रेत खनन के चार आरोपियों ने 22 साल के युवक की पीट-पीटकर हत्या की

जबलपुर. जबलपुर के भेड़ाघाट इलाके में रेत खनन से जुड़े मफियाओं ने 22 साल के युवक की हत्या कर दी। आरोपियों ने परमहंस रोड पर मृतक के साथ बेरहमी से मारपीट की। दबंग कुछ दिनों से उसे लगातार धमकियां दे रहे थे। पुलिस ने चारों आरोपियों पर हत्या समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है।

डीएसपी भेड़ाघाट पूजा पांडेय ने बताया कि लम्हेटाघाट निवासी 22 साल का स्वदीप पटेल रेत का कारोबार करता था। वह रात करीब 11 बजे अपने दोस्तों के साथ परमहंस आश्राम रोड पर खाना खा रहा था। इसी दौरान उसका रेत का कारोबार करने वाले अमित सोनकर, पवन सोनकर, दुर्गेश झारिया और तारेंद्र लोधी से झगड़ा हो गया। चारों कई दिनों से स्वदीप को धमका रहे थे। उन्होंने स्वदीप से मारपीट शुरू कर दी। आरोपियों ने उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी।

घटना की सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंच गए। पुलिस को घटना के बारे में मृतक के परिजन ने सूचना दी। पुलिस फिलहाल किसी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। परिजन ने आरोप लगाए कि स्वदीप को कई दिनों से लगातार धमकाया जा रहा था। पूरा मामला रेत के खनन से जुड़ा होने के कारण अब पुलिस भी इसे रेत के अवैध खनन से जोड़कर देख रही है।

नेपाल के ‘नक्शे’ बाजी की निकली हवा, ठोस सबूत के बिना ही किया था दावा

नेपाल ने दावे की पुष्टि के लिए समिति का गठन किया

‘बाहरी हस्तक्षेप’ के सेना प्रमुख के दावे को मिला बल

भारत के कुछ हिस्से को अपना होने का दावा करते हुए नेपाल सरकार ने जो नक्शाबाजी का जो पैंतरा दिखाया था उसकी हवा सरकार के ही फैसले से निकल गई है.

नेपाल की कैबिनेट ने गुरुवार को एक निर्णय किया कि जिसमें भारत के जिन भूभाग पर वह दावा कर रहा है उसका प्रमाण संकलन करने के लिए 9 लोगों की एक समिति का गठन किया गया है.

नेपाल सरकार के प्रवक्ता युवराज खतिवडा ने कैबिनेट बैठक का फैसला सुनाते हुए पत्रकार सम्मेलन में कहा कि सरकार ने भारत के साथ सीमा विवाद पर ठोस प्रमाण और दस्तावेज जुटाने के लिए 9 सदस्यों वाली विशेषज्ञों की एक टीम का गठन किया गया है.

खतिवडा के मुताबिक नेपाल सरकार की आधिकारिक थिंकटैंक संस्था नीति अनुसंधान प्रतिष्ठान के अध्यक्ष डॉक्टर विष्णुराज उप्रेती को इसका संयोजक बनाया गया है. इस समिति में सीमा विशेषज्ञ, भूगोल विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय कानून के ज्ञाता, पुरातत्वविद् आदि को रखा गया है.

हालांकि सरकार के इस फैसले पर कूटनीतिक मामलों के जानकार हैरानी में हैं. नेपाल के जाने माने कूटनीतिक विशेषज्ञ डॉक्टर अरुण सुवेदी ने कहा कि यह आश्चर्य कि बात है कि जो काम पहले करना चाहिए वो काम अब किया जा रहा है. पहले नक्शा प्रकाशित कर फिर संसद में उस पर सरकार संशोधन प्रस्ताव लेकर आई और अब प्रमाण ढूंढने का काम कर रही है. जबकि पहले प्रमाण जमा कर कूटनीतिक वार्ता करनी चाहिए थी.

सरकार के इस फैसले से एक बात तो तय हो गई है कि नेपाल अब तक भारत के जिन हिस्सों पर दावा कर रहा था उसका ठोस प्रमाण या दस्तावेज उसके पास नहीं हैं. यानी नेपाल अब तक जो नक्शेबाजी कर रहा था वह बिना किसी सबूत या प्रमाण के ही कर रहा था.

सवालों के घेरे में नेपाल सरकार

नेपाल की ओली सरकार के इस फैसले से कई सवालों के घेरे में आ गई है. पहला सवाल- जब नेपाल के पास जमीन का दस्तावेज है ही नहीं तो उसने नक्शा निकालने में इतनी जल्दबाजी क्यों की?

दूसरा सवाल- बिना प्रमाण और दस्तावेज के नेपाल ने किसके उकसाने पर यह हरकत की है?

तीसरा सवाल- क्या नेपाल के द्वारा जानबूझकर इस समय‌ सीमा विवाद किसी और को खुश करने और भारत को परेशान किए जाने के भारतीय सेना प्रमुख के आरोप को इससे बल मिला है?

चौथा सवाल- क्या नेपाल की ओली सरकार ने अपनी नाकामी, आंतरिक कलह और डगमगाती सत्ता को बचाने के लिए यह कदम उठाया था?

चीन को दो टूक, लद्दाख सीमा पर आगे बढ़े सैनिक नहीं हटेंगे पीछे

नई दिल्ली 
लद्दाख सीमा पर बातचीत के बीच चीन कोई मनमानी न कर पाए इसके लिए भारतीय सेना पूरी तैयार है। सीमा विवाद को सुलझाने के लिए अधिकारियों की बैठकों का दौर जारी है लेकिन इस बीच भी भारत चीन पर आंख मूंद कर भरोसा नहीं करनेवाला है। भारत ने चीन को दो टूक जवाब दिया है कि जबतक LAC के करीब आए उसके सैनिकों को नहीं हटाया जाता, तबतक भारतीय सैनिक भी एक इंच पीछे नहीं हटेंगे।
पढ़ें- भारत और चीन बातचीत से ही निकालेंगे लद्दाख विवाद का हल! 

गुरुवार को हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को सूत्रों से यह जानकारी मिली कि आर्मी यूनिट और एयरफोर्स तीन सेक्टर्स में पूरी तरह तैयार हैं। ये तीनों सेक्टर 3,488 किलोमीटर में फैली लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल (LAC) में आते हैं। इसमें वेस्टर्न (लद्दाख), मिडिल (उत्तराखंड, हिमाचल), ईस्टर्न (सिक्किम, अरुणाचल) शामिल हैं। इस बीच बातचीत और सीमा पर चीनी सैनिकों की हलचल पर पूरी नजर है। इन बातों पर भी नजर है कि चीन किसी नए इलाके पर अपना हक जताने की कोशिश न करने लगे। 

रखी शर्त, पहले चीन हटाए अपने सैनिक 
सेना की तैयारी पर बात करते हुए एक सूत्र ने बताया कि लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक हमारे सैनिक ऐसे ही तैयार रहेंगे, यह स्थिति तबतक ऐसी रहेगी जबतक चीन एलएसी के पास आए अपनी सेना को हटा नहीं लेता। भारतीय सेना किस तरह आगे बढ़ी है इसका एक उदाहण देखिए। जैसे 33 क्रॉप्स के जो जवान ईस्टर्न सेक्टर में तैनात थे, उन्होंने अपनी यूनिट को 17 (गंगटौक), 27 (कलिपॉन्ग) और 20 (बिनागुरी) पहाड़ श्रंखलाओं में आगे भेज दिया है। हर यूनिट में 10 से 12 हजार तक जवान हैं। 

यह सब लद्दाख में शुरू हुई चीनी गतिविधियों के बाद ही किया गया है। वहां चीन ने पैंगोंग सो झील, ग्वालन घाटी क्षेत्र ने सैन्य गतिविधियां तेज की थीं। इससे पहले नाकू ला (सिक्किम) में भी ऐसा किया गया था। इसके बाद भारतीय सेना ने भी लेह में तैनात बटालियन की मदद को अतिरिक्त जवान भेजे थे। पिछले महीने यह खबर आई थी कि भारत ने पैदल सैनिकों की 3 डिविजन वहां भेजी हैं। इनके साथ अर्टलरी गन और कुछ भारी हथियार सिस्टम भी शामिल थे। लेकिन इसके बाद चीन के तेवर थोड़े ढीले पड़ गए और बातचीत का दौर जारी है, जिसका जल्द समाधान निकल सकता है। 

खुद तो मरा, असलम बाबा पर कइयों को कोरोना का ‘किस’ दे गया यह असलम बाबा

रतलाम 
एमपी के रतलाम जिले में झांड-फूंक करने वाले एक बाबा की कोरोना से मौत हो गई है। हाथ चूम कर इलाज करने वाले बाबा खुद भी कोरोना से मरे हैं और 23 लोगों को संक्रमित कर गए हैं। उसके बाद से रतलाम में हड़कंप मचा हुआ है। बाबा की ख्याति सिर्फ रतलाम शहर में ही नहीं थी, बल्कि आसपास के इलाकों से भी लोग इनके पास अंधविश्वास के चक्कर में इलाज करवाने आते थे। बाबा हाथ को चूम कर बड़ी-बड़ी बीमारियों को दूर करने का दावा करता था।

इलाके में इसकी पहचान असलम बाबा के रूप में थी। असलम का असली नाम अनवर शाह है। रतलाम के नयापुरा इलाके में करीब 15 वर्षों से अपने परिवार के साथ रह रहा था। असलम यहीं रहकर झाड़-फूंक का करता था। सीधे-साधे लोग इसके चक्कर में फंस कर इलाज करवाने आते थे। असलम बीमारी दूर करने के नाम पर लोगों से मोटी रकम भी ऐंठता था। कोरोना महामारी के बीच भी इसने बीमारी ठीक करने का दावा किया था। 

हाथ चूम कर करता था इलाज 
स्थानीय लोग बताते हैं कि बाबा अपने भक्तों का इलाज हाथ चूम कर करते थे। साथ ही पानी में फूंक मार कर भक्तों को पिलाते थे। बाबा के पास हर रोग का इलाज था। अंधविश्वास के चक्कर में लोग अनवर शाह के पास चले आते थे। हालांकि बाबा खुद कैसे कोरोना से संक्रमित हुआ, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। तबीयत खराब होने के बाद इसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 

4 जून को मौत 
असलम बाबा की 4 जून को मौत हो गई। उसके बाद जिले के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग को पता चला कि यह झांड़-फूंक करने का काम करता था। उसके बाद बाबा के संपर्क में आए लोगों की तलाश शुरू हुई। अब तक बाबा के 23 भक्त कोरोना से संक्रमित हैं, जिसमें 7 इसके परिवार के लोग हैं। ज्यादातर लोग तो डर से सामने आ ही नहीं रहे हैं। 

चेन का पता लगा रही प्रशासन 
असलम बाबा के पास हर दिन दर्जनों लोग उसके जाल में फंसकर इलाज के लिए आते थे। ऐसे में प्रशासन के सामने सवाल है कि बाबा कोरोना से संक्रमित कैसे हुए। नयापुरा इलाके में कोरोना के ज्यादातर जो मामले हैं, वे लोग बाबा के ही संपर्क में आए थे। प्रशासन अब यह पता करने में जुटी है कि बाबा को भक्तों से कोरोना हुआ या फिर बाबा ने भक्तों को कोरोना बांटा है। 

29 बाबाओं को उठाया 
असलम बाबा की कोरोना से मौत के बाद रतलाम शहर में हड़कंप मचा हुआ है। ऐसे में प्रशासन ने एहतियात के तौर पर 29 और बाबाओं को उठा कर क्वारंटीन किया है। ये बाबा शहर में झाड़-फूंक करने का काम करते थे। क्वारंटीन के दौरान जिनमें बीमारी के लक्षण नजर आएंगे, उनका कोरोना टेस्ट करवाया जाएगा। जिला प्रशासन ने कहा है कि बाबाओं से खतरा इसलिए है कि ये झाड़ फूंक करते हैं और कई तरह की चीजें भी देते हैं। इनसे संक्रमण का खतरा ज्यादा है। 

चीन में उठी अजीब मांग, महिलाओं को मिले एक से अधिक पति रखने का हक

बीजिंग
चीन में अविवाहित पुरुषों की बढ़ती तादाद संकट का सबब बनती जा रही है। लैंगिक असमानता की वजह से चीन में हालात इतने ज्‍यादा खराब हो गए हैं कि वर्ष 2050 तक 3 करोड़ पुरुष अविवाहित रह जाएंगे। इस संकट के समाधान के लिए चीन के एक प्रफेसर ने अधिकारियों को एक क्रांतिकारी बदलाव करने का सुझाव दिया है। उन्‍होंने कहा कि सरकार को महिलाओं को दो या दो से अधिक पति रखने का अधिकार देना चाहिए।
चीनी अर्थशास्‍त्री यी कांग एनजी ने कहा कि महिलाओं को कुछ समय के लिए दो या उससे अधिक पति रखने का अधिकार देने से इस सामाजिक समस्‍या का समाधान हो सकता है। उन्‍होंने कहा कि उनके इस सुझाव को अगर मान ल‍िया जाता है तो देश में बढ़ रही अविवाहित लोगों की तादाद को पत्‍नी और खुशी मिल सकेगी। प्रफेसर एनजी फूदान यूनिवर्सिटी में प्रफेसर हैं।

‘योग्‍य दुलहन की तलाश करना बेहद कठिन काम’
प्रफेसर एनजी ने कहा कि बढ़ती प्रतिस्‍पर्धा की वजह से अविवाहित दूल्‍हों के लिए आने वाले समय में योग्‍य दुलहन की तलाश करना बेहद कठिन काम होगा। उन्‍होंने कहा कि अधेड़ उम्र के अविवाहित व्‍यक्ति के लिए दुलहन का दिल जीतने के लिए युवाओं से प्रतियोगिता करनी होगी। वह भी तब जब दुलहनों की तादाद बहुत कम है। उन्‍होंने कहा, ‘(यदि पुरुष की) स्‍वाभाविक जैविक और मनोवैज्ञानिक आवश्‍यकता ठीक ढंग से पूरी नहीं होगी तो इसका निश्चित रूप से इसका उनकी खुशी पर बुरा असर पड़ेगा।’

चीनी अर्थशास्‍त्री ने इस संकट के समाधान के लिए दो सुझाव द‍िए हैं। पहला-वेश्‍यावृत्ति को कानूनी रूप दिया जाए और दूसरा बहुविवाह प्रथा को मंजूरी। इसके तहत महिला को कानूनी तरीके से दो या उससे अधिक पति रखने का हक दिया जाए। चीनी कानून के मुताबिक अभी तक केवल एक शादी की ही अनुमति है। उन्‍होंने कहा कि तिब्‍बत में पहले से ही यह प्रथा चली आ रही है। उन्‍होंने कहा कि उनके जैसे कई लोग हैं जो यह चाहते हैं कि पत्‍नी न होने से अच्‍छा है कि पत्‍नी को साझा कर ल‍िया जाए।

दिग्विजय ने शिवराज के ऑडियो पर कहा- सरकार गिराने में मोदी और शाह के शामिल होने का भंडाफोड़ करने के लिए आपका धन्यवाद

भोपाल. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कथित ऑडियो वायरल होने के बाद सियासी पारा बढ़ गया है। अब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की सरकार गिराने के षड्यंत्र में मोदी और शाह भी शामिल थे, आपने (शिवराज) इसका भंडाफोड़ कर दिया। इसके लिए शिवराजजी आपका धन्यवाद। उन्होंने ट्वीट के जरिए कहा- अब यह साफ हो गया है कि जब मोदीजी को कोरोना से निपटने के लिए समय देना था, तब वे मध्यप्रदेश की जनता द्वारा चुनी हुई सरकार को गिराने में व्यस्त थे।

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में शिवराज सिंह चौहान को ‘मामा’ संबोधन करते हुए कहा कि आपने स्वीकार किया कि आपके केंद्रीय नेतृत्व मोदी-शाह ने सरकार गिरवाई। अब यह भी स्वीकार कर लेते कि कमलनाथ सरकार ने रेत माफिया, बिल्डर माफिया, मिलावट करने वाले माफिया और व्यापम, ई-टेंडरिंग घोटालों पर सख्त कार्यवाई शुरू की, जिससे भाजपा घबराई हुई थी। इधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सियासी हंगामे के बीच ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि, “पापियों का विनाश तो पुण्य का काम है। हमारा धर्म तो यही कहता है।” इसे मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को गिराने से जोड़ कर देखा जा रहा है।।

कमलनाथ ने कहा था- उनके झूठ की पोल खुल गई है
इससे पहले बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था कि मै तो शुरू से ही कह रहा था कि भाजपा ने मेरी बहुमत की सरकार को साजिश-षड्यंत्र और विधायकों को प्रलोभन देकर गिराया है। उन्होंने कहा था कि अब तो इस बात की पुष्टि भी हो गई और सच्चाई भी प्रदेश की जनता के सामने आ गई कि मेरी सरकार को गिराने के लिए किस तरह की साजिश की गई और इसमें कौन- कौन शामिल था। उनके झूठ की पोल भी अब सबके सामने आ चुकी है।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा- क्या भाजपा में नैतिकता खत्म हो चुकी है ?

वायरल ऑडियो इंदौर के रेजीडेंसी का था, जहां कार्यकर्ताओं से मिले थे शिवराज
बताया जा रहा है कि वायरल ऑडियो इंदौर की रेजीडेंसी का है। यहां शिवराज सांवेर के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उनके साथ पूर्व मंत्री तुलसी सिलावट भी मौजूद थे। तुलसी शिवराज कैबिनेट में मंत्री हैं। इस वायरल ऑडियो की सत्यता की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

वायरल ऑडियो में शिवराज ने क्या कहा?

“केंद्रीय नेतृत्व ने तय किया कि सरकार गिरनी चाहिए। यह बर्बाद कर देगी, तबाह कर देगी। और आप बताओ कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और तुलसी भाई के बिना सरकार गिर सकती थी क्या‌? और कोई तरीका नहीं था। ये तो मंत्री वहां भी थे। मुख्यमंत्री बनने की तो नहीं सोची थी। अब कांग्रेस वाले कह रहे हैं कि गड़बड़ कर दी। घोटाला कर दिया।

मैं आज पूरे विश्वास और ईमानदारी के साथ इस मंच से कह रहा हूं, धोखा कांग्रेस ने दिया। धोखा सिंधिया और तुलसी सिलावट ने नहीं दिया। दर्द और कसक की वजह से मंत्री पद छोड़ दिया, जबकि लाेग सरपंच तक का पद नहीं छोड़ते। आज सिंधिया जी और तुलसी भाई का मैं इसलिए स्वागत करता हूं कि भाजपा की सरकार बनाने के लिए मंत्री पद छोड़कर आए। और अब हो रहे हैं चुनाव।

ईमानदारी से बताओ कि तुलसी अगर विधायक नहीं बने तो हम मुख्यमंत्री रहेंगे क्या? भाजपा की सरकार बचेगी क्या? हर भाजपा कार्यकर्ता की ड्यूटी है और कर्तव्य है कि तुलसी सिलावट चुनाव नहीं लड़ रहा, आप सब चुनाव लड़ रहे हैं। हम उम्मीदवार हैं।”

राजस्थान में ऑपरेशन लोटस का खतरा जयपुर में रिजॉर्ट पॉलीटिक्स शुरू

राजस्थान में कांग्रेस पर ऑपरेशन लोटस का खतरा मंडरा रहा है. एक बार फिर राज्य में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज विधायकों के साथ बैठक करेंगे. इसके बाद सीएम अशोक गहलोत, डिप्टी सीएम सचिन पायलट, कांग्रेस महासचिव अविनाश पांडेय, राज्यसभा प्रत्याशी केसी वेणुगोपाल और प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे.

गौरतलब है कि जयपुर के शिव विलास रिजॉर्ट में राजस्थान कांग्रेस को बचाने को लेकर माथापच्ची का दौर जारी है. राजस्थान में भी मध्य प्रदेश जैसे हालात बन रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व एक्शन में आ गया है और आनन-फानन में केसी वेणुगोपाल को दिल्ली से जयपुर भेजा गया है

गहलोत और पायलट के बीच मतभेद दूर!

बताया जा रहा है कि केसी वेणुगोपाल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच मतभेदों को लेकर बात की. दरअसल, सीएम अशोक गहलोत ने आरोप लगाया था कि कुछ विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं, जिन्हें पैसे का ऑफर दिया जा रहा है. इसके चलते विधायकों को रिजॉर्ट में ठहराया गया है.

सीएम अशोक गहलोत के आरोप पर सचिन पायलट खेमा भड़क गया. सचिन पायलट के समर्थक विधायकों ने मांग की कि किसके पास फोन आए हैं? यह साफ होना चाहिए क्योंकि ऐसा लग रहा है कि अफवाह के दम पर माहौल बनाया जा रहा है. इसके बाद अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मीटिंग हुई.

क्या है पूरा मामला

राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीट में चुनाव होना है. विधानसभा में सीटों के गणित के आधार पर ये तय था कि दो पर कांग्रेस और बची हुई एक सीट पर बीजेपी का उम्मीदवार राज्यसभा पहुंच सकता है. कांग्रेस ने केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी को उम्मीदवार बनाया, लेकिन बीजेपी ने बड़ा दांव चल दिया.

बीजेपी ने एक की जगह अपने दो उम्मीदवार राजेंद्र गहलोत और ओंकार सिंह लखावत को उतार दिया. अब कांग्रेस को डर है कि बीजेपी अपने दूसरे उम्मीदवार की जीत के लिए कांग्रेस के विधायकों में तोड़फोड़ का खेल कर सकती है. इसके बाद सभी कांग्रेस और समर्थन देने वाले विधायकों को शिव विलास रिजॉर्ट में ठहराया गया है.

इसके साथ ही कांग्रेस ने हालातों को देखते राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भारतीय ट्राइबल पार्टी के 2 विधायकों को लेकर अपने साथ रिजॉर्ट पहुंचे. मध्य प्रदेश और गुजरात के विधायकों को भी राजस्थान में ठहराया गया था. अब खुद राजस्थान सरकार को ऑपरेशन लोटस का खौफ सता रहा है और वो पार्टी को बचाने की कोशिश कर रही है.

अगले 48 घंटों में मॉनसून झारखंड, दक्षिणी मध्य प्रदेश, बिहार, पूरे ओडिशा और छत्तीसगढ़ में दस्तक दे सकता है.

मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई हिस्सों में अलर्टगोवा और ओडिशा में भी समुद्र तट से दूर रहने की हिदायत

लंबे इंतजार के बाद दक्षिण पश्चिम मॉनसून ने गुरुवार को गोवा और महाराष्ट्र में दस्तक दे दी है. अगले 2 दिनों में तेजी से इसके और आगे बढ़ने की उम्मीद है. मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में दक्षिण एवं तटीय महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा होने का पूर्वानुमान जताया है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई से मौसम विभाग के मुंबई केंद्र के उप महानिदेशक के एस होसलीकर ने कहा, ‘दक्षिण पश्चिम मॉनसून महाराष्ट्र पहुंच गया है. यह हरनई (तटीय रत्नागिरि जिले में), सोलापुर (दक्षिण महाराष्ट्र में), रामागुंडम (तेलंगाना) और जगदलपुर (छत्तीसगढ़) के ऊपर से गुजर रहा है.’ मौसम विभाग ने महाराष्ट्र और गोवा के कुल इलाकों में भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है.

मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटों के दौरान आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, विदर्भ, मराठवाड़ा, केरल, तटीय कर्नाटक, गंगीय पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है. मौसम विभाग का अनुमान है कि 14 जून तक मुंबई में भारी बरसात लोगों के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है. होसलीकर ने कहा, ‘अगले 48 घंटों में महाराष्ट्र के कुछ और हिस्सों में इसके आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं. भारी वर्षा की चेतावनी जारी की जाती है.’

तटीय सिंधुदुर्ग जिले (जिसकी सीमा गोवा से लगती है) के कुछ हिस्सों में गुरुवार को बारिश हुई. यह जिला महाराष्ट्र के दक्षिणी छोर पर स्थित है. साथ ही अंबोली, वेंगुरला और अन्य पड़ोसी इलाके में भी बारिश हुई है. इधर, पिछले कुछ दिनों में मुंबई और उसके उपनगरीय क्षेत्रों सहित राज्य के कई हिस्सों में मॉनसून-पूर्व वर्षा हुई है. अगले 48 घंटों में मॉनसून झारखंड, दक्षिणी मध्य प्रदेश, बिहार, पूरे ओडिशा और छत्तीसगढ़ में दस्तक दे सकता है.

चीन के सामने डटी हैंं है हमारी सेना….

दिल्ली
लद्दाख सीमा पर बातचीत के बीच चीन कोई मनमानी न कर पाए इसके लिए भारतीय सेना पूरी तैयार है। सीमा विवाद को सुलझाने के लिए अधिकारियों की बैठकों का दौर जारी है लेकिन इस बीच भी भारत चीन पर आंख मूंद कर भरोसा नहीं करनेवाला है। भारत ने चीन को दो टूक जवाब दिया है कि जबतक LAC के करीब आए उसके सैनिकों को नहीं हटाया जाता, तबतक भारतीय सैनिक भी एक इंच पीछे नहीं हटेंगे।

गुरुवार को हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को सूत्रों से यह जानकारी मिली कि आर्मी यूनिट और एयरफोर्स तीन सेक्टर्स में पूरी तरह तैयार हैं। ये तीनों सेक्टर 3,488 किलोमीटर में फैली लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल (LAC) में आते हैं। इसमें वेस्टर्न (लद्दाख), मिडिल (उत्तराखंड, हिमाचल), ईस्टर्न (सिक्किम, अरुणाचल) शामिल हैं। इस बीच बातचीत और सीमा पर चीनी सैनिकों की हलचल पर पूरी नजर है। इन बातों पर भी नजर है कि चीन किसी नए इलाके पर अपना हक जताने की कोशिश न करने लगे।

रखी शर्त, पहले चीन हटाए अपने सैनिक
सेना की तैयारी पर बात करते हुए एक सूत्र ने बताया कि लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक हमारे सैनिक ऐसे ही तैयार रहेंगे, यह स्थिति तबतक ऐसी रहेगी जबतक चीन एलएसी के पास आए अपनी सेना को हटा नहीं लेता। भारतीय सेना किस तरह आगे बढ़ी है इसका एक उदाहण देखिए। जैसे 33 क्रॉप्स के जो जवान ईस्टर्न सेक्टर में तैनात थे, उन्होंने अपनी यूनिट को 17 (गंगटौक), 27 (कलिपॉन्ग) और 20 (बिनागुरी) पहाड़ श्रंखलाओं में आगे भेज दिया है। हर यूनिट में 10 से 12 हजार तक जवान हैं।