केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन, लंबे समय से चल रहे थे बीमार

केंद्रीय मंत्री और लोजपा नेता रामविलास पासवान का आज गुरुवार की शाम निधन हो गया। 

, रामविलास पासवान लंबे समय से बीमार चल रहे थे. उनके निधन की दुखद खबर रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने ट्वीटर पर दी है.


बता दें कि दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल रामविलास पासवान का इलाज चल रहा था. जहां आज उनका निधन हो गया. रामविलास पासवान एलजेपी के संस्थापक थे. इन्होंने अपनी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना भी की थी. एनडीए सरकार में खाद्य और उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान बिहार से राज्यसभा के सदस्य थे

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच रामविलास का निधन एलजेपी के लिए बड़ा झटका है.  उनका इलाज अस्पाल में चल रहा था वह आईसीयू में भर्ती थे. केंद्रीय मंत्री के निधन के बाद सियासी गलियारों में शोक है. लोग उनके निधन पर दुख जता रहे हैं. 

कहा जाता था राजनीति का मौसम वैज्ञानिक
रामविलास पासवान लंबे समय से बीमार चल रहे थे. उन्होंने राजनीति में एक लंबा समय बिताया है. रामविलास पासवान वीपी सिंह, एचडी देवेगौड़ा, इंद्रकुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी इन सभी प्रधानमंत्रियों के ‘कैबिनेट’ में अपनी जगह बनाने वाले शायद एकमात्र व्यक्ति थे.
केंद्र की अधिकतर सरकारों में मंत्री रहे पासवान ने कई सरकारों में अहम भूमिका भी निभाई थी. उन्हें राजनीति का मौसम वैज्ञानिक कहा जाता था.

जब गिनीज बुक में दर्ज हुआ नाम
साल था 1977,  देश में लोक सभा चुनाव थे. उस चुनाव में राम विलास पासवान ने जनता पार्टी के टिकट पर हाजीपुर की सीट से कांग्रेस उम्मीदवार को सवा चार लाख से ज़्यादा मतों से हराकर पहली बार लोकसभा में पैर रखा था. सब कुछ एक तरफ पासवान की जीत एक तरफ, दरअसल, खबर बनी कि बिहार की एक सीट पर किसी नेता ने इतने ज़्यादा अंतर से चुनाव जीता कि उसका नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल हो गया.

राफेल विमान ने पहली बार दिखाया दम, अपाचे-तेजस-चिनूक भी छाए

आज मनाया गया 88वां वायुसेना दिवस

हिंडन एयरबेस पर फ्लाइ पास्ट में दिखा दम

राफेल, अपाचे और तेजस विमान ने दिखाई ताकत

देश की शान वायुसेना ने गुरुवार को अपना 88वां स्थापना दिवस मनाया. इस मौके पर गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर कार्यक्रम हुआ, जिसमें वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने देश को संबोधित किया. लेकिन इस कार्यक्रम में आकर्षण का केंद्र रहा राफेल लड़ाकू विमान, जिसने पहली बार इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया. फ्रांस से हाल ही में आए पांच राफेल लड़ाकू विमानों में से दो विमान यहां मौजूद रहे, जिसमें से एक ने उड़ान भरी. राफेल ने जब आसमान में अपना दम दिखाया, तो हर कोई देखता रह गया. राफेल के साथ जगुआर लड़ाकू विमानों ने फॉर्मेशन तैयार की थी, जो कि शानदार नज़ारा रहा. इस दौरान राफेल ने आसमान में करतब दिखाए.

राफेल लड़ाकू विमान (PTI)

राफेल लड़ाकू विमान के अलावा सुखोई, मिग, ग्लोबमास्टर, अपाचे, चिनूक हेलिकॉप्टर ने भी आसमान में अपनी ताकत दिखाई. इस बार फ्लाइ पास्ट में कुल 56 विमान शामिल हुए, जिनमें देशी-विदेशी कई लड़ाकू और अन्य विमान-हेलिकॉप्टर शामिल रहे. इनके अलावा सूर्यकिरण और सारंग टीम ने भी अपनी ताकत का एहसास करवाया.वायुसेना प्रमुख ने देश को दिलाया भरोसा देश को संबोधित करते हुए वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने सुरक्षा का भरोसा दिलाया. साथ ही कहा कि हमारे क्षेत्र में खतरा बढ़ता जा रहा है, पड़ोसी देश के जरिए आतंकियों के खतरे को बढ़ाया जा रहा है तो वही साइबर स्पेस के चलते भी हमें नई चुनौतियां देखने को मिल रही हैं. वायुसेना हर मोर्चे पर अपने आप को तैयार कर रही है, साथ ही बॉर्डर पर पैनी निगाहें बनाई हुई है.  वायुसेना प्रमुख ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों ने हमें और ताकतवर तैयारी करने के लिए सजग किया है. वायुसेना लगातार अपने बेड़े में नए विमानों को शामिल कर रही है, अपाचे और राफेल इसका ही उदाहरण हैं. कई पुराने एयरक्राफ्ट का अपग्रेडेशन भी किया जा रहा है.बालाकोट के वीरों का किया गया सम्मान यहां कार्यक्रम में वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने दो दर्जन से अधिक वायुवीरों का सम्मान किया. इसमें वो जवान भी शामिल रहे, जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट में हुई एयरस्ट्राइक में अहम रोल निभाया था. इनमें एक महिला और दो पुरुष जवान शामिल रहे. 

ड्रैगन पर फिर बरसे डोनाल्ड ट्रंप, कहा- कोरोना वायरस के लिए चीन को बड़ी कीमत चुकानी होगी

कोरोना वायरस से संक्रमित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं। इस बीच देश के नाम वीडियो संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को कोरोना महामारी के लिए चीन को दोषी ठहराया और कहा कि चीन ने दुनिया के साथ जो किया है, उसे उसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी। 

डोनाल्ड ट्रंप ने ट्विटर पर अपने एक वीडियो संदेश में कहा कि मुझे जो ट्रीटमेंट मिला है, उसे मैं आपलोगों के लिए उपलब्ध करवाना चाहता हूं और मैं इसे मुक्त करने जा रहा हूं। आपको इसके लिए भुगतान करने की जरूरत नहीं। जो हुआ, इसमें आपकी गलती नहीं है। यह चीन की गलती है। इस देश और दुनिया के साथ चीन ने जो किया है, वह इसकी एक बड़ी कीमत चुकाने जा रहा है। 

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका कोरोना वायरस संक्रमण एक तरह से ईश्वर का आशीर्वाद था, क्योंकि इसने उन्हें बीमारी के इलाज के लिए संभावित दवाओं के बारे में शिक्षित किया।

सोमवार को वाल्टर रीड से लौटने के बाद पहली बार ट्रंप ने वीडियो संदेश जारी किया है, जहां उन्हें कोरोना के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। जिस तरह से डोनाल्ड ट्रंप को कोरोना वायरस का उपचार दिया गया, उसकी उन्होंने प्रशंसा की और अमेरिकियों को मुफ्त दवाइयां (कोरोना के उपचार के लिए) प्रदान करने का आश्वासन दिया।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह डोनाल्ड ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे। जिसके बाद ट्रंप को आर्मी अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। चार दिन बाद वह फिर व्हाइट हाउस लौट आए थे। बता दें कि 3 नवंबर को अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव है। 

सोशल मीडिया फाउंडेशन की कोर कमेटी की बैठक संपन्न .


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शिवपुरी ।सोशल मीडिया फाउंडेशन(रजि.) की कोर कमेटी की बैठक आज दोपहर 12 से 2बजे तक शिवपुरी होटल के सभाकक्ष में राष्ट्रीय अध्यक्ष बलराम शर्मा की अध्यक्षता में एवं हरियाणा प्रदेश इकाई के प्रभारी राजकुमार सैनी के मुख्यातिथि मे संपन्न हुई।

बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप शिवहरे जोनू , संयुक्त सचिव एवं प्रदेश के प्रभारी अशोक जैन, प्रदेश कोर कमेटी के सदस्य उम्मेद झा, मयंक अरोरा, हेमंत शर्मा,अतुल,गोपाल त्यागी इत्यादि ने सर्व सहमति से प्रांतीय सम्मेलन के आयोजन पर विचार किया गया जनवरी 2021 माह में प्रांतीय सम्मेलन भोपाल में आयोजित किया जायेगा ।इसका निर्णय लिया गया।
मध्यप्रदेश सदस्यता विस्तार पर भी चर्चा हुई ।प्रदेश कोर कमेटी बनाने पर भी विचार विर्मश किया गया।बैठक का संचालन सचिव डा.भूपेन्द्र विकल ने किया आभार व्यक्त कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप शिवहरे जोनू ने किया.
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नवजोत सिद्धू को कांग्रेस ने दिया जोर का झटका, पंजाब प्रभारी रावत बोले- उनके लिए पार्टी में जगह नहीं

चंडीगढ़, । पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और फायर ब्रांड नेता नवजोत सिंह सिद्धू को उनकी पार्टी ने बड़ा झटका दिय है। हाल ही में सिद्धू को ‘कांग्रेस का भविष्य’ बताने वाले पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत की राय बदल गई है। उन्होंने कहा है कि सिद्धू के लिए अभी पार्टी और राज्‍य सरकार में कोई जगह नहीं है। रावत के इस बयान से सिद्धू के कांग्रेस में फिर से स्‍थापित होने की उम्‍मीदों को झटका लगा है। दरअसल, कांग्रेस सिद्धू के राहुल गांधी की ट्रैक्‍टर यात्रा में अपनी ही राज्‍य सरकार पर हमला करने से नाराज है।

हरीश रावत ने कहा- सिद्धू के लिए अभी पार्टी व सरकार में कोई वेकेंसी नहीं

हरीश रावत ने कहा कि पंजाब कांग्रेस की कमान सुनील जाखड़ के हाथ में है और पंजाब सरकार में उन्हें लेने या न लेने का फैसला मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को करना है। ऐसे में आज की तारीख में नवजोत सिंह सिद्धू के लिए पार्टी या सरकार में कोई वेकेंसी नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में उनका बेहतर उपयोग किया जाएगा। रावत का यह बयान राहुल गांधी की पंजाब में खेती बचाओ यात्रा खत्म होने के बाद आना बेहद महत्‍वपूर्ण है।

मोगा में राहुल गांधी की रैली में अपनी ही सरकार पर निशाना साधने से सिद्धू से कांग्रेस नाराज

गौरतलब है कि 4 अक्टूबर को मोगा में राहुल गांधी की रैली में सिद्धू ने जिस तरह अपनी ही सरकार पर हमला बोला था, उससे पंजाब कांग्रेस के नेता असहज हो गए थे। इससे अंदरखाते पार्टी काफी नाराज है। यही कारण था कि मोगा रैली के बाद सिद्धू को बाकी जगह बोलने का मौका नहीं दिया गया। हरीश रावत का कहना है कि उन्हें पटियाला में बुलाया जाना था, लेकिन राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन होने की वजह से टाइमिंग में बदलाव करना पड़ा।
ठंडी पड़ी कयासबाजी

राहुल गांधी की रैली से पहले जिस प्रकार हरीश रावत मान-मनोव्‍वल कर नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस के मंच पर लेकर आए, उसके बाद से यही कयास लगाए जा रहे थे कि आने वाले समय में पंजाब कांग्रेस में कोई बड़ा बदलाव हो सकता है। अब रावत के बयान के बाद यह कयासबाजी ठंडी पड़ गई है।

मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष को लेकर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि पार्टी के पास कई ऐसे नेता हैं, जिन्होंने एनएसयूआइ से पार्टी के लिए काम किया है। ऐसे में 2017 में आने वाले को प्रधान कैसे बनाया जा सकता है। भविष्य में उनके क्या उपयोग होगा। इस पर रावत ने कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा।

कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए रतनगढ़ की माता मंदिर पर दर्शनार्थियों के आने पर रोक

दतिया। उच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में एवं जन समुदाय के स्वास्थ्य की रक्षा को देखते हुए आगामी माह में आयोजित होने वाले धार्मिक त्योहारों पर अनयंत्रित उपस्थिति को दृष्टिगत रखते हुए जिले के सेवढ़ा अनुभाग के रतनगढ़ माता मंदिर एवं कुँअर बाबा मंदिर पर आगामी आदेश पर्यन्त तक दर्शनार्थियों की आमद प्रतिबंधित की गई है। 

अनुविभागीय अधिकारी सेवढ़ा अनुराग निगवाल ने इस संबंध में जारी आदेश में उल्लेख किया है कि पूर्व में 29 सितम्बर को जारी आदेश में रतनगढ़ माता मंदिर, कुँअर बाबा मंदिर श्रृद्धालुओं एवं दर्शनार्थियों के दर्शनार्थ खोले गए थे। लेकिन रतनगढ़ माता मंदिर, कुँअर बाबा मंदिर पर श्रृद्धालुओं की अनियंत्रित भीड़ को देखते हुए तहसीलदार सेवढ़ा एवं इन्दरगढ़ और थाना प्रभारी अतरेंटा के द्वारा कोविड-19 के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए माता मंदिर बंद करने की अनुशंसा की गई है। उच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में एवं जन समुदाय के स्वास्थ्य की रक्षा को ध्यान में रखते हुए अन्य आदेश पर्यन्त दर्शनार्थियों की आमद प्रतिबंधित की गई है। यह आदेश जनहित में आपदा प्रबंधन की दृष्टि से तत्काल प्रभाव से प्रभावित होगा। 

जानिए क्या है पीएफआई?, क्या हैं इनके दावे? क्यों उठ रही है इसको बैन करने की मांग

नई दिल्ली, । ऐसा शायद ही कोई मौका हो जब देश में माहौल खराब करने के मामले में पीएफआइ का नाम सामने न आए। चाहे बाबरी मस्जिद गिराए जाने के समय की बात हो या इस साल सीएए और एनआरसी को लेकर माहौल खराब करने का मामला हो, पीएफआइ इन चीजों के लिए जिम्मेदार ठहराई जाती रही है।

अब हाथरस कांड के बाद एक बार फिर से पीएफआइ का नाम सामने आ रहा है। कहा जा रहा है कि पीएफआइ ऐसे मौके पर मोटी रकम खर्च करके प्रदेश का माहौल खराब करने की तैयारी में था मगर खुफिया एजेंसियों की सतर्कता की वजह से वो अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाए।

क्या है पीएफआई? क्या हैं इसके दावे 

पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया या पीएफआई एक चरमपंथी इस्लामिक संगठन है। संगठन अपने को पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक में आवाज उठाने वाला बताता है। बताया जाता है कि संगठन की स्थापना 2006 में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF)के उत्तराधिकारी के रूप में हुई। संगठन की जड़े केरल के कालीकट में गहरी हैं। फिलहाल इसका मुख्यालय दिल्ली के शाहीन बाग में बताया जा रहा है। शाहीन बाग वो ही इलाका जहां पर सीएए और एनआरसी के विरोध में पूरे देश में सबसे लंबा आंदोलन चला था।

एक मुस्लिम संगठन होने के कारण इस संगठन की ज्यादातर गतिविधियां मुस्लिमों के इर्द गिर्द ही घूमती हैं। कई ऐसे मौके ऐसे भी आए हैं जब इस संगठन से जुड़े लोग मुस्लिम आरक्षण के लिए सड़कों पर आए हैं। संगठन 2006 में उस समय सुर्ख़ियों में आया था जब दिल्ली के रामलीला मैदान में इनकी तरफ से नेशनल पॉलिटिकल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। तब लोगों की एक बड़ी संख्या ने इस कांफ्रेंस में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।

फिलहाल कहा जा रहा है कि इस संगठन की जड़े देश के 24 राज्यों में फैली हुई है। कहीं पर इसके सदस्य अधिक सक्रिय हैं तो कहीं पर कम। मगर मुस्लिम बहुल इलाकों में इनकी जड़े काफी गहरी है इससे इनकार नहीं किया जा रहा है। संगठन खुद को न्याय, स्वतंत्रता और सुरक्षा का पैरोकार बताता है और मुस्लिमों के अलावा देश भर के दलितों, आदिवासियों पर होने वाले अत्याचार के लिए समय समय पर मोर्चा खोलता है। 

एनडीएफ के अलावा कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी , तमिलनाडु के मनिथा नीति पासराई , गोवा के सिटिजन्स फोरम, राजस्थान के कम्युनिटी सोशल एंड एजुकेशनल सोसाइटी, आंध्र प्रदेश के एसोसिएशन ऑफ सोशल जस्टिस समेत अन्य संगठनों के साथ मिलकर पीएफआई ने कई राज्यों में अपनी पैठ बना ली है। इस संगठन की कई शाखाएं भी हैं। जिसमें महिलाओं के लिए- नेशनल वीमेंस फ्रंट और विद्यार्थियों के लिए कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया। गठन के बाद से ही इस संगठन पर कई समाज विरोधी व देश विरोधी गतिविधियों के आरोप लगते रहे हैं। 

पीएफआई का विवादों से पुराना नाता

पीएफआई का विवादों से पुराना नाता हैं। इसे स्‍टूडेंट्स इस्‍लामिक मूवमेट ऑफ इंडिया यानी सिमी की बी विंग कहा जाता है। साल 1977 में संगठित की गई सिमी को 2006 में प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद माना जाता है कि मुसलमानों, आदिवासियों और दलितों का अधिकार दिलाने के नाम पर इस संगठन का निर्माण किया गया।

ऐसा इसलिए माना जाता है कि पीएफआई की कार्यप्रणाली सिमी जैसी ही थी। साल 2012 में भी इस संगठन को बैन करने की मांग उठ चुकी है। उसके बाद इस साल यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने भी संगठन को बैन करने की मांग की थी। इसके लिए गृह मंत्रालय को पत्र भी लिखा गया है मगर अब तक परमीशन नहीं मिली है। 

मालूम हो कि केरल सरकार ने इस संगठन का बचाव करते हुए केरल हाईकोर्ट को दलील दी थी कि यह सिमी से अलग हुए सदस्‍यों का संगठन है, जो कुछ मुद्दों पर सरकार का विरोध करता है। सरकार के दावों को कोर्ट ने खारिज करते हुए प्रतिबंध को बरकरार रखा था। इतना ही नहीं पूर्व में इस संगठन के पास से केरल पुलिस द्वारा हथियार, बम, सीडी और कई ऐसे दस्‍तावेज बरामद किए गए थे जिसमें यह संगठन अलकायदा और तालिबान का समर्थन करती नजर आयी थी। 

यूपी में पीएफआई को बैन करना आवश्‍यक

इस संगठन के कार्यकर्ताओं का नाम लव जिहाद से लेकर दंगा भड़काने, शांति को प्रभावित करने तक के मामले में काफी पहले भी आ चुका है। माना जाता है कि संगठन एक आतंकवादी संगठन है जिसके तार कई अलग-अलग संगठनों से जुड़े हैं।

केंद्रीय एजेंसियों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से साझा किए गए ताजा खुफिया इनपुट और गृह मंत्रालय के मुताबिक, यूपी में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के दौरान शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, वाराणसी, आजमगढ़ और सीतापुर क्षेत्रों में पीएफआई सक्रिय रहा है। दंगे भड़काने में भी इनकी भूमिका रही है। माहौल को खराब करने के लिए संगठन हर तरह की मदद करने में आगे रहता है। 

भिलाई इस्पात संयंत्र में फिर दुर्घटना, कन्वेयर बैटरी टूटकर गिरी

भिलाई। : भिलाई इस्पात संयंत्र में बुधवार की रात फिर एक बार बड़ी दुर्घटना टल गई। यहां उत्पादन के दौरान अचानक कोक ओवन बैटरी क्रमांक-9 की दो जर्जर कन्वेयर बैटरी टूटकर गिर गई। इससे कोक बनाने की प्रक्रिया ठप हो गई है और इस्पात का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। जनसंपर्क विभाग का कहना है कार्मिक सुरक्षित हैं। घटना के कारणों की जांच की जा रही। हालांकि कार्मिकों का कहना है कि गैलरी जर्जर थी। प्रबंधन भी इसे खतरनाक मानते हुए मरम्मत कार्य करा रहा था, तभी रात में गैलरी गिर गई। इस घटना में किसी कार्मिक को कोई चोट नहीं आई है।

बता दें कि भिलाई इस्पात संयंत्र ने लाकडाउन अवधि में इस्पात उत्पादन को कम कर दिया था। इसके चलते कोक ओवन बैटरी क्रमांक-5 का उत्पादन मार्च में बंद कर दिया था। मौके का फायदा उठाते हुए प्रबंधन ने बैटरी का मरम्मत कार्य शुरू कराया। खराब हो रहे सामान को बदलने का सिलसिला शुरू हुआ। महत्वपूर्ण सामान बदल दिए गए। करीब छह माह तक नवीनीकरण का कार्य चला। अब फिर से उत्पादन शुरू कर दिया गया है।

एक तरफ इस्पात संयंत्र के विस्तार की प्रक्रिया चल रही है तो दूसरी ओर छह दशक पुराने संयंत्र की पुरानी अधोसंरचना अब जर्जर हो चुकी है। आए दिन इसकी वजह से दुर्घटनाएं होती रहती हैं। पिछले दिनों संयंत्र में इसी तरह की दुर्घटनाओं में कुछ लोगों की मौतें भी हुई हैं। भिलाई इस्पात संयंत्र को बरकरार रखने के लिए इसकी पुरानी मशीनरी और सिस्टम का पूरी तरह नवीकरण बेहद जरूरी है।

राहुल के ‘हमारी सरकार होती तो 15 मिनट में चाइना को उठाकर फेंक देते’ बयान के बाद सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने लगा अक्साई चिन

नई दिल्ली
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव (India-China tension at Ladakh) के मुद्दे पर लगातार मोदी सरकार पर हमलावर हैं। मई में तनाव की शुरुआत के बाद से ही वह भारत की जमीन पर चीन के कब्जा करने के आरोप लगा रहे हैं। अब तो उन्होंने पीएम मोदी को ‘कायर’ करार देते हुए दावा किया है कि (Rahul Gandhi attacks PM Modi) अगर उनकी सरकार होती तो 15 मिनट नहीं लगते चाइना को उठाकर फेंकने में। उनके इस दावे के बाद सोशल मीडिया खासकर ट्विटर पर अक्साई चिन ट्रेंड करने लगा है और राहुल गांधी ट्रोल हो रहे हैं। बीजेपी ने भी उन पर हमला बोला है। यूजर्स पूछ रहे हैं कि चीन ने अक्साई चिन को किसकी सरकार रहते हड़पा था। बता दें कि अक्साई चिन जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है लेकिन उस पर चीन का अवैध कब्जा है। जवाहर लाल नेहरू के प्रधानमंत्री रहते ड्रैगन ने उस पर अवैध कब्जा किया था।

एक यूजर ने तो 1962 की जंग में भारत की हार के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के उस चर्चित बयान का हवाला देकर राहुल पर तंज कसा जिसमें तत्कालीन पीएम ने कहा था कि अक्साई चिन में घास का एक तिनका भी नहीं उगता। यूजर्स ने लिखा, ‘वहां घास का एक तिनका भी नहीं उगता’- दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री। पंडित नेहरू के उस बयान पर तत्कालीन सांसद महावीर त्यागी ने संसद में अपने गंजे सिर को दिखाते हुए पूछा था कि तिनका तो यहां भी नहीं है तो क्या मैं इसे काटकर फेंक दूं या किसी और को दे दूं।

क्या कहा था राहुल गांधी ने

दरअसल राहुल गांधी ने मंगलवार को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में किसान रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कायर बताया था। उन्होंने कहा था, ‘जब हमारी सरकार थी, मैं आपको गारंटी देता हूं, चाइना में इतना दम नहीं था कि वो हमारे देश में एक कदम भी डाल दे। आज पूरी दुनिया में एक ही देश है जिसके अंदर कोई और देश की सेना आई। 1200 वर्ग किलोमीटर ले गई और कायर प्रधानमंत्री कहता है कि इस देश की जमीन किसी ने नहीं ली। पूरी दुनिया में एक ही देश है जिसकी जमीन हड़पी गई, वह है हिंदुस्तान’ उन्होंने आगे कहा, ‘…मैं आपको बता रहा हूं कि हमारी सरकार होती न तो उठाकर फेंक देते चाइना को बाहर।…15 मिनट लगते बस।’

पीएम को कायर बताने पर बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने गांधी-नेहरू परिवार को ही कायर, तानाशाह और भ्रष्ट बता दिया। मालवीय ने ट्वीट किया, ‘तो कायर नेहरू के परनाती, तानाशाह इंदिरा के नाती, लूजर राजीव और भ्रष्ट सोनिया के बेटे ने यह बात कही।’

जानी-मानी वरिष्ठ पत्रकार तवलीन सिंह ने भी राहुल गांधी के बयान को बचकाना बताया है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘राहुल गांधी का किसी अपरिपक्व स्कूली बच्चे जैसा बर्ताव जारी है।’

लेखिका शेफाली वैद्य ने सवाल किया, ‘वाकई, पहली बात तो यह कि अक्साई चिन के लिए कौन जिम्मेदार था? क्या राहुल गांधी को लगता है कि इस देश में हर कोई उनकी तरह ही झूठा मूर्ख है?’

ऐसा पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने पूर्वी लद्दाख में चीनी अतिक्रमण को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है। हालांकि, मोदी सरकार चीनी सैनिकों के भारतीय भू-भाग में होने की बात से इनकार करती आई है।

उनके हमलों पर बीजेपी भी पलटवार करती आई है और उन्हें अक्साई चिन की याद दिलाती है। जून में जब राहुल गांधी ने भारतीय जमीन पर चीन के कब्जे का आरोप लगाया था तब लद्दाख से बीजेपी सांसद ने पलटवार करते हुए कहा था कि हां, चीन ने हमारी जमीन पर कब्जा किया है। 1962 में कांग्रेस शासन के दौरान 37,244 वर्ग किलोमीटर अक्साई चिन। इसके अलावा कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार के दौरान भी चीन ने भारत की जमीन पर कब्जा किया।