चौधरी राकेश सिंह का दिग्विजय पर करारा हमला । बोले – वे कांग्रेस में क्या है ?

एक तरफ कांग्रेस उपचुनाव से पहले बीजेपी में सेंधमारी कर रही है, तो वही मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी में बड़ी फूट पैदा हो गयी है। पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह ने  ग्वालियर में  मीडिया से बात करते हुए बड़ा बयान दिया है। चौधरी राकेश सिंह ने कहा है कि मैं कांग्रेस पार्टी में नही आ जाऊं, इसलिए तीन बड़े नेता मेरे लिए इकट्ठा हो रहे है… जिनमें दिग्विजय सिंह, अजय सिंह और  डॉ गोविंद सिंह शामिल है। इन लोगों को चौधरी राकेश सिंह के नाम से इतना भय सता रहा है कि वह रात दिन मेरे नाम की चर्चा कर रहे है। जबाकि में कांग्रेस ज्वाइन कर चुका हूं, राहुल गांधी जी ने क्षेत्र में काम करने के लिए भी बोल दिया है… लेकिन सवाल ये है कि अब जो दिग्विजय सिंह मेरे खिलाफ बोल रहे हैं, वह किस अधिकार से बोल रहे हैं, यह क्या पार्टी के अनुशासनहीनता नहीं है…. क्योंकि मैं कांग्रेस मैन हूं, कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ा हुआ हूं, 1979 से श्यामाचरण शुक्ला के साथ काम कर रहा हूं, हां एक बार गलती हुई है, उसके लिए माफी मांगता हूं। इसके साथ ही चौधरी राकेश सिंह ने अजय सिंह पर भी निशाना साधा है…. चौधरी राकेश सिंह ने कहा है कि अजय सिंह मेरा विरोध कर रहे हैं… ये वहीं अजय सिंह है जो अर्जुन सिंह की राजनीतिक विरासत को संभाल नही सकें, अजय सिंह तीन बार चुनाव हार गए और वह मेरा विरोध कर रहै है….. ।

उंन्होने  दिग्विजिय सिंह पर भी आरोप लगाया । साथ ही मेहगांव विधानसभा सीट से कांग्रेस से अपनी दावेदारी पेश कर रहे है।
चौधरी राकेश सिंह ने कहाकि  उनका फैसला की तीन लोग नही कांग्रेस करेगी जिसके नेता सोनिया जी,राहुल जी और कमलनाथ जी करेंगे । राहुल गांधी जी जब भिण्ड आये थे तो मैं मंच पर उनके साथ था । उंन्होने कहा था पार्टी में काम करिए ।  कुछ समय पहले मुझे कमलनाथ जी ने बुलाया और पूछा कि क्या तुम चुनाव लड़ने के इक्छुक हो मैने कहाकि पार्टी कहेगी तो लड़ूंगा अन्यथा जो काम देगी वह करूंगा ।

उंन्होने यह भी कहाकि में इस मामले को मीडिया में नही लाना चाहता था लेकिन जब दिग्विजय सिंह ने इस पर प्रेस कांफ्रेस की तो मुझे मजबूरी में पार्टी फोरम से बाहर आकर मीडिया के सामने अपनी बात कहनी पड़ी । उंन्होने यह भी कहाकि डॉ गोविंद सिंह मेरा विरोध क्यों कर रहे है इस पर थोड़ा अचरज है । सीनियर होने के बावजूद में उनके लहार स्थित घर गया । सौजन्य बातचीत में उंन्होने विरोध बजी प्रकट नही किया ।

LAC के पास चीन ने बढ़ाई हेलिकॉप्टर की हलचल, एयरबेस पर पैनी नजर बनाए हुए है भारत

भारत और चीन के बीच जारी है तनाव

LAC के पास चीन ने हेलिकॉप्टर की गश्त बढ़ाई

भारत और चीन के बीच लद्दाख इलाके में अभी भी तनाव जारी है और इसको बातचीत से हल करने की कोशिश हो रही है. 6 जून को हुई बैठक में अभी कोई ठोस नतीजा तो नहीं निकला है, लेकिन इस बीच चीन ने एक बार फिर बॉर्डर पर हलचल तेज़ कर दी है. जानकारी है कि चीन ने ईस्टर्न लद्दाख के आसपास भारत से जुड़े बॉर्डर के पास हेलिकॉप्टर की हलचल तेज़ कर दी है.

सूत्रों की मानें, तो इन हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल लद्दाख के पास इकट्ठा हुए चीनी सैनिकों की मदद करने में किया जा रहा है. पिछले 8-10 दिन से बॉर्डर पर दोनों देशों की ओर से हलचल बढ़ी है, ऐसे में चीन लगातार अपनी ताकत को उस ओर मजबूत करता दिख रहा है.

इन दिनों चीन की ओर से हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल पेट्रोलिंग, सामान की सप्लाई के लिए किया जा रहा है, लेकिन अब वह भारत के बॉर्डर से बिल्कुल सटकर इन्हें उड़ा रहा है. इसके अलावा, चीनी सेना PLA के लड़ाकू एयरक्राफ्ट भी ईस्टर्न लद्दाख के पास LAC उड़ान भरते देखे गए हैं.

बता दें कि चीन के हुतान और गलगुन्सा बेस पर भारत भी नज़र बनाए हुए है और चीन की हर हलचल का हिसाब ले रहा है.

गौरतलब है कि मई की शुरुआत के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति है. लेकिन बीते दिनों जब चीन ने बॉर्डर पर फाइटर प्लेन को तैनात किया तो हालात और भी गरम हो गए. और 2017 में डोकलाम के वक्त पैदा हुई स्थिति से आगे जाते हुए दिख रहे थे.

सूत्रों के मुताबिक, 10-12 चीनी लड़ाकू विमानों को हुतान-गलगुन्सा बेस के पास तैनात किया गया है, जो ईस्टर्न लद्दाख के पास के इलाके हैं. इतना ही नहीं, चीनी विमान ईस्टर्न लद्दाख के 30 किमी. अंदर तक उड़ान भरते हुए देखे जा चुके हैं जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार भारतीय सीमा के दस किमी. ही दूर है.

भारत और चीन के बीच इस विवाद को लेकर 6 जून को लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की बैठक हुई थी, लेकिन अभी कोई नतीजा नहीं निकला है. आगे भी बातचीत का सिलसिला जारी रह सकता है. चीन ने बीते दिनों लद्दाख की ओर बढ़त बना ली है, जबकि भारत उसे कह रहा है कि वह अप्रैल जैसी स्थिति पर वापस जाए.

उपचुनाव के लिए भाजपा ने गठित की संचालन व प्रबंध समिति, सिंधिया के साथ जानिए किन नेताओं को मिला स्थान

भोपाल। मध्य प्रदेश में 24 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भाजपा ने रणनीतिक और मैदानी तैयारी के लिए संचालन एवं प्रबंध समिति की घोषणा कर दी है। दोनों समितियों में 40 दिग्गज नेताओं को रखा गया है। प्रबंध समिति का संयोजक पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह को बनाया गया है, संचालन समिति में प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ पूर्व मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी है।
संचालन समिति में प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, थावरचंद गेहलोत, फग्गन सिंह कुलस्ते व प्रहलाद पटेल के अलावा पूर्व मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को भी लिया गया है।
इनके अलावा वरिष्ठ नेता प्रभात झा, कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, गोपाल भार्गव, सुहास भगत, जयभान सिंह पवैया, डॉ. गौरीशंकर शेजवार, माया सिंह, यशोधरा राजे सिंधिया, अनूप मिश्रा, दीपक जोशी, रस्तम सिंह, लाल सिंह आर्य एवं नारायण सिंह कुशवाह भी मौजूद हैं।
यह है प्रबंध समिति
प्रबंध समिति में संयोजक भूपेंद्र सिंह के अलावा उमाशंकर गुप्ता, रामपाल सिंह, बंशीलाल गुर्जर, अरविंद भदौरिया, विजेश लुणावत, रामेश्वर शर्मा, पंकज जोशी, लोकेंद्र पाराशर, राजेंद्र सिंह, शैलेंद्र शर्मा, भगवानदास सबनानी, नरेंद्र पटेल, रवींद्र यति, विकास वीरानी, डॉ. हितेश वाजपेयी, मनोरंजन मिश्रा और प्रदीप त्रिपाठी के नाम की घोषषणा की गई है।
वहीं, इसके पहले पार्टी ने राज्‍य में इन उप चुनावों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति किए थे। यह नियुक्ति प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत ने की थी भाजपा ने संगठन क्षमता में माहिर माने जाने वाले नेताओं को उपचुनाव के संचालन की कमान सौंपी गई थी।

ढाई माह बाद शुरू हुए पीतांबरा माई के दर्शन,

दतिया। शहर में विख्यात पीतांबरा मंदिर को सोमवार को भक्तों के लिए खोला गया। जहां शासकीय गाइड लाइन के साथ लोगों को दर्शन कराए गए। इस दौरान पूर्व में ही स्थानीय लोगों के लिए रजिस्ट्रेशन कराए गए थे। मंदिर प्रशासन ने बताया कि पुलिस व प्रशासन के सहयोग से मंदिर की व्यवस्थाएं पूरी तरह से चाक चौबंद है। रविवार को ही स्थानीय लोगों द्वारा सोमवार के लिए तकरीबन 800 से अधिक रजिस्ट्रेशन करवा लिए थे। जिन्हे आज रजिस्ट्रेशन जांच कर व थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही मंदिर में प्रवेश दिया गया।

मंदिर परिसर में प्रवेश के बाद पहले उनके हाथ व पैर सेनेटाइजर से धुलवाए गए। उसके बाद मंदिर में प्रवेश दिया गया। मंदिर में अंदर रैलिग व अन्य चीजों को छूना पूर्णत: प्रतिबंधित किया गया है। इसके बावजूद समय समय पर सेनेटटाइज किया जा रहा है। सोमवार को कांग्रेस के पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल पीतांबरा मंदिर पहुंचे। और मंदिर में जाकर माई के सम्मुख प्रार्थना की। उनके साथ सेंवढ़ा विधायक घनश्याम सिंह भी मौजूद रहे। इसके अलावा मंदिर के द्वार पर ही समाजसेवियों द्वारा मंदिर में प्रवेश करने वालों को मास्क वितरित कर हाथ धुलवाए गए।

जिला अस्पताल से भागने वाला कैदी तारीख बदलने से पहले पकड़ा

भिंड। जिला अस्पताल से  भागने वाला कैदी तारीख बदलने से पहले पकड़ा गया है पुलिस ने उसे मिहोना थाना क्षेत्र के एक गांव से दबोचा है कोतवाली और मिहोना थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी को हिरासत में लिया गया है। आरोपी सुबह 5:00 बजे हथकड़ी खोलकर जिला चिकित्सालय से फरार हो गया था कैदी अस्पताल के सीसीटीवी में फरार होने की घटना हुई थी कैद।

उत्तरप्रदेश के जालौन थाना रेडर के कुसमरा निवासी 23 वर्षीय प्रधुम्न सिंह कुशवाह पुत्र भागीरथ प्रसाद फरवरी माह में मिहोना में रिश्तेदारी में आया था। प्रधुम्न ने मिहोना में नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म किया और उसे अपने साथ ले गया था। किशोरी के परिजन की शिकायत पर मिहोना पुलिस ने आरोपित पर अपहरण, दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था। पुलिस ने 28 मई को आरोपित को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश कर जिला जेल भिजवा दिया गया था। जिला जेल में प्रधुम्न को 5 जून को उल्टी हुई तो उसमें खून आया। इससे उसे जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। ट्रॉमा सेंटर में प्रधुम्न की निगरानी के लिए रिजर्व पुलिस लाइन से पुलिस बल तैनात किया गया था। 6 जून की रात में निगरानी के लिए आरक्षक कृष्ण कुमार और आरक्षक विजय शर्मा की ड्यूटी थी। 7 जून को सुबह 5ः03 बजे आरक्षक बैठे रहे। बंदी प्रधुम्न सिंह किसी तरह से हथकड़ी निकालकर भाग निकला था लेकिन अब उसकी गिरफ्तारी से पुलिस ने राहत की सांस ली है।

उपचुनाव: गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने संभाली सिंधिया के गढ़ की कमान….

भोपाल. मध्यप्रदेश की 24 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भाजपा ने तैयारियां शुरू कर दी है। जिन 24 सीटों पर उपचुनाव होने है उनमें से ग्वालियर-चंबल संभाग की 16 सीटें हैं। ऐसे में भाजपा का पूरा फोकस इस अंचल में है। ज्योतिरादित्य सिंधिया यहां से पार्टी के बड़े चेहेरे हैं लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ साथ अब भाजपा के संकटमोचक कहे जाने वाले नरोत्तम मिश्रा ने भी मोर्चा संभाल लिया है। सिंधिया के गढ़ में हमेशा सिंधिया को घेरने वालों को अब उनके साथ काम करने के लिए तैयार करना बड़ी चुनौती है। बीजेपी ने इसकी जिम्मेदारी गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को सौंपी है।
ग्वालियर चंबल अंचल को जहां ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ कहा जाता है, वहीं ये भारतीय जनता पार्टी को गढ़ने वाली राजमाता विजया राजे सिंधिया यानि ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी की कर्मभूमि भी है। बीजेपी इसी अंचल से फली फूली और पूरे विश्व तक पहुंची। चाहें सत्ता के केंद्र में बीजेपी हो या कांग्रेस, ग्वालियर उसका बड़ा केंद्र रहता है। इस बार भी जब कांग्रेस की सरकार प्रदेश से विदा हुई तो उसमें भी ग्वालियर चंबल ने बड़ी भूमिका निभाई।
नरोत्तम को जिम्मेदारी
पार्टी ने इसकी जिम्मेदारी गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को सौंपी है। वे रविवार देर शाम ग्वालियर पहुंचेंगे। सरकार के लिए हमेशा संकटमोचक की भूमिका निभाने वाले नरोत्तम मिश्रा को संगठन ने विषम परिस्थितियों में डैमेज कंट्रोल का जिम्मा सौंपा है। ग्वालियर में वे पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद अनूप मिश्रा से मुलाकात करेंगे। यहां आधा घंटे चर्चा करने के बाद पूर्व मंत्री नारायण सिंह कुशवाह के घर पहुंचकर उनसे चर्चा करेंगे। यहां आधा घंटे चर्चा के बाद मिश्रा पूर्व मंत्री
जयभान सिंह पवैया से उनके निवास पर चर्चा करेंगे। यहां भी आधे घंटे चर्चा करने के बाद वे पूर्व मंत्री माया सिंह के निवास पर उनसे चर्चा करेंगे।

भाजपा के सामने क्या चुनौती
सिंधिया समर्थक 22 विधायकों के भाजपा में शामिल हो जाने के बाद भाजपा के पुराने और स्थापित नेताओं में बेचैनी है। उन्हें अपने राजनैतिक भविष्य पर ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है, उनके नाराज और रूठने की खबरें सरकार और संगठन तक पहुंच रही हैं । उपचुनाव से पहले बीजेपी, पार्टी के पुराने नेताओं को भरोसे में लेना चाहती है।
सिंधिया समर्थकों से नहीं होगी मुलाकात
ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में आने के बाद ये पहला मौका है कि भाजपा सरकार का कोई मंत्री ग्वालियर दौरे पर आ रहा है। खास बात ये है उनकी मुलाकात अपनी पार्टी के दिग्गज नेताओं से होगी, लेकिन सिंधिया समर्थक भाजपा नेताओं से मुलाकात का कोई अधिकृत कार्यक्रम उनके दौरे में शामिल नहीं हैं।

शिवराज ने की थी मुलाकात
हाल ही में मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात करने के लिए उनके आवास पर पहुंचे थे। इस दौरान से अटकलें लगाई जा रहीं थी कि मंत्रिमंडल विस्तार और उपचुनाव में नरोतत्म मिश्रा की बड़ी भूमिका हो सकती है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया को बताया बेटे जैसा, बीजेपी में उनको सम्मान नहीं मिलेगा दिग्विजय सिंह बोले

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के भारतीय जनता पार्टी ( BJP ) में शामिल होने के बाद राज्य में अभी तक आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी का दौर थमा नहीं है।
इसी क्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ( Congress Leader Digvijay singh ) ने रविवार को को भाजपा और ज्योतिरादित्य पर निशाना साधा।
भोपाल में एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता ने ज्योतिरादित्य सिंधिया ( Jyotiraditya Scindia ) को चेताया कि भाजपा में उनको न तो सम्मान मिलेगा और न ही वैसी जिम्मेदारी, जैसी वो कांग्रेस में निभाते आए हैं।
दिग्जिवय ने यह भी कहा कि ज्योतिरादित्य उनके बेटे जैसे हैं, इसलिए उनके कांग्रेस छोड़कर जाने से उनको दुख पहुंचा।
लेकिन इससे भी ज्यादा दुख तब हुआ, जब उन्होंने एक पार्टी का दामन थाम लिया, जिसने उनको चुनाव में हराया।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि शायद सिंधिया को मंत्रिमंडल में शामिल होने की जल्दबाजी थी। मीडिया से मुखातिब होते हुए दिग्गी राजा ने कहा कि कांग्रेस में रहते हुए ज्योतिरादित्या सिंधिया मुरैना से मंदसौर तक अपने कार्यकर्ताओं को मनचाहा पद दिलवाते थे।
लेकिन भाजपा में ऐसा नहीं हो पाएगा, क्योंकि यहां पर आरएसएस की माननी होती है।
वहीं, राज्यसभा के लिए कांग्रेस के उम्मीदवार बने दिग्गी राजा ने भाजपा का नाम लिए बिना कहा कि गुजरात में जिस तरह से कांग्रेस विधायकों की खरीद फरोख्त की जा रही है, ऐसे मध्य प्रदेश में नहीं चलने वाला।
उन्होंने कहा कि हमारे यहां मध्य प्रदेश में विधायक स्वार्थी नहीं हैं, और जो थे वो पहले ही भाजपा में चले गए हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि एमपी में 24 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इन चुनावों के लिए पार्टी ने बेहतरीन तैयारी की है। उन्होंने कहा कि इन चुनावों में हम जनता से लालची लोगों से लोकतंत्र बचाने की बात कहेंगे।

साइकिल की सीट बनाते हुए जानकीदास ने खड़ा किया था एटलस का साम्राज्य, चौथी पीढ़ी में लग गया ताला

एटलस साइकिल की देश के कई जगहों पर चल रही यूनिटों को भले ही धीरे-धीरे बंद कर दिया गया हो। लेकिन एटलस साइकिल कंपनी की शुरुआत राय बहादुर जानकीदास कपूर ने एक दुकान में गद्दी बनाते हुए की थी। राय बहादुर जानकीदास कपूर को देश की आजादी के बाद 25 एकड़ जमीन मिली तो साइकिल की गद्दी बनाते हुए उन्होंने छोटी फैक्ट्री शुरू कर दी।
वह फैक्ट्री बढ़ती गई तो उनके निधन के बाद बेटों ने काम संभाल लिया। जिस समय जानकीदास के बेटों ने फैक्ट्री को संभाला, वह एटलस का ऊंचाई छूने वाला दौर रहा। उनके निधन के बाद हालात बिगड़ते गए और एक समय में ऊंचाइयां छूने वाली एटलस को चौथी पीढ़ी ने कुप्रबंधन के कारण पूरी तरह से बंद कर दिया।
एटलस कंपनी के संस्थापक राय बहादुर जानकीदास कपूर सन 1951 से पहले तक एक दुकान में साइकिल की गद्दी बनाते थे। उनको आजादी के बाद सोनीपत में 25 एकड़ जमीन मिली थी, जिस पर जानकीदास कपूर ने साइकिल बनाने की छोटी फैक्ट्री लगाई। जानकीदास खुद साइकिल बनाना जानते थे, इसलिए उनको साइकिल की फैक्ट्री लगाने पर कामयाबी मिलती चली गई। यहां जिस तरह से उत्पादन बढ़ता चला गया, उसी तरह से फैक्ट्री का दायरा बढ़ता गया।
एटलस के पुराने कर्मचारी रहे सुशील बताते हैं कि इस बीच ही जानकीदास कपूर का 1967 में निधन हो गया। लेकिन उनके तीन बेटों बिशंभर दास कपूर, जयदेव कपूर व जगदीश कपूर ने मिलकर फैक्ट्री को संभालना शुरू कर दिया। फैक्ट्री की पूरी जिम्मेदारी बिशंभर दास उठाते रहे और जयदेव व जगदीश उनका साथ देते रहे। एटलस का 1967 के बाद का दौर ऊंचाइयों को छूने वाला रहा और एटलस की मुख्य यूनिट के साथ ही सोनीपत में कई यूनिटें शुरू हुईं।
इसके बाद यहां से धीरे-धीरे लुधियाना (पंजाब), साहिबाबाद (उत्तर प्रदेश), मालनपुर (मध्य प्रदेश) और गुरुग्राम में कई अन्य यूनिटें शुरू कर दी गईं। एटलस का दायरा बढ़ने के बाद भी बैलेंस सीट एक ही रही और तीनों भाई मिलकर फैक्टरियों को संभालते रहे। जहां बिशंभर दास सोनीपत की मुख्य यूनिट व लुधियाना की यूनिट संभालते थे। वहीं जयदेव कपूर सोनीपत की मिलटन फैक्ट्री व साहिबाबाद की यूनिट को संभालते थे। इस तरह ही जगदीश कपूर रसोई गांव की ऑटो फैक्ट्री, मालनपुर की यूनिट व गुरुग्राम की एटलस ट्यूब मिल को संभालते थे।
इन तीनों ने एक साथ मिलकर काम किया और एटलस विदेश तक पहुंच गई। एटलस की पूरी जिम्मेदारी उठाने वाले बिशंभर दास कपूर का 2000 में निधन हो गया और उसके बाद ही एटलस का कुप्रबंधन शुरू हो गया, जिससे हालात बिगड़ते चले गए। इसके तीन साल बाद ही मुख्य यूनिट को धीरे-धीरे समेटना शुरू कर दिया गया।
एटलस के कर्मचारी सुशील के अनुसार बिशंभर दास के बाद उनके बेटे अरुण कपूर, राजीव कपूर व विक्रम कपूर ने सोनीपत की यूनिट को संभालना शुरू किया था। लेकिन उसके कुछ साल बाद ही विक्रम कपूर के बेटे अंगद कपूर ने बाद में यहां बैठना शुरू कर दिया। जानकीदास कपूर की चौथी पीढ़ी अंगद कपूर ने यहां से एटलस को समेटना शुरू कर दिया और उसके बाद इसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया।
इस तरह ही जयदेव कपूर के बेटों गिरीश व गौतम और जगदीश के बेटों संजय कपूर, सलील कपूर व अजय कपूर भी अपने हिस्से की यूनिट को संभालते रहे। सुशील बताते हैं कि इन सभी की बैलेंस सीट एक ही रही और उसका ही असर सभी यूनिट पर पड़ता रहा। एक यूनिट में घाटा हुआ तो अन्य यूनिट तक उसका असर पहुंचा। जबकि कुप्रबंधन का सबसे ज्यादा असर यूनिटों पर पड़ रहा था और उसमें सुधार नहीं हुआ तो हालात लगातार बिगड़ते चले गए। इस तरह जिस एटलस को राय बहादुर जानकीदास व उनके तीनों बेटों ने देश के साथ ही दुनिया भर में पहुंचाया, आज वह गर्त में पहुंच चुकी है और उनकी चौथी पीढ़ी ने सब कुछ बंद कर दिया।
कर्मचारियों की ग्रेच्युटी नहीं मिली तो पेंशन भी नहीं मिल रही
सोनीपत की मुख्य यूनिट से निकाले गए कर्मचारियों को पहले वेतन तक नहीं दिया जा रहा था लेकिन कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन करके अपना वेतन निकलवाया। उनको वेतन मिल गया तो किसी की ग्रेच्युटी अभी तक नहीं मिली है और किसी की पेंशन नहीं मिल रही है। पेंशन के फार्म तक नहीं भरवाए जा रहे हैं। इस कारण कर्मचारी कोर्ट में जाने की तैयारी कर चुके हैं। वह कोरोना महामारी कम होते ही कोर्ट का सहारा लेने की बात कहते हैं।

भाजपा का प्यादा बताए जाने के बाद उद्धव से मिलने मातोश्री पहुंचे सोनू सूद, बाहर आकर कही ये बात


नई दिल्ली। लॉकडाउन के बाद हजारों मजदूरों को उनके घरों पर पहुंचाने का इंतजाम कर चर्चा में आए एक्टर सोनू सूद ने महाराष्ट्र सीएम उद्धव ठाकरे से मुलाकात की है। रविवार शाम को सोनू उद्धव ठाकरे और उनके बेटे, राज्य सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे से उनके आवास मातोश्री पर मिले। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद सोनू सूद ने कहा कि जब तक मजदूर घर जाने को लेकर परेशान हैं, वो मदद करते रहेंगे। रविवार को शिवसेना सांसद राउत की ओर से सूद को भाजपा का प्यादा बताए जाने के बाद उन्होंने ये मुलाकात की है।

मुझे पूरे देश से समर्थन मिल रहा

सोनू सूद ने कहा, जो परेशानी में हैं, उनकी मदद हमें करनी चाहिए। मैं अपनी ओर से कोशिश कर रहा हूं क्योंकि प्रवासी मजदूरों को हमारी जरूरत है। जब तक कि आखिरी प्रवासी अपने घर नहीं पहुंच जाता, मैं उनकी मदद करता रहूंगा। उन्होंने कहा कि मुझे कश्मीर से कन्याकुमारी तक सभी का समर्थन मिला है। जिसके लिए मैं आभारी हूं।

संजय राउत ने बोला है सोनू सूद पर हमला

सोनू सूद की मजदूरों की मदद को लेकर काफी तारीफ हुई है। वहीं शिवसेना के सांसद संजय राउत ने रविवार को पार्टी के मुखपत्र सामना लिखे लेख में सोनू सूद पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है, महाराष्ट्र में सोशल वर्क की लंबी परंपरा रही है। अब इस लिस्ट में एक और व्यक्ति शामिल हो गए हैं। वह हैं सोनू सूद, जिनके कई वीडियो और तस्वीरें दिख रही हैं, उनमें सोनू सूद चिलचिलाती धूप में प्रवासी मजदूरों की मदद कर रहे हैं। दरअसल इन अभियानों के पीछे सोनू सूद महज एक चेहरा हैं। महाराष्ट्र के कुछ राजनीतिक दल सोनू सूद का इस्तेमाल उद्धव सरकार पर आरोप लगाने के लिए कर रहे हैं।

भाजपा का प्रचार करते दिखेंगे सोनू

संजय राउत ने कहा है कि बीजेपी के कुछ लोगों ने सोनू सूद को एडॉप्ट किया है और ये काम चुपके चुपके हुआ है। अब सोनू सूद का नाम मन की बात में आएगा, उन्हें पीएम मोदी से मिलने का मौका मिलेगा, फिर वो दिल्ली, यूपी में बीजेपी का प्रचार करेंगे। हालांकि भाजपा ने इसको लेकर संजय राउत की आलोचना की है।