पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री ने संयुक्‍त राष्‍ट्र में उठाया जम्‍मू-कश्‍मीर का मुद्दा, भारत ने बंद की बोलती

संयुक्‍त राष्‍ट्र
संयुक्‍त राष्‍ट्र के 75 साल पूरे होने पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में जम्‍मू-कश्‍मीर का मुद्दा उठाना पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के लिए महंगा पड़ गया। भारत ने पाकिस्‍तान को ‘आतंकवाद का गढ़’ और ‘पनाहगार’ बताकर उसकी बोलती बंद कर दी। भारत ने कहा कि पाकिस्‍तान एक ऐसा मुल्‍क है जो आतंक फैलाने वालों को ट्रेनिंग देता है और उन्‍हें शहीद का दर्जा देता है।

भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यकों पर अत्‍याचार बढ़ता जा रहा है। संयुक्‍त राष्‍ट्र में पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के कश्‍मीर का मुद्दा उठाने पर भारत ने जवाब देने के अधिकार के तहत आतंकवाद का मुद्दा उठाया। संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने कुरैशी के भाषण को भारत के आंतरिक मामले के मामले में कभी न खत्‍म होने वाला मनगढ़ंत विचार करार दिया।

‘भारत कुरैशी के कश्‍मीर के दुर्भावनापूर्ण उल्‍लेख को खारिज करता है’

सोमवार को शुरू हुए संयुक्‍त राष्‍ट्र के इस कार्यक्रम में मैइत्रा ने कहा कि मैं उत्‍तर देने के अधिकार के तहत पाकिस्‍तान के प्रतिनिधि के बयान का जवाब देना चाहती हूं। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान इस तरह के मंच का इस्‍तेमाल बार-बार मिथ्‍या आरोप लगाने के लिए करता रहा है। पाकिस्‍तान के प्रतिनिधि का जो हमने विचार सुना वह भारत के आतंरिक मामले में कभी न खत्‍म होने वाला मनगढ़ंत विचार है।

मैइत्रा ने कहा कि भारत कुरैशी के जम्‍मू-कश्‍मीर के दुर्भावनापूर्ण उल्‍लेख को खारिज करता है जो भारत का अभिन्‍न अंग है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि अगर संयुक्‍त राष्‍ट्र में कोई ऐसा अजेंडा जो पूरा नहीं हुआ है तो वह बढ़ते आतंकवाद से निपटना है। पाकिस्‍तान एक ऐसा देश है जो पूरी दुनिया में आतंकवाद के केंद्र के रूप में कुख्‍यात है। पाकिस्‍तान ने खुद आतंकवादियों को शरण देने और प्रशिक्षण देने तथा उन्‍हें शहीद का दर्जा देने को स्‍वीकार किया है। वहीं खुद पाकिस्‍तान अल्‍पसंख्‍यकों के खिलाफ ज्‍यादती करता है।

बड़ी लापरवाही : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हेलीकॉप्टर के ऊपर आ गया था ड्रोन

गुना । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सुरक्षा में गंभीर चूक सामने आई है। 14 सितंबर को वे मुंगावली (अशोकनगर) की सभा में हेलीकॉप्टर से पहुंचे थे। सभा के बाद जब जाने लगे तो हेलीकॉप्टर के ऊपर अचानक एक ड्रोन आ गया था। वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों की नजर भी उस पर नहीं पड़ी। पायलट ने इसकी सूचना दी और कहा था, ‘यह ड्रोन हेलीकॉप्टर की पंखुड़ियों में उलझ सकता है’, तब अधिकारियों ने इसे नीचे उतरवाया। मामले में ग्वालियर जोन आइजी अविनाश शर्मा ने विभागीय स्तर पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि आइजी से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि यह कोई सुरक्षा में चूक नहीं है।

मुख्यमंत्री चौहान का 11 सितंबर को शिवपुरी जिले के करैरा व पोहरी व 14 सितंबर को अशोकनगर जिले के मुंगावली में कार्यक्रम था। इन दोनों कार्यक्रमों में हुई गलतियों को लेकर आइजी शर्मा ने शिवपुरी व अशोकनगर के पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखा है। इसमें बताया है कि मुंगावली में जब हेलीकॉप्टर में वीआइपी बैठने वाले थे या बैठ गए थे, तब पायलट ने ऊपर ड्रोन उड़ने की सूचना दी और कहा कि यह हेलीकॉप्टर के पंखों में उलझ सकता है। भविष्य में इस तरह की गलती नहीं होनी चाहिए। करैरा में हेलीपैड पर बहुत सारे लोग घुस आए थे।

आइजी के पत्र में उल्लेख है कि मुख्यमंत्री के काफिले के साथ जो 15 पुलिसकर्मी सादी वेशभूषा में लगाए थे, वे सभी अलग-अलग तरह के कपड़े पहने थे। कुछ तो जींस भी पहने थे, इसलिए समझ नहीं आ रहा था कि ये पुलिसकर्मी हैं या जनता के लोग। ये सफारी सूट में होते तो इन्हें आसानी से पहचाना जा सकता था।

पोहरी में दीवार फांदकर पहुंचे लोग

पोहरी में कई लोग दीवार फांदकर हेलीपैड पर पहुंच गए थे। मुंगावली में मंच पर लोक निर्माण विभाग ने 35 लोगों के बैठने की क्षमता बताई थी, जबकि यहां बैठने वालों की सूची में 40 लोगों के नाम थे। अशोकनगर एएसपी हेमलता कुरील भी इस संबंध में आइजी को कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाईं।

मुंगावली में कोई बच्चा वीडियोग्राफी के लिए ड्रोन उड़ा रहा था, उस ड्रोन को तत्काल नीचे उतरवा दिया था। यह सुरक्षा में कोई चूक नहीं है। -अविनाश शर्मा, आइजी ग्वालियर जोन

संभोग से समाधि की ओर: आचार्य श्री रजनीश.

* आचार्य रजनीश के इस विचार ने दुनिया में क्रांति कर दी थी….योग जगत में……आलोचना के पात्र भी बने …पर गहरा था उनका चिंतन नब्ज पहचान गये थे…..
एक बात, पहली बात स्‍पष्‍ट कर लेनी जरूरी है वह हय कि यह भ्रम छोड़ देना चाहिए कि हम पैदा हो गये है, इसलिए हमें पता है—क्‍या है काम, क्‍या है संभोग। नहीं पता नहीं है। और नहीं पता होने के कारण जीवन पूरे समय काम और सेक्‍स में उलझा रहता है और व्‍यतीत होता है।

      मैंने आपसे कहा, पशुओं का बंधा हुआ समय है। उनकी ऋतु है। उनके मौसम है। आदमी का कोई बंधा हुआ समय नहीं है। क्‍यों? पशु शायद मनुष्‍य से ज्‍यादा संभोग की गहराई में उतरने में समर्थ है और मनुष्‍य उतना भी समर्थ नहीं रह गया है।

      जिन लोगों ने जीवन के इन तलों पर बहुत खोज की है और गहराइयों में गये है और  जिन लोगों ने जीवन के बहुत से अनुभव संग्रहीत किये है। उनको यह जानना, यह सुत्र उपलब्‍ध हुआ है कि अगर संभोग एक मिनट तक रुकेगा तो आदमी दूसरे दिन फिर संभोग के लिए लालायित हो जायेगा। अगर तीन मिनट तक रूक सके तो यह सप्‍ताह तक उसे सेक्‍स की वह याद भी नहीं आयेगी। और अगर साम मिनट तक रूक सके तो तीन महीने के लिए सेक्‍स से इस तरह मुक्‍त हो जायेगा कि उसकी कल्‍पना में भी विचार प्रविष्‍ट नहीं होगा। और अगर तीन घंटे तक रूक सके तो जीवन भर के लिए मुक्‍त हो जायेगा। जीवन में उसको कल्‍पना भी नहीं उठेगी।

      लेकिन सामान्‍यत: क्षण भर का अनुभव है मनुष्‍य का। तीन घंटे की कल्‍पना करनी भी मुश्‍किल है। लेकिन मैं आपसे कहता हूं के तीन घंटे अगर संभोग की स्‍थिति में, उस समाधि की दशा में व्‍यक्‍ति रूक जाये तो एक संभोग पूरे जीवन के लिए सेक्‍स से मुक्‍त करने के लिए पर्याप्‍त है। इतनी तृप्‍ति पीछे छोड़ जाता है—इतनी अनुभव,इतनी बोध छोड़ जाता है कि जीवन भर के लिए पर्याप्‍त हो जाता है। एक संभोग के बाद व्‍यक्‍ति ब्रह्मचर्य को अपलब्‍ध हो सकता है।

      लेकिन हम तो जीवन भी संभोग के बाद भी उपलब्‍ध नहीं होते। क्‍या है? बूढ़ा हो जाता है आदमी मरने के करीब पहुंच जाता है और संभोग की कामना से मुक्‍त नहीं होता। संभोग की कला और संभोग के शास्‍त्र को उसने समझा नहीं है। और न कभी किसी ने समझाया है,न विचार किया है। न सोचा है, न बात की है। कोई संवाद भी नहीं हुआ जीवन में—कि अनुभवी लोग उस पर संवाद करते और विचार करते हम बिलकुल पशुओं से भी बदतर हालत पर है। उस स्‍थिति में है। आप कहेंगे कि एक क्षण से तीन घंटे तक संभोग की दशा ठहर सकती है, लेकिन कैसे?

      कुछ थोड़े से सूत्र आपको कहता हूं। उन्‍हें थोड़ा ख्‍याल में रखेंगे तो ब्रह्मचर्य की तरफ जाने में बड़ी यात्रा सरल हो जायेगी। संभोग करते क्षणों में क्षणों श्वास जितनी तेज होगी। संभोग का काल उतना ही छोटा होगा। श्वास जितनी शांत और शिथिल होगी। संभोग का काल उतना ही लंबा हो जायेगा। अगर श्वास को बिलकुल शिथिल करने का थोड़ा अभ्‍यास किया जाये, तो संभोग के क्षणों को कितना ही लंबा किया जा सकता है। और संभोग के क्षण जितने लंबे होंगे, उतने ही संभोग के भीतर से समाधि का जो सूत्र मैंने आपसे कहा है—निरहंकार भाव, इगोलेसनेस और टाइमलेसनेस का अनुभव शुरू हो जायेगा। श्वास अत्‍यंत शिथिल होनी चाहिए। श्वास के शिथिल होते ही संभोग की गहराई अर्थ और उदघाटन शुरू हो जायेंगे।

      और दुसरी बात, संभोग के क्षण में ध्‍यान दोनों आंखों के बीच, जहां योग आज्ञा चक्र को बताता है। वहां अगर ध्‍यान हो तो संभोग की सीमा और समय तीन घंटे तक बढ़ाया जा सकता है। और एक संभोग व्‍यक्‍ति को सदा के लिए ब्रह्मचर्य में प्रतिष्‍ठित कर देगा—न केवल एक जन्‍म के लिए, बल्‍कि अगले जन्‍म के लिए भी।

      किन्‍हीं एक बहन ने पत्र लिखा है और मुझे पूछा है कि विनोबा तो बाल ब्रह्मचारी है, क्‍या उन्‍हें समाधि का अनुभव नहीं हुआ होगा। मेरे बाबत पूछा है कि मैंने तो विवाह नहीं किया, मैं तो बाल ब्रह्मचारी हूं मुझे समाधि का अनुभव नहीं हुआ होगा।

      उस बहन को अगर वह यहां मौजूद हों तो मैं कहना चाहता हूं। विनोबा को या मुझे या किसी को भी बिना अनुभव के ब्रह्मचर्य उपलब्‍ध नहीं होता। वह अनुभव चाहे इस जन्‍म का हो, चाहे पिछले जन्‍म का हो—जो इस जन्‍म में ब्रह्मचर्य को उपलब्‍ध होता है, वह पिछले जन्‍मों के गहरे संभोग के अनुभव के आधार पर और किसी आधार पर नहीं। कोई और रास्‍ता नहीं है।

      लेकिन अगर पिछले जन्‍म में किसी को गहरे संभोग की अनुभूति हुई हो ता इस जन्‍म के साथ ही वह सेक्‍स से मुक्‍त पैदा होगा। उसकी कल्‍पना के मार्ग पर सेक्‍स कभी भी खड़ा नहीं होगा और उसे हैरानी दूसरे लोगों को देखकर कि यह क्‍या बात है। लोग क्‍यों पागल हैं,क्‍यों दीवाने है?  उसे कठिनाई होगी यह जांच करने में कि कौन स्‍त्री है, कौन पुरूष है?इसका भी हिसाब रखने में और फासला रखने में कठिनाई होगी।

      लेकिन कोई अगर सोचता हो कि बिना गहरे अनुभव के कोई बाल ब्रह्मचारी हो सकता है। तो बाल ब्रह्मचारी नहीं होगा, सिर्फ पागल हो जायेगा। जो लोग जबरदस्‍ती ब्रह्मचर्य थोपने की कोशिश करते है, वह विक्षिप्‍त होते है और कहीं भी नहीं पहुंचते।

      ब्रह्मचर्य थोपा नहीं जाता। वह अनुभव की निष्‍पति है। वह किसी गहरे अनुभव का फल है। और वह अनुभव संभोग का ही अनुभव है। अगर वह अनुभव एक बार भी हो जाए तो अनंत जीवन की यात्रा के लिए सेक्‍स से मुक्‍ति हो जाती है।

      तो दो बातें मैंने कहीं, उस गहराई के लिए—श्वास शिथिल हो इतनी शिथिल हो कि जैसे चलती ही नहीं और ध्‍यान, सारी अटैंशन आज्ञा चक्र के पास हो। दोनों आंखों के बीच के बिन्‍दु पर हो। जितना ध्‍यान मस्‍तिष्‍क के पास होगा, उतनी ही संभोग की गहराई अपने आप बढ़ जायेगी। और जितनी श्राव शिथिल होगी, उतनी लम्‍बाई बढ़ जायेगी। और आपको पहली दफा अनुभव होगा कि संभोग का आकर्षण नहीं है मनुष्‍य के मन में। मनुष्‍य के मन में समाधि का आकर्षण है। और एक बार उसकी झलक मिल जाए, एक बार बिजली चमक जाये और हमें दिखाई पड़ जाये अंधेरे में कि रास्‍ता क्‍या है फिर हम रास्‍ते पर आगे निकल सकते है।

      एक आदमी एक गंदे घर में बैठा है। दीवालें अंधेरी है ओर धुएँ से पूती हुई है। घर बदबू से भरा हुआ है। लेकिन खिड़की खोल सकता है। उस गंदे घर की खिड़की में खड़े होकर वह देख सकता है दूर आकाश को तारों को सूरज को, उड़ते हुए पक्षियों को। और तब उसे उस घर के बहार निकलने में कठिनाई नहीं रह जायेगी।

      जिस दिन आदमी को संभोग के भीतर समाधि का पहली थोड़ी सह भी अनुभूति होती है उसी दिन सेक्‍स का गंदा मकान सेक्‍स की दीवालें अंधेरे से भरी हुई व्‍यर्थ हो जाती है आदमी बाहर निकल जाता है।

      लेकिन यह जानना जरूरी है कि साधारणतया हम उस मकान के भीतर पैदा होते है। जिसकी दीवालें बंद है। जो अंधेरे से पूती है। जहां बदबू है जहां दुर्गंध है और इस मकान के भीतर ही पहली दफ़ा मकान के बाहर का अनुभव करना जरूरी है, तभी हम बहार जा सकते है। और इस मकान को छोड़ सकते है। जिस आदमी ने खिड़की नहीं खोली उस मकान की और उसी मकान के कोने में आँख बंद करके बैठ गया है कि मैं इस गंदे मकान को नहीं देखूँगा, वह चाहे देखे और चाहे न देखे। वह गंदे मकान के भीतर ही है और भीतर ही रहेगा।

      जिसको हम ब्रह्मचारी कहते है। तथाकथित जबर दस्‍ती थोपे हुए ब्रह्मचारी, वे सेक्‍स के मकान के भीतर उतने ही है जितना की कोई भी साधारण आदमी है। आँख बंद किये बैठे है,आप आँख खोले हुए बैठे है, इतना ही फर्क है। जो आप आँख खोलकर कर रहे है, वह आँख बंद कर के भीतर कर रहे है। जो आप शरीर से कर रहे है। वे मन से कर रहे है। और कोई फर्क नहीं है।

      इसलिए मैं कहता हूं कि संभोग के प्रति दुर्भाव छोड़ दे। समझने की चेष्‍टा,प्रयोग करने की चेष्‍टा करें और संभोग को एक पवित्रता की स्‍थिति दे।

      मैंने दो सूत्र कहे। तीसरी एक भाव दशा चाहिए संभोग के पास जाते समय। वैसा भाव-दशा जैसे कोई मंदिर के पास जा रहा है। क्‍योंकि संभोग के क्षण में हम परमात्‍मा के निकटतम होते है। इसीलिए तो संभोग में परमात्‍मा सृजन का काम करता है। और नये जीवन को जन्‍म देता है। हम क्रिएटर के निकटतम होते है।

      संभोग की अनुभूति में हम सृष्‍टा के निकटतम होते है।

      इसीलिए तो हम मार्ग बन जाते है। और एक नया जीवन हमसे उतरता है। और गतिमान हो जाता है। हम जन्‍मदाता बन जाते है।

      क्‍यों?

      सृष्‍टा के निकटतम है वह स्‍थिति। अगर हम पवित्रता से प्रार्थना से सेक्‍स के पास जायें तो हम परमात्‍मा की झलक को अनुभव कर सकते है। लेकिन हम तो सेक्‍स के पास घृणा एक दुर्भाव एक कंडेमनेशन के साथ जाते है। इसलिए दीवाल खड़ी हो जाती है। और परमात्‍मा का यहां कोई अनुभव नहीं हो पाता है।  

      सेक्‍स के पास ऐसे जाऐं, जैसे की मंदिर के पास जा रहे है। पत्‍नी को ऐसा समझें, जैसे की वह प्रभु है। पति को ऐसा समझें कि जैसे कि वह परमात्‍मा है। और गंदगी में क्रोध में कठोरता में द्वेष में, ईर्ष्‍या में, जलन में चिन्‍ता के क्षणों में कभी भी सेक्‍स के पास न जायें। होता उलटा है। जितना आदमी चिन्‍तित होता है। जितना परेशान होता है। जितना क्रोध से भरा होता है। जितना घबराया होता है, जितना एंग्‍विश में होता है। उतना ही ज्‍यादा वह सेक्‍स के पास जाता है।

      आनंदित आदमी सेक्‍स के पास नहीं जाता। दुखी आदमी सेक्‍स की तरफ जाता है। क्‍योंकि दुख को भुलाने के लिए इसको एक मौका दिखाई पड़ता है।

      लेकिन स्मरण रखें कि जब आप दुःख में जायेंगे, चिंता में जायेंगे, उदास हारे हुए जायेगे, क्रोध में लड़े हुए जायेंगे। तब आप कभी भी सेक्‍स की उस गहरी अनुभूति को उपलब्‍ध नहीं कर पायेंगे। जिसका की प्राणों में प्यास  है। वह समाधि की झलक वहां नहीं मिलेगी। लेकिन यहां उलटा होता है।

      मेरी प्रार्थना है जब आनंद में हों, जब प्रेम में हों, जब प्रफुल्‍लित हों और जब प्राण ‘प्रेयर फुल’ हों। जब ऐसा मालुम पड़े कि आज ह्रदय शांति से और आनंद से कृतज्ञता से भरा हुआ है, तभी क्षण है—तभी क्षण है संभोग के निकट जाने का। और वैसा व्‍यक्‍ति संभोग से समाधि को उपलब्‍ध होता है। और एक बार भी समाधि की एक किरण मिल जाये। तो संभोग से सदा के लिए मुक्‍त हो जाता है। और समाधि में गतिमान हो जाता है।

      स्‍त्री और पुरूष का मिलन एक बहुत गहरा अर्थ रखता है। स्‍त्री और पुरूष के मिलन में पहली बार अहंकार टूटता है और हम किसी से मिलते है।

      मां के पेट से बच्‍चा निकलता है और दिन रात उसके प्राणों में एक ही बात लगी रहती है जैसे की हमने किसी वृक्ष को उखाड़ लिया जमीन से। उस पूरे वृक्ष के प्राण तड़पते है कि जमीन से कैसे जुड़ जाये। क्‍योंकि जमीन से जुड़ा हुआ होकर ही उसे प्राण मिलता था। रस मिलता था जीवन  मिलता था। व्‍हाइटालिटी मिलती थी। जमीन से उखड गया तो उसकी सारी जड़ें चिल्लाये गी कि मुझे जमीन में वापस भेज दो। उसका सारा प्राण चिल्लाये गा कि मुझे जमीन में वापस भेज दो। वह उखड  गया टूट गया। अपरूटेड हो गया।

      आदमी जैसे ही मां के पेट से बाहर निकलता है, अपरूटेड हो जाता है। वह सारे जीवन और जगत से एक अर्थ में टूट गया। अलग हो गया। अब उसकी सारी पुकार और सारे प्राण की आकांशा जगत और जीवन और अस्‍तित्‍व से, एग्ज़िसटैंस से वापस जुड़ जाने की है। उसी पुकार का नाम प्रेम और प्‍यास है।

      प्रेम का और अर्थ क्‍या है? हर आदमी चाह रहा है कि मैं प्रेम पाऊँ और प्रेम करूं। प्रेम का मतलब क्‍या है?

      प्रेम का मतलब है कि मैं टुट गया हूं, आइसोलेट हो गया हूं। अलग हो गया हूं। मैं वापस जुड़ जाऊँ जीवन से। लेकिन इस जुड़ने का गहरे से गहरा अनुभव मनुष्‍य को सेक्‍स के अनुभव में होता है। स्‍त्री और पुरूष को होता है। वह पहला अनुभव है जुड़ जाने का। और जो व्‍यक्‍ति इस जुड़ जाने के अनुभव को—प्रेम की प्‍यास, जुड़ने की आकांशा के अर्थ में समझेगा,वह आदमी एक दूसरे अनुभव को भी शीध्र उपलब्‍ध हो सकता है।

      योगी जुड़ता है, साधु भी जुड़ता है। संत भी जुड़ता है, समाधिस्‍थ व्‍यक्‍ति भी जुड़ता है। संभोगी भी जुड़ता है।

      संभोग करने में दो व्‍यक्‍ति जुड़ते है। एक व्‍यक्‍ति दूसरे से जुड़ता है और एक हो जाता है।

      समाधि में एक व्‍यक्‍ति समष्‍टि से जुड़ता है और एक हो जाता है।

      संभोग दो व्‍यक्‍तियों के बीच मिलन है।

      समाधि एक व्‍यक्‍ति और अनंत के बीच मिलन है।

      स्‍वभावत: दो व्‍यक्‍ति का मिलन क्षण भर को हो सकता है। एक व्‍यक्‍ति और अनंत का मिलन अनंत के लिए हो सकता है। दोनों व्‍यक्‍ति सीमित है। उनका मिलन असीम नहीं हो सकता। यही पीड़ा है, यहीं कष्‍ट है, सारे दांपत्‍य का, सारे प्रेम का कि जिससे हम जुड़ना चाहते है। उससे भी सदा के लिए नहीं जुड़ पाते। क्षण भर को जुड़ते है और फिर फासले हो जात है। फासले पीड़ा देते है। फासले कष्ट देते है। और निरंतर दो प्रेमी इसी पीड़ा में परेशान रहते है। कि फासला क्‍यों है। और हर चीज फिर धीरे-धीरे ऐसी मालूम पड़ने लगती है कि दूसरा फासला बना रहा है। इसीलिए दूसरे पर क्रोध पैदा होना शुरू हो जाता है।

-ओशो

संभोग से समाधि की ओर,

प्रवचन-4

गोवालिया टैंक, मुम्‍बई,

1-अक्‍टूबर-1968, 

नोट:  आचार्य रजनीश का मनोविज्ञान कितना गहरा है,  आज समूचा समाज विक्षिप्त है, विकृत है, कुंठित है…क्या युवा, क्या उम्रदराज, क्या धर्म गुरु सब यौन कुंठा से पीड़ित हैं……..

और आचार्य रजनीश इस कुंठा का इलाज कई साल पहले कह गये…….शायद बीमारी को उन्होंने पकड़ लिया था………

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राज्यसभा से निलंबित सांसदों का संसद परिसर में रात्रि धरना, गाना गाकर वक्त बिताते दिखे संजय सिंह और डोला सेन

निलंबित किए गए सदस्यों में तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन, कांग्रेस के राजीव सातव, सैयद नजीर हुसैन और रिपुन बोरा, आप के संजय सिंह, माकपा के केके रागेश और इलामारम करीम शामिल हैं.

नई दिल्ली राज्यसभा में किसान बिल को लेकर हंगामे की वजह से 8 सांसदों को सदन से सस्पेंड कर दिया गया. सभी 8 निलंबित सांसद गांधी मूर्ति के सामने धरने पर बैठ गए और विरोध के गाने गाते रहे. रविवार को राज्यसभा में जिस कदर हंगामा हुआ, उसकी वजह से सभापति वेंकैया नायडू ने इन सांसदों को सस्पेंड किया था. अब देखना है कि ये धरना आगे भी इसी तरह जारी रहता है या इस आंदोलन को खत्म करने के लिए बीच का रास्ता निकाला जाता है.

निलंबित किए गए सदस्यों में तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन, कांग्रेस के राजीव सातव, सैयद नजीर हुसैन और रिपुन बोरा, आप के संजय सिंह, माकपा के केके रागेश और इलामारम करीम शामिल हैं. सभी सांसद रविवार को कृषि विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में विरोध कर रहे थे.

राज्यसभा सभापति क्या बोले?
राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सोमवार को राज्यसभा में हुए हंगामे की निंदा करते हुए कहा कि यह राज्यसभा के लिए सबसे खराब दिन था. उपसभापति हरिवंश को धमकी दी गई. उन्होंने कहा, “इससे मुझे बहुत दुख पहुंचा है, क्योंकि सदन में कल जो हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण, अस्वीकार्य और निंदनीय है.”

उन्होंने कहा, “सदन में कोरोना वायरस के सरकारी दिशा-निर्देशों का भी पालन नहीं किया गया, अगर हम इसका अनुपालन नहीं करते हैं तो आम आदमी से क्या उम्मीद रखेंगे. कुछ संसद सदस्य वेल तक जा पहुंचे और पेपर फेंका, माइक तोड़ दिया, रूलबुक को फेंक दिया. यहां तक कि उपसभापति को भी धमकी दी गई. क्या यही संसद का स्टैंडर्ड है?”

उन्होंने आगे कहा, “उपसभापति को शारीरिक रूप से धमकी दी गई और कहा गया कि अगर समय से मार्शल न आते तो उनके साथ बहुत बुरा होता. इन सब चीजों को जानकर मैं चिंतित हूं.” उपसभापति के खिलाफ विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को सभापति वेंकैया नायडू ने खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि यह उचित प्रारूप में नहीं है.

मोर के ये खास उपाय आपको बना देंगे धनवान, बस करें ये छोटा सा का 

शांति बनाए रखने और कीड़ों को दूर रखने के लिए यह भगवान कृष्ण का पसंदीदा मोर घर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ मॉर्फिन ट्रीटमेंट भी आपको अमीर बना सकते हैं। तो, हमें बताएं कि वे उपचार क्या हैं।

1. अगर आप घर में सुख-समृद्धि लाना चाहते हैं, तो घर के दक्षिण-पूर्व में मोरपंख के गड्ढे रखें। इससे घर का माहौल बेहतर होगा।

यदि: यदि आपके पास पैसा नहीं है, तो पूजा स्थान पर एक मोर रखें। इससे घर में बर्बादी होगी और परिवार के सदस्यों के बीच रिश्ते बढ़ेंगे।

अगर। यदि आप प्रगति नहीं कर रहे हैं और परेशानी हो रही है, तो घर के सामने वाले दरवाजे पर गणेश प्रतिमा रखें। साथ ही दो मोर रखें। ऐसा करने से अपराधबोध खत्म हो जाएगा।

वी-वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु दोष है, तो उसे ताबीज में बंद मोरपंख को धारण करना चाहिए और उसे अपने दाहिने हाथ में पहनना चाहिए। इससे दोष दूर होता है। साथ ही काम में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

5. कई विचारों के कारण प्रगति नहीं की जा सकती है। इससे बचने के लिए घर पर एक पोछा रखें। इससे आंखों का संपर्क दूर होगा।

अगर। यदि आपका बच्चा शिक्षा प्राप्त करना पसंद नहीं करता है, तो उसकी पुस्तक में एक मोर रखें। ऐसा करने से बच्चे की याददाश्त तेज होगी।

7. जो लोग व्यापार में पैसा खो रहे हैं उन्हें मोर को दुकान के पूर्व दिशा में रखना चाहिए। इसके अलावा, पानी को चांदी या स्टील के फूलदान में रखना चाहिए। इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होंगी।

अगर। अगर पति-पत्नी के बीच तनाव रहता है, तो उनके बीच कोई बातचीत नहीं होती है, मोर के पंखों को अपने बेडरूम के पूर्व या दक्षिण-पूर्व की ओर रखें। ऐसा करने से उनके रिश्ते में सुधार होगा।

9. अगर आप घर में खुशहाली लाना चाहते हैं तो भगवान कृष्ण का मोर मुकुट पहनें। अब रोसेन उन्हें धूप और दीप दिखाते हैं। इससे घर में समृद्धि बढ़ेगी।

10. यदि घर में क्लेश की स्थिति है, तो अपने पूजा स्थान पर मोर पंख को धार्मिक पाठ के बीच में रखें। इससे देवी-देवता प्रसन्न होंगे।

लौंग के जोड़े खोल सकते हैं आपकी किस्मत के बंद दरवाजे

धन प्राप्ति व अन्य समस्याओं के लिए कई उपाय बताए जाते हैं लेकिन ज्योतिषियों के अनुसार केवल लौंग के जोडों के खास टोटके किए जाएं तो आपकी किस्मत के बंद दरवाजे भी खुल सकते हैं-

किसी भी जरूरी काम की शुरूआत में एक नींबू लें उसमें 4 लौंग गाड़ दें और ॐ श्री हनुमते नम: मंत्र का 21 बार जाप करके उस नींबू को घुमाकर पश्चिम दिशा की तरफ श्रीराम का नाम लेते हुए फेंक दें।

मन में या घर में अगर ज्याआदा झगडे होते हों या नकारात्मकता ज्याीदा हावी रहती हो तो जातक सुबह के देसी कपूर के साथ एक जोड़ी लौंग नियमित जलाए तो लाभ मिलता है।

किसी भी काम को सौ फीसद सफल बनाने के लिए घर में दाई ओर मुडी हुई सूंड के गणेशजी का चित्र लगाएं, इसके आगे लौंग तथा सुपारी रखें और इसकी पूजा करें। काम पर जाते समय उसमें से एक लौंग को अपने साथ ले जाएं। आपका काम कभी रुक नहीं पाएगा।

आकस्मिक धन लाभ और रुका हुआ पैसा पाने के लिए कच्ची घानी के तेल में दो लौंग डालकर हनुमानजी की पूजा करें आपको ना केवल जबरदस्त धनलाभ होगा बल्कि आत्मरविश्वास में भी बढोतरी होगी।

इसके अलावा हम आपको कुछ ऐसे भी उपाय बता रहे हैं, जिनको करने से हनुमानजी की आप पर तुरंत मेहरबानी होने लगेगी।

हनुमानजी के मंदिर जाकर एक सरसों के तेल का और एक शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके बाद वहीं बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। इसके ठीक बाद मंगलवार के दिन काले वानरों को गुढ चना खिलाएं।

सुबह स्नान के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दिया जलाएं और पूर्व दिशा की ओर मुहं करके तुलसी की माला से राम का 1008 बार जाप करें, सात सप्‍ताह में आपकी मनोच्‍छा पूरी हो जाएगी।

अगर आप शनि दोष से पीडि़त हैं तो मंगलवार को काली उड़द व कोयले की एक पोटली बनाएं। इसमें एक रुपए का सिक्का रखें और पोटली को खुद पर उसार कर किसी नदी में प्रवाहित कर दें। इससे शनि दोष का प्रभाव कम हो जाएगा।

कफील खान और योगी की लड़ाई पहुंची संयुक्त राष्ट्र 

लखनऊ, गोरखपुर के डॉ. कफील खान ने योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया है।

खान को हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत लगे आरोपों के बाद जेल से रिहा किया गया है और अब वो जयपुर में रह रहे हैं। खान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (यूएनएसआरसी) को एक पत्र लिखकर भारत में अंतर्राष्ट्रीय मानव सुरक्षा मानकों के व्यापक उल्लंघन और असहमति की आवाज को दबाने के लिए एनएसए और यूएपीए जैसे सख्त कानूनों के दुरुपयोग किए जाने की बात कही है।

अपने पत्र में खान ने संयुक्त राष्ट्र के इस निकाय को शांतिपूर्ण तरीके से सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किए जाने के बाद उनके मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए भारत सरकार से आग्रह करने के मसले पर धन्यवाद दिया और यह भी कहा कि सरकार ने उनकी अपील नहीं सुनी।

खान ने लिखा, मानव अधिकार के रक्षकों के खिलाफ पुलिस शक्तियों का उपयोग करते हुए आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के तहत आरोप लगाए जा रहे हैं। इससे भारत का गरीब और हाशिए पर रहने वाला समुदाय प्रभावित होगा।

बता दें कि 26 जून को संयुक्त राष्ट्र के निकाय ने कफील खान और शर्जील इमाम समेत अन्य लोगों पर लगाए गए 11 मामलों का उल्लेख करते हुए भारत सरकार को लिखा था, मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर आरोप, जिनमें से कई गिरफ्तारी के दौरान यातना और दुर्व्यवहार करने के हैं।

जेल में बिताए दिनों के बारे में खान ने लिखा, मुझे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और कई दिनों तक भोजन-पानी से भी वंचित रखा गया और क्षमता से अधिक कैदियों वाली मथुरा जेल में 7 महीने की कैद के दौरान मुझसे अमानवीय व्यवहार किया गया। सौभाग्य से, हाई कोर्ट ने मुझ पर लगाए गए एनएसए और 3 एक्सटेंशन को खारिज कर दिया।

इसके अलावा खान ने अपने पत्र में 10 अगस्त, 2017 को गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के कारण कई बच्चों की जान जाने के मामले का भी उल्लेख किया।

उच्च न्यायालय ने 25 अप्रैल, 2018 के अपने आदेश में कहा था कि उसके खिलाफ चिकित्सा लापरवाही का कोई सबूत नहीं मिला और वह ऑक्सीजन की टेंडर प्रक्रिया में भी शामिल नहीं था।

हालांकि खान अपनी नौकरी से अब भी निलंबित हैं।

हरड़ में है गजब के स्वास्थवर्धक गुण….

हरड़ (Haritaki) बहुत ही प्रसिद्ध कायाकल्प जड़ी-बूटी (Herb) है. इस पेड़ के फल, जड़ें और छाल का इस्तेमाल हर्बल दवाओं को तैयार करने में किया जाता है.

आयुर्वेद में हरड़ का उपयोग यौन समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है.

आयुर्वेद में ऐसी जड़ी-बूटियां (Herbs) हैं जो कि कई तरह की बीमारियों के इलाज में कारगर सिद्ध हुई हैं. ऐसी ही एक जड़ी-बूटी हरड़ है, जिसे हरीतकी (Haritaki) के नाम से भी जाना जाता है. यह त्रिफला के तीन फलों में से एक है. नियमित रूप से हरड़ का सेवन पाचन तंत्र (Digestion) से लेकर बवासीर (Piles) तक की दिक्कतों से छुटकारा दिला सकता है.डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला का कहना है कि यह बहुत ही प्रसिद्ध कायाकल्प जड़ी-बूटी है. इस पेड़ के फल, जड़ें और छाल का इस्तेमाल हर्बल दवाओं को तैयार करने में किया जाता है. हरड़ में नमक को छोड़कर पांचों रस यानी मीठा, तीखा, कड़वा, कसैला और खट्टा पाए जाते हैं. मिनरल, विटामिन, प्रोटीन, एंटीबैक्टीरियल, एंटीबायोटिक गुण इस औषधि में होते हैं. इसका बीजरहित फल खाया भी जा सकता है. जानिए हरड़ के अन्य फायदे-

त्वचा और बालों की समस्याओं के लिए

त्वचा और बालों की समस्याओं से हरड़ का पाउडर निजात दिला सकता है. मुंहासे दूर करने के लिए गर्म पानी में हरड़ का पाउडर मिलाएं और इसके पेस्ट को ठंडा कर सीधे प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं. बालों के झड़ने की शिकायत हो या रूसी की परेशानी, आंवले के तेल में हरड़ के पाउडर को मिलाकर बालों पर लगाएं.

पाचन तंत्र में सुधार

भोजन से पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाने और आंतों को स्वस्थ रखने में हरड़ का नियमित रूप से सेवन फायदेमंद साबित होता है. एक गर्म पानी में 2-3 ग्राम हरड़ डालकर पीने से पाचन में मदद मिलती है.

बवासीर को कम करने में

एम्स के डॉ. नबी वली का कहना है कि बवासीर यानी पाइल्स में गुदा और मलाशय में मौजूद नसों में सूजन और तनाव आ जाता है. हरड़ में मल को पतला करने वाला गुण पाया जाता है, जिसके कारण पेट से जुड़ी समस्याएं दूर होकर बवासीर की समस्या में राहत दिलाने का काम कर सकता है. पानी की आधी बाल्टी में 2 चम्मच हरड़ डालकर नहाएं. इससे सूजन कम होगी और घाव भी भरेंगे.

खांसी के लिए फायदेमंद

हरड़ का इस्तेमाल खांसी, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं के लिए किया जाता है. आधे चम्मच शहद के साथ हरड़ के पाउडर को मिलाकर चाटें.

यौन शक्ति बढ़ाने के लिए

आयुर्वेद में हरड़ का उपयोग यौन समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है. यौन शक्ति बढ़ाने के लिए रोजाना 1-2 ग्राम एक महीने तक खाएं. यह शीघ्रपतन के इलाज में फायदेमंद है. हरड़ के इस्तेमाल को लेकर इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि ज्यादा समय तक इस्तेमाल करने पर इसके गर्म और कसैले गुण के कारण यौन शक्ति की कमी भी हो सकती है.

उल्टी और मतली में राहत

उल्टी की समस्या होने पर हरड़ का इस्तेमाल तुरंत राहत दिलाता है. अगर मतली हो तो भी हरड़ का सेवन कर सकते हैं. शहद के साथ हरड़ पाउडर लेने पर यह समस्या दूर होती है.

मुंह और पेट का अल्सर

हरड़ में कोशिकाओं को नुकसान से बचाने वाले, बैक्टीरिया के प्रभाव को नष्ट करने वाले और अल्सर को दूर करने वाले गुण मौजूद होते हैं. हरड़ का इस्तेमाल मुंह और पेट के अल्सर से बचाने में मदद करता है. हरड़ को सूखे मेवों के साथ मिलाएं और पानी में इसे डालकर उबाल लें. इस पानी को माउथवॉश की तरह इस्तेमाल करें. यह मसूड़ों के रोग और दांत की समस्याओं को रोकने में प्रभावशाली है.

एसबीआई ग्राहक घर बैठे अपडेट करें बैंक खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर, यह है आसान तरीका

अगर आप एसबीआई (SBI )के अकाउंट होल्डर हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. दरअसल हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक ने एटीएम (SBI ATM) से पैसे निकालने के नियमों में बदलाव किया है. नये नियम के तहत अगर आप अपने अकांउट से एटीएम कार्ड के माध्यम से 10 हजार या उससे अधिक की निकासी करते हैं तो आपके फोन मे एक वन टाइम पासवर्ड आयेगा (one time password) . ओटीपी (OTP) भरने के बाद ही आप पैसे की निकासी (Withdraw Money) कर पायेंगे. इसका मतलब साफ है कि अगर आपका मोबाइल नंबर बैंक में नहीं है तो आपको पैसे निकालने में परेशानी हो सकती है.

ऐसे में आपको यह जानना बेहद जरूरी है कि अपना मोबाइल नंबर बैंक में कैसे अपडेट करते हैं. क्योंकि कई ऐसे भी ग्राहक होते हैं जो अपना नंबर बदल देते हैं. ऐसे में अगर बैंक में आपका मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है तो आप पैसे नहीं निकाल पायेंगे. बैंक में मोबाइल नंबर अपडेट करने के तीन तरीके हैं. आप बैंक की शाखा में जाकर अपना मोबाइल नंबर अपडेट करा सकते हैं. आप एटीएम में जाकर खुद से अपना मोबाइल नंबर अपडेट कर सकते हैं. तीसरा तरीका आपके लिए आसान है क्योंकि इसके लिए आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है. वैसे भी कोरोना के दौर में लोग घर से बाहर निकलने में परहेज करते हैं.

एटीएम में जाकर इस तरह रजिस्टर्ड करें अपना नंबर

एटीएम में जाकर नंबर अपडेट करने के लिए आपको एटीएम मं जाना होगा. वहां एटीएम डालने के बाद रजिस्ट्रेशन के ऑप्शन को क्लिक करें. फिर अपना पासवर्ड डालें. इसके बाद मोबाइल नंबर रजिस्ट्रेशन के लिंक पर क्लिक करें. इस क्लिक करने के बाद मोबाइल नंबर बदलने का ऑपशन आयेगा. यहां आपको अपना पुराना नंबर डालना होगा. इसके बाद नया मोबाइल नंबर डालने का ऑपश्न आयोगा. इसके बाद आपको दोनों नंबर पर ओटीपी भेजा जायेगा. इसके बाद आपको एसएमएस के जरिये मिले ओटीपी को रिफरेंस नंबर के साथ इस नये फॉर्मेट के साथ मैसेज भी कर सकते हैं. अपना नया मोबाइल नंबर ACTIVATE IOTP VALUE + REF. इस फॉर्मेट में मोबाइल में टाइप करने के बाद 567676 में मैसेज भेज दें. चार घंटों में आपका नया नंबर एक्टिवेट हो जायेगा.

घर बैठे मोबाइल नंबर अपडेट करने का तरीका

सबसे पहले स्टेट बैंक की वेबसाइट www.onlinesbi.com पर जाएं और लाग इन करें. इसके बाद Profile-Personal Details-Change mobile No. पर जाएं. फिर माई अकाउंट पर क्लिक करें. एक नया पेज खुलेगा. उसमें अकाउंट नंबर और मोबाइल नंबर भरकर सब्मिट करे. आपका मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड हो जायेगा. इसके बाद आपक नये रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के अंतिम के दो अंक दिखेंगे.

ब्रांच में जाकर नंबर अपडेट करने का तरीका

इसके लिए बैंक में जाकर आपको फोन नंबर करने से संबंधित एक आवेदन बैंक में जमा करना होगा. इसके बाद बैंक द्वारा वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करने के बाद आपका नया फोन नंबर आपके बैंक अकाउंट से लिंक कर दिया जायेगा. इसके बाद जैसे की आपका आपका नंबर आपके बैंक अकाउंट से जुड़ जायेगा इससे संबंधित एक मैसेज आपके फोन में आयेगा जिसके बाद आप इस सेवा का इस्तेमाल कर सकते हैं.