हाथरस कांड में सामने आया नक्सल कनेक्शन, नकली भाभी बनकर साजिश रच रही थी महिला- सूत्र

हाथरस. उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए कथित गैंगरेप (Hathras Case) मामले की फिलहाल जांच चल रही है. इसी बीच शनिवार को हाथरस कांड में नक्सल कनेक्शन (Naxal Connection) सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है. एसआईटी की टीम मध्य प्रदेश के जबलपुर की रहने वाली महिला की तलाश में जुटी है. बताया जा रहा है कि संदिग्ध नक्सली महिला पीड़िता के घर में भाभी बनकर रह रही थी. एसआईटी की जांच में सामने आया है कि 16 सितंबर से लेकर 22 सितंबर तक पीड़िता के घर में रहकर नक्सली महिला बड़ी साजिश रच रही थी. इससे पहले पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि इस केस से जुड़े फंडिंग मामले में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और भीम आर्मी के लिंक भी मिले हैं.

हाथरस कांड की जांच कर रही एसआईटी के सूत्र बताते हैं कि नक्सली महिला घूंघट ओढ़कर पुलिस और एसआईटी से बातचीत कर रही थी. वहीं घटना के 2 दिन बाद से ही संदिग्ध महिला पीड़िता के गांव पहुंच गई थी. आरोप है कि पीड़िता के ही घर में रहकर वह परिवार के लोगों को कथित रूप से भड़का रही थी. पीड़िता की भाभी बनकर रहने वाली नक्सली एक्टिविस्ट महिला की कॉल डिटेल्स में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं.

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक विदेशी फंडिंग के साथ नक्सली कनेक्शन पर यूपी पुलिस व एसआईटी टीम काम कर रही है. इससे पहले एसआईटी की जांच में पहले जातीय वा सांप्रदायिक दंगे की साजिश का पर्दाफाश किया था. पुलिस महिला व उसके करीबियों की तलाश में जुटी है. अभी भी 4 दर्जन लोगों से एसआईटी की टीम पूछताछ कर चुकी है. हाथरस केस में पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया है, जो पीएफआई के सदस्य बताए जा रहे हैं.

नेपाल सीमा पर पीएफआई की गतिविधियां

गिरफ्तार सदस्यों में एक शख्स बहराइच के जरवल का रहने वाला है. इसके बाद से यूपी पुलिस सक्रिय हो गई है. बहराइच पुलिस का कहना है कि ये इलाका इंडो-नेपाल सीमा से सटा हुआ है और पिछले कुछ समय में पीएफआई से जुड़े कुछ अन्य लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. ऐसे में पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यूपी और देश के भीतर जातीय और सांप्रदायिक दंगे फैलाने के लिए भारत नेपाल सीमा पर पीएफआई की गतिविधियां क्या चल रही हैं?

भारत की उत्तरी सीमा पर चीन ने की 60,000 सैनिकों की तैनाती, अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा

वाशिंगटन : LAC पर भारत और चीन के मध्य तनाव जारी है. सीमा पर गतिरोध के बीच चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर 60,000 से ज्यादा सैनिकों को जमा कर रखा है. अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ (Mike Pompeo) ने यह बात कही. उन्होंने चीन के “बुरे रवैये” और क्वाड देशों के लिए चेतावनी खड़ी करने को लेकर निशाना साधा. क्वाड समूह के देशों में अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने मंगलवार को टोक्यो में मुलाकात की. कोरोनावायरस महामारी शुरू होने के बाद यह पहली आमने-सामने की वार्ता है. 

चारों देशों की यह बैठक हिंद-प्रशांत, दक्षिणी चीन सागर और पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन के आक्रामक सैन्य रुख के बीच जापान की राजधानी टोक्यो में हुई. 

टोक्यो बैठक में हिस्सा लेकर लौटे अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में कहा, “भारतीय अपनी उत्तरी सीमा पर 60,000 चीनी सैनिकों की मौजूदगी देख रहे हैं.” 

उन्होंने कहा, “मैं भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के अपने समकक्ष विदेश मंत्रियों के साथ था. यह एक प्रारूप है, जिसे हम क्वाड कहते हैं, चार बड़े लोकतंत्र, चार ताकतवर अर्थव्यवस्थाएं, चार देश, जिनमें से सबकी असल चिंता चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से खड़े किए जोखिम से जुड़ी है.” 

रामविलास पासवान के निधन से बिहार चुनाव में नया मोड़, कुछ यूं बदलेगा वोटों का खेल

नई दिल्‍ली/पटना
पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर असर डाल सकता है। उनके बेटे चिराग ने इस चुनाव में नीतीश कुमार को उखाड़ फेंकने का दम भरा है। ऐसे में सीनियर पासवान के निधन से लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) सहानुभूति वोट बटोर सकती है। पासवान के जाने से दुसाध वोट चिराग के साथ खड़े हो सकते हैं। रामविलास पासवान दशकों तक दुसाधों के सबसे बड़े नेता रहे। चुनाव में दुसाधों की सक्रिय भागीदारी के चलते ही पासवान की राजनीतिक ताकत कभी कमजोर नहीं हुई। चिराग उसी ताकत को नीतीश के खिलाफ इस्‍तेमाल करना चाहते हैं।

दुसाध एकजुट होकर एलजेपी को कर सकते हैं वोट
सीनियर पासवान बीमार होने के चलते पहले ही इन चुनावों में भागीदारी नहीं करने वाले थे। ऐसे में सवाल उठ रहे थे कि चिराग क्‍या दुसाधों को उसी तरह साध पाएंगे जैसे उनके पिता करते थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री के निधन ने इसकी संभावना बढ़ा दी है कि दुसाध एकजुट होकर एलजेपी के लिए वोट करें। पार्टी ने गुरुवार को नीतीश और जेडीयू को झटका लेने वाले प्‍लान पर कदम आगे बढ़ा दिए हैं। करीब महीना भर पहले चिराग ने पिता की बीमारी का जिक्र करते हुए कहा था कि वह उनके राजनीतिक काम को आगे बढ़ाना चाहते हैं। बीमारी के चलते पासवान प्रचार भी नहीं करने वाले थे। एक दलित नेता के रूप में पासवान का जो कद था, वह बिहार ही नहीं, राष्‍ट्रीय स्‍तर के नेता थे।

चुनाव में बीजेपी-जेडीयू से होना है मुकाबला
बीजेपी के लगभग हर बड़े नेता ने पासवान के निधन पर शोक जताया है। हालांकि चुनाव में बीजेपी और जेडीयू को एलजेपी से दो-दो हाथ करने पड़ेंगे। ऐसे कयास हैं कि बीजेपी ने एलजेपी को भी साधा हुआ है लेकिन वह ऐसी परिस्थिति नहीं चाहती जहां जेडीयू के साथ उसका गठबंधन बहुमत से दूर रह जाए क्‍योंकि तब चिराग को ऐडवांटेज होगा। चुनाव प्रचार शुरू रहा है, ऐसे में बीजेपी पासवान को श्रद्धांजलि तो देगी लेकिन एलजेपी का विरोध करेगी। बीजेपी के शीर्ष नेता नीतीश कुमार के लिए अपना समर्थन बार-बार दोहरा चुके हैं।

चिराग के आगे खुद को साबित करने की चुनौती
पासवान का जाने से चिराग पर खुद को साबित करने का दबाव बढ़ गया है। सीनियर पासवान कई विरोधाभासों के बावजूद अपने राजनीतिक लक्ष्‍य हासिल कर लेते थे। सीनियर पासवान ने वाजपेयी सरकार में मंत्रालय बदलने पर एनडीए छोड़ दिया था और फिर यूपीए में मंत्री बने। इसके बावजूद उन्‍होंने बीजेपी से हाथ मिलाया और 2014 में फिर केंद्र में मंत्री पद हासिल किया। हाल ही में चिराग ने वोटर्स और पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील में कहा था कि ‘पापा का अंश हूं इसलिए उन्‍हें पता है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में सफल होते हैं।’ सूत्रों के मुताबिक, एलजेपी लोगों के बीच जाकर यह कहेगी कि वह पासवान के ‘सपने’ को पूरा करेगी।

पासवान के निधन से चंद घंटे पहले ही एलजेपी ने एक पत्र सार्वजनिक किया था। 24 सितंबर को बीजेपी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा को लिखी चिट्ठी में चिराग ने कहा था कि जब उनके पिता राज्‍यसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल करने से पहले मुलाकात कर समझाने गए थे तो नीतीश का व्‍यवहार ‘ठीक नहीं था। जब यह चिट्ठी सार्वजनिक हो गई है तो इसे फैलाकर एलजेपी की पोजिशन को और मजबूत करने की कोशिशें होंगी।

राजस्थान में पुजारी के परिवार ने अंतिम संस्कार करने से किया इनकार, जानें क्या है मांग

राजस्थान के करौली जिले के सपोटरा इलाके में एक पुजारी को जिंदा जलाने के बाद से वहां के लोगों में गुस्सा है। परिवार के लोगों ने पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है और राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के सामने कुछ मांगें रखी हैं। परिवार का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं वह अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। आपको बता दें कि इस मामले के मुख्य आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 

पुजारी बाबूलाल के रिश्तेदार ललित ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि हम चाहते हैं कि 50 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले। सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और आरोपियों का समर्थन करने वाले पटवारी और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। पुजारी के परिवार को सुरक्षा भी मिलनी चाहिए। 

क्या था मामला 

पुलिस के अनुसार घटना सापोटरा के बूकना गांव की है। वहां बुधवार को एक मंदिर के पुजारी बाबू लाल वैष्णव पर पांच लोगों ने हमला किया। आरोप है कि मंदिर के पास की खेती की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे इन लोगों ने पुजारी पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी। 

क्या कहा मुख्यमंत्री ने

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर कहा है, सपोटरा में बाबूलाल वैष्णव जी की हत्या अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है, सभ्य समाज में ऐसे कृत्य का कोई स्थान नहीं है। प्रदेश सरकार इस दुखद समय में शोकाकुल परिजनों के साथ है। घटना के प्रमुख आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है एवं कार्रवाई जारी है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

आरोपी मंदिर की जमीन पर कब्जा करना चाहते थे :

पुलिस के मुताबिक, मरने से पहले पुजारी ने पुलिस को बताया था कि कैलाश मीणा अपने साथियों शंकर, नमो, किशन और रामलखन के साथ मंदिर के बाड़े पर कब्जा कर छप्पर लगा रहा था। मैंने विरोध किया तो पेट्रोल डालकर आग लगा दी। मेरा परिवार मंदिर की 15 बीघा जमीन पर खेती कर अपना गुजारा करता है।

विवाद कैसे शुरू हुआ :

बाबूलाल वैष्णव सपोटरा तहसील के बूकना गांव के पुराने राधाकृष्ण मंदिर में पूजा करते थे। ग्रामीणों ने मंदिर के लिए खेती की जमीन दान दी थी, जो राजस्व रिकॉर्ड में मंदिर माफी में दर्ज है। करीब एक महीने पहले कुछ लोग जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करने लगे। पुजारी ने इसकी शिकायत की थी। 4-5 दिन पहले भी गांव के 100 घरों की बैठक हुई थी, जिसमे पंचों ने पुजारी का समर्थन किया था।

भाजपा बोली, तुरंत न्याय मिले: 

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस घटना को निंदनीय बताते हुए कहा है कि राज्य की कांग्रेस सरकार को दोषियों को सख्त सजा दिलाकर परिवार को तुरंत न्याय दिलाना चाहिए।

पाकिस्तान की ओर से खेल सकता है दुनिया का सबसे लंबा क्रिकेटर, हैरतअंगेज हैं तस्वीरें

पाकिस्तान क्रिकेट टीम हमेशा से ही तेज गेंदबाजों के लिए मशहूर रही है। टीम के तेज गेंदबाज आमतौर पर आपको बेहद लंबी-चौड़ी कद काठी के ही देखने को मिलेंगे। शोएब अख्तर से लेकर मोहम्मद इरफान के रूप में कई ऐसे तेज गेंदबाज रहे हैं, जिन्होंने अपनी ऊंचे कद के दम पर बल्लेबाजों की नाक में दम किया है। हालांकि, आने वाले दिनों में आपको पाकिस्तान की तरफ से विश्व क्रिकेट का सबसे लंबा खिलाड़ी खेलता हुआ दिख सकता है। पाकिस्तान सुपर लीग की टीम लाहौर कलंदर्स ने मुदस्सर गुज्जर नाम के एक खिलाड़ी को अपनी टीम में शामिल किया है, जिसकी लंबाई 7 फीट 6 इंच है। अगर इस खिलाड़ी को पाकिस्तान के लिए खेलना का मौका मिलता है, तो मुदस्सर गुज्जर अबतक के क्रिकेट इतिहास में खेलने वाले सबसे लंबे खिलाड़ी बन सकते हैं। 

लाहौर की टीम ने किया शामिल

पाकिस्तान सुपर लीग की टीम लाहौर कलंदर्स ने मुदस्सर गुज्जर को अपनी टीम में शामिल किया है। इस खिलाड़ी की उम्र अभी महज 21 साल है और उनका कद 7 फीट 6 इंच है। मुदाशीर जब 10 साल के थे, उसी समय उनकी लंबाई 6 फीट थी। मुदाशीर के लंबे कद के कारण उनके स्कूल के बच्चे हमेशा ही उनका मजाक बनाया करते थे, जिसके चलते वो काफी परेशान भी रहा करते थे।

पाकिस्तान के लिए खेलना है सपना

लौहार कलंदर्स द्वारा टीम में सिलेक्ट किए जाने के बाद मुदस्सर गुज्जर काफी खुश हैं। उनका सपना है कि वो एक दिन पाकिस्तान टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेल सके। अगर मुदस्सर ऐसे करने में कामयाब हो जाते हैं, तो वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अबतक के सबसे लंबे खिलाड़ी होंगे। 

घर में नहीं किसी की इतनी लंबी कद काठी

मुदस्सर गुज्जर की घर में उनके जितने कोई भी लंबा नहीं है, उनकी माता-पिता की हाइट भी आम लोगों की तरह बेहद सामान्य है। मुदस्सर की मां 5 फीट 3 इंच की हैं, जबकि उनके पिता की लंबाई 5 फीट 6 इंच ही है। मुदस्सर चार भाई-बहनों में सबसे छोटे पर सबसे लंबे हैं। वो अपने दोस्तों और आसपास के लोगों में भी सबसे ऊंचे कद के हैं।  

पाकिस्तान टीम की तरफ से मोहम्मद इरफान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेल चुके हैं, उनकी लंबाई को लेकर भी बल्लेबाजों के मन में एक समय काफी डर हुआ करता था। मोहम्मद इरफान की लंबाई 7 फीट 1 इंच है और वो पाकिस्तान के लिए 60 वनडे, 22 टी-20 और 4 टेस्ट मैच खेल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने कुल मिलाकर 109 विकेट चटकाए हैं।

लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती बना ड्रैगन, भारत-चीन टकराव इसका उदाहरण: ताइवानी राष्‍ट्रपति

ताइपे
ताइवान के नैशनल डे पर दिए अपने भाषण में देश की राष्‍ट्रपति त्‍साई इंग वेन ने चीन पर जोरदार हमला बोला। उन्‍होंने कहा कि चीन दुनियाभर के लोकतंत्रों के लिए चुनौती बन गया है और भारत-चीन सीमा पर झड़प इसका उदाहरण है। राष्‍ट्रपति वेन ने यह भी कहा कि चीन अगर अगर समानता और गरिमा बनाए रखता है और दोनों के बीच संबंध सुधारना चाहता तो हम सार्थक बातचीत के लिए तैयार हैं।

राष्‍ट्रपति वेन ने अपने भाषण में कहा, ‘दक्षिण चीन सागर में विवाद, चीन-भारत सीमा पर झड़प, हॉन्‍ग कॉन्‍ग में चीन का दमन यह स्‍पष्‍ट रूप से द‍िखाता है कि हिंद-प्रशांत इलाके में लोकतंत्र, शांति और समृद्धि गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।’ उन्‍होंने कहा कि हम अपनी रक्षा की क्षमता को बढ़ा रहे हैं और सेना हमारा भविष्‍य है और इसे लगातार मजबूत करने के लिए काम करते रहेंगे।

‘चीनी सेना पीएलए की गतिविधियां अनुचित हैं’

उन्‍होंने कहा कि हम लगातार देश में अत्‍याधुनिक हथियार और सबमरीन बना रहे हैं। हम अत्‍यंत प्रशिक्षित जवानों को तैयार करने पर काम कर रहे हैं। राष्‍ट्रपति ने कहा कि चीनी सेना पीएलए की गतिविधियां अनुचित हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देश कई गठबंधन कर रहे हैं ताकि उनकी उनकी राष्‍ट्रीय सुरक्षा और लोकतंत्र बाहरी प्रभाव से प्रभावित न हो। उन्‍होंने कहा कि अगर चीन अपनी दुश्‍मनी को भुलाने और समानता तथा गरिमा के आधार पर संबंधों को सुधारने के लिए इच्‍छुक है तो हम सार्थक बातचीत के लिए तैयार हैं।

उधर, ताइवान के नैशलन डे पर भी चीनी सेना धमकाने से बाज नहीं आई। चीन ने शुक्रवार शाम को नैशनल डे की पूर्व संध्‍या पर अपने लड़ाकू विमान ताइवान की सीमा के पास भेजे। ताइवन की सेना ने भी करारा जवाब देते हुए उन्‍हें तत्‍काल भगा दिया। चीन ने इस साल अब तक 2,972 बार से ज्‍यादा अपने फाइटर जेट ताइवान की सीमा के पास भेजे हैं। चीन के युद्धक विमानों को भगाने पर ही ताइवान को करीब 90 करोड़ डॉलर खर्च करना पड़ा है।

ताइवान के उपराष्‍ट्रपति लाइ चिंग टे ने ट्वीट करके बताया कि चीन ने हमारे ताइवान नैशनल डे की पूर्व संध्‍या पर एक बार फिर से हमें भड़काने के लिए अपने युद्धक विमान भेजे। लेकिन यह हमारे जश्‍न को नहीं रोक सकेगा। यह हमें क्षेत्र में शांति और स्थिरता की रक्षा करने से रोक नहीं सकेगा। इससे पहले ताइवान के रक्षा मंत्री ने कहा था कि चीन के लगातार लड़ाकू विमानों के भेजने से हमारी सेना पर दबाव काफी बढ़ गया है।

चीन अमेरिका और ताइवान के बीच बढ़ते सहयोग से चिढ़ा

रक्षा मंत्री ने कहा कि उनके देश को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। उधर, विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ताइवान की सेना को थकाने के लिए लगातार अपने फाइटर जेट को ताइवान स्‍ट्रेट के पास भेज रहा है। चीन इन द‍िनों अमेरिका और ताइवान के बीच बढ़ते सहयोग से चिढ़ा हुआ है। चीन के इसी संकट को देखते हुए ताइवान की राष्‍ट्रपति त्‍साई इंग वेन ने प्रण किया है कि वह देश की सुरक्षा को मजबूत करेंगी और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए काम करेंगी।

सिंधिया का कांग्रेस को करारा जवाब- मेरी संपत्ति 300 साल पुरानी, सवाल तो उनसे हैं जो नए नए महाराजा बन

ग्वालियर
: कांग्रेस पार्टी लगातार बीजेपी के राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को भूमाफिया बता रही है, उपचुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया को घेरने के लिए एक बड़ा मुद्दा कांग्रेस ने बना लिया है। कांग्रेस के भूमाफिया के आरोपों पर पहली बार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बड़ा बयान दिया है। सिंधिया ने कहा है कि ‘ये संपत्ति मेरी 300 साल पुरानी है और सवाल तो मैं उन लोगों से करना चाहता हूं, जो नए-नए महराजा बने हुए हैं। मैं एक परिवार विशेष में पैदा हुआ हूं यदि यह मेरी गलती है तो मैं स्वीकार करता हूं।’

दरअसल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया पर लगातार कांग्रेस हमलावर है। ग्वालियर में सिंधिया ट्रस्ट के द्वारा जमीन अपने नाम कराए जाने को लेकर लगातार कांग्रेस सिंधिया को भूमाफिया साबित करने में लगी हुई है, इन आरोपों पर बीजेपी के राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और कांग्रेस पर पलटवार किया है।

बता दें कि बीते दिनों कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने भी राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर बड़ा हमला बोलते हुए सिंधिया को राज्य का सबसे बड़ा भूमाफिया कहा था. इसके साथ ही कांग्रेस के और नेता इस तरह के बयान दे चुके हैं।

रामविलास पासवान के साथ केंद्रीय कैबिनेट में NDA खत्म, मोदी सरकार में सिर्फ एक मित्र दल बाकी 

नई दिल्ली- केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन के बाद केंद्रीय कैबिनेट में बीजेपी के अलावे एनडीए का कोई दूसरा सहयोगी मंत्री नहीं बच गया है। कुछ दिन पहले ही कृषि विधेयकों पर विरोध के चलते शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बाद ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। जबकि, शिवसेना ने पिछले साल महाराष्ट्र में बाजी पलटने के बाद मोदी सरकार से अपना नाता तोड़ लिया था। मोदी सरकार के लगातार दो कार्यकालों से यही विशेषता थी कि बीजेपी के पूर्ण बहुमत में होने के बावजूद अलग-अलग सहयोगी दलों को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में पर्याप्त प्रतिधिनिधित्व दिया था, लेकिन पासवान की मौत ने उसमें फिलहाल के लिए शून्य ला दिया है। अब केंद्रीय मंत्रिपरिषद में एनडीए के सहयोगी दल में से सिर्फ एक नुमाइंदा बच गया है।

गौरतलब है कि कृषि कानूनों को लेकर जब हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दिया था, तब शिवसेना ने यही आरोप लगाया था कि अब एनडीए रह कहां गया है। लेकिन, फिर भी केंद्रीय कैबिनेट में रामविलास पासवान जैसे नेता की उपस्थिति उन सवालों का जबाव देने के लिए काफी थी। वह कद्दावर भी थे और राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा दलित चेहरा भी थे। लेकिन, उनकी मौत ने मोदी मंत्रिमंडल की वह विविधता फिलहाल के लिए खत्म कर दी है। अब एनडीए के सहयोगी के नाम पर केंद्रीय मंत्रिपरिषद में सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण राज्यमंत्री रामदास अठावले ही बच गए हैं।

मई 2019 जब नरेंद्र मोदी की लगातार दूसरी बार सरकार बनी थी, तब उनके कैबिनेट सहयोगियों में शिवसेना के अरविंद सावंत, शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल और लोक जनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान को जगह दी गई थी। लेकिन, दो पार्टियां पहले ही एनडीए का साथ छोड़ चुकी थीं और अब रामविलास पासवान की दुखद मौत हो चुकी है। वैसे एनडीए में एक और बड़ी सहयोगी पार्टी जदयू भी शामिल है, लेकिन वह पीएम मोदी के दोनों कार्यकाल में कभी सरकार में शामिल नहीं रही है।

माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जब भी मंत्रिपरिषद का विस्तार होगा, सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जा सकती है।

बमौरी गुना उपचुनाव दिग्विजय सिंह बनाम सिंधिया

बारह साल पहले अस्तित्व में आई गुना जिले की बमोरी सीट पर भाजपा के उम्मीदवार और पंचायत मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया का मुकाबला कांग्रेस के कन्हैयालाल अग्रवाल से है, जो 2013 से पहले भाजपा की शिवराज सरकार में मंत्री रहे। रोचक तथ्य यह है कि कन्हैया को दिग्विजय सिंह का करीबी और सिसोदिया को ज्योतिरादित्य सिंधिया का खास माना जाता है। जनता में चर्चा इस बात की है कि क्या सिंधिया की सीट में दिग्विजय सेंध लगाएंगे या दिग्विजय के गढ़ में एक सीट के साथ सिंधिया अपना दखल बरकरार रखेंगे।

इन चुनावी बातों से दूर बमोरी तहसील के आदिवासी बहुल गांव गढ़ा के लोगों की अलग ही चिंता है। आदिवासी कोमल प्रसाद कहते हैं कि बैंकों के चक्कर लगा चुका हूं लेकिन 1000 रुपए अभी तक नहीं मिले। उनके पास सस्ता अनाज लेने की पात्रता पर्ची भी नहीं है। चतुर्भुज कुशवाहा, बाबूलाल जायसवाल आदि का व्यवस्था पर गुस्सा साफ महसूस किया जा सकता है। इनका जिक्र इसलिए क्योंकि यहां चुनावों में सहरिया-आदिवासी और दलित वर्ग ही निर्णायक भूमिका में रहे हैं। सहरिया-आदिवासी और अनुसूचित जाति के वोटरों की संख्या लगभग 80 हजार है। क्षेत्र में पानी, सड़क, बिजली, रोजगार जैसी समस्याएं हैं। बमौरी में एक गांव सिंधिया गढ़ भी है, यहां घुमक्कड़ जातियों के करीब तीन हजार लोगों को सिंधिया स्टेट द्वारा बसाया गया था, इन्हें मुद्दों से मतलब नहीं है।

दलबदल : कौन उठाए इस मुद्दे को क्योंकि दोनों की यही कहानी
पहले जनता दल में रहे, 1998 में भाजपा में गए, 2018 में निर्दलीय उतरे और जुलाई 2020 में कांग्रेस का दामन थामने वाले अग्रवाल को लेकर दलबदल की चर्चा है तो यही बात सिसोदिया के लिए भी सामने आ रही है। सिसोदिया फरवरी 2020 तक कांग्रेस में रहे और फिर सिंधिया के साथ भाजपा के हो गए। लिहाजा 2 लाख वोटरों वाली इस सीट पर चुनाव दलबदल और मुद्दों से ज्यादा प्रतिष्ठा का है। खुद दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन व भाई लक्ष्मण सिंह सक्रिय हैं। गुना सिंधिया का संसदीय क्षेत्र है इसलिए महेंद्र सिंह समर्थकों को उनकी सक्रियता का इंतजार है।

पहले एक सीट थी गुना और बमोरी

2008 से पहले गुना व बमोरी एक सीट थी। 2003 में केएल अग्रवाल कांग्रेस के कैलाश शर्मा से 46 हजार वोटों से जीते थे। इससे पहले तीन चुनावों में उन्हें हार मिली थी। महेंद्र सिंह सिसोदिया से पिछले दो चुनाव वह बड़े अंतर से हार रहे हैं।2008 में बमोरी नई विधानसभा सीट बनी। पहले चुनाव में भाजपा के टिकट पर कन्हैयालाल अग्रवाल ने कांग्रेस के महेंद्र सिंह सिसोदिया को 4778 वोटों से हराया। 2013 में अग्रवाल को सिसोदिया ने 18561 वोटों से शिकस्त दे दी।2018 में भाजपा ने बृजमोहन आजाद को टिकट दिया। कांग्रेस से सिसोदिया फिर सामने थे, लेकिन अग्रवाल निर्दलीय मैदान में उतरे और 28488 वोट ले गए। इससे सिसोदिया को फायदा मिला और वे 27920 वोटों से जीत गए।