सिंधिया के सामने पायलट उतरेंगे विधानसभा उपचुनाव प्रचार में ग्वालियर संभाग में बराबरी की टक्कर

मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव (MP bypolls 2020) को लेकर बीजेपी और कांग्रेस की तैयारियां जोरों पर हैं. हालांकि चुनाव की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन सत्ताधारी बीजेपी को इन उपचुनावों में हराने के लिए कांग्रेस पूरा दम-खम लगा रही है. खासकर कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में गए ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) और उनके प्रभाव वाली ग्वालियर-चंबल इलाके की सीटों पर पार्टी का ध्यान ज्यादा है. ऐसे में कांग्रेस ने हाल के दिनों में राजस्थान में अपने बगावती तेवर से चर्चा में आए तेज-तर्रार नेता सचिन पायलट (Sachin Pilot) को मध्य प्रदेश में चुनाव प्रचार में उतारने का प्लान बनाया है.

सचिन पायलट को मध्य प्रदेश में चुनाव प्रचार में उतारने के पीछे कांग्रेस पार्टी (Congress) की सोची-समझी रणनीति है. दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट एक-दूसरे के जिगरी दोस्त रहे हैं. पायलट ने जब राजस्थान में बगावती तेवर दिखाए थे, तो सिंधिया ने उनके समर्थन में बयान भी दिया था. पायलट को सिंधिया के खिलाफ चुनाव प्रचार में उतारकर कांग्रेस एक कारगर गेम-प्लान के साथ मैदान में जाना चाहती है.

यह गौर करने वाली बात है कि मध्य प्रदेश में जिन 28 सीटों पर विधानसभा के उपचुनाव होने हैं, उनमें से अधिकतर सीटें ग्वालियर-चंबल इलाके की हैं, जिसे सिंधिया का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है. इसी साल मार्च में जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ (Kamalnath) सरकार से अपना समर्थन वापस लिया और बीजेपी में शामिल हुए, उस समय सिंधिया समर्थक 22 विधायकों ने इस्तीफा दिया था. इसके बाद प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) की सरकार बनी. सिंधिया समर्थक ज्यादातर विधायक इन्हीं इलाकों से आते हैं. मध्य प्रदेश का यह इलाका राजस्थान से सटा हुआ भी है. ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद है कि सचिन पायलट का चुनाव प्रचार करना यहां सिंधिया पर भारी पड़ सकता है.

सचिन पायलट ने बीते दिनों मीडिया के साथ बातचीत में कहा था कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने उनसे उपचुनाव में प्रचार (Election Campaign) करने का आग्रह किया है. पायलट ने कहा कि वे पार्टी के लिए निश्चित रूप से यह काम करेंगे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का एक जिम्मेदार नेता होने के नाते यह उनका कर्तव्य है कि पार्टी को जब उनकी जरूरत हो, तो वह वहां मौजूद रहें.

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में जिन 28 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनमें से 16 सीटें ग्वालियर-चंबल इलाके की हैं. इनमें कई सीटें ऐसी हैं जहां गुर्जर मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है. ऐसे में राजस्थान के दिग्गज गुर्जर नेता सचिन पायलट, कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं. पार्टी ने इसी सोच और उम्मीद के साथ सचिन पायलट को सिंधिया के प्रभाव वाले इलाकों में चुनाव प्रचार के लिए उतारने का प्लान बनाया है. यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव मैदान में दो जिगरी दोस्त एक-दूसरे के खिलाफ किस अंदाज में परस्पर विरोधी बयान देते हैं.

बिना मास्क पहने अकेले कार चला रहे वकील का कटा 500 रुपये का चालान… सरकार से मांगा 10 लाख रुपये मुआवजा…


दिल्ली के एक वकील ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और अकेले कार चलाने के दौरान मास्क न पहनने के लिए उन पर लगाए गए 500 रुपये के जुर्माने की वापसी की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने “सार्वजनिक रूप से मानसिक प्रताड़ना” दिए जाने के लिए सरकारी अधिकारियों से मुआवजे के रूप में 10 लाख रुपये की मांग की है।

अपनी याचिका में वकील सौरभ शर्मा का कहना है कि उन्हें 9 सितंबर को पूर्वी दिल्ली के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट द्वारा एक चालान जारी किया गया था, जबकि वह अकेले गाड़ी चला रहे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक अपनी याचिका में उन्होंने कहा है, 9 सितंबर 20 को लगभग 11 बजे, अपने कार्यालय जाने के दौरान, याचिकाकर्ता की कार को दिल्ली पुलिस के अधिकारियों द्वारा गीता कॉलोनी के पास रोक दिया गया था। एक पुलिस कांस्टेबल अरोड़ा ने उनका फोटो लिया, जबकि याचिकाकर्ता अभी भी अपनी कार में बैठे हुए थे और उसे कार से उतरने का निर्देश दिया।”

याचिका में कहा गया है कि शर्मा ने निजी वाहन में अकेले यात्रा करते समय मास्क पहनने के लिए कार्यकारी आदेश को देखने की मांग की। हालांकि, अधिकारी उन्हें ऐसा कोई आदेश नहीं दिखा सके, लेकिन फिर भी उन्हें 500 रुपये का जुर्माना लिया गया।

इसलिए, शर्मा ने मांग की कि चालान को रद्द कर दिया जाए, 500 रुपये का जुर्माना वापस किया जाए और उन्हें मुआवजा भी दिया जाए।

वह आगे कहते हैं कि “शहर के आम जनता पर बिना किसी कानूनी अधिकार के जुर्माना लगाया जाता है और इसलिए इस माननीय न्यायालय द्वारा खारिज किया जा सकता है”।

याचिकाकर्ता ने अधिकारियों को अकेले यात्रा करते समय मास्क नहीं पहनने पर किसी के खिलाफ जुर्माना लगाने से रोकने के लिए एक दिशा-निर्देश दिए जाने की भी मांग की है।

‘व्यक्तिगत वाहन, अकेले यात्रा करते समय सार्वजनिक स्थान पर नहीं’
शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि चालान में बताया गया अपराध यह है कि उन्होंने सार्वजनिक स्थान पर मास्क नहीं पहना है। हालांकि, उनका दावा है कि अकेले यात्रा करते समय उनका “निजी निजी वाहन सार्वजनिक स्थान नहीं है।”

“यह एक निजी क्षेत्र है और इसलिए अकेले यात्रा करते समय मास्क पहनने की जरूरत की उसी बराबरी में नहीं रखा जा सकता कि सार्वजनिक स्थान पर मास्क नहीं पहना गया है।”

शर्मा ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के स्पष्टीकरण का भी जिक्र किया है कि इसने लोगों को अकेले यात्रा करने के लिए मास्क पहनने के निर्देश देने के लिए कोई दिशानिर्देश जारी नहीं किया है। मंत्रालय ने यह स्पष्टीकरण इस महीने की शुरुआत में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान किया था।

उन्होंने यह भी कहा है कि लॉकडाउन के आंशिक रूप से हटाए जाने के साथ ही, कई सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ होती है, जिसमें लोग मास्क पहनने और सामाजिक दूर रखने के नियमों का उल्लंघन करते हैं।

शर्मा ने कहा, “जब दुकानों में भीड़भाड़ हो जाती है तो न तो दुकानदारों पर जुर्माना लगाया जाता है और न ही नियम तोड़ने वाले ग्राहकों पर। हालांकि, याचिकाकर्ता की तरह अगर लोग अपनी कार में अकेले यात्रा करते समय अपने चेहरे पर मास्क रखने में नाकाम रहते हैं, तो पुलिस उन पर जुर्माना लगा देती है और वह भी बिना किसी अधिकार के।

रास्ते से लौटकर राज्यसभा पहुंची जया बच्चन, महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करने पर BJP सांसद को दिया जवाब

जया बच्चन हाल ही में सदन से बॉलीवुड में ड्रग्स के इस्तेमाल का मुद्दा उठाने वाले रवि किशन पर भी निशाना साध चुकी हैं।

नई दिल्ली

भारत में इस साल संसद का सत्र बिना प्रश्नकाल के ही हो रहा है। हालांकि, इसके बावजूद दोनों सदनों से कई ऐसे वाकये सामने आए हैं, जिन्होंने संसद की कार्रवाई में आम लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। हालिया कुछ मामले राज्यसभा से सांसद जया बच्चन से जुड़े हैं। कुछ दिनों पहले ही बॉलीवुड में ड्रग्स का मुद्दा उठाने पर रवि किशन पर जमकर निशाना साधने वाली जया बच्चन अब लगातार महाराष्ट्र सरकार को बचाने में जुटी हैं। इस सिलसिले में वे फिर से भाजपा के सांसद से भिड़ गईं।

दरअसल, समाजवादी पार्टी से सांसद जया बच्चन लगातार केंद्र सरकार के सवालों और जवाबों पर प्रतिक्रिया दे रही हैं। हाल ही में जब वे राज्यसभा से घर जा रही थीं, तब उन्हें बीच रास्ते में ही भाजपा सांसद विनय सहस्रबुद्धे के भाषण के कुछ हिस्से सुनाई दिए। सहस्रबुद्धे कोरोनावायरस महामारी को न संभाल पाने के लिए महाराष्ट्र सरकार पर एक के बाद एक तीखे प्रहार कर रहे थे। यह सुनते ही जया बच्चन तुरंत उन्हें जवाब देने के लिए राज्यसभा लौटीं और सहस्रबुद्धे के बयान को अनुचित करार दे दिया।

जया बच्चन यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने अपने परिवार के कोरोना संक्रमित होने का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका अच्छा ख्याल रखा गया और महाराष्ट्र सरकार यह लगातार सुनिश्चित कर रही है कि मुंबई की गलियां नियमित तौर पर सैनिटाइज की जाएं। बता दें कि बच्चन परिवार के चार सदस्य दो महीने पहले कोरोना से संक्रमित पाए गए थे। इनमें अमिताभ बच्चन उनके बेटे अभिषेक बच्चन, बहू ऐश्वर्या राय और पोती आराध्या शामिल थी। हालांकि, जया बच्चन की टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई थी.

बता दें कि कोरोना से सबसे बुरे हालात महाराष्ट्र के ही हैं। राज्य में अब तक कोरोना के कुल केस 11.21 लाख पर पहुंच गए हैं। इतना ही नहीं, जहां देश में अब तक कोरोना से 83 हजार से ज्यादा जानें गई हैं, वहीं अकेले महाराष्ट्र में 30 हजार 883 मौतें हो चुकी हैं। यानी देश में हुई कुल 37 फीसदी मौतें महाराष्ट्र से ही हुई हैं।

चीन की नई चाल, सीमा पर लाउडस्पीकर लगाकर भारतीय सेना के लिए बजा रहा पंजाबी गाने!

सेना के सूत्रों ने कहा कि पहली घटना तब हुई जब भारतीय सेना ने 29-31 अगस्त के बीच दक्षिणी किनारे पर पैंगोंग झील के पास ऊंचाइयों पर कब्जा करने की चीनी कोशिश को नाकाम कर दिया था.

नई दिल्ली

भारत और चीन के बीच तनाव जारीचीन ने सीमा पर लगाए लाउडस्पीकरलाउडस्पीकर में पंजाबी गाने बजा रहा चीन

भारत और चीन के बीच पिछले काफी वक्त से तनाव बना हुआ है. सीमा पर तनाव के बीच चीन ने अब नई चाल चली है. चीन ने एलएसी पर फिंगर-4 इलाके में लाउडस्पीकर लगाए हैं. इन लाउडस्पीकर पर चीन पंजाबी गाने भी बजा रहा है. माना जा रहा है कि चीन लाउडस्पीकर के जरिए अब भारतीय सैनिकों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है.

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक फिंगर-4 एरिया में चीन की सेना ने लाउडस्पीकर लगाए हैं. सूत्रों का कहना है कि जहां चीनी सेना ने लाउडस्पीकर लगाए हैं, वह इलाका 24×7 भारतीय सैनिकों की लगातार निगरानी में है. वहीं अब यह संभव है कि चीन हमारे सैनिकों को विचलित करने या दबाव बनाने के लिए इस तरह की चाल चल रहा है. दरअसल, यहां भारत की ओर से तैनात सैनिकों में सिख भी शामिल है. ऐसे में कहा जा रहा है कि चीन की सेना मानसिक दबाव बनाने के तहत इस तरह के गाने बजा रही है.

बता दें कि फिंगर-4 एरिया ऐसे इलाका है, जहां भारत और चीन की सेनाओं के बीच टकराव के हालात बने हुए हैं. कुछ दिन पहले 8 सितबंर को दोनों देशों की सेनाओं के बीच इस इलाके में काफी जबरदस्त फायरिंग हुई थी. दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच 100 से अधिक राउंड फायर किए गए थे. पिछले 20 दिनों में भारत और चीन में पूर्वी लद्दाख में सैनिकों के बीच कम से कम तीन गोलीबारी की घटनाओं को अंजाम दिया गया है.

कई बार फायरिंग

सेना के सूत्रों ने कहा कि पहली घटना तब हुई जब भारतीय सेना ने 29-31 अगस्त के बीच दक्षिणी किनारे पर पैंगोंग झील के पास ऊंचाइयों पर कब्जा करने की चीनी कोशिश को नाकाम कर दिया था, जबकि दूसरी घटना 7 सितंबर को मुखपारी हाई के पास हुई. सेना के सूत्रों ने कहा कि तीसरी घटना 8 सितंबर को पैंगोंग झील के उत्तरी तट के पास हुई थी. उस दौरान देशों के सैनिकों ने 100 से अधिक राउंड फायरिंग की थी क्योंकि चीनी पक्ष बहुत आक्रामक तरीके से बर्ताव कर रहा था.

वहीं यह घटना ऐसे समय में हुई, जब भारतीय विदेश मंत्री शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के लिए मास्को गए थे और सीमा मुद्दों को संबोधित करने के लिए अपने चीनी समकक्ष से मिले थे. चर्चा के मुताबिक दोनों पक्ष कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता करने वाले थे, लेकिन अभी तक चीनी पक्ष की ओर से तारीख और समय की पुष्टि नहीं की गई है.

कई बार हुई बातचीत

बता दें कि भारत और चीन ने सैन्य और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर अप्रैल-मई से कई दौर की बातचीत की है लेकिन अब तक इसका कोई महत्वपूर्ण परिणाम नहीं निकला है. भारत और चीन इस साल अप्रैल-मई से पैंगोंग झील के पास कोंगरूंग नाला, गोगरा और फिंगर क्षेत्र में चीनी सेना के जरिए किए गए बदलाव के बाद गतिरोध में लगे हुए हैं. भारतीय सेना ने उस क्षेत्र में चीनी सेना के जरिए किसी भी आक्रामक कदम को उठाने के लिए अब लद्दाख क्षेत्र में अपनी तैयारियों को कई गुना बढ़ा दिया है.

प्रधानमंत्री जन्मदिन: आज मोदी जी ने 70 साल पूरे किये शून्य से शिखर तक की यात्रा……..

बचपन में नरेंद्र मोदी का परिवार काफी गरीब था और इसलिए जीवन संघर्ष से भरा रहा. पूरा परिवार छोटे से एक मंजिला घर में रहता था. उनके पिता स्थानीय रेलवे स्टेशन पर एक चाय के स्टाल पर चाय बेचते थे. शुरुआती दिनों में पीएम नरेंद्र मोदी भी अपने पिता का हाथ बटाया करते थे.

एक शख्स कड़े संघर्ष के बाद शून्य से शिखर तक का सफर तय करता है और जब वह उस शिखर पर पहुंच जाता है, तो उसकी मेहनत और लगन की वजह से लोग उस युग या समय को उसके नाम से जानने लगते हैं. राजनीति में यही कहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है. यह उनकी मेहनत और संघर्ष ही है कि आज राजनीतिक दुनिया में कहा जाता है कि ‘मोदी युग’ चल रहा है. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है. पीएम मोदी आज 70 साल के हो गए हैं. 17 सितंबर ही के दिन सन् 1950 में उनका जन्म गुजरात के वडनगर में हुआ था.

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के दिन आइए जानते हैं कैसे वडनगर में एक निर्धन परिवार से दिल्ली की सत्ता के शिखर तक पीएम मोदी ने सफर तय किया. दरअसल पीएम मोदी बचपन से ही देश सेवा करना चाहते थे, इसके लिए वह सेना में भी शामिल होने का सपना देखते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. उनके भाग्य में देश के प्रधानमंत्री का पद लिखा था.

बचपन में होना चाहते थे सेना में शामिल
बचपन में नरेंद्र मोदी का परिवार काफी गरीब था और इसलिए जीवन संघर्ष से भरा रहा. पूरा परिवार छोटे से एक मंजिला घर में रहता था. उनके पिता स्थानीय रेलवे स्टेशन पर एक चाय के स्टाल पर चाय बेचते थे. शुरुआती दिनों में पीएम नरेंद्र मोदी भी अपने पिता का हाथ बटाया करते थे. निजी जिंदगी के संघर्षों के अलावा पीएम मोदी एक अच्छे छात्र भी रहे. उनके स्कूल के साथी नरेंद्र मोदी को एक मेहनती छात्र बताते हैं और कहते हैं कि वह स्कूल के दिनों से ही बहस करने में माहिर थे. वो काफी समय पुस्तकालय में बिताते थे. साथ ही उन्हें तैराकी का भी शौक था. नरेंद्र मोदी वडनगर के भगवताचार्य नारायणाचार्य स्कूल में पढ़ते थे. पीएम मोदी बचपन से ही एक अलग जिंदगी जीना चाहते थे और इसलिए पारम्परिक जीवन में नहीं बंधे.

बचपन में पीएम मोदी का सपना भारतीय सेना में जाकर देश की सेवा करने का था, हालांकि उनके परिजन उनके इस विचार के सख्त खिलाफ थे. नरेन्द्र मोदी जामनगर के समीप स्थित सैनिक स्कूल में पढ़ने के बेहद इच्छुक थे, लेकिन जब फीस चुकाने की बात आई तो घर पर पैसों का घोर अभाव सामने आ गया. नरेंद्र मोदी बेहद दुखी हुए.

कैसे आए राजनीति में पीएम मोदी
बचपन से ही उनका संघ की तरफ खासा झुकाव था और गुजरात में आरएसएस का मजबूत आधार भी था. वे 1967 में 17 साल की उम्र में अहमदाबाद पहुंचे और उसी साल उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ली. इसके बाद 1974 में वे नव निर्माण आंदोलन में शामिल हुए. इस तरह सक्रिय राजनीति में आने से पहले मोदी कई वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे.

इसके बाद 1980 के दशक में वह गुजरात की बीजेपी ईकाई में शामिल हुए. वह 1988-89 में भारतीय जनता पार्टी की गुजरात ईकाई के महासचिव बनाए गए. नरेंद्र मोदी ने लाल कृष्ण आडवाणी की 1990 की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा के आयोजन में अहम भूमिका अदा की. इसके बाद वो भारतीय जनता पार्टी की ओर से कई राज्यों के प्रभारी बनाए गए.

इसके बाद साल 1995 में उन्हें पार्टी ने और ज्यादा जिम्मेदारी दी. उन्हें भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय सचिव और पांच राज्यों का पार्टी प्रभारी बनाया गया. इसके बाद 1998 में उन्हें महासचिव (संगठन) बनाया गया. इस पद पर वो अक्‍टूबर 2001 तक रहे. लेकिन 2001 में केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद मोदी को गुजरात की कमान सौंपी गई.

प्रधानमंत्री मोदी ने जब साल 2001 में मुख्यमंत्री की पद संभाली तो सत्ता संभालने के लगभग पांच महीने बाद ही गोधरा कांड हुआ, जिसमें कई हिंदू कारसेवक मारे गए. इसके ठीक बाद फरवरी 2002 में ही गुजरात में मुसलमानों के खिलाफ़ दंगे भड़क उठे. इस दंगे में सैकड़ों लोग मारे गए. तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात का दौरा किया, तो उन्होंनें उन्हें ‘राजधर्म निभाने’ की सलाह दी.

गुजरात दंगो में पीएम मोदी पर कई संगीन आरोप लगे. उन्हें मुख्यमंत्री के पद से हटाने की बात होने लगी तो तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी उनके समर्थन में आए और वह राज्य के मुख्यमंत्री बने रहे. हालांकि पीएम मोदी के खिलाफ दंगों से संबंधित कोई आरोप किसी कोर्ट में सिद्ध नहीं हुए.

दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनावों में पीएम मोदी ने जीत दर्ज की थी. इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनावों में और फिर 2012 में भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी गुजरात विधानसभा चुनावों में जीती.

साल 2009 से बढ़ा पीएम मोदी का राजनीतिक कद
2009 के लोकसभा चुनाव बीजेपी ने लालकृष्ण आडवाणी को आगे रखकर लड़ा था, लेकिन यूपीए के हाथों शिकस्त झेलने के बाद आडवाणी का कद पार्टी में घटने लगा. दूसरी पंक्ति के नेता तेजी से उभर रहे थे- जिनमें नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली शामिल थे. नरेंद्र मोदी इस समय तक गुजरात में दो विधानसभा चुनावों में लगातार जीत हासिल कर चुके थे और उनका कद राष्ट्रीय होता जा रहा था.

जब 2012 में लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की, तब तक ये माना जाने लगा था कि अब मोदी राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करेंगे. ऐसा ही हुआ भी जब मार्च 2013 में नरेंद्र मोदी को बीजेपी संसदीय बोर्ड में नियुक्त किया गया और सेंट्रल इलेक्शन कैंपेन कमिटी का चेयरमैन बनाया गया. वो एकमात्र ऐसे पदासीन मुख्यमंत्री थे, जिसे संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया था. ये साफ तौर पर संकेत था कि अब मोदी ही अगले लोकसभा चुनावों में पार्टी का मुख्य चेहरा होंगे.

लगातार दो बार प्रधानमंत्री बने

साल 2014 में नरेंद्र मोदी के चेहरे पर भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव लड़ा और यहीं से राष्ट्रीय राजनीति में ‘मोदी युग’ की शुरुआत हुई. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई. बीजेपी ने अकेले दम पर 282 सीटों पर जीत दर्ज की. इतना ही नहीं एक प्रत्याशी के रूप में पीएम मोदी ने देश की दो लोकसभा सीटों वाराणसी और वडोदरा से चुनाव लड़ा और दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से विजयी हुए. नरेन्द्र मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के 14वें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली.

इसके बाद अगले पांच साल तक पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल में एक के बाद एक कई महत्वपूर्ण फैसले लिए. पीएम मोदी की लोकप्रियता हर दिन के साथ बढ़ती गई. अब बीजेपी और कमल की पहचान पूरी तरह से पीएम मोदी से हो गई. उनकी पॉपुलेरिटी के सामने विपक्ष का कोई नेता ठहरता हुआ नहीं दिखाई दे रहा था.

इसके बाद साल 2019 के लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा सवाल था कि क्या पीएम मोदी एक बार फिर अपना जादू दोहरा पाएंगे. नतीजे जब आए तो जवाब मिल चुका था. देश ने एकतरफा बीजेपी के खाते में वोट किया और इस बार भी पीएम मोदी के चेहरे पर NDA की ऐतिहासिक जीत हुई. 2019 लोकसभा चुनाव की जीत 2014 से काफी बड़ी थी. इस चुनाव में बीजेपी ने 303 सीटों पर जीत दर्ज की.

आज पीएम मोदी की पॉपुलेरिटी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लोग उन्हें देश के महान प्रधानमंत्रियों, जैसे जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी बाजपेयी के साथ बराबर खड़ा देखते हैं. कई तो उन्हें इन नेताओं से भी बड़ा नेता मानते हैं.

केंद्र सरकार पर भड़की इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, कहा – कोरोना के चलते 382 डॉक्टरों की गई जान

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने केंद्र सरकार के उस बयान पर नाराजगी जताई है जिसमें सरकार ने संसद में कहा था कि उसके पास कोरोना के चलते जान गंवाने वालों या इस वायरस से संक्रमित होने वाले डॉक्टरों व अन्य मेडिकल स्टाफ का डाटा नहीं है.

नई दिल्ली: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (Indian Medical Association) ने केंद्र सरकार के उस बयान पर नाराजगी जताई है जिसमें सरकार ने संसद में कहा था कि उसके पास कोरोना के चलते जान गंवाने वालों या इस वायरस से संक्रमित होने वाले डॉक्टरों (Doctors die of covid-19) व अन्य  अन्य मेडीकल स्टाउ का डाटा नहीं है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने प्रेस रिलीज जारी की और कहा, ‘अगर सरकार कोरोना संक्रमित होने वाले डॉक्टर और हेल्थ केयर वर्कर का डेटा नहीं रखती और यह आंकड़े नहीं रखती कि उनमें से कितनों ने अपनी जान इस वैश्विक महामारी के चलते कुर्बान की तो वह महामारी एक्ट 1897 और डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू करने का नैतिक अधिकार खो देती है. इससे इस पाखंड का का भी पर्दाफाश होता है कि एक तरफ इनको कोरोना वॉरियर कहा जाता है और दूसरी तरफ इनके और इनके परिवार को शहीद का दर्जा और फायदे देने से मना किया जाता है.’

एसोसिएशन ने आगे कहा, ‘बॉर्डर पर लड़ने वाले हमारे बहादुर सैनिक अपनी जान खतरे में डालकर दुश्मन से लड़ते हैं लेकिन कोई भी गोली अपने घर नहीं लाता और अपने परिवार के साथ साझा करता, लेकिन डॉक्टर्स और हेल्थ केयर वर्कर राष्ट्रीय कर्तव्य का पालन करते हुए ना सिर्फ खुद संक्रमित होते हैं बल्कि अपने घर लाकर परिवार और बच्चों को देते हैं.’

एसोसिएशन आगे कहती है, ‘केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि पब्लिक हेल्थ और हॉस्पिटल राज्यों के तहत आते हैं इसलिए इंश्योरेंस कंपनसेशन का डाटा केंद्र सरकार के पास नहीं है. यह कर्तव्य का त्याग और राष्ट्रीय नायकों का अपमान है जो अपने लोगों के साथ खड़े रहे.’ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने उन 382 डॉक्टर की लिस्ट जारी की जिनकी जान कोरोना के चलते गई.

IMA की ये चार मुख्य मांगें हैं… 
1. सरकार कोरोना से मारे गए डॉक्टर्स को शहीद का दर्जा दे
2. देश की सरकार इनके परिवार को सांत्वना और मुआवजा दे
3. सरकार नर्सों व अन्य हेल्थ केयर वर्कर प्रतिनिधि से भी ऐसा डेटा ले
4. प्रधानमंत्री उचित समझें तो हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष को बुलाएं और उनकी चिंताएं समझें और सुझाव लें

लोकसभा में उठा पलायन का मुद्दा, सरकार ने कहा- मौत का डाटा नहीं

Gwalior मप्र के मंत्री प्रधुम्न सिंह तोमर और कांग्रेसियों में हाथापाई

मंत्री प्रद्युम्न सिंह (Minister Pradhuman Singh) ने अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला पदाधिकारी नाज़िम खान का गला पकड़ लिया. मामला बढ़ता देख पुलिस ने मोर्चा संभाला और कांग्रेसियों को हटाया.



ग्वालियर. ग्वालियर चंबल (Gwalior-chambal) की 16 सीटों पर उपचुनाव (By Election) की जंग शुरू होने से पहले ही कांग्रेस और बीजेपी में सड़क पर झड़प होने लगी है. नगर निगम ने कमलनाथ के स्वागत के लिए लगाए कुछ पोस्टर हटाए तो कांग्रेसियों ने हंगामा खड़ा कर दिया. कार्यकर्ताओं ने फूलबाग चौराहा पर चक्काजाम कर दिया. इस दौरान केबिनेट मंत्री प्रधुम्न सिंह तोमर यहां पहुंचे तो कांग्रेसियों ने उनका घेराव कर दिया. मंत्री भी आपा खो बैठे और कांग्रेस कार्यकर्ता से बदसुलूकी कर दी. इससे उत्तेजित कार्यकर्ताओ की उनसे और पुलिस से झड़प हो गई.

18 सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ  ग्वालियर-चंबल के दो दिन के चुनावी दौरे पर आ रहे हैं.इस इवेंट को जोरदार बनाने के लिए शहर में कांग्रेस ने कमलनाथ के होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टर लगाए हैं. फूलबाग पर लगे कुछ पोस्टर बैनर नगर निगम अमले ने हटा दिए.जब निगम का अमला पोस्टर बैनर हटा रहा था तो कांग्रेसियों को भनक लग गई.थोड़ी देर में पूर्व मंत्री लाखन सिंह यादव के साथ सैकड़ों कार्यकर्ता फूलबाग पर जमा हो गए. इन लोगों ने हंगामा कर दिया और  फूलबाग चौराहे पर धरना देकर बैठ गए. कांग्रेसियों ने सिंधिया के खिलाफ भी नारेबाज़ी की. लाखन सिंह ने प्रशासन पर BJP के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया. उनका आरोप है कि बीजेपी कमलनाथ और कांग्रेस के जोरदार माहौल से डर गई है. अब कांग्रेस को रोकने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है.

कैबिनेट मंत्री पहुंचे तो बवाल बढ़ा,झूमा झटकी

जिस वक्त फूलबाग चौराहे पर कांग्रेसियों का  धरना चल रहा था, उस दौरान कैबिनेट मंत्री प्रधुम्न सिंह तोमर मांझी समाज से मुलाकात करने पहुंच गए. मंत्री को आता देख कुछ कांग्रेसी उनके सामने नारेबाजी करने लगे.पहले मंत्री प्रधुम्न ने कांग्रेसियों को मना किया, लेकिन जब मंत्री के सामने अड़ गए तो मंत्री ने अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला पदाधिकारी नाज़िम खान का गला पकड़ लिया. मामला बढ़ता देख पुलिस ने मोर्चा संभाला और कांग्रेसियों को हटाया.

सिंधिया का पुतला फूंका, थाना घेरा

मंत्री से विवाद के बाद भड़के कांग्रेसियों ने  फूलबाग पर प्रदर्शन किया.  कांग्रेसियों ने सिंधिया का पुतला फूंका और  मंत्री पर कार्रवाई की मांग को लेकर 3 घंटे तक सड़क पर धरना दिया. देर शाम कांग्रेसियों ने पड़ाव थाना का घेराव किया.थाना परिसर में नारेबाजी कर कांग्रेसियों ने मंत्री प्रधुम्न सिंह तोमर और भाजपाईयों पर FIR की मांग की. कांग्रेस के आवेदन पर  पुलिस अफसरों ने जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया.कांग्रेस ने 24 घंटे में कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनीदी है.

मंत्री प्रद्युम्न ने वीडियो जारी किया

कांग्रेसियों से हुए विवाद के बाद शिवराज सरकार में मंत्री प्रधुम्न सिंह तोमर ने अपना पक्ष रखते हुए एक वीडियो बयान जारी किया. तोमर का कहना है वो फूलबाग चौराहे पर धरने पर बैठे मांझी समाज के लोगों से ज्ञापन लेने गया था. वहां कांग्रेस का झंडा लिए कुछ लोगों ने गुंडागर्दी करने की कोशिश की.उन्होंने वीडियो के माध्यम से आग्रह किया है कि जनता किसी पार्टी की नहीं होती क्योंकि जब तक लोग हैं तभी तक नेता राजनीति कर पाते हैं.तोमर ने भाजपा कार्यकर्ताओं से हाथ जोड़कर अपील की है कि उन्हें उत्तेजित नहीं होना है.

माथे के इस प्वाइंट पर 45 सेकंड तक डालें दबाव, आपको भी दिखेगा चमत्कार !

आज के जमाने में बहुत से लोग ऐसे है, जो केवल दवाईयों पर जीते है. इसकी सबसे बड़ी वजह लोगो का गलत खान पान और कम मेहनत करना है. वैसे यदि दवाईयों की जगह योगा और एक्यूप्रेशर का इस्तेमाल किया जाएँ तो यक़ीनन आप हर बीमारी से सुरक्षित रहेंगे. वही सर्जरी से होने वाले इलाज की बजाय अगर एक्यूप्रेशर की मदद से बिना दर्द वाला इलाज करवाया जाएँ तो ये आपके स्वास्थ्य के लिए भी ज्यादा अच्छा रहेगा.

एक्यूप्रेशर का न कोई साइड इफ़ेक्ट होता है और न ही इसमें कोई परेशानी झेलनी पड़ती है. हालांकि एक्यूप्रेशर से होने वाले इलाज वक्त जरूर लेते है, पर साथ ही अपना अच्छा असर भी दिखाते है. जी हां ये इलाज सर्जरी की तरह जल्दी अपना असर नहीं दिखा पाते. ऐसे में हर रोगी को एक्यूप्रेशर के इलाज के दौरान धैर्य रखना चाहिए. वही अगर आप इस इलाज को जीवन भर के लिए अपना ले तो आप हमेशा के लिए बीमारियों से सुरक्षित हो जायेंगे.

इसलिए आज हम आपको एक्यूप्रेशर का एक ऐसा मशहूर इलाज बताने वाले है, जो आपके बेहद काम आएगा. इसके इलावा इस इलाज के बारे में जानने के बाद आप यक़ीनन मन ही मन में हमें शुक्रिया कहेगे. वैसे भी आज कल तनाव के कारण हर कोई परेशान है. यहाँ तक कि स्कूल जाने वाला छोटा सा बच्चा भी आज कल चिंता में रहता है. ऐसे में इस तनाव को कम करने के लिए हम आपको एक तरीका बता रहे है.

गौरतलब है कि इस इलाज के लिए सबसे पहले आपको अपनी तर्जनी ऊँगली को अपनी भौहों यानि आईब्रोस के बीचोबीच रखना है. इसके बाद इस प्वॉइंट को कम से कम 45 सेकंड तक मसलना है. फिर हल्की सी मसाज करनी है. मगर इस बात का ध्यान रखे कि जोर से इस प्वॉइंट को न दबाएं. बता दे कि इस प्वॉइंट को दबाने से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है. दरअसल माथे के इस प्वॉइंट पर ही वो मासपेशिया होती है, जो हमारे तनाव वाले सेंस से जुडी होती है. ऐसे में इन्हे मलने से तनाव से मुक्ति मिलती है.

इसलिए यदि आप रोज सुबह और शाम केवल एक मिनट निकाल कर ये कार्य करेंगे, तो आप हमेशा तनाव मुक्त रहेंगे. इसके इलावा तनाव से जुडी कई बीमारियों जैसे नींद की कमी, अधिक गुस्सा आना, अचानक मूड का खराब हो जाना आदि से भी आप बचे रहेंगे. तो बिना सोचे आज ही ये कार्य शुरू कीजिये और तनाव को हमेशा के लिए अपनी जिंदगी से बाहर निकाल दीजिये.

वास्तु टिप्स: घर के मुख्य द्वार से आती हैं खुशियां अपार, जानिए प्रवेश द्वार के लिए कैसा हो वास्तु


घर के मुख्य द्वार का दोषरहित होना बहुत जरूरी है, जिससे घर में सुख, शांति और धन-धान्य का वास होता है. साथ ही घर के सभी लोगों में परस्पर सहयोग और प्रेम का भाव भी बना रहता है.जानिए, वास्तु के हिसाब से कैसा हो घर का प्रवेश द्वार.

नई दिल्ली: एक सुंदर घर का सपना हर कोई देखता है. सभी चाहते हैं कि उनकी पसंद का एक प्यारा सा घर हो, जिसमें वे सुकून भरी जिंदगी व्यतीत करें. आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अपनी रुचि के हिसाब से एक घर लेना या घर का निर्माण करवाना कठिन काम है. इसीलिए घर का चुनाव करते समय हर छोटी-बड़ी बात का ख्याल रखना जरूरी है. बात अगर घर के मुख्य दरवाजे (Main Door) की है तो वास्तु (Vastu) के अनुसार उसकी दशा व दिशा आदि सभी उपयुक्त होने चाहिए.

मुख्य द्वार है सबसे जरूरी हिस्सा
सच तो यह है कि प्रवेश द्वार घर का महत्वपूर्ण अंग होता है. भवन का निर्माण या उसे खरीदने के दौरान वास्तु के नियमों का ध्यान रखना आवश्यक है. यह प्रवेश द्वार से घर के सदस्यों के आवागमन के साथ ही घर में खुशियों का भी प्रवेश कराता है. घर के मुख्य द्वार के दोषयुक्त होने पर घर के सदस्यों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. घर में आर्थिक, मानसिक व शारीरिक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है. इसीलिए घर के मुख्य द्वार का दोषरहित होना बहुत जरूरी है, जिससे घर में सुख, शांति और धन-धान्य का वास होता है. साथ ही घर के सभी लोगों में परस्पर सहयोग और प्रेम का भाव भी बना रहता है. वास्तुशास्त्री नरेश सिंगला से जानिए, वास्तु के हिसाब से कैसा हो घर का प्रवेश द्वार.



किस दिशा में हो मुख्य द्वार
वास्तुशास्त्र के अनुसार चारों दिशाएं शुभ मानी गई हैं. इसलिए किसी वास्तु विशेषज्ञ (Vastu Expert) की देख-रेख में मुख्य द्वार का निर्माण कराया जा सकता है. कभी भूलकर भी दक्षिण-पूर्व (South-East) और दक्षिण-पश्चिम (South-West) दिशा की ओर प्रवेश द्वार नहीं बनवाना चाहिए. दक्षिण-पूर्व की ओर प्रवेश द्वार होने पर घर में चोरी, परिवार में झगड़े की आशंका बनी रहती है. साथ ही घर के सदस्यों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है. वहीं दक्षिण-पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार होने से घर के मुखिया को दुखों का सामना करना पड़ता है.

मुख्य द्वार की दशा
ध्यान रखें कि मुख्य द्वार के सामने सीढ़ियां न हों. ऐसा होना अशुभ होता है. यह द्वार भीतर की ओर खुलना चाहिए. ध्यान रहे कि इस दरवाजे से कोई आवाज नहीं आनी चाहिए. संभव हो तो घर में दो प्रवेश द्वार बनवाएं. बड़ा प्रवेश द्वार वाहन के लिए और दूसरा लोगों के आने-जाने के लिए. इस द्वार के सामने कोई गड्ढा या सीधा रास्ता नहीं होना चाहिए. घर के सामने कचरा घर और टूटी फूटी इमारतें भी नहीं होनी चाहिए.

वास्तु के खास टिप्स
1. प्रवेश द्वार साफ-सुथरा और आकर्षक होना चाहिए.
2. घर के ठीक सामने कोई पेड़, लता, दरख्त आदि न हो. इनसे पड़ने वाली छाया निराशा उत्पन्न करती है.
3. मुख्य द्वार पर अंधेरा नहीं होना चाहिए. अंधेरा दूर करने के लिए फेंगशुई लैंप (Fengshui Lamp) या क्रिस्टल बॉल (Crystal Ball) का इस्तेमाल करना चाहिए. फेंगशुई के ये गैजेट (Gadget) घर से नकारात्मक शक्ति को बाहर करके घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करते हैं.
4. स्वास्तिक बनाना- लाल और नीले रंग का स्वास्तिक मुख्य द्वार पर काफी फायदेमंद होता है. घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर लाल स्वास्तिक व बीच में नीला स्वास्तिक शुभकारी माना गया है.
5. गणपति का मुख – गणपति जी का मुख प्रवेश द्वार पर अंदर की ओर लगाना बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि गणेश जी की पीठ की ओर दरिद्रता और पेट की ओर संपन्नता होती है. इसीलिए अंदर की तरफ गजानन का मुख लगाएं.
6. कलश की स्थापना – मुख्य द्वार पर कलश रखना बहुत शुभ होता है. ध्यान रखें कि कलश का मुंह खुला यानी संकरा न हो. इसमें शुद्ध जल भरकर द्वार के पास रखें. इसे पूजा स्थल पर भी स्थापित करें, यह बहुत सुखकारी होता है. यह घर की शांति और संपन्नता का प्रतीक होता है.


7. अशोक, आम या नीम के पत्तों की माला या वंदनवार लगाना – घर के मुख्य द्वार पर अशोक, आम या नीम के पत्तों की वंदनवार अंदर की ओर लगाना शुभ फल देने वाला माना जाता है. आम के पत्तों का वंदनवार सबसे बेहतर माना जाता है.
8. घोड़े की नाल – इसका संबंध शनि से है. घोड़े की नाल को मुख्य द्वार पर गाड़ने से नकारात्मक शक्ति बेअसर हो जाती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है. इसके लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें.
9. तुलसी का पौधा – तुलसी का पौधा घर के मुख्य द्वार के सामने या घर के आंगन में लगाकर पूजा करके दीया जलाने से घर के वास्तुदोष दूर हो जाते हैं.