राहुल ने शेयर किया 10 देशों का आंकड़ा, अर्थव्यवस्था और कोरोना पर PM मोदी को घेरा

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोला है. गिरती अर्थव्यवस्था और कोरोना संकट को लेकर राहुल ने केंद्र सरकार को घेरा है. राहुल गांधी ने 10 देशों का आंकड़ा ट्विटर पर शेयर किया है, जिसमें अर्थव्यवस्था और कोरोना को लेकर फैक्ट दिए गए हैं. इसमें भारत की स्थिति चिंताजनक है.

वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, देश में कोरोना के 75 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. बीते 24 घंटों में कोरोना के 55,722 नए मामले सामने आए हैं.  इस दौरान 579 लोगों की मौत हुई है.

इससे पहले मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने तीखा हमला बोला था. हाल ही में अपने पंजाब दौरे से जुड़ा एक वीडियो ट्वीट करके राहुल गांधी ने कहा था कि किसानों ने देश को खाद्य सुरक्षा दी और मोदी सरकार ने किसानों को सिर्फ धोखा दिया. लेकिन अब और नहीं.

इसी महीने राहुल गांधी ने ‘खेती बचाओ यात्रा’ के जरिेए पंजाब और हरियाणा के किसानों से मुलाकात की थी. अपने तीन दिवसीय दौर पर राहुल गांधी ने नए कृषि कानूनों के खिलाफ ट्रैक्टर रैली की थी. इस दौरान जनसभाओं में राहुल ने मोदी सरकार पर जमकर हमले किए थे. हरियाणा के पिहोवा में उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार अंबानी और अडानी का रास्ता साफ करने में लगी है. किसानों के हित से उसे कोई मतलब नहीं है. पहले चरण के चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी दो रैलियों को संबोधित करेंगे. पहली रैली नवादा जिले के हिसुआ विधानसभा सीट पर होगी, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव मौजूद रह सकते हैं. दूसरी रैली भागलपुर विधानसभा सीट पर होगी. इसके अलावा दूसरे और तीसरे चरण के चुनाव प्रचार के दौरान भी राहुल गांधी रैली कर सकते हैं.

पाक के रिटायर्ड जनरल ने खोली उसकी पोल, 1947 में पाकिस्तानी सेना ने इस मकसद से किया था भारत पर हमला

इस्लामाबाद, । पाकिस्तान के एक रिटायर्ड सैन्य अधिकारी ने ही अपने देश की पोल खोल दी है। राइडर्स इन कश्मीर नाम की अपनी किताब में रिटायर्ड मेजर जनरल अकबर खान ने स्वीकार किया है कि सन 1947 में कश्मीर को पाकिस्तान से मिला लेने की नीयत से कबायलियों के साथ पाकिस्तानी सेना ने हमला किया था। पाकिस्तान पूरे कश्मीर पर ही कब्जा करना चाहता था लेकिन भारतीय सेना के वहां आ जाने से उसका मंसूबा पूरा नहीं हो सका था।

अकबर खान का 1947 में कश्मीर में हुए युद्ध में पाकिस्तानी सेना की ओर बड़ा योगदान था। अकबर खान बंटवारे के समय बनी आ‌र्म्ड फोर्स पार्टीशन सब कमेटी में भी थे। अकबर खान ने लिखा है कि सितंबर 1947 में वह पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय में हथियारों और उपकरणों के विभाग के निदेशक थे। तभी उनसे कहा गया कि तैयारी करें, हमें कश्मीर पर कब्जा करना है।

हथियारों और गोला-बारूद के विभाग का प्रमुख होने के नाते उनकी जिम्मेदारी युद्ध के लिए सभी आवश्यक इंतजाम करने की थी। हथियारों की ताकत पर ही सेना और अन्य लोगों को कश्मीर पर हमला बोलना था। सरकार का आदेश मिलने के बाद इटली से हथियारों और गोला-बारूद का बंदोबस्त किया गया और उन्हें कश्मीर में मौजूद पाकिस्तानी एजेंटों को भेजा गया। इसका उद्देश्य यह था कि जिस समय पाकिस्तानी सेना और कबायली कश्मीर पर हमला करेंगे, उसी समय कश्मीर के अंदरूनी इलाकों में मौजूद एजेंट वहां पर हिंसा फैलाएंगे।

इससे दो मोर्चो पर सुरक्षा बल फंस जाएंगे और पाकिस्तान आसानी से कश्मीर पर कब्जा कर लेगा। इस कार्रवाई को ऑपरेशन गुलमर्ग का नाम दिया गया था। लेकिन पाकिस्तान को यह पता नहीं चल सका था कि कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत से हाथ मिला लिया है और वहां से मदद मांगी है। पाकिस्तान पर हमला होने के कुछ घंटों के बाद वहां भारतीय सेना पहुंच गई और इसके बाद तस्वीर बदल गई।

चीन की खुलेआम धमकी, …तो हम भारत में भड़काएंगे अलगाववादियों का विद्रोह

भारत के संग सीमा पर उलझा चीन अब देश के अंदर अलगाववादियों को भड़काने की धमकी दे रहा है। चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने भारत को ताइवान कार्ड खेलने से बचने की सलाह देते हुए कहा कि यदि भारत ने ताइवान की आजादी को समर्थन दिया तो चीन भी उसके कई राज्यों में अलगाववादियों को समर्थन दे सकता है। हालांकि, सच्चाई यह है कि चीन लंबे समय से उत्तर पूर्व में अलगाववादी और उग्रवादी गुटों को हथियार और पैसा देता रहा है। दूसरी तरफ वह कश्मीर में भी पाकिस्तानी एजेंडे को सपोर्ट करता है। 

बीजिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी में अकैडमी ऑफ रिजनल एंड ग्लोबल गवर्नेंस के सीनियर रिसर्च फेलो लॉन्ग शिंगचुन ने ग्लोबल टाइम्स में लिखे लेख में कहा है कि भारत में कई मीडिया आउटलेट्स ने ताइवान के नेशनल डे का विज्ञापन दिखाया और एक टीवी चैनल ने ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू का इंटरव्यू दिखाया, जिसने उन्हें ताइवान के अलगाववादी स्वर को मंच मिला। इससे चीन में इस बात की चर्चा छिड़ गई है कि भारत के ताइवान कार्ड का जवाब किस तरह दिया जाए। 

लॉन्ग शिंगचुन ने आगे कहा कि भारत की ओर से वन चाइना को समर्थन देने और ताइवान की आजादी को समर्थन नहीं देने का ही नतीजा है कि चीन भारत में अलगाववादी ताकतों को समर्थन नहीं देता है। ताइवान और भारत के अलगाववादी एक ही कैटिगरी के हैं। यदि भारत ताइवान कार्ड खेलता है तो इसे बात से अवगत होना चाहिए कि चीन भी भारतीय अलगाववादी कार्ड खेल सकते हैं। 

चीन सरकार के मुखपत्र में छपे लेख में कहा गया है कि भारतीय सेना ने कहा है कि वे ढाई फ्रंट युद्ध की तैयारी कर रहे हैं। उनका इशारा पाकिस्तान, चीन और आंतरिक विद्रोह की ओर है। आंतरिक विद्रोह में अलगाववादी ताकतें और आतंकवादी शामिल हैं। लेख में कहा गया है, ”यदि भारत ताइवान की आजादी को समर्थन देता है, तो चीन भी नॉर्थ ईस्ट के राज्यों त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, असम और नगालैंड में अलगाववादी ताकतों को सपोर्ट कर सकता है। चीन सिक्किम में विद्रोह को भी सपोर्ट कर सकता है।”

अखबार लिखता है कि कई राज्य देश की आजादी के बाद जुड़े हैं, लेकिन यहां के लोग खुद को भारतीय नहीं मानते हैं। वे अपना अलग देश चाहते हैं और इसके लिए लड़ रहे हैं। सबसे प्रमुख असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट है। ये हथियारबंद अलगाववादी संगठन भारतीय सेना के अभियानों की वजह से कमजोर पड़ चुके हैं, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। बाहरी समर्थन के अभाव में उनके लिए आगे बढ़ना मुश्किल है, लेकिन अगर समर्थन होता है, तो यह विद्रोह शुरू करने के लिए सशक्त करेगा। 

ग्लोबल टाइम्स ने यह भी कहा है कि इन अलगाववादी ताकतों ने चीन से समर्थन मांगा है, लेकिन कूटनीतिक सिद्धांतों और भारत के साथ दोस्ती की वजह से चीन ने इन्हें जवाब नहीं दिया है। चीन दूसरे देशों की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है। एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की मान्यता चीन-भारत राजनयिक संबंधों का आधार है। अखबार ने कहा कि भारत का ताइवान कार्ड खेलना उसके हित में नहीं है। कुछ भारतीय रणनीतिज्ञ, थिंक टैक्स और मीडिया आउटलेट्स चीन को जवाबी कार्रवाई को मजबूर कर रहे हैं। भारत सरकार अब तक चुप रही है, लेकिन कुछ भारतीय आग से खेल रहे हैं। यदि भारतीय राष्ट्रवादी ताइवान में आग भड़काएंगे तो उत्तरपूर्व में अशांति और विद्रोह देखेंगे। 

FATF की ग्रे लिस्ट में ही रहेगा पाकिस्तान, 6 प्रमुख काम को करने में हुआ फेल

इस्लामाबाद
फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स (एफएटीएफ) ने आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के लचर रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। एफएटीएफ के अधिकारियों ने कहा है कि पाकिस्तान आतंक के खिलाफ हमारे 27 कार्ययोजनाओं में से प्रमुख छह योजनाओं को पूरा करने में नाकाम साबित हुआ है। इसमें भारत में वांछित आतंकवादियों मौलाना मसूद अजहर और हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई न करना भी शामिल हैं। जिसके बाद इस महीने फ्रांस की राजधानी पेरिस में होने वाली इस संगठन की बैठक में भी पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट में ही बने रहने की संभावना है।

ग्रे लिस्ट में ही बना रहेगा पाकिस्तान

फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स (एफएटीएफ) की डिजिटल पूर्ण सत्र 21-23 अक्टूबर को पेरिस में आयोजित किया जाएगा। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक प्रतिबद्धताओं और मानकों को पूरा करने में इस्लामाबाद के प्रदर्शन की पूरी तरह समीक्षा की जाएगी। माना जा रहा है कि उसके लचर रवैये के कारण ग्रे लिस्ट में में बनाए रखने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

यूएन में प्रतिबंधित आतंकियों के खिलाफ नहीं की कार्रवाई

घटनाक्रम से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि एफएटीएफ ने पाकिस्तान को आतंकवाद के वित्तपोषण को पूरी तरह रोकने के लिए कुल 27 कार्ययोजनाएं पूरी करने की जिम्मेदारी दी थी जिनमें से उसने अभी 21 को पूरा किया है और कुछ काम पूरे नहीं कर सका है। पाकिस्तान ने जिन कार्यों को पूरा नहीं किया है, उनमें मसूद अजहर, हाफिज सईद और जाकिर उर रहमान लखवी जैसे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है।

आतंकियों को प्रतिबंधित सूची से किया बाहर

इसके अलावा एफएटीएफ ने इस बात का पुरजोर संज्ञान लिया है कि आतंकवाद रोधी कानून की अनुसूची पांच के तहत पाकिस्तान की 7,600 आतंकियों की मूल सूची से 4,000 से अधिक नाम अचानक से गायब हो गये। अधिकारी ने कहा कि इन हालात में लगभग तय है कि पाकिस्तान एफएटीएफ की ग्रे सूची में बना रहेगा।

अमेरिका-फ्रांस समेत ये देश भी पाकिस्तान के खिलाफ

इसके अलावा नामित करने वाले चार देश-अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी भी पाकिस्तान की सरजमीं से गतिविधियां चला रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की उसकी प्रतिबद्धता से संतुष्ट नहीं हैं। अजहर, सईद और लखवी भारत में अनेक आतंकी हमलों में संलिप्तता के लिए सर्वाधिक वांछित आतंकवादी हैं।

भाजपा में रहकर भी भाजपाई नहीं हो पा रहे सिंधिया, पार्टी ने रणनीतिक कारणों से बनाई दूरी

मध्यप्रदेश में 28 सीटों पर उपचुनाव दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुका है। भाजपा के डिजिटल रथों पर कांग्रेस से भाजपा में गए ग्वालियर घराने के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया गायब हैं। मुख्यमंत्री शिवराज की जनसभा में साथ नजर आने वाले सिंधिया अब वहां भी मंच पर नहीं दिखते। इतना ही नहीं भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को स्टार प्रचारकों में 10वां स्थान दिया है।

यहां तक कि ग्वालियर चंबल संभाग की 16 सीटों के प्रचार में भी अब कमान मुख्यमंत्री शिवराज के कंधे पर है। पार्टी में अंदरखाने चल रही चर्चा के मुताबिक सबकुछ रणनीति के तहत ही है। पार्टी के एक नेता तो तंज भरे लहजे में कहते हैं कि वह भाजपा में आ गए हैं, लेकिन अभी भाजपाई होने में वक्त लगेगा।

क्यों मुख्य पर्दे से गायब हैं ग्वालियर के ‘महाराज’

उपचुनाव प्रचार अब चरम पर है। भाजपा ने मुख्यमंत्री शिवराज बनाम पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का चुनावी रंग देने के लिए यह कदम उठाया है। ऐसा कांग्रेस की रणनीति की काट के लिए है। ज्योतिरादित्य के भाजपा में जाने के बाद से कांग्रेस ने उन्हें क्षेत्र में गद्दार के तौर पर प्रचारित करना शुरू किया। यहां तक कि उपचुनाव में भी ज्योतिरादित्य को गद्दार बताना मुख्य मुद्दा है। उनके परिवार को अंग्रेजों के जूते उठाना, झांसी की रानी को धोखा देना जैसे मुद्दे खूब चर्चा में आए। इसके अलावा कांग्रेस ने हवा दी कि सिंधिया ने जमीन घोटाले में घिरने से बचने के लिए पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा। 

दरअसल ग्वालियर चंबल संभाग की 16 सीटों पर सिंधिया के साथ कांग्रेस से गए लोग ही चुनाव लड़ रहे हैं। इसे क्षेत्र की जनता भी समझ रही है। भाजपा के अंदरखाने में इसका विरोध भी हैै कि सिंधिया के कांग्रेस में जाने से 16 विधायकों को 2018 में जिताने वाले सभी मतदाता तो भाजपाई नहीं हो गए, लेकिन इसके फेर में भाजपा में जुड़ाव रखकर वोट देने वालों को झटका जरूर लगा है। सिंधिया के मुखर होने पर पार्टी का यह पक्ष दबा रह सकता है। इसलिए पार्टी ने सबको साधने के लिए अपनी रणनीति को थोड़ा दुरुस्त किया है।

अभी तो केवल राज्यसभा सांसद हैं, उनसे बड़े कद्दावर नेता हैं

भाजपा के ही एक नेता की सुन लीजिए। सूत्र का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर चंबल संभाग के बड़े नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। भाजपा में अभी वह केवल राज्यसभा सांसद हैं। वह पार्टी में अपने समर्थक विधायकों के साथ आए हैं, लेकिन वरिष्ठताक्रम में पार्टी के भीतर सिंधिया से बड़े तमाम नेता हैं। सूत्र का कहना है कि भाजपा नेता सिंधिया का मान-सम्मान सब भाजपा का है। हम उनका पूरा आदर करते हैं, लेकिन अपने वरिष्ठ नेताओं को भी पार्टी उचित सम्मान तो देगी। सूत्र का कहना है कि भाजपा अपनी परंपरा, नियम, कायदे के अनुरूप चल रही है। यह तो मीडिया है जो तरह-तरह के मीन-मेख निकालती है।

पार्टी से ऊपर सिंधिया को कैसे मान ले भाजपा?

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कुछ प्रचार के वीडियो वायरल हो रहे हैं। एक वीडियो में वह उपचुनाव को महाराज का बता रहे हैं। वह कार्यकर्ताओं से कह भी रहे हैं कि गांव-गांव यह संदेश पहुंचा दो। चुनावी सभा में मंच से वह खुद को महाराज कह रहे हैं। भाजपा और संघ की विचारधारा से जुड़े एक सदस्य का भी मानना है कि सिंधिया को ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए। भोपाल के एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि उन्होंने राजमाता विजयाराजे सिंधिया के दौर को भी देखा है। 

उनका कहना है कि राजमाता में भी इस तरह का गुरूर नहीं दिखाई देता था। वह कहते हैं कि आज 2020 में भाजपा बहुत बदल गई है। भाजपा का नेता, युवा नेता, कार्यकर्ता सब बदले हैं। मुझे नहीं लगता कि इसमें महाराज वाली छवि की अब कोई खास जगह है। उन्हें इस बारे में अपनी बुआ यशोधरा राजे से थोड़ा सीख लेना चाहिए। सूत्र का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया इसी साल भाजपा में आए हैं। उन्हें अभी भाजपाई बनकर राजनीति करने में थोड़ा समय लग सकता है।

कमलनाथ अकेले काफी हैं, 15 महीने की सरकार थी

भाजपा की तरह ही कांग्रेस पार्टी ने भी रणनीति में क्लाइमेक्स को घोला है। वह पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को शहीद मुख्यमंत्री की तरह पेश कर रही है। कमलनाथ हर जनसभा में अपनी 15 महीने की संक्षिप्त सरकार के कामकाज का जिक्र जरूर कर रहे हैं। इसमें दो महीने लोकसभा चुनाव आचार संहिता में और एक महीना अपनी सरकार बचाने की कवायद में लगाना नहीं भूलते। वह धोखे में गिराई गई सरकार का पूरा फ्लेवर देते हैं, लेकिन मंच पर राघोगढ़ के राजा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह नहीं होते। जीतू पटवारी से लेकर अन्य ने प्रचार में ताकत लगा दी है। कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन दिग्विजय सिंह पर्दे पर सक्रिय नहीं हैं। जबकि सिंधिया अपने भाषण में कमलनाथ के साथ दिग्विजय सिंह का नाम लेना नहीं भूलते। भाजपा के नेता दिग्विजय के गायब रहने पर तंज भी कस रहे हैं।

भाजपा चाहती है कि दिग्विजय संभालें मोर्चा

खास किस्म की राजनीति, विशेष बयानों के जरिए करने वाले राजा दिग्विजय सिंह के मध्यप्रदेश की सत्ता से हटने के बाद कांग्रेस को 2018 तक राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी और सत्ता के लिए इंतजार करना पड़ा। टीम कमलनाथ के सूत्र इसके पीछे थोड़ा दिग्विजय सिंह को भी जिम्मेदार ठहराते हैं। कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री के विरोधी उन्हें मिस्टर बंटाधार की भी संज्ञा दे देते हैं। भाजपा के कुछ रणनीतिकारों को भी इस संज्ञा में आनंद आता है। टीम कमलनाथ और कांग्रेस के रणनीतिकारों का भी मानना है कि उपचुनाव में दिग्विजय सिंह के पर्दे पर खुलकर मोर्चा संभालते ही नुकसान हो जाने की संभावना है। इसलिए दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे रहकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को फिर मुख्यमंत्री बनाने की डिजाइन को स्थापित करने में लगे हैं।

भाजपा में रहकर भी भाजपाई नहीं हो पा रहे सिंधिया, पार्टी ने रणनीतिक कारणों से बनाई दूरी

मध्यप्रदेश में 28 सीटों पर उपचुनाव दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुका है। भाजपा के डिजिटल रथों पर कांग्रेस से भाजपा में गए ग्वालियर घराने के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया गायब हैं। मुख्यमंत्री शिवराज की जनसभा में साथ नजर आने वाले सिंधिया अब वहां भी मंच पर नहीं दिखते। इतना ही नहीं भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को स्टार प्रचारकों में 10वां स्थान दिया है।

यहां तक कि ग्वालियर चंबल संभाग की 16 सीटों के प्रचार में भी अब कमान मुख्यमंत्री शिवराज के कंधे पर है। पार्टी में अंदरखाने चल रही चर्चा के मुताबिक सबकुछ रणनीति के तहत ही है। पार्टी के एक नेता तो तंज भरे लहजे में कहते हैं कि वह भाजपा में आ गए हैं, लेकिन अभी भाजपाई होने में वक्त लगेगा।

क्यों मुख्य पर्दे से गायब हैं ग्वालियर के ‘महाराज’

उपचुनाव प्रचार अब चरम पर है। भाजपा ने मुख्यमंत्री शिवराज बनाम पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का चुनावी रंग देने के लिए यह कदम उठाया है। ऐसा कांग्रेस की रणनीति की काट के लिए है। ज्योतिरादित्य के भाजपा में जाने के बाद से कांग्रेस ने उन्हें क्षेत्र में गद्दार के तौर पर प्रचारित करना शुरू किया। यहां तक कि उपचुनाव में भी ज्योतिरादित्य को गद्दार बताना मुख्य मुद्दा है। उनके परिवार को अंग्रेजों के जूते उठाना, झांसी की रानी को धोखा देना जैसे मुद्दे खूब चर्चा में आए। इसके अलावा कांग्रेस ने हवा दी कि सिंधिया ने जमीन घोटाले में घिरने से बचने के लिए पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा। 

दरअसल ग्वालियर चंबल संभाग की 16 सीटों पर सिंधिया के साथ कांग्रेस से गए लोग ही चुनाव लड़ रहे हैं। इसे क्षेत्र की जनता भी समझ रही है। भाजपा के अंदरखाने में इसका विरोध भी हैै कि सिंधिया के कांग्रेस में जाने से 16 विधायकों को 2018 में जिताने वाले सभी मतदाता तो भाजपाई नहीं हो गए, लेकिन इसके फेर में भाजपा में जुड़ाव रखकर वोट देने वालों को झटका जरूर लगा है। सिंधिया के मुखर होने पर पार्टी का यह पक्ष दबा रह सकता है। इसलिए पार्टी ने सबको साधने के लिए अपनी रणनीति को थोड़ा दुरुस्त किया है।

अभी तो केवल राज्यसभा सांसद हैं, उनसे बड़े कद्दावर नेता हैं

भाजपा के ही एक नेता की सुन लीजिए। सूत्र का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर चंबल संभाग के बड़े नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। भाजपा में अभी वह केवल राज्यसभा सांसद हैं। वह पार्टी में अपने समर्थक विधायकों के साथ आए हैं, लेकिन वरिष्ठताक्रम में पार्टी के भीतर सिंधिया से बड़े तमाम नेता हैं। सूत्र का कहना है कि भाजपा नेता सिंधिया का मान-सम्मान सब भाजपा का है। हम उनका पूरा आदर करते हैं, लेकिन अपने वरिष्ठ नेताओं को भी पार्टी उचित सम्मान तो देगी। सूत्र का कहना है कि भाजपा अपनी परंपरा, नियम, कायदे के अनुरूप चल रही है। यह तो मीडिया है जो तरह-तरह के मीन-मेख निकालती है।

पार्टी से ऊपर सिंधिया को कैसे मान ले भाजपा?

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कुछ प्रचार के वीडियो वायरल हो रहे हैं। एक वीडियो में वह उपचुनाव को महाराज का बता रहे हैं। वह कार्यकर्ताओं से कह भी रहे हैं कि गांव-गांव यह संदेश पहुंचा दो। चुनावी सभा में मंच से वह खुद को महाराज कह रहे हैं। भाजपा और संघ की विचारधारा से जुड़े एक सदस्य का भी मानना है कि सिंधिया को ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए। भोपाल के एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि उन्होंने राजमाता विजयाराजे सिंधिया के दौर को भी देखा है। 

उनका कहना है कि राजमाता में भी इस तरह का गुरूर नहीं दिखाई देता था। वह कहते हैं कि आज 2020 में भाजपा बहुत बदल गई है। भाजपा का नेता, युवा नेता, कार्यकर्ता सब बदले हैं। मुझे नहीं लगता कि इसमें महाराज वाली छवि की अब कोई खास जगह है। उन्हें इस बारे में अपनी बुआ यशोधरा राजे से थोड़ा सीख लेना चाहिए। सूत्र का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया इसी साल भाजपा में आए हैं। उन्हें अभी भाजपाई बनकर राजनीति करने में थोड़ा समय लग सकता है।

कमलनाथ अकेले काफी हैं, 15 महीने की सरकार थी

भाजपा की तरह ही कांग्रेस पार्टी ने भी रणनीति में क्लाइमेक्स को घोला है। वह पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को शहीद मुख्यमंत्री की तरह पेश कर रही है। कमलनाथ हर जनसभा में अपनी 15 महीने की संक्षिप्त सरकार के कामकाज का जिक्र जरूर कर रहे हैं। इसमें दो महीने लोकसभा चुनाव आचार संहिता में और एक महीना अपनी सरकार बचाने की कवायद में लगाना नहीं भूलते। वह धोखे में गिराई गई सरकार का पूरा फ्लेवर देते हैं, लेकिन मंच पर राघोगढ़ के राजा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह नहीं होते। जीतू पटवारी से लेकर अन्य ने प्रचार में ताकत लगा दी है। कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन दिग्विजय सिंह पर्दे पर सक्रिय नहीं हैं। जबकि सिंधिया अपने भाषण में कमलनाथ के साथ दिग्विजय सिंह का नाम लेना नहीं भूलते। भाजपा के नेता दिग्विजय के गायब रहने पर तंज भी कस रहे हैं।

भाजपा चाहती है कि दिग्विजय संभालें मोर्चा

खास किस्म की राजनीति, विशेष बयानों के जरिए करने वाले राजा दिग्विजय सिंह के मध्यप्रदेश की सत्ता से हटने के बाद कांग्रेस को 2018 तक राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी और सत्ता के लिए इंतजार करना पड़ा। टीम कमलनाथ के सूत्र इसके पीछे थोड़ा दिग्विजय सिंह को भी जिम्मेदार ठहराते हैं। कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री के विरोधी उन्हें मिस्टर बंटाधार की भी संज्ञा दे देते हैं। भाजपा के कुछ रणनीतिकारों को भी इस संज्ञा में आनंद आता है। टीम कमलनाथ और कांग्रेस के रणनीतिकारों का भी मानना है कि उपचुनाव में दिग्विजय सिंह के पर्दे पर खुलकर मोर्चा संभालते ही नुकसान हो जाने की संभावना है। इसलिए दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे रहकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को फिर मुख्यमंत्री बनाने की डिजाइन को स्थापित करने में लगे हैं।

गाय के गोबर से 33 करोड़ दीये बनने से चीन तिलमिलाया, चीनी लाइट का कारोबार प्रभावित

नई दिल्ली। चीन अपने लाइट कारोबार पर चोट होता देख तिलमिला गया है। तभी भारत में गाय के गोबर से 33 करोड़ दीये बनाने की घोषणा के बाद वीईबो जैसे चीन के ट्विटर पर गाय के गोबर लैंप की खूब चर्चा चल रही है। चीन के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि गाय के गोबर से बनने वाले दीये से वायु प्रदूषण फैलेगा जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। चीन को इस बात की आशंका है कि इस प्रकार के भारतीय कार्यक्रम से उनका आयात प्रभावित होगा। 

हाल ही में राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ने इस साल दिवाली से पहले गाय के गोबर से 33 करोड़ दीये बनाने की घोषणा की है। चीन का कहना है कि भारत बिना जांचे-परखे मेक इन इंडिया कार्यक्रम को प्रोत्साहित कर रहा है।आयोग ने कहा था कि दिवाली के दौरान चीनी लाइट आइटम के आयात को ध्यान में रखते हुए 33 करोड़ दीये बनाने का फैसला किया गया है। ताकि चीन से आयात कम हो सके।

एक अनुमान के मुताबिक दिवाली के दौरान इस्तेमाल होने वाले 90 फीसद लाइट आइटम चीन से आयातित होते हैं। कामधेनु आयोग के मुताबिक देश के 15 राज्य गाय के गोबर से चीनी आइटम को मुकाबला देने के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए तैयार हो गए हैं। 

चीन से लाइट आइटम के आयात को कम करने के लिए बंदरगाहों पर चीन से आने वाले माल की गुणवत्ता की भी जांच की जा रही है। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर माल को चीन वापस भेज दिया जाएगा या उसे नष्ट कर दिया जाएगा जिसका खर्च आयातक उठाएगा। इस तरह की बातें सामने आने के बाद चीन बौखलाया हुआ है। हर साल दीवाली के मौके पर बड़े पैमाने पर चीनी लाइटों का आयात किया जाता था मगर जब से चीन के साथ रिश्ते खराब हुए हैं लोग चीनी लाइटों और अन्य सामानों का बहिष्कार कर रहे हैं।

कमलनाथ ने इमरती को कहा आइटम तो वे बोली नींच है

ग्वालियर। मप्र उपचुनाव में नहीं थम रहा नेताओं की बदजुबानी का सिलसिला ।अब पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा प्रत्याशी इमरती देवी को कहा ‘आइटम’ । जिले के डबरा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र राज्य के लिए प्रचार करने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंच से भाषण देते वक्त कहा ‘ सुरेंद्र राजे हमारे उम्मीदवार हैं, सरल स्वभाव के सीधे साधे हैं. यह उसके जैसे नहीं है, क्या है उसका नाम? मैं क्या उसका नाम लूं आप तो उसको मुझसे ज्यादा अच्छे से जानते हैं, आपको तो मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था यह क्या आइटम है।

इससे पहले इसी मंच पर भाषण करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया ने भाजपा प्रत्याशी को जलेवी देवी कहकर संबोधित किया ।
कमलनाथ के भाषण से भाजपा आग बबूला हो गयी । प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पलटवार करते हुए कहा नवरात्रि में कमलनाथ महिलाओं का अपमान करते हैं नारी का सम्मान करते हैं उनकी पूजा करते हैं कभी मां के रूप में तो कभी देवी के रूप में कमलनाथ आपको डबरा की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगे आपने एक जैकलिन फर्नांडीस इमरती देवी की तुलना की है
कमलनाथ पर कटाक्ष करते हुए ग्रह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि नवरात्रि में कमलनाथ ने महिलाओं का अपमान किया है हम नारी का सम्मान करते है उनकी पूजा करते है कभी माँ के रूप में तो कभी देवी के रूप में , कमलनाथ आप को डबरा की महिलाएं कभी माफ नही करेगी , आप ने एक जैकलीन फर्नाडीज से इमरती देवी की तुलना की है ।

इमारती ने कहा नीच

अपने को जलेबी देवी और आइटम कहने पर इमरती देवी भी नही मानी । उनहोने कमलनाथ और पूरी कांग्रेस को नीच प्रवृति का बताते हुए कहाकि जब वे एक हरिजन महिला को ऐसा बोल सकते है तो ऐसी नीच प्रवृति वालो के साथ कोई परिवार अपनी महिलाओं के।साथ काम लड़ने कैसे भेज सकता है । उन्होंने ये भी कहाकि वे आइटम के साथ उठते बैठते है । उनका हीरोइन के साथ इंदौर के फोटो तो सबने देखा ही है ।
गौरतलब है कि इमरती देवी ने तीन विधानसभा चुनाव डबरा क्षेत्र से रिकॉर्ड मतो से जीते थे और कमलनाथ सरकार में महिला एवम बाल विकास मंत्री थी । वे विधानसभा से इस्तीफा देकर भाजपा के चली गई और शिवराज सरकार में भी महिला बाल विकास मंत्री बन गई । इस बार वे डबरा सीट से ही भाजपा के टिकिट पर चुनाव लड़ रही हैं।

ट्रंप टावर की 16वीं मंजिल से लटका सिरफिरा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करने की करता रहा मांग, हुआ गिरफ्तार

अमेरिका में तीन नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और डोनाल्ड ट्रंप आजकल चुनाव प्रचार प्रसार में व्यस्त हैं. उनका मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन से है.

शिकागो: अमेरिका के शिकागो में एक सिरफिरा ट्रंप टॉवर की 16वीं मंजिल से रस्सी के सहारे लटक गया. टॉवर पर लटकने के बाद ये शख्स राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात कराने की मांग करने लगा. पुलिसवालों को इस नीचे बुलाने के लिए बहुत ही मशक्कत करनी पड़ी. किसी तरह इस सिरफिरे को समझा बुझाकर वापस बुलाया गया. इसके बाद शिकागो पुलिस ने सिरफिरे को गिरफ्तार कर लिया गया. सिरफिरा शख्स वापस बुलाए जाने के बाद भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बात करने की मांग करता रहा.

अमेरिका में तीन नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं. डोनाल्ड ट्रंप आजकल चुनाव प्रचार प्रसार में व्यस्त हैं. उनका मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन से है.

कल ट्रंप ने दो अहम राज्यों में चुनावी रैलियां कीं
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कल दो मध्यपश्चिमी राज्यों मिशिगन और विस्कोन्सिन में अपनी चुनावी रैलियां की. यहां उन्होंने वाम दल पर ‘जीने के अमेरिकी तरीके को तबाह करने का आरोप लगाया.’ चुनाव के लिहाज से ट्रंप के लिए दोनों ही राज्य अहम हैं क्योंकि 2016 में हुए राष्ट्रपति चुनावों में इन दो राज्यों ने ट्रंप की जीत में अहम भूमिका निभाई थी.

एक के बाद की गई रैलियों में ट्रंप ने वाम दल पर ‘अमेरिका के इतिहास को मिटा देने’ और ‘अमेरिकी मूल्यों को त्यागने’ का प्रयास करने का आरोप लगाया. ट्रंप ने दावा किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन लोगों को खतरे में डालेंगे.

अपने आधार को बनाए रखने और मतदाताओं को अपने पक्ष में मतदान करने के लिए ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं को ‘अमेरिका विरोधी चरमपंथी’ करार दिया और कहा कि उदारवादियों का यह ‘नैतिक कर्तव्य’ है कि वे रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हों. उन्होंने कहा, ‘आप जानते हैं कि डेमोक्रेटिक पार्टी एक वक्त अस्तित्व में ही नहीं थी.’