कांग्रेस ने विधानसभा उपचुनाव के लिये 15 नामों की पहली सूची जारी की.

ग्वालियर मध्यप्रदेश विधानसभा के होने वाले उपचुनाव के लिये कांग्रेस ने पहली सूची जारी करते हुये, ग्वालियर से सुनील शर्मी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. वहीं सांवेर से प्रेमचंद गुड्डू उम्मीदवार होंगे.

मध्य प्रदेश में 27 सीटों पर उपचुनाव होने वाले है। उपचुनाव के पहले दोनों ही पार्टियों के नेताओं द्वारा प्रचार प्रसार शुरू कर दिया गया है। चुनाव प्रचार प्रसार के बीच आज कांग्रेस ने आज 15 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है।

ये है कांग्रेस की पहली सूची
रविंद्र सिंह तोमर – दिमनी
सत्यप्रकाश सखवार – अंबाह
मेवाराम जाटव – गोहद
सुनील शर्मा – ग्वालियर
सुरेश राजे – डबरा
फूल सिंह बरैया – भांडेर
प्रागीलाल जाटव – करैरा
कन्हैयालाल अग्रवाल – बमोरी
आशा दोहरे – अशोकनगर
विश्वनाथ सिंह कुंजाम – अनूपपुर
मदनलाल चौधरी अहिरवार – सांची
विपिन वानखेड़े – आगर मालवा
राजवीर सिंह बघेल – हाटपिपल्या
रामकिशन पटेल – नेपानगर
प्रेमचंद गुड्डू – सांवेर

भारत-चीन का संयुक्त बयान विपक्ष को नहीं आया रास, इन नेताओं ने उठाए सवाल

नई दिल्ली: लद्दाख में सीमा विवाद दूर करने के लिए भारत और चीन की ओर से मॉस्को में जारी किए गए संयुक्त बयान पर विपक्षी नेता सवाल खड़े कर रहे हैं. राहुल गांधी ने कहा कि चीन ने हमारी जमीन हड़प ली है. भारत सरकार उस जमीन को कब वापस लेने जा रही है. 

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राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि क्या वह लद्दाख में चीन द्वारा हड़पी गई जमीन को भी ‘Act of God’बताकर पीछा छुड़ा लेगी? राहुल गांधी ने यह बयान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर तंज कसते हुए दिया. निर्मला ने पिछले दिनों कहा था कि कोरोना महामारी एक दैवीय आपदा है. जिसने देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था को पीछे धकेल दिया है

वहीं नेता असददुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट करके कहा कि हमने दोनों देशों की ओर से जारी किया गया संयुक्त बयान देखा है. बैठक में विदेश मंत्री डॉ जयशंकर ने चीन से लद्दाख में अप्रैल से पहले वाली स्थिति बहाल करने के लिए क्यों नहीं कहा. क्या वह भी अपने बॉस (पीएम मोदी) के इस तर्क से सहमत हो गए हैं कि कोई भी चीनी सैनिक हमारी सीमा में नहीं घुसा है?

सूत्रों के मुताबिक ओवैसी ने इस बयान के जरिए सीधी पीएम मोदी पर निशाना साधने की कोशिश की है. चीनी अतिक्रमण के मुद्दे पर हुई पहली सर्वदलीय ऑनलाइन बैठक में पीएम मोदी ने कहा था कि हमारी सीमा में न कोई घुसा है और न ही कोई अतिक्रमण हुआ है. उनके इस बयान पर देश में नाराजगी देखी गई थी.

उपचुनाव : बीएल संतोष ने एमपी के भाजपा नेताओं को दी चेतावनी

भाजपा नेताओं की चेतावनी पार्टी के नेताओं द्वारा सक्रिय रूप से प्रचार नहीं करने की खबरों के बाद आयी है, क्योंकि वे पूर्व-कांग्रेसी ज्योतिरादित्य सिंधिया के वफादारों को तवज्जो देने से खुश नहीं थे.

नई दिल्ली मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगामी उप-चुनावों में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा नेताओं को एकजुट होने के लिए काम करने के चेतावनी के एक सप्ताह से भी कम समय के बाद भाजपा महासचिव बीएल संतोष ने विधानसभा प्रभारियों को चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि उनको
यह सुनिश्चित करना है कि पूर्व कांग्रेसी ज्योतिरादित्य सिंधिया के वफादारों सहित सभी भाजपा नेता अपनी-अपनी सीटों से जीत सुनिश्चित करें.

संतोष ने कहा कि अगर कोई उम्मीदवार जीतने में विफल रहता है, तो भाजपा नेताओं के अनुसार विधानसभा प्रभारियों को कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए.

उन्होंने बुधवार को विधानसभा प्रभारियों और पार्टी की उपचुनाव प्रबंधन समिति के सदस्यों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान चेतावनी जारी की.

सांसद केपी यादव का नाम शिलालेख में न होने पर महाप्रबंधक हेमंत शिवहरे पर गिरी गाज

ग्वालियर गुना में म.प्र. ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाली सड़क के भूमि पूजन शिलालेख से स्थानीय सांसद केपी यादव के नाम को अहमियत न देकर अपमानित करने की खबर सामने आ रही है, जबकि शिला पट्टिका में राज्यसभा सांसद और राज्य में केबीनेट मंत्री का नाम अंकित किया गया है.
गुना के गांव जमरा से गाजीपुर जाने वाली सड़क का भूमिपूजन कार्यक्रम का आयोजन कल 10 सितंबर को किया गया था.
गुना कलेक्टर ने इस संबंध में महाप्रबंधक सड़क ग्रामीण विकास प्राधिकरण को मौखिक आदेश भी दिये थे. लेकिन इसके बाबजूद महाप्रबंधक हेमंत शिवहरे ने नियमों की अवहेलना कर चुने हुये जनप्रतिनिधि एवं क्षेत्रीय सांसद केे नाम की अवहेलना की .
मुख्य कार्यपालन अधिकारी ,म.प्र. ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण एक आदेश जारी कर महाप्रबंधक हेमंत शिवहरे को निलंबित कर दिया गया है.
क्षेत्र में स्थानीय सांसद को अपमानित करने की ओछी राजनीति क्यों की जा रही, जनता में इस विषय में चर्चा है. जबकि क्षेत्र में विधानसभा उपचुनाव भी होने हैं इससे आने वाले चुनाव में भाजपा को नुकसान भी भुगतना पड़ सकता है.यह सभी जानते हैं सासंद केपी यादव भी जनता के बीच अपनी अच्छी पैठ बना चुके हैं.
ओछी राजनीति करने वालों ने शायद अभी जनता से सबक नहीं सीखा है.

पेंगोंग के फिंगर-4 पर बढ़ा तनाव, चीनी जमावड़े के बाद भारत ने सैनिक बढ़ाए-बोफोर्स तैनात

भारतीय सेना पेंगोंग इलाके में अपनी ताकत बढ़ा रही है. लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन की गुस्ताखियों को देखते हुए भारतीय सेना ने अब 155 मिमी की होवित्जर तोप तैनात करने शुरू कर दिए हैं.

नई दिल्ली

मॉस्को में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच बैठक हुई है. एक तरफ चीन भारत से बातचीत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसकी सेना पेंगोंग इलाके में अपनी ताकत बढ़ा रही है. लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन की गुस्ताखियों को देखते हुए भारतीय सेना ने अब 155 मिमी की होवित्जर तोप तैनात करने शुरू कर दिए हैं.

बोफोर्स तोप तैनात करना भारतीय सेना का बड़ा कदम है. ये फैसला ऐसे वक्त में लिया गया है, जब चीन घुसपैठ की अपनी कोशिशों से बाज नहीं आ रहा. एलएसी पर इन दिनों करीब 40 हजार भारतीय जवान तैनात हैं. वायुसेना भी मुस्तैद है और अब होवित्जर तोप भी सरहद पर भेजे जा रहे हैं. चीन ने छोटी से छोटी गलती भी की तो उसे बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

भारतीय जवानों की अब फिंगर 4 तक पहुंच हो गई है. सामरिक रूप से बेहद अहम ऊंचाई वाले इलाकों पर जवानों का दबदबा हो चुका है. तनाव के बीच LAC पर हालात बदल गए हैं. हिन्दुस्तान के जवानों ने पूर्वी लद्दाख के अलग-अलग इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है. माउंटेन वारफेयर के उस्ताद माने जाने वाले जवान चीन को सबक सीखाने के लिए तैयार हैं.

पेंगोंग लेक के उत्तरी और दक्षिणी इलाकों में चीन की बेचैनी बढ़ी है. चीन भले ही अपने जवान, गाड़ियां और हथियार तैनात कर चुका है, लेकिन इन इलाकों में ऊंचाइयों पर भारत की पकड़ मजबूत होने से उसके पसीने छूट रहे हैं. भारतीय जवान ऊंचाइयों पर मौजूद हैं और वो चीनी सेना की हरकत पर हर वक्त नजर रख रहे हैं.

इस बीच चीन को रास्ते पर लाने के लिए अब हिन्दुस्तान इंटीग्रेटेड रेस्पॉस की रणनीति अपना रहा है. मतलब चीन जिस भाषा में समझे, उसी भाषा में उसे समझाने की पहल होगी. इन्हीं कोशिशों के तहत विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार की रात चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की. मॉस्को में करीब 2 घंटे तक दोनों की बातचीत चली.

जयशंकर और वांग यी की मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब हाल के दिनों में चीन की हिमाकत कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है. 29-30 अगस्त के बाद से वो लगातार घुसपैठ की कोशिशें करता रहा है और हर बार हिन्दुस्तान ने उसे आगाह किया है. 

Helth tips:चेहरे पर है सफेद दानों की भरमार तो अपनाएं ये घरेलू नुस्खे, कुछ ही दिनों में अपने आप हो जाएंगे गायब

सफेद दाने किसी भी उम्र में हो सकते हैं। आमतौर पर यह दाने बहुत ही छोटे होते हैं। जब स्किन की मृत कोशिकाएं त्वचा के ऊपर आती हैं तब यही मिलिया का रूप ले लेती है.

बिजी लाइफस्टाइल और खराब खानपान के कारण अधिकतर लोगों को स्किन संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्हीं में एक समस्या है स्किन पर सफेद दाने पड़ जाना। इसे मिलिया नाम से भी जाना जाता है। यह दाने माथे, नाक, गाल, आंखों के नीच कई भी पड़ जाता है। जिनमें दर्द तो नहीं होता है लेकिन यह आपकी सुंदरता में ग्रहण लगा देते है। 

सफेद दाने किसी भी उम्र में हो सकते हैं। आमतौर पर यह दाने बहुत ही छोटे होते हैं। जब स्किन की मृत कोशिकाएं त्वचा के ऊपर आती हैं तब यही मिलिया का रूप ले लेती हैं। इन दानों से निजात पाने के लिए महंगे से महंगे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन आप चाहे तो कुछ घरेलू उपाय अपनाकर इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। 

सफेद दानों से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय

शहद
चेहरे पर पड़े सफेद दानों को हटाने में शहद काफी कारगर साबित हो सकता है। इसमें एक तरह का नैचुरल नमक पाया जाता है। जो आपकी स्किन को कसाव देने के साथ-साथ ऑयली स्किन से छुटकारा दिलता है। इसके साथ ही यह  पोर्स को खोलने के साथ-साथ तैलीय गांठों और दानों को हटाने में मदद करता है। इसके लगाने के लिए शहद को चेहरे पर अच्छी तरह से लगाए। थोड़ी देर हल्के हाथों से मसाज करने के बाद करीब 1 घंटे बाद चेहरे को धो लें। 

हरी मेथी की पत्तियां
हरी मेथी का पेस्ट बनाकर बनाकर इसका रस निकाल लें। इसके बाद इसे चेहरे पर कॉटन रूई की मदद से लगा लें। थोड़ी देर लगा रहने के बाद साफ पानी से धो लें। 

एलोवेरा
एलोवेरा में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो स्किन संबंधी हर समस्या से आसानी से छुटकारा दिला सकता है। इसके लिए रात को सोने से पहले एलोवेरा जेल को लेकर सफेद दानों में लगाकर हल्के हाथों से मसाज करे। इसके बाद साफ पानी से दूसरे दिन धो लें। इस उपाय को कम से कम एक माह अपनाएं।

चंदन
चंदन और गुलाबजल का बना पेस्ट आपके चेहरे को ठंडक पहुंचाएगा। इसके साथ ही ये स्किन को साफ करने में मदद करेगा। इसे चेहरे पर लगाकर नैचुरल तरीके से सुखने दें। इसके बाद साफ पानी से धो लें। इस पेस्ट के इस्तेमाल से ऑयली स्किन से भी छुटकारा मिलेगा। 

धोखाधड़ी:ग्वालियर में पिता-पुत्र ने डाकघर में जमा करवाने के नाम पर ठगे 51.15 लाख, पुत्र गिरफ्तार

ग्वालियर
डाकघर की रैकरिंग स्कीम में पैसा जमा करने के नाम पर पिता-पुत्र ने काराेबारियाें से 51.15 लाख रुपए की धोखाधड़ी कर दी। पिता-पुत्र हर महीने रैकरिंग स्कीम के नाम पर पैसा लेते गए, लेकिन जब समय पूरा हो गया तो इकठ्ठा पैसा देने की जगह भाग गए। मुरार पुलिस ने पिता पुत्र पर एफआईआर दर्ज कर एक को बीती रात गिरफ्तार भी कर लिया। टीआई मुरार अजय सिंह पवार ने बताया कि राजेश गुप्ता निवासी मालरोड मुरार अपने बेटे समर गुप्ता के साथ डाकघर में रैकरिंग खाता खुलवाता था। उसने मुरार क्षेत्र के कई व्यापारियों को पांच साल की स्कीम में पैसा जमा करने के लिए कहा। हर महीने रैकरिंग स्कीम के नाम पर व्यापारियों से रुपए लेते गए। जब पांच साल पूरे हो गए तो लोगों ने रुपए मांगना शुरू किया।

कुछ दिनों तक तो टरकाते रहे और एक दिन पिता-पुत्र घर पर ताला लगाकर गायब हाे गए। व्यापारियों ने थाने पहुंचकर शिकायत की। इस बीच लोगों को सूचना मिली कि समर गुप्ता मुरार इलाके में ही देखा गया है ताे उन्हाेंने यह जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर समर को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी समर को कोर्ट में पेश कर एक दिन की रिमांड पर लिया है।
इन लोगों ने की थाने में शिकायत
पिता-पुत्र की ठगी का शिकार कई लोग हुए हैं। पिछले दाे दिन में मुरार थाने में 17 लाेग शिकायत करने पहुंचे। इनमें योगेश जैन, मोहन गर्ग, आकाश गर्ग, प्रह्लाद गोयल, राहुल गोयल, आनन्द सचदेवा, प्रेमचंद्र सचदेवा, महावीर जैन, मनीष राठौर, ब्रजेश अग्रवाल, सुरेंद्र गोयल, मुन्ना खान, दिनेश अग्रवाल,धर्मेद्र राठौर और बिट्टू अग्रवाल शामिल हैं। लाेगाें के मुताबिक कई लोग अभी थाने तक नहीं पहुंचे हैं। आरोपी के पकड़े जाने की सूचना जैसे-जैसे लाेगाें तक पहुंचेगी, ठगी के शिकार हुए लाेग सामने आ सकते हैं। बुधवार को दो लोग और थाने पहुंचे।

गधी का दूध भारत में 7,000 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है- जानें हक़ीक़त: फ़ैक्ट चेक

किसी को गधा कहना एक तरह से मूर्ख कहा जाना समझा जाता है. इसके अलावा कई लोग आम बोलचाल में लगातार काम करने वालों को ‘गधे की तरह काम करने वाला’ भी कहते हैं.

भारत में गधों का इस्तेमाल बोझा ढोने में होता रहा है लेकिन मोटर वाहन के आने के बाद बीते कुछ सालों में गधों की संख्या में काफ़ी कमी आई है. लेकिन अब गधों के बारे में ऐसी बातें सामने आ रही हैं जिससे शायद इनकी तादाद बढ़ाने में लोगों की दिलचस्पी जागे.

टाईम्स आफ इंडिया  ने मंगलवार को एक ख़बर प्रकाशित की जिसमें बताया गया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का हिसार (हरियाणा) में मौजूद राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (NRCE) जल्द ही गधी के दूध की डेयरी स्थापित करने जा रहा है.

अख़बार लिखता है कि इस डेयरी में हलारी नस्ल के गधों को रखा जाएगा और उनका दूध निकाला जाएगा.

इसके अलावा कई  मीडिया संस्थानों ने इस ख़बर को अपने यहां जगह दी और यह दावा किया कि गधी का दूध 7,000 रुपये प्रति लीटर तक बिक सकता है.



गधी के दूध के लाभ
शोध में पाया है कि बहुत से जानवरों के दूध को कम करके आंका जाता है, इनमें गधी और घोड़ी का दूध भी शामिल है.

गधी और घोड़ी के दूध में प्रोटीन इस तरह का है कि जिन लोगों को गाय के दूध से एलर्जी है, यह उनके लिए बहुत बेहतर है. साथ ही संगठन लिखता है कि यह दूध एक इंसानी दूध की तरह है, जिसमें प्रोटीन और वसा की मात्रा कम होती है लेकिन लैक्टॉस अधिक होता है.

इसमें आगे कहा गया है कि यह जल्द ही फ़ट जाता है लेकिन इसका पनीर नहीं बनाया जा सकता है.

इसका उपयोग कॉस्मेटिक्स और फ़ार्मास्युटिकल उद्योग में भी होता है क्योंकि कोशिकाओं को ठीक करने और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के भी इसमें गुण हैं.

ऐसा कहा जाता है कि प्राचीन मिस्र की महिला शासक क्लियोपैट्रा अपनी ख़ूबसूरती बरक़रार रखने के लिए गधी के दूध में नहाया करती थीं.

NRCE के पूर्व निदेशक डॉक्टर मुक्ति साधन बसु कहते हैं कि गधी के दूध के दो प्रमुख लाभ पाए जाते हैं, पहला यह महिला के दूध जैसा होता है, वहीं दूसरा इसमें एंटी-एजिंग, एंटि-ऑक्सिडेंट और रीजेनेरेटिंग कंपाउंड्स होते हैं जो त्वचा को पोषण देने के अलावा उसे मुलायम बनाने में काम आते हैं.

डॉक्टर बसु कहते हैं, “भारत में गधी के दूध पर अभी बहुत अधिक रिसर्च की जानी बाकी है क्योंकि लोगों को इसके फ़ायदों को लेकर जानकारी नहीं है जबकि यूरोप में इसके बारे में लोग काफ़ी जानते हैं, कामकाजी महिलाएं अपने नवजात बच्चों के लिए गधी के पाश्चुरिकृत दूध का इस्तेमाल कर रही हैं और अब तो अमरीका ने भी इसकी अनुमति दे दी है.”

वो कहते हैं, “इसमें लैक्टॉज़, विटामिन ए, बी-1, बी-2, बी-6, विटामिन डी और विटामिन ई भी होता है. गधी के दूध से बने साबुन, क्रीम, मॉश्चराइज़र की बाज़ार में मांग है और आज भारत में कई महिलाएं गधी के दूध के बने इन उत्पादों का इस्तेमाल कर रही हैं.”

डॉक्टर बसु कहते हैं कि भारत में अभी गधी के दूध से कम उत्पाद बन रहे हैं लेकिन इसमें जब बढ़ोतरी होगी तो गधी के दूध की कमी होगी क्योंकि भारत में गधों की संख्या लगातार कम हो रही है.

कितना दूध देती है गधी

एनआरसीई गधी के दूध की डेयरी के लिए गुजरात से हलारी नस्ल के गधे ला रहा है. आणंद कृषि विश्वविद्यालय के पशु आनुवंशिकी और प्रजनन विभाग के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर डी.एन. रांक कहते हैं कि भारत में गधों की नस्लों के बारे में पहली बार इस तरह का काम हुआ है.

वो कहते हैं, “भारत में गधों की सिर्फ़ स्पीति नस्ल को मान्यता थी अब गुजरात के जामनगर और द्वारका में पाए जाने वाली हराली नस्ल के गधों को भी मान्यता दी गई है. यह गधे आम गधों से थोड़े ऊंचे और घोड़ों से थोड़े छोटे और सफ़ेद होते हैं. अब तक भारत में सड़कों पर घूमने वाले गधों की नस्ल की पहचान नहीं थी लेकिन अब दो नस्लों को पहचान मिल गई है जो अच्छी बात है.”

प्रोफ़ेसर रांक कहते हैं कि गधों का ध्यान न रखना और उनसे बेतरतीब काम कराने से दूध नहीं मिल सकता है. वो कहते हैं कि एक गधी दिन में अधिकतम आधा लीटर दूध देती है और हर गधी का दूध उसके रख-रखाव के तरीक़े से घट बढ़ सकता है.

7,000 रुपये लीटर है गधी का दूध?

गधी के दूध का कारोबार भारत में उस तरह से नहीं है जिस तरह से यह यूरोप और अमरीका में शुरू हो चुका है. प्रोफ़ेसर रांक कहते हैं कि भारत में अभी शुरुआत है, गधी का दूध महंगा ज़रूर है लेकिन यह अभी 7,000 रुपये प्रति लीटर तक नहीं बिक रहा है.

वो कहते हैं कि विभिन्न मीडिया संस्थानों ने भी 7,000 रुपये प्रति लीटर का आंकड़ा विदेशों के हवाले से दिया है.

वहीं, डॉक्टर बसु कहते हैं कि यह अभी शुरुआत है लेकिन फ़ार्म में रखकर गधे पालने का चलन तमिलनाडु, केरल या गुजरात में कुछ ही लोगों ने किया है और इसकी ख़रीद-फ़रोख़्त अधिकतर ऑनलाइन है.

जो ऊंट, भेड़, गाय और गधी के दूध के साथ-साथ उससे बना घी और मिल्क पाउडर भी ऑनलाइन बेचती है.

वो कहते हैं, “गधे के दूध का दाम कोई तय नहीं है और यह कोई फ़ार्म के ज़रिए नहीं आता है. हम अपने लोगों से गांव से इस दूध को मंगवाते हैं. इस दूध को अधिकतर दवाई और कॉस्मेटिक्स के इस्तेमाल के लिए ही लोग लेते हैं.”

कहते हैं कि 7,000 रुपये प्रति लीटर इसका दाम तब हो सकता है जब इसे आप किसी के पास कहीं दूर भेज रहे हों क्योंकि यह जल्दी ख़राब हो जाता है, अगर आप इसे मुंबई में ही हाथों हाथ लें तो 5,000 रुपये प्रति लीटर में मिल जाएगा.

कहते हैं कि सिर्फ़ साबुन और कॉस्मेटिक्स के उत्पाद से अलग यह पेट के बैक्टीरियल इन्फ़ेक्शन में भी बहुत काम आता है.

उपचुनाव: चंबल–ग्वालियर के राजनीतिक बागियों की हालत पतली …कुछ बागियों को घर न बैठाया तो शिवराज सरकार को खतरा…….


मध्यप्रदेश विधान सभा उपचुनाव जैसे जैसे पास आ रहे नेताओं की सरगर्मियां तेज होती जा रहीं हैं.
बागी चंबल में ही पैदा होते रहे हैं पहले बीहड़ों में पैदा होते थे अब सफेद पोशाक पहन राजनीति की शोभा बढ़ाते हैं.यहां बागी शब्द कांग्रेस से भााजपा में गये विधायकों के लिये लिखा जा रहा है.
सूत्रों की मानें तो ग्वालियर चंबल की कुछ सीटों पर बागियों की स्थिति जनता में बहुत खराब है , इनका जीतना मुशकिल नजर आ रहा है. ग्वालियर की बात करें तो सतीश सितरवार के दल बदल कर कांग्रेस में जाने के कारण दोनों सीटों पर इसका असर पड़ेगा. समझदार को इशारा काफी है . संभाग में जिन सीटों पर बागियों की स्थिति जनता के बीच ठीक छवि नहीं बना पा रही उनकी जगह अगर दूसरे उम्मीदवारों को मौका मिल जाये तो ही शिवराज की नैया पार हो सकती है.
जयभान सिंह पवैया अपनी पुरानी सीट पर सौ प्रतिशत परिणाम दे सकते हैं. इनके कारण दूसरी सीट पर भी असर पड़ेगा.बेहतर है इस कद्दावर नेता का उपयोग समय रहते किया जाये. सरकार रही तो सब कुछ सेट हो जायेगा और कहीं चली गई तो सब घर के रहेंगे न घाट के. जनता किसी की नहीं निर्णय बड़े सोच समझकर लेती है.
इधर पोहरी विधानसभा की स्थिति भी भाजपा के पक्ष में नहीं दिख रही है. सीट को निकालना टेड़ी खीर होगी. यहां बासपा की स्थिति बेहतर नजर आ रही है.
चंबल की सीटों पर भी विपक्षी दल शिकंजा कसने में लगा हुआ है.
कहने का मतलब यही है अगर अब भाजपा को अपनी लाज बचाना है तो कुछ बागियों को कहीं और जगह पर नियुक्ति दे सरकार को लाल सिगनल से बाहर निकाला जा सकता है. अभी समय है आगे स्थित और बिगड़ने वाली है.असंतुष्ट तो समीकरण बिगाड़ेंगे ही कुछ बागी भी भाजपा के लिये भष्मासुर साबित होंगे.
स्थिति वही होने जा रही न निगल सकते हैं न उगल सकते हैं.