कानून की प्रतियां फाड़ीं, मीटिंग से वॉकआउट…कृषि एक्ट पर नहीं कम हुई तकरार, किसान संगठनों और सरकार के बीच वार्ता बेकार

कृषि कानूनों को लेकर सड़कों पर उतरे किसानों की नाराजगी आज भी खत्म नहीं हो पाई। कृषि कानूनों को लेकर जारी तकरार के बीच आज यानी बुधवार को 29 किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच बातचीत विफल रही। किसान संगठनों का आरोप है कि उनसे बातचीत करने के लिए सरकार की ओर से कोई भी मंत्री नहीं आया, जिसकी वजह से उन्होंने बैठक से वॉकआउट किया है। बता दें कि पंजाब में आंदोलनरत 29 किसान संगठन नई दिल्ली में कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार के साथ बुधवार को बातचीत करने के लिए पहुंचे थे। 

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, 29 किसान यूनियनों के नेता हाल ही में लागू कृषि कानूनों पर चर्चा करने के लिए कृषि सचिव के साथ बैठक से वॉकआउट कर गए। इतना ही नहीं, इन किसान संगठनों ने कृषि भवन के बाहर कृषि कानूनों की प्रतियां भी फाड़ीं। किसान संगठनों की मांग है कि कृषि से जुड़े ये कानून वापस ले लिए जाएं। 

किसान के एक यूनियन नेता ने कहा कि हम किसान कानूनों पर चर्चा से संतुष्ट नहीं थे, इसलिए हम बाहर आ गए। हम चाहते हैं कि इन काले कानूनों को खत्म कर दिया जाए। सचिव ने कहा कि वह हमारी मांगों को आगे बढ़ाएंगे।

वहीं, अन्य किसान नेता ने कहा कि मीटिंग के लिए कोई भी मंत्री नहीं आया, इसलिए हमने बैठक का बहिष्कार किया। हम चाहते हैं कि इस कानून को वापस लिया जाए। बता दें कि केंद्र के साथ बातचीत के लिए सात सदस्यीय समिति बनाई गई है। इस समिति में बलबीर सिंह राजेवाल, दर्शनपाल, जगजीत सिंह डालेवाल, जगमोहन सिंह, कुलवंत सिंह, सुरजीत सिंह और सतमान सिंह साहनी शामिल किये गए हैं।

इससे पहले राजेवाल ने कहा था कि केंद्रीय कृषि विभाग के सचिव के निमंत्रण के अनुसार केंद्र उनसे बातचीत करना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘हम जा रहे हैं, क्योंकि हम निमंत्रण को ठुकराते रहे तो वे कहेंगे कि हम किसी वार्ता के लिए तैयार नहीं हैं। हम उन्हें कोई बहाना नहीं देना चाहते। हम वहां जायेंगे।’ 

सोमवार को किसान मजदूर संघर्ष समिति ने केंद्रीय कृषि विभाग द्वारा 14 अक्टूबर को बुलाई गयी बैठक में नहीं जाने का निर्णय लिया था। किसान संगठनों ने पिछले सप्ताह भी आठ अक्टूबर को उनकी चिंताओं के समाधान के लिए बुलाये गये सम्मेलन में हिस्सा लेने के केंद्र के न्यौते को ठुकरा दिया था। इन संगठनों के आंदोलन से राज्य में रेल यातायात बाधित हुआ और ताप विद्युत संयंत्रों की कोयला आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई।

रिटायर्ड ऑफिसर पूरी करेंगे लद्दाख की सड़क परियोजनाएं, पहाड़ी क्षेत्रों में जोखिम भत्ते में 733% का इजाफा

चीन-बांग्लादेश सीमा से राष्ट्रीय राजमार्गों का संपर्क सुदृढ़ करने के लिए सरकार तीनों सेनाओं सहित केंद्र व राज्य सरकार के शीर्ष स्तर के सेवानिवृत्त अधिकारियों की सेवाएं लेने जा रही है। इसका मकसद लद्दाख, कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड व पूर्वोत्तर के राज्यों में सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण राजमार्ग परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में विषम परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने हाल में जोखिम भत्ते में 733 फीसदी का इजाफा किया है।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सर्वाजनिक उपक्रम राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने 05 अक्तूबर को ठेके पर भर्ती के लिए सेवानिवृत्त अधिकारियों से आवेदन मांगे हैं। इसकी अंतिम तारीख 02 नवंबर है। उपक्रम में तकनीकी अथवा परियोजना पद पर कार्यकारी निदेशक, महाप्रबंधक, उप महाप्रबंधक, प्रबंधक, महाप्रबंधक (भूमि अधिग्रहण), उप महाप्रबंधक (वित्त) पदों पर भर्ती की जाएगी।

एनएचआईडीसीएल के एक शीर्ष अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कार्यकारी निदेशक को सरकारी फार्मुले के हिसाब से लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये महीने वेतन व 40,000 रुपये जोखिम भत्ता (लद्दाख) दिया जाएगा।

महाप्रबंधक को एक लाख 81 हजार से दो लाख 25 हजार रुपये वेतन व 36,000 रुपये जोखिम भत्ता, उप महाप्रबंधक को एक लाख 20 हजार से एक लाख 75 हजार रुपये व 32,000 रुपये जोखिम भत्ता, प्रबंधक को एक लाख 10 हजार से डेढ लाख रुपये वेतन व 24,000 रुपये जोखिम भत्ता दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि आवेदन करने वालों की योग्यता सिविल इंजीनियर, मैकेनिकल इंजीनियर, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की डिग्री व निश्चित कार्यकाल का अनुभव होना चाहिए। शीर्ष अधिकारियों की उम्र 61 साल के ऊपर नहीं होनी चाहिए और उन्हें शुरू में दो साल के लिए ठेके पर रखा जाएगा। इसके पश्चात 65 साल उम्र तक उनको विस्तार मिल कसेगा।

हाईवे बनाने के लिए मैकेनिकल इंजीनियर, स्थायी भर्ती बंद
जानकारों का कहना है कि सीमा सड़क संपर्क जैसी अति महत्वपूर्ण परियोजनओं के लिए एनएचएआईडीसीएल में हाईवे इंजीनियरों की स्थायी भर्ती नहीं हो रही है। हाइवे निर्माण के लिए दक्ष हाईवे इंजीनियरों के बजाए उपक्रम में इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिविल इंजीनियरों को ठेके पर रखने का अदूरदर्शी फैसला किया जा रहा है। इनका सड़क निर्माण से कोई लेना-देना नहीं है। उपक्रम के स्थायी अधिकारी सड़क परियोजना को बेहतर तरीके से पूरा करने में सक्षम हैं और उनकी जवाबदेही तय होती है। जबकि ठेके पर रखे अधिकारियों पर यह बात लागू नहीं होती है। बताते हैं कि एनएचआईडीसीएल प्रशासन द्वारा आए दिन बड़े पैमाने पर तबादले करने से स्थायी अधिकारी उपक्रम को छोड़ रहे हैं। जिस कारण विभाग को ठेके पर भर्ती करनी पड़ रही है।

रिहाई के बाद महबूबा मुफ्ती का ऐलान- नहीं भूली हूं उस काले दिन के काले फैसले की बेइज्जती, जारी रहेगा संघर्ष

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को करीब 14 महीने बाद मंगलवार को रिहा कर दिया गया। मंगलवार की रात रिहाई के बाद महबूबा मुफ्ती ने अपना एक ऑडियो संदेश जारी किया और जम्मू-कश्मीर के लिए संघर्ष का ऐलान किया। पिछले साल पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने और धारा 35 ए को खत्म करने से ठीक पहले जन सुरक्षा कानून के तहत महबूबा मुफ्ती को नजरबंद किया गया था, मगर मंगलवार को करीब 14 महीने बाद रिहा कर दिया गया। इसके बाद महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उस काले दिन का काला फैसला उनके दिमाग में हर रोज खटकता रहा है और इसके लिए वह संघर्ष करेंगी।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रिहा होते ही ऐलान किया है कि अनुच्छेद-370 की बहाली के लिए वे फिर से संघर्ष शुरू करेंगी। अपने ट्विटर अकाउंट पर करीब 1 मिनट 23 सेकेंड के अपने ऑडियो संदेश में महबूबा ने कहा, ‘मैं आज एक साल से भी ज्यादा अर्से के बाद रिहा हुई हूं। इस दौरान 5 अगस्त 2019 के उस काले दिन का काला फैसला हर पल मेरे दिल और रूह पर हर पल वार करता रहा। मुझे एहसास है कि यही कैफियत जम्मू-कश्मीर के लोगों की रही होगी। हम में से कोई भी शख्स उस दिन की बेइज्जती को भूल नहीं सकता।’ 

ऑडियो में वह आगे कहती हैं, ‘दिल्ली दरबार ने गैर कानूनी, गैर लोकतांत्रिक और गैर कानूनी तरीके से हमसे छीन लिया, उसे वापस लेना होगा। बल्कि उसके साथ-साथ कश्मीर के मसले को हल करने के लिए जद्दोजहद जारी रखनी होगी, जिसके लिए हजारों लोगों ने अपनी जानें न्योछावर की। मैं मानती हूं कि यह रास्ता आसान नहीं है, मुझे यकीन है कि हौसले से यह दुश्वार रास्ता भी तय होगा। आज जब मुझे रिहा किया गया है, मैं चाहती हूं कि जम्मू-कश्मीर के जितने भी लोग देश की जेलों में बंद हैं, उन्हें जल्द से जल्द रिहा किया जाए।’

बता दें कि जम्मू कश्मीर की पहली महिला मुख्यमंत्री रहीं महबूबा को केंद्र द्वारा इस राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने एवं अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाये जाने के समय कई अन्य नेताओं के साथ हिरासत में ले लिया गया था। उन्हें सीआरपीसी की धारा 107 और 151 के तहत हिरासत में लिा गया था लेकिन बाद में उनके खिलाफ जन सुरक्षा अधिनयिम के तहत मामला दर्ज किया गया। 

महबूबा की बेटी इल्तिजा ने उन्हें हिरासत में रखे जाने को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी जिसकी पिछली सुनवाई 29 सितंबर को हुई थी। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं – फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला को सात माह की हिरासत के बाद मार्च में रिहा कर दिया गया था।

कांग्रेस से निष्कासित जिला प्रवक्ता ब्रज भूषण शर्मा की गुना में हत्या

गुना, अशोकनगर,  अशोकनगर जिले के कांग्रेस जिला प्रवक्ता पद से निष्कासित ब्रज भूषण शर्मा की गुना में कैंट क्षेत्र के दर्जी मोहल्ले में चाकू से गोदकर हत्या की घटना सामने आई है। उनका शव नग्न अवस्था में मिला। अवैध संबंध में हत्या किए जाने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस को इस मामले में उनकी महिला मित्र पर शक है। पुलिस के अनुसार महिला मित्र ने उन्हें अपने घर पर बुलाया था, जिसके बाद उनकी लाश मिली। आशंका है कि महिला ने ही किसी की मदद से उनकी हत्या करवाई है। अवैध संबंध के इस मामले में पुलिस जांच कर रही है। इस मामले में खुद एसपी जांच की निगरानी कर रहे हैं।

JEE Advanced : इस साल जो स्टूडेंट्स नहीं दे पाए थे जेईई एडवांस 2020, उन्हें अगले साल जेईई एडवांस्ड परीक्षा में बैठने का मौका

इस साल जिन स्टूडेंट्स ने जेईई एडवांस्ड परीक्षा 2020 (JEE advanced)के लिए सफलतापूर्वक रजिस्ट्रेशन कराया था और कोविड-19 महामारी के कारण परीक्षा नहीं दे पाए, उन्हें इंडियन इंस्टीट्यूट्स ऑफ  टेक्नोलॉजी 2021 (IIT) अब जेईई एडवांस्ड परीक्षा  2021 में बैठने का मौका देगा। आईआईटी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। 

एक आधिकारिक बयान में यह कहा गया है कि प्रभावित उम्मीदवारों की समस्या का समाधान करते हुए फैसला किया गया कि उन सभी उम्मीदवारों को जेईई (एडवांस्ड) 2021 में बैठने की इजाजत दी जाएगी जिन्होंने जेईई एडवांस्ट 2020 में सफलतापूर्व रजिस्टर्ड कराया था लेकिन वे परीक्षा में उपस्थित नहीं हो पाए।

यह फैसला तब आया है जब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी  (NTA) ने 13 सितंबर में अनुपस्थित स्टूडेंट्स के लिए दोबारा नीट परीक्षा देने के लिए सहमत हुई है। 14 अक्टूबर को नीट इन स्टूडेंट्स की परीक्षा ले रहा है, इसके बाद 16 अक्टूबर को NEET के नतीजे जारी किए जाएंगे। आपको बता दें कि जेईई एडवांस्ड में जेईई मेन क्वालीफाई करने के बाद ही योग्य होते है, लेकिन जेईई मुख्य परीक्षा में अनुपस्थित हुए स्टूडेंट्स के लिए ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है।

आपको बता दें कि इस साल ज्वाइंट एट्रेंस एग्जाम -एडवांस्ड  (JEE-Adv) परीक्षा 1.5 लाख स्टूडेंट्स शामिल हुए थे। जेईई एडवांस्ड 2020 परीक्षा के लिए योग्य छात्रों में से सिर्फ 64 फीसदी छात्रों ने ही रजिस्ट्रेशन करवाया था। जेईई मेन परीक्षा के टॉप 2.45 लाख अभ्यर्थी जेईई एडवांस्ड परीक्षा में बैठने के लिए योग्य होते हैं लेकिन इस बार सिर्फ 1.60 लाख छात्रों ने ही जेईई एडवांस्ड के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया था। 

आपको बता दें कि आईआईटी दिल्ली ने इस साल जईई परीक्षा आयोजित कराई थी और ज्वाइंट एडमिशन बोर्ड आईआईटी की तरफ से सभी नीति, नियमों और आईआईटी के सभी एडमिशन संबंधी मामलों में फैसला लेता है।

मौजूदा पात्रता मानदंड की यह छूट आयु बार के आनुपातिक छूट के अतिरिक्त होगी। इसके अलावा, यह निर्णय लिया गया कि इन उम्मीदवारों को जेईई (एडवांस्ड) 2021 में उपस्थित होने के लिए जेईई (मेन्स) 2021 से उत्तीर्ण होने वाले उम्मीदवारों की कुल संख्या के हिस्से के रूप में माना जाएगा।

GWALIOR HC: नरेंद्र तोमर, कमलनाथ, सहित आठ बड़े नेताओं के खिलाफ FIR के आदेश

ग्वालियर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ सहित 8 बड़े नेताओं के खिलाफ महामारी एक्ट और हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना का मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं। सभी नेताओं ने कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन उस समय भी किया जब हाईकोर्ट ने कड़े शब्दों में कार्यवाही की बात की थी। 

ग्वालियर हाईकोर्ट में आज सुनवाई के दौरान न्याय बनाई गई एडवोकेट राजू शर्मा, संजय द्विवेदी और वीडी शर्मा ने फोटो सहित अपनी रिपोर्ट पेश की। प्रशासन की तरफ से दलील दी गई कि लोग शिकायत नहीं कर रहे इसलिए हम कार्रवाई नहीं कर पा रहे। याचिकाकर्ता ने कोर्ट रूम में बताया कि वह 8 शिकायतें कर चुका है परंतु प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। 

सभी पक्षों के तर्क सुनने के बाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व विधायक मुन्ना लाल गोयल, कांग्रेस प्रत्याशी सुनील शर्मा, कांग्रेस प्रत्याशी सतीश सिकरवार, कांग्रेस प्रत्याशी फूल सिंह बरैया, कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रामनिवास रावत और भाजपा प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह तोमर के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले मामला दर्ज किया जाए उसके बाद विवेचना की जाए। यानी विवेचना के नाम पर FIR दर्ज करने में देरी नहीं की जा सकती।

मौसमी बीमारियों की दस्तक, स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की नई गाइडलाईन

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने माना कि पिछले सात दिनों में केवल दक्षिण पूर्व एशिया में कोरोना वायरस के मामलों में कमी आई है और इसकी वजह है कि भारत में कोरोना काबू में आया है.

नई दिल्ली: एक तरफ देश में कोरोना वायरस की बीमारी का खतरा थोड़ा कम होता नजर आ रहा है तो दूसरी तरफ डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, स्वाइन फ्लू और सर्दी खांसी वाले वायरल बुखार का मौसम आ चुका है. ऐसे में कोरोना और दूसरे बुखार के बीच फर्क कैसे किया जाए और इनका इलाज कैसे हो, उसके लिए केंद्र ने सभी राज्यों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं.  

बड़ी बात ये है कि सरकार ने ये माना है कि फ्लू और डेंगू जैसी बीमारियों के साथ अगर कोरोना वायरस होता है तो डॉक्टरों के लिए इलाज एक बड़ी चुनौती होगा. डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के टेस्ट के लिए ब्लड सैंपल लिया जाए. कोरोनावायरस और स्वाइन फ्लू के टेस्ट के लिए नाक या गले से सैंपल लिया जाए. 

कोरोना मरीजों की संख्या अब तेजी से घटी 
भारत में कोरोना के मरीजों की संख्या अब तेजी से घट रही है. जाहिर है कि ऐसे में सरकार ये बिल्कुल नहीं चाहेगी कि मौसमी बीमारियां कोरोना के सुधरते ग्राफ को बिगाड़ दें. पांच सप्ताह से भारत में कोरोना के आंकड़ों में सुधार है. केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 9 से 15 सितंबर वाले सप्ताह में औसतन 92830 प्रतिदिन थी. 16 से 22 सितंबर वाले सप्ताह में ये घटकर 90346 प्रतिदिन पर आ गई. 23 से 29 सितंबर वाले सप्ताह में ये औसत तेजी से घटा और 83232 प्रतिदिन पर आ गया. दोनों सप्ताहों में मरीजों के घटने का सिलसिला और तेज हुआ.

30 सितंबर से 6 अक्टूबर वाले सप्ताह में 77113 प्रतिदिन और 7 अक्टूबर से 13 अक्टूबर के बीच कोरोना मरीजों की संख्या औसतन 72576 प्रतिदिन पर आ गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने माना कि पिछले सात दिनों में केवल दक्षिण पूर्व एशिया में कोरोना वायरस के मामलों में कमी आई है और इसकी वजह है कि भारत में कोरोना काबू में आया है. 

मुख्यमंत्री शिवराज के वाहन के सामने खड़ी हो गई युवती तो सख्ते में आ गए सुरक्षाकर्मी, जानिए क्या थी वजह 

मुख्यमंत्री शिवराज के वाहन के सामने खड़ी हो गई युवती तो सख्ते में आ गए सुरक्षाकर्मी, जानिए क्या थी वजह

ग्वालियर। हवाई पट्रटी जा रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के वाहन के सामने एक जींस-सर्ट पहने युवती के सामने आते ही सुरक्षाकर्मी सख्ते में आ गए। समय गंवाए बिना सुरक्षा कर्मी वाहन को अपने घेरे में लेते हुए युवती को हटाने लगें। हांलाकि युवती को परेशान देख मुख्यमंत्री ने वाहन के पास बुलाया और उसकी समस्या को सुनने के साथ ही सरकार के द्वारा समस्या का निदान करने का भरोस भी दिए है।

बीमार मां के ईलाज को लेकर परेशान थी युवती

ग्वालियर में चेतकपुरी रोड स्थित बंधन गार्डन से विमानतल के लिए निकले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के काफिले को नीतू माहौर ने अचानक गाड़ी के सामने खड़े होकर रोक दिया। जिस पर पुलिस व भाजपा नेता युवती को गाड़ी के सामने से हटाने के लिए दौड़े। इसी बीच मुख्यमंत्री ने परेशान युवती को उसकी समस्या सुनने के लिए अपने पास बुला लिया। ‘

नीतू ने उन्हें बताया कि उसकी मां कैंसर से पीड़ित हैं। पिता का निधन हो चुका है। उसके पास मां का इलाज कराने के लिए पैसे नही हैं। मुख्यमंत्री ने युवती का आवेदन लेते हुए कहा कि सरकार उसकी मां का इलाज कराने में पूरी मदद करेगी।

आखिर क्या करती

अशोक कॉलोनी थाटीपुर निवासी नीतू पुत्री शिवलाल माहौर ने बताया कि उसने एमकॉम किया है। पिता के बाद वह नौकरी तलाश रही है। कैंसर पीड़ित मां के इलाज के लिए उसके पास पैसा नहीं है। अगर वह मुख्यमंत्री के काफिले को नहीं रोकती तो क्या करती।

बड़ी ज्योतिषीय घटनाः ग्रहों के राजकुमार बुध 14 अक्टूबर को तुला राशि में होंगे वक्री, जानें शुभ-अशुभ फल 

बुध देव 14 अक्टूबर को तुला राशि में वक्री चाल चलेंगे और फिर 3 नवंबर को मार्गी होंगे। ज्योतिष शास्त्र में किसी भी ग्रह का वक्री अवस्था में फल अच्छा नहीं माना जाता है।

बुध देव 14 अक्टूबर को तुला राशि में वक्री चाल चलेंगे और फिर 3 नवंबर को मार्गी होंगे। ज्योतिष में किसी भी ग्रह का वक्री अवस्था में फल अच्छा नहीं माना जाता है। नवग्रहों में राजकुमार यानि बुध को एक तटस्थ ग्रह माना जाता है परंतु विभिन्न ग्रहों से युति के कारण इसके फलों में भी परिवर्तन देखने को मिलते हैं। बुध ग्रह सौरमंडल के 9 ग्रहों में सबसे छोटा और सूर्य के करीब है। बुध ग्रह की गतिविधियां लोगों के जीवन में काफी मायने रखती है। कुंडली में बुध ग्रह की अच्छी स्थिति व्यक्ति को तार्किक क्षमता देती है, इसके प्रभाव से व्यक्ति गणितीय विषयों में अच्छा प्रदर्शन करता है। बुध के वक्री होने से व्यापार में उछाल आएगा और कीमतों में वृद्धि होगी।

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि इससे पहले बुध ने तुला राशि में 22 सितंबर को प्रवेश किया था, अब ये इसी राशि में ही वक्री होने जा रहे हैं। बुध 14 अक्तूबर की सुबह 6 बजकर 30 पर तुला राशि पर गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं, पुनः 3 नवंबर की रात्रि 11 बजकर 15 पर इसी राशि पर भ्रमण करते हुए मार्गी होंगे। बुध की इस उल्टी चाल का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा। ज्योतिष के अनुसार, कोई भी ग्रह अपनी उल्टी चाल में उतने अच्छे फल नहीं देता है जितने की वह सीधी चाल में देता है। किसी भी राशि में ग्रह का वक्री होने अच्छा नहीं माना जाता, हालांकि कुंडली में स्थिति के अनुसार यह लाभप्रद भी होता है। वक्री होने का मतलब है कि अब बुध तुला राशि में उल्टी चाल चलेंगे।  बुध के खराब परिणामों में  फैसला लेने की क्षमता न होना, सिर दर्द, त्वचा आदि के रोग हो सकते हैं। अगर आपकी कुंडली में बुध ग्रह अच्छा है तो आपको वाणी, शिक्षा, शिक्षण, गणित, तर्क में लाभ मिलता है। 

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि बुध ग्रह हमारी जन्म कुंडली में स्थित 12 भावों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डालता है। इन प्रभावों का असर हमारे प्रत्यक्ष जीवन पर पड़ता है। वहीं सप्ताह में इसका दिन बुधवार माना गया है साथ ही इस दिन के और इस ग्रह के कारक देव श्री गणेश जी माने जाते हैं। बुध ग्रह शुभ ग्रहों (गुरु शुक्र और बली चंद्रमा) के साथ होता है तो यह शुभ फल देता है और क्रूर ग्रहों (मंगल केतु शनि राहु सूर्य) की संगति में अशुभ फल देता है। बुध ग्रह मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है। कन्या इसकी उच्च राशि भी है जबकि मीन इसकी नीच राशि मानी जाती है। 27 नक्षत्रों में बुध को अश्लेषा ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्र का स्वामित्व प्राप्त है। हिन्दू ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि तर्क संवाद गणित चतुरता और मित्र का कारक माना जाता है। सूर्य और शुक्र बुध के मित्र हैं जबकि चंद्रमा और मंगल इसके शुत्र ग्रह हैं।