LAC से बीजिंग` तक डोवाल की नजर, आज कर सकते हैं CSG की अहम बैठक

नई दिल्ली: LAC पर तनाव बरकरार है और भारत- चीन की सेना आमने-सामने है. ताजा हालात को लेकर भारत अब नई नीति के तहत काम कर रहा है.चीन की नई चाल पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) नजर बनाए हुए हैं. शुक्रवार को NSA अजित डोवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर उन्हें चीन की सैन्य और कूटनीतिक साजिश के बारे में पूरी तरह अवगत कराया. 

इस बीच सूत्रों से खबर आ रही है कि NSA अजित डोवाल चीन से तनाव पर आज चाइना स्टडी ग्रुप (CSG) की बैठक कर सकते हैं. इस बैठक में भारत-चीन के बीच कमांडर स्तर की बातचीत के लिए भारत का एजेंडा तय किया जाएगा. कोर कमांडर स्तर की यह बैठक अगले हफ्ते हो सकती है. इस बैठक के लिए विदेश मंत्री डॉ जयशंकर के मॉस्को यात्रा से वापस लौटने का इंतजार किया जा रहा है. उनके आते ही CSG की अहम बैठक हो सकती है. 

चीन के मसले पर भारत का इरादा साफ है. न तो वह चीन के झांसे में आएगा और न ही धौंस बर्दाश्त करेगा. भारत की मजबूत इच्छाशक्ति और सही रणनीति का कमाल है कि चीन आज बैकफुट पर है. बता दें कि NSA अजित डोवाल ने कुछ दिनों पहले चीन के विदेश मंत्री से बातचीत की थी. तब चीन ने तनाव कम करने का वादा किया था लेकिन अब पीछे हटने की बजाए चीन घुसपैठ लगातार घुसबैठ की नई-नई साजिशें रचता है. इसके बाद से भारत भी चीन को उसी के अंदाज में जवाब देने में लग गया है.

लालू की तरह कार्यकर्ताओं को सम्मान और भरोसा नहीं दे पाते तेजस्वी? इसलिए RJD में मचा है घमासान

पटना
बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की ऐलान भले ही अभी नहीं हुआ हो, लेकिन ये तय है कि अक्टूबर-नवंबर में इसे संपन्न करा लिया जाएगा। ऐसे में सभी सियासी दल अपनी रणनीतिक तैयारी में जुटे हुए हैं। खास तौर से मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी की कोशिश इस चुनाव में वापसी की है। हालांकि, पार्टी का एक तबका ऐसा भी जो काफी परेशान है। उनकी परेशानी की वजह है आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का जेल में होना। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक वर्ग मानता है कि विधानसभा चुनाव में लालू यादव के एक्टिव तौर से साथ में नहीं होने से पार्टी को नुकसान हो सकता है। इसकी कई अहम वजहें भी बताई जा रही हैं।

रघुवंश प्रसाद सिंह के इस्तीफे से उठे सवाल

जिस तरह से आरजेडी के दिग्गज नेता और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से रहे रघुवंश प्रसाद सिंह ने अपना इस्तीफा लालू यादव को भेजा, ये पार्टी में चल रहे घमासान को दर्शाता है। पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेताओं को लगता है कि लालू यादव के जेल में होने से उनकी राय को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। लालू यादव, चारा घोटाला मामले में दिसंबर 2017 से ही रांची जेल में हैं। उनकी अनुपस्थिति में लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव पार्टी से जुड़े अहम फैसले ले रहे हैं।

जेनरेशन शिफ्ट’ से खुश नहीं कई दिग्गज पार्टी नेता

हमारे सहयोगी अखबार ईटी को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आरजेडी के पुराने और दिग्गज नेता पार्टी के जेनरेशन शिफ्ट से पूरी तरह खुश नहीं है। यही वजह है कि कई ऐसे मौके आए जब ये नेता रांची में लालू प्रसाद यादव से मिलने भी पहुंचे। हालांकि, जल्दी-जल्दी और लगातार मुलाकात हमेशा संभव नहीं है। आरजेडी के वरिष्ठ नेता ईटी से बात करते हुए बताया कि जब लालू यादव यहां थे तो वो सभी बातों को सुनते थे। वो हमारी समस्याओं को दूर करने की कोशिश करते थे। हम कई बार उनसे वाद-विवाद भी करते थे लेकिन बाद में सभी संतुष्ट और खुश होकर वापस आते थे। तेजस्वी यादव के साथ ऐसा नहीं कर सकते, ऐसा इसलिए क्योंकि वो युवा हैं।

तेजस्वी पर वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी के लग रहे आरोप

आरजेडी के दिग्गज नेताओं की बात करें तो जय प्रकाश नारायण, शिवानंद तिवारी, अब्दुल बारी सिद्दीकी, रामचंद्र पूर्वे समेत कई नेता हैं जिन्हें लगता है कि पार्टी में उनकी अनदेखी की जा रही है। उनकी शिकायत है कि युवा नेतृत्व कभी उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहा, ना ही कभी हमसे संपर्क करने की कोशिश की गई। इन नेताओं ने कहा कि शायद यही वजह है कि पार्टी के कई विधायक इन्ही वजहों के चलते पार्टी से अलग हो रहे हैं।

तेजस्वी ने मुझे मिलने का कभी समय नहीं दिया’

बुधवार को आरजेडी से इस्तीफा देने वाले पार्टी के बड़े नेता और पूर्व मंत्री रहे भोला राय ने कहा कि राघोपुर की स्थिति को बताने के लिए तेजस्वी ने मुझे मिलने का कभी समय नहीं दिया। 2010 के चुनाव में भोला राय ने राबड़ी देवी के लिए राघोपुर सीट छोड़ दी थी। आरजेडी छोड़ने वाले नेताओं की फेहरिस्त काफी लंबी है। पिछले साल वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी ने भी आरजेडी नेतृत्व पर इसी तरह के आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था।

इन नेताओं की नाराजगी क्या पार्टी को पड़ेगी भारी?

कुछ नेताओं को लालू यादव के बेटे तेजप्रताप यादव के रवैये से नाराजगी है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो खुले तौर पर उनके ऊपर निशाना साधते हैं। ऐसा ही मामला उस समय सामने आया था जब तेज प्रताप ने आरजेडी के पूर्व प्रदेश रामचंद्र पूर्वे पर निशाना साधा था। इसके अलावा आरजेडी के मौजूदा अध्यक्ष जगदानंद सिंह के व्यवहार को लेकर भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी है। फिलहाल पार्टी को आगामी चुनाव में अगर पूरी तैयारी से उतरना है तो पहले आपसी अंतर्कलह को दूर करना जरूरी होगा।

Bihar Elections 2020: तो क्या लालू की तरह कार्यकर्ताओं को सम्मान और भरोसा नहीं दे पाते तेजस्वी? इसलिए RJD में मचा है घमासान

पटना
बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की ऐलान भले ही अभी नहीं हुआ हो, लेकिन ये तय है कि अक्टूबर-नवंबर में इसे संपन्न करा लिया जाएगा। ऐसे में सभी सियासी दल अपनी रणनीतिक तैयारी में जुटे हुए हैं। खास तौर से मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी की कोशिश इस चुनाव में वापसी की है। हालांकि, पार्टी का एक तबका ऐसा भी जो काफी परेशान है। उनकी परेशानी की वजह है आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का जेल में होना। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक वर्ग मानता है कि विधानसभा चुनाव में लालू यादव के एक्टिव तौर से साथ में नहीं होने से पार्टी को नुकसान हो सकता है। इसकी कई अहम वजहें भी बताई जा रही हैं।

रघुवंश प्रसाद सिंह के इस्तीफे से उठे सवाल

जिस तरह से आरजेडी के दिग्गज नेता और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से रहे रघुवंश प्रसाद सिंह ने अपना इस्तीफा लालू यादव को भेजा, ये पार्टी में चल रहे घमासान को दर्शाता है। पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेताओं को लगता है कि लालू यादव के जेल में होने से उनकी राय को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। लालू यादव, चारा घोटाला मामले में दिसंबर 2017 से ही रांची जेल में हैं। उनकी अनुपस्थिति में लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव पार्टी से जुड़े अहम फैसले ले रहे हैं।

जेनरेशन शिफ्ट’ से खुश नहीं कई दिग्गज पार्टी नेता

हमारे सहयोगी अखबार ईटी को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आरजेडी के पुराने और दिग्गज नेता पार्टी के जेनरेशन शिफ्ट से पूरी तरह खुश नहीं है। यही वजह है कि कई ऐसे मौके आए जब ये नेता रांची में लालू प्रसाद यादव से मिलने भी पहुंचे। हालांकि, जल्दी-जल्दी और लगातार मुलाकात हमेशा संभव नहीं है। आरजेडी के वरिष्ठ नेता ईटी से बात करते हुए बताया कि जब लालू यादव यहां थे तो वो सभी बातों को सुनते थे। वो हमारी समस्याओं को दूर करने की कोशिश करते थे। हम कई बार उनसे वाद-विवाद भी करते थे लेकिन बाद में सभी संतुष्ट और खुश होकर वापस आते थे। तेजस्वी यादव के साथ ऐसा नहीं कर सकते, ऐसा इसलिए क्योंकि वो युवा हैं।

तेजस्वी पर वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी के लग रहे आरोप

आरजेडी के दिग्गज नेताओं की बात करें तो जय प्रकाश नारायण, शिवानंद तिवारी, अब्दुल बारी सिद्दीकी, रामचंद्र पूर्वे समेत कई नेता हैं जिन्हें लगता है कि पार्टी में उनकी अनदेखी की जा रही है। उनकी शिकायत है कि युवा नेतृत्व कभी उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहा, ना ही कभी हमसे संपर्क करने की कोशिश की गई। इन नेताओं ने कहा कि शायद यही वजह है कि पार्टी के कई विधायक इन्ही वजहों के चलते पार्टी से अलग हो रहे हैं।

तेजस्वी ने मुझे मिलने का कभी समय नहीं दिया’

बुधवार को आरजेडी से इस्तीफा देने वाले पार्टी के बड़े नेता और पूर्व मंत्री रहे भोला राय ने कहा कि राघोपुर की स्थिति को बताने के लिए तेजस्वी ने मुझे मिलने का कभी समय नहीं दिया। 2010 के चुनाव में भोला राय ने राबड़ी देवी के लिए राघोपुर सीट छोड़ दी थी। आरजेडी छोड़ने वाले नेताओं की फेहरिस्त काफी लंबी है। पिछले साल वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी ने भी आरजेडी नेतृत्व पर इसी तरह के आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था।

इन नेताओं की नाराजगी क्या पार्टी को पड़ेगी भारी?

कुछ नेताओं को लालू यादव के बेटे तेजप्रताप यादव के रवैये से नाराजगी है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो खुले तौर पर उनके ऊपर निशाना साधते हैं। ऐसा ही मामला उस समय सामने आया था जब तेज प्रताप ने आरजेडी के पूर्व प्रदेश रामचंद्र पूर्वे पर निशाना साधा था। इसके अलावा आरजेडी के मौजूदा अध्यक्ष जगदानंद सिंह के व्यवहार को लेकर भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी है। फिलहाल पार्टी को आगामी चुनाव में अगर पूरी तैयारी से उतरना है तो पहले आपसी अंतर्कलह को दूर करना जरूरी होगा।

नेपाल में राजनीतिक गतिरोध का अंत, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और प्रचंड में हुआ समझौता

काठमांडू
नेपाल में पिछले दो महीने से चले आ रहे राजनीतिक गतिरोध का शनिवार को अंत हो गया। नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और उनके विरोधी पुष्प कमल दहल प्रचंड के बीच मतभेदों को सुलझा लिया। पार्टी ने दोनों के बीच अधिकारों के बंटवारे का समझौता कराके इस विवाद को समाप्त कराया। हालांकि दोनों नेताओं के बीच यह दोस्‍ती कब तक रहेगी, इसको लेकर पार्टी नेताओं के मन में अभी से संदेह के बादल उमड़ रहे हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (सीपीएन) के प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ ने कहा कि पार्टी की 13 सदस्यीय शक्तिशाली स्थायी समिति की बैठक बालूवतार में प्रधानमंत्री के सरकारी आवास पर हुई जिसमें राजनीतिक और कूटनीतिक तरीकों से नेपाल तथा भारत के बीच सीमा विवाद के समाधान का भी फैसला किया गया। अधिकारी ने कहा कि बैठक में ओली और प्रचंड के बीच कार्य विभाजन तय किया गया।

पुष्प कमल दहल पूरे अधिकारों के साथ पार्टी के अध्यक्ष
प्रचंड पूरे अधिकारों के साथ पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष रहेंगे तथा पार्टी मामलों को देखेंगे, वहीं ओली सरकार के मामलों पर ध्यान देंगे। श्रेष्ठ ने कहा, ‘पार्टी स्थापित दिशानिर्देशों के आधार पर चलेगी। हालांकि सरकार को राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर फैसला लेते समय पार्टी के भीतर परामर्श करने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व सरकार के रोजाना के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के यूनिटी जनरल कन्वेंशन को अगले साल सात अप्रैल से 12 अप्रैल के बीच काठमांडू में आयोजित करने का फैसला किया गया। पार्टी की केंद्रीय कार्य समिति की बैठक 31 अक्टूबर को बुलाई जाएगी। बैठक में ओली तथा प्रचंड द्वारा सीपीएन में आंतरिक कलह को दूर करने के उद्देश्य से तैयार किये गये 15 पन्नों के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।

यूपी के इस बाहुबली माफिया की योगी सरकार में हालत पस्त, अब तक 10 संपत्तियां कुर्क

प्रयागराज: यूपी के माफिया सरगना अतीक अहमद के काले कारोबार पर योगी सरकार की कार्रवाईयों का सिलसिला लगातार जारी है. शुक्रवार को भी प्रयागराज के मेहदौरी इलाके में अतीक के चचेरे भाई हमज़ा उस्मान की करोड़ो की प्रॉपर्टी पर सरकार ने बुलडोजर चला कर जमींदोज कर दिया. 

बताया जाता है कि यह अतीक अहमद की बेनामी संपत्ति थी, जिसे उसने अपने चचेरे भाई हमजा उस्मान के नाम करा रखा था. आरोप है कि यह प्रॉपर्टी सरकारी नजूल की थी, जिसे हमज़ा उस्मान ने सरकारी संपत्ति होते हुए भी कब्ज़ा कर कई निर्माण करा लिए थे. शुक्रवार को भारी पुलिस फोर्स के साथ पहुंची प्रशासन की टीम ने अवैध निर्माण को ध्वस्त करते हुए जमीन को सील कर दिया. 

बता दें कि जिला प्रशासन ने अतीक अहमद की 20 अवैध संपत्तियों को चिन्हित किया था. जिसमें पहले चरण में सात संपत्तियों को कुर्क किया गया. इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत 60 करोड़ रुपये है. दूसरे चरण की कार्रवाई में तीन प्रॉपर्टी को कुर्क किया गया है. कुल मिलाकर अब तक 10 संपत्तियों पर कुर्की की कार्रवाई की जा चुकी है. साथ ही 5 अवैध निर्माण पर प्रशासन बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर चुका है. 

जिस तरह से प्रशासन अतीक और उसके करीबियों पर सख्ती बरतते हुए लगातार कार्रवाई कर रहा है. उससे माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भी अतीक अहमद और उसके करीबियों की मुश्किलें कम नहीं होने वाली. प्रशासन के सख्त रूख से तय माना जा रहा है कि जल्द ही अतीक अहमद की बाकी अवैध संपत्तियों पर भी प्रशासन का बुलडोजर चलने वाला है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया को ललकारने वाले नेता को कांग्रेस में इनाम, हॉट सीट से बनाया उम्मीदवार, जानें कौन हैं ये

भोपाल
बीएसपी के बाद कांग्रेस ने भी उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। 27 में से 15 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान हो गया है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम चर्चा के लिए कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद आज आधिकारिक रूप से उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया गया है। 15 में से 2 ऐसे उम्मीदवार हैं, जो बीजेपी से आए हैं। दोनों बीजेपी में रह कर ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ आवाज उठाई थी। कांग्रेस ने इस बार दोनों को सबसे हॉट सीट से उम्मीदवार बनाया है।

कांग्रेस ने इंदौर के सांवेर सीट से प्रेमचंद गुड्डू को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, गुना के बमोरी से कन्हैयालाल अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। कन्हैयाललाल अग्रवाल शिवराज सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। दोनों नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में आने के बाद कांग्रेस में शामिल हुए हैं। सांवेर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार प्रेमचंद गुड्डू, ज्योतिरादित्य सिंधिया को हमेशा से ही ललकारते रहे हैं। बीजेपी में आने के बाद गुड्डू उन्हें खुलेआम चुनौती दे रहे थे।

सांवेर और बमोरी है हॉट सीट
ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए सांवेर और बमोरी सबसे अहम सीट हैं। इन दोनों सीटों से उनके खास लोग चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। सांवेर से शिवराज सरकार में जल संसधान मंत्री तुलसी सिलावट चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। तुलसी सिलावट की गिनती ज्योतिरादित्य सिंधिया के सबसे करीबी लोगों में होती है। प्रदेश में सिंधिया जब होते हैं, तो वह उनके साथ साए की तरह रहते हैं। बमोरी सीट से मंत्री महेंद्र सिसोदिया बीजेपी के उम्मीदवार हो सकते हैं। क्योंकि उनकी पुरानी सीट यही है। सिसोदिया भी ज्योतिरादित्य के पक्के वाले समर्थक में हैं। कांग्रेस की सरकार में मंत्री रहते हुए, सिसोदिया ने कहा था कि महाराज का अपमान हुआ, तो सरकार पर काले बादल मंडराने लगेंगे।

गुड्डू देंगे तुलसी को टक्कर
उपचुनाव में सांवेर सीट सबसे अहम है। तुलसी सिलावट को चुनाव जीताने के लिए सीएम शिवराज और ज्योतिरादित्य सिंधिया लगातार दौरे कर रहे हैं। इस सीट की महता इतनी है कि पीएम ने भी यहां के स्वनिधि योजना के एक लाभुक से बात की है। तुलसी सिलावट का इस सीट पर सीधे प्रेमचंद गुड्डू से मुकाबला होगा। प्रेमचंद गुड्डू कांग्रेस ही राजनीति करते थे। वह सांसद और विधायक रह चुके हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया से नाराजगी की वजह से वह कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए थे। सिंधिया जब बीजेपी में आए, तो गुड्डू ने फिर से वहीं रूख अख्तियार किया। पार्टी ने उन्हें नोटिस थमाया तो वह इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए। अब कांग्रेस ने गुड्डू को सांवेर से टिकट दे दिया है। ऐसे में तुलसी सिलावट की राह अब आसान नहीं है।

बमोरी से कन्हैया लाल अग्रवाल देंगे टक्कर
बमोरी सीट ज्योतिरादित्य सिंधिया के पूर्व संसदीय क्षेत्र में आता है। यहां से उपचुनाव में मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया उम्मीदवार होंगे। सिसोदिया की गिनती महाराज के करीबी लोगों में होती है। कांग्रेस ने यहां से कन्हैयालाल अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। कन्हैयालाल अग्रवाल भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के आने के बाद ही कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है। उनकी गिनती कभी बीजेपी के बड़े नेताओं में होती थी। वह 2008 में शिवराज सरकार में राज्य मंत्री भी थे। 2 बार वह विधायक भी रह चुके हैं।

गौरतलब है कि उम्मीदवारों की घोषणा के बाद 12-13 सितंबर को पूर्व सीएम कमलनाथ ग्वालियर-चंबल के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वहां वह भव्य रोड शो भी करेंगे। कमलनाथ के कार्यक्रम के लिए ग्वालियर में तैयारी तेज है। वहीं, अब सबकी निगाहें बीजेपी के उम्मीदवारों की सूची पर टिकी है।हालांकि कयास लगाए जा रहे हैं कि 27 में 25 सीटों पर कांग्रेस छोड़ कर आए लोग ही उम्मीदवार होंगे।

जीतू पटवारी की उर्जा का  कांग्रेस को स्तेमाल करना चाहिये.


अखिल भारतीय कांग्रेस में यकायक बड़ा फेरबदल कर ढ़लती उम्र के बुजुर्ग नेताओं की जगह युवा पीढ़ी को अहमियत देना कांग्रेस का स्वागत योग्य कदम है.

सारे उम्र दराज नेता सत्ता का सुख भोग भोग कर निष्क्रिय अवस्था में आ चुके हैं, जबकि कांग्रेस को उन युवा नेताओं की दरकार है जो जमीन पर उतरकर विपक्ष की लड़ाई लड़ सकें.
जितनी भी उमरदराज पीढ़ी कांग्रेस में है अधिकतर संजय गांधी की युवा टीम से है. उस समय भी कांग्रेस की यही स्थिति थी जो आज है लग रहा था कांग्रेस एक डूबता जहाज है. पुराने खलीफे सब साथ छोड़ चुके थे. तब संजयगांधी ने युवाओं को आगे कर एक प्रयोग किया था जो सफल रहा था.
आज कांग्रेस को फिर वही कदम उठाने की दरकार है पुराने नेताओं को  दरकिनार कर जमीनी युवा पीढ़ी को मौका देना चाहिये. जमीनी से यहां अर्थ उन नौजवानों से है जो सर्वहार वर्ग से या मध्यम वर्ग से हैं.
राजा महाराजा,  रईस, उद्योगपति कहने का मतलब यही है वातानुकूलित पीढी संघर्ष नहीं कर सकती है और जरुरत इस समय सड़क पर संघर्ष करने वाली पीढ़ी की है. जो डंडे खा सके, जेल जा सके. प्रशासन, पुलिस और सरकार के आगे जनता की आवाज बुलंद कर सके.
गुजरात में हार्दिक पटेल, यूपी में लल्लु  जैसे नवयुवक नेता वर्तमान समय में विपक्ष की राजनीति के सांचे में फिट बैठ रहे हैं.
इसी कड़ी में मध्यप्रदेश में जीतू पटवारी को भी लिया जा सकता है विपक्ष में खड़े होकर जनता की आवाज को बेहतर तरीक से उठाना कोई इनसे सीखे. मंदसौर के किसानों पर हुये गोली कांड के खिलाफ जीतू पटवारी की उर्जा को लोग आज भी याद करते हैं. जीतू पटवारी ने मंत्री के रुप में भी जनता की सेवा कर मन जीता.  किसी भी हालात में इस युवा नेता का मनोबल टूटते नहीं देखा है .आज भी जीतू पटवारी को विपक्ष के मोर्चे पर सजगता से लड़ते देखा जा सकता है.
आज मधयप्रदेश कांग्रेस अगर जीतू पटवारी जैसे युवा नेता के हाथ में प्रदेश की कमान सौंपती है तो बहुत जल्द कांग्रेस  सत्ता में अपनी वापिसी कर आने वाले लोकसभा चुनाव में बेहतर परिणाम देने की स्थिति में होगी.

गिलोय का औषधि के रुप में प्रतिबंधात्मक उपयोग करने पर हर तरह का वॉयरस होगा बेअसर.

आयुर्वेद में गिलोय को अमृता के नाम से जाना जाता है. सबको पता है गिलोय एक आयुर्वेदिक टॉनिक है . जिसका उपयोग यदी आप सर्दी जुकाम से पी डित हैं. आपको निमोनिया की शिकायत है.

अस्थमा केे मरीज हैं. इन बीमारियों के लिये गिलोय का उपयोग रामबाण औषधि के रुप में साबित होगा. कोरोना वायरस भी पहले बुखार फिर सर्दी फिर खांसी और अंत में गले से होता हुआ आदमी के फैंफड़ों को खत्म कर देता है.

गिलोय बुखार को जड़ से खत्म करने वाली औषधि है. अगर आप गिलोय का सेवन बीमार होने से पहले ही करते हैं तो यह आपके शरीर की बीमारी से लड़ने वाली प्रतिरोधात्मक क्षमता को बढ़ाती है.

वर्तमान समय में दुनिया में कोरोना वॉयरस ने कहर मचा रखा है. जब अभी तक इसके लिये कोई औषधि नहीं खोजी जा सकी है, तब क्यों न हमको हमारी आयुर्वेदिक औषधियों को आजमाना चाहिये.

हम सब जानते हैं बरसात के बाद भारत में तमाम तरह के बैक्टीरिया और वॉयरस लोगों को अपना शिकार बनाते हैं. और जनता डेंगु, चिकनगुनिया एवं अनेक तरह के बुखार से पीड़ित होने लगती है. वर्तमान में कोरोना वॉयरस भी जनता को बुखार, जुकाम, खांसी से पीड़ित कर अपना शिकार बना रहा है. बेहतर यह होगा आप इस इंतजार में न रहें कि आपको वॉयरस संक्रमित करेगा. आप आयुर्वेदिक परामर्श के अनुसार गिलोय काड़ा और गिलोय बटी का उपयोग करेंगे तो निश्चित ही बीमार करने वाले बैक्टीरिया और वॉयरस से लड़ पायेंगे.

पोहरी विधानसभा में ओबीसी बनाम धाकड़ सिंधिया के प्रत्याशी को नुकसान पहुंचायेंगे..


पोहरी में शिवराज सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया की सभा में ओबीसी वर्ग के नौजवानों ने 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर अपना आक्रोश प्रकट किया था. इससे यह साफ जाहिर होता है कि पोहरी विधानसभा में अंदर ही अंदर भाजपा के उम्मीवार को लेकर चिंगारी भड़क रही है. भले ही शिवराज सिंह चौहान आश्वासन दे गये हों, न्याय करने का लेकिन पोहरी विधानसभा में भाजपा की जमीन हिलती नजर आ रही है.
बेरोजगार नवयुवक ही कोई भी चुनाव हो निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य की आम सभा में ओबीसी वर्ग के लोगों ने 27 फ़ीसदी आरक्षण की मांग को लेकर हंगामा किया .इसके दूरगामी नतीजे ठीक नहीं होंगे. यह अभी से लगने लगा है.

सिंधिया बोलते रहे यह लोग हंगामा करते ही रहे. कुल मिलाकर इस मामले में जिला प्रशासन असहाय खड़ा देखता रहा . प्रशासन कर भी क्या सकता है. आगे चुनाव जो है और वोट इन्हीं लोगों को डालना है.