सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से भागा इंजीनियर की हत्या का आरोपी

ग्वालियर। 12 दिन पहले इंजीनियर की प्रेमिका के साथ मिलकर हत्या करने वाल शातिर अपराधी जेएएच के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से भाग गया है, जबकि सुरक्षा में तैनात गार्ड सोते रह गए हैं। घटना शनिवार-रविवार दरमियानी रात 2 से 4 बजे के बीच की है। घटना का पता चला उस समय चला जब स्टाफ की नजर खाली बेड पर पड़ी। हत्या के आरोपित के भागने का पता चलते ही सुपर स्पेशियलिटी में हंगाम खड़ा हो गया। तत्काल पुलिस पहुंची और जांच के बाद भागे आरोपित की तलाश शुरू कर दी है। 4 टीमें बनाकर उसके संबंधित स्थानों पर दबिश दी जा रही है।

ग्वालियर थाना क्षेत्र के सागर ताल निवासी वीरेन्द्र परिहार को 16 अक्टूबर को इंजीनियर 25 वर्षीय सचिन शाक्य की हत्या में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वीरेन्द्र ने कुबूल किया था कि उसने अपनी प्रेमिका और प्रेमिका के भाई के साथ मिलकर सचिन की हत्या की थी। पकड़े जाने के बाद वीरेन्द्र परिवार को जेल पहंुचाने से पहले पुलिस ने कोरोना टेस्ट कराया था। जिसमें वह संक्रमित निकला था। जिसके बाद उसे जेएएच के सुपर स्पेशियलिटी में भर्ती कराया गया था। जहां पर सुरक्षा के लिए 6 पुलिस जवान राउंड द क्लॉक ड्यूटी पर लगाए गए थे। शनिवार रात को वहां आरक्षक नरेश शाक्य व हितेन्द्र निगरानी की ड्यूटी पर थे। रात करीब 2 बजे ड्यूटी पर तैनात आरक्षक नरेश व हितेन्द्र भी वार्ड के बाहर सो गए और इसी बीच वीरेन्द्र चकमा देकर निकल गया। घटना का पता सुबह लगा। जब स्टाफ ने उसे बेड पर नहीं देखा। हालांकि अस्पताल स्टाफ का कहना है कि उसे भागते ही गार्ड ने देखा पकड़ने का भी प्रयास किया है, लेकिन वह सफल नहीं हो सके।

आरोपित के भागने का पता चलते ही पुलिस टीम ने उसके घर सागरताल रोड सरकारी मल्टी, पुरानी छावनी, सिरोल, रेलवे स्टेशन, बस स्टेण्ड सहित अन्य स्थानों पर दबिश दी, लेकिन अभी आरोपित हाथ नहीं आया है।

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से भागा इंजीनियर की हत्या का आरोपी

ग्वालियर। 12 दिन पहले इंजीनियर की प्रेमिका के साथ मिलकर हत्या करने वाल शातिर अपराधी जेएएच के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से भाग गया है, जबकि सुरक्षा में तैनात गार्ड सोते रह गए हैं। घटना शनिवार-रविवार दरमियानी रात 2 से 4 बजे के बीच की है। घटना का पता चला उस समय चला जब स्टाफ की नजर खाली बेड पर पड़ी। हत्या के आरोपित के भागने का पता चलते ही सुपर स्पेशियलिटी में हंगाम खड़ा हो गया। तत्काल पुलिस पहुंची और जांच के बाद भागे आरोपित की तलाश शुरू कर दी है। 4 टीमें बनाकर उसके संबंधित स्थानों पर दबिश दी जा रही है।

ग्वालियर थाना क्षेत्र के सागर ताल निवासी वीरेन्द्र परिहार को 16 अक्टूबर को इंजीनियर 25 वर्षीय सचिन शाक्य की हत्या में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वीरेन्द्र ने कुबूल किया था कि उसने अपनी प्रेमिका और प्रेमिका के भाई के साथ मिलकर सचिन की हत्या की थी। पकड़े जाने के बाद वीरेन्द्र परिवार को जेल पहंुचाने से पहले पुलिस ने कोरोना टेस्ट कराया था। जिसमें वह संक्रमित निकला था। जिसके बाद उसे जेएएच के सुपर स्पेशियलिटी में भर्ती कराया गया था। जहां पर सुरक्षा के लिए 6 पुलिस जवान राउंड द क्लॉक ड्यूटी पर लगाए गए थे। शनिवार रात को वहां आरक्षक नरेश शाक्य व हितेन्द्र निगरानी की ड्यूटी पर थे। रात करीब 2 बजे ड्यूटी पर तैनात आरक्षक नरेश व हितेन्द्र भी वार्ड के बाहर सो गए और इसी बीच वीरेन्द्र चकमा देकर निकल गया। घटना का पता सुबह लगा। जब स्टाफ ने उसे बेड पर नहीं देखा। हालांकि अस्पताल स्टाफ का कहना है कि उसे भागते ही गार्ड ने देखा पकड़ने का भी प्रयास किया है, लेकिन वह सफल नहीं हो सके।

आरोपित के भागने का पता चलते ही पुलिस टीम ने उसके घर सागरताल रोड सरकारी मल्टी, पुरानी छावनी, सिरोल, रेलवे स्टेशन, बस स्टेण्ड सहित अन्य स्थानों पर दबिश दी, लेकिन अभी आरोपित हाथ नहीं आया है।

तंत्र-मंत्र, ज्योतिष कुछ नहीं जानते थे’ चंद्रास्वामी

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जो चंद्रास्वामी एक दौर में एक साथ कई देशों की सरकार के ताकतवर लोगों के साथ उठने-बैठने के लिए मशहूर थे, वो बीते कुछ सालों से लगभग गुमनामी में रह रहे थे.

चंद्रास्वामी की कहानी गुमनामी से निकलकर भारतीय राजनीति के केंद्र में कई सालों तक रही.

उनकी शख्सियत कैसी थी, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक ओर तो उन्हें भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव का सबसे नज़दीकी सलाहकार माना जाता रहा तो दूसरी तरफ़ उन पर राजीव गांधी की हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप भी लगा.

इन आरोपों के बीच कई देशों के शासनाध्यक्षों से मधुर संबंध, हथियारों की दलाली और हवाला का कारोबार, विदेशी मुद्रा अधिनियम का उल्लंघन जैसे कई संगीन आरोपों से भी चंद्रास्वामी सुर्खियों में रहे.

कहने वाले तो ये भी कहते हैं कि पीवी नरसिम्हाराव के पांच साल के प्रधानमंत्रित्व काल में चंद्रास्वामी को कभी प्रधानमंत्री से मिलने के लिए पहले से अप्वाइंटमेंट की ज़रूरत नहीं पड़ी. यह सिलसिला चंद्रशेखर के छोटे-से कार्यकाल के दौरान भी बना रहा.

प्रधानमंत्री के क़रीबी

ऐसे में ये जानना बड़ा दिलचस्प है कि दिल्ली-जयपुर हाइवे के ठीक मध्य में स्थित बहरोर के एक जैन परिवार का लड़का कैसे सत्ता का सामानांतर केंद्र चलाने की हैसियत में पहुंच गया.

चंद्रास्वामी के पिता धर्मचंद जैन सूद पर पैसे उठाने का काम करते थे. परिवार वैसे तो गुजरात का था, लेकिन चंद्रास्वामी के जन्म से सालों पहले राजस्थान आ गया था और उनके जन्म के कुछ सालों बाद हैदराबाद में जाकर बस गया था.

चंद्रास्वामी के शुरुआती जीवन के बारे में हीरा लाल चौबे की जीवनी बताती है कि नेमिचंद (चंद्रास्वामी का असली नाम) ने कोई शिक्षा हासिल नहीं की थी.

बचपन से उनकी दिलचस्पी तंत्र साधना में हो गई और 16 साल की उम्र में वे संन्यासी या कहें तांत्रिक कहलाने लगे. हीरा लाल चौबे के मुताबिक चंद्रास्वामी सबसे पहले जैन संत महोपाध्याय अमर मुनि के सानिध्य में आए. 23 साल की उम्र में बनारस में गोपीनाथ कविराज के पास पहुंच गए, तंत्र-मंत्र की साधना करने. 26 साल की उम्र में उन्होंने पहला महायज्ञ कर लिया. बीच में बिहार में कुछ साल रहे.

तंत्र मंत्र और ज्योतिष

लेकिन वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय के मुताबिक चंद्रास्वामी को ना तो तंत्र-मंत्र आता था और ना ही उन्हें ज्योतिष का कोई ज्ञान था.

पीवी नरसिम्हाराव के सलाहकारों में रहे वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक भी कहते हैं, “चंद्रास्वामी व्यवहार कुशल तो बहुत थे, लेकिन उन्हें तंत्र विद्या और ज्योतिष का ना तो ज्ञान था और ना इन विषयों पर उनका कोई अध्ययन.”

चंद्रास्वामी की तंत्र साधना के बारे में राम बहादुर राय बताते हैं, “1965-1966 के दौर में हिंदुस्तान समाचार एजेंसी का दफ़्तर कनॉट प्लेस के फ़ायर ब्रिगेड लेन में हुआ करता था. वहां एक न्यूज़ एडिटर होते थे रामरूप गुप्त. वे बड़े ज्योतिषी थे. चंद्रास्वामी लोगों की कुंडलियां लेकर उनके पास आते रहते थे और गुप्त जी जो बताते वो चंद्रास्वामी लोगों को बताते रहते थे.”

चंद्रास्वामी के जीवन से इतर भी उनके जीवन के बारे में कुछ जानकारियां मौजूद हैं. ‘स्टोरीज ऑफ़ इंडियाज़ लीडिंग बाबाज़’ की लेखिका भवदीप कांग से मोहन गुरुस्वामी ने कहा है, “हम चंद्रास्वामी को हैदराबाद के सिटी कॉलेज के बाहर आवारागर्दी करते देखा करते थे.”

उन्होंने ये भी कहा है कि चंद्रास्वामी नागार्जुन सागर डैम प्रोजेक्ट में स्क्रैप डीलर का काम भी करने लगे थे, फिर किसी धांधली में फंसे और थोड़े ही साल में राज्य के मुख्यमंत्री पीवी नरसम्हिा राव के साथ स्वामी के तौर पर नज़र आने लगे.

नरसिम्हाराव से क़रीबी

पीवी नरसिम्हा राव 1971 से 1973 के बीच आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे. चंद्रास्वामी की तबसे नरसिम्हा राव से नज़दीकियां बन गई थीं. राजनीतिक गलियारों में चंद्रास्वामी के आने का क़िस्सा 1971 से थोड़ा पुराना है.

वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय बताते हैं, “सिद्धेश्वर प्रसाद बिहार से 1962 में लोकसभा के लिए चुनकर आ गए थे. ज़मीनी नेता हैं, 90 साल के हैं. 1965-66 के आसपास उनके सर्वेंट क्वार्टर में दो लड़के रहा करते थे- एक थे चतुर्भुज गौतम जो बाद में चंद्रशेखर के निजी सचिव बने और दूसरे थे चंद्रास्वामी.”

राम बहादुर राय के मुताबिक वो दौर ऐसा था जब चंद्रास्वामी कांग्रेसी नेताओं के घरों के चक्कर लगाते, रामगुप्त जी से कुंडली बनवाते और धीरे-धीरे सत्ता की दलाली में लिप्त होते गए और आंध्र प्रदेश से लेकर राजस्थान, हरियाणा सब ओर जगह बनाते गए.

अपनी लंबी बाल-दाढ़ी, पीले वस्त्रों और रुद्राक्ष की माला के साथ चंद्रास्वामी में काफ़ी कुछ ऐसा था जिसका जादू दूसरों के सिर पर चढ़कर बोलने लगा था. प्रसिद्ध इतिहासकार पैट्रिक फ्रेंच ने ‘इंडिया- ए पोट्रेट’ में चंद्रास्वामी के बारे में लिखा है- “वो कोई सभ्य आदमी तो नहीं थे, लेकिन उनमें दूसरों के दिमाग़ को जीतने का हुनर था. वे दूसरों की कमज़ोरियां पढ़ लेते थे, ख़ासकर वैसे लोग जो बहुत पॉवरफ़ुल जगहों पर थे. ऐसे लोगों को पैसे और ताक़त की वजह से लोगों के धोखा देने का डर सताता रहता था.”

ख़ास बात ये है कि चंद्रास्वामी ख़ुद अंग्रेजी नहीं पढ़ पाते थे और न ही बोल पाते थे, लेकिन दुनिया के कई देशों के ताक़तवर हुक्मरानों पर उनका ख़ासा प्रभाव हो चला था.

पूर्व विदेश मंत्री के नटवर सिंह ने अपनी पुस्तक ‘वॉकिंग विद लायंस’ में लिखा है, “1979-80 में मैं पेरिस में बीमार पड़ा था. चंद्रास्वामी उस वक्त फ़्रांसीसी राष्ट्रपति के निजी फिज़िशयन के साथ मुझसे मिलने आए थे, ये देखकर ही मैं सकते में था कि उन्होंने मुझसे कहा कि वे सीधे यूगोस्लाविया से फ़्रांसीसी राष्ट्रपति से मिलने आए हैं. फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ने लेने के लिए अपना निजी विमान भेजा था.”

इसी पुस्तक में नटवर सिंह ने उस वाकये का भी ज़िक्र किया है जिसमें किस तरह से मार्गरेट थैचर के ब्रिटिश प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी की थी जो बाद में सच साबित हुई.

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि ब्रूनेई के सुल्तान, बहरीन के शासक, ज़ायर के राष्ट्राध्यक्ष भी चंद्रास्वामी के भक्त हो गए थे.

हथियार डीलर अदनान ख़शोगी से नज़दीकी

इस स्थिति में पहुंचने की एक वजह चंद्रास्वामी की सऊदी अरब के हथियार कारोबारी अदनान ख़शोगी से कारोबारी संबंधों की अहम भूमिका रही.

राम बहादुर राय कहते हैं, “अदनान ख़शोगी को भारत में लाने वाले चंद्रास्वामी ही थे. हथियारों की ख़रीद-बिक्री में कमीशनखोरी का खेल शुरू हो चुका था. लेकिन मुझे ये भी लगता है कि भारत की खुफिया एजेंसी रॉ ने भी चंद्रास्वामी का इस्तेमाल अपने हितों के लिए किया. उन्हें जिस तरह का ऐक्सेस दिया जा रहा था, उससे लगता है कि सरकार उनके मेल-जोल से अपने लिए भी जानकारियां जुटाती रही.”

वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी एक वाकये का ज़िक्र करते हैं, “1993-94 में चंद्रास्वामी की मां का निधन हुआ था, राजस्थान के बहरोर में तेरहवीं को कवर करने के लिए उस वक्त के इकलौते चैनल ज़ी न्यूज की ओर से मुझे भेजा गया था. 40-45 हज़ार लोग शामिल हुए थे और बॉलीवुड के कम से कम 20 सितारे वहां मौजूद थे.”

राम मंदिर मामले में मध्यस्थता

विजय त्रिवेदी चंद्रास्वामी के बारे में बताते हैं, “वे बेहद विवादास्पद थे, लेकिन सभी पार्टियों में उनकी एक तरह से स्वीकार्यता थी. राम मंदिर निर्माण कराने के लिए वे जब मध्यस्थता कर रहे थे तो उनकी बात मुलायम सिंह भी सुन रहे थे, नरसिम्हा राव भी और भाजपा की ओर से भैरों सिंह शेखावत भी. राजनीति में ऐसे फ़िक्सर समय के साथ सामने आते रहते हैं.”

राम मंदिर के निर्माण के लिए 1993 में चंद्रास्वामी ने अयोध्या में सोम यज्ञ का आयोजन किया था. इस आयोजन में शामिल होने के लिए दुनिया भर से हिंदू जुटे थे.

इस यज्ञ को कवर कर चुके वरिष्ठ पत्रकार शरद गुप्ता बताते हैं, “उस दौर में लखनऊ में कोहिनूर होटल हुआ करता था. उस होटल का मालिक भी चंद्रास्वामी का शिष्य हुआ करता था. चंद्रास्वामी के कहने पर पूरा होटल ही इन लोगों के लिए बुक था और हर तरफ़ वोदका पीकर झूमते विदेशी संन्यासी नज़र आ रहे थे और सबके सब चंद्रास्वामी के भक्त.”

पामेला बोर्डेस की कहानी 1989 में ही सामने आ चुकी थी कि किस तरह से चंद्रास्वामी की सोहबत में वो पैसे और सेक्स की दुनिया में डूबती चली गई थीं.

1982 की मिस इंडिया रहीं पामेला बोर्डेस ने ‘डेली मेल’ को दिए इंटरव्यू में बताया था कि अदनान ख़शोगी और चंद्रास्वामी के लिए वो सेक्सुअल प्रेज़ेंट के तौर पर काम करती रहीं.

जेल तक जाना पड़ा

चंद्रास्वामी ने पावर, सेक्स, हथियार, मनी, और पॉवर ब्रोकिंग को वो काकटेल बना लिया था जिसमें वो फ़िक्सिंग के किंग बनकर उभर चुके थे.

लेकिन इस दौड़ में हमेशा एक-सा वक्त नहीं रहता. 1996 के बाद चंद्रास्वामी का बुरा दौर शुरू हुआ और एक के बाद एक उन पर मुकदमे चलने शुरू हो गए तो उन्हें तिहाड़ जेल जाना पड़ गया.

चंद्रास्वामी सत्ता के केंद्र से बाहर हो गए, लेकिन उनके दोस्त हर जगह मौजूद थे. लिहाज़ा तमाम मुकदमों के बावजूद वे दिल्ली के आलीशान इलाके में बने फ़ॉर्म हाउस में जमे रहे.

वेद प्रताप वैदिक चंद्रास्वामी से अपने आत्मीय संबंधों का हवाला देते हुए कहते हैं, “उसने अपनी सारी ऊर्जा उल्टे-सीधे कामों में लगा दी थी, वो चाहता तो बेहतर कर सकता था.”

राम बहादुर राय कहते हैं, “लोग ये भूल जाएंगे कि कभी चंद्रास्वामी की हैसियत प्रधानमंत्री के सबसे ख़ास आदमी की थी, लोगों को बोफ़ोर्स, सेंट किट्स, विदेशी मुद्रा का उल्लंघन, ईरान कॉन्ट्रा हथियार डील, पैसों की धोखाधड़ी जैसे मामले याद आएंगे.”

MP उपचुनाव: जीतू पटवार बोले- कमलनाथ की होती है टाटा-अंबानी से बात, उनके पैरों की धूल के बराबर भी नहीं शिवराज

मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं। इस बीच कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी बयानबाजी तेज हैं। इस उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी लगातार सेल्फ गोल करती जा रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी नेता इमरती देवी को लेकर दिए गए बयान का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी को एक और मौका दे दिया है।

एक रैली में जीतू पटवारी ने कहा, ‘ये अनिल, मुकेश अंबानी, रतन टाटा… ये बड़े-बड़े उद्योगपतियों के नाम आप सुनते हैं। इनको तो यूं फोन लगाते हैं। ऐसा व्यक्तित्व है कमलनाथ जी का। शिवराज सिंह चौहान तो उनके पैरों की धूल के बराबर भी नहीं है।’

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के डबरा में कांग्रेस उम्मीदवार सुरेंद्र राजेश के लिए प्रचार करने पहुंचे कमलनाथ ने बीजेपी उम्मीदवार इमरती देवी को आइटम बता डाला। कमलनाथ ने कहा, ”सुरेश राजेश जी हमारे उम्मीदवार हैं, सरल स्वभाव के सीधे-साधे हैं। ये तो करेंगे, ये उसके जैसे नहीं हैं, क्या है उसका नाम…. ( लोग चिल्लाते हैं- इमरती देवी), मैं क्या उसका नाम लूं, आप तो उसको मेरे से ज्यादा पहचानते हैं। आपको तो पहले ही मुझे सावधान कर देना चाहिए था, ये क्या आइटम है…ये क्या आइटम है (हंसते हुए)। 

कांग्रेस नेता ने शिवराज को कहा था- भूखा-नंगा
इससे पहले मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेता दिनेश गुर्जर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए विवादित बयान दिया था। उन्होंने एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को भारत का दूसरा सबसे बड़ा उद्योगपति बताया तो शिवराज सिंह चौहान को भूखे नंगे परिवार का बता डाला। हालांकि, शिवराज सिंह चौहान ने इसे अपने लिए हथियार बना लिया और कहा कि वह नंगे-भूखे परिवार से हैं इसलिए गरीबों का दुख दर्द समझते हैं।

दिनेश गुर्जर ने उपचुनाव को लेकर एक चुनावी सभा में कहा, ”कमलनाथ जी हिन्दुस्तान के दूसरे नंबर के उद्योगपति हैं। शिवराज सिंह की तरह नंगे-भूखे घर के नहीं हैं। शिव राज सिंह चौहान के पास पांच एकड़ की जमीन हुआ करती थी, आज हजारों एकड़ जमीन के मालिक हो गए, क्योंकि किशानों का खून पीने का काम उन्होंने किया।शिवराज सिंह चौहान ने दिनेश गुर्जर पर पलटवार करते हुए कहा, ”हां, मैं नंगे-भूखे परिवार से हूं, इसलिए उनका दुख-दर्द समझता हूं। हां, मैं गरीब हूं इसलिए गरीब बेटे-बेटियों का मामा बन पढ़ाता हूं। गरीब हूं इसलिए गरीब मां-बाप का कन्यादान करता हूं। गरीब हूं इसलिए गरीब का दर्द समझता हूं… प्रदेश को समझता हूं।”

रॉ चीफ से मिलकर नरम पड़े नेपाली प्रधानमंत्री ओली के तेवर, पुराना नक्शा ट्वीट कर दी विजयदशमी की बधाई

भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के चीफ की नेपाल यात्रा के बाद वहां के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के तेवर नरम हुए हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री ने विजयदशमी के मौके पर पुराना नक्शा ट्वीट करके अपने देश के लोगों को शुभकामनाएं दी हैं। इसे नक्शा विवाद में नेपाल के रुख में बदलाव मानते हुए अहम मोड़ माना जा रहा है। हालांकि भारत ने इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

सूत्रों का कहना है कि भारत घटनाक्रम पर नजर बनाए रखेगा। भारत पहले ही नेपाल के नए नक्शे को खारिज कर चुका है, लेकिन नेपाल से रिश्तों को लेकर भारत ने कभी भी तल्ख बयानबाजी नही की। नेपाल का रुख कितना स्थायी रहता है ये देखना होगा।

नए नक्शे से हुआ था विवाद
दरअसल, नेपाल और भारत के बीच ताजा विवाद की जड़ नेपाल का नया नक्‍शा है, जिसमें काठमांडू ने भारतीय इलाकों पर दावा किया था। नेपाल ने नया नक्शा जारी करके इस नक्शे में लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को नेपाल का हिस्सा बताया था जो फिलहाल भारतीय क्षेत्र में है। इसे संसद में भी पारित कराया गया था। चीन की शह पर ओली सरकार का रवैया लगातार भारत को लेकर तल्ख हो रहा था। चीन के दखल को लेकर ओली अपने ही देश मे घिर रहे थे। उनकी कुर्सी भी खतरे में पड़ गई थी। चीन ने नेपाल के कई गांवों में कब्जा किया इसे लेकर भी नेपाल के एक बड़े वर्ग में ओली की किरकिरी हो रही थी।

अकेले में हुई मुलाकात
माना जा रहा है कि अब तक भारत-नेपाल सीमा विवाद पर सख्‍त रवैया अपनाए पीएम केपी शर्मा ओली के रुख में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख सामंत कुमार गोयल से मुलाकात के बाद बदलाव आया है। इससे पहले गोयल ने बुधवार रात को अकेले में ओली से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की थी।

सेना प्रमुख भी जाएंगे
भारतीय सेना प्रमुख जनरल नरवणे भी अगले महीने नेपाल की यात्रा पर जा रहे हैं। इन यात्राओं को भारत नेपाल रिश्तों में आई खटास को दूर करने और आपसी रणनीतिक संबंधों को ज्यादा भरोसेमंद बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों ने कहा, अगर नेपाल से भारत के रिश्ते अच्छे नही रहते तो इसका फायदा उठाकर चीन नेपाल में अपना दखल भी बढ़ाएगा। साथ ही नेपाल की सीमा भी खतरे में पड़ सकती है। क्योंकि भारत के सहयोगी स्वभाव से उलट चीन की विस्तारवादी नीति रही है।

रॉ प्रमुख से मुलाकात पर विवाद
इस बीच ओली रॉ प्रमुख से मिलकर अपने ही देश में विवाद में भी उलझे। इस मुलाकात को लेकर उनकी खुद की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ही खिलाफ खड़ी हो गई है। सत्तारूढ़ पार्टी के कई नेताओं ने पीएम ओली पर कूटनीतिक नियमों को तोड़ने का आरोप लगाया है। सत्तारूढ़ दल नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता भीम रावल ने कहा कि रॉ प्रमुख गोयल और प्रधानमंत्री ओली के बीच जो बैठक हुई, वह कूटनीतिक नियमों के विरूद्ध है और इससे नेपाल के राष्ट्रहितों की पूर्ति नहीं हुई। रावल ने कहा कि चूंकि यह बैठक विदेश मंत्रालय के संबंधित संभाग के साथ बिना परामर्श के गैर पारदर्शी तरीके से हुई, ऐसे में इससे हमारी राजकीय प्रणाली कमजोर भी होगी। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश मामलों के प्रकोष्ठ के उपप्रमुख विष्णु रिजाल ने कहा कि कूटनीति नेताओं के द्वारा नहीं बल्कि राजनयिकों द्वारा संभाली जानी चाहिए।

विपक्ष ने भी ओली के खिलाफ खोला मोर्चा
प्रमुख विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस के केंद्रीय नेता गगन थापा ने ट्वीट किया कि यह बैठक न केवल कूटनीतिक नियमों का उल्लंघन है बल्कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा भी पैदा करती है। इसकी जांच की जानी चाहिए। पहले यह खबर भी आई थी कि रॉ चीफ गोयल ने पीएम ओली से मुलाकात से पहले नेपाल के तीन पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड, माधव कुमार नेपाल नेपाली कांग्रेस के शेर बहादुर देउबा से मुलाकात की थी। हालांकि, इन तीनों नेताओं ने गोयल के साथ अपनी मुलाकात की खबरों को गलत बताते हुए खारिज कर दिया था।

नेपाल सरकार ने बताया औपचारिक मुलाकात
नेपाली प्रधानमंत्री ओली के साथ बैठक की पुष्टि करते हुए प्रेस सलाहकार सूर्य थापा ने कहा कि रॉ चीफ गोयल ने पीएम ओली से मुलाकात की है। थापा ने इस बैठक का विवरण देने से इनकार कर दिया। नेपाली विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि इस बैठक के दौरान उनके मंत्रालय से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था।

मर्यादा भूलीं मंत्री इमरती देवी, कमलनाथ को कह दिया ‘लुच्चा-लफंगा और शराबी’

ग्वालियर। जैसे-जैसे प्रदेश में उपचुनाव की तारीख नजदीक आ रही है. वैसे-वैसे नेताओं की भाषा भी गिरती जा रही है. पूर्व सीएम कमलनाथ द्वारा मंत्री इमरती देवी को ‘आइटम’ कहने पर सियासी बयानबाजी जारी है. अपशब्दों के बाद अब बयानबाजी का स्तर गाली-गलौज तक पहुंच गया है. मंत्री इमरती देवी ने चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पूर्व सीएम कमलनाथ को ‘लुच्चा-लफंगा और शराबी’ बता दिया.

पूर्व सीएम कमलनाथ द्वारा आइटम कहे जाने के बाद इमरती देवी के साथ-साथ सीएम शिवराज, ज्योतिरादित्य सिंधिया और कई भाजपा नेता कमलनाथ पर निशाना साध चुके हैं. लेकिन शिवराज सरकार में मंत्री और डबरा विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी इमरती देवी ने एक सभा को सम्बोधित करते हुए राजनीतिक मर्यादा की हदें पार कर दीं. उन्होंने कहा कि कमलनाथ उस शराबी-कबाड़ी की तरह लुच्चे-लफंगे बन गए हैं, जो राह चलती महिलाओं को छेड़ता है और उन पर आइटम शब्द का इस्तेमाल कर फफ्तियां कसता है.

मंत्री इमरती देवी ने कहा कि कमलनाथ को शर्म नहीं आई किसी महिला के प्रति ऐसे शब्द का इस्तेमाल करते हुए. जबकि वे कैबिनेट में मंत्री हैं. नवरात्रि का समय चल रहा है और कमलनाथ ने महिलाओं का अपमान किया है. इसका परिणाम ये होगा की इस बार तो क्या मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार कभी नहीं बनेगी.

इमरती देवी डबरा के शांति गार्डेन में आयोजित भाजपा के युवा सम्मेलन में जनता को सम्बोधित कर रही थीं. इस दौरान उन्होंने पूर्व सीएम कमलनाथ के आइटम वाले बयान को लेकर उन पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि ‘मेरे ससुर के सामने, सास नन्द, देवरानी-जेठानी, बेटों के सामने कमलनाथ ने ऐसी भाषा बोली है, मैं आपके परिवार की महिला हूं और अगर 3 तारीख को आपने मेरी लाज नहीं रखी तो आप जानो और आपका काम जाने.’

उज्जैन में कलेक्टर ने देवी को चढ़ाई मदिरा, 12 घंटे तक रास्ते भर बहती रहेगी धार

हल्की गुलाबी ठंड का असर लोगों पर साफ दिखाई दे रहा है। सुबह से बड़ी संख्या में भक्त माता मंदिर पहुंचे हुए थे। जैसे ही कलेक्टर आशीष सिंह ने धार लगाकर मदिरा चढ़ाई, माता के जयकारे गूंज उठे। मौका था शारदीय नवरात्रि में महाष्टमी पर नगर पूजा का। बतौर मुखिया कलेक्टर ने माता महामाया को मदिरा चढ़ाकर पूजा की शुरुआत की। इसके बाद पुजारी और कुछ भक्ताें ने मदिरा चढ़ाई। अष्टमी पर शहर की सुख-समृद्धि के लिए 500 साल से इस नगर पूजा का सिलसिला जारी है। 12 घंटे में 27 किलोमीटर गुजरने वाली इस यात्रा में मदिरा की धार अनवरत बहती रहेगी।

साल में एक बार शारदीय नवरात्रि में हाेने वाली इस पूजा में कलेक्टर आशीष सिंह शामिल हुए। उन्होंने महालया और महामाया मंदिर में माता पूजन के बाद यात्रा काे रवाना किया। करीब 27 किमी इस महा-पूजा में 40 मंदिरों में मदिरा का भोग लगाया जाएगा। यात्राें में जिला प्रशासन के साथ-साथ कई पैदल चलते हुए इस परंपरा का निर्वहन करेंगे। सुबह यात्रा प्रसिद्ध 24 खंबा माता मंदिर से शुरू हुई जो ज्योतिलिंग महाकालेश्वर पर शिखर ध्वज चढ़ाकर समाप्त होगी। इस यात्रा की खास बात यह होती है कि एक घड़े में मदिरा को भरा जाता है, जिसमें नीचे छेद होता है, जिससे पूरी यात्रा के दौरान मदिरा की धार बहाई जाती है जो टूटती नहीं है।

नगर पूजा में परंपराओं को खास ख्याल रखा गया। 27 किमी के रूट में नौ ऐसे देवी मंदिर हैं, जिनमें पूरा शृ़ंगार चढ़ाया जाएगा।भूखी माता व 24 खंभा माता मंदिर पर चार स्थानों पर इसके अलावा 64 योगिनी, चामुंडा माता, बहादुरगंज माता मंदिर, गढ़कालिका और नगर कोट की रानी मंदिर में शृ़ंगार का पूरा सामान चढ़ाकर पूजा करने की परंपरा है। ऐसे ही चक्रतीर्थ पर मसानिया भैरव को सिगरेट चढ़ाकर पूजा की जाएगी। देवियों को पूरा शृंगार चढ़ाने की परंपरा 500 साल से चली आ रही है। मान्यता है कि यह देवियां नगर की सुख-समृद्धि और शांति की कामना पूरी करती हैं। मसानिया भैरव सहित शहर में मौजूद अन्य भैरव क्षेत्र की रखवाली के प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें भोग लगाकर सुरक्षा की कामना की जाएगी।

कमलनाथ के ‘आइटम’ के बाद अजय सिंह का विवादित बयान, अपने ही प्रत्याशी को बताया ‘टिकाऊ माल’

सागर। जैसे जैसे मध्यप्रदेश में उपचुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे वैसे नेताओं के विवादित बयान सामने आ रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के द्वारा बीजेपी प्रत्याशी इमरती देवी को ‘आइटम’ बताए जाने के बाद. अब कांग्रेस नेता ने अपने ही प्रत्याशी को टिकाऊ माल बता दिया है. सागर के सुरखी विधानसभा में एक चुनावी सभा को संबोधित करने आए पूर्व नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता अजय सिंह ने अपनी ही प्रत्याशी पारुल साहू को माल कहकर संबोधित कर दिया. जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.

सुरखी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी पारुल साहू के पक्ष में वोट की अपील कर रहे कांग्रेस नेता अजय सिंह ने कहा कि गोविंद सिंह राजपूत तो बिकाऊ माल निकले लेकिन पारुल साहू आप टिकाऊ माल निकली हैं. दरअसल अजय सिंह, गोविंद सिंह राजपूत के कांग्रेस छोड़ बीजेपी में जाने पर उनपर कटाक्ष कर रहे थे. उन्होने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मैं पारुल आपके लिए जनता से वोट की अपील करने आया हूं, आप टिकाऊ माल निकलना.

पारुल साहू उपचुनाव से पहले बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल हुई हैं, और वह सुरखी विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी हैं. वहीं गोविंद सिंह राजपूत कांग्रेस का हाथ छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं, और वह भी विधानसभा सीट से बीजेपी के प्रत्याशी हैं.

महाष्टमी पर गुजरात को तोहफा, PM Modi ने किया किसान योजना, हॉस्पिटल और रोप-वे का शुभारंभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने गृह राज्य गुजरात को महाष्टमी पर बड़ा तोहफा दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किसान सूर्योदय योजना, गिरनार रोप-वे और पीडियाट्रिक हार्ड हॉस्पिटल का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री विजय रूपानी के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने हाल ही में किसान सूर्योदय योजना की घोषणा की थी। इस योजना के तहत किसान सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक बिजली की आपूर्ति कर सकेंगे। राज्य सरकार ने 2023 तक इस योजना के तहत बुनियादी ढांचे को स्थापित करने के लिए 3,500 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है। 2020-21 के लिए दाहोद, पाटन, महिसागर, पंचमंडल, खेड़ा, तापी, वलसाड, छोटा उदयपुर, आनंद और गिर सोमनाथ को योजना के तहत शामिल किया गया है। शेष जिलों को चरणबद्ध तरीके से 2023 तक कवर किया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर के साथ जुड़े बाल चिकित्सा अस्पताल का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा उन्होंने अहमदाबाद सिविल अस्पताल में टेली-कार्डियोलॉजी के लिए एक मोबाइल एप्लीकेशन को भी लॉन्च किया। यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी का 470 करोड़ रुपए की लागत से विस्तार किया गया है। विस्तार परियोजना के पूरा होने के बाद हॉस्पिटल में बिस्तरों की संख्या 450 से बढ़कर 1251 हो जाएगी। यह संस्थान देश का सबसे बड़ा एकल सुपर स्पेशियलिटी कार्डियक शिक्षण संस्थान भी बन जाएगा और दुनिया के सबसे बड़े एकल सुपर स्पेशिएलिटी कार्डिएक अस्पतालों में से एक होगा।

आँखों के लिए बहुत लाभदायक होता है ग्रीन टी 

वर्तमान की दौड़भाग भरी लाइफ में आँखों की समस्या हर छोटी-बड़ी उम्र को लोगों को बहुत सताने लगी है। इतनी हीं नहीं, इसी वजह से छोटे-छोटे बच्चों को भी चश्मा लगाना पड़ रहा है। इसलिए समय रहते अपने खानपान में सुधार लेना ही बहुत बेहतर है।

रोज रात को 9-10 बादाम पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठते ही इनका छिलका उतार कर खाएं। इससे आंखों की रोशनी बहुत तेज होगी।रात को सोते समय त्रिफला को पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी से आंखों को धोएं। इससे आंखे स्वस्थ रहेगी। साथ आंखों पर लगा चश्मा भी स्वतः उतर जाएगा।गाजर में विटामिन ए, बी, सी भरपूर मात्रा में होते हैं। रोजाना गाजर खाने या इसका जूस पीने से आंखों की रोशनी बहुत तेज होती है।रोजा रात को सोने से पहले अपने पैरों के तलवों की सरसों के तेल से मालिश करें। इससे आंखे हैल्दी रहती है साथ ही उनकी रोशनी बरकरार रहती है।