बिरयानी खाने के लिए सड़क पर लगी 1.5 किमी लंबी लाइन,

नई दिल्ली, । बेंगलुरू में बिरयानी प्रेमियों ने कुछ गजब का कर दिखाया है। वायरल हो रहे एक वीडियो में देखा जा सकता है कि बिरयानी के लिए बेंगलुरू के लोगों ने 1.5 किलोमीटर लंबी लाइन लगा दी है।

बेंगलुरु में एक रेस्तरां के बाहर एक किलोमीटर से ज्यादा लंबी कतार में खड़े सैकड़ों ग्राहकों का एक वीडियो समाचार एजेंसी एएनआई ने शेयर किया है। वीडियो में बिरयानी की प्लेट के इंतजार में मास्क में लोगों की एक बड़ी कतार दिखाई देती है।

रेस्तरां  बाहर लगभग 1.5 किमी लम्बी कतार लगी हुई है। ऑनलाइन साझा किए जाने के बाद से इस वीडियो में लोग अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बिरयानी की विशेषता का अनुमान लगाने की कोशिश कर रहे हैं। बिरयानी खरीदने के लिए लाइन में लगे एक ग्राहक ने बताया कि वह सुबह 4 बजे से लाइन में लगा है। सुबह 6:30 बजे मेरा ऑर्डर मिला, क्योंकि बिरयानी के लिए लगभग 1.5 किमी की लंबी कतार है। उन्होंने बताया कि यहां की बिरयानी बहुत  बहुत स्वादिष्ट है, यह इंतजार के लायक है।

वहीं रेस्तरां के मालिक ने कहा कि मैं लगभग 22 साल पहले यह स्टाल खोला था। हमारी बिरयानी में किसी भी तरह का प्रिजर्वेटिव नहीं डाला जाता है। हम एक दिन में हजारों किलोग्राम से अधिक बिरयानी परोसते हैं। ,

आखिरकार क्यों सीएम जगनमोहन रेड्डी को सुप्रीम कोर्ट के नंबर 2 जज के खिलाफ लिखनी पड़ी चिट्ठी ?

नई दिल्ली
विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में अगर किसी राज्य का सीएम किसी भी न्यायाधीश पर राजनैतिक हस्तक्षेप की बात करता है तो ये सामान्य घटना नहीं हो सकती। यहां हम बात कर रहे हैं आंध्र प्रदेश के सीएम जगनमोहन रेड्डी के उस पत्र (Jagan Mohan Reddy Letter To CJI) की जिसने न्यायिक व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। लोकतंत्र के चार स्तंभों में तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है न्यायपालिका। अगर इसके किसी सदस्य पर किसी राज्य के सीएम की तरफ से उंगली उठती है तो स्थिति की गंभीरता को समझा जा सकता है।

जगनमोहन रेड्डी ने लगाया आरोप

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी (AP CM Jagan Mohan Reddy) ने 8 पन्नों का पत्र भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice Of India) शरद अरविंद बोबेड़े (Justice Bobde) को लिखा। CJI बोबड़े के बाद शीर्ष अदालत के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस रमन्ना (Justice Ramana) और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के कुछ जज के खिलाफ सरकार को गिराने का आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा है कि आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम चंद्रबाबू (EX CM Chandra babu Naidu) नायडू के साथ मिलकर सरकार को अस्थिर किया जा रहा है। दरअसल, ऐसा एक दिन या एक महीने में असंतोष पैदा नहीं हुआ होगा। सरकार और अदालत के बीच ये रंज काफी पहले से चल रहा है।

राज्य में न्याय प्रशासन को प्रभावित करने का आरोप

गौर करने वाली बात ये है कि सीजेआई को यह चिट्ठी 6 अक्टूबर को लिखी गई थी और जगनमोहन रेड्डी इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Jagan Mohan Reddy) से मिलकर लौटे थे। सूत्रों से मालूम चला कि जगनमोहन रेड्डी ने पीएम से राज्य के विकास और आंध्र प्रदेश पुर्नगठन अधिनियम के तहत फंड के बारे में बातचीत हुई थी।

पत्र को हैदराबाद में मीडिया के सामने शनिवार को जगनमोहन के प्रमुख सलाहकार अजेय कल्लम की तरफ से रिलीज किया गया था। चिट्ठी में उन मौकों का भी जिक्र किया गया है, जब तेलुगुदेशम पार्टी से जुड़े केसों को कुछ सम्मानीय जजों को सौंपा गया। इसके अलावा इसमें कहा गया, ‘मई 2019 में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने पर जबसे चंद्रबाबू नायडू की सरकार की ओर से जून 2014 से लेकर मई 2019 के बीच की गई सभी तरह की डीलों की जांच के आदेश दिए गए हैं, तबसे जस्टिस एनवी रमन्ना राज्य में न्याय प्रशासन को प्रभावित करने में जुटे हैं।’

रेड्डी और अदालत

सीएम ने आरोप लगाया है कि जमीन लेन-देन को लेकर राज्य के पूर्व एडवोकेट जनरल दम्मलपति श्रीनिवास पर जो जांच बैठी, उस पर हाईकोर्ट ने स्टे दे दिया, जबकि एंटी-करप्शन ब्यूरो ने उनके खिलाफ एफआईआर तक दायर कर दी थी। बता दें कि 15 सितंबर को ही हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि एसीबी की तरफ से पूर्व एडवोकेट जनरल पर दर्ज की गई एफआईआर की डीटेल्स मीडिया में रिपोर्ट नहीं की जाए। यह एफआईआर श्रीनिवास पर अमरावती में जमीन खरीद को लेकर दर्ज हुई थी।

क्यों रोका गया मीडिया को

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेके माहेश्वरी ने आदेश में कहा था, ‘अंतरिम राहत के माध्यम से यह निर्देशित किया जाता है कि किसी भी आरोपी के खिलाफ इस रिट याचिका को दायर करने के बाद (एफआईआर) दर्ज करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाएगा। जांच भी रुकी हुई है। यह आगे निर्देशित किया जाता है कि (पूर्व के आदेश के अनुसार, एफआईआर, विवरण को रोक दिया गया है) के संबंध में समाचार किसी भी इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट या सोशल मीडिया में सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

जस्टिस रमन्ना पर चंद्रबाबू के साथ सांठगांठ का आरोप

अपनी शिकायत में सीएम जगनमोहन ने कहा कि जस्टिस रमन्ना सरकार को अस्थिर करने में नायडू का साथ दे रहे हैं। वह हाई कोर्ट के काम में दखलअंदाजी कर रहे हैं और जजों को प्रभावित कर रहे हैं। रेड्डी के अनुसार रमन्ना ऐसा टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू के हितों के संरक्षण के लिए कर रहे हैं और वे वर्तमान सरकार को गिराना चाहते हैं। देश में यह पहली बार है कि किसी मुख्यमंत्री ने जज के खिलाफ चीफ जस्टिस से शिकायत की हो, जिसमें न्यायिक सिस्टम को प्रभावित करने की बात की गई हो। जगन ने CJI से आंध्र प्रदेश में जूडिशरी की तटस्थता को बरकरार रखने की गुजारिश की है।

रूस ने दुनिया को विश्वयुद्ध के खतरे से बचाया, अर्मेनिया-अजरबैजान में बनी सहमति

मॉस्को: कोरोना संकट के बीच दुनिया पर मंडरा रहा विश्व युद्ध का खतरा रूस के प्रयासों से टल गया है. अर्मेनिया (Armenia) और अजरबैजान (Azerbaijan) पिछले कई दिनों से जारी युद्ध रोकने पर सहमत हो गए हैं. आज दोपहर से दोनों तरफ से गरज रहीं तोपें खामोश हो जाएंगी. यदि दोनों देशों में सहमति नहीं बनती तो आने वाले दिनों में स्थिति विकराल हो सकती थी, क्योंकि कई देश इस लड़ाई में कूदने की तैयारी कर रहे थे. 

मॉस्को में चल रही थी बातचीत
विवादित क्षेत्र को लेकर अर्मेनिया और अजरबैजान में छिड़ी जंग को खत्म करने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों को मॉस्को आमंत्रित किया था. दोनों पक्षों में हुई मैराथन बातचीत के बाद आखिरकार युद्ध रोकने पर सहमति बन गई है. 

मानवीय आधार पर बनी सहमति
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Russian Foreign Minister Sergei Lavrov) ने बताया कि अर्मेनिया और अजरबैजान मानवीय आधार पर युद्ध समाप्त करने पर सहमत हो गए हैं. 10 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से दोनों देश युद्ध विराम को लागू कर देंगे. लावरोव के मुताबिक, दोनों देश एक-दूसरे के कैदियों और संघर्ष में मारे गए लोगों के शवों का आदान-प्रदान करेंगे. मॉस्को में आयोजित वार्ता में मध्यस्थता करने वाले लावरोव ने यह भी कहा कि अर्मेनिया और अजरबैजान ने नागोर्नो-काराबाख (Nagorno-Karabakh) विवाद के निपटारे के लिए भी बातचीत शुरू करने पर सहमति दर्शाई है.  

क्यों बढ़ गया था खतरा
वैसे, तो यह दो देशों के बीच की लड़ाई थी, लेकिन इसमें कई देश शामिल होने की तैयारी कर रहे थे. तुर्की ने तो पहले ही अजरबैजान की तरफ से मोर्चा संभाल लिया था. जिस तरह से टेंशन बढ़ती जा रही थी, उसे देखते हुए यह आशंका पैदा हो गई थी कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तुर्की के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं. यदि ऐसा होता तो रूस और तुर्की के बीच भयानक जंग शुरू हो जाती और इस महायुद्ध में दुनिया की दूसरी महाशक्तियां भी शामिल होतीं. यह भी खबर थी कि पाकिस्तानी सेना भी इस युद्ध में भूमिका निभा रही है.

इतना ही नहीं, अर्मेनिया और अजरबैजान की लड़ाई में फ्रांस, ईरान और इजराइल के भी शामिल होने का खतरा बढ़ गया था. लेकिन रूस ने तुर्की के उकसावे के बावजूद संयम से काम लिया और दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाकर दुनिया को विश्वयुद्ध के खतरे से बचा लिया. 

भारतीय रेलवे ने टिकट रिजर्वेशन के नियमों में किया बड़ा बदलाव.

नई दिल्ली: कोरोना (Corona) काल में यात्रियों को राहत देने के लिए भारतीय रेलवे (Indian Railway) ने टिकटों के आरक्षण को लेकर बड़ा बदलाव किया है, जो (शनिवार) से लागू हो गया है. नए बदलाव के तहत अब ट्रेनों में टिकट आरक्षण का दूसरा चार्ट (Reservation Chart) ट्रेन के स्टेशन से चलने के आधे घंटे पहले जारी किया जाएगा. बता दें कि पिछले कुछ महीने से कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus) को देखते हुए रेलवे ने यह समय दो घंटे कर दिया था.

4 घंटे पहले तैयार होती थी आरक्षण तालिका

एक बयान में भारतीय रेलवे ने कहा, “कोविड-19 महामारी आने से पहले के दिशा-निर्देशों के तहत पहली आरक्षण तालिका ट्रेनों के निर्धारित प्रस्थान समय से कम से कम चार घंटे पहले तैयार की जाती थी, ताकि उपलब्ध बर्थ द्वितीय आरक्षण तालिका (Reservation Chart) के तैयार होने तक ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर पीआरएस काउंटरों और इंटरनेट के माध्यम से बुक (Rai Ticket Booking) किए जा सकें.”

कोरोना महामारी से पहले था ये नियम

रेलवे ने कहा कि द्वितीय आरक्षण तालिका ट्रेनों के निर्धारित/परिवर्तित प्रस्थान समय से 30 मिनट से लेकर पांच मिनट पहले तक तैयार की जाती थी. पहले से बुक टिकट भी रिफंड के प्रावधानों के अनुसार इस दौरान रद्द करने की अनुमति थी. कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण दूसरा आरक्षण चार्ट बनाने का समय ट्रेनों के निर्धारित/परिवर्तित प्रस्थान समय से आधा घंटा पहले से बढ़ाकर दो घंटा पहले करने का निर्देश दिया गया था.

जोनल रेलवे के अनुरोध पर लिया गया फैसला

रेलवे ने बताया, “यात्रियों की सुविधा के लिए जोनल रेलवे (Zonal Railway) के अनुरोध के हिसाब से इस मामले पर विचार किया गया और तय किया गया कि दूसरी आरक्षण तालिका (Reservation Chart) ट्रेनों के निर्धारित/परिवर्तित प्रस्थान समय से कम से कम आधा घंटा पहले तैयार कर ली जाए.” रेलवे ने बताया, “अब नए नियम के हिसाब से ऑनलाइन और पीआरएस टिकट काउंटरों पर टिकट बुकिंग (Rai Ticket Booking) सुविधा दूसरी आरक्षण तालिका के तैयार होने से पहले उपलब्ध होगी. इसके लिए सीआरआईएस सॉफ्टवेयर में जरूरी बदलाव किया गया है.”

कोरोना के कारण निलंबित थी ट्रेन सेवा

कोरोना वायरस के संक्रमण को बढ़ने के रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन (Coronavirus Lockdown) के कारण देशभर में 25 मार्च से सभी यात्री ट्रेनों को निलंबित कर दिया गया था, हालांकि 1 मई से प्रवासियों को उनके गृह राज्य पहुंचाने के लिए श्रमिक ट्रेनों की शुरुआत की गई. इसके बाद भारतीय रेलवे चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों की शुरुआत कर रही है.



डीटीएच की छतरी पर बैठा ये बंदर आपको ‘महिंद्रा की कार’ जिता सकता है, बस कल तक का है मौका

आनंद महिद्रा (Anand Mahindra) ने एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें डीटीएच की छतरी पर बंदर बैठा हुआ है। अगर इस तस्वीर के लिए दिया गया आपका कैप्शन उन्हें पसंद आता है, तो आप जीत सकते हैं महिंद्रा का एक स्केल मॉडल। आनंद महिंद्रा कैप्शन कॉम्पटीशन (Anand Mahindra caption competition) के तहत ऐसी तस्वीरें शेयर करते रहते हैं।

हाइलाइट्स:

आनंद महिद्रा ने एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें डीटीएच पर बंद बैठा हुआ हैउन्होंने लोगों से इस तस्वीर के लिए हिंदी और अंग्रेजी में एक-एक शानदार कैप्शन मांगा हैजिसे उनका ये कैप्शन पसंद आता है वह जीत सकता है एक स्केल मॉडल की कारआनंद महिंद्रा कैप्शन कॉम्पटीशन के तहत ऐसी तस्वीरें

नई दिल्ली
आनंद महिंद्रा  ट्विटर पर कितने एक्टिव रहते हैं और कितने क्रिएटिव चीजें सामने लाते हैं ये तो सब जानते ही हैं, लेकिन उनके कैप्शन कॉम्पटीशन ने तो क्रिएटिविटी को एक अलग ही लेवल पर पहुंच दिया है। वह एक तस्वीर डाल देते हैं और कैप्शन कॉम्पटीशन (caption competition) करवाते हैं। इसमें वह एक हिंदी और एक अंग्रेजी का कैप्शन देने वाले विनर चुनते हैं। बात यहां पर खत्म नहीं होती, इन विनर्स को मिलती है महिंद्रा की स्केल मॉडल गाड़ी। इस बार आनंद महिंद्रा ने एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें डीटीएच की छतरी पर एक बंदर बैठा है। इस तस्वीर पर उन्होंने लोगों के कैप्शन मांगा है।

ये भी जानिए कि क्या होता है स्केल मॉडल

आनंद महिंद्रा ने अपने ट्वीट में साफ लिखा है कि जीतने वाले को स्केल मॉडल गाड़ी मिलेगी। स्केल मॉडल का मतलब एक छोटी सी खिलौने जैसी गाड़ी समझ लीजिए। ये गाड़ी हूबहू असल गाड़ी जैसी होती है, ना कि सिर्फ कोई खिलौना। यानी इस स्केल मॉडल को बेहद बारीकी से बनाया जाता है, जो असल गाड़ी की नकल होता है। इसका मतलब की कैप्शन के विनर को लाखों की कार नहीं मिलेगी, सिर्फ स्केल मॉडल मिलेगा, जिसकी कीमत चंद हजार में होती है। हां, लोगों में इस बात का क्रेज जरूर होता है कि इसे महिंद्रा की तरफ से दिया जाएगा।

पहले भी डाल चुके हैं क्रिएटिव तस्वीरें
आनंद महिंद्रा इस तरह की क्रिएटिव तस्वीरें पहले भी डालते रहे हैं। लॉकडाउन से कुछ दिन पहले 15 मार्च को उन्होंने एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें एक ठेले पर घर जैसी आकृति बनी हुई थी। यूं लग रहा था मानो कोई साइकिल पर ही घर उठाकर चला जा रहा हो।

SC/ST कानून के तहत दी गई जमानत CrPC के तहत रद्द/ वापस हो सकती है, POCSO की प्रक्रिया SC/ST अधिनियम पर प्रबल होगी : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट


एक महत्वपूर्ण फैसले में, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एक अभियुक्त को दी गई जमानत की गुंजाइश पर चर्चा की और आयोजित किया गया,

“अत्याचार अधिनियम की धारा 14-ए (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में जमानत रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय CrPC की धारा 439 (2) के तहत आवेदन पर सुनवाई नहीं कर सकता है।”

न्यायमूर्ति आनंद पाठक की पीठ ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि किसी पीड़ित को ” उपाय” के बिना नहीं छोड़ा जा सकता है, यदि आरोपी को जमानत मिल जाती है, लेकिन वह जांच/ट्रायल में हस्तक्षेप करता है और पीड़ित या गवाहों को डराता है।

दरअसल अत्याचार अधिनियम की धारा 14-ए (1) (2) में कहा गया है कि विशेष अदालत या कार्यकारी विशेष अदालत द्वारा जमानत देने या इनकार करने के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की जाएगी।

वर्तमान मामले के आरोपी पर अपहरण और बलात्कार के अपराध के लिए मामला दर्ज किया गया था और आईपीसी, POCSO और एससी/एसटी अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत आरोप लगाया गया था। विशेष अदालत द्वारा उनकी जमानत याचिका को खारिज करने के बाद धारा 14 ए (1) (2) के तहत अपील में जमानत दी गई थी।

शिकायतकर्ता ने सीआरपीसी की धारा 439 (2) के तहत एक आवेदन दिया था, जिसमें धारा 14-ए के तहत दी गई जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने अपनी जमानत शर्तों को पराजित किया था और पीड़ित और उसके परिवार को लगातार डरा रहा था।

इस प्रकार, न्यायालय के समक्ष जो प्रश्न उठा था कि क्या विशेष कानून के तहत एक बार जमानत दी गई, वो सीआरपीसी के तहत रद्द की जा सकती है।

अभियुक्तों के वकील ने यह कहते हुए इसे सुनवाई योग्य होने का प्रश्न उठाया था कि एक बार विशेष क़ानून यानी अत्याचार अधिनियम के तहत ज़मानत मिल जाए, तो न्यायालय को सशक्त बनाने वाले अत्याचार अधिनियम की धारा 14-ए (1) (2) के तहत ज़मानत को वापस लेने के लिए कोई प्रावधान नहीं है।

भले ही अदालत ने इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में जमानत रद्द करने का पक्ष नहीं लिया, लेकिन यह नोट किया कि इसमें ऐसा करने की शक्ति है।

अभियुक्तों द्वारा दिए गए प्रस्ताव से असहमति जताते हुए, न्यायालय ने कहा कि 2015 में, एससी/एसटी एक्ट में संशोधन किया गया ताकि स्पीडी ट्रायल सुनिश्चित किया जा सके और उन दोषों को दूर किया जा सके जिससे अधिकारों के संरक्षण और पीड़ित के हित प्रभावित होते हों।

इस पृष्ठभूमि में,

“कोई भी व्याख्या जो ज़मानत की शर्त का उल्लंघन करने के मामले में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए पीड़ित के अधिकार को प्रतिबंधित करती है, संशोधन अधिनियम की भावना के खिलाफ होगी और यह एक विषम स्थिति पैदा कर सकती है जहां संशोधन अधिनियम का पूरा उद्देश्य पराजित हो जाएगा और इसलिए, कहा गया कि आरोपी के वकील द्वारा सुझाई गई व्याख्या को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। “

वास्तव में, यह आयोजित किया गया था कि

शिकायतकर्ता / पीड़ित पक्ष द्वारा CrPC की धारा 439 के तहत जमानत रद्द करने के लिए एक आवेदन उच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई योग्य है जिसने अपील में जमानत देने का आदेश और फैसला पारित किया हो, निश्चित रूप से उसे वापस लेने के लिए एक फिट मामला है।

मल्लिकार्जुन कोडागली (मृत) बनाम कर्नाटक राज्य और अन्य (2019) 2 एससीसी 752 , जिसका प्रतिनिधित्व विधिक प्रतिनिधि ने किया, पर भरोसा किया गया , (जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता / पीड़िता को “द्वितीयक उत्पीड़न” कहने का विरोध किया था।

कोर्ट ने जोड़ा,

“अन्यथा, भले ही इस्तेमाल की जाने वाली भाषा एक से अधिक निर्माण को प्रभावित करने में सक्षम हो, सही अर्थ का चयन करने के लिए वैकल्पिक निर्माणों को अपनाने के परिणामस्वरूप होने वाले परिणामों के बारे में होना चाहिए। एक निर्माण जिसके परिणामस्वरूप कठिनाई, गंभीर असुविधा, अन्याय, विसंगति या बेतुकापन होता है, जिसके कारण प्रणाली में असंगति या अनिश्चितता और संघर्ष पैदा हो जाता है, जिसे विनियमित करने के लिए क़ानून को अस्वीकार करना पड़ता है और उस निर्माण को वरीयता दी जानी चाहिए जो ऐसे परिणामों से बचता है।”

साथ ही, यह आयोजित किया गया था कि उच्च न्यायालय अत्याचार अधिनियम की धारा 14-ए (2) के तहत दी गई जमानत के लाभ को “वापस” भी कर सकता है, यदि तथ्य ऐसा वारंट करते हैं।

यह कहा,

“न्यायालय के पास एक आदेश वापस लेने की शक्ति है, जो पहले उसके द्वारा पारित किया जा चुका है। आदेश जारी करने या पारित करने की शक्ति में उसका वापस शामिल होना शामिल है।”

अत्याचार अधिनियम और POCSO अधिनियम के बीच परस्पर क्रिया

चूंकि वर्तमान मामले के अभियुक्त को दो विशेष कानूनों के तहत आरोपित किया गया था, यानी यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 और अत्याचार अधिनियम के तहत, न्यायालय को एक सवाल का सामना करना पड़ा था कि प्रक्रियात्मक कानून किस कानून के तहत लागू होगा।

न्यायालय ने पाया कि जब एक आरोपी पर अत्याचार अधिनियम और साथ ही साथ POCSO अधिनियम द्वारा मुकदमा चलाया जा रहा है, तो POCSO अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय के पास निम्नलिखित कारणों के लिए अधिकार क्षेत्र होगा:

• POCSO अधिनियम की धारा 42-ए में उक्त अधिनियम के तहत स्थापित विशेष न्यायालयों को अन्य अधिनियमों के प्रावधानों को भी लागू करने के लिए अनुमति देता है, जब तक कि वे POCSO अधिनियम के प्रावधानों के साथ असंगत नहीं हैं और किसी भी असंगतता के मामले में, POCSO अधिनियम के प्रावधान असंगतता की हद तक इस तरह के अन्य अधिनियमों के प्रावधानों के ऊपर प्रभाव रखेंगे;

• विशेष न्यायालय, POCSO अधिनियम, अन्य अधिनियमों के तहत भी अपराध के लिए ट्रायल कर सकता है जिसके साथ अभियुक्त CrPC के अधीन हो सकता है। जबकि, अत्याचार अधिनियम में इस तरह के समावेश का कोई समान प्रावधान मौजूद नहीं है।

• POCSO एक्ट के प्रावधान अत्याचार अधिनियम सहित किसी भी कानून के प्रावधानों को रद्द करने के अतिरिक्त हैं। इसलिए, POCSO अधिनियम सभी प्रकृति में शामिल है, जबकि, अत्याचार अधिनियम की धारा 20 अन्य विधियों के परस्पर क्रिया को सीमित करती है;

• हालांकि दोनों क़ानून नागरिकों के एक विशेष वर्ग के हित के लिए समर्पित हैं, लेकिन विधायी प्राथमिकता या प्रमुखता बच्चे के पक्ष में प्रतीत होती है;

• POCSO अधिनियम में बहुत व्यापक गुंजाइश है, जहां तक ​​पीड़ितों का संबंध है क्योंकि POCSO अधिनियम बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए और ऐसे अपराधों के ट्रायल के लिए विशेष न्यायालय की स्थापना के लिए और इसके साथ जुड़े मामलों या आकस्मिक उपचार के लिए एक अधिनियम है, इसलिए, महत्वाकांक्षा और गुंजाइश POCSO अधिनियम अत्याचार अधिनियम की तुलना में अधिक व्यापक प्रतीत होती है।

• अत्याचार अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय के पास बुनियादी ढांचा, प्रक्रिया, स्टाफ और प्रशिक्षण का प्रकार नहीं है जैसा कि POCSO अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों में विचार किया गया है।

कोर्ट ने टिप्पणी की,

“यदि दोनों अधिनियमों को ध्यान में रखा जाता है, जहां विशेष सुरक्षा, उपचार और शीघ्र ट्रायल पर विचार किया गया है, तो ऐसा प्रतीत होता है कि POCSO अधिनियम को अत्याचार अधिनियम की तुलना में पीड़ितों की व्यापक श्रेणी के लिए डिज़ाइन किया गया है। चूंकि ये प्रक्रिया विशेष रूप से हर वर्ग के बच्चों के लिए प्रदान की गई है चाहे अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की पृष्ठभूमि वाले भी हों, किसी बाल पीड़ित के नाजुक मन को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विशेष रूप से अधिनियमित प्रावधानों के माध्यम से अभियुक्तों की जांच और ट्रायल की प्रक्रिया, उनका संभावित द्वितीयक उत्पीड़न और प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय POCSO अधिनियम में बड़े पैमाने पर दिखाई देते हैं, लेकिन अत्याचार अधिनियम में नहीं।”

उपर्युक्त खोज के आधार पर, यह स्पष्ट किया गया है कि यदि आरोपी की किसी भी जमानत अर्जी को सीआरपीसी की धारा 439 के तहत अनुमति या अस्वीकार किया जाता है तो उस विशेष अदालत द्वारा तब अपील अत्याचार अधिनियम की धारा 14-ए (2) के तहत नहीं होगी। केवल सीआरपीसी की धारा 439 के तहत एक आवेदन जमानत के लिए लागू होगा।

CrPC की धारा 437 (3) के तहत जमानत की शर्तों का दायरा और सीमा

उच्च न्यायालय ने माना है कि सीआरपीसी की धारा 437 (3) में उल्लिखित जमानत शर्तों का दायरा और सीमा इतनी व्यापक है कि सामुदायिक सेवा और अन्य सुधारकारी उपायों को भी शामिल किया जा सके। हालांकि, ऐसी स्थितियों में प्रकृति में अति या अधिकता नहीं होनी चाहिए।

धारा 437 (3) में “इस तरह की अन्य शर्तों को आवश्यक माना गया है” और “अन्यथा न्याय के हित में” जैसे भावों पर जोर देते हुए, अदालत ने कहा कि सुधारवादी जमानत शर्तों को लागू करने के लिए “विवेक” होना चाहिए।

हालांकि, इसने चेतावनी दी,

“जमानत की शर्त अत्यधिक और भयानक नहीं हो सकती है और यह जमानत खरीदने के समान नहीं है। जब कोई मामला जमानत के लिए तैयार किया जाता है और जब अभियुक्त स्वेच्छा से स्वयं सेवा करता है और वह स्वयं सामुदायिक सेवा करने का इरादा रखता है, तो केवल इस शर्त से कुछ मदद हो सकती है।”

केस का शीर्षक: सुनीता गंधर्व बनाम एमपी राज्य और अन्य।  

इन बातों का रखेंगे ख्याल तो कभी नहीं होंगे कंगाल, देख लें आजमा कर

भारतीय परंपराओं में कई ऐसी बातें बताई गयी हैं जिनको मानने से किसी भी मनुष्य को काफी फायदा हो सकता है। भारतीय प्राचीन परंपराओं के मुताबिक, कुछ ऐसे काम हैं, जिन्हें नियमित रूप से रोजाना करने से मनुष्य कि किस्मत उसका साथ देने लगती है और भाग्य से जुड़ी बाधाएं दूर हो जाती हैं। इन छोटी मगर इन जरुरी बातों को रोजाना करने से  किसी भी कार्य में सफलता मिलने के योग बनते हैं और घर में सुख-समृद्धि होती है।

1 – कुल देवता की पूजा और श्राद्धय

भारतीय परंपराओं के मुताबिक जिन घरों में कुल देवी देवताओं की पूजा और श्राद्धय होता है वहां हमेशा सुख-समृद्धी बनी रहती है। इसके अलावा, परिवार के पितरों का नियमित श्राद्धय और दान कर्म होता है उस परिवार में भी सुख-समृद्धी बनी रहती है। आपके लिए ये जानना जरुरी है कि कुल देवता/देवी की पूजा न करने से परिवार में दुर्घटनाएं और नकारात्मक ऊर्जा का आना शुरू हो जाता है। इसलिए कुल देवी देवताओं की पूजा करना अति आवश्यक है।

2 – पाँच जीवों को खाना खिलाना

शास्त्रों में जीवन से हर समस्या का समाधान बताया गया है। शास्त्रों में गाय को खिलाएं रोटी या हरी घास, पक्षियों को अनाज के दाने, कुत्ते को रोटी, चींटियों को शक्कर या आटे की गोलियां  और मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाने से सभी प्रकार के दुख दूर होते हैं। इन सभी को इनका भोजन देने से घर परिवार में सुख शांती का वास होता है और सभी कष्टों से छूटकारा मिलता है।

3 – भगवान को पहले भोग लगाएं

खुद खाने से पहले भगवान को भोग लगाने को प्राचीन काल से ही नैवेद्य कहा जाता है। प्राचीनकाल से ही प्रत्येक हिन्दू भोजन करते वक्त उसका कुछ हिस्सा अपने खाने से पहले देवी-देवताओं को समर्पित करते आये हैं। शास्त्रों के मुताबिक, खुद खाने से पहले भगवान को भोग चढ़ाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि जिन घरों में खुद खाने से पहले भगवान को भोग लगाया जाता है वहां सुख-समृद्धी बनी रहती है.

हमें सफलता पाने के लिए अपने स्वयं में कुछ लक्षणों और विशेषताओं की आवश्यकता है जैसे…


आपमें क्षमता है, इसे महसूस करें और इसे पूरा करें। आत्मविश्वास की अपनी एक बड़ी ताकत होती है। इसे कभी ढीला न करें। अपनी क्षमताओं को अपनी ताकत बनाएं और एक दिन कुछ महान हासिल करने के लिए हर दिन कड़ी मेहनत करें।

हम एक वास्तविक दुनिया में रह रहे हैं। यह एक कड़वी सच्चाई है कि यह दुनिया कठोर है और परेशानियों से भरी है। यदि हम किसी विशिष्ट लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, किसी योग्य वस्तु के लिए काम कर रहे हैं या इस दुनिया का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, तो हमें सफलता पाने के लिए अपने स्वयं में कुछ लक्षणों और विशेषताओं की आवश्यकता है जैसे: 1. कड़ी मेहनत 2. बलिदान 3. जुनून 4. निश्चय 5. संगति 6. धैर

हम में से बहुत से लोग शिकायत करते हैं कि मैं उस कार्य को पूरा नहीं कर सकता, मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता क्योंकि व्यावहारिक रूप से हमारे पास सीमित संसाधन हैं, मैं इसका पीछा नहीं कर सकता क्योंकि मुझे अपने परिवार, दोस्तों, समय और ऊर्जा का त्याग करना होगा। मैं यह कभी नहीं कर सकता, इसका असंभव है। मैं अपना व्यवसाय शुरू नहीं कर सकता क्योंकि हर कोई एक ही व्यवसाय कर रहा है।