सरकार को लेकर गहलोत की बढ़ी टेंशन, बोले- मायावती को तो CBI का डर है

,जयपुर। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार, कांग्रेस के भीतर की अदावत के बाद अब बाहर से आए विधायकों से भी मुसीबत में पड़ गई है। पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की सरकार गिराने की कथित साजिश और अब बसपा विधायकों के विलय पर बसपा सुप्रीमो मायावती के कानूनी दांव-पेंचों ने सीएम गहलोत की टेंशन बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री ने सरकार पर आए सियासी संकट के बीच माया की एंट्री पर कहा है, “मेरा मानना है कि मायावती जो बयानबाजी कर रही हैं, वह बीजेपी के इशारे पर कर रही हैं। बीजेपी जिस प्रकार से सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग का दुरुपयोग कर रही है … डरा रही है, धमका रही है सबको ही.. आप देखो राजस्थान में क्या हो रहा है।” मुख्यमंत्री ने कहा, “मायावती भी डर रही हैं उससे, मजबूरी में वो बयान दे रही हैं।”

उन्होंने कहा, यही कारण है कि एक दिन पहले मायावती पर भड़ास निकालते हुए सीएम गहलोत ने यहां तक कह दिया कि बसपा प्रमुख मायावती बीजेपी के इशारे पर बयानबाजी कर रही हैं। गहलोत बोले, “.. दो तिहाई बहुमत से कोई पार्टी टूट सकती है, अलग पार्टी बन सकती है… विलय कर सकती है दूसरी पार्टी में। यहां बसपा छह के छह विधायक मिल गए हैं तो मायावती की जो शिकायत है, वह वाजिब नहीं है क्योंकि मायावती के दो विधायक अगर अलग होते तो शिकायत हो सकती थी।”

पहले बसपा से मजबूत हुए गहलोत, अब संकट में आए?
बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय से अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार को पिछले साल मजबूती मिली थी। तब उनके पास 101 विधायक थे और 6 और मिलने से 107 हो गए। लेकिन 200 सदस्यीय सदन में सत्तारूढ़ दल के पास फिलहाल संख्या बल कम है। सचिन पायलट गुट की बगावत के बाद विधानसभा में बहुमत का गणित बदल गया है। ऐसे में अगर बसपा के विधायकों का साथ छूटता है तो गहलोत सरकार संकट में आ सकती है।

ये है नया गणित जो बना या बिगाड़ सकता है सरकार

यदि बसपा और बीजेपी विधायक की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से फैसला विलय के खिलाफ आता है तो सरकार खतरे में आ सकती है। इसे यूं समझा जा सकता है, कुल 200 विधायकों वाली विधानसभा में से 6 विधायकों के हटाए जाने पर कुल 194 सदस्य बचेंगे। ऐसे में बहुमत के लिए 98 विधायक जरूरी होंगे। जबकि गहलोत सरकार के 102 विधायकों का दावा सही मानें तो वह घटकर 96 ही रह जाएगा। इनमें 82 कांग्रेस विधायक, 10 निर्दलीय विधायक, 2 बीटीपी और एक-एक माकपा और आरएलडी से विधायक शामिल हैं। जबकि विपक्षी दल यानी बीजेपी के पास वर्तमान में 75 विधायक हैं और पायलट गुट के 22 विधायक शामिल करने पर बहुमत साबित करने लायक संख्या बल जुट सकता है। ऐसी स्थित में माकपा तटस्थ रहे तो प्रदेश सरकार का तख्ता पलट हो सकता है।

बीजेपी ने ऐसे फंसाया कानूनी पेंच
बीजेपी विधायक मदन दिलावर ने अपनी याचिका में विधानसभाध्यक्ष के 24 जुलाई के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने बसपा विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के खिलाफ उनकी शिकायत खारिज कर दी थी। इससे पहले भी उन्होंने हाईकोर्ट में इस मामले में अर्जी दायर की थी, जिसे निस्तारित कर दिया गया था। दरअसल, विधायक ने अपनी पहली याचिका में विधानसभा अध्यक्ष की ओर से उनकी बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं करने की बात कही थी। इस पर कोर्ट ने जवाब तलब किया तो सामने आया कि विधायक की शिकायत पहले ही निस्तारित की जा चुकी है। ऐसे में कोर्ट में दायर याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया गया।

कांग्रेस में विलय पर बसपा विधायकों को नोटिस
बसपा के सभी छह विधायकों को कांग्रेस में विलय मामले में गुरुवार को राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किये थे। बसपा और बीजेपी विधायक मदन दिलावर की ओर से दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने विधायकों के साथ विधानसभा अध्यक्ष और विधानसभा के सचिव को भी नोटिस दिए हैं। इन सभी को कोर्ट ने नोटिस का जवाब 11 अगस्त तक दाखिल करने हैं।

नजरें 11 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर टिकी
न्यायमूर्ति महेंद्र कुमार गोयल की पीठ ने गुरुवार को नोटिस जारी किरते हुए 11 अगस्त तक जवाब तलब किया है। बसपा और बीजेपी विधायक दिलावर की याचिकाओं पर अलग-अलग जारी नोटिस के बाद अगली सुनवायी अब 11 अगस्त को होगी। अब कांग्रेस, बीजेपी और बसपा दलों के साथ प्रदेश की जनता की नजरें कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

इन 6 विधायकों ने बदली पार्टी
राजस्थान विधान सभा चुनाव- 2018 में बसपा के टिकट पर 6 विधायक जीत सदन पहुंचे थे। इनमें संदीप यादव, वाजिब अली, दीपचंद खेरिया, लखन मीणा, जोगेन्द्र अवाना और राजेन्द्र गुढ़ा शामिल हैं। इन्होंने चुनाव तो बसपा के टिकट पर जीता था लेकिन 9 महीने बाद ही सितम्बर 2019 में बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

अमर सिंह का सिंगापुर के अस्पताल में निधन, PM मोदी ने जताया शोक

राज्यसभा सांसद अमर सिंह का निधन


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सिंगापुर के एक अस्पताल में चल रहा था इलाज

राज्यसभा सांसद और पूर्व समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह का 64 वर्ष की उम्र में आज निधन हो गया. वो पिछले काफी दिनों से बीमार चल रहे थे. उनका सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था. कुछ दिनों पहले ही उनका किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था. शनिवार दोपहर उनका निधन हो गया.

अमर सिंह, समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव रहे हैं साथ ही राज्यसभा सांसद भी रहे हैं. सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के वो काफी करीब रहे. अमर सिंह एक समय समाजवादी पार्टी की नंबर दो पोजिशन के नेता भी रहे थे. हालांकि साल 2010 में पार्टी के सभी पोस्ट से इस्तीफा दे दिया था. बाद में उन्हें पार्टी से भी बर्खास्त कर दिया गया.

अमर सिंह वर्तमान में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सांसद थे. समाजवादी पार्टी से अलग होने के बाद उनकी सक्रियता कम हो गई थी. हालांकि, बीमार होने से पहले तक उनकी करीबियां भारतीय जनता पार्टी से बढ़ रही थीं.

अमर सिंह ने हाल ही में अमिताभ को लेकर एक ट्वीट किया था. जिसमें उन्होंने अभिताभ से माफी मांगी थी. अमर सिंह, राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक अपनी दोस्ती और बिगड़ते रिश्तों दोनों के लिए चर्चा में रहे. अमिताभ बच्चन से लेकर समाजवादी पार्टी से रिश्तों को लेकर काफी वक्त तक दोस्ती और खटास के बयानों को लंबा दौर चला. लेकिन अमर सिंह ने हर बात पर खुलकर चर्चा की और कई बार शायराना अंदाज में अपना जवाब दिया.

राजनीति का ये चेहरा अब दुनिया को अलविदा कह गया लेकिन अपने पीछे वो अमर निशां छोड़ गया जिसे भारतीय राजनीति हमेशा याद करेगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमर सिंह के निधन पर दुख जताते हुए ट्वीट किया कि वह काफी ऊर्जावान नेता थे और उन्होंने पिछले कुछ दशकों में देश की राजनीति के अहम उतार-चढ़ाव काफी करीब से देखे थे.वो अपने जीवन में दोस्ती के लिए जाने जाते रहे हैं. उनके निधन की खबर सुनने से दुखी हूं. उनके परिवारजनों और दोस्तों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं.

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने पूर्व राज्यसभा सांसद के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके असामयिक निधन पर शोक व्यक्त करता हूं. दुख की इस घड़ी में उनके परिजनों और सहयोगियों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं. ओम शांति.

वहीं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, ‘अपनी विशिष्ट कार्यशैली से भारतीय राजनीति पर अमिट प्रभाव डालने वाले मृदुभाषी राजनेता, सांसद श्री अमर सिंह जी का निधन दुःखद है. उनके परिजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं. प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें. ऊं शांति.’

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने निधन पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, ‘श्री अमर सिंह जी के स्नेह-सान्निध्य से वंचित होने पर भावपूर्ण संवेदना एवं श्रद्धांजलि.’

वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने शोक व्यक्त करते हुए लिखा, ‘ईश्वर श्री अमर सिंह जी की आत्मा को अपने श्रीचरणों में शरण दें. श्री अमर सिंह जी के परिवार के प्रति मेरी भावपूर्ण संवेदनाएं. मैं इस दुखद क्षण में उनकी शोक संतप्त पत्नी और बेटियों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करती हूं.’

अमर सिंह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते थे. आज ही उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी थी. साथ ही लोगों को ईद अल अजहा की बधाई भी दी थी.

अमर सिंह का मार्च महीने में एक वीडियो खूब चर्चा में रहा था. जिसमें उन्होंने अपनी मौत की अफवाहों पर विराम लगाते हुए कहा था कि टाइगर अभी जिंदा है और बीमारी से जूझ रहा है. उन्होंने अपने पहले के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि तबीयत पहले भी बिगड़ी थी लेकिन हर बार वो मौत के मुंह से लड़कर वापस आ गए.

वीडियो में अमर सिंह कहते हैं, ‘सिंगापुर से मैं अमर सिंह बोल रहा हूं. रुग्ण (बीमार) हूं, त्रस्त हूं व्याधि (दिक्कतों) से लेकिन संत्रस्त (डरा) नहीं. हिम्मत बाकी है, जोश बाकी है, होश भी बाकी है. हमारे शुभचिंतक और मित्रों ने ये अफवाह बहुत तेजी से फैलाई है कि यमराज ने मुझे अपने पास बुला लिया है. ऐसा बिल्कुल नहीं है. मेरा इलाज चल रहा है और मां भगवती की कृपा हुई तो अपनी शल्य चिकित्सा के उपरांत शीघ्र-अतिशीघ्र दोगुनी ताकत से वापस आऊंगा.’

उन्होंने आगे कहा, ‘आप लोगों के बीच सदैव की भांति…जैसा भी हूं, जो भी हूं आपका हूं. बुरा हूं तो अच्छा हूं तो…अपनी चिरपरिचित शैली, प्रथा और परंपरा के अनुकूल जैसे अबतक जीवन जिया है, वैसे ही आगे भी जिऊंगा.’

राम मंदिर: भूमि पूजन में शामिल होने के लिए मोहन भागवत, उमा भारती को निमंत्रण

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य के लिए भूमि पूजन की तैयारी शुरू हो गई है. 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भूमि पूजन में शामिल होने अयोध्या जाएंगे. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी के अलावा, अवधेशानंद सरस्वती, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, रामभद्राचार्य, इकबाल अंसारी, मोहन भागवत, कल्याण सिंह, विनय कटियार को भी भूमि पूजन में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा गया है.

अब अगर बात करें कि कौन नहीं आने वाला है तो भूमि पूजन कार्यक्रम में कोई केंद्रीय मंत्री शामिल नहीं होगा. राजनाथ सिंह और अमित शाह के आने के आशंका जताई जा रही थी, लेकिन अब ये दोनों भी नहीं आएंगे. उम्र स्वास्थ्य और कोरोना को देखते हुए लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के भी अयोध्या आने की संभावनाएं नहीं है
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किसी मुख्यमंत्री को इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है. वहीं, किसी उद्योगपति को भी भूमि पूजन का निमंत्रण नहीं भेजा गया है. सभी धर्मों के प्रतिनिधि भूमिपूजन में उपस्थित होंगे. श्री श्री रविशंकर सरीखे बड़े घर्म गुरुओं को भी अभी तक न्योता नहीं दिया गया है. अभी तक बनी सूची में 208 लोगों को नाम हैं और इसमें बदलाव भी हो रहा है.

पीएम मोदी कराएंगे मंदिर निर्माण शुरू- उमा भारती

इससे पहले, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने पीएम मोदी का बचाव करते हुए कहा था कि सोमनाथ मंदिर का निर्माण कार्य राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने शुरू कराया था. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी तर्ज पर मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कराएंगे.

फायर ब्रांड नेत्री ने कहा था कि अयोध्या अब विवाद का विषय नहीं रहा. वहां आस्था का टकराव नहीं था. मुसलमानों की आस्था खुदा पर है, मक्का मदीना पर है, इस्लाम पर है, लेकिन बाबर या बाबर की बनवाई हुई किसी यादगार पर नहीं. उन्होंने कहा था कि हिंदू हों या मुसलमान, सबकी नजर में बाबर एक विदेशी हमलावर था. कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उमा भारती ने कहा था कि अयोध्या मुद्दे को नेहरू ने राजनीतिक मंशा से साल 1949 में विवादित बना दिया.

रिया चक्रवर्ती के खिलाफ जारी हो सकता है लुकआउट नोटिस, पुलिस को मिले अहम सुराग

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड मामले में उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती फंसती नजर आ रही हैं. खबरों के मुताबिक बिहार पुलिस इस मामले में रिया के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने पर विचार कर रही है. बिहार पुलिस को रिया चक्रवर्ती के खिलाफ कुछ बड़े सबूत हाथ लगे हैं. ऐसे में उन से पूछताछ करना जरूरी हो गया है. वहीं खबर ऐसी भी सामने आ रही है कि पुलिस रिया चक्रवर्ती से संपर्क नहीं साध पा रही है. फोन पर भी एक्ट्रेस से बात नहीं हो पा रही है. पुलिस के मुताबिक रिया लापता हो गई हैं.

रिया के खिलाफ लुकआउट नोटिस

पिछले कुछ दिनों से बिहार पुलिस ने सुशांत मामले में काफी तेजी दिखाई है. कई लोगों के बयान दर्ज कर केस को सही दिशा में आगे बढ़ाने और जांच को अंजाम तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है. मालूम हो कि मंगलवार को सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने रिया चक्रवर्ती के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी. बताया गया था कि रिया लंबे समय से सुशांत को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थीं. उन पर सुशांत को परिवार से दूर रखने के आरोप लगाए गए थे. रिया पर सुशांत को ब्लैकमेल करने की बात भी सामने आई है. इन्हीं पहलुओं पर जांच करते हुए अब रिया के खिलाफ बिहार पुलिस को कुछ सबूत हाथ लगे हैं.

लेकिन इस लुकआउट नोटिस को लेकर रिया के वकील सतीश ने अलग ही बयान दिया है. उनके मुताबिक रिया को या फिर उन्हें कोई लुकआउट नोटिस नहीं भेजा गया है.वकील के मुताबिक रिया के घर भी कोई नहीं आया है.

ED ने भी शुरू की जांच-पड़ताल

इस मामले में ED ने भी अपनी तरफ से जांच शुरू कर दी है. मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर रिया और उनके परिवार के खिलाफ जांच-पड़ताल की जा रही है. वहीं इंडिया टुडे ने भी सुशांत के बैंक अकाउंट्स की डिटेल हासिल की है जिन्हें देख ये साफ समझा जा सकता है कि रिया चक्रवर्ती के मेकअप और शॉपिंग पर काफी पैसे खर्च किए गए थे. एक्ट्रेस के भाई के लिए भी खर्चे किए गए हैं.

ऐसे में अब कब रिया चक्रवर्ती का बयान बिहार पुलिस दर्ज करती है,ये देखने वाली बात होगी. वहीं रिया चक्रवर्ती की बात करें तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल इस केस को मुंबई शिफ्ट करने की मांग की है. दलील दी गई है कि एक ही मामले में दो अलग-अलग जगह जांच नहीं चल सकती

भारत से बिगड़े रिश्ते का चालाकी से फायदा उठा रहा चीन, बोला- हम नेपाल को अपने बराबर मानते हैं

भारत और नेपाल के बीच आपसी रिश्तों में खटास का फायदा चीन लगातार उठा रहा है। एक बार फिर से चीन ने नेपाल को अपने शब्दों के बाण से फांसने और उसे भारत से दूर करने की कोशिश की है। शनिवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अगुवाई में चीन के शीर्ष नेतृत्व ने चीन-नेपाल मित्रता के निरंतर विकास की सराहना करते हुए कहा कि बीजिंग ने हमेशा काठमांडू को अपने बराबर माना है। चीन की यह प्रतिक्रिया इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत के साथ बीते कुछ समय से नेपाल के रिश्ते अच्छे नहीं हैं, वहीं चीन के साथ उसके संबंध लगातार बेहतर हो रहे हैं। 

चीन और नेपाल के बीच द्विपक्षीय संबंधों की स्थापना की 65 वीं वर्षगांठ पर नेपाली समकक्ष बिद्या देवी भंडारी के साथ बधाई संदेशों का आदान-प्रदान करते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि चीन नेपाल के साथ द्विपक्षीय संबंधों की निरंतर प्रगति के लिए आगे बढ़चढ़ कर काम करेगा। शनिवार सुबह आधिकारिक मीडिया में प्रकाशित एक बयान के अनुसार, शी ने कहा कि दोनों देशों ने हमेशा एक-दूसरे का सम्मान किया, एक-दूसरे के साथ समान व्यवहार किया, राजनीतिक आपसी विश्वास बढ़ाया और पारस्परिक रूप से लाभप्रद सहयोग को गहरा किया।

शी जिनपिंग ने आगे कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में दोनों देश कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए हैं और दोनों पक्षों ने चीन-नेपाल के बीच दोस्ती का नया अध्याय लिखा है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए नेपाली समकक्ष विद्या देवी भंडारी ने बीजिंग और शी जिनपिंग की तारीफ की। उन्होंने कहा कि नेपाल मानव जाति के लिए साझा भविष्य के साथ एक समुदाय के निर्माण के चीन द्वारा प्रस्तावित दृष्टिकोण का स्वागत करता है और बेल्ट एंड रोड के सह-निर्माण पर सहयोग में सक्रिय रूप से शामिल है। 

इसके अलावा, अलग से चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग ने अपने समकक्ष प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के साथ चीन और नेपाल के बीच आपसी विश्वास और दोस्तीको बढ़ाने के बारे में बात की। ली ने कहा कि चीन विभिन्न क्षेत्रों में उच्च स्तरीय निर्माण और बेल्ट एंड रोड पहल में चौतरफा सहयोग को मजबूत करने के लिए नेपाल के साथ काम करने के लिए तैयार है और यह द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तरों तक ले जा सकता है। वहीं ओली ने अपने बधाई संदेश में कहा कि राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से  द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर विकास देखा गया है।

,दरअसल, जून में नेपाल ने अपने देश का एक संशोधित मैप जारी किया था, जिसके बाद से भारत के साथ उसके रिश्ते थोड़े खराब हुए हैं। नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी किया, जिसमें उसने कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधूरा को अपने क्षेत्र में दिखाया है। जबकि भारत ने नवंबर 2019 में जारी नक्शे में ट्राई जंक्शन को रखा था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड में चीन के साथ लगी सीमा के पास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर सड़क को खोला था, जो लिपुलेख पास के पास खत्म होता है। नेपाल ने सड़क को खोले जाने पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, भारत ने इसे इसलिए बनाया ताकि कैलाश मानसरोवर की यात्रा आसान हो जाए।

इधर नई दिल्ली का मानना है कि चीन के इशारे पर ही काठमांडू इस पुराने विवाद पर सिनाजोरी कर रहा है। भारतीय सेना प्रमुख एमएम नरवने ने भी इस इशारा किया था कि नेपाल भारत की नई सड़क का विरोध इसलिए कर रहा है, क्योंकि उसे कोई उकसा रहा है। 

वहीं, नेपील प्रधानमंत्री के पी ओली ने जून में आरोप लगाया था कि भारत उसे सत्ता से बेदखल करने के लिए ऐसी साजिश रच रहा है। इतना ही नहीं, केपी ओली ने एक और चौंकाने वाला बयान दिया था कि वास्तविक अयोध्या भारत में नहीं, बल्कि नेपाल में है।

राहुल और सोनिया गुट में बंटी कांग्रेस, जानें 43 साल में कितनी बार टूटी सबसे पुरानी पार्टी

कांग्रेस में एक बार फिर युवा तुर्क और अनुभवी नेताओं के बीच तलवारें खिंच गई हैं। इसका ताजा उदाहरण राजस्थान में युवा बनाम वरिष्ठ के बीच जारी घमासान और कांग्रेस राज्यसभा सांसदों की बैठक में राहुल गांधी बनाम सोनिया गांधी गुट के बीच हुई तीखी बहस है। वरिष्ठ नेताओं ने शुक्रवार को राहुल के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाते हुए सोनिया को पत्र भेजा है। इसमें स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति और केंद्रीय पदाधिकारियों के पारदर्शी चुनाव की मांग की गई है।
ऐसे में पार्टी के अंदर 1967 जैसी फूट की आशंका जताई जा रही है। यदि 43 साल की सियासत देखी जाए तो इस दौरान कांग्रेस, भाजपा और जनता दल जैसी बड़ी पार्टियों से टूटकर 87 पार्टियां बनी हैं लेकिन सिर्फ 25 ही अस्तित्व में हैं। 62 पार्टियों का कोई नामोनिशान तक नहीं बचा है।

कांग्रेस में 1967 जैसी फूट की आशंका

पार्टी नेताओं का मानना है कि कांग्रेस एक बार फिर 1967 जैसी परिस्थितियों का सामना कर रही है। तब कामराज के नेतृत्व में बुजुर्ग नेताओं ने इंदिरा गांधी को पार्टी से निकाल दिया था और इंदिरा ने अलग पार्टी बना ली थी। हालांकि वह ज्यादा सफल नहीं हो पाईं और 1971 के पाकिस्तान युद्ध में जीत के बाद इंदिरा कांग्रेस ने धमाकेदार जीत दर्ज की थी।

इन दिग्गजों ने भी छोड़ा था कांग्रेस का हाथ

एके एंटनी ने साल 1980 में कांग्रेस (ए) नाम से पार्टी बनाई थी। हालांकि 1982 में उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था। लेकिन इंदिरा गांधी के निधन तक उन्हें कांग्रेस में कोई भी पद नहीं दिया गया था।पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने 1996 में कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और तमिल मनीला कांग्रेस (टीएमसी) जो कांग्रेस से टूटकर बनी थी उसकी तमिलनाडु इकाई में शामिल हो गए थे। 1996 में टीएमसी ने अन्य क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। इस सरकार में उन्हें वित्त मंत्री का कार्यभार दिया गया था। इसके बाद साल 2004 में जब मनमोहन सिंह का सरकार सत्ता में आई उन्हें फिर से वित्त मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया।1996 में माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर मध्यप्रदेश विकास कांग्रेस नामक पार्टी बनाई थी। 1986 में प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस छोड़कर अपनी अलग पार्टी राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस की स्थापना की थी। उन्होंने 1989 में इस पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था।

कांग्रेस से टूटकर बनीं ये पार्टियां अब भी हैं सक्रिय

तृणमूल कांग्रेसराष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टीवाईएसआर कांग्रेसपीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टीछत्तीसगढ़ जनता कांग्रेसएआईएनआर कांग्रेसनागा पीपल्स फ्रंटविदर्भ जनता कांग्रेसतमिल मनीला कांग्रेस

जनता दल से टूटकर बनी जेडीयू भी छह बार टूटी

कलह और बिखराव की वजह से जनता दल 20 साल में छह बार टूटी। इससे टूटकर जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल, राष्ट्रीय जनता दल, बीजू जनता दल, इंडियन नेशनल लोकदल, जनता दल सेक्युलर, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, एसजेडी, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा, जेएपी, पीएसपी, जननायक जनता पार्टी, एलजेडी और समाजवादी जनता पार्टी बनीं।

भाजपा के बिना इन दिग्गजों को नहीं मिली सफलता

वहीं भाजपा से टूटकर बनीं 17 पार्टियां अपना अस्तित्व नहीं बचा सकीं। भाजपा छोड़ने के कुछ सालों बाद बाद उमा भारती, कल्याण सिंह, केशुभाई पटेल वापस लौट आए। कल्याण सिंह ने जनक्रांति पार्टी, उमा भारती ने जनशक्ति पार्टी, केशुभाई पटेल ने गुजरात परिवर्तन पार्टी, बाबूलाल मरांडी ने झारखंड विकास मोर्चा बनाई थी। हालांकि बिना कमल के साथ के इन्हें राजनीतिक मैदान में सफलता नहीं मिल पाई।

अलग पार्टी बनाने के बाद इन दिग्गजों को मिली सत्ता की कमान

नेतापार्टीराज्यपुरानी पार्टी का नाममुलायम सिंह यादवसमाजवादी पार्टीउत्तर प्रदेशजनता दललालू प्रसाद यादवराष्ट्रीय जनता दलबिहारजनता दलनीतीश कुमारजनता दल यूनाइटेडबिहारजनता दलनवीन पटनायकबीजू जनता दलओडिशाजनता दलमुफ्ती मोहम्मद सईदपीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टीजम्मू-कश्मीरकांग्रेसममता बनर्जीतृणमूल कांग्रेसपश्चिम बंगालकांग्रेसवाईएस जगनमोहन रेड्डीवाईएसआर कांग्रेसआंध्र प्रदेशकांग्रेसएन रंगास्वामीएनआर कांग्रेसपुड्डुचेरीकांग्रेसनेफ्यू रियोनागा पीपल्स फ्रंट

भारत को राफेल मिलने पर चीन के बाद भड़का पाकिस्तान, उगला जहर

फ्रांस से राफेल आने के बाद भारतीय वायुसेना की ताकत में जहां एक ओर कई गुना इजाफा हुआ है वहीं पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान इससे सहमा हुआ है. पहले चीन ने राफेल विमान को अपने जे 20 से कमतर बताया तो अब पाकिस्तान ने इसे परमाणु हथियारों की रेस करार दे दिया.

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता आइशा फारूकी ने भारत को राफेल फाइटर जेट मिलने पर प्रतिक्रिया दी. साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में फारूकी ने कहा कि भारतीय वायुसेना को हाल ही में जो राफेल विमान मिले हैं उससे जुड़ी हुई उन्होंने कई रिपोर्ट देखी हैं. उन्होंने कहा, भारत के पूर्व अधिकारियों और कई अंतरराष्ट्रीय मैगजीन के अनुसार राफेल विमान दोहरी क्षमता वाला है और इसका इस्तेमाल परमाणु हथियारों के लिए भी किया जा सकता है.

फारूकी ने कहा कि भारत लगातार अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को बढ़ा रहा है और उसे आधुनिक बना रहा है. पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा, भारत हिंद महासागर को परमाणु हथियारबंद बना रहा है और मिसाइल सिस्टम के जरिए लगातार हथियारों की तैनाती बढ़ा रहा है.

उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरी सुरक्षा आवश्यकता के अलावा एशिया में अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार बढ़ाने में जुटा हुआ है. फारुकी ने कहा पश्चिम अपनी संकीर्ण कारोबारी हितों के लिए भारत को इन हथियारों की पूर्ति और तकनीक देने में मदद कर रहा है.

बता दें कि भारतीय वायुसेना में पांच राफेल विमानों के शामिल होने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि भारतीय सेना के लिए ये नए युग का आरंभ है. चीन ने राफेल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि J-20 के सामने राफेल कहीं नहीं टिकेगा.

पहले दिन नहीं दिखा लॉक डाउन का असर ,सुबह होते ही जरूरत का सामान लेने बाज़ार पहुंचे लोग


ग्वालियर।ईद और राखी के त्योहार पर अगले तीन दिन लॉकडाउन रहेगा। इसी कारण शनिवार की सुबह बाजारों में जरूरत का सामान लेने भारी भीड़ रही। संक्रमण का खतरा होने के बाद भी अधिकतर बाजारों में सुबह से लोग उमड़ने लगे। अगले तीन दिन बाजारों की तरह सरकारी दफ्तर भी बंद रहेंगे जबकि विभिन्न बैंकों की 238 शाखाएं दो दिन। इस कारण सारा भार एटीएम पर रहेगा। राखी वाले दिन बैंक खुलेंगे पर इनमें लेनदेन कम ही होगा। 18 राखी बाजाराें में पार्किंग व्यवस्था के लिए उप निरीक्षक व अमला तैनात किया जाएगा। सभी निर्धारित ट्रैफिक पाइंट के अलावा शहर के तीनों ट्रैफिक डीएसपी को पुलिस लाइन से ट्रैफिक व्यवस्था के लिए अतिरिक्त बल दिया गया है।

ग्वालियर मेंअंडा, फल एवं सब्जी की बिक्री  3 अगस्त तक रोज सुबह 6 से 11 बजे तक हो सकेगी। दूध डेयरी कारोबारियों की मांग पर डेयरी व बेकरी भी पूरे समय खोलने की मंजूरी प्रशासन ने शुक्रवार रात दे दी है।मिठाई, जनरल स्टोर, कॉस्मेटिक, नमकीन, थोक-खेरिज किराना, मटन-चिकन शॉप, रुमाली रोटी व शीरमाल की बिक्री के अलावा पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, मेडिकल, अस्पताल, उद्योग, निर्माण, राशन दुकानें, होटल, बस-टेंपाे और टैक्सी सेवा पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।मुख्य बाजार, मॉल, कपड़े की दुकानों सहित अन्य सभी बाजार बंद रहेंगे। रेस्टोरेंट से ऑनलाइन सप्लाई रात 10 बजे तक हो सकेगी। 18 स्थानाें पर राखी बाजार पूरे समय खुल सकेंगे।

पुलिस ने पहले दिन नहीं दिखाई सख्ती,,,,

पहले दिन बाजारों में चहल पहल होने के बाद भी अधिकतर इलाकों में पुलिस ने सख्ती नहीं की ओर दिन चढ़ने का इंतजार करते हुए नजर आए।

जयपुर से निकले गहलोत के 6 मंत्री-5 विधायक ‘लापता’, नहीं पहुंचे जैसलमेर

जयपुर
राजस्थान में जारी सियासी संकट (Rajasthan Political Crisis) में हर रोज नया मोड़ आता जा रहा है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने खेमे के विधायकों को जयपुर से निकालकर जैसलमेर शिफ्ट कर दिया। अब खबर आ रही है कि इस शिफ्टिंग के दौरान गहलोत खेमे के 11 सदस्य ‘लापता’ हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, गहलोत सरकार के 6 मंत्री और 5 विधायक अब तक जैसलमेर नहीं पहुंचे हैं। इसे लेकर बाजार में चर्चाओं को दौर शुरू हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, जयपुर से जैसलमेर नहीं पहुंचने वालों में परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा, खेल मंत्री चांदना, कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया, चिकित्सा राज्यमंत्री सुभाष गर्ग, सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना, विधायक जगदीश जांगिड़, विधायक अमित चाचाण, विधायक परसराम मोरदिया, विधायक बाबूलाल बैरवा और विधायक बलवान पूनिया शामिल हैं, जो अबतक जैसलमेर नहीं पहुंचे हैं

शिफ्टिंग पर बोले गहलोत- विधायकों पर बाहरी दबाव बनाया जा रहा था
इससे पहले विधायकों की शिफ्टिंग को लेकर पूछ गए सवाल का जवाब देते हुए सीएम गहलोत ने कहा था कि हमारे विधायक जो कई दिनों से जयपुर में थे, उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। उन पर और उनके घरवालों पर दबाव बनाया जा रहा था। बाहरी दबाव को दूर रखने के लिए उन्हें स्थानांतरित करने के बारे में सोचा और फिर स्थानांतरित कर दिया। सीएम ने कहा कि डेमोक्रेसी को बचाने के लिए हर किसी का कर्तव्य बनता है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी

गहलोत खेमे के विधायकों की शिफ्टिंग चल ही रही थी कि राजस्थान विधानसभा कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने सुप्रीम कोर्ट का ‘दरवाजा खटखटा’ दिया। दरअसल, महेश जोशी ने 24 जुलाई को पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और 18 अन्य विधायकों के पक्ष में राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट ने सीपी जोशी की अयोग्यता की कार्यवाही स्थगित करने का फैसला दिया है।

गहलोत गुट के दावों की खुली पोल
वहीं जयपुर से जैसलमेर शिफ्टिंग के दौरान विधायकों की जो संख्या सामने आई है, उसने गहलोत गुट के अब तक के दावों की पोल ही खोल कर रख दी। पूर्व में गहलोत खेमे की ओर से कभी 109, कभी 104 तो कभी 101 से ज्यादा विधायकों के साथ होने की बात कही जाती थी। लेकिन विधायकों की शिफ्टिंग के दौरान नजारा दावों से उलट था। जैसलमेर शिफ्टिंग के दौरान महज 97 विधायक नजर आए। मीडिया रिपोट्‌र्स के अनुसार, जयपुर से जैसलमेर के सफर में पहले हवाई जहाज में 54 विधायक चढ़े, दूसरे चार्टर प्लेन में मात्र 6 विधायक तो तीसरे प्लेन में 37 विधायक रवाना हुए। इस तरह से सिर्फ 97 विधायक की शिफ्टिंग के लिए जयपुर से निकले।

अशोक गहलोत का बीजेपी पर निशाना
विधायकों की शिफ्टिंग से पहले बसपा के 6 विधायकों का कांग्रेस में विलय को लेकर गहलोत बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने तेलगुदेशम पार्टी के 4 सांसदों को राज्यसभा के अंदर रातों रात मर्जर करवा दिया, वो मर्जर तो सही है और राजस्थान में 6 विधायक मर्जर कर गए कांग्रेस में, वो मर्जर गलत है, तो फिर BJP का चाल-चरित्र-चेहरा कहां गया? राज्यसभा में मर्जर हो, वो सही है और यहां मर्जर हो, वो गलत है?