दिवाला कानून में संशोधन, डिफाल्ट के नए मामलों में 6 माह तक कार्यवाही नहीं. 

कोरोना वायरस के कारण लगाए गए लॉकडाउन के दौरान काम बंद रहने के कारण कर्ज भुगतान में असफलता के नए मामलों में दिवाला कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी. इसके लिए केंद्र सरकार ने दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता में संशोधन कराए .

नई दिल्ली  सरकार ने दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी किया है. इसके तहत कोरोना वायरस महामारी के दौरान कर्ज भुगतान में असफलता के नए मामलों में दिवाला कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी.

कोरोना वायरस पर रोकथाम के लिए देश में 25 मार्च से लॉकडाउन लागू है. 25 मार्च से छह माह तक कर्ज भुगतान में चूक या डिफॉल्ट के नए मामलों में दिवाला कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी. इस कदम से कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि कोरोना वायरस महामारी और उसके बाद लागू राष्ट्रव्यापी बंद से आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.

अध्यादेश में कहा गया है ’25 मार्च, 2020 या उसके बाद डिफॉल्ट के किसी मामले में छह महीने या उससे आगे (एक साल से अधिक नहीं) दिवाला कार्रवाई नहीं की जा सकेगी.’ इसमें कहा गया है कि किसी कॉरपोरेट कर्जदार के खिलाफ उपरोक्त अवधि के दौरान कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) के तहत आवेदन नहीं किया जा सकेगा.

इस अवधि के लिए सीआईआरपी प्रक्रिया को निलंबित किया गया है. संहिता की तीन धाराएं….7, 9 और 10 छह माह की अवधि के लिए लागू नहीं होंगी. इस संदर्भ में आईबीसी में एक नई धारा ‘10ए’ डाली गई है. धारा 7 और 9 वित्तीय और परिचालन के लिए ऋण देने वालों द्वारा दिवाला कार्रवाई शुरू करने से संबंधित है. धारा 10 कॉरपोरेट आवेदकों से संबंधित है.

आईबीसी के तहत कोई भी इकाई किसी कंपनी द्वारा कर्ज भुगतान में एक दिन की चूक होने पर भी दिवाला कार्रवाई के लिए आवेदन कर सकती है. इसके लिए न्यूनतम सीमा एक करोड़ रुपये है. पहले यह सीमा एक लाख रुपये थी.

वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने 17 मई को कहा था कि सरकार दिवाला कानून के तहत कई रियायतें उपलब्ध कराएगी. इसके तहत एक साल तक के लिए नए मामलों में दिवाला कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी.

ब्लास्ट हो गया घर में रखा गैस सिलेंडर तो 50 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा, जानिए क्या है क्लेम का प्रोसेस

गैस सिलेंडर फटने पर 50 लाख रुपये तक का इंश्योरेंस कवर मिलता है.
नई दिल्ली. कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के एक घर में सिलेंडर फटने (Gas Cylinder Blast) का मामला सामने आने के बाद अफरातफरी मच गई. सिलेंडर फटने का एक लाइव वीडियो भी सामने आया. धमाके का वीडियो देख कर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि किस तरह से सिलेंडर में लगी आग खतरनाक होती है. अचनाक घटे इस वारदात से लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है.

ऐसे में जरूरी है कि हमें पता हो कि एलपीजी का इस्तेमाल का करते हुए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और किसी प्रकार की दुर्घटना होने पर क्या किया जाना चाहिए. साथ ही यह भी पता होना चाहिए कि यदि LPG गैस सिलिंडर फट जाता है या गैस लीक होने की वजह से हादसा हो जाता है तो आपके, एक ग्राहक होने के नाते, क्या अधिकार हैं.

LPG यानी रसोई गैस कनेक्शन लेने पर पेट्रोलियम कंपनियां ग्राहक को पर्सनल एक्सीडेंट कवर उपलब्ध कराती हैं. 50 लाख रुपये तक का यह इंश्योरेंस एलपीजी सिलेंडर से गैस लीकेज या ब्लास्ट के चलते दुर्भाग्यवश हादसा होने की स्थिति में आर्थिक मदद के तौर पर है. इस बीमा के लिए पेट्रोलियम कंपनियों की बीमा कंपनियों के साथ साझेदारी रहती है. वर्तमान में हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम के रसोई गैस कनेक्शन पर इंश्योरेंस ICICI लोम्बार्ड के माध्यम से है.

डीलर की होगी जिम्मेदारी

अगर सिलिंडर में लीकेज या ब्लास्ट होता है तो इसकी जिम्मेदारी डीलर और कंपनी की है. करीब 16 साल पहले हुए हादसे पर नैशनल कंज्यूमर फोरम ने यह आदेश दिया था और यह अब भी लागू है. नेशनल कंज्यूमर फोरम ने अपने फैसले में कहा था कि मार्केटिंग डिस्प्लिन गाइडलाइंस 2014 फॉर एलपीजी डिस्ट्रिब्यूशन के तहत तय है कि डीलर ने डिफेक्टिव सिलिंडर सप्लाई किया तो वह अपनी जिम्मेदारी शिकायती पर नहीं डाल सकता. गाइडलाइंस कहती हैं कि डीलर डिलिवरी से पहले चेक करे कि सिलिंडर बिल्कुल ठीक है या नहीं.

एलपीजी सिलिंडर की वजह से हुए हादसे में नुकसान के लिए मुआवजा देनदारी प्रति घटना 50 लाख रुपये और प्रति व्यक्ति 10 लाख रुपये है. यह मुआवजा इन सूरतों में देय है.हादसा गैस एजेंसी के साथ पंजीकृत ग्राहक के घर पर हुआ हो. पंजीकृत डीलर के परिसर में हुआ हो. सिलिंडर को पेट्रोलियम कंपनी के यहां से डिस्ट्रीब्यूटर के यहां ले जाते वक्त रजिस्टर्ड ट्रांसपोर्ट कान्ट्रैक्टर के पास होने के दौरान हुआ हादसा. सिलिंडर डीलर के यहां से कर्मचारी या ग्राहक द्वारा ग्राहक के घर ले जाया जा रहा हो. बीमित के द्वारा कम्युनिटी किचन, रेटिकुलेटेड सिस्टम्स, अन्य चीजों जैसे गीजर, लाइटिंग, जनरेटर सेट, इरीगेशन पंप आदि में एलपीजी की सप्लाई के दौरान. पंजीकृत परिसरों में सिलिंडर को एलपीजी इंस्टॉलेशन से कनेक्ट और ​डिसकनेक्ट करने के दौरान.

इस सेक्शन के तहत ग्राहक के घर पर एलपीजी सिलिंडर की वजह से हादसे में हुए जान-माल के नुकसान के लिए पर्सनल एक्सीडेंट कवर देय है. हादसे में ग्राहक की प्रॉपर्टी/घर को नुकसान पहुंचता है तो प्रति एक्सीडेंट 2 लाख रुपये तक का इंश्योरेंस क्लेम मिलता है.

हादसे में मौत होने पर प्रति एक्सीडेंट प्रति व्यक्ति 6 लाख रुपये का मुआवजा मिलता है. हादसे में घायल होने पर मेडिकल खर्च के लिए प्रति एक्सीडेंट 30 लाख रुपये का मुआवजा मिलता है, जो प्रति व्यक्ति 2 लाख रुपये तक होता है. साथ ही प्रति व्यक्ति 25000 रुपये तक की तुरंत राहत सहायता भी है.

व्यक्तिगत हानि और प्रॉपर्टी डैमेज के लिए मुआवजा इन सूरतों में हादसे में दिया जाएगा. भरा हुआ सिलिंडर बॉटलिंग प्लांट से बाहर ले जाया जा रहा हो. ट्रांसपोर्टेशन के दौरान

भरा हुआ सिलिंडर डिस्ट्रीब्यूटर के यहां रखा हो. सिलिंडर डिस्ट्रीब्यूटर के यहां से ग्राहक के घर ले जाया जा रहा हो या फिर ग्राहक के यहां से भरा/खाली सिलिंडर डिस्ट्रीब्यूटर के यहां ले जाया जा रहा हो.

भरा हुआ सिलिंडर ग्राहक के घर पर रखा हो. खाली सिलिंडर बॉटलिंग प्लांट में वापस लाया जा रहा हो.

बीमित के द्वारा कम्युनिटी किचन, रेटिकुलेटेड सिस्टम्स, अन्य चीजों जैसे गीजर, लाइटिंग, जनरेटर सेट, इरीगेशन पंप आदि में एलपीजी की सप्लाई के दौरान.

पंजीकृत परिसरों में सिलिंडर को एलपीजी इंस्टॉलेशन से कनेक्ट और ​डिसकनेक्ट करने के दौरान.शैक्षणिक संस्थानों, रिसर्च लैब्स, सरकारी/म्युनिसिपल हॉस्पिटल्स, मिड डे मील स्कीम, समाज कल्याण संस्थानों जैसे अनाथ आश्रम, वृद्धाश्रम आदि में एलपीजी के इस्तेमाल के दौरान. रेस्टोरेंट, होटल, प्राइवेट हॉस्पिटल, क्लिनिक, पॉल्ट्री फार्म्स, सिरेमिक इंडस्ट्री, कॉटेज इंडस्ट्री, ग्लास इंडस्ट्री आदि में एलपीजी के इस्तेमाल के दौरान. ग्राहक द्वारा 5 किलो का सिलिंडर डिस्ट्रीब्यूटर के यहां से ले जाते वक्त.

​गैस सिलेंडर पर 50 लाख का क्लेम कैसे मिलेगा?

मायएलपीजी.इन (http://mylpg.in) के मुताबिक जैसे ही कोई व्यक्ति एलपीजी कनेक्शन लेता है तो उसे मिले सिलेंडर से यदि उसके घर में कोई दुर्घटना होती है तो वह व्यक्ति 50 लाख रुपये तक के बीमा का हकदार हो जाता है.

एक दुर्घटना पर अधिकतम 50 लाख रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है. दुर्घटना से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति को अधिकतम 10 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दी जा सकती है.

LPG सिलेंडर के बीमा कवर पाने के लिए ग्राहक को दुर्घटना होने की तुरंत सूचना नजदीकी पुलिस स्टेशन और अपने एलपीजी वितरक को देनी होती है.

PSU ऑयल विपणन कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, एचपीसी तथा बीपीसी के वितरकों को व्यक्तियों और संपत्तियों के लिए तीसरी पार्टी बीमा कवर सहित दुर्घटनाओं के लिए बीमा पॉलिसी लेनी होती है.

ये किसी व्यक्तिगत ग्राहक के नाम से नहीं होतीं बल्कि हर ग्राहक इस पॉलिसी में कवर होता है. इसके लिए उसे कोई प्रीमियम भी नहीं देना होता.

FIR की कॉपी, घायलों के इलाज के पर्चे व मेडिकल बिल तथा मौत होने पर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाणपत्र संभाल कर रखें.

दुर्घटना होने पर उसकी ओर से वितरक के जरिए मुआवजे का दावा किया जाता है. दावे की राशि बीमा कंपनी संबंधित वितरक के पास जमा करती है और यहां से ये राशि ग्राहक के पास पहुंचती है.

गैस सिलेंडर से हादसा होने की स्थिति में सबसे पहले पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करानी होती है. इसके बाद संबंधित एरिया ऑफिस जांच करता है कि हादसे का कारण क्या है. अगर हादसा एलपीजी एक्सीडेंट है तो एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर एजेंसी/एरिया ऑफिस बीमा कंपनी के स्थानीय ऑफिस को इस बारे में सूचित करेगा. इसके बाद संबंधित बीमा कंपनी को क्लेम फाइल होता है. ग्राहक को बीमा कंपनी में सीधे क्लेम के लिए आवदेन करने या उससे संपर्क करने की जरूरत नहीं होती.

क्या था प्रयागराज का मामला?

प्रयागराज के बलुआ घाट इलाके के एक घर में सिलेंडर में विस्फोट की पूरी लाइव घटना मौके पर मौजूद व्यक्ति ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर ली. आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कोई बड़ा हादसा हो सकता था. हालांकि इस घटना में किसी व्यक्ति को चोट की खबर नहीं आई. आग लगने की सूचना पर मौके पर डायल 112 के पुलिसकर्मी भी बाइक से पहुंच गए थे लेकिन पुलिसकर्मी भी आग के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके. इसके बाद फायर ब्रिगेड को बुलाया गया, जिसने आग को काबू किया. लेकिन लेकिन तब तक किचन का सारा सामान जलकर खाक हो गया था. गैस सिलेंडर में लगी पाइप में लीकेज की वजह से आग लगने की आशंका जताई जा रही है.

लौट के ये चैनल फिर डीडी फ्री डिश पर आए, समझ आई ग्रामीण भारत के दर्शकों की ताकत

डीडी फ्री डिश
टीवी चैनल स्टार उत्सव, कलर्स रिश्ते, जी अनमोल, जी अनमोल सिनेमा और सोनी पल एक बार फिर से डीडी फ्री डिश पर वापसी कर रहे हैं। भारत में सबसे बड़ी एंटरटेनमेंट कंपनियों स्टार इंडिया, वायाकॉम 18, जी एंटरटेनमेंट और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के यह सभी चैनल सब्सक्रिप्शन आधारित चैनल बनने की आशा में डीडी फ्री डिश से अलग हो गए थे। लेकिन यह चैनल इस प्लेटफॉर्म से अलग होने के बाद ब्रॉडकास्टरों की आशाओं पर खरे नहीं उतर पाए। आखिरकार इन्हें फिर से इसे प्लेटफॉर्म पर वापस आना पड़ रहा है।
अब यह पांचों चैनल 10 जून 2020 से लेकर 31 मार्च 2021 तक के समय में इसी प्लेटफॉर्म पर अपने आधार मूल्य पर बने रहेंगे। चैनल की कंपनियों ने इन चैनलों को 1 मार्च 2019 को डीडी फ्री डिश के प्लेटफॉर्म से हटा लिया था। लेकिन ट्राई के नए टैरिफ प्लान जारी करने के अनुसार इन चैनलों को सब्सक्रिप्शन पर आधारित चैनलों वाली श्रेणी में जगह नहीं मिली। बाकी चैनलों के साथ इन चैनलों को 10 पैसे से लेकर एक रुपये तक के मूल्य पर किसी भी प्लेटफॉर्म पर जगह मिल रही थी। साथ ही इन चैनलों के दर्शकों की संख्या में भी भारी गिरावट आई थी।

चैनल
जिस समय यह चैनल डीडी फ्री डिश का हिस्सा थे, उस समय भारत के ग्रामीण इलाकों में इन्हें खूब देखा जाता था। लेकिन, पिछले साल से जब इन चैनलों को इस प्लेटफॉर्म से बाहर कर लिया गया, उसके बाद से इनके दर्शकों की संख्या में लगभग 95 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। जब इन चैनलों के दर्शक कम हो गए तो चैनलों को विज्ञापन मिलने में भी कठिनाइयां होने लगीं। इस वजह से इन चैनलों की कंपनियों को भारी घाटा सहना पड़ा है। अब फिर से डीडी फ्री डिश के साथ आकर यह चैनल अपना खोया सम्मान पाने की कोशिश करेंगे। कंपनियों को आशा है कि कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन का फायदा इस वक्त इन चैनलों को मिल सकता है।

कोरोना का कहर: देश में 24 घंटे में सबसे ज्यादा मौतें, दुनिया में छठे नंबर पर पहुंचा भारत

देश में लगातार सातवें दिन संक्रमण के 8,000 से ज्यादा मामले आए. अब तक 1 लाख 14 हजार लोग संक्रमण से ठीक हो चुके हैं. पिछले 24 घंटे में 4611 लोग ठीक हुए हैं.

नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से बढती जा रही है. शनिवार सुबह स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में अबतक 2 लाख 36 हजार 657 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. इसमें से 6642 की मौत हो चुकी है, जबकि एक लाख 14 हजार लोग ठीक भी हुए हैं. देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के 9887 नए केस आए सामने आए हैं और 294 मौतें हुईं. दुनिया में छठे नंबर पर पहुंचा भारत अमेरिका, ब्राजील, रूस, स्पेन, ब्रिटेन के बाद कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में भारत छठे स्थान पर पहुंच गया है. वहीं भारत में मामले बढ़ने की रफ्तार दुनिया में तीसरे नंबर पर आ गई है. शुक्रवार को ब्राजील में 30,136 और अमेरिका में 25,273 नए मामले आए, जबकि रूस में 8,726 नए मामले आए. इसका सीधा मतलब है कि एक दिन में नए मामलों की बढ़ोतरी में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है. भारत में आज 9887 नए केस सामने आए हैं.

नरोत्तम मिश्रा और शिवराज सिंह की मीटिंग……..पर चर्चायें तेज…….

भोपाल. मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान आज अचानक गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के घर पहुंचे। नरोत्तम मिश्रा और सीएम शिवराज सिंह चौहान के बीच बंद कमरे में लंबी चर्चा हुई। हालांकि मीटिंग के बाद बाहर आने पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा- मैं मुख्यमंत्री हूं वो गृहमंत्री हैं। सालों से युवा मोर्चा के जमाने से हम साथ काम करते आए हैं। नरोत्तमजी का बहुत दिनों से आग्रह था कि मैं घर पर आऊं। लंबे समय से नाश्ता ड्यू था इसलिए आज आया हूं। सीएम शिवराज ने कहा हम तो रोज मिलते हैं।
मुलाकात के सियासी मायने
एमपी में कैबिनेट विस्तार को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। तारीख पर तारीख के बाद भी शिवराज कैबिनेट को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हो पाया है। नरोत्तम मिश्रा की छवि संकटमोचक के तौर पर हैं। जबक भी पार्टी में किसी भी तरह की समस्या आती है नरोत्तम मिश्रा सबसे पहले सामने आते हैं। नरोत्तम मिश्रा, शिवराज सरकार में नंबर दो की हैसियत रखते हैं। नरोत्तम एमपी बीजेपी के उन नेताओं में से हैं, जो पार्टी को हर मुश्किल वक्त से निकालना जानते हैं। ऑपरेशन लोट्स के दौरान भी नरोत्तम विरोधियों के निशाने पर थे।

कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रदेश में कैबिनेट विस्तार को लेकर जो परिस्थिति बनी है, शायद सीएम उसी पर चर्चा के लिए गए थे। इसके साथ ही बंद कमरे में दोनों नेताओं के बीच उपचुनाव और राज्यसभा की रणनीति पर भी चर्चा हुई है। हालांकि मुलाकात के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इसे सामान्य मुलाकात ही बताया है। लेकिन जिस तरीके से सीएम सीएम मंत्री घर पहुंचे हैं, उससे लगता नहीं है कि यह सामान्य मुलाकात है।

दरअसल, कैबिनेट विस्तार में कई रोड़े हैं और कई चर्चाएं भी चल रही हैं। एक तो सिंधिया समर्थकों के आने के बाद से अपने बड़े नेताओं को कैबिनेट में एडजस्ट करना शिवराज के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। ऐसे में कई दिग्गज नेताओं ने प्रेशर गेम शुरू कर दिया है। कुछ दिन पहले बीजेपी के कुछ दिग्गज नेताओं ने शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात भी की थी। ऐसे में पार्टी को डर है कि उपचुनाव में ये बगावत कहीं भारी न पड़ जाए।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के ट्विटर प्रोफाइल पर बीजेपी गायब…….

भोपाल.ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर बीजेपी के एक कद्दावर नेता के बयानों के बाद अब एक और खबर से राजनीति में सिंधिया फिर चर्चा में हैं. मध्य प्रदेश में आने वाले कुछ महीनों में उपचुनाव होने वाले हैं. इसे लेकर कांग्रेस और बीजेपी ने अभी से ही तैयारी शुरू कर दी है. इसी बीच मध्य प्रदेश से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. कुछ महीने पहले कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाने वाले कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कथित तौर पर अपने ‘ट्विटर’ अकाउंट से BJP शब्द को हटा दिया है. इसकी जगह उन्होंने पब्लिक सर्वेंट लिखा है. अब खबर की जानकारी लगते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म हो गया है. लोग तरह-तरह के अटकलें लगा रहे हैं. दरअसल, जब सिंधिया ने कांग्रेस को छोड़ा था तो उस समय भी उन्होंने ट्विटर अकाउंट से कांग्रेस शब्द को हटा दिया था. हालांकि, इसको लेकर बीजेपी की तरफ से अभी किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं आई है.शायद बीजेपी के कद्दावर नेता और केंद्र में मंत्री बार बार सिंधिया को लेकर बयान जारी कर रहे हो सकता है उसी की प्रतिक्रिया स्वरुप यह सब हो रहा हो.

दरअसल, मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के दो महीने से ज्याता समय बीत जाने के बाद भी अभी तक पूर्ण रूप से मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं किया गया है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सिंधिया अपने समर्थक विधायकों का ज्यादा से ज्यादा मंत्री बनवाना चाहते हैं. वहीं, शिवराज सिंह बैंलेस बनाकर चलना चाहते हैं, ताकि उनके विधायक भी नाराज न हों. यही वजह है कि बीजेपी पर प्रेशर बनाने के लिए सिंधिया ने ट्विटर अकाउंट से बीजपी शब्द को हटा दिया है.

बता दें कि सिंधिया के साथ जिन 22 विधायकों ने कांग्रेस छोड़ी थी, उनमें छह कमलनाथ मंत्रिमंडल में मंत्री थे. भाजपा की सरकार के गठन के बाद शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में छह मंत्री सिंधिया समर्थक रखने की कवायद के कारण भाजपा के आतंरिक समीकरण गड़बड़ा रहे हैं. सबसे ज्यादा खींचतान बुंदेलखंड और ग्वालियर -चंबल में चल रही है. बुंदेलखंड क्षेत्र से भाजपा के दो बड़े चेहरे गोपाल भार्गव एवं भूपेन्द्र सिंह हैं. दोनों ही सागर जिले की विधानसभा सीटों से चुनकर आते हैं.

वहीं, सिंधिया समर्थक गोविंद राजपूत भी सागर जिले के ही हैं. राजपूत के मंत्री बनाए जाने के बाद सागर जिले से एक और विधायक को मंत्री बनाया जा सकता है. शिवराज सिंह चौहान अपने समर्थक भूपेन्द्र सिंह को मंत्रिमंडल में लेना चाहते हैं. केन्द्रीय नेतृत्व गोपाल भार्गव की अनदेखी नहीं करना चाहता. कमलनाथ सरकार को गिराए जाने की रणनीति में भूपेन्द्र सिंह की भूमिका को भी कोई नकार नहीं पा रहा. मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता जेपी धनोपिया का मानना है कि भाजपा में स्थिति बगाबत की है, इस कारण मंत्रिमंडल के गठन को टाला जा रहा है.

Coronavirus (Covid-19): किसानों के लिए खुशखबरी, खेती के लिए मुफ्त में ट्रैक्टर दे रही है ये कंपनी.


कृषि उपकरण बनाने वाली कंपनी ट्रैक्टर्स एंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड (Tractors and Farm Equipment Limited-TAFE) ने मुफ्त ट्रैक्टर रेंटल सेवा (Free Tractor Rental Scheme) के जरिये पिछले दो महीने में एक लाख एकड़ से अधिक जमीन पर खेती में छोटे किसानों की मदद की है. टैफे ने एक बयान में कहा कि इस सेवा की राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में काफी मांग देखने को मिल रही है. कंपनी ने कहा कि इस पेशकश के तहत वह जेफार्म सर्विसेज प्लेटफॉर्म के माध्यम से छोटे किसानों की मदद के लिये मुफ्त ट्रैक्टररेंटिंग सेवाएं दे रही है.

90 दिन के लिए कंपनी की यह पेशकश
कंपनी की यह पेशकश 90 दिनों के लिये है और यह 30 जून 2020 तक उपलब्ध है. कंपनी का दावा है कि अभी तक इस सेवा का लाभ उठाकर छोटे किसान एक लाख एकड़ से अधिक रकबे में खेती कर चुके हैं. कंपनी ने बताया कि इस पेशकश के तहत जेफार्म सर्विसेज प्लेटफॉर्म पर 38,900 मैसी फर्ग्यूसन और आयशर ट्रैक्टर्स तथा 1,06,500 अन्य उपकरणों का पंजीकरण हुआ. छोटे किसानों ने इन्हें (TAFE Tractor) जेफार्म सर्विसेज के माध्यम से किराये पर लिया. कंपनी ने छोटे किसानों के बदले किराये का भुगतान अपनी तरफ से ट्रैक्टर व उपकरण मालिकों को किया. इससे छोटे किसानों के साथ ही ट्रैक्टर मालिकों को भी लाभ हुआ.

कंपनी का कहना है कि लॉकडाउन के कारण किसानों को ट्रैक्टर किराए पर देने में कुछ बाधाएं पैदा हुई थीं लेकिन मुफ्त किराये की योजना उनके कृषि कार्यों को पूरा करने के लिए एक उचित समय पर आई हैं.

इस साल 4 अक्टूबर को होगी सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा, UPSC ने जारी किया नया शेड्यूल

इससे पहले यूपीएससी ने इस साल प्रारंभिक परीक्षा 31 मई को निर्धारित की थी लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण यह परीक्षा टल गई थी।

कोरोना महामारी की स्थिति को देखते हुए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवाओं के लिए नई शेड्यूल जारी की है। इस शेड्यूल के अनुसार अब 4 अक्टूबर को यूपीएससी सिविल सर्विसेज की प्रारंभिक परीक्षा होगी, जबकि मुख्य परीक्षा की तिथि को 8 जनवरी 2021 निर्धारित किया गया है। इससे पहले यूपीएससी ने इस साल प्रारंभिक परीक्षा 31 मई को निर्धारित की थी लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण यह परीक्षा टल गई।

केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने न्यूज एजेसी पीटीआई-भाषा से बात-चीत में बताया कि सिविल सेवा परीक्षा की नयी तिथि की घोषणा के बाद उन तमाम अफवाहों पर विराम लगेगा, जिसमें कहा जा रहा था कि इस साल की परीक्षा रद्द कर दी गई है। उन्होंने कहा, “अभ्यर्थियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। परीक्षा यूपीएससी के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित होगी।”

सिविल सेवा परीक्षा हर साल तीन चरणों- प्री, मेन्स और इंटरव्यू में आयोजित होता है। इसका आयोजन भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) समेत अन्य सेवाओं के अधिकारियों के चयन के लिए किया जाता है। देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा का हिस्सा बनने के लिए लाखों अभ्यर्थी हर साल इस परीक्षा में शामिल होते हैं।

लॉकडाउन के कारण मौजूदा स्थिति पर समीक्षा के लिए आयोग द्वारा बुलाई गई बैठक में नई तारीखों का फैसला लिया गया। यूपीएससी ने अपने बयान में कहा, “लॉकडाउन खुलने और केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्यों द्वारा घोषित रियायतों पर गौर करते हुए, आयोग ने भर्ती परीक्षाओं का नया कार्यक्रम जारी करने का फैसला किया है।” आयोग ने यह भी कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों में परीक्षा या भर्ती परीक्षाओं की अधिसूचना, आयोजन की तिथि और अवधि में बदलाव किया जा सकता है।

यूपीएससी ने यह भी बताया कि सिविल सेवा परीक्षा, 2019 के शेष अभ्यर्थियों का इंटरव्यू 20 जुलाई से शुरू होगा और चयनित अभ्यर्थियों को व्यक्तिगत रूप से इसकी जानकारी दी जाएगी।

इस नए शेड्यूल में एनडीए प्रथम और द्वितीय दोनों परीक्षाएं एक साथ एक ही दिन 6 सितंबर को आयोजित की जाएंगी। वहीं इंजीनियरिंग सर्विसेज (मेन्स) 2020 परीक्षा 9 अगस्त को आयोजित होंगी। जबकि कम्बाइंड मेडिकल सर्विसेस परीक्षा 2020, 22 अक्टूबर को आयोजित होगी। वहीं इंडियन फॉरेस्ट सर्विसेज (IFS) की परीक्षा 28 फरवरी 2021 को आयोजित होगी। यूपीएससी की अन्य परीक्षाओं का शेड्यूल आप नीचे देख सकते हैं।