एयरफोर्स की पाक-चीन को चेतावनी:वायुसेना प्रमुख ने कहा- दो मोर्चों पर जंग के लिए भी हम तैयार

वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने सोमवार को साफ कहा कि उत्तरी इलाके में मौजूदा हालातों में चीन के पास ऐसा कोई रास्ता नहीं कि वो हमें हरा सके। लद्दाख में हमारी पोजिशन मजबूत है और दो मोर्चों पर जंग के लिए भी तैयार हैं।

भदौरिया ने कहा कि मौजूदा समय में पड़ोसियों की तरफ से बढ़ रहे खतरे को देखते हुए हमें मजबूती के साथ जंग के हर मोर्चे पर पूरी क्षमता से लड़ने की जरूरत है। मैं भरोसा दिलाता हूं कि ऑपरेशनली हम बेस्ट हैं।

लद्दाख में तैनाती के बारे में एक सवाल के जवाब में एयरफोर्स ची‌फ ने कहा- हमने सभी जरूरी ऑपरेशनल लोकेशन पर तैनाती की है। हमारी पोजिशन अच्छी है और तनाव बढ़ता है तो चीन को बेहतर जवाब मिलेगा।

‘वायुसेना किसी भी विवाद से निपटने को तैयार’

भदौरिया के मुताबिक, वायुसेना किसी भी विवाद से निपटने के लिए तैयार है। अगर दो मोर्चों पर जंग होती है तो उस स्थिति में भी हम लड़ने के लिए मुस्तैद हैं। हमने रिकॉर्ड समय में राफेल, अपाचे और चिनूक को ऑपरेशन में शामिल किया और इन्हें अपने कॉन्सेप्ट से जोड़ा। अगले तीन साल में राफेल और एलसीए मार्क-1 स्क्वॉड्रन अपनी पूरी क्षमता के साथ ऑपरेट करेगी और इसके साथ एडिशनल मिग-29 भी शामिल होंगे, जिनका ऑर्डर किया जा रहा है। हमने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट में भरोसा दिखाया है और अगले 5 साल में हम 83 एलएसी मार्क 1-ए को शामिल करने की शुरुआत करेंगे।

एयरफोर्स डे पर ताकत दिखाएगा राफेल

8 अक्टूबर को पहली बार राफेल इंडियन एयरफोर्स डे परेड में शामिल होगा और आसमान में ताकत दिखाएगा। राफेल 4.5 जनरेशन का फाइटर जेट है।

24 घंटे में मिले कोरोना के 61,267 नए केस, 884 मरीज़ों की हुई मौत

नई दिल्ली. भारत में कोरोना वायरस   के संक्रमितों की संख्या 66 लाख 85 हजार से अधिक हो गई है. पिछले 24 घंटे के अंदर 61 हजार 267 लोग संक्रमित पाए गए, वहीं सोमवार को 884 मरीजों की मौत भी हो गई. यह लगातार तीसरा दिन था जब संक्रमण (Covid-19 Infected) से मरने वालों की संख्या 1 हजार से कम है. अब तक 1 लाख 3 हजार 569 मरीजों की मौत हो चुकी है. सोमवार को 75 हजार 675 मरीजों को ठीक होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया. अब तक 56 लाख 62 हजार 491 लोग ठीक हो चुके हैं. पिछले 26 दिनों में एक्टिव केस सबसे निचले स्तर पर आ गया है. 10.17 लाख से घटकर ये 9.19 लाख पहुंच गया है. देश में अभी 9 लाख 19 हजार 023 मरीज (Active Case) ऐसे हैं, जिनका इलाज चल रहा है.

आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक महीने में यानी 4 सितंबर से 4 अक्टूबर तक देश में 28.77 लाख से ज्यादा नए केस बढ़े. 27.91 लाख से ज्यादा लोग ठीक होकर अपने घर गए, जबकि 37 हजार 687 मरीजों की मौत हो गई. इस तरह रिकवर हुए मरीजों की संख्या अधिक होने के चलते एक्टिव केस यानी ऐसे मरीजों की संख्या जिनका अभी इलाज चल रहा है, वो बढ़ने की बजाय घटने लगे. एक महीने में ऐसे 88 हजार 566 एक्टिव केस कम हुए हैं.

कोरोना से प्रभावित प्रमुख राज्यों का हाल:-

महाराष्ट्र में सोमवार को 10 हजार 244 लोग संक्रमित मिले और 12 हजार 982 मरीजों को इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया. अब तक 14 लाख 53 हजार 653 लोग संक्रमित हो चुके हैं. इनमें 2 लाख 52 हजार 277 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है, जबकि 11 लाख 62 हजार 585 लोग ठीक हो चुके हैं.

>>दिल्ली में अब तक कुल 2,92,560 लोग संक्रमित हुए हैं. इनमें से 2,63,938 स्वस्थ हो चुके हैं. सोमवार को संक्रमण से 32 मरीजों की मौत हो गई, जबकि 1947 नए कोरोना संक्रमित मरीज मिले. वहीं, कुल 5542 लोग संक्रमण की चपेट में आने से अपनी जान गंवा चुके हैं. फिलहाल 23080 सक्रिय मरीज हैं.

उत्तर प्रदेश में सोमवार को 2,971 नए मामले सामने आए और 4,269 लोग ठीक होकर अपने घर गए. अब तक 4 लाख 17 हजार 437 लोग संक्रमित हो चुके हैं. इनमें अभी 45 हजार 24 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि 3 लाख 66 हजार 321 लोग ठीक हो चुके हैं. अब तक 6,092 मरीज जान गंवा चुके हैं.

>>बिहार में पिछले 24 घंटे के अंदर 907 लोग संक्रमित पाए गए. 9 मरीजों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. राज्य में अब तक 1 लाख 88 हजार 858 लोग संक्रमित हो चुके हैं. इनमें 1 लाख 76 हजार 674 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 11 हजार 259 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है. अब तक 924 मरीजों की मौत हो चुकी है.

अब तक कितनी टेस्टिंग?

ICMR के मुताबिक, 5 अक्टूबर तक कोरोना वायरस के कुल 8,10,71,797 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं, जिनमें से 10,89,403 सैंपल की टेस्टिंग कल की गई. पॉजिटिविटी रेट करीब सात फीसदी है.

दुनिया में कोरोना के 3.56 करोड़ से ज्यादा केस

दुनिया में संक्रमितों का आंकड़ा 3.56 करोड़ से ज्यादा हो गया है. ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 2 करोड़ 68 लाख 59 हजार 709 से ज्यादा हो चुकी है. मरने वालों का आंकड़ा 10.33 लाख के पार हो चुका है. ये आंकड़े www.worldometers.info/coronavirus के मुताबिक हैं. यूरोपीय देशों में संक्रमण की दूसरी लहर घातक साबित हो रही है. फ्रांस इससे सबसे ज्यादा प्रभावित है.

ड्रैगन को जमीन से लेकर समुद्र तक घेरने की तैयारी, आज म‍िल रहे Quad देश तो भड़का चीन

पेइचिंग
पूर्वी लद्दाख से लेकर ऑस्‍ट्रेलिया तक दादागिरी पर उतारू चीनी ड्रैगन पर नकेल कसने के लिए दुनिया के 4 शक्तिशाली देश आज जापान की राजधानी तोक्‍यो में बड़ी बैठक करने जा रहे हैं। भारत-ऑस्‍ट्रेलिया-अमेरिका-जापान के विदेश मंत्री ‘द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग’ (Quad) के तहत आज मुलाकात करने जा रहे हैं जिसमें चीन की बढ़ती आक्रामकता का मुद्दा प्रमुखता से उठने जा रहा है। उधर, क्‍वॉड की इस बैठक से चीन भड़क उठा है और उसने इसे ‘षडयंत्रकारियों का विशेष दल’ करार दिया है।

क्‍वॉड की बैठक से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इसमें 5G कनेक्‍टविटी, साइबर सिक्‍यॉरिटी, मैनुफैक्‍चर‍िंग सेक्‍टर के लिए एक सप्‍लाई चेन, समुद्र नौवहन के क्षेत्र में सहयोग, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर और कनेक्‍टव‍िटी के मुद्दे पर चर्चा होगी। इसके अलावा कोविड-19 वैक्‍सीन के वितरण के लिए एक अग्रिम योजना समेत उन सभी क्षेत्रों पर चर्चा होगी जहां पर चीन का विकल्‍प मुहैया कराया जा सके। यह बातचीत भारतीय समयानुसार दोपहर में करीब डेढ़ बजे शुरू होगी।

क्‍वॉड बैठक से भड़का चीन, बताया ‘मिनी नाटो’
उधर, इस बैठक से पहले ही चीन ने क्‍वॉड की बैठक को ‘षडयंत्रकारियों का विशेष दल’, चीन के खिलाफ अग्रिम मोर्चा और ‘मिनी नाटो’ करार दिया है। चीन ने कहा कि यह कोल्‍ड वॉर के समय की मानसिकता है जिसका नेतृत्‍व अमेरिका का कर रहा है। क्‍वॉड देशों के साथ ड्रैगन का तनाव बढ़ता जा रहा है और चीन के इन बयानों ने उसके इरादों को साफ कर दिया है। क्‍वॉड की इस बैठक और उसके परिणामों पर चीन की पूरी नजर रहेगी।

ड्रैगन के ख‍िलाफ एशियाई नाटो बनाने की तैयारी!
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक क्‍वाड की इस बैठक में शुरुआत में ‘क्षेत्रीय आकलन’ किया जाएगा जिसमें दक्षिण और पूर्वी चीन सागर, लद्दाख में 6 महीने से चल रहा गतिरोध, हॉन्‍ग कॉन्‍ग और ताइवान के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। चारों देशों के नेता अंडमान सागर के पास नवंबर में होने वाले मालाबार नौसैनिक अभ्‍यास में ऑस्‍ट्रेलिया को शामिल करने पर चर्चा करेंगे। हालांकि इसमें अभी ऑस्‍ट्रेलिया को शामिल करने पर कोई फैसला नहीं हुआ है। ऑस्‍ट्रेलिया के शामिल होने की घोषणा भारत का रक्षा मंत्रालय करेगा। माना जा रहा है कि मालाबार अभ्‍यास से ‘एशियाई नाटो’ बनाने का रास्‍ता साफ हो सकता है।

चीन से अलग सप्‍लाइ चेन बनाने पर बनेगी रणनीति

इस बैठक में चारों देश चीन से अलग एक सप्‍लाइ चेन बनाने पर बात करेंगे ताकि ड्रैगन की मनमानी को काबू में किया जा सके। इसे जापान आगे बढ़ा रहा है ताकि भारत और ऑस्‍ट्रेलिया की मदद से चीन पर से निर्भरता को कम किया जा सके। इस बैठक में भारत से आसियान देशों के बीच ‘ईस्‍ट-वेस्‍ट’ कनेक्‍टविटी को बढ़ाने पर जयशंकर जोर देंगे ताकि चीन के नॉर्थ-साउथ कनेक्‍टविटी को करारा जवाब दिया जा सके। इसके अलावा इंडो-पैसफिक क्षेत्र में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर परियोजनाओं के संयुक्‍त फंड‍िंग पर भी विचार किया जाएगा।

इस बैठक में हिस्‍सा लेने के लिए चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने विशेष प्रयास किए। खासतौर पर ट्रंप प्रशासन इस बैठक को लेकर काफी उत्‍सुक है। बैठक से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा, ‘यह बहुत शानदार यात्रा होने जा रही है। इसको अमलीजामा पहनाने के लिए हम लंबे समय से काम कर रहे थे और यह बैठक उसी के समर्थन में हो रही है। अपने क्‍वॉड पार्टनर के साथ मुलाकात करने की योजना की हम तैयारी कर रहे थे। हम आशा करते हैं कि कई महत्‍वपूर्ण घोषणाएं और उपलब्धियां हासिल होंगी।’

चीन के खिलाफ साझा रणनीति बनाने पर होगी सहमति!
भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्‍ट्रेलिया की यह बैठक अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव से ठीक पहले हो रही है। माना जा रहा है कि इसमें चीन पर एक साझा समझ बनेगी और भविष्‍य में उठाए जाने वाले कदमों का खाका तैयार होगा। इस बैठक के महत्‍व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि डोनाल्‍ड ट्रंप बीमार हैं और उन्‍हें छोड़कर माइक पोम्पियो जापान पहुंचे हैं। दरअसल, कोरोना महामारी पर पूरी दुनिया में घिरे चीन के दोस्तों की फेहरिस्त घटती जा रही है।

अमेरिका, भारत, जापान सहित दुनिया के कई बड़े देश अब उसके खिलाफ हो रहे हैं। ऐसे में चीन के खिलाफ NATO और EU की तरह एक मजबूत मोर्चा बनाने की कवायद काफी तेज हो गई है। अमेरिका, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया और भारत ‘द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग’ (क्‍वॉड) को चीन के खिलाफ मजबूत गठबंधन के तौर पर तैयार करने में जुटे हैं। चीन की विस्तारवादी नीति के कारण उसके ज्यादातर पड़ोसी देश उससे खफा हैं। चीन के खिलाफ इस गठबंधन में कनाडा के भी शामिल होने की खबरें हैं। कनाडा की हाल के महीने में भारत के साथ काफी चर्चाएं हुई हैं और उसने SCS में ताईवान के रास्ते एक जंगी जहाज भी भेजा है।

ऑस्ट्रेलिया के कारण क्‍वॉड के गठन में हुई थी देरी

इस संगठन को पहली बार साल 2007 में स्थापित करने का ऐलान किया गया था, लेकिन 2008 में आई भीषण आर्थिक मंदी के कारण ऐसा हो न सका। उस समय ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री केविन रूड थे जो चीन के करीबी माने जाते थे। उनके कार्यकाल के दौरान ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच संबंध बेहद मजबूत हुए थे। रूड खुद चीनी भाषा मंडारिन भी बहुत अच्छी तरह बोलते थे। ऐसे में उन्होंने इस गुट में शामिल होने से खुद को अलग कर लिया था।

कभी क्‍वॉड की सबसे कमजोर कड़ी था भारत

क्‍वॉड की दूसरी सबसे कमजोर कड़ी भारत को माना जाता था। इसकी वजह दोनों देशों के बीच होने वाला आर्थिक व्यापार था। 2014 में जब भारत में सत्ता परिवर्तन हुआ उसके बाद से राष्ट्रवाद की भावना भी तेजी से बढ़ी। 1962 के बाद से ही भारत में चीन को शक की निगाह से देखा जाता रहा है। हाल में जब चीन ने लद्दाख के क्षेत्र में घुसपैठ की और गलवान की घटना को अंजाम दिया तब भारत का ड्रैगन से पूरा मोहभंग हो गया। इसी कारण भारत और अमेरिका भी तेजी से करीब आए।

क्या है क्‍वॉड जानिए

द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग (क्‍वॉड) की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। हालांकि इसकी शुरुआत वर्ष 2004-2005 हो गई जब भारत ने दक्षिण पूर्व एशिया के कई देशों में आई सुनामी के बाद मदद का हाथ बढ़ाया था। क्‍वाड में चार देश अमेरिका, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया और भारत शामिल हैं। मार्च में कोरोना वायरस को लेकर भी क्वॉड की मीटिंग हुई थी। इसमें पहली बार न्यूजीलैंड, द. कोरिया और वियतनाम भी शामिल हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हाथरस कांड की CBI जांच चाहती है योगी सरकार

उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित युवती से कथित गैंगरेप और मौत मामले में योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच चाहती है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कहा कि वह कोर्ट की निगरानी में हाथरस कांड की जांच चाहती है। योगी सरकार ने उस याचिका पर सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल कर पक्ष रखा है, जिसमें हाथरस कांड की रिटायर्ट जज की निगरानी में सीबीआई या एसआईटी से जांच कराने की मांग की गई है। हाथरस कांड मामले में दायर इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की बेंच सुनवाई करेगी।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि इस घटना की सच्चाई सामने लाने के लिए सरकार निष्पक्ष जांच के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को अपनी निगरानी में हाथरस में कथित गैंगरेप और मौत मामेल की सीबीआई जांच के निर्देश देने चाहिए। सरकार ने आगे बताया कि कानून-व्यवस्था कायम रखने और हिंसा से बचने के लिए रात में पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार किया गया। यूपी सरकार के इस हलफनामे में राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों को जाति विभाजन के प्रयास के लिए दोषी ठहराया गया है।

इसके अलावा, यूपी सरकार ने अपने हलफनामे के प्वाइंट 10 में बताया है कि और किन वजहों से रात में ही पीड़िता का अंतिम संस्कार किया। हलफनामे के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने रात के ढाई बजे पीड़िता के शव को जलाने के संदर्भ में बाबरी मस्जिद केस की वजह से जिलों को हाई अलर्ट पर रखने और कोरोना की वजह से भीड़ न इकट्ठा होने देने का भी जिक्र किया है। इसमें कहा गया है कि अयोध्या-बाबरी केस में फैसले की संवेदनशीलता और कोरोना के मद्देनजर परिवार की मंजूरी से पीड़िता का रात में अंतिम संस्कार किया गया। 

बता दें कि दिल्ली निवासी सामाजिक कार्यकर्ता सत्यम दुबे और कुछ वकीलों ने यह याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि यूपी में मामले की जांच और ट्रायल निष्पक्ष नहीं हो पाएगी। गौरतलब है कि हाथरस कांड को लेकर यूपी सरकार और पुलिस के एक्शन पर सवाल उठने लगे थे, जिसके बाद यूपी सरकार ने सोमवार को यह मामला सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया था। याचिका में उत्तर प्रदेश पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं। पुलिस के विपक्षी नेताओं के साथ टकराव और रात 2.30 बजे पीड़िता के शव के अंतिम संस्कार किए जाने का जिक्र याचिका में किया गया है। याचिका में हाथरस केस के ट्रायल को उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यूपी में मामले की जांच और सुनवाई निष्पक्ष नहीं हो पाएगी। इसलिए इसे दिल्ली ट्रांसफर किया जाए। 

इधर, उत्तर प्रदेश के हाथरस कांड के बाद तेजी से बदल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पुलिस ने जिले के चंदपा थाने में जाति आधारित संघर्ष की साजिश, सरकार की छवि बिगाड़ने के प्रयास और माहौल बिगाड़ने के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।  प्रदेश भर में इस संबंध में कुल 21 मुकदमे दर्ज किये गए हैं। दिल्‍ली से हाथरस जा रहे एक संगठन से जुड़े चार युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्‍यवस्‍था) प्रशांत कुमार के मुताबिक, हाथरस प्रकरण में हाथरस जिले के विभिन्‍न थाना क्षेत्रों में छह मुकदमों के अलावा सोशल मीडिया के विभिन्‍न प्‍लेटफार्म पर आपत्तिजनक टिप्‍पणी को लेकर बिजनौर, सहारनपुर, बुलंदशहर, प्रयागराज, हाथरस, अयोध्‍या, लखनऊ आयुक्तालय में कुल 13 मामले दर्ज किये गये हैं। दिल्‍ली से हाथरस की तरफ जा रहे चार संदिग्‍धों के विरूद्ध निरोधात्‍मक कार्रवाई करते हुए उन्‍हें गिरफ़्तार किया गया है। पुलिस का आरोप है कि ये लोग हाथरस के बहाने उत्‍तर प्रदेश को ‘जलाने की साजिश में शामिल हैं।

इस बीच मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने सख्‍त तेवर दिखाते हुए कहा, ‘न केवल देश और प्रदेश में जातीय और सांप्रदायिक दंगे फैलाने की साजिश रची जा रही है बल्कि इसकी नींव रखने के लिए विदेश से फंडिंग भी हो रही है।’

गौरतलब है कि हाथरस जिले के एक गांव में 14 सितंबर को 19 वर्षीय दलित लड़की से चार लड़कों ने कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया था। इस लड़की की बाद में 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। मौत के बाद आनन-फानन में पुलिस ने रात में अंतिम संस्कार कर दिया था, जिसके बाद काफी बवाल हुआ। परिवार का कहना है कि उसकी मर्जी से पुलिस ने पीड़िता का अंतिम संस्कार किया, वहीं पुलिस ने इन दावों को खारिज किया। 

इंडियन आर्मी और एयरफोर्स के 2 दोस्त, जिनकी वजह से तय है चीन की लद्दाख में करारी हार!

पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच हालात अप्रैल महीने से ही काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों की सेनाएं तनाव में नरमी लाने की पुरजोर कोशिशें कर रही हैं, लेकिन चीन की चालबाजी की वजह से सफलता नहीं मिल रही। इस वजह से सीमा पर किसी भी हालात से निपटने के लिए भारत की तीनों सेनाएं पूरी तरह से तैयार हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) को बने हुए दस महीने हो गए हैं, जिसकी वजह से भारतीय सेना को और मजबूती मिली है। हालांकि, इन सबके बीच गौर करने वाली यह बात है कि इस समय एयरफोर्स और आर्मी के प्रमुख, दोनों नेशनल डिफेंस एकेडमी के कोर्समेट्स हैं और दोनों की ही सेनाएं संयुक्त रूप से पूर्वी लद्दाख में चीन से युद्ध लड़ने का अभ्यास कर रही हैं।

इस समय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे और वायुसेना प्रमुख मार्शल आरकेएस भदौरिया हैं। दोनों ही एनडीए के दिनों से काफी करीबी दोस्त भी हैं। लेह के आसमान में भारतीय वायुसेना के C-17s, Ilyushin-76s और C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान देखे जा सकते हैं, जोकि चीनी सेनाओं के विपरीत आगे की ओर तैनात भारतीय सैनिकों के लिए राशन और आपूर्ति के साथ उड़ान भर रहे हैं। लद्दाख क्षेत्र में तैनात एक वरिष्ठ वायुसेना कमांडर ने कहा, “मुख्यालय के ऊपर से निर्देश स्पष्ट हैं कि सेना और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा जो भी आवश्यकताएं हैं, उन्हें पूरा किया जाना चाहिए।”

फॉरवर्ड एरिया में तैनात सेना के एक अधिकारी ने कहा कि इन दिनों सीडीएस जनरल बिपिन रावत और दोनों सेनाओं के प्रमुख अक्सर चर्चा करते हैं और चीनी सेना के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाते हैं। दो सेनाएं संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, ”सेना जोकि चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने की स्थिति में तैनात है, भी नियमित रूप से भारतीय वायु सेना को अपनी डोमेन जागरूकता बढ़ाने के लिए जमीन पर वास्तविक स्थिति के बारे में अपडेट दे रही है और उन्होंने हालात के बिगड़ने की स्थिति में संयुक्त रूप से कुछ ऑपरेशंस की योजना बनाई है।” सेनाओं के इन प्रयासों को जमीन पर देखा जा सकता है, क्योंकि सेनाएं चीन और पाकिस्तान दोनों से लद्दाख सेक्टर में निपटने की तैयारी कर रही हैं।

लद्दाख में दिख रहे चिनूक हेलीकॉप्टर

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा की ओर लेह से सड़क पर, चीन और बेहद कठोर सर्दियों से जूझ रहे सेना के जवानों को आपूर्ति प्रदान करने के लिए सिंधु नदी के ऊपर चिनूक को उड़ते हुए देखा जा सकता है। वहीं, एलएसी के पास वायुसेना के चिनूक और Mi-17V5s हेलीकॉप्टरों को एक उन्नत लैंडिंग ग्राउंड (ALG) की ओर उड़ते हुए देखा जा सकता है। यहां वे सर्दियों से निपटने के लिए जवानों के लिए शेल्टर्स के पैनल समेत बाकी जरूरी चीजें उपलब्ध करा रहे हैं।

चीन से तनाव में अहम भूमिका निभा रहे ये हेलीकॉप्टर्स

लद्दाख में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए मौजूद भारतीय वायुसेना का हर विमान यूं तो जवानों की मदद कर रहा है, लेकिन नए खरीदे गए चिनूक और अपाचे हेलीकॉप्टर्स से काफी मदद मिल रही है। ये दोनों ही चीन के साथ जारी तनाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं। 14 कोर के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अरविंद कपूर कहते हैं, ”हमारे हेलीकॉप्टर की भार उठाने की क्षमता काफी है, हम बहुत ही कम समय के नोटिस पर कंटेनरों को उठाने और उसे जरूरत वाली जगह पर पहुंचाने के लिए तैयार हैं।” अधिकारियों ने कहा कि चिनूक रोजाना जवानों के आने-जाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में सामग्री की आपूर्ति कर रहे हैं, जबकि अपाचे की भूमिका तब बहुत बड़ी हो जाएगी, जब दोनों पक्षों का टैंकों के जरिए से आमना-सामना होगा।

CRPF के काफिले पर आतंकियों ने फायरिंग की, 2 जवान शहीद, 3 जख्मी

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के पंपोर में आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर हमला कर दिया। हमले में सीआरपीएफ के 5 जवान घायल हो गए। इनमें से 2 जिला अस्पताल में इलाज के दौरान शहीद हो गए। बाकी 3 जवानों का इलाज चल रहा है। हमला दोपहर करीब 12.50 बजे पंपोर बायपास पर हुआ। सीआरपीएफ की 110 बटालियन और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों की जॉइंट पार्टी पर आतंकियों ने फायरिंग कर दी। इलाके की नाकाबंदी कर आतंकियों की तलाश की जा रही है।

पिछले हफ्ते पुलवामा में 2 आतंकी मारे गए थे
पुलवामा जिले के अवंतीपोरा के संबूरा इलाके में 27 सितंबर को आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच एनकाउंटर हुआ था। सुरक्षाबलों ने 2 आतंकी मार गिराए थे। आतंकियों की फायरिंग में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया था।

अगस्त में आतंकी हमले में 2 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे
पिछले कुछ महीनों से पुलिस पार्टी और सेना के काफिले पर आतंकी हमले तेज हो गए हैं। कश्मीर के नौगाम में 14 अगस्त को आतंकी हमले में 2 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। 12 अगस्त को भी बारामूला के सोपोर में सुरक्षाबलों पर हमला किया गया था, जिसमें एक जवान घायल हुआ था।

जितना बताया गया, उससे ज्यादा खराब थी डोनाल्ड ट्रंप की हालत, वाइट हाउस ने स्वीकारा सच

वॉशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कोरोना वायरस संक्रमित होने के दो दिन बाद आखिरकार वाइट हाउस ने उनके स्वास्थ्य को लेकर सच्चाई को स्वीकार किया है। वाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ मार्क मीडोज ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की सेहत शुक्रवार को जितनी बताई गई थी उससे कहीं ज्यादा खराब थी। तेज बुखार और खून में कम होते आक्सीजन के कारण डॉक्टरों ने ट्रंप को अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी थी।

मीडोज ने बताया ट्रंप की वास्तविक हाल
मीडोज ने शनिवार रात को फॉक्स न्यूज से बातचीत के दौरान कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि उन्हें अब बुखार नहीं है। उनके शरीर में अब ऑक्सीजन की मात्रा भी पहले से ज्यादा हुई है। कल सुबह हम वास्तव में इससे चिंतित थे। उन्हें बुखार था और उनका ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिरा था। इसके बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप खड़े थे और टहल रहे थे।

पहले वाइट हाउस ने छिपाई थी जानकारी
बता दें कि मीडोज सहित वाइट हाउस के कई अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा था कि ट्रंप की सेहत अच्छी है और उनमें हल्के लक्षण ही हैं। नेवी कमांडर डॉ सीन कॉनले और अन्य डॉक्टरों ने ट्रंप के सेहत को समान्य बताया था। हालांकि, तब भी कई विशेषज्ञों ने इसपर सवाल उठाए थे।

इस कारण ट्रंप पर भारी कोरोना
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक आयु, पुरुष होना और पहले से अन्य बीमारिया आदि जोखिम बढ़ा देते हैं और ट्रंप में ये बातें हैं। कनेक्टिकट विश्वविद्यालय के डॉ डेविड बानाच ने कहा कि ट्रंप की उम्र 74 वर्ष है जो जोखिम का प्राथमिक कारक है। इसके अलावा उनका वजन भी अधिक है।

सैन्य अस्पताल में जारी है ट्रंप का इलाज

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों वॉल्टर रीड मेडिकल सेंटर में कोरोना का इलाज कराने के लिए भर्ती हैं। हालांकि, अस्पताल में भी एक प्रेसिडेंशल स्वीट है जहां से ट्रंप अपना काम कर रहे हैं। वाइट हाउस ने दो तस्वीरें भी शेयर की हैं जिनमें डोनाल्ड ट्रंप काम करते हुए दिख रहे हैं। इसके साथ उनकी सेहत से जुड़ी अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की गई है। ट्रंप ने खुद भी वीडियो शेयर कर दावा किया था कि अब वह बेहतर हैं।

48 घंटे बताए थे अहम
वहीं, वाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ मार्क मीडोज ने शनिवार को कहा था कि कोरोना वायरस से संक्रमित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार को ‘बेहद चिंताजनक’ दौर से गुजरे हैं और अगले 48 घंटे उनके स्वास्थ्य के लिये काफी महत्वपूर्ण होंगे। यह टिप्पणी इस खुलासे के बाद की गई है कि शुक्रवार को अस्पताल ले जाने से पहले वाइट हाउस में ट्रंप को ऑक्सीजन दी गई थी। हालांकि वाइट हाउस के कर्मचारियों ने कहा था कि ट्रंप में केवल मामूली लक्षण दिखाई दिए थे।

नीतीश कुमार को मात देने के लिए अमित शाह ने खेला बड़ा खेल…

मोदी तुझसे बैर नहीं, नीतीश तेरी खैर नहीं…”

इसी नारे के साथ 37-वर्षीय चिराग पासवान और उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने उस गठबंधन से बाहर निकल आने की धमकी पर खरा उतरकर दिखाया है, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी साझीदार हैं. अब LJP मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के खिलाफ प्रत्याशी उतारेगी, लेकिन उन सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी, जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हिस्से में होंगी. और उधर, केंद्र में चिराग पासवान और नीतीश कुमार, दोनों की पार्टियां BJP के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बनी रहेंगी.

अगर आपको कन्फ्यूज़ करने के लिए इतना काफी है, तो भी बस, देखते रहिए – हर बढ़िया बिहारी राजनैतिक गाथा की तरह इसमें भी एक शानदार ट्विस्ट है…

चिराग पासवान के पिता रामविलास पासवान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में उपभोक्ता मामलों, खाद्य तथा सार्वजनिक वितरण विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं. वह अस्पताल में हैं. कुछ साल पहले बॉलीवुड में भाग्य आज़मा चुके चिराग को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से ‘ट्रेनिंग’ मिल रही है. दो दिन पहले जब चिराग ने ‘नीतीश को नहीं, BJP को हां’ की घोषणा की थी, तब उन्होंने दिल्ली में अमित शाह से लम्बी बैठक की थी.

इसकी रूपरेखा अमित शाह ने तैयार की है, और रणनीति यह है कि नीतीश कुमार के सामने चिराग ‘वोट-कटवा’ की भूमिका में रहेंगे, जिससे नतीजों में BJP को लाभ होगा. जब विधानसभा चुनाव परिणाम आ जाएंगे, तो इससे BJP के हाथ में नीतीश कुमार से सौदेबाज़ी के लिए ज़्यादा ताकत मौजूद रहेगी. अगर BJP का नतीजा बहुत अच्छा रहा, तो हो सकता है कि वह नीतीश कुमार से छुटकारा पाने की स्थिति में ही आ जाए और पासवान के समर्थन से सरकार का गठन कर ले.

इस तरह देखें, तो कई सीटों पर चिराग ‘दोस्ताना मुकाबला’ करते नज़र आ सकते हैं, और ऐसे प्रत्याशी उतार सकते हैं, जो दरअसल दौड़ में न हों. वे उन वोटों को काटेंगे, जो नीतीश की तरफ जा सकते हैं, और नतीजतन BJP का प्रत्याशी जीत जाएगा.

राज्य में पासवान सबसे बड़ा दलित समुदाय है, और कुल आबादी का साढ़े चार फीसदी है. चिराग की महत्वाकांक्षा पार्टी की पहुंच को बढ़ाने की है. उनका मानना है कि नीतीश कुमार के खिलाफ एन्टी-इन्कम्बेंसी लहर (सत्ता के खिलाफ लहर) पर्याप्त है, जिसकी बदौलत अपना जनाधार बढ़ाया जा सकता है. इस विधानसभा चुनाव का एक और पहलू भी है – लालू प्रसाद यादव, कांग्रेस तथा वामदलों का विपक्षी गठबंधन, जिसकी अगुवाई लालू प्रसाद के 30-वर्षीय पुत्र तेजस्वी यादव कर रहे हैं. अगर चिराग यह चाहते हैं कि उन्हें गंभीरता से लिया जाए, तो उन्हें अपने नेतृत्व को उभारना होगा, और आगे बढ़कर काम करना होगा. इस उद्देश्य से वह उतनी ही सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, जितनी सीटों पर नीतीश कुमार लड़ेंगे – लगभग 140. पिछले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने सिर्फ 40 सीटों पर चुनाव लड़ा था. बस, यही है बड़ी खिलाड़ी बनने की कोशिश.

BJP के लिए भी बदलती भूमिकाएं कतई सही हैं. प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि उनकी पार्टी बेशक नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का दावेदार मानकर चुनाव लड़ेगी. लेकिन पिछले कुछ सालों में प्रधानमंत्री की लोकप्रियता ने साबित कर दिया है कि बिहार में उनके नाम भी सीटें आसानी से जीती जा सकती हैं, और नीतीश कुमार के साथ गठबंधन में जूनियर पार्टनर बने रहने की जगह अब अमित शाह ‘बड़े भाई’ की भूमिका में पहुंचना चाहते हैं. यह बिल्कुल वैसा ही मॉडल है, जैसा वह अन्य गठबंधनों में आज़मा चुके हैं, और जो BJP की ताकत को बढ़ाने में अक्सर कामयाब रहा है.

बिहार में 243 विधानसभा सीटें हैं. BJP और नीतीश कुमार संभवतः 119-119 सीटों पर लड़ेंगे, लेकिन नीतीश को पांच सीटें जीतनराम मांझी को भी देनी होंगी, सो, वह BJP की तुलना में कम सीटों पर लड़ेंगे. यह ऐसा दृश्य है, जिसकी कुछ साल पहले तक कल्पना भी संभव नहीं थी.

राज्य में मतदान 28 अक्टूबर को शुरू होगा, और नतीजे 10 नवंबर को आएंगे.

चिराग पासवान ने कई बार मुझसे कहा है कि नीतीश कुमार कुशल प्रशासक नहीं हैं. कोरोना संकट में बिहार में हुए झोलझाल और लॉकडाउन घोषित होने के बाद दिल्ली व मुंबई जैसे शहरों को छोड़कर बिहार के गांवों की तरफ लौटने को मजबूर हुए प्रवासी मज़दूरों के बेहद भावनात्मक मुद्दे पर हुए गड़बड़ियों ने दिखाया है कि नीतीश ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर हैं. अब चिराग जब नीतीश के खिलाफ कैम्पेन तैयार कर रहे हैं, उन्हें अपने बेहद तजुर्बेकार पिता का पूरा समर्थन हासिल है.

नीतीश कुमार की मौजूदगी वाली टीम से बाहर निकलने के लिए चिराग ने जानबूझकर इतनी सीटें मांग लीं, जिनके लिए साझीदारों को इकार ही करना पड़े. बस, फिर वह बाहर निकल आए, और शाह का लिखा कथानक स्पष्ट कर दिया – दिल्ली में साझीदार, बिहार में विरोधी…

नीतीश कुमार को उनकी वास्तविक स्थिति दिखा देने की इस कोशिश से बिहार चुनाव में एक नया ट्विस्ट जुड़ गया है, और साबित करता है कि बिहार में होने वाला कोई भी चुनाव ऊबाऊ नहीं हो सकता. कुछ ही हफ्ते पहले तक नतीजा कतई स्पष्ट दिख रहा था – नीतीश कुमार और BJP की आसान जीत. अब, मामला काफी जटिल हो गया है.

मैंने इस आलेख के लिए बिहार के कई नेताओं से बात की. सभी ने एक विरोधाभासी-सी बात कही – पिछले एक साल में खराब गवर्नेन्स के कारण नीतीश कुमार के खिलाफ पैदा हुए गुस्से से किसी भी तरह गठबंधन में शामिल प्रधानमंत्री को नुकसान नहीं पहुंचा है. अगर इसकी कीमत चुकानी पड़ी, तो वह सिर्फ नीतीश ही चुकाएंगे, और गठबंधन को इससे नुकसान नहीं होगा.

नीतीश कुमार राजनैतिक कलाबाज़ियों के मामले में दिग्गज हैं, और अपनी इसी सरकार को बनाए रखने के लिए साझीदार बदल चुके हैं (उन्होंने अपने पुराने सहयोगी BJP का साथ छोड़कर कांग्रेस व लालू यादव के साथ मिलकर सरकार बनाई थी, और फिर उन्हें छोड़कर BJP का दामन थाम लिया था), लेकिन इस बार ऐसा लगता है, वह पीछे छूट सकते हैं. BJP के एक केंद्रीय नेता का कहना था कि अवसर देखकर साझीदार बदलने वाले के तौर पर नीतीश कुमार की छवि ज़ाहिर हो चुकी है. उन्होंने कहा, “हर बिहारी जानता है कि वह ‘कुर्सी कुमार’ हैं… जहां कुर्सी, वहां नीतीश…”

इन दिनों नीतीश कुमार अपनी अंतरात्मा की उस आवाज़ को लेकर भी चुप हैं, जिसने उनके दावे के मुताबिक उनकी राजनीति की दिशा तय की है.

अपनी तरक्की के लिए अपने ही साझीदारों का नुकसान करवा देना BJP के लिए कोई नई बात नहीं है. बिल्कुल ऐसा ही महाराष्ट्र में शिवसेना और पंजाब में अकाली दल के साथ हुआ था. दोनों ने BJP से नाता तोड़ लिया, लेकिन अपनी क्षेत्रीय पकड़ को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुए.

नीतीश कुमार ने अतीत में साझीदार बदलने के फैसले को अंतरात्मा की आवाज़ बताया था. लेकिन अब उन्हें राजनैतिक अंतर्ज्ञान से काम लेना होगा.


साजिश:दिल्ली दंगों में शामिल रहे संगठन PFI के 4 कार्यकर्ता मथुरा में गिरफ्तार, भड़काऊ साहित्य लेकर हाथरस जा रहे थे

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में सोमवार रात पुलिस ने चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उसके सहयोगी कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए लोगों के पास हाथरस गैंगरेप मामले से जुड़ा भड़काऊ साहित्य मिला है। इनके मोबाइल, लैपटॉप जब्त किए गए हैं। चारों आरोपी दिल्ली से आए थे और हाथरस जा रहे थे।

पुलिस और खुफिया एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ में जुटी हैं। पुलिस ने हाथरस के बहाने यूपी में जातीय हिंसा भड़काने की साजिश का खुलासा रविवार को ही किया था। इसमें PFI का नाम भी सामने आया था। 

PFI यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया एक चरमपंथी इस्लामिक संगठन है। इसका हेड ऑफिस दिल्ली के शाहीन बाग में है। यह संगठन नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में दिल्ली में हुए दंगों में भी शामिल था।

पुलिस को पहले ही इनपुट मिल गया था
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने बताया, “कुछ संदिग्ध लोगों के दिल्ली से हाथरस आने की जानकारी मिली थी। इस इनपुट पर इंटेलीजेंस एजेंसियों और हाथरस से लगे सभी इलाकों में अलर्ट कर दिया गया था।”

“सोमवार रात करीब 11 बजे मथुरा में टोल प्लाजा पर वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। इस दौरान एक स्विफ्ट डिजायर कार (DL 01 ZC 1203) को रोका गया। कार में 4 लोग थे। पूछताछ के दौरान इनकी हरकतें संदिग्ध लगीं। इन्हें हिरासत में लेकर तलाशी ली गई और पूछताछ की गई तो पता चला कि ये PFI और CFI से जुड़े हैं।”

पकड़े गए 4 में से 3 आरोपी यूपी के हैं
गिरफ्तार आरोपियों में मुजफ्फरनगर का अतीक, बहराइच का मसूद अहमद, रामपुर का आलम और केरल के मल्लपुरम का सिद्दीक शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस बात का पता लगा रही हैं कि हाथरस के बहाने उत्तर प्रदेश में दंगे भड़काने की साजिश में और कौन-कौन शामिल है।

ईडी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर सकता है

हाथरस की घटना के बाद रातों-रात बनाई गई वेबसाइट ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर सकता है। शुरुआती जांच में पता चला है कि हिंसक प्रदर्शन के लिए एक संदिग्ध संगठन से वेबसाइट को फंडिंग मिली थी। विदेशों से फंडिंग मिलने की बात भी सामने आई है।

यूपी पुलिस ने रविवार को जातीय दंगे भड़काने की साजिश का खुलासा करते हुए वेबसाइट के खिलाफ केस दर्ज किया था। पुलिस ने बताया कि वेबसाइट के जरिए मुख्यमंत्री योगी के फर्जी बयान दिखाए गए, ताकि माहौल बिगड़ जाए।

सवर्ण समाज ने पंचायत की, 200 लोगों पर केस दर्ज

हाथरस में सोमवार को सवर्ण समाज के लोगों ने भाजपा के पूर्व विधायक राजवीर के घर महापंचायत की। इस मामले में 200 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई इसलिए की गई, क्योंकि जिले में धारा 144 लागू है और पंचायत करने की इजाजत नहीं ली गई थी। गैंगरेप मामले के आरोपियों के पक्ष में हुई इस पंचायत में सवर्ण समाज के लोग जुटे थे।