लालू की तरह कार्यकर्ताओं को सम्मान और भरोसा नहीं दे पाते तेजस्वी? इसलिए RJD में मचा है घमासान

पटना
बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की ऐलान भले ही अभी नहीं हुआ हो, लेकिन ये तय है कि अक्टूबर-नवंबर में इसे संपन्न करा लिया जाएगा। ऐसे में सभी सियासी दल अपनी रणनीतिक तैयारी में जुटे हुए हैं। खास तौर से मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी की कोशिश इस चुनाव में वापसी की है। हालांकि, पार्टी का एक तबका ऐसा भी जो काफी परेशान है। उनकी परेशानी की वजह है आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का जेल में होना। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक वर्ग मानता है कि विधानसभा चुनाव में लालू यादव के एक्टिव तौर से साथ में नहीं होने से पार्टी को नुकसान हो सकता है। इसकी कई अहम वजहें भी बताई जा रही हैं।

रघुवंश प्रसाद सिंह के इस्तीफे से उठे सवाल

जिस तरह से आरजेडी के दिग्गज नेता और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से रहे रघुवंश प्रसाद सिंह ने अपना इस्तीफा लालू यादव को भेजा, ये पार्टी में चल रहे घमासान को दर्शाता है। पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेताओं को लगता है कि लालू यादव के जेल में होने से उनकी राय को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। लालू यादव, चारा घोटाला मामले में दिसंबर 2017 से ही रांची जेल में हैं। उनकी अनुपस्थिति में लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव पार्टी से जुड़े अहम फैसले ले रहे हैं।

जेनरेशन शिफ्ट’ से खुश नहीं कई दिग्गज पार्टी नेता

हमारे सहयोगी अखबार ईटी को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आरजेडी के पुराने और दिग्गज नेता पार्टी के जेनरेशन शिफ्ट से पूरी तरह खुश नहीं है। यही वजह है कि कई ऐसे मौके आए जब ये नेता रांची में लालू प्रसाद यादव से मिलने भी पहुंचे। हालांकि, जल्दी-जल्दी और लगातार मुलाकात हमेशा संभव नहीं है। आरजेडी के वरिष्ठ नेता ईटी से बात करते हुए बताया कि जब लालू यादव यहां थे तो वो सभी बातों को सुनते थे। वो हमारी समस्याओं को दूर करने की कोशिश करते थे। हम कई बार उनसे वाद-विवाद भी करते थे लेकिन बाद में सभी संतुष्ट और खुश होकर वापस आते थे। तेजस्वी यादव के साथ ऐसा नहीं कर सकते, ऐसा इसलिए क्योंकि वो युवा हैं।

तेजस्वी पर वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी के लग रहे आरोप

आरजेडी के दिग्गज नेताओं की बात करें तो जय प्रकाश नारायण, शिवानंद तिवारी, अब्दुल बारी सिद्दीकी, रामचंद्र पूर्वे समेत कई नेता हैं जिन्हें लगता है कि पार्टी में उनकी अनदेखी की जा रही है। उनकी शिकायत है कि युवा नेतृत्व कभी उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहा, ना ही कभी हमसे संपर्क करने की कोशिश की गई। इन नेताओं ने कहा कि शायद यही वजह है कि पार्टी के कई विधायक इन्ही वजहों के चलते पार्टी से अलग हो रहे हैं।

तेजस्वी ने मुझे मिलने का कभी समय नहीं दिया’

बुधवार को आरजेडी से इस्तीफा देने वाले पार्टी के बड़े नेता और पूर्व मंत्री रहे भोला राय ने कहा कि राघोपुर की स्थिति को बताने के लिए तेजस्वी ने मुझे मिलने का कभी समय नहीं दिया। 2010 के चुनाव में भोला राय ने राबड़ी देवी के लिए राघोपुर सीट छोड़ दी थी। आरजेडी छोड़ने वाले नेताओं की फेहरिस्त काफी लंबी है। पिछले साल वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी ने भी आरजेडी नेतृत्व पर इसी तरह के आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था।

इन नेताओं की नाराजगी क्या पार्टी को पड़ेगी भारी?

कुछ नेताओं को लालू यादव के बेटे तेजप्रताप यादव के रवैये से नाराजगी है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो खुले तौर पर उनके ऊपर निशाना साधते हैं। ऐसा ही मामला उस समय सामने आया था जब तेज प्रताप ने आरजेडी के पूर्व प्रदेश रामचंद्र पूर्वे पर निशाना साधा था। इसके अलावा आरजेडी के मौजूदा अध्यक्ष जगदानंद सिंह के व्यवहार को लेकर भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी है। फिलहाल पार्टी को आगामी चुनाव में अगर पूरी तैयारी से उतरना है तो पहले आपसी अंतर्कलह को दूर करना जरूरी होगा।

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