PM मोदी, अमित शाह और मुख्यमंत्रियोंं ने दी जवानों को श्रद्धांजलि

नई दिल्ली, ।  लद्दाख सीमा पर गलवन घाटी चीनी सेना के साथ हुई झड़प में शहीद हुए सेना के जवानों को पीएम मोदी, गृह मंत्री अ​मित शाह और 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने कहा कि यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। भारत की अखंडता और संप्रभुता सर्वोच्च है और इसकी रक्षा करने से हमें कोई रोक नहीं सकता। भारत शांति चाहता है, लेकिन भारत उकसाने पर हर हाल में मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। 

लद्दाख सीमा पर गलवन घाटी के पास चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में चीन को भारी नुकसान हुआ है। समाचार एजेंसी एएनआइ ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि सीमा पर हुई इस झड़प में चीन के 40 से ज्यादा सैनिकों के मारे जाने की संभावना है। एएनआइ ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि सीमा पर हुई हिंसक झड़प में चीनी सेना की यूनिट का कमांडिंग अफसर ढेर हुआ है।

इस बीच चीन ने एक बार फिर से भारत पर उल्टा दोष मढ़ने की कोशिश की है। चीन ने अपना पुराना चरित्र दिखाते हुए भारत पर बॉर्डर प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। चीन ने एकबार फिर झूठ का राग अलापने की कोशिश की है। भारत-चीन सीमा पर तनाव के बीच आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों के साथ एक अहम बैठक की । इस अहम बैठक के बाद राजनाथ ने हिंसक झड़प में शहीद जवानों को याद करते हुए कहा है कि देश उनकी बहादुरी और बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। मेरी भावनाएं सैनिकों के परिवार वालों के साथ हैं। हमें भारत के बहादुरों की बहादुरी और साहस पर गर्व है।

एजेंसियां

पीएम मोदी ने 19 जून को सर्वदलीय बैठक बुलाई हो सकता है बड़ा फैसला

दिल्ली
चीन की धोखेबाजी के बाद मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पीएम मोदी ने 19 जून को शाम 5 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि सरकार कोई भी कदम उठाने से पहले सभी दलों को विश्वास में लेना चाहती है। साथ ही सीमा पर सैना को अलर्ट कर दिया गया है। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व अन्य वरिष्ठ मंत्रियों से मुलाकात के बाद फैसला लिया गया है कि चीन के साथ अभी सैन्य वार्ता नहीं की जाएगी। बीते दिनों सीमा पर तनातनी को कम करने के लिए दोनों देशों ने यह वार्ता शुरू की थी, लेकिन सोमवार रात चीन की हरकत के बाद अब इसे रोक दिया गया है। बता दें भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी तनाव उस समय बढ़ गया जब 14-15 जून की रात चीनी सैनिकों ने गलवन घाटी में भारतीय सैनिकों पर अचानक हमला कर दिया। दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुए खूनी संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हुए हैं, जबकि चीन के 43 सैनिक मारे गए हैं। भारत के चार सैनिकों की हालत गंभीर है। आशंका जताई जा रही है कि शहीदों की संख्या 24 पहुंच सकती है।

भारतीय व्यापारियों ने किया चीनी सामानों का बायकाट, अभियान शुरू

नई दिल्ली। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी सेना की आक्रामकता की निंदा करते हुए चीनी सामनों के बहिष्कार का आह्वान किया है।

सीएआईटी ने चीनी सामानों जैसे कॉस्मेटिक, बैग, खिलौने, फर्निचर, जूते-चप्पल, मोबाइल समेत ऐसे करीब 500 श्रेणियों के 3 हजार सामानों की लिस्ट तैयार की है जो अब चीन से नहीं लेंगे। इतना ही नहीं चीनी सामानों का पूर्णतया बायकॉट भी करने का फैसला लिया है।

सीएआईटी ने यह आह्वान ऐसे समय में किया है, जब लद्दाख में गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच गतिरोध सोमवार को हिंसक हो गया, जिसमें दोनों पक्षों की तरफ कई लोग हताहत हुए हैं।

सीएआईटी ने कहा कि मुख्य बात यह है कि 13 अरब डॉलर या लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक की चीनी सामानों का आयात दिसंबर 2021 से घटा दिया जाए।

भारत मौजूदा समय में साल में 5.25 लाख करोड़ रुपये या 70 अरब डॉलर मूल्य की चीनी सामानों का आयात करता है।

सीएआईटी ने एक बयान में कहा, “प्रथम चरण ने सीएआईटी ने चीनी सामानों की 500 से अधिक श्रेणियों को चुना है, जिनमें 3,000 से अधिक वस्तुएं शामिल हैं, जो भारत में भी बनाई जाती हैं, लेकिन सस्ते के लालच में अभी तक चीन से आयात की जा रही हैं।”

बयान में कहा गया है, “इन सामानों निर्माण के लिए किसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी की जरूरत नहीं है और यदि जरूरत भी पड़ती है तो भारत उसके लिए अच्छी तरह तैयार है और भारत में विनिर्मित वस्तुओं का चीनी वस्तुओं के स्थान पर अच्छी तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे इन वस्तुओं के लिए चीन पर भारत की निर्भरता घटेगी।”

बता दें कि चीनी हमले को लेकर पूरे देश में चीन के खिलाफ गुस्से का माहौल है। अब देश में चीनी सामानों के बहिष्कार की मांग तेज हो गई है। सीएआईटी ने ‘भारतीय सामान-हमारा अभिमान’ नाम से अभियान की शुरूआत भी कर दी है।

(इनपुट आईएएनएस के साथ)

भारत चीन संघर्ष: सेना को दी गई ‘इमरजेंसी पावर’, नहीं करना होगा दिल्ली से आदेश का इंतजार

लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात हुए खूनी संघर्ष के बाद भारत ने अब आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। सरकार ने भारतीय सेना को लद्दाख में सेना की मौजूदगी को लेकर खुली छूट दे दी है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने सेना को ‘इमरजेंसी पावर’ दे दी है। केंद्र ने सेना को कहा है कि वे मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए स्वयं फैसला ले सकते हैं। बता दें कि सोमवार रात एलएसी पर मौजूद गलवान घाटी में भारत और चीन सेना के बीच खूनी संघर्ष हुआ, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।

सेना के सूत्रों के अनुसार भारत की पूरी कोशिश है कि वह सीमा पर डटे चीनी सैनिकों को भारतीय सेना की मजबूती का प्रदर्शन करे।

यही ध्यान में रखते हुए सेना को ‘इमरजेंसी पावर’ दे दी गई है। सरकार ने मौजूदा परिस्थिति के अनुसार सीमा पर सैनिकों और हथियारों की मौजूदगी का पूरा अधिकार दे दिया है। माना जा रहा है कि सीमा पर सैनिकों की अधिक मौजूदगी के बाद ही बातचीत की मेज पर भारत का पड़ला चीन के बराबर हो सकता है।

गौरतलब है कि बीते पांच हफ्तों से गलवान घाटी समेत पूर्वी लद्दाख के कई इलाकों में बड़ी संख्या में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने थे। यह घटना भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे के उस बयान के कुछ दिन बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के सैनिक गलवान घाटी से पीछे हट रहे हैं। पिछले एक महीने से ज्यादा वक्त से चल रहे गतिरोध को लेकर दोनों देशों के बीच सेना और डिप्लेमैटिक स्तर पर भी बातचीत चल रही थी। सेना के कमांडर लेवल के अधिकारियों के बीच भी वार्ता हुई थी और चीन के सैनिकों का पीछे हटना भी शुरू हुआ था।

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इंडिया के एटम बम पर SIPRI का बड़ा बयान, चीन और पाक सन्न, इस्लामाबाद से लेकर बीजिंग तक मातम पसरा

नई दिल्ली। इंडिया के एटम बम पर परमाणु हथियारों पर नजर रखने वाली अंतरराष्‍ट्रीय संस्‍था स्टॉकहोम इंटरनैशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के बयान के बाद इमरान खान ही नहीं शी जिनपिंग भी सन्न रह गये हैं। SIPRI के बयान के बाद इस्लामाबाद से लेकर बीजिंग तक मातम पसर गया है। जिन परमाणु बमों की धमकी देकर पाकिस्तान दुनिया को डराता और चीन धमकाता रहा है उनकी हवा निकल गई है। इंडिया के एटम बम के सामने पाकिस्तान ही नहीं चीन के परमाणु बमों की भी कोई औकात नहीं है। भले ही चीन और पाकिस्तान के पास भारत से ज्यादा एटम हैं लेकिन भारत के एटम बमों की मारक क्षमता और टाइमिंग के मुकाबले कहीं नहीं टिकते।

भले ही चीन और पाकिस्तान के पास भारत के मुकाबले परमाणु हथियार ज्यादा हों लेकिन नई दिल्ली अपने न्यूक्लियर वेपन की क्षमता को लेकर आश्वस्त है। यहीं नहीं, भारत लगातार अपने एटमी हथियारों को उन्नत कर रहा है। जमीन से हवा तक भारत की एटमी ताकत बेहद मजबूत है। समुद्र में भी भारत की एटमी ताकत को भेदना आसान नहीं है। दरअसल, परमाणु हथियारों पर नजर रखने वाली अंतरराष्‍ट्रीय संस्‍था स्टॉकहोम इंटरनैशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार चीन लगातार अपने एटमी हथियारों के जखीरे को बढ़ा रहा है। भारतीय डिफेंस सूत्रों के अनुसार, परमाणु हथियारों की गिनती से कुछ नहीं होता है। उन्होंने बताया कि भारत लगातार अपने परमाणु हथियारों को उन्नत बना रहा है। भारत अपने हथियारों को प्रभावकारी, निश्चित और सेंकडों में हमला की मारक क्षमता से लगातार अपडेट कर रहा है।

SIPRI की रिपोर्ट उस समय आई है जब पूर्वी लद्दाख पर चीन के साथ भारत की तनातनी चल रही है। भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC)है। उधर पाकिस्तान सीमा पार से लगातार सीजफायर उल्लंघन कर रहा है।

इधर, भारत अग्नि मिसाइलों को लगातार अपडेट कर रहा है। जमीनी ताकत मजबूत करने के लिए भारत तेजी से काम कर रहा है। 700 किलोमीटर तक मार करने वाले अग्नि-1 से लेकर 5,000 किलोमीटर तक मार करने वाली अग्नि-V मिसाइल तैयार है। यही नहीं, हवा में भारत पड़ोसी देशों को मात देने की रणनीति बना चुका है। लड़ाकू विमान मिराज-2000 और जगुआर को एटम बम गिराने की क्षमता से लैस किया जा चुका है। परमाणु हथियारों से लैस भारत की पहली सबमरीन INS अरिहंत 2018 में भी भारतीय नौसेना में शामिल हो चुका है। 3,500 किलोमीटर तक मार करने वाली K-4 सबमरीन बलिस्टिक मिसाइल का दो बार परीक्षण इस साल जनवरी में किया जा चुका है और जल्द ही इसका उत्पादन शुरू हो सकता है। जल्द ही K-4 मिसाइल 750 किलोमीटर तक मार करने वाली K-15 मिसाइल की जगह ले लेगा।

पाकिस्तान की नौसेना के भारत की नौसेना के सामने अभी बेहद कमजोर है। हालांकि पाकिस्तान ने 450 किलोमीटर तक मार करने वाली सबमरीन बलिस्टिक मिसाइल बाबर-3 का विकास जरूर किया है और इसका पहला परीक्षण 2017 में किया गया था। हालांकि चीन इस मामले में आगे है। पेइचिंग जिन क्लास सबमरीन से लैस है उसके पास 7,400 किलोमीटर तक मार करने वाली JL-2 बलिस्टिक मिसाइल है। हां ये जरूर है कि भारत चीन, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया के बीच गुप्त रूप से चल रहे मिसाइल समझौते को लेकर चिंतित है।

कोरोना का कहर: रविवार को टोटल लॉक डाउन रहेगा

ग्वालियर ।  जिले में लगातार बढ़ रहे कोरोना प्रकोप और लोगो द्वारा इसके लिए बताए गए एहतियात बरतने में कई जा रही लापरवाही के चलते जिला प्रशासन अब सख्ती के मूड में आ गया है । आज प्रशासन ने घोषणा की है कि आगामी रविवार से हर रविवार को शहर में टोटल लॉक डाउन किया जाएगा ।

यह घोषणा आज जिला प्रशासन ने की है । प्रशासन के अनुसार अगले रविवार से हर रविवार को शहर के पूरी तरह से कर्फ्यू जैसा लॉक डाउन रहेगा । इसमें किसी भी स्थिति में लोगो को अनावश्यक आवाजाही पर रोक रहेगी । यातायात भी बन्द रहेगा और मेडिकल इमरजेंसी को छोड़कर बाकी सड़को पर निकलने वाला के खिलाफ पुलिस कड़ी कार्यवाही करेगी । इस दिन दुकाने आदि भी पूरी तरह बन्द रहेंगी । सुबह सात से नौ बजे तक दूध, ब्रेड और अंडे आदि की बिक्री की जा सकेगी।शहर के पेट्रोल पंप और मेडिकल स्टोर लॉकडाउन के दौरान खुले रहेंगे ।जिला प्रशासन ने किए आदेश जारी 

भारतीय एवं चीनी सैनिकों के शहीद होने के बाद पीएम मोदी ने बुलाई आपात बैठक

नई दिल्ली। लद्दाख सीमा पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए। सूत्रों द्वारा बताए गए करीब 40 से 50 चीनी सैनिक भी मारे गए हुए इस घटना पीएम नरेंद्र मोदी ने आपात बैठक बुलाई है। यह बैठक पीएम आवास पर बुलाई गई और इसमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल थे। इस बैठक भारत-चीन की स्थिति पर चर्चा हुई।

बता दें कि लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात चीनी सैनिकों के साथ हिंसक टकराव के दौरान अब तक 20 भारतीय जवान शहीद हो गए हैं।

वहीं भारत ने भी दावा किया है कि 43 चीनी सैनिक भी हताहत हुए हैं। इससे पहले खबरें आ रही थीं कि भारतीय सेना के 34 जवान लापता हैं। लेकिन, इस की पुष्टि नहीं की गई थी, लेकिन रात होते-होते सरकारी सूत्रों ने कम से कम 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने की बात कही है।

इससे पहले सेना ने कहा था कि हिंसक टकराव के दौरान 1 अधिकारी व 2 जवान शहीद हुए जबकि चीन को भी नुकसान हुआ है।

चीनी पत्रकार का दावा, चीन इसलिए नहीं बता रहा लद्दाख में मारे गए अपने सैनिकों की संख्या

बीजिंग: पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात को चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना के कुल 20 सैनिक शहीद हो गए। इस झड़प में चीन को भी काफी नुकसान हुआ है और उसके 43 सैनिक हताहत बताए जा रहे हैं। हालांकि चीन ने अभी तक अपने मारे गए सैनिकों के बारे में चुप्पी साध रखी है। इस बीच एक चीनी पत्रकार ने दावा किया है कि बीजिंग नहीं चाहता कि दोनों देशों के लोगों में युद्ध का उन्माद फैले, इसलिए उसने अपने हताहत सैनिकों की संख्या नहीं बताई है।

क्या है चीनी पत्रकार का दावा

चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के चीनी और अंग्रेजी संस्करण के एडिटर-इन-चीफ हू जिजिन ने कहा कि बीजिंग ने सद्भावना बनाए रखने के लिए अपने हताहत सैनिकों की संख्या नहीं बताई है।

जिजिन ने कहा, ‘चीन ने भारतीय सैनिकों के साथ हुई झड़प में मारे गए PLA के सैनिकों की संख्या जारी नहीं की। मेरा मानना है कि चीन नहीं चाहता कि दोनों देशों के लोग अपने-अपने देशों के हताहतों की संख्या की तुलना करें और जनता में युद्धोन्माद फैले। यह बीजिंग की तरफ से सद्भावना की पेशकश है।’

चीन का एक और प्रॉपेगैंडा 

खबरों के मुताबिक, चीन के कम से कम 43 सैनिक हताहत हुए हैं, लेकिन ऐसा लगता है वह इस बारे में दुनिया को अंधेरे में रखना चाहता है। क्योंकि यदि संख्या जारी होती है तो चीन में पहले से बिगड़े हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। साथ ही यह भारत की सीमा पर कब्जे की नीयत से डटे चीन की सद्भावना की बात कहकर खुद को पीड़ित के रूप में दिखाने की चाल लग रही है। यही वजह है कि चीन की सरकारी मीडिया ने पहले तो कहा कि हम अभी चीनी हताहतों की संख्या नहीं बता सकते, और बाद में इसपर चुप्पी ही साध ली।

कोरोना अपडेट: देश में पहली बार एक दिन में 2000 मौतें, पिछले 24 घंटे में 10974 नए मामले सामने आए

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में इस वक्त 1 लाख 55 हजार 227 कोरोना के एक्टिव केस हैं. सबसे ज्यादा एक्टिव केस महाराष्ट्र में हैं. दूसरे नंबर पर दिल्ली है. पिछले 24 घंटे में 10 हजार 974 से मामले सामने आ चुके हैं.

नई दिल्ली: भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की कुल संख्या साढ़े तीन लाख के पार जा चुकी है. स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में अबतक 3 लाख 54 हजार 065 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. इसमें से 11903 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक लाख 86 हजार लोग ठीक भी हुए हैं. पिछले 24 घंटे में 10 हजार 974 से मामले सामने आए हैं और रिकॉर्ड 2003 लोगों की मौत हुई है. ध्यान रहे कि देश में एक दिन में 2000 मौतों का इतना बड़ा आंकड़ा इसलिए आया है कि क्योंकि कल महाराष्ट्र ने राज्य के मौत के आंकड़े में करीब 1400 मौतें और जोड़ दी थी.