क्विंटल के बजाए किलो में हो रहा सोयाबीन का उत्पादन, कटाई की लागत भी नहीं निकल रही

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जिले में पहले कम बारिश और बाद में अतिवृष्टि से सोयाबीन का उत्पादन प्रभावित
पीला मोजक और कीट व्याधि ने फसल को खासा नुकसान पहुंचाया

क्विंटल के बजाए किलो में हो रहा सोयाबीन का उत्पादन, कटाई की लागत भी नहीं निकल रही

हरदा। जिले में खरीफ सीजन की मुख्य फसल सोयाबीन की कटाई शुरू हो गई है। इसका उत्पादन किसानों को निराश कर रहा है। हालत यह है कि फसल की पूर्ण लागत तो दूर की बात, हार्वेस्टर से कटाई में खर्च हो रही राशि के बराबर भी उत्पादन नहीं हो रहा। कई किसान तो पहले ही अपने खेतों में मवेशी छोड़ चुके हैं। वहीं फसल पर कल्टीवेटर चलाकर खेत बनाने का काम भी किया जा चुका है। शुरुआत में भुवनखेड़ी और हरदा में ऐसे मामले सामने आए थे। कुकरावद गांव के किसानों ने इसे उखाडऩा शुरू कर दिया था, ताकि अगली फसल के लिए खेत समय पर तैयार किया जा सके।
आपदा प्रभावित घोषित हो चुका है जिला
ज्ञात हो कि कलेक्टर संजय गुप्ता द्वारा अधिसूचना जारी कर पटवारी हल्का स्तर पर अधिसूचित फसल सोयाबीन व मक्का तथा जिला स्तर पर अधिसूचित उड़द फसल में अतिवृष्टि, बाढ़ और कीट व्याधि के कारण 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान होने की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए जिले को (छहों तहसीलों को) आपदा प्रभावित घोषित किया गया है। जिले में 1 लाख 91 हजार हेक्टेयर रकबे में खरीफ की बोवनी हुई है। सबसे ज्यादा रकबे में सोयाबीन की बुवाई हुई है। बोवनी के बाद बारिश नहीं होने से फसलों पर संकट के बादल मंडराए थे। बारिश हुई तो फसलें पीला मोजेक की चपेट में आ गई थी। इसके बाद अन्य कीट व्याधि लगी। हाल ही में अतिवृष्टि से आई बाढ़ के कारण फसल का दम ही निकल गया।
फसल खराबी का रकबा रोज बढ़ा
किसानों के अनुसार सोयाबीन, मक्का और उड़द की फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है। जिन किसानों ने शुरुआती दौर में वैज्ञानिक सलाह के आधार पर इसे बचाने का प्रयास शुरू भी किया, लेकिन उनके हाथ कुछ नहीं आया। फसल पूरी तरह खराब हो चुकी थी। कृषि विभाग के अधिकारी और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने लगातार खेतों का भ्रमण भी किया था। उनके मुताबिक फसलों में राजयोटोनिया ब्लाइट, एरियल ब्लाइट एवं उड़द की टी-9 प्रजाति में तना मक्खी एवं रायजोटोनिया ब्लाइट का प्रकोप देखने में आया था।
14 एकड़ रकबे में साढ़े 6 क्विंटल उत्पादन हुआ
ऐड़ाबेड़ा के किसान परमानंद विश्नोई ने बताया कि उनके 14 एकड़ में साढ़े 6 क्विंटल सोयाबीन निकली है। किसान जगदीश विश्नोई ने बताया कि उनके 12 एकड़ रकबे में 4 बोरा सोयाबीन उत्पादन हुआ। किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव मोहन विश्नोई ने बताया कि खिरकिया क्षेत्र में कुछ किसानों के खेतों में 1 से 4 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन हो रहा है। अन्य क्षेत्रों में बुरे हाल हैं। किसानों को कटाई की लागत तक निकालना मुश्किल है। आम किसान यूनियन के राम इनानिया ने बताया कि बीते दिनों भैरोपुर गांव में 10 एकड़ कटाई के दौरान 10 क्विंटल उत्पादन भी नहीं निकला। जबकि यह फसल शुरुआती बोवनी की थी। बाद में की गई बोवनी की फसल में तो इतना उत्पादन भी नहीं होगा। इनानिया ने बताया कि 20 से 30 प्रतिशत रकबे में ही 70 किलो से 1 क्विंटल उत्पादन होने की उम्मीद है। बाकी में बुरी स्थिति है। कई खेतों में मवेशी छोड़े जा चुके हैं। मूंग और उड़द फसल भी पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री भगवानदास गौर ने बताया कि हार्वेस्टर से कटाई कराने पर 1500 रुपए प्रति एकड़ खर्च हो रहे हैं। वहीं उत्पादन 50 से 80 किलो प्रति एकड़ मिल रहा है। किसानों को कटाई की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है, अन्य खर्च तो दूर की बात है।

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