राज्यसभा चुनाव / कमलनाथ के बंगले पर कांग्रेस का मॉक पोल; क्रॉस वोटिंग की आशंका, इसलिए दिग्विजय की जीत पक्की करने के लिए 52 की जगह 54 विधायक वोट देंगे

भोपाल. राज्यसभा चुनाव से एक दिन पहले यानी गुरुवार कोपूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सिंह के बंगले पर वोटिंग को लेकरमॉक पोल हुआ। कांग्रेस कोक्राॅस वोटिंग की आशंका है, इसलिए पार्टी के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह की जीत सुनिश्चितकरने के लिए 52 की जगह 54 विधायकों को वोट डालने के निर्देश दिएगए।पार्टी की ओर से दावा किया गया कि सभी विधायक एकसाथ हैं। कहीं कोई चूक न हो जाए, इसलिए दो अतिरिक्त विधायकों को दिग्विजय को ही वोट करने को कहा है।

कमलनाथ के बंगले पर सुबह से ही सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। चुनाव के पहले मॉक पोल कराया गया।

इसके साथअब राज्यसभा की दो सीटों परभाजपा और एक पर कांग्रेस की जीतपक्की हो गईहै। इधर, एक दिन पहले कांग्रेस की पार्टी मीटिंग से गायब रहने वाले 5 विधायक भी पहुंच गए, जबकि कुणाल चौधरी कोरोना संक्रमित होने के कारण नहीं आए।

अब फूल सिंह को 38 विधायक वोटकरेंगे
कांग्रेस नेअपने दोनों उम्मीदवारों में से पहली वरीयता दिग्विजय सिंह को दी है। दूसरी वरीयता फूल सिंह बरैया की है। कांग्रेस के पास कुल विधायकों की संख्या 92 है। राज्यसभा की एक सीट को जीतने के लिए 52 वोटों की जरूरत होगी। पार्टी के 54 विधायकों के दिग्विजय को वोट देनेके बाद शेष 38 विधायक बरैया को वोट करेंगे। जबकिभाजपा के 107 विधायक हैं। इसके अलावा, दो निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा का भी समर्थन है। यानी विधायकों की संख्या 114 हो जाएगी।

मॉक पोल के दौरान सीनियर नेताओं ने विधायकों को वोट करने के बारे में बताया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी भी इसमें शामिल हुए।

सीनियर नेता भी पहुंचे
मॉल पोल में सीनियर नेताओं ने विधायकों को वोट करने के बारे में बताया। उन्हें क्या-क्या और कैसे करना है- इसे करके दिखाया गया। इसके बाद सभी नेता एक-एक कर वहां से वापस चले गए।

सिर्फ विधायकों को ही प्रवेश दिया गया
सुबह से ही कमलनाथ के श्यामला हिल्स स्थित आवास पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी। मुख्य गेट से सिर्फ पार्टी के विधायकों और सीनियर नेताओं को प्रवेश दिया गया। इसके अलावा किसी को भी अंदर नहीं जाने दियागया। सिर्फ कुछ खास लोगों की गाड़ियां बंगले के अंदर तक जा सकीं। अन्य नेताओं को गाड़ी बाहर खड़ी करके पैदल ही अंदर जाना पड़ा।

कांग्रेस ने यह तय किया

  1. पहले प्रत्याशी दिग्विजय रहेंगे। दूसरे फूल सिंह बरैया होंगे।
  2. वोटिंग के दिन कमलनाथ के घर से एक साथ सभी विधायक चुनाव के लिए जाएंगे।
  3. पहले 54 विधायकदिग्विजय का नाम पहले नंबर पर लिखेंगे। कमलनाथ का वोट भी दिग्विजय को।
    4.एक दिन पहले गायब लक्ष्मण सिंह समेत अन्य विधायक भी पहुंचे।

ड्रैगन से सब परेशान: बार-बार घुस रहे हैं चीन के लड़ाकू विमान, ताइवान के जेट्स ने बाहर खदेड़ा

खुराफाती चीन कोरोना वायरस महामारी के दौर में भी ना तो खुद शांति से बैठा है और ना ही अपने पड़ोसियों को चैनियत से रहने दे रहा है। एक तरफ उसके सैनिकों ने भारत के साथ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) हिंसक झड़प की तो दूसरी तरफ चीन के लड़ाकू विमान बार-बार ताइवान में घुस रहे हैं। हालांकि, ताइवान ने हर बार चीनी विमानों को खदेड़ दिया है।

गुरुवार को एक बार फिर चीनी एयर फोर्स के लड़ाकू विमान ताइवान के एयरस्पेस में घुस गए। पिछले 10 दिनों में यह पांचवीं बार है जब चीन ने इस फाइटर जेट ताइवान में घुसे हैं। इसको लेकर दोनों देशों में तनाव काफी बढ़ गया है। 

ताइवान एयर फोर्स ने कहा है कि चीन के J-10 और J-11 लड़ाकू विमान ताइवान के दक्षिण पश्चिम भाग में एयरस्पेस में घुसे। नियमित पट्रोलिंग पर रहने वाले ताइवान के फाइटर्स ने चाइनीज विमानों को रेडियो पर चेतावनी दी इसके बाद वे ताइवान के एयर डिफेंस जोन से निकल गए। 9 जून से अब तक पांच बार इस तरह चीन के लड़ाकू विमानों ने ताइवान में घुसने की कोशिश की है। हर बार उन्हें ताइवान के फाइटर जेट्स ने खदेड़ दिया है। 

ताइवान का कहना है एक तरफ दुनिया कोरोना वायरस महामारी से लड़ रही है तो दूसरी तरफ चीन ने हाल के महीनों में उसके खिलाफ सैन्य गतिविधियों में इजाफा कर दिया है और डराने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि चीन इस लोकतांत्रिक आइलैंड पर अपना दावा करता रहा है। 

चीन ने इस मुद्दे पर अभी कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। बीजिंग अक्सर कहता रहा है कि इस तरह के अभ्यास में कोई असामान्य बात नहीं है। यह देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता दिखाने के लिए किया जाता है। चीन ने ताइवान को अपने नियंत्रण में लेने के लिए बल प्रयोग की घोषणा नहीं की है। हालांकि, पिछले महीने चीन के एक सीनियर जरनल ने कहा था कि चीन तभी अटैक करेगा जब ताइवान को स्वतंत्र हो जाने से रोकने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा। 

अब गांव-कस्बों में भी हो सकेगा कोरोना टेस्ट, सरकार ने लॉन्च की मोबाइल लैब

कोरोना टेस्टिंग के लिए मोबाइल लैब लॉन्च

दूर-सुदूर के इलाकों में मिलेगी मदद

देश में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों के बीच अब टेस्टिंग को रफ्तार देने की कोशिश की जा रही है. गुरुवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने एक मोबाइल लैब को लॉन्च किया. जो कि कोरोना टेस्टिंग में काम आएगी, ये लैब किसी भी इलाके में टेस्ट कर पाएगी. देश में ये अपनी तरह की पहली लैब है.

जानकारी के अनुसार, इस मोबाइल लैब में रोज कोरोना वायरस के 25 टेस्ट RT-PCR तकनीक से, 300 टेस्ट ELISA तकनीक से हो सकेंगे. इसके अलावा टीबी और HIV से जुड़े कुछ टेस्ट भी किए जा सकेंगे. मोबाइल लैब को आधुनिक सुविधा से तैयार किया गया है

सरकार के मुताबिक, इन लैब का इस्तेमाल ऐसी जगहों के लिए किया जाएगा जहां पर लैब की सुविधा नहीं है. यानी गांव-कस्बों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा.

इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि हमारे देश में फरवरी में सिर्फ एक ही लैब थी, लेकिन आज हमारे पास 953 लैब हैं. इनमें से करीब 700 लैब सरकारी हैं, ऐसे में अब देश में कोरोना वायरस के टेस्ट ज्यादा होंगे.

इस मोबाइल लैब को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दूर-सुदूर के इलाकों में टेस्टिंग के लिए इनका इस्तेमाल किया जाएगा. गौरतलब है कि देश में अबतक कोरोना वायरस के कुल 63 लाख टेस्ट हो चुके हैं, बीते चौबीस घंटे में देश में करीब पौने दो लाख टेस्ट हुए.

ICMR की ओर से लक्ष्य रखा गया है कि जून के अंत तक देश में रोज करीब तीन लाख टेस्ट किए जाएं. अभी रोज करीब डेढ़ लाख टेस्ट ही हो रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में टेस्टिंग पर जोर देने की बात कही थी.

लद्दाख में 3 इंफैंट्री डिविजन तैनात, जानें- चीन सीमा पर कितनी मुस्तैद है भारतीय सेना

एलएसी पर बढ़ाई गई जवानों की तैनाती

हिमाचल प्रदेश में अतिरिक्त ट्रूप्स भेजे गए

17 माउंटेन स्ट्राइक कोर को भी किया गया तैनात

गलवान घाटी में धोखेबाजी करने वाले चीन को सबक सिखाने के लिए भारत हर स्तर पर है. लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर अतिरिक्त जवानों की तैनाती से लेकर हिंद महासागर में नौसेना के बेड़े को बढ़ाने तक. जल-थल और नभ में भारत ने जिस तरह अपनी शक्ति को स्थापित किया है, उससे पार पाना भी चीन के लिए बिल्कुल आसान नहीं होगा.

इस समय भी हर मोर्चे पर भारतीय सेना चीन के सामने डटी हुई है. चीन के चालबाज चरित्र को समझते हुए भारत चौकन्ना है और इसी के चलते सरहद से जुड़े हर मोर्चे पर मुस्तैद है. लद्दाख में 3 इंफैंट्री डिविजन डिप्लायड हैं. इसके अलावा ऊंचाई पर युद्धाभ्यास करने वाली दो अलग-अलग ब्रिगेड भी तैनात हैं. हिमाचल प्रदेश में अतिरिक्त ट्रूप्स भेजे जा चुके हैं.

उत्तराखंड में गढ़वाल और कुमाऊं सेक्टर में सैन्य बल बढ़ा दिया गया है. उत्तरकाशी के चिन्यालिसौर में एयरफोर्स ने हवाई पट्टी को एक्टिव कर दिया है. चीन की नजर यहां भी हमेशा रही है तो इस मोर्चे पर भारत पूरी तरह तैयार हो चुका है. सिक्किम में सैन्य बल बढ़ाया जा चुका है. अरुणाचल प्रदेश में भी भारत ने पूरा इंतजाम कर रखा है.

जम्मू कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल में उत्तरी आर्मी कमांड में 34,000 भारतीय सैनिक तैनात हैं. उत्तराखंड में केंद्रीय आर्मी कमांड में 15,500 सैनिक तैनात हैं. और सिक्किम, अरुणाचल, असम, नागालैंड और बंगाल में पूर्वी आर्मी कमांड में 1 लाख 75 हज़ार 500 सैनिक तैनात हैं. इस तरह सैनिकों की कुल संख्या हो जाती है 225,000.

सुकना में 33 कोर, तेजपुर में 4 कोर, रांची में 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर को भारत ने तैनात कर दिया है. इसके अलावा वायु सेना की ओर से एलएसी से सटे बेस पर लड़ाकू विमानों की तैनाती भी की गई है. साथ ही नौसेना ने हिंद महासागर में अपनी ताकत को बढ़ाना शुरू कर दिया है. यानी जल, थल और नभ. हर जगह भारत तैयार है.

भारत के पास ज्यादा अनुभवी सेना

इस बीच चीन के रक्षा विशेषज्ञ और सैन्य चीनी मैगजिन मॉर्डर्न वैपनरी के संपादक हुआंग गुओझी ने लिखा है कि पहाड़ी मैदान और पर्वतीय क्षेत्रों में सबसे ज्यादा अनुभवी सेना सिर्फ भारत के पास है और 12 डिवीजन में 2 लाख सैनिकों के साथ भारत दुनिया की सबसे शक्तिशाली माउंटेन फाइटिंग फोर्स है.

हार्वर्ड केनेडी स्कूल के वेलफेयर सेंटर फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल अफेयर्स की रिसर्च में कहा गया है कि युद्ध की स्थिति में भारत उत्तरी सीमाओं में चीन पर भारी पड़ सकता है. इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की सामरिक शक्तियां बिखरी हुई हैं और सैनिकों को लाना-ले जाना चीन के लिए आसान नहीं होगा.

तिब्बत और शिनजियांग प्रांत में विरोधों को दबाने में चीनी सेना का बड़ा हिस्सा व्यस्त रहेगा. यहां तक कि भारत के एयर डिफेंस सिस्टम के सामने चीन को जल्दी संभल पाना बिल्कुल आसान नहीं होगा. इस बीच जंग की तैयारियों के वीडियो दिखा दिखाकर चीन बार बार भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना चाहता है लेकिन भारत इसे समझता है.

श्रद्धांजलि उपवास रख वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई को किया याद

ग्वालियर।

कोरोना महामारी के कारण इस बार वीरांगना लक्ष्मीबाई मेले का स्वरूप बदला हुआ दिखा। जहां पहले सैकड़ों की संख्या में लोग झांसी से आई ज्योतियात्रा में शामिल होते थे। वहीं इस बार चुनिंदा लोगों ने शहीद ज्योतियात्रा निकाली। इस दौरान सभी ने झांसी की रानी की समाधि पर दीपदान किया। वहीं चीन के सैनिकों के साथ हिसंक झड़प में शहीद हुए सैनिकों के सम्मान में दीप जलाए गए। गुरुवार सुबह 8 बजे समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करने यहां लोगों का तांता लगा हुआ है। सबसे पहले प्रशासनिक अधिकारियों ने रानी लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल पहुंचकर उन्हें शासन की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की उसके बाद पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया सांसद विवेक नारायण शेजवलकर भाजपा जिला अध्यक्ष कमल मखीजानी सहित अन्य तमाम नेताओं ने समाधि स्थल पहुंचकर वीरांगना को नमन किया।

वीरागंना को श्रद्धासुमन अर्पित करने श्रद्घांजलि उपवास

 बलिदान मेले के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्वमंत्री जयभानसिंह पवैया 20 नागरिकों के साथ सुबह 8 से 12 बजे तक वीरागंना को श्रद्धासुमन अर्पित करने श्रद्घांजलि उपवास पर बैठे। साथ ही चीन सीमा पर शहीद हुए भारतीय जवानों को श्रद्घाजंलि अर्पित की । साथ ही शाम को 7.55 बजे सांस्कृतिक झांकियों के साथ प्रसिद्घ कवि विनीत चौहान फेसबुक पर लाइव काव्यपाठ करेंगे। इसके साथ 20 सालों से आयोजित होने वाले ऐतिहासिक समारोह पर आधारित डॉक्युमेंट्री का प्रदर्शन भी होगा।

नेपाल के बारे में चौकने वाला खुलासा, चीनी युवा राजदूत यांगी ने पीएम ओली को नक्शा बढ़ाने के लिए उकसाया

नई दिल्ली,  भारत से लगने वाली नेपाल की सीमा में हाल के फेरबदल के पीछे एक चौंकाने वाला कारण सामने आया है। खुफिया एजेंसियों को पता चला है कि नेपाल में चीन की युवा राजदूत होऊ यांगी ने इसमें अहम भूमिका निभाई और भारत के खिलाफ बड़ा कदम उठाने के लिए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को तैयार किया। 

नेपाली कांग्रेस भी सरकार के साथ झांसे में आई 

इसी के बाद ओली ने ऐसी रूपरेखा तैयार की कि राष्ट्रीय मानचित्र के विस्तार के इस प्रस्ताव पर विपक्षी नेपाली कांग्रेस भी सरकार के साथ आ गई। गलवन घाटी में भारत और चीन के सैनिकों की भिड़ंत से नेपाल के घटनाक्रम से कई संबंध नहीं है। लेकिन चीनी राजदूत के प्रभाव में आए कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार के अगुआ ओली ने भारत पर नेपाल की निर्भरता पर विचार किए बगैर अप्रत्याशित काम कर डाला। उल्लेखनीय है कि चीन में भी कम्युनिस्ट पार्टी का ही शासन है और वह नेपाल की राजनीतिक स्थिति में करीबी दखल रखता है। नेपाल ने अपने नक्शे का विस्तार करते हुए भारत के हिस्से लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपना बता डाला। ओली अपने पहले कार्यकाल में भी और मौजूदा कार्यकाल में भी चीन के साथ नये समीकरण बनाने की कोशिश कर चुके हैं।

यांगी का ओली के आवास और कार्यालय में बेरोक-टोक जाना-आना

यांगी पहले पाकिस्तान में तीन साल काम कर चुकी हैं। वहां पर उनके काम को देखते हुए उन्हें नेपाल में स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका दिया गया। युवा यांगी का ओली के आवास और कार्यालय में बेरोक-टोक जाना-आना है। इस बात का संकेत मिलने के बाद ही थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने चीन का नाम लिए बगैर नेपाल की ओर से किसी की शह से उठाया गया कदम बताया था। जनरल ने नेपाल के कदम पर हैरानी जताई थी। 

काठमांडू को तिब्बत से जोड़ने के लिए रेललाइन का निर्माण किया जाएगा 

माना जा रहा है कि नेपाल ने तबसे भारत से दूरी बढ़ानी और तेज की, जब चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग अक्टूबर 2019 में भारत के बाद दो दिवसीय यात्रा पर नेपाल पहुंचे थे। उस दौरान नेपाल – चीन के बीच 20 सूत्रीय समझौते हुए, पर इन समझौतों का मुख्य बिंदु था नेपाल को रेलमार्ग द्वारा चीन से जोड़ना। काठमांडू को तिब्बत से जोड़ने के लिए 70 किलोमीटर लंबी रेललाइन का निर्माण किया जाना तय हुआ ताकि आयात-निर्यात के मामले में नेपाल की भारत पर निर्भरता समाप्त हो सके। नेपाल अभी आयात-निर्यात के लिए पूर्णतया भारत पर निर्भर है।

सरकार का फैसला- चीनी संचार उपकरणों पर लगेगी रोक, सभी मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर्स को चीनी इक्विपमेंट हटाने का निर्देश

नई दिल्लीः भारत सरकार ने चीनी संचार उपकरणों पर रोक लगाने का फैसला किया है. सभी मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर्स को चीनी उपकरण हटाने के निर्देश दिए गए हैं. सरकारी कंपनियों से कहा गया है कि वे नए सिरे से शर्तें बदलकर टेंडर जारी करें ताकि चीनी कंपनियां हिस्सा ही न ले पाएं.

भारत सरकार ने संचार विभाग, बीएसएनएल और एमटीएनएल को निर्देश देकर 4G के क्रियान्वयन के लिए किसी भी चीनी उपकरण के प्रयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है, इतना ही नहीं संचार विभाग ने चीनी उपकरणों के 4G के क्रियान्वन में प्रयोग/उपयोग हो रहे उपकरणों पर भी तुरन्त रोक लगा दी है.

सरकार ने तमाम सरकारी कंपनियों को निर्देश दिए हैं जिसके तहत सभी संचार उपकरणों की खरीद के लिए जारी किए गए टेंडरों को तुरंत रद्द कर दिया जाए और संचार उपकरणों की खरीद के लिए नई शर्तों के साथ नई टेंडर जारी किए जाएं.

इन टेंडरों के शब्दों को इस तरह से गड़ा जाए ताकि इससे चीनी कंपनियां खुद ब खुद बाहर हो जाएं या इन टेंडरों में चीनी कंपनियां हिस्सा न ले पाएं.

संचार विभाग ने सभी निजी मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर्स को निर्देश देने की प्रक्रिया शुरू की है. इसके तहत सभी प्राइवेट मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर्स को वर्तमान में इस्तेमाल किए जा रहे चीनी उपकरणों को तुरंत सेवा से बाहर करने और नए चीनी उपकरणों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश दिए जा रहे हैं.

हुआई और जेटी दो चीनी कंपनियों को लेकर खास तौर पर दुनियाभर में डाटा चोरी और सुरक्षा से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठते रहे हैं. इन दोनों कंपनियों के मालिकाना हक पर भी शंका की बादल मंडराते रहे हैं. ऐसा माना जाता है कि इन दोनों कंपनियों के पीछे चीनी सरकार खुद है.

संचार विभाग, चीनी संचार उपकरणों पर प्रतिबंध लगाकर ना केवल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ सकेगा बल्कि देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भी मजबूत होगा.

सरकार का और संचार मंत्रालय का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत और चीन के बीच सीमा पर ना केवल जबरदस्त तनाव है बल्कि उसके साथ ही साथ खूनी झड़प भी हुई है. ऐसे में चीनी संचार उपकरणों पर रोक लगाकर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को सरकार सबसे आगे रख रही है. साथ ही साथ जनमानस को भी सकेंत साफ है चीनी सामान का बहिष्कार करें.

भारत को मिली सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट, पाकिस्तान बौखलाया

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के चुनाव में निर्विरोध रूप से जीत दर्ज कर ली है। इसके साथ ही भारत 2021-22 के लिए इस सर्वोच्च संस्था का अस्थायी सदस्य बन गया है। बता दें कि यह 8 वीं बार है जब भारत यूएनएससी के अस्थाई सदस्य लिए चुना गया है। भारत को इस चुनाव में 192 में से 184 वोट मिले। वहीं भारत की इस कामयाबी पर चिढ़े पाकिस्तान ने कहा कि सुरक्षा परिषद में नई दिल्ली की अस्थायी सदस्यता हमारे लिए चिंता की बात है। 
रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 से संबंधित पाबंदियों के कारण संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में मतदान के विशेष इंतजाम किए गए थे। भारत का अस्थायी सदस्य के तौर पर 15 देशों की सुरक्षा परिषद में शामिल होना लगभग तय था।

भारत 2021-22 कार्यकाल के लिए एशिया-प्रशांत श्रेणी से अस्थायी सदस्य रहेगा। भारत की जीत इसलिए भी तय मानी जा रही थी क्योंकि वह समूह की इस इकलौती सीट के लिए एकमात्र उम्मीदवार था।

वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा, भारत हमेशा इस मंच से उठाए जाने वाले प्रस्तावों को खारिज करता रहा है, खासकर कश्मीर जैसे मुद्दों को। कश्मीरियों को उनके हक नहीं दिए गए और उनका दमन जारी है। कुरैशी ने कहा, भारत के अस्थाई सदस्य बनने से कोई आसमान नहीं फट पड़ेगा। पाकिस्तान भी सात बार अस्थाई सदस्य रह चुका है। 
बता दें कि 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र आमसभा में असेंबली के 75वें सत्र के लिए अध्यक्ष, सुरक्षा परिषद के पांच अस्थायी सदस्यों और आर्थिक व सामाजिक परिषद के सदस्यों का चुनाव किया जाना है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा, परिषद में भारत की मौजूदगी से ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के उसके लोकाचार को दुनिया तक लाने में मदद मिलेगी। संयुक्त राष्ट्र को समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने और विश्वसनीय बने रहने के लिए बदलने की जरूरत है।

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के अस्थायी सदस्य चुने जाने पर गर्मजोशी से स्वागत किया है। अमेरिका ने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की जीत पर हम उन्हें बधाई देते हैं। हम अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मुद्दों पर एक साथ काम करने के लिए तत्पर हैं।

कोरोना अपडेट: देश में पहली बार एक दिन में आए करीब 13 हजार नए केस, अबतक 12237 लोगों की मौत

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में इस वक्त 1 लाख 60 हजार 384 कोरोना के एक्टिव केस हैं. सबसे ज्यादा एक्टिव केस महाराष्ट्र में हैं. दूसरे नंबर पर दिल्ली है. पिछले 24 घंटे में 12 हजार 881 नए मामले सामने आए हैं.

नई दिल्ली: भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की कुल संख्या साढ़े तीन लाख के पार जा चुकी है. स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में अबतक 3 लाख 66 हजार 946 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. इसमें से 12237 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक लाख 94 हजार लोग ठीक भी हुए हैं. पिछले 24 घंटे में रिकॉर्ड 12 हजार 881 से मामले सामने आए हैं और 334 लोगों की मौत हुई है.

दुनिया में चौथे नंबर पर भारत आज पहली बार देश में एक दिन में सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं. वहीं कोरोना संक्रमितों की संख्या के हिसाब से भारत दुनिया का चौथा सबसे प्रभावित देश है. अमेरिका, ब्राजील, रूस के बाद कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में भारत चौथे स्थान पर आ गया है. भारत से अधिक मामले अमेरिका (2,233,957), ब्राजील (960,309), रूस (553,301) में हैं.