सभी मंत्री अपने वेतन का 30% मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराएंगे, विधायकों से भी सीएम की अपील- वे भी योगदान दें

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत सभी मंत्री अपने वेतन का 30% सीएम रिलीफ फंड में जमा कराएंगे। इसकी शुरुआत करते हुए शिवराज ने अपने कोटे से 3 महीने का वेतन का 30% के हिसाब से करीब सवा लाख रुपए जमा भी करवा दिया। इसका निर्णय अस्पताल से ही मंत्रियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री के आह्वान पर सभी ने लिया।

मंत्री गोपाल भार्गव ने अपनी तरफ से अगले एक साथ तक वेतन में से 30% दिए जाने की बात कही। हालांकि, शिवराज ने कहा कि अभी सिर्फ कोविड-19 के लिए ही इसे किया जा रहा है। आगे जरूरत पड़ेगी, तो उस पर भी निर्णय करेंगे। मैंने 31 जुलाई 2020 तक प्राप्त होने वाले अपने तीन महीने के वेतन का 30 प्रतिशत मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में जमा कराया है। इसी तरह आगे के तीन महीने तक की तीस प्रतिशत राशि को राहत कोष में जमा कराऊंगा।

विधायक और आम लोग भी करें मदद
शिवराज ने कहा कि कोविड-19 के कारण देश के साथ ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी बुरा प्रभाव पड़ा है। ऐसे में शासन में जो भी अनावश्यक खर्च हैं, उनमें कटौती की जाए। जो काम जरूरी नहीं हैं, उन्हें करने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले कोरोना और फिर उसके बाद महत्व के अनुसार दूसरे कार्य किए जाएं। हमें बेफिजूल के खर्च से बना होगा। इसे मैं अनावश्यक खर्च कहता हूं। इसके साथ ही विधायकों से भी उनके वेतन का 30% मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए जाने अपील करता हूं। जनता भी इस कोष में क्षमता के अनुसार मदद कर सकती हैं। कोविड-19 संकट किसी एक-दो का नहीं है। यह हम सबका है और हमें इसके खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ना है।

उज्जैन में मिला जमीन में गड़ा बेशकीमती खजाना, सोने-चांदी से भरे तीन घड़े बरामद

उज्जैन: उज्जैन के महिदपुर में सौ साल से ज्यादा पुराने मकान में खुदाई के दौरान बेशकीमती जेवरात मिले हैं. मकान मालिक ने जेवर को छिपाने की कोशिश की लेकिन पुलिस और प्रशासन ने पूरे मामले का खुलासा कर दिया. संभागीय मुख्यालय उज्जैन से 60 किलोमीटर दूर महिदपुर तहसील के घाटी मोहल्ला निवासी सुरेंद्र नाम के शख्स के मकान की खुदाई के दौरान धातु के तीन घड़े बरामद किए गए हैं. इन घड़ों में सोने चांदी के जेवरात मिले हैं. इसमें अट्ठारह सौ ईसवी के सिक्के भी बरामद किए गए हैं.

महिदपुर के एसडीएम आर पी वर्मा ने बताया कि खुदाई के दौरान 3 घड़े निकलने की सूचना लोगों के माध्यम से मिली थी. जब मकान मालिक सुरेंद्र से पूछा गया तो उन्होंने छिपाने की कोशिश की. इसके बाद मकान में काम कर रहे तीन मजदूरों को हिरासत में लेकर पुलिस ने पूछताछ की तो पूरे मामले का खुलासा हुआ.

कहा जा रहा है कि मकान मालिक ने मजदूरों से पूरे घटनाक्रम को छिपाने के एवज में कुछ जेवर भी दिए थे. जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने लाखों रुपए कीमत के बेशकीमती जेवरात जप्त किए हैं, इसकी कीमत अधिकारियों द्वारा आंकी जा रही है.

पुरातत्व विभाग का दल भी पहुंचा
महिदपुर में खुदाई के दौरान मिले जेवरात और सिक्कों का परीक्षण करने के लिए पुरातत्व विभाग का दल भी पहुंचा है. पुरातत्व यह भी पता लगायेगा कि सिक्के और जेवरात कितने पुराने हैं? अधिकारियों के मुताबिक सोने चांदी के जेवर को राजस्व विभाग के माल खाने में जमा किया जाएगा. जबकि सिक्के और अन्य प्राचीन वस्तुएं पुरातत्व विभाग अपने कब्जे में ले सकता है.

चीन ने अपने J-20 को बताया राफेल से बेहतर, पूर्व IAF चीफ धनोआ ने खोली पोल

पूर्व एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने शुक्रवार को चीन के उस दावे की पोल खोल दी जिसमें उसने कहा है कि उसके जे-20 लड़ाकू विमान राफेल से बेहतर हैं। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक ‘एक्सपर्ट’ के हवाले से कहा कि राफेल सुखोई-30 MKI जेट से बहेतर जरूर है, लेकिन J-20 के सामने नहीं टिकता। 

कम्युनिस्ट पार्टी की प्रोपेगेंडा वेबसाइट ने एक कथित मिलिट्री एक्सपर्ट झांग शूफेंग के हवाले से कहा, ”यह केवल एक चौथाई जेनरेशन अडवांस है और गुणवत्ता के मामले में इसमें अधिक बदलाव नहीं हैं।” वेबसाइट ने एक अनाम एक्सपर्ट के हवाले से कहा कि राफेल केवल थर्ड प्लस जेनरेशन का फाइटर जेट है और J-20 के सामने उसकी नहीं चलेगी।”

रापेल को 4.5 जेनरेशन का फाइटर जेट बताने वाले वायुसेना के पूर्व चीफ बीएस धनोआ ने दो साधारण सवालों के जरिए चीन के दावे की पोल खोलकर रख दी। धनोआ ने पूछा, ”यदि J-20 वास्तव में पांचवी पीढ़ी का फाइटर जेट है तो इस पर कनार्ड्स क्यों हैं, जबकि अमेरिका के पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों F22, F35 और रूस की पांचवीं पीढ़ी के Su 57 में ये नहीं हैं।” कनार्ड्स विमान के नियंत्रण में सुधार के लिए मुख्य विंग के आगे लगे होते हैं।   

धनोआ ने कहा, ”मैं नहीं मानता कि J-20 इतने शक्तिशाली हैं कि उन्हें पांचवी पीढी का कहा जाए क्योंकि कनार्ड रडार सिग्नेचर को बढ़ा देता है लॉन्ग रेंज के मीटीअर मिसाइलों को पोजिशन बता देता है, जो राफेल में लगे हैं।”

पूर्व वायुसेना चीफ ने चीन से दूसरा सवाल पूछा कि यदि J-20 का उत्पादतक चेंगदू एयरोस्पेस कॉर्पोरेशन इसे 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट बताता है तो इसमें सुपरक्रूज की क्षमता क्यों नहीं है? सूपरक्रूज वह क्षमता है जिससे फाइटर जेट आफ्टरबर्न्स का इस्तेमाल किए बिना M 1.0 (साउंड की गति) की अधिक स्पीड से उड़ सकते हैं।  

धनोआ ने ,बताया, ”राफेल में सुपरक्रूज की क्षमता है और रडार सिग्नेचर की तुलना दुनिया के सबसे अच्छे फाइटर जेट्स से की जा सकती है।” धनोआ Sukhoi 30 MKI के साथ ही भारत के सभी अच्छे फाइटर प्लेन उड़ा चुके हैं। बालाकोट एयरस्ट्राइक की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ धनोआ ने ही संभाली थी। 

वायुसेना के टॉप पोस्ट से रिटायर हो चुके धनोआ ने इस सप्ताह चाइनीज प्रोपेगेंडा की धज्जियां उड़ाईं और कहा कि यदि चाइनीज हथियार वास्तव में अच्छे होते तो 27 फरवरी 2019 को राजौरी में नांगी तेकरी पुल पर हमले के लिए चीन ने अमेरिका के F-16 की जगह चाइनीज JF-17 को  चुना होता। लेकिन चीन ने JF-17 का इस्तेमाल केवल मिराज 3/5 को एयर डिफेंस कवर देने के लिए किया।      

जैसलमेर के सूर्यगढ़ में शिफ्ट हो सकते हैं कांग्रेस विधायक, घर से 15 दिन का सामान मंगाया

राजस्थान की सियासत में हर रोज कुछ नया मोड़ आ रहा है. अब हर किसी की नज़रें विधानसभा सत्र पर टिकी हैं, इस बीच शुक्रवार को जयपुर में एक बार फिर हलचल देखने को मिल सकती है. जयपुर के होटल फेयरमाउंट में मौजूद विधायकों से आज सुबह चेक आउट करने को कहा गया है, साथ ही 15 दिनों का सामान घर से मंगाने के लिए कहा गया है.

इसके अलावा विधायकों को अपना आईडी कार्ड साथ रखने को कहा गया है. सूत्रों की मानें तो विधायकों को जैसलमेर के सूर्यगढ़ ले जाया जा सकता है. यहां पुलिस सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है. हालांकि, कुछ विधायकों का कहना है कि राजस्थान सरकार ने कुछ और जगह भी चिह्नित की हैं.

आपको बता दें कि आज ही जयपुर के होटल में एक बार फिर कांग्रेस विधायक दल की बैठक होनी है, इससे पहले गुरुवार को भी कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई थी.

सूत्रों की मानें, तो विधायक दल की बैठक में विधायकों ने शिफ्ट होने की बात कही थी. जिसमें जयपुर होटल में बोरियत का हवाला दिया था, ऐसे में किसी ने रणथंभौर तो किसी ने जोधपुर या जैसलमेर जाने को कहा था

गुरुवार की बैठक में सभी विधायकों से कहा गया था कि 14 अगस्त तक आपको होटल में ही रहना होगा, लोकतंत्र बचाने के लिए ऐसा करना जरूरी है. साथ ही कहा गया था कि त्योहार भी आप यहां अपने परिवार के साथ मना सकते हैं. ऐसे में अब विधायकों को शिफ्ट करने की बात सामने आ रही है.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को ही बयान दिया था कि जब से विधानसभा सत्र का ऐलान हुआ है, तभी से हॉर्स ट्रेडिंग तेज हो गई है. गहलोत का आरोप था कि अब विधायकों का दाम बढ़ गया है, उन्होंने तंज करते हुए कहा कि अगर कोई बागी वापस आना चाहे और उसे किस्त ना मिली हो तो वो आ सकता है.

नौसेना में घोटाला, सीबीआई ने चार राज्यों के 30 ठिकानों पर की छापेमारी

नौसेना में फर्जी बिल के जरिए घोटाले का मामला सामने आने के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने चार राज्यों दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के करीब 30 ठिकानों पर छापेमारी की. दरअसल, पश्चिमी नौसेना कमान को आईटी हार्डवेयर की आपूर्ति के लिए जाली बिल बनाकर 6.76 करोड़ रुपये के घपले का आरोप है.

आरोप है कि कैप्टन अतुल कुलकर्णी, कमांडर मंदार गोडबोले और आरपी शर्मा और पेटी ऑफिसर एलओजी (एफ&ए) कुलदीप सिंह बघेल ने कथित रूप से 6.76 करोड़ रुपये के सात फर्जी बिल तैयार किए. छापेमारी के दौरान पुलिस को 10 लाख रुपये की नकदी मिली है. इसके अलावा कुछ अहम दस्तावेज भी मिले हैं.

क्या है पूरा मामला

यह पूरा मामला पश्चिमी नौसेना कमान में आईटी हार्डवेयर की आपूर्ति के लिए आकस्मिक व्यय बिल के भुगतान से जुड़ा हुआ है. इस पूरे घोटाले का खुलासा रक्षा मंत्रालय की आंतरिक जांच में हुआ. इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने 23 अक्टूबर 2019 को सीबीआई को जानकारी दी. रक्षा मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद सीबीआई ने मामला दर्ज कर लिया.

6.76 करोड़ से अधिक हो सकता है घोटाला

सीबीआई के सूत्रों का कहना है कि यह घोटाला 6.76 करोड़ से बड़ा सकता है. मामले की तफ्तीश शुरू कर दी गई है और पुराने बिलों के भुगतान की भी पड़ताल की जा सकती है. फिलहाल, सीबीआई की ओर से नेवी अफसरों और कंपनियों से जानकारी जुटाई जा रही है.

किन लोगों पर दर्ज हुआ केस

बताया जा रहा है कि सीबीआई ने कैप्टन अतुल कुलकर्णी, कमांडर मंदर गोडबोले, कमांडर आर पी शर्मा, पेटी ऑफिसर एलओजी (एफ&ए) कुलदीप सिंह बघेल के अलावा एस एम देशमने, ए.के. के. विश्वास, इंदू कुंभरे, अनमोल कंदियाबूरू, प्रदीप चौहान, अमर देववाणी (प्राइवेट पर्सन), मेसर्स ACME नेटवर्क एंड आईटी सॉल्यूशन ( कंपनी), कौशल पंचाल साइबरस्पेस इंफोविजन प्राइवेट लिमिटेड के मालिक, जीतू मेहरा (मेसर्स मोक्ष इंफोसिस कंपनी के मालिक) और मेसर्स स्टार नेटवर्क कंपनी के मालिक लाल चंद यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया गया.

MP: दिग्विजय के भाई लक्ष्मण सिंह ने दी नसीहत- ‘तांत्रिक बाबाओं’ से बचकर रहे कांग्रेस

कंप्यूटर बाबा और मिर्ची बाबा पर निशाना

पहले भी पार्टी को चेता चुके हैं लक्ष्मण सिंह

मध्य प्रदेश में एक तरफ जहां एक-एक कर कांग्रेस विधायक पार्टी छोड़ कर जा रहे हैं, वहीं चाचौड़ा से कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह पार्टी में रहकर लगातार पार्टी को नसीहत दे रहे हैं. लक्ष्मण सिंह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई भी हैं.

बुधवार को लक्ष्मण सिंह ने ट्वीट कर अपनी ही पार्टी को बाबाओं से दूर रहने की नसीहत दी है. लक्ष्मण सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि ‘हम कांग्रेस के साथी भाजपा, संघ की विचारधारा को निरंतर कोसते हैं, मैं भी उनकी विचारधारा से सहमत नहीं हूं. परंतु कांग्रेस की विचारधारा कहां लुप्त हो गई कि चुनाव में हमें ‘दुष्ट’ तांत्रिक बाबाओं की मदद लेनी पड़ रही है?’.

इस ट्वीट में उन्होंने मध्य प्रदेश कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी टैग किया है. हालांकि अपने ट्वीट में उन्होंने किसी बाबा का नाम नहीं लिखा लेकिन उनका निशाना इन दिनों कांग्रेस खेमे में चल रहे कंप्यूटर बाबा और मिर्ची बाबा पर है. इससे पहले भी वे कांग्रेस में बाबाओं की बढ़ती सक्रियता पर पार्टी को चेता चुके हैं.

22 जुलाई को लक्ष्मण सिंह ने ट्वीट कर लिखा था कि ‘मिर्ची बाबा पुनः कांग्रेस का प्रचार कर रहे हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में ‘मिर्ची’ यज्ञ के परिणाम हम देख चुके हैं. @INCMP @OfficeOfKNath कृपया सतर्क रहें’. वहीं दूसरी तरफ कंप्यूटर बाबा इन दिनों ग्वालियर-चंबल संभाग में डेरा डाले हुए हैं.

हालांकि ये पहली बार नही है जब लक्ष्मण सिंह ने अपनी ही पार्टी को नसीहत दी है. कुछ दिनों पहले जब मांधाता से विधायक नारायण पटेल कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए थे तब लक्ष्मण सिंह ने ट्वीट कर लिखा था, ‘नारायण पटेल जैसे “मृदुभाषी, कर्मठ” साथी विधायक का पार्टी छोड़ कर जाने पर बहुत दुख हुआ. यह तो किसी गुट के नहीं थे, फिर क्यों गए? कांग्रेस और कमलनाथ चिंतन करें’.

सोनिया गांधी की कांग्रेस के RS सांसदों के साथ बैठक में उठी राहुल को फिर अध्‍यक्ष बनाने की मांग

नई दिल्ली: राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को फिर से कांग्रेस अध्‍यक्ष बनाए जाने की मांग उठने लगी है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Congress chief Sonia Gandhi) ने गुरुवार को पार्टी के राज्यसभा सदस्यों (Rajya Sabha MP) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये बैठक की, जिसमें कई सदस्यों ने राहुल गांधी को फिर से पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की मांग की. गौरतलब है कि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस  की करारी हार के बाद राहुल ने पार्टी अध्‍यक्ष पद से इस्‍तीफा दे दिया था. पार्टी के कई नेताओं ने उनसे इस्‍तीफा वापस लेने का आग्रह किया था लेकिन राहुल अपने फैसले पर अडिग रहे थे. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में रिपुन बोरा, पीएल पूनिया, छाया वर्मा तथा कुछ अन्य सदस्यों ने राहुल को फिर से पार्टी की कमान सौंपने की पैरवी की.

बैठक से अवगत एक सूत्र ने बताया, ‘‘बोरा, पूनिया, छाया वर्मा और कुछ अन्य सदस्यों ने कहा कि मौजूदा समय में पार्टी कार्यकर्ताओं की भावना है कि राहुल गांधी को फिर से कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाए. इन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी ही विपक्ष में इकलौती आवाज हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दे रहे हैं.”सूत्रों का कहना था कि पार्टी के कई राज्यसभा सदस्यों की इस मांग पर सोनिया गांधी की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. गत 11 जुलाई को सोनिया ने कांग्रेस के लोकसभा सदस्यों के साथ डिजिटल बैठक की थी और उसमें भी पार्टी के कई सांसदों ने राहुल गांधी को फिर से पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने की मांग की थी.

पिछले साल लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद राहुल गांधी ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद सोनिया गांधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया था.सोनिया की अगुवाई में हुई पार्टी के राज्यसभा सदस्यों की बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्षगुलाम नबी आजाद, कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश और कई अन्य राज्यसभा सदस्य मौजूद थे.सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में कोरोना महामारी से संबंधित हालात, मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति, लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध और अर्थव्यवस्था की स्थिति पर मुख्य रूप से चर्चा हुई. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था की स्थिति पर अपनी बात रखी. राज्यसभा में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 40 है, जबकि लोकसभा में पार्टी के सांसदों की संख्या 52 है

शिवराज सरकार का सख्त निर्देश, फीस नहीं देने पर प्राइवेट स्कूल बच्चे का नाम नहीं काट सकेंगे

भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कोई भी निजी स्कूल फीस (School Fees) जमा नहीं होने पर किसी भी छात्र का नाम नहीं काट सकेंगे. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं. सीएम शिवराज ने साफ किया है कि भले ही किसी छात्र के अभिभावक फीस जमा ना कर पाए, लेकिन तब भी उस छात्र का नाम स्कूल से नहीं काटा जाएगा. इसके साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई शिक्षा नीति को लेकर मध्य प्रदेश में एक टीम गठित करने के निर्देश स्कूल शिक्षा मंत्री को दिए हैं. स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा है कि केंद्र द्वारा घोषित नई शिक्षा नीति (New Education Policy 2020) देश में शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी. इसके क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश लीड ले इसके लिए सभी प्रावधानों पर राज्य की परिस्थितियों के अनुसार अमल किया जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान न देकर उनका कौशल विकसित करने के लिए प्रदेश में कक्षा छठवीं से ही व्यवसायिक शिक्षा दिए जाने के प्रावधान को जल्दी से जल्दी लागू किया जाएगा. स्कूली पाठ्यक्रम में संगीत, दर्शन कला, नृत्य के साथ ही योग का भी समावेश किया जाएगा.

नई शिक्षा नीति को लेकर गठित होगी टीम

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को लागू करने के लिए शिक्षा मंत्री एक टीम गठित करें जो इस संबंध में कार्रवाई के लिए रूपरेखा बनाए. उन्होंने कहा कि प्रदेश में विशेष रूप से व्यवसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाना है, जिससे बच्चा शुरू से ही अपने क्षेत्र में दक्षता हासिल कर ले तथा उसे भावी जीवन में एक अच्छे अवसर हासिल हो सके. नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली पाठ्यक्रम में योग और नैतिक शिक्षा को विशेष महत्व दिया जाए. सीएम ने प्रदेश में बड़ी संख्या में गांवों के क्लस्टर में उच्च गुणवत्ता वाले स्कूल विकसित करने की बात कही. एमपी में जल्द ही ऐसे 10,000 स्कूल विकसित किए जाने की योजना बनाई जा रही है.

निजी स्कूलों को सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि कोरोना संकट के चलते निजी विद्यालय विद्यार्थियों से ट्यूशन फीस के अलावा अन्य शुल्क वसूल नहीं कर पाएंगे. उन्होंने निर्देश दिए कि शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करे कि यदि कोई अभिभावक बच्चे की फीस नहीं चुका पा रहा है तो भी बच्चे का नाम विद्यालय से किसी भी हालत में नहीं कटना चाहिए. कोरोना संकटकाल में निजी विद्यालयों की समस्याओं के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा मंत्री से कहा कि वे प्रदेश के स्कूल संचालकों और अभिभावकों से बातचीत कर हल निकालें.

कोरोना में डिजिटल शिक्षा की व्यवस्था

प्रदेश में कोरोना काल में डिजिटल शिक्षा की व्यवस्था के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्री प्राइमरी के विद्यार्थियों के लिए भी डिजिटल शिक्षा प्रारंभ होगी जो उन्हें प्रत्येक सप्ताह 3 दिन दी जाएगी तथा प्रतिदिन 30 मिनट का समय निर्धारित होगा. इसके अलावा पहली से आठवीं तक की कक्षाओं में सप्ताह में 5 दिन तथा हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल में सप्ताह में 6 दिन डिजिटल शिक्षा दी जाएगी.

आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तारीख बढ़ाई गई, जानें क्या है लास्ट डेट

केंद्र सरकार ने वित्तवर्ष 2018-19 के लिए आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तारीख को बढ़ा दिया है. आयकर विभाग ने कहा कि कोरोना वायरस की महामारी देखते हुए आयकर दाताओं को राहत देने के लिए यह कदम उठाया है. सरकार ने आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 30 सितंबर तक बढ़ा दी है. पहले आयकर भरने की अंतिम तारीख 31 जुलाई थी.

आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तारीख दो महीने बढ़ाई गई

आयकर विभाग ने कहा, ‘‘कोरोना वायरस की महामारी के मद्देनजर आयकर दाताओं को और राहत देते हुए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने वित्तवर्ष 2018-19 (आकलन वर्ष 2019-20) के लिए आयकर रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2020 से बढ़ाकर 30 सितंबर 2020 कर दी है.’’

उल्लेखनीय है कि वित्तवर्ष 2018-19 का मूल अथवा संशोधित आयकर रिटर्न भरने की तारीख तीसरी बार बढ़ाई गई है. ऐसा देश में कोरोना वायरस संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से किया गया