंसलर सबा रहमान से संपर्क किया। उन्होंने पूरे मामले की गंभीरता को समझते हुए महिला को पूरा प्लान समझाया। उसे मोबाइल की रिकॉर्डिंग ऑन कर अंदर भेजा गया। जबकि महिला काउंसर और उनकी टीम बाहर कुछ दूरी पर खड़ी रही। जैसे ही महिला अंदर टीआइ केएन त्रिपाठी के केबिन में पहुंची वह उसके पास आकर खड़े हुए और उसे पकड़ लिया। महिला से छेड़छाड़ की। महिला ने यह भी कहा कि केबिन में कोई आ सकता है। टीआइ बोला कि ठीक है तेरे ई-रिक्शा पर कैंसर पहाड़िया पर घूमने चलेंगे।

खाकी को हमेशा बदनाम करता रहा है यह टीआइ

पिछोर थाना में एक महिला के साथ वीडियो बनने पर चर्चा में आए

  • लॉकडाउन में मुरैना में एक ढाबा खुलवाकर लोगों खाना खिलाते का वीडियो वायरल हुआ
  • कोरोना से पति की मौत के बाद थाना पहुंची महिला से अभद्रता कर केबिन से भगाने का वीडियो वायरल पर चर्चा में आए

एक महीने तक दुष्कर्म पीड़िता को थाना के चक्कर लगवाए, राजीनामा करने दबाव डाला

वॉट्सऐप पर ऐसे चली चैट

पीड़िता ने महिला काउंसलर से बात कर ने के बाद जब टीआइ से वॉटसएप पर चैट की तो इस तरह उसके इरादों को बेनकाब किया है।

टीआइ : हाय, आप टाइम निकालकर 5 मिनट के लिए आओ

पीड़िता : मगर मैं चाहती हूं मिलने से पहले आप स्पष्ट बात करें

टीआइ : आप जल्दी समझ गईं

पीड़िता : घबराओं नहीं मैं गलत नहीं समझी हूं

टीआइ : आओगी तो क्या खाओगी, बोलो

पीड़िता : वही खा लेंगे जो आप खिलाओगे

टीआइ : अरे घबराओं नहीं खुलकर बात करो

पीड़िता : आप खुलकर अपनी बात कहो तभी तो मैं कह पाऊंगी

टीआइ कंपू केएन त्रिपाठी के खिलाफ एक महिला ने छेड़छाड़ की शिकायत की है। जिस पर महिला थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है। टीआइ को तत्काल सस्पेंड कर दिया है। – अमित सांघी, एसपी ग्वालियर

कहां गए चीनी सेना के ‘डिलीवरी ड्रोन’? खच्चरों और गदहों से सैनिकों को पहुंचा रहा साजो सामान

पेइचिंग
लद्दाख में भारत से तनाव के बीच चीन की सरकारी मीडिया आए दिन ड्रोन से सैनिकों को हथियारों और खाने की डिलीवरी करने के दावे करती थी। इतना ही नहीं, ग्लोबल टाइम्स के संपादक तो इस ड्रोन का वीडियो जारी करते हुए भारतीय जवानों के खाने को लेकर सहानभूति भी जता दी थी। जबकि, वास्तविकता यह है कि चीनी सेना इन दिनों तिब्बत में भारत से लगी सीमा पर गदहों और खच्चरों के जरिए फॉरवर्ड लोकेशन पर सैन्य साजो सामान और रसद की आपूर्ति कर रही है। खुद ग्लोबल टाइम्स ने ही चीनी सेना के ‘मिशन खच्चर’ की रिपोर्ट प्रकाशित की है।
खच्चरों से साजो सामान पहुंचा रही चीनी सेना
ग्लोबल टाइम्स ने रिपोर्ट में लिखा है कि चीनी सेना की तिब्बती मिलिशिया परिवहन इकाइयां सीमा पर अधिक ऊंचाईयों पर स्थित कठिन वातावरण में आपूर्ति करने के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण के रूप में खच्चरों और घोड़ों का भी उपयोग कर रही है। दक्षिण पश्चिम चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के नगरी प्रान्त के रुतोग काउंटी में तिब्बती मिलिशिया सैनिक की सप्लाई यूनिट चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों को साजो सामान पहुंचा रही है।

तिब्बती मिलिशिया सैनिकों को बना रहा बलि का बकरा
चीन तिब्बती मिलिशिया सैनिकों को दोयम दर्जे का समझता है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की रुतोग काउंटी पार्टी समिति और सरकार ने चीनी सैनिकों को हर कीमत पर सामान और गोला-बारूद पहुंचाने के आदेश जारी किए हैं। शिनजियांग मिलिट्री कमांड के अंदर काम करने वाले तिब्बती मिलिशिया के सैनिक अपने जान को जोखिम में डालकर दुर्गम इलाकों में चीनी सेना के लिए सामान पहुंचाते हैं। फिर भी इनकों चीन में सेना के बराबर का दर्जा नहीं हासिल है।

प्रोपगेंडा फैलाने में जुटी चीनी मीडिया
प्रोपगेंडा फैलाते हुए चीनी मीडिया सीसीटीवी ने एक कथित तिब्बती मिलिशिया के सैनिक का बयान जारी किया। जिसमें वह चीनी सेना को अपना समर्थन देने की बात कहता सुनाई दे रहा है। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है कि वह तिब्बती मिलिशिया का ही सैनिक था या कोई और। आए दिन चीन की सरकार समर्थित मीडिया झूठे और मॉर्फ्ड वीडियो जारी कर प्रोपगेंडा फैलाने की कोशिश करती रहती हैं।

ड्रोन से न पहुंचाने पर दी सफाई
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि PLA सुदूर क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए रसद सहायता प्रदान करने में ड्रोन जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग कर रहा है। कुछ स्थानों के लिए जहां बड़ी मात्रा में आपूर्ति की आवश्यकता होती है वहां इनकी सहायता के अलावा खच्चरों और घोड़ों जैसे पारंपरिक साधन अधिक व्यावहारिक हैं। हालांकि, चीन ने अभी तक ड्रोन के जरिए सैनिकों को साजोसामान पहुंचाने का कोई वीडियो जारी नहीं किया है।

कुट्टू का आटा क्या होता है और किससे बनता है? जानें व्रत में इसे क्यों खाते हैं

व्रत में सबसे ज्यादा कुट्टू का आटा खाया जाता है। इसके आटे से व्रत में खाने वाली पूड़ियां, पराठे, पकौड़े, चीला बनाया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि व्रत में कुट्टू का आटा क्यों खाया जाता है और यह किससे बनता है? आइए, जानते हैं खास बातें- 

अनाज न होने की वजह से व्रत में खाया जाता है यह आटा 
कुट्टू को अंग्रेजी में Buckwheat कहा जाता है, लेकिन इसका किसी तरह के अनाज से कोई संबंध नहीं है क्योंकि गेहूं, अनाज और घास प्रजाति का पौधा है जबकि कुट्टूस बकव्हीट का लैटिन नाम फैगोपाइरम एस्कलूलेंट है और यह पोलीगोनेसिएइ परिवार का पौधा है। बकव्हीट पौधे से प्राप्त फल तिकोने आकार का होता है। पीसकर जो आटा तैयार किया जाता है, उसे बकव्हीट यानी कुट्टू का आटा कहा जाता है।  बकव्हीट का पौधा ज्यादा बड़ा नहीं होता है। इसमें गुच्छों में फूल और फल आते हैं। भारत में यह बहुत कम जगहों पर उगाया जाता है। हिमालय के हिस्सों जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड और दक्षिण के नीलगिरी में जबकि नॉर्थ ईस्ट राज्यों में उगाया जाता है। भारत में इसका प्रयोग व्रत के दौरान खायी जाने वाली चीजों में ही होता है।

पोषण से भरपूर कुट्टू का आटा 
कुट्टू का आटा प्रोटीन से भरपूर होता है।इसमें मैग्नीशियम, विटामिन-बी, आयरन, कैल्शियम, फॉलेट, जिंक, कॉपर, मैग्नीज और फासफोरस भरपूर मात्रा में होता है। इसमें फाइटोन्यूट्रिएंट रूटीन भी होता है जो कोलेस्ट्रोल और ब्लड प्रेशर को कम करता है। सेलियक रोग से पीड़ितों को भी इसे खाने की सलाह दी जाती है।

अब महाराष्ट्र सरकार ने भी राज्य में सीबीआई जांच पर लगा दी रोक, जानें किन-किन राज्यों ने वापस लिया जनरल कंसेंट

दरअसल, केंद्र सरकार के साथ अनबन की स्थिति में राज्य सरकारों ने अपने अधिकार क्षेत्र के सभी नियमों-कानूनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है ताकि केंद्र के हस्तक्षेप को ज्यादा से ज्यादा हद तक रोका जा सके। भारतीय लोकतंत्र का संघीय ढांचा कहता है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार, आपसी तालमेल के साथ देश और प्रांतों का शासन-प्रशासन चलाएंगे। इसके लिए कई संवैधानिक प्रावधान किए गए हैं। केंद्र और राज्यों के बीच कामकाज के बंटवारे के लिए केंद्र सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची भी तैयार की गई। हालांकि, जिन विषयों पर केंद्र के साथ राज्यों की सहमति नहीं बन पाती है, उन पर तनातनी की स्थिति पैदा हो ही जाती है। सीबीआई जांच को दिया गया जनरल कंसेंट वापस लेना भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है।

​टीआरपी स्कैम की जांच और महाराष्ट्र सरकार का फैसला

महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार ने आदेश पारित कर कहा कि अब सीबीआई राज्य सरकार या किसी उच्च न्यायिक संस्था (हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट) से अनुमति लेने के बाद ही राज्य में किसी प्रकार की जांच कर पाएगी। उद्धव ठाकरे सरकार के इस आदेश का सीधा और स्पष्ट मतलब है कि केंद्र की एनडीए सरकार के साथ उसके रिश्ते में खटास बढ़ गई है। बहरहाल, महाराष्ट्र सरकार ने ताजा आदेश रिपब्लिक टीवी समेत पांच टीवी चैनलों की तरफ से टीआरपी में कथित छेड़छाड़ की खबरों के बीच हुई है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, सार्वजनिक कार्य मंत्री अशोक चह्वाण, राज्य सरकार के मुख्य सचिव संजय कुमार, सीएम के प्रधान सलाहकार अजय मेहता और सीएम के अतिरिक्त मुख्य सचिव आशीष कुमार सिंह की मौजूदगी में यह फैसला लिया गया है। दरअसल, राज्य सरकार को डर सता रहा है कि टीआरपी स्कैम की जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है। इस कारण सरकार ने पहले ही इसकी संभावनाओं पर पानी फेर दिया।

पायलट की बगावत से डरे थे अशोक गहलोत

राजस्थान में जब सचिन पायलट ने अपनी टीम के साथ बगावत की आवाज बुलंद की तो अशोक गहलोत सरकार की स्थिति डांवाडोल होने लगी। पायलट खेमे को विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से नोटिस मिला था और पायलट इसके खिलाफ हाई कोर्ट चले गए थे। केंद्र में बीजेपी की सरकार है। ऐसे में राजस्थान की कांग्रेस सरकार को डर लग रहा होगा कि दबाव बनाने के लिए सीबीआई का इस्तेमाल हो सकता है। इसी सियासी उठापटक के बीच सरकार ने 20 जुलाई, 2020 को बड़ा फैसला लिया। सरकार ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को राज्य में जांच और छापेमारी की दी गई अनुमति वापस ले ली। गहलोत सरकार ने आदेश पारित कर कहा कि अब सीबीआई को राज्य में किसी जांच से पहले उसकी अनुमति लेनी होगी क्योंकि उसने सीबीआई को दिया ‘जनरल कंसेंट’ वापस ले लिया है।

नायडू ने की थी शुरुआत

आंध्र प्रदेश की तत्कालीन चंद्रबाबू नायडू सरकार ने 8 नवंबर, 2018 को सीबीआई को राज्य में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। आंध्र प्रदेश ने महज तीन महीने पहले 3 अगस्त, 2018 को ही एक आदेश पारित करके सीबीआई को राज्य में जांच करने की ‘आम सहमति (जनरल कंसेंट)’ दी थी। तब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नायडू सरकार के इस फैसले का स्वागत किया था। ध्यान रहे कि चंद्रबाबू नायडू मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में एनडीए का हिस्सा थे, लेकिन मार्च 2018 में उन्होंने खुद को गठबंधन से अलग कर लिया था। अगले विधानसभा चुनाव में नायडू की सत्ता छिन गई और वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख जगनमोहन रेड्डी राज्य के नए मुख्यमंत्री बने।

नायडू के रास्ते पर चल पड़ीं ममता

सीबीआई को बैन करने के फैसले पर आंध्र प्रदेश के तत्कालीन सीएम चंद्रबाबू नायडू का समर्थन करने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी यही काम किया। हफ्ते भर के अंदर उन्होंने प. बंगाल में सीबीआई को जांच करने की दी गई सहमति वापस ले ली। पश्चिम बंगाल ने 1989 में राज्य में सीबीआई जांच को ‘जनरल कंसेंट’ दिया था।

जब कोलकाता में सीबीआई अफसर पर आई आफत

3 फरवरी, 2019 को शारदी चिटफंड घोटाले के संबंध में राज्य के तत्कालीन पुलिश कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ के लिए कोलकाता पहुंची सीबीआई की टीम के साथ जो हुआ, वह इतिहास में दर्ज हो गया। प. बंगाल पुलिस ने सीबीआई अधिकारियों को ही हिरासत में ले लिया और उन्हें थाने ले गई। सीबीआई की 8 सदस्यीय टीम को जबरन वैन में भरकर शेक्‍सपियर सरनी पुलिस स्‍टेशन ले जाया गया। उधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं। बाद में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में शिकायत की और कोर्ट ने राजीव कुमार गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें जांच में सहयोग करना का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को ममता ने लोकतंत्र और संविधान की जीत बताई थी।

CBI को बैन करने वाला तीसरा राज्य बना छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने 10 जनवरी, 2019 को आंध्र प्रदेश और प. बंगाल के नक्शे कदम पर चलते हुए सीबीआई को राज्य में जांच के लिए दिया गया जनरल कंसेंट वापस ले लिया। प्रदेश की भूपेश बघेल सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर इसकी जानकारी दी और कहा कि वो सीबीआई के बता दे कि राज्य सरकार की अनुमति लिए बिना वह यहां जांच करने के लिए नहीं आए। हालांकि, बघेल सरकार ने इस फैसले के पीछे का कोई कारण नहीं बताया।

NIA जैसी नहीं है CBI

दरअसल, नैशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की तरह सीबीआई का संचालन अपने निजी कानून से नहीं होता है। एनआईए के लिए एनआईए ऐक्ट है जबकि सीबीआई का संचालन दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टेब्लिसमेंट (DSPE) ऐक्ट के तहत होता है। इसका सेक्शन 6 सीबीआई को दिल्ली समेत किसी भी केंद्रशासित प्रदेश से बाहर संबंधित राज्य सरकार की अनुमति के बिना उस राज्य में जांच करने से रोकती है। इसे ऐसे भी समझें कि चूंकि सीबीआई के ज्यूरिस्डिक्शन में सिर्फ केंद्र सरकार के विभाग और कर्मचारी आते हैं, इसलिए उसे राज्य सरकार के विभागों और कर्मचारियों अथवा राज्यों में संगीन अपराधों की जांच के लिए अनुमति की जरूरत पड़ती है।

जनरल कंसेंट वापस लेने का मतलब

सीबीआई को राज्य से दो तरह की अनुमति मिलती है। एक- खास मामले की जांच को लेकर (केस स्पेसिफिक) और दूसरा- सामान्य सहमति (जनरल कंसेंट)। जनरल कंसेंट के तहत राज्य सीबीआई को अपने यहां बिना किसी रोकटोक के जांच करने की अनुमति देते हैं। करीब-करीब सभी राज्यों ने सीबीआई को जनरल कंसेंट दिया हुआ है। इससे एजेंसी राज्य में कार्यरत केंद्र सरकार के कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में आसानी होती है और उसे हर बार राज्य से अनुमति नहीं लेनी पड़ती है। अब तक आंध्र प्रदेश, प. बंगाल, छत्तीसगढ़ और राजस्थान ने सीबीआई से जनरल कंसेंट वापस ले लिया है। इसका मतलब यह है कि अब सीबीआई इन राज्यों में पदस्थापित किसी केंद्रीय कर्मचारी या अन्य व्यक्ति के खिलाफ तब तक नया केस दर्ज और जांच नहीं कर सकती है जब तक उसे राज्य इसकी अनुमति नहीं दे दे।

​​…तब राज्य सरकार की अनुमति की जरूरत नहीं

सीबीआई ने 2013 में सुप्रीम कोर्ट में डीएसपीई ऐक्ट के सेक्शन 6 को हटाने को लेकर दलील दी थी कि अब तक (2013 तक) सिर्फ 10 राज्यों ने ही जनरल कंसेंट दिया है। इससे अन्य राज्यों में जांच करने में उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर संबंधित राज्य का हाई कोर्ट अनुमति दे दे तो राज्य सरकार की अनुमति के बिना भी जांच की जा सकती है। मतलब साफ है कि सीबीआई अपनी मर्जी से और राज्य सरकार की अनुमति के बिना संबंधित राज्य में छापेमारी नहीं कर सकती है। उसे अगर किसी खास मामले में जांच की जरूरत जान पड़ती है और राज्य सरकार से इसकी अनुमति नहीं मिलती है तो उसे उस राज्य के हाई कोर्ट से अनुमति लेनी होगी।

जम्मू-कश्मीर में विकास की प्रक्रिया से चिंतित अब्दुल्ला-मुफ्ती अपनी जमीन खिसकती देख बौखलाए

संघ शासित जम्मू-कश्मीर देश की आजादी से पूर्व एक समृद्धशाली राज्यों में गिना जाता था, लेकिन पाकिस्तान पोषित आतंकवादी घटनाओं और अलगाववादियों द्वारा कश्मीर की आजादी के नाम पर आम मुसलमानों को उकसाने जैसी गतिविधियों के चलते प्रदेश का काफी समय से सर्वागीण विकास अवरुद्ध हो गया था। अनुच्छेद-370 और 35ए हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में एक नए युग की शुरुआत हुई है। वहां खून-खराबा और भ्रष्टाचार काफी हद तक रुक गए हैं। परिणामस्वरूप नया जम्मू-कश्मीर विकास के पथ पर चल पड़ा है। अब उद्योगपति भी वहां निवेश करने में उत्सुकता दिखा रहे हैं। कई स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े समूह वहां बड़े-बड़े हॉस्पिटल खोलने का मन बना रहे हैं। इसी प्रकार निजी शैक्षिक संस्थान भी खोले जा रहे हैं। शिकारा और हाउसबोट जैसे उद्योग-धंधे पुन: फलने-फूलने लगे हैं।

‘स्पेशल मार्केट इंटरवेंशन प्राइस स्कीम’ : गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। यहां धान, गेहूं, मक्का और केसर की प्रमुख फसलें उगाई जाती हैं। कुछ भागों में जौ, बाजरा, ज्वार भी उगाए जाते हैं। कश्मीर में बागवानी व्यापक स्तर पर की जाती है। इससे 27 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। झीलों एवं नदियों में मछलियों एवं सिंघाड़ों तथा इनके किनारों पर सब्जियों एवं फूलों की खेती की जाती है। केसर की खेती कश्मीर घाटी में विशेषकर पुलवामा जिले के पंपोर और इसके आस-पास के गांवों में की जाती है। कश्मीर में सेब की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। घाटी से सेब के प्रतिदिन करीब 750 ट्रक देश के अन्य भागों में जाते हैं। केंद्र सरकार ने 2019 में सेब की खेती करने वाले किसानों के लिए एक नई योजना ‘स्पेशल मार्केट इंटरवेंशन प्राइस स्कीम’ लागू की है। इसके तहत नेफेड सीधे तौर पर कश्मीर के किसानों से सेब खरीदता है और इसके बाद प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के तहत रकम सीधे किसानों के खाते में भेज दी जाती है। इस योजना से प्रदेश के करीब सात लाख किसानों को लाभ हुआ है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण में काफी तेजी : केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर के गांवों के विकास के लिए दिया जाने वाला पैसा अब सीधे सरपंचों के खाते में डालने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए ग्राम पंचायतों के विकास के लिए 4483 पंचायतों को 366 करोड़ रुपये की राशि दी गई है। सरकार ने 634 ग्राम पंचायतों को इंटरनेट से जोड़ने का भी निर्णय लिया है। केंद्र सरकार ने कश्मीरी किसानों के लिए पेंशन योजना को भी लागू किया है। इसका लाभ करीब पांच करोड़ किसानों को मिला है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण में भी काफी तेजी आई है। 2019 के आंकड़ों के अनुसार इस योजना के तहत कश्मीर में करीब 11,400 सड़कों का निर्माण किया गया है, जिससे 1338 गांवों और कस्बों को जोड़ने में मदद मिली है। कश्मीर के किसानों को बाजार की सहायक सेवाएं प्रदान करने और विभिन्न बाजारों तक उचित सड़क संपर्क सुनिश्चित करने के लिए फसल विशिष्ट कृषि कलस्टरों का विकास किया जा रहा है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने इस साल ग्रामीण विकास के लिए 25 योजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

हालांकि जम्मू-कश्मीर में विकास करने के लिए सरकार के समक्ष चुनौतियां भी कम नहीं हैं। मौजूदा हालातों में कश्मीर घाटी एवं अन्य इलाकों में विशेषकर बहुसंख्यक मुस्लिम लोगों को विकास तथा भाई-चारे की मुहिम के साथ कैसे जोड़ा जाए? सरकार के समक्ष यह बड़ी चुनौती है। कुल मिलाकर नव निíमत संघ शासित जम्मू-कश्मीर में विकास की इसी प्रक्रिया से चिंतित कश्मीरी नेता अपनी जमीन खिसकती देख बौखलाए प्रतीत हो रहे हैं।

बिहार चुनाव में BJP का बड़ा वादा, एक साल में 3 लाख नए शिक्षकों की नियुक्ति, जानें घोषणा-पत्र में और क्या-क्या

बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर बड़ा वादा किया है। बिहार के लिए भाजपा ने अपने विजन डाक्‍यूमेंट में 11 संकल्प किए हैं, जिनमें 19 लाख रोजगार का वादा है, मगर इसमें सबसे बड़ा वादा शिक्षकों की नौकरी का है। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में वादा किया है कि आने वाले एक साल में 3 लाख टीचरों की नियुक्ति करेगी। भारतीय जनता पार्टी ने आज अपना विजन डॉक्टूयमेंट जारी किया और इस मौके पर कहा कि सरकार बनने के बाद इन वादों को पूरा करेगी। 

भारतीय जनता पार्टी के भरोसे पत्र के तीन नंबर प्वाइंट में कहा गया है कि एनडीए सरकार ने बिहार में 3.5 शिक्षकों की नियुक्तियां कीं। इसे बढ़ाते हुए आने वाले एक साल में राज्य के सभी प्रकार के विद्यालय, उच्च शिक्षा के विश्वविद्यालयों और संस्थानों में 3 लाख नए शिक्षकों की नियुक्ति किया जाएगा।

इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी ने राजद के 10 लाख नौकरी के जवाब में 19 लाख रोजगार देने का वादा किया है। भाजपा ने अपने घोषणा-पत्र में कहा है कि एक हजार नए किसान उत्पाद संघों को आपस में जोड़कर राज्यभर के विशेष सफल उत्पाद, (जैसे- मक्का, फल, सब्जी, चूड़ा, मखाना, पान, मशाला, शहद, मेंथा, औषधीय पौधों के लिए सप्लाई चेन विकसित करेंगे) और 10 लाख रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

जानें भारतीय जनता पार्टी के संकल्प पत्र में क्या-क्या वादे हैं 
1- कोरोना का नि शुल्क टीकाकरण उपलब्ध कराएंगे
2- विद्यालय उच्च शिक्षा के विश्वविद्यालयों तथा संस्थानों में 3लाख शिक्षकों की नियुक्ति करेंगे
3- बिहार के नेक्स्ट जेनरेशन आईटी हब के रूप में विकसित करके अगले 5 वर्ष में 5 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर
4- 50 हजार करोड़ की व्यवस्था कराकर    1 करोड़ महिलाओं को स्वावलंबी बनाएंगे
5- कुल 1 लाख लोगों को स्वास्थ्य विभाग में नौकरी     के अवसर प्रदान करेंगे, दरभंगा में एम्स का संचालन 2024 तक
6- धान तथा गेहूं के बाद अब दलहन की भी खरीद एम एस पी दरों पर
7- 30 लाख लोगों को 2022 तक पक्के मकान
8- मेडिकल इंजिनियरिंग सहित तकनीकी शिक्षा को हिंदी भाषा में उपलब्ध कराएंगे
9- अगले दो सालों में निजी तथा कोम्फेड आधारित 15 दुग्ध प्रोसेसिंग उद्योग स्थापित करेंगे
10- मछलियों के उत्पादन में बिहार को देश का नंबर एक राज्य बनाएंगे
11- एक हजार नए किसान उत्पाद संघों को आपस में जोड़कर राज्यभर के विशेष सफल उत्पाद, (जैसे- मक्का, फल, सब्जी, चूड़ा, मखाना, पान, मशाला, शहद, मेंथा, औषधीय पौधों के लिए सप्लाई चेन विकसित करेंगे) और 10 लाख रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

चेतकपुरी चौराहे पर सहेली से मिलकर लौट रही युवती पर झपट्टा मार चेन लूट ले गए बाइक सवार

ग्वालियर। सहेली से मिलकर लौट रही युवती पर बाइक सवार बदमाश झपट्टा मारकर सोने की चेन लूट ले गए। वारदात चेतकपुरी के पास बंधन गार्डन के सामने की है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने नाकाबंदी की, लेकिन झपट्टामार हाथ नहीं आए हैं। चेन दो तौला सोने की बताई गई है। पीड़िता ने पुलिस को बताया है कि वह एफआइआर बाद में दर्ज कराएगी। उसके पिता की हालत बेहत नाजुक है और यह बात सुनकर उनको सदमा लगेगा। जिस पर पुलिस ने इस घटना को छिपाकर रखा, पर बुधवार सुबह यह सार्वजनिक हो गई।

माधवगंज निवासी 22 वर्षीय युवती अंशुल गुप्ता बीकॉम की विद्यार्थी है। उसके पिता व्यवसायी हैं। मंगलवार शाम वह अपनी सहेली से मिलने चेतकपुरी आई थी। लौटते समय अभी वह बंधन गार्डन के पास पहुंची ही थी तभी पीछे से आए बाइक सवार दो बदमाशों ने झपट्टा मारा और गले से चेन लूट ल गए।

वारदात के बाद वह गिरते-गिरते बची, लेकिन संभलकर उसने बदमाशों का पीछा किया, पर झपट्टा मार बाइक की गति बढ़ाकर जीवाजी क्लब रोड की तरफ भाग गए। घटना की सूचना डायल 100 पर दी। जिस पर तत्काल डायल 100 और झांसी रोड थाना पुलिस पहंुची। पुलिस ने लुटेरों की तलाश में नाकाबंदी की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है।

बाइक सवार नया गैंग

4 दिन में इस तरह चेन और पर्स की यह तीसरी घटना है। तीनों वारदातों में दोपहिया वाहन पर सवार 2 बदमाश शामिल हैं। उनकी उम्र भी लगभग 25 से 27 वर्ष के लगभग है। पुलिस अफसरों का भी मानना है कि यह कोई नया गिरोह है। उपचुनाव के लिए आचार संहिता लागू है और शहर में पुलिस की निगरानी कड़ी हो गई है। ऐसे में लगातार वारदात चिंता की बात मानी जा रही है।

LAC पर पूर्वी लद्दाख में तैनात सैनिकों की रोटेशन प्रक्रिया शुरू, युद्ध की रणनीति को चुस्त बनाने की पहल

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच सेना ने रोटेशन पर जवानों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसे लंबे समय तक एलएसी पर मौजूद रहने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

सेना के सूत्रों ने कहा कि कठिन एवं दुर्गम स्थानों पर जवानों की तैनाती में रोटेशन प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके पीछे मकसद यह होता है कि लंबे समय तक जवानों को ऐसे ऊंचाई वाले दुर्गभ स्थानों पर तैनात नहीं रखा जाए। वहीं, दूसरे सैनिकों को वहां भेजकर उनकी युद्धक क्षमता को मजबूती प्रदान करना है। इसलिए उन्हें दो-तीन महीनों के भीतर वहां से हटा दिया जाता है औ दूसरे सैनिकों को वहां भेजा जाता है।

सेना सूत्रों के अनुसार यह प्रक्रिया पूर्वी लद्दाख में भी आरंभ कर दी गई है। क्योंकि वहां सैनिक चार-छह महीनों से तैनात हैं। जो सैनिक वहां पहले से तैनात थे उन्हें मैदानी इलाकों में भेजा जा रहा है तथा नये सैनिकों को वहां भेजा जा रहा है। वहां नए सैनिकों को भेजने से पूर्व आवश्यक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है।

सूत्रों ने कहा कि इसमें किसी भी प्रकार से सैनिकों की संख्या नहीं बढ़ाया जा रही है। सिर्फ जवानों को बदला जा रहा है। सेना के सूत्रों ने कहा कि इस प्रकार के कदम चीन ने भी उठाए हैं। इसके बाद भारत ने उठाए।

सेना के सूत्रों ने बताया कि सैनिकों की रोटेशन के जरिये हमने सर्दियों भर की तैनाती की प्रक्रिया सुनिश्चित कर दी है। आने वाली बातचीत में निभर करेगा कि सैनिकों की वापसी होती है या वहां तैनाती कायम रहती है। बता दें कि दोनों देशों के पचास हजार से ज्यादा सैनिक एलएसी पर तैनात हैं। दोनों देशों में सैनिकों को पीछे हटाने को लेकर लगातार बातचीत हो रही है लेकिन कोई हल नहीं निकल रहा है।

संशोधित शेडयूल] AIBE-XV परीक्षा 24 जनवरी को होगी आयोजित, ऑनलाइन पंजीकरण 03 दिसंबर तक बढ़ाया 

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) की तारीख को स्थगित करने का फैसला किया है। अब परीक्षा 24 जनवरी, 2021 को आयोजित की जाएगी।

इसी तरह, आवेदन प्राप्त करने की तारीख भी 03 दिसंबर, 2020 तक बढ़ा दी गई है।

उल्लेखनीय है कि एआईबीई पहले 16 अगस्त को आयोजित होने जा रहा था। हालांकि, “वर्तमान महामारी की स्थिति और लगातार लॉकडाउन, कोरोना रोगियों की बढ़ती संख्या के प्रकाश में”, बीसीआई ने परीक्षा की तारीख को स्थगित करने का फैसला लिया गया। बाद में निर्णय लिया गया कि परीक्षा 8 नवंबर को आयोजित की जाएगी।

अब, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने फिर से कार्यक्रम को संशोधित किया है।

AIBE-XV का संशोधित शेड्यूल

16 मई, 2020 से ऑनलाइन पंजीकरण शुरू हुआ।

इच्छुक उम्मीदवार 3 दिसंबर, 2020 तक बार परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन के लिए ऑनलाइन भुगतान 10 दिसंबर, 2020 तक खुला रहेगा।

उम्मीदवार अपना ऑनलाइन फॉर्म 15 दिसंबर, 2020 तक पूरा कर सकते हैं।

एडमिट कार्ड 5 जनवरी, 2021 को जारी किए जाएंगे।

परीक्षा की नई तिथि- 24 जनवरी, 2021।

विशेष रूप से, एआईबीई एक ओपन बुक एग्जाम है, जो हर साल दो बार आयोजित की जाती है जिसे एक वकील के लिए बार में शामिल होने के लिए पास करना ज़रूरी है।

उपरोक्त तिथियां संशोधनों के अधीन हैं, यदि कोई हो, तो अपरिहार्य परिस्थितियों के मामले में बीसीआई द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है।