सड़क दुर्घटना में कांग्रेसी नेता बालेंद्र शुक्ला और भगवान सिंह यादव घायल

ग्वालियर। डबरा में पूर्व सीएम कमलनाथ की सभा में शामिल होने जा रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालेंद्र शुक्ला और भगवान सिंह यादव सड़क दुर्घटना में घायल हो गए। बताया गया है कि शमशाद टेकरी के पास उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त होकर डिवाइडर पर चढ़ गई जिसमें नेतागण घायल हो गए घायलों में राम सिंह चौहान भी शामिल है आनन-फानन में सभी घायलों को दूसरे वाहनों से इलाज के लिए अस्पताल रवाना किया गया हालांकि घायलों को प्राथमिकी उपचार मौके पर ही दे दिया गया और घायलों में कोई गंभीर नहीं है।

इमरान खान का जोरदार हमला, बोले- जिया उल हक के जूते पॉलिश कर राजनीति में आए थे नवाज शरीफ

पाकिस्तान के सेना प्रमुख बाजवा पर चुनाव में धांधली करने और इस्लामाबाद में कठपुतली सरकार स्थापित करने के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बयान पर शनिवार को प्रधानमंत्री इमरान खान ने पलटवार किया है। नवाज शरीफ की खिंचाई करते हुए इमरान ने कहा कि पीएमएल-एन सुप्रीमो 1980 में मॉर्शल लॉ के दौरान जनरल जिया उल हक के जूते पॉलिश करके राजनीति में आए थे। इसके अलावा उन्होंने नवाज पर और भी कई आपत्तिजनक टिप्पणियां की। उन्होंने कहा कि शरीफ उस सेना के खिलाफ बोल रहे है, जो सेना राष्ट्र के लिए अपना बलिदान दे रही है।

गौरतलब है कि तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे 70 वर्षीय नवाज शरीफ को 2017 में अदालत ने सत्ता से बेदखल कर दिया था। इसके बाद उन्होंने पहली बार सीधे तोर पर सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा और आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फ़ैज़ हमीद के साथ प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ बयान दिया है।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने देश की सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई पर उन्हें अपदस्थ करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इन दोनों ने इमरान खान को सत्ता में लाकर अपनी ‘कठपुतली’ सरकार बनवाई है। शरीफ लाहौर से लगभग 80 किमी दूर गुजरांवाला में 11 विपक्षी दलों के गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने शुक्रवार देर रात लंदन से वीडियो लिंक के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया। सैन्य नेतृत्व पर निशाना साधते हुए शरीफ ने कहा कि सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने मेरी सरकार को खत्म कर दिया। उन्होंने 2018 के चुनावों में धांधली की और नाकाबिल इमरान खान को देश पर थोप दिया। जनरल बाजवा प्रत्यक्ष अपराधी हैं और उन्हें इसके लिए जवाब देना होगा। उन्होंने उनकी सरकार गिराने के पीछे आईएसआई का हाथ होने का भी आरोप लगाया। शरीफ के अनुसार पूरा प्रकरण आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद की मदद से हुआ।

विपक्षी दलों ने 20 सितंबर को पीडीएम के गठन और तीन चरण में सरकार विरोधी अभियान चलाने की घोषणा की थी। इसके तहत इमरान खान सरकार को सत्ता से हटाने के लिए देशभर में जन सभाएं, प्रदर्शन और रैलियां शुरू हो चुकी हैं। जनवरी 2021 में इस्लामाबाद के लिए लंबा मार्च निकाला जाएगा।

NEET Topper Interview: परिवार में पहला डॉक्टर बनेगा शोएब, ऐसे मिले 720 में 720

नीट के पहले ही प्रयास में परफेक्ट 720 अंक हासिल करके राउरकेला ओडिशा के रहने वाले शोएब आफताब ने इतिहास रच दिया है. वो अपने परिवार में पहले डॉक्टर बन रहे हैं. उनके पिता शेख मोहम्मद अब्बास व्यवसायी और मां सुल्ताना रिजया गृहणी हैं. शोएब ने अपनी सफलता के पीछे अपनी मां की खास भूमिका बताई जो उनके लिए अपना शहर छोड़कर दूसरे शहर आईं. 

23 मई 2002 को जन्मे शोएब ने एलन करियर इंस्टीट्यूट, कोटा से कोचिंग की थी. उन्होंने नीट परीक्षा में 720 में से 720 अंक प्राप्त किए हैं. शोएब अपने परिवार में पहले शख्स हैं जो मेडिकल की पढ़ाई करेंगे और डॉक्टर बनेंगे. शोएब ने aajtak.in से बातचीत में बताया कि डॉक्टर बनना सपना था जो अब साकार होने जा रहा है. वो साल 2018 में कोटा आए थे. उन्होंने कहा कि मुझे बेस्ट कॉम्पीटिशन मिला और मैंने अपना बेस्ट देने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि मैं कोटा में अपनी मां और छोटी बहन के साथ पीजी में रहता था. 
शोएब ने इसी वर्ष 12वीं में 95.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं. उनकी केवीपीवाई में ऑल इंडिया 37वीं रैंक और 10वीं में 96.8 प्रतिशत अंक थे. उन्होंने कहा कि एलन के टीचर्स की गाइडेंस से ही मैंने यह सफलता प्राप्त की है. उन्हें इस दौरान लॉकडाउन का भी फायदा मिला. शोएब ने कहा कि इस दौरान मैं रुका नहीं, मैंने अपनी कमजोरियां दूर कीं, मैं नीट के सिलेबस में कमजोर टॉपिक्स को बार-बार रिवाइज करता गया. इससे डाउट्स भी सामने आते गए. जो टॉपिक्स मजबूत थे, उन पर ज्यादा फोकस नहीं किया.   

भाभी के भाई ने विवाहिता को फंसाया, 2 साल तक संबंध बनाए और फरार हो गया –

ग्वालियर। आर्मी में पदस्थ जवान की पत्नी से उसी के रिश्ते में लगने वाले भाई ने शादी का झांसा देकर दो साल से दुष्कर्म करता रहा। जब उसके पुत्री हुई तो वह दो माह पहले फरार हो गया। इंतजार करने पर नहीं आया और फोन पर बात हुई तो उसने कहा कि अब मैं शादी नहीं कर सकता हूं। पीडि़ता ने इस पूरी मामले की एफआईआर मुरार थाने में कराई है। 

पीडि़ता उम्र 35 साल ने बताया लगभग दो साल से वह और उसकी भाभी का भाई रिंकू कुशवाह बड़ी लालौर, किराए के मकान में एक साथ रह रहे थे। पति आर्मी में बाहर पदस्थ है। दोनों को एकांत मिला तो सामाजिक रिश्तो की मर्यादा है तोड़कर दोनों के बीच अवैध रिश्ता बन गया। शिकायतकर्ता महिला का कहना है कि भावनात्मक रूप से वह उसके कब्जे में आ गई थी। उसने शादी का वादा किया था। दोनों के बीच नियमित रूप से शारीरिक संबंध बने। इसके कारण एक लड़की का जन्म हुआ। 

लड़की होते ही रिंकू कुशवाह उसे छोड़कर चला गया। महिला ने बताया कि रिंकू कुशवाहा लगातार उस पर अपने पति से तलाक लेने का दबाव बनाता था। पति ने जो एटीएम कार्ड घर खर्चे के लिए दिया था, वह भी रिंकू कुशवाहा ने ले लिया था। लड़की का जन्म होने के बाद जब महिला ने उससे शादी के लिए दबाव बनाया तो उसने स्पष्ट रूप से मना कर दिया। इसके बाद महिला ने पुलिस थाने आकर रिंकू कुशवाहा के खिलाफ मामला दर्ज कराया।

बलिया हत्याकांड के मुख्य आरोपी का बचाव करने वाले विधायक को मुख्यमंत्री ने तलब किया, नोटिस जारी

बलिया हत्याकांड का मुख्य आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह रविवार को लखनऊ में गिरफ्तार कर लिया गया है। एसटीएफ ने जनेश्वर मिश्र पार्क के पास से गिरफ्तार किया है।

इस बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हत्यारोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह का बचाव करने वाले विधायक सुरेंद्र सिंह को लखनऊ तलब किया है। वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्री देव सिंह ने विधायक के खिलाफ नोटिस जारी किया है। बता दें कि विधायक लगातार हत्यारोपी का बचाव कर रहे थे और मीडिया को दिए गए बयान में कहा कि अगर पिछली सरकार यादवों को बचाती थी तो हम अपनी जाति के लोगों के समर्थन में क्यों न खड़े हों?

दरअसल, बलिया जिले के रेवती थाना क्षेत्र के दुर्जनपुर गांव के पंचायत भवन में गुरुवार को कोटे की दुकान के चयन के लिए खुली बैठक हो रही थी। इसमें एसडीएम, सीओ, एसओ व अन्य पुलिसकर्मी भी शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ता धीरेंद्र प्रताप सिंह ने एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी। इस दौरान ईंट-पत्थर और लाठी-डंडे भी चले। इसमें छह लोग घायल हो गए।

कांग्रेस के लिए वोट मांगेंगे कंप्यूटर बाबा, स्टार प्रचारकों की सूची में पार्टी ने बताया सोशल वर्कर

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश विधानसभा की 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव (MP Assembly By Election 2020) के लिए कांग्रेस ने शनिवार को अपने स्टार प्रचारकों की सूची (Congress Star Campaigners List) जारी कर दी है. इस सूची में राहुल गांधी-प्रियंका गांधी समेत अन्य कांग्रेस नेताओं के अलावा एक खास व्यक्ति का नाम भी शामिल है. पार्टी ने नामदेव दास त्यागी (Namdev Das Tyagi) उर्फ कंप्यूटर बाबा (Computer Baba) को भी अपना स्टार प्रचारक बनाया है.

कांग्रेस ने अपनी सूची में नामदेव दास त्यागी को सोशल वर्कर बताया है. इस लिस्ट में पच्चीसवें नंबर पर उनका नाम है. खास बात है कि वो स्टार प्रचारकों की इस सूची में अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जिनके नाम के आगे सोशल वर्कर लिखा हुआ है.

मध्य प्रदेश उपचुनाव में कांग्रेस के यह नेता होंगे स्टार प्रचारक

राहुल गांधी

प्रियंका गांधी

मुकुल वासनिक

कमलनाथ

अशोक गहलोत

भूपेश बघेल

दिग्विजय सिंह

नवजोत सिंह सिद्धू

सचिन पायलट

अशोक चव्हाण

रणदीप सुरजेवाला

कांतिलाल भूरिया

सुरेश पचौरी

अरुण यादव

विवेक तंखा

राजमणि पटेल

अजय सिंह

आरिफ अकील

सज्जन सिंह वर्मा

जीतू पटवारी

जयवर्धन सिंह

प्रदीप जैन

लाखन सिंह यादव

गोविंद सिंह

नामदेव दास त्यागी

आचार्य प्रमोद कृष्णा

साधना भारती

आरिफ मसूद

सिद्धार्थ कुशवाहा

कमलेश्वर पटेल

कौन हैं नामदेव दास त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा?

कंप्यूटर बाबा का असली नाम स्वामी नामदेव दास त्यागी है. उनका संबंध दिगंबर अखाड़ा से है और वो इंदौर के रहने वाले हैं. उन्हें यह अनोखा नाम कंप्यूटर बाबा वर्ष 1998 में नरसिंहपुर के संत द्वारा दिया गया. उन्हें कंप्यूटर बाबा इसलिए कहा जाता है क्योंकि दावा है कि उनका दिमाग कंप्यूटर की ही भांति है और उनकी याददाश्त काफी तेज है. वो अपने पास हमेशा लैपटॉप और इंटरनेट कनेक्शन के लिए वाई-फाई डोंगल रखते हैं. साथ ही बाबा को हाईटेक स्मार्टफोन और आधुनिक गैजेट्स रखने का भी शौक है.

अप्रैल 2018 में तत्कालीन शिवराज सिंह सरकार द्वारा उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया था जिसको लेकर कांग्रेस ने काफी विरोध जताया था. हालांकि बाद में कंप्यूटर बाबा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से नाराज हो गए और कांग्रेस के समर्थक बन गए थे.

चीन ने भारतीय सीमा के पास दागीं मिसाइलें, रॉकेट की बारिश से थर्राए पहाड़

पेइचिंग
पूर्वी लद्दाख में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा के पास जारी सीमा व‍िवाद चीन के साथ कई दौर की बातचीत के बाद भी खत्‍म होने का नाम ले रहा है। इस बीच चीनी सेना PLA ने मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए भारतीय सीमा से सटकर जोरदार युद्धाभ्‍यास किया है। चीन के सरकारी भोंपू ग्‍लोबल टाइम्‍स का दावा है कि लाइव फायर एक्‍सरसाइज में 90 फीसदी नए हथियारों का इस्‍तेमाल किया गया।

ग्‍लोबल टाइम्‍स ने कहा कि यह अभ्‍यास 4700 मीटर की ऊंचाई पर पीएलए के तिब्‍बत थिएटर कमांड की ओर से किया गया। ग्‍लोबल टाइम्‍स ने इस अभ्‍यास का एक वीडियो भी जारी किया है। इस विडियो में नजर आ रहा है कि चीनी सेना अंधेरे में हमला बोलती है और ड्रोन विमानों की मदद से हमला बोलती है। विडियो में नजर आ रहे हैं कि चीनी सेना की रॉकेट फोर्स एक साथ जोरदार हमले करके एक पूरे पहाड़ी इलाके को तबाह कर देती है।

कंधे पर रखकर दागे जाने वाली मिसाइलों का भी प्रदर्शन
यही नहीं चीनी सेना ने गाइडे‍ड मिसाइल के हमले का भी अभ्‍यास किया। अभ्‍यास के दौरान चीनी सेना की तोपों ने भी जमकर बम बरसाए। पीएलए के सैनिकों ने कंधे पर रखकर दागे जाने वाली मिसाइलों का भी प्रदर्शन किया। ग्‍लोबल टाइम्‍स ने दावा किया कि इस अभ्‍यास में शामिल 90 फीसदी हथियार और उपकरण एकदम नए हैं। माना जा रहा है कि चीनी अखबार ने भारत-चीन वार्ता के दौरान दबाव बनाने के लिए यह वीडियो जारी किया है।

बता दें कि भारत और चीन के बीच कई दौर की वार्ता के बाद भी अभी तक लद्दाख गतिरोध का कोई हल नहीं निकला है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि सीमा पर बड़ी संख्या में चीनी सैनिकों की तैनाती पूर्व में हुए करारों का उलट है। ऐसे में जब दो देशों के सैनिक तनाव वाले इलाकों में मौजूद रहते हैं तो वही होता है जो 15 जून को हुआ। जयशंकर ने कहा, यह बर्ताव न सिर्फ बातचीत को प्रभावित करता है बल्कि 30 वर्ष के संबंधों को भी खराब करता है।

चीन पर बरसे भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर
जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के रिश्तों के मूल में सीमा पर शांति और स्थिरता कायम रखना था, लेकिन फिलहाल सीमा पर जो तनाव है उसका असर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ना तय है। इससे पहले विदेश मंत्री ने शुक्रवार को एशिया सोसायटी के एक वर्चुअल कार्यक्रम में कहा, ‘1993 से अब तक दोनों देशों के बीच कई करार हुए जिन्होंने शांति और स्थिरता कायम करने का ढांचा तैयार किया। इन करारों में सीमा प्रबंधन से सैनिकों के बर्ताव तक सब बातों को शामिल किया गया, लेकिन जो इस साल हुआ उसने सभी करारों को खोखला साबित कर दिया।’

ATM ट्रांजेक्शन के दौरान निकला नकली नोट? जानें क्या है रिफंड पाने का तरीका 

आरबीआई के नियमों के मुताबिक नकली नोट एटीएम से निकलने पर बैंकों को एक्शन मोड में काम कर जल्द से जल्द ग्राहकों को रिफंड करना होगा। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो बैंकों को इसके लिए कार्रवाई झेलनी पड़ेगी।

दिल्ली

एटीएम ट्रांजेक्शन के दौरान कभी-कभी ऐसा होता है कि मशीन से नकली नोट निकल जाते हैं। नकली नोट निकल जाने के बाद ग्राहकों को समझ नहीं आता कि वे क्या करें और क्या नहीं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने ग्राहकों को एटीएम से नकली नोट निकलने पर पूरा रिफंड देने की व्यवस्था की हुई है। आरबीआई ने इस संबंध में कड़े नियम बैंकों के लिए बनाए हैं।

आरबीआई के नियमों के मुताबिक नकली नोट एटीएम से निकलने पर बैंकों को एक्शन मोड में काम कर जल्द से जल्द ग्राहकों को रिफंड करना होगा। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो बैंकों को इसके लिए कार्रवाई झेलनी पड़ेगी। आरबीआई के मुताबिक ये बैंक की जिम्‍मेदारी है कि वह ब्रांच और फिर एटीएम में पहुंचाएं जाने वाले नोटों की जांच करे और नकली नोटों को सिस्‍टम में शामिल करने से बचें। यही वजह है कि एटीएम और काउंटर पर इश्‍यू करने से पहले नोटों की जांच की जाती है।

हालांकि अक्सर ऐसा होता है कि ढेर सारे नोट होने की वजह से कुछ नकली नोट भी असली नोट के साथ मिक्स हो जाते हैं। ऐसे में बैंक इन नोटों की पहचान नहीं कर पाता और यह एटीएम तक पहुंच जाते हैं। और जब ग्राहक निकासी करते हैं तो यह नोट उनके पास चले जाते हैं। ऐसी परिस्थिति में रिफंड पाने का तरीका यह है कि आप नोटों के मशीन से निकल जाने के बाद नकली नोट को वहां लगे सीसीटीवी के सामने दिखाएं। आप नोट की फ्रंट और पीछे की साइड दोनों को ही कैमरे के पास ले जाकर दिखाएं।

इसके बाद एटीएम के सिक्योरिटी गार्ड को इसकी जानकारी दें। ऐसा करने से आपके पास दो प्रूफ हो जाएंगे और आपको बैंक के सामने यह साबित करने में आसानी होगी कि एटीएम से ही नकली नोट निकला है। इसके बाद नकली नोट लेकर बैंक के समक्ष पेश करना होगा। बैंक आगे की प्रक्रिया का पालन तय नियमों के मुताबिक करेगा और ग्राहक को उस नकली नोट के बदले असली नोट दे दिया जाएगा। बैंक में जाकर एटीएम मशीन से निकली रसीद दिखाएंगे तो क्लेम करने में और ज्यादा आसानी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167 (2) के तहत डिफ़ॉल्ट जमानत / वैधानिक जमानत देते समय, राशि जमा करने की शर्त नहीं लगाई जा सकती।

CrPC की धारा 167 (2), के तहत डिफ़ॉल्ट जमानत / वैधानिक जमानत पाने के लिए एकमात्र आवश्यकता ये है कि क्या आरोपी 60 या 90 दिनों से अधिक समय तक जेल में है, जैसा भी मामला हो, और 60 या 90 दिनों के भीतर, जैसा भी मामला हो, जांच पूरी नहीं हुई है और 60 वें या 90 वें दिन तक कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है और अभियुक्त डिफ़ॉल्ट जमानत के लिए आवेदन करता है और जमानत दाखिल के लिए तैयार है, ये कहते हुए पीठ, जिसमें जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह शामिल हैं, ने मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच द्वारा लगाई गई शर्त को रद्द कर दिया, जिसमें एक अभियुक्त को डिफ़ॉल्ट जमानत / वैधानिक जमानत पर रिहा करते समय 8 00,000 रुपये जमा करने की शर्त लगाई गई थी।

अदालत ने यह भी कहा कि धारा 437 CrPC के तहत नियमित जमानत आवेदन पर विचार करते समय परिस्थितियां डिफ़ॉल्ट जमानत / वैधानिक जमानत के लिए आवेदन पर विचार करते समय अलग-अलग होती हैं।

इस शर्त को लागू करने के खिलाफ अभियुक्तों द्वारा दायर अपील को अनुमति देते हुए, न्यायालय ने धारा 167 CrPC का उल्लेख करते हुए कहा कि, जहां जांच 60 दिनों या 90 दिनों के भीतर पूरी नहीं होती है, जैसा कि मामला हो सकता है, और कोई चार्जशीट 60 वें या 90 वें दिन दायर नहीं की जाती है, अभियुक्त को डिफ़ॉल्ट जमानत के लिए “अनिश्चितकालीन अधिकार” मिलता है, और अभियुक्त डिफ़ॉल्ट जमानत और जमानत के लिए आवेदन करने के बाद डिफ़ॉल्ट जमानत का हकदार बन जाता है।

अदालत ने कहा:

“धारा 167 (2), के तहत डिफ़ॉल्ट जमानत / वैधानिक जमानत पाने के लिए एकमात्र आवश्यकता ये है कि क्या आरोपी 60 या 90 दिनों से अधिक समय तक जेल में है, जैसा भी मामला हो, और 60 या 90 दिनों के भीतर, जैसा भी मामला हो, जांच पूरी नहीं हुई है और 60 वें या 90 वें दिन तक कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है और अभियुक्त डिफ़ॉल्ट जमानत के लिए आवेदन करता है और जमानत प्रस्तुत करने के लिए तैयार रहता है। कथित राशि जमा करने की कोई अन्य शर्त नहीं लगाई जा सकती है। डिफ़ॉल्ट जमानत / वैधानिक जमानत पर अभियुक्तों को रिहा करते समय ऐसी स्थिति का समाधान करना धारा 167 (2) के तहत डिफ़ॉल्ट जमानत के बहुत ही उद्देश्य को विफल करेगा, राकेश कुमार पॉल (सुप्रा) फैसले और इस मामले में CrPC को देखते हुए इस न्यायालय द्वारा दिए अन्य निर्णयों के मुताबिक अभियुक्त डिफ़ॉल्ट जमानत / वैधानिक जमानत का हकदार है, ये धारा 167 CrPC में होने वाली घटना के अधीन है, अर्थात, जांच 60 दिनों या 90 दिनों के भीतर पूरी नहीं होती है, जैसा कि मामला हो सकता है, और कोई 60 वें या 90 वें दिन तक चार्जशीट नहीं दायर की जाती है और आरोपी डिफ़ॉल्ट जमानत के लिए आवेदन करता है और जमानत प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। “

अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने ऐसी शर्त लगाई थी कि मजिस्ट्रेट के सामने और धारा 437 CrPC के तहत नियमित जमानत अर्जी पर विचार करते समय अभियुक्त की पत्नी ने 7,00,000 / – जमा करने का हलफनामा दायर किया। इसमें कहा गया है कि डिफॉल्ट जमानत/वैधानिक जमानत देते समय, इसमें शामिल राशि जमा करने के लिए शर्त नहीं लगाई जा सकती है।

न्यायालय ने यह भी देखा कि उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई एक अन्य शर्त, अर्थात, आरोपी को संबंधित पुलिस थाने के सामने प्रतिदिन 10:00 बजे रिपोर्ट करने के लिए निर्देश देना, जब तक कि आगे के आदेश हों, भी टिकने वाला नहीं है, क्योंकि यह बहुत कठोर है।

अदालत ने कहा,

“इसके बजाय, जो शर्त लगाई जा सकती है, वह अपीलकर्ता को निर्देश दे सकता है कि वह जांच को पूरा करने में जांच अधिकारी के साथ सहयोग करे और जांच/ पूछताछ के लिए संबंधित पुलिस थाने में मौजूद रहे, जब और जैसा कहा जाए करे और उल्लंघन पर जांच अधिकारी ऐसी स्थिति के उल्लंघन पर जमानत रद्द करने के लिए संबंधित अदालत से संपर्क कर सकता है।”

अदालत ने उपरोक्त शर्तों को रद्द करके अपील की अनुमति दी।

अपीलकर्ताओं के लिए अधिवक्ता बी रघुनाथ और श्रीराम पी उपस्थित हुए।

सरवनन बनाम राज्य [ आपराधिक अपील संख्या 681682/ 2020]

पीठ : जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह