88 बच्चों का पिता था भारत का ये फेमस राजा, विदेशों में भी थे इनकी ठाठ-बाट के चर्चे

दिल्ली: आजादी से पहले हमारा देश कई सारी छोटी छोटी रियासतों में बंटा हुआ था। पटियाला राजघराना भी इन्हीं में से एक था। आपको बता दें कि पटियाला राजघराना की गिनती धनी रियासतों में की जाती थी। यहां के महाराजा भूपिंदर सिंह देश के एक ऐसे व्यक्ति थे। जिनके पास उनका प्राइवेट जेट था महाराजा भूपिंदर सिंह की लाइफ स्टाइल देख कर अंग्रेज भी हमसे खौफ खाते थे। वह जब भी विदेश जाते थे तो पूरा का पूरा एक होटल ही किराए पर लिया करते थे। महाराजा भूपिंदर सिंह के पास 44 रोल्स रॉयल कार थी। जिसमें से 20 का काफिला रोजमर्रा में राज्य के दौरे के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

राजा भूपेंद्र सिंह पटियाला राजघराने ऐसे राजा थे।

जिनको लेकर कई सारे किस्से मशहूर हैं वह भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान भी थे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को खड़ा करने में इनके काफी पैसे खर्च भी हुए थे। इसके अलावा 40 के दशक में जब भी भारतीय टीम विदेश जाती थी तो अमूमन उनका खर्च यही उठाया करते थे।

दीवान जरमनी दास ने अपनी किताब महाराजा में महाराजा भूपेंद्र सिंह के बारे में कई सारी बातें बताई हैं। भूपेंद्र सिंह की 10 पत्नियां थी और 88 संताने थी महाराजा के शानोशौकत के चर्चे दुनियां भर में फेमस थे साल 1935 में बर्लिन के दौरे पर उनकी मुलाकात हिटलर से हुई थी कहा जाता है कि महाराजा भूपेंद्र सिंह से हिटलर इतने प्रभावित हो गए थे कि अपनी एक बार राजा को तोहफे में दे दी थी। हिटलर और महाराजा के बीच दोस्ती काफी लंबे समय तक रही थी।

महाराजा भूपिंदर सिंह के ठाठ एक से बढ़कर एक थे जिसका उदाहरण यह है कि साल 1929 में महाराजा ने कीमती नग हीरो और आभूषणों से भरा संदूक पेरिस के एक जोड़ी को भेजा था लगभग 3 साल की कारीगरी के बाद जौहरी ने एक ऐसा हार तैयार किया था जो काफी ज्यादा सुर्खियों में रहा था।

कांग्रेस में शामिल हुईं शरद यादव की बेटी सुभाषिनी राज राव, लड़ सकती हैं बिहार विधानसभा चुनाव

पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोकतांत्रिक जनता दल के प्रमुख शरद यादव की बेटी सुभाषिनी राज राव और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के महासचिव काली प्रसाद पांडे बुधवार को कांग्रेस में शामिल हो गए। पांडे पहले ही बिहार के कुचायकोट निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल कर चुके हैं, जबकि सुभाषिनी राव को राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी द्वारा मैदान में उतारने की उम्मीद है।

बिहार कांग्रेस के प्रमुख मदन मोहन झा ने दोनों का स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी में दोनों के शामिल होने की वजह से महागठबंधन राज्य में और मजबूत होगा। दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए, सुभाषिनी राव ने कहा कि उनके पिता अपनी बीमारी के कारण बिहार में चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं ले पाए हैं।

वहीं, टिकट बंटवारे में अनियमितताओं की रिपोर्ट के बीच, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) शेष 49 सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने के लिए बैठक करेगी। कांग्रेस ने 28 अक्टूबर को पहले चरण के चुनाव के लिए 21 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। चुनाव के दूसरे और तीसरे चरण क्रमश: 3 और 7 नवंबर को होंगे। नतीजे 10 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) 144 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि कांग्रेस 70 सीटों पर। इसके अलावा, वाम दल 29 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पहले चरण के लिए 23 या 24 अक्टूबर को एक वर्चुअल रैली को संबोधित करेंगे।

मालूम हो कि शरद यादव अपनी पार्टी गठित करने से पहले जेडीयू में थे और उन्होंने पार्टी का अध्यक्ष रहने के साथ कई वर्षों तक राजग के संयोजक की भूमिका भी निभाई। वर्ष 2017 में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण शरद यादव को जेडीयू से निकाल दिया गया था। इसके बाद उन्होंने लोकतांत्रिक जनता दल का गठन किया। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में वह महागठबंधन का हिस्सा थे और इसी के बैनर तले मधेपुरा से चुनाव भी लड़ा था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

कानून की प्रतियां फाड़ीं, मीटिंग से वॉकआउट…कृषि एक्ट पर नहीं कम हुई तकरार, किसान संगठनों और सरकार के बीच वार्ता बेकार

कृषि कानूनों को लेकर सड़कों पर उतरे किसानों की नाराजगी आज भी खत्म नहीं हो पाई। कृषि कानूनों को लेकर जारी तकरार के बीच आज यानी बुधवार को 29 किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच बातचीत विफल रही। किसान संगठनों का आरोप है कि उनसे बातचीत करने के लिए सरकार की ओर से कोई भी मंत्री नहीं आया, जिसकी वजह से उन्होंने बैठक से वॉकआउट किया है। बता दें कि पंजाब में आंदोलनरत 29 किसान संगठन नई दिल्ली में कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार के साथ बुधवार को बातचीत करने के लिए पहुंचे थे। 

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, 29 किसान यूनियनों के नेता हाल ही में लागू कृषि कानूनों पर चर्चा करने के लिए कृषि सचिव के साथ बैठक से वॉकआउट कर गए। इतना ही नहीं, इन किसान संगठनों ने कृषि भवन के बाहर कृषि कानूनों की प्रतियां भी फाड़ीं। किसान संगठनों की मांग है कि कृषि से जुड़े ये कानून वापस ले लिए जाएं। 

किसान के एक यूनियन नेता ने कहा कि हम किसान कानूनों पर चर्चा से संतुष्ट नहीं थे, इसलिए हम बाहर आ गए। हम चाहते हैं कि इन काले कानूनों को खत्म कर दिया जाए। सचिव ने कहा कि वह हमारी मांगों को आगे बढ़ाएंगे।

वहीं, अन्य किसान नेता ने कहा कि मीटिंग के लिए कोई भी मंत्री नहीं आया, इसलिए हमने बैठक का बहिष्कार किया। हम चाहते हैं कि इस कानून को वापस लिया जाए। बता दें कि केंद्र के साथ बातचीत के लिए सात सदस्यीय समिति बनाई गई है। इस समिति में बलबीर सिंह राजेवाल, दर्शनपाल, जगजीत सिंह डालेवाल, जगमोहन सिंह, कुलवंत सिंह, सुरजीत सिंह और सतमान सिंह साहनी शामिल किये गए हैं।

इससे पहले राजेवाल ने कहा था कि केंद्रीय कृषि विभाग के सचिव के निमंत्रण के अनुसार केंद्र उनसे बातचीत करना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘हम जा रहे हैं, क्योंकि हम निमंत्रण को ठुकराते रहे तो वे कहेंगे कि हम किसी वार्ता के लिए तैयार नहीं हैं। हम उन्हें कोई बहाना नहीं देना चाहते। हम वहां जायेंगे।’ 

सोमवार को किसान मजदूर संघर्ष समिति ने केंद्रीय कृषि विभाग द्वारा 14 अक्टूबर को बुलाई गयी बैठक में नहीं जाने का निर्णय लिया था। किसान संगठनों ने पिछले सप्ताह भी आठ अक्टूबर को उनकी चिंताओं के समाधान के लिए बुलाये गये सम्मेलन में हिस्सा लेने के केंद्र के न्यौते को ठुकरा दिया था। इन संगठनों के आंदोलन से राज्य में रेल यातायात बाधित हुआ और ताप विद्युत संयंत्रों की कोयला आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई।

पानी की गहराई से भी डर रहा है चीन, जानिए ड्रैगन के खौफ की इनसाइड स्टोरी

चीन अपने टोही विमान और तकनीक के सहारे एलएसी के करीब पैंगोंग त्सो लेक के नीचे पानी के अंदर झांकने की कोशिश में लगा है. सैटेलाइन तस्वीरों से साफ हुआ है कि चीन के सैन्य हवाई अड्डों में ऐसे कई विमान खड़े हैं, जो पानी के अंदर की हलचल का पता लगा सकते हैं. लेकिन सवाल ये है कि आख़िर चीन ऐसा कर क्यों रहा है? जानकारों की मानें तो असल में वो डरा हुआ है. उसे लग रहा है कि कहीं भारत पानी के रास्ते ही उस पर हमला ना कर दे.

सबसे पहले ये समझते हैं कि आखिर झील में भारत को कैसे झांसा देने की कोशिश कर रहा है चीन. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि चीन अब दुनिया भर की नौसेनाओं की पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए इस्तेमाल की जाने वाली नई तकनीक के सहारे पैंगोंग त्सो झील के अंदर, उसकी गहराई में भी नजर रख रहा है. लेकिन ये निगरानी क्यों. आखिर क्यों चीन को हर आहट पर डर लग रहा है. 

एलएसी पर टसल की शुरुआत बाद से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ग्राउंड फोर्स यानी PLAGF स्वीडिश CB-90 की तरह कॉपी किए गए हाई स्पीड गश्ती क्राफ्ट और टाइप 928D नावों के जरिए पैंगोंग त्सो झील पर निगरानी रखे हुए है. लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि चीन अब दुनिया भर की नौसेनाओं द्वारा पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए इस्तेमाल की जाने वाली नई तकनीक के सहारे पैंगोंग त्सो झील के अंदर उसकी गहराई में भी नजर रख रहा है.

31 जुलाई को फिंगर 4 और फिंगर 8 के बीच कम से कम 13 नावों के मौजूद होने की जानकारी मिली थी. नाव स्क्वाड्रन में रिमुतांग के एक प्रमुख बेस से कुनक फोर्ट और फिंगर 5 तक आठ नई और नावों को तैनात किया गया. जो कि फिंगर 4 से मुश्किल से 2.5 किलोमीटर दूर है.

वहीं अब गहराई वाले इलाकों की नई सैटेलाइट तस्वीरें में खास तौर से चीनी सैन्य हवाई अड्डे पर कुछ बदलाव देखे गए हैं, जो अब से पहले नहीं दिखे. पीएलए वायु सेना ने पैंगोंग त्सो झील में पानी के नीचे की गतिविधियों की बारीकी से निगरानी शुरू कर दी है. PLAAF झील की टोह के लिए विशेष विमान इस्तेमाल कर रही है. जिसके पिछले छोर एक मैग्नेटिक एनोमली डिटेक्टर (MAD) लगा हुआ है.

ख़बर है कि चीन पनडुब्बियों का पता लगाने वाली तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है. इन विशेष विमान, जैसे कि Y-8 GX6 या शांक्सी Y-8 ट्रांसपोर्टर के गाओक्सिन-6 या हाई न्यू 6 वैरिएंट का इस्तेमाल पीएलए नौसेना विरोधी सतह के साथ-साथ पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए करती है.

जहाज पर लगा ये डिटेक्टर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में किसी भी तरह के बदलाव को एक मिनट में पता लगा सकता है. जिसका इस्तेमाल पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए किया जाता है. साथ ही जमीन के नीचे छिपे खनिज और दुर्लभ मिट्टी का पता लगाने के लिए भी उपयोग किया जाता है. इन विमानों को होटन, कोरला और वुदुन में सैटेलाइट इमेज पर देखा गया है.

वुडुन हवाई अड्डे की लेटेस्ट सैटेलाइट इमेज से संकेत मिलता है कि 24 अगस्त को Y-8 GX6 को वहां पार्क किया गया था. इस विमान में पिछले दूसरों की तुलना में छोटा MAD बूम है. विमान पीले प्राइमर में है, ऐसा लगता है कि विमान की अभी टेस्टिंग चल रही है. ऐसे नए और छोटे एमएडी बूम के साथ कम से कम चार विमान हैं, जो जियान-यानलियांग एयरबेस में हैं, जहां उनका निर्माण होता है.

मगर वहीं दूसरी तरफ भारतीय जवान भी पूरी तरह से मुस्तैद हैं. इंडियन आर्मी की इसी मुस्तैदी की वजह से एलएसी पर चीनी सैनिकों के होश गुम हैं. एलएसी के पास अब हालात ये है कि चीनी सैनिक फिंगर 4 की रिजलाइन पर हैं लेकिन उनकी हर गतिविधि पर भारतीय फौज की नज़र है क्योंकि पैंगोंग सो लेकर के दोनों किनारे सामरिक महत्व की सभी अहम चोटियों पर भारतीय सेना का नियंत्रण है. यही वजह है कि चीन अब घुसपैठ की कोई नई साजिश नहीं रच पाया. वरना मई महीने से वो जिस तरह एलएसी पर हरकतें कर रहा है, वो नाकाबिले बर्दाश्त है.

एलएसी पर यथास्थिति बहाल करने के लिए हालांकि लगातार बातचीत चल रही है लेकिन लगता है कि चीन ये मसला बातचीत से हल करने के मूड में नहीं है. और वो भारत के सामने ऊटपटांग शर्तें रख रहा है. बहानेबाजी कर रहा है. कुल मिलाकर चीन तनाव कम करने में कोई सहयोग नहीं कर रहा. 

भतीजे के प्रति चाचा के दिल में अभी भी है ‘साफ्ट कार्नर’, शिवपाल बोले- राज्यसभा चुनाव में अखिलेश कहेंगे तो देंगे साथ

प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के दिल में आज भी भतीजे सपा अध्यक्ष  अखिलेश यादव के प्रति साफ्ट कार्नर है। बुधवार को उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में अखिलेश यादव कहेंगे तो वे स्वयं और उनके समर्थक विधायक सपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे।

प्रदेश में हो रहे विधान सभा उपचुनाव में भी वे कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं कर रहे हैं। ताकि 2022 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी पूरी ताकत से चुनाव लड़ सके। शिवपाल ने कहा कि वे सेक्यूलर दलों को एकजुट देखना चाहते हैं, ताकि भारतीय जनता पार्टी के जंगलराज को समाप्त किया जा सके।

बताया कि पिछले राज्यसभा चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी को वोट दिया था। अब पार्टी प्रत्याशी की जीत के लिए अखिलेश बात करेंगे तभी हम कुछ निर्णय लेंगे। कहा कि हम संघर्ष से नहीं घबराते।

नौजवानों, किसानों की बदहाल स्थित के लिए हम कोई भी संघर्ष और कुर्बानी के लिए तैयार हैं। अब हमारा एक मात्र लक्ष्य 2022 के चुनाव है। सत्ता पलटे बगैर इस प्रदेश को प्रगति के रास्ते पर नहीं लौटाया जा सकता।

प्रसपा अध्यक्ष बुधवार सुबह यहां खटखटा बाबा की कुटिया पर गणेश युवा शोभायात्रा समिति की भगवान गणेश शोभायात्रा रद्द हो जाने के कारण आयोजित एक दिवसीय विशेष गणेश स्थापना एवं हवन पूजन कार्यक्रम का शुभारंभ करने आए थे।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता कर्ण सिंह ने अनुच्छेद-370 पर फारूक के बयान की निंदा की, कहा- यह अस्वीकार्य

नई दिल्‍ली, । वरिष्ठ कांग्रेस नेता कर्ण सिंह (Karan Singh) ने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में चीन की मदद से अनुच्छेद-370 को बहाल किए जाने संबंधी पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) के कथित बयान की कड़ी निंदा की। जम्मू-कश्मीर के पूर्व सद्र-ए-रियासत सिंह ने फारूक अब्दुल्ला के उक्‍त बयान को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। उन्‍होंने बुधवार को कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से केंद्रशासित प्रदेश की जनता में वास्तविकता से दूर उम्मीदें पैदा होंगी जो देश के हित में नहीं है।

कर्ण सिंह (Karan Singh) ने एक बयान में कहा कि मेरे पुराने मित्र फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने यह हैरान करने वाला बयान दिया है कि चीन की मदद से अनुच्छेद-370 की बहाली होगी। मैं उनके एक साल तक हिरासत में रहने और हाल के कई घटनाओं से उनके गुस्से और हताशा को समझ सकता हूं लेकिन नेशनल कांफ्रेंस (National Conference) के नेता के इस बयान को किसी भी रूप में स्‍वीकार नहीं किया जा सकता है। यह बयान तो पूरी तरह अस्वीकार्य है। वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि फारूक का बयान से जम्मू-कश्मीर के लोगों में वास्तविकता से दूर उम्मीदें पैदा करने को उकसाएगा।

हालाकि कर्ण सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की रिहाई का स्वागत करते हुए कहा कि इससे जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी। बता दें कि फारूक के विवादित बयान को लेकर भाजपा हमलावर है। भाजपा ने पूर्व में इस बयान को लेकर कांग्रेस की चुप्‍पी पर भी सवाल उठाए थे। भाजपा प्रवक्‍ता संबित पात्रा ने कहा था कि ऐसा नहीं है कि केवल फारूक अब्दुल्ला ऐसा कहते हैं। यदि आप राहुल गांधी के हाल-फिलहाल के बयानों को सुनें तो पाएंगे कि ये दोनों ही नेता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

वहीं अब्दुल्ला ने अपने पूर्व के बयान पर रविवार को कहा था कि जहां तक चीन का सवाल है मैंने तो कभी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को यहां बुलाया नहीं। वहीं महबूबा मुफ्ती ने एकबार फिर जहर उगला है। उन्‍होंने ट्वीट कर कहा है कि पिछले साल पांच अगस्त को लिया गया केंद्र का फैसला दिनदहाड़े लूट थी। हम उसे वापस पाकर रहेंगे। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती से आज उनके पास पर नेशनल काफ्रेंस अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला व उमर अब्दुल्ला ने मुलाकात की। मुलाकात के बाद उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हम महबूबा जी से शिष्टाचार भेंट करने आए थे क्योंकि वह लंबे समय बाद रिहा हुई हैं। 

उपचुनाव: भाजपा ने जारी की स्टार प्रचारकों की सूची, शिवराज-सिंधिया शामिल, प्रज्ञा का नाम नहीं

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, कांग्रेस से भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और थावर चंद गहलोत, ये कुछ नाम हैं जिन्हें अगले महीने राज्य में होने वाले उपचुनाव के लिए भाजपा ने स्टार प्रचारक बनाया है। बता दें कि राज्य की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं।  

तीन नवंबर को होने वाले उपचुनाव के भाजपा ने बुधवार को अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी की। इस सूची में चौहान, सिंधिया, तोमर और गहलोत के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, प्रहलाद पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते और राज्य भाजपा इकाई के अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा का नाम भी शामिल है। 

इसके अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को भी इस सूची में जगह दी गई है। पार्टी की ओर से जारी सूची के अनुसार विनय सहस्त्रबुद्धे, मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव को भी भाजपा ने स्टार प्रचारक बनाया है। प्रज्ञा ठाकुर का नाम इसमें शामिल नहीं है, जो चर्चा का विषय बना हुआ है।

कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने भाजपा की स्टार प्रचारक सूची से भोपाल से सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर का नाम न होने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर को स्टार प्रचारक क्यों नहीं बनाया है जबकि 2018 में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रचार प्रभारी रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह जिम्मेदारी दी है। 

हालांकि, भाजपा ने कहा है कि जो स्टार प्रचारक बनाए गए हैं वह कांग्रेस को मात देने के लिए पर्याप्त हैं। भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने स्टार प्रचारकों की सूची में प्रज्ञा ठाकुर का नाम न होने पर कहा कि भाजपा के लिए यह मायने नहीं रखता है। हमारे सभी 30 स्टार प्रचारक अपने बूते पर कांग्रेस को हराने के लिए सक्षम हैं। 

मुलायम सिंह यादव कोरोना पॉजिटिव, गुड़गांव के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती किए गए

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव कोरोना वायरस संक्रमित पाए गए हैं। उन्हें इलाज के लिए गुड़गांव के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है। हालांकि उनमें कोविड-19 के एक भी लक्षण नहीं हैं। कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद डॉक्टर उनका देखभाल कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से बुधवार की देर शाम इस बात की जानकारी दी गई। बता दें कि मुलायम सिंह यादव की पत्नी भी कोरोना संक्रमित पाई गई हैं।

सपा ने बताया, ‘समाजवादी पार्टी संस्थापक आदरणीय नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव जी की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने के उपरांत चिकित्सकों की देख रेख जारी है। फिलहाल उनमें कोरोना के एक भी लक्षण नहीं हैं।’

मुलायम सिंह यादव के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी देते हुए उनके बेटे और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर बताया, ‘माननीय नेताजी का स्वास्थ्य स्थिर है। आज कोरोना पॉजिटिव होने पर गुड़गांव के मेदांता में उन्हें स्वास्थ्य-लाभ के लिए भर्ती कराया था। हम वरिष्ठ डॉक्टरों के निरंतर संपर्क में हैं और समय-समय पर सूचित करते रहेंगे।’

कुछ समय पहले भी सपा नेता की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें लखनऊ स्थिति मेदांता अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। अगस्त के शुरुआत में पेट में दर्द और पेशाब में संक्रमण की समस्या को लेकर वे अस्पताल में भर्ती हुए थे। उससे पहले कई दिनों तक उनका इलाज चला था और अस्पातल से डिस्चार्ज होने के कुछ समय बाद फिर उन्हें भर्ती करना पड़ा। अगस्त से पहले जब वे बीमार पड़े तो पेट में सूजन और दर्द था। जांच में पाया गया कि बड़ी आंत में समस्या है। कोलोनोस्कोपी करके साफ किया गया था। इसके बाद सेहत में सुधार होने पर डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।

भूलने की बीमारी हो सकती है हाइपरटेंशन की तरफ इशारा, हो जाएं सतर्क 

बाइक की चाबी इधर-उधर रखने की आदत से परेशान हैं? बाद में चाबी खोजते समय पूरा घर सिर पर उठा लेते हैं? अगर हां तो भूलने की इस बीमारी को हल्के में न लें। यह हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) की निशानी हो सकती है। अमेरिका स्थित मेयो क्लीनिक का हालिया अध्ययन तो कुछ यही बयां करता है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक रक्त धमनियों में फैट या कोलेस्ट्रॉल जमना उच्च रक्तचाप की बड़ी वजह है। इससे धमनियां सकरी हो जाती हैं और खून का बहाव धीमा पड़ जाता है। मुख्य शोधकर्ता चैनल जॉर्जीना ने बताया कि खून का बहाव धीमा पड़ने से मस्तिष्क में ऑक्सीजन की आपूर्ति घट जाती है।

यह स्थिति तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं पर भारी पड़ती है और वे दम तोड़ने लगती हैं। इससे न सिर्फ याददाश्त, बल्कि तर्क शक्ति और एक साथ कई काम निपटाने की क्षमता भी कमजोर पड़ जाती है।

जॉर्जीना ने भूलने की बीमारी पनपने पर रक्तचाप की नियमित निगरानी शुरू करने की सलाह दी। उन्होंने चेताया कि हाइपरटेंशन की शिकायत को हल्के में लेने के कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं। व्यक्ति न सिर्फ हार्ट अटैक और स्ट्रोक, बल्कि अल्जामइमर के चलते भी जीवन के कई बेशकीमती साल गंवा सकता है।